Friday, August 23, 2019

MAN KI BAAT : पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि अभी भी समय है शिक्षक संगठन अपने विचारों और कारगुजारियों में सुधार लायें तब जाकर संगठन और शिक्षक की गरिमा........

MAN KI BAAT : पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि अभी भी समय है शिक्षक संगठन अपने विचारों और कारगुजारियों में सुधार लायें तब जाकर संगठन और शिक्षक की गरिमा........

इधर कई दिनों से उत्तर प्रदेश के तमाम शिक्षक संगठन इधर-उधर, जहाँ-तहाँ बिलबिला रहे हैं....क्यों भाई ऐसा क्या हो गया ? जब तमाम संगठन अपने -अपने स्वार्थ में खड़े कर लिये तब ये दूरदर्शी बिलबिलाती नजर कहाँ चली गयी थी । आइये कुछ नहीं सभी मूलभूत बातों पर मिलकर विचार करते हैं मेरा मानना है कि वर्तमान परिवेश में शिक्षक संघठनों की प्रासंगिकता और भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि शिक्षा के सवाल पर सरकार और समाज दोनों उदासीन है। एकतरफ समाज शिक्षा के बाजारीकरण व निजीकरण के बोझ तले दबा है तो दूसरी तरफ सरकारी शिक्षण संस्थाओं की स्थिति पर सरकार और समाज दोनों मौन हो चले हैं। क्योंकि मैं मानता हूं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा उसमें सुधार विषय पर सरकार एवं संगठन के बीच संवादहीनता अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं जिसके लक्षण अब दिखाई देने शुरू हो गये हैं । जिस पर शिक्षक संगठनों के तमाम पदाधिकारियों को गम्भीरता से मनन करना होगा । ऐसा क्यों हो रहा है कि शिक्षकों के लिए प्रतिदिन खाई दर खाई खुदती चली जा रही है और शिक्षक अपना वजूद ढ़ूढ़ने को मजबूर है । मैं जब अपने को अदना सा शिक्षक कहता हूं तो तमाम शिक्षक हंस कर निकल जाते हैं लेकिन अब शिक्षकों को समझ आने लगा होगा कि अदना शब्द का प्रयोग प्रासंगिक था या नहीं ।

मैं तो कहता हूं कि राष्ट्रनिर्माता शिक्षक अपने को सरकारी ड्यूटी तक सीमित न रख कर सामाजिक स्तर पर बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने के साथ-साथ बेहतर समाज के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाएं। सरकारें शिक्षक और शिक्षा के प्रति संवेदनहीन रही हैं । आज न सिर्फ शिक्षा की मूलभूत संरचना को खंडित किया जा रहा है बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत वर्तमान पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण एवं बेहतर शिक्षा से दूर किया जा रहा है। शिक्षा का सवाल सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित न होकर बल्कि पूरे राष्ट्र का सवाल है। अब शिक्षक से बहुउद्देश्य कर्मचारियों जैसे कार्य लिये जा रहे हैं फिर भी शिक्षक की पीठ पर कामचोर की मोहर बेधड़क लगा दी जा रही है। जिससे समाजिक परिवेश में शिक्षक की गरिमा गिरती चली जा रही है । हां इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ शिक्षक, शिक्षक भूमिका को धारण तो करते हैं पर उसकी गरिमा को प्रोफेशनल शिक्षक बनकर जमींदोज भी कर रहे हैं ।

भगवान बुद्ध ने सबसे पहले संघ का गठन किया था और नारा दिया था "संघम् शरणम् गच्छामि" और कलयुग में यह वाक्य "संघे शक्ति कलियुगे" बन गया। संगोष्ठी से शिक्षक संगठन, सदस्यों और शिक्षकों के बीच सीधा संवाद होता है तथा संगठन के उद्देश्य एवं कार्य को अमलीजामा पहनाने में काफी मददगार होती रही थी पर संगठन के सोच में भी साल दर साल गिरवाट आती चली गयी और शिक्षकों के बीच संगठन अपने साख खोते चले गये । "प्राइमरी का मास्टर" होने के नाते पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि अभी भी समय है शिक्षक संगठन अपने विचारों और कारगुजारियों में सुधार लायें तब जाकर संगठन और शिक्षक की गरिमा बच पायेगी। पिछले कई साल पहले जब हर वर्ष शिक्षक संगठन का जो सम्मेलन अलग-अलग राज्यों में होता रहा है जिसमें अलग राज्यों के संगठन के पदाधिकारी और सभी राज्यों के कोने -कोने के शिक्षक बन्धु मिलकर आपस में अपनी बोली-भाषा और विचारों से ओतप्रोत होते रहे, उसकी कमी ने संगठन को भी गर्त की ओर ढकलेने का एक सहारा बना है ।

शिक्षक संघ अपनी लंबी यात्रा में हमेशा शिक्षा की नीति निर्धारण में योगदान देते रहा है और आज भी इसके लिए तत्पर है। शिक्षक संघ हमेशा अपने मांगों व समस्याओं से ऊपर उठकर अपनी सामाजिक दायित्वों के प्रति भी सजग रहा है। लेकिन आज सरकारी तंत्रों के कुंठित रवैये और कुकुरमुत्ते की तरह उगे स्वार्थपरक संगठनों ने शिक्षकों को तितर-बितर कर दिया जिसका परिणाम अब परिलक्षित होने लगा है।

     मुझे लगता है मेरे द्वारा कही और लिखी बातों से हो सकता है तमाम लोग इत्तेफाक न रखते हों पर सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता अच्छे और बुरे कमेंट आ सकतें पर शिक्षक की पीड़ा है तो कहनी और सुननी भी पड़ेगी । उत्तर प्रदेश या यूं कहे अखण्ड भारतवर्ष के और प्रदेशों के तमाम शिक्षक संगठनों को अपने तथाकथित अंहकार को छोड़कर मूल संगठन में विलय होकर मजबूती प्रदान करते हुए जब भी आन्दोलन का बिगुल बजे तो बल प्रदान करना चाहिए । वहीं मूल संगठनों की भी जिम्मेदारी बनती है कि सबका सम्मान होना चाहिए, वरना अब वो दिन दूर नहीं कि जब ये देहाती कहावत- "क्या राजा भोज और क्या गंगू तेली" और दूसरा सामयिक कहावत "आज हमारी काल तुम्हारी, देखो लोगों बारी-बारी" चरितार्थता होने की तरफ अपने कदम बढ़ा चुके हैंं जिसमें समय के चक्र के साथ सबका पिसना तय है ।

     ।।जय शिक्षक जय भारत।।
     आप सबका अदना सा शिक्षक
             दयानन्द त्रिपाठी

Sunday, August 18, 2019

FAKE, TEACHER DISMISSED : यूपी में फर्जी TET मार्कशीट पर नौकरी कर रहे थे तीन टीचर, नौकरी से किया बर्खास्त

यूपी में फर्जी TET मार्कशीट पर नौकरी कर रहे थे तीन टीचर, नौकरी से किया बर्खास्त


बर्खास्त किए गए तीनों शिक्षकों (Teachers) की सेवा समाप्त कर दी गई है. उनके खिलाफ केस (FIR) दर्ज करने के लिए बीएसए ने एसपी को पत्र भेजा है.



उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में हुई 72 और 16 हजारशिक्षकों (Teachers) की भर्ती में लगातार फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं. लगातार शिकायतों के बाद जांच करने पर आरोपों की पुष्टि हो रही है और बर्खास्तगी की कार्रवाई जारी है. हाल ही में निचलौल, सिसवा व बृजमनगंज जिले में तीन शिक्षकों को नौकरी से निकाला गया. नौकरी कर रहे तीन शिक्षकों को खराब रिकॉर्ड के आधार पर बर्खास्त किया गया. इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

जिन तीन शिक्षकों को निकाला उनमें निचलौल के सुनील कुमार, बृजमनगंज के प्रधानाध्यापक अखिलेश तिवारी और सिसवा की सहायक अध्यापिका प्रियंका सिंह शामिल हैं. ये तीनों फर्जी TET मार्कशीट पर नौकरी कर रहे थे. सुनील कुमार निचलौल क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में सहायक अध्यापक थे. उन्हें फर्जी टीईटी के अलावा Fake academic record के चलते भी निकाला गया.

अखिलेश तिवारी बृजमनगंज के प्राथमिक विद्यालय में बतौर प्रधानाध्यापक काम कर रहे थे. उनका भी टीईटी सर्टिफिकेट 2011 फर्जी निकला. सिसवा के प्राथमिक विद्यालय सबया दक्षिण टोला में प्रियंका सिंह अध्यापिका थी. इनका भी टीईटी 2013 का सर्टिफिकेट जांच में फर्जी निकला.

तीनों शिक्षक बर्खास्त

बर्खास्त किए गए तीनों शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है. उनके खिलाफ केस दर्ज करने के लिए बीएसए ने एसपी को पत्र भेजा है. इन तीनों की बर्खास्तगी से डीएम व अन्य विभागीय उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है.

शिक्षकों को बर्खास्त करने वाले बीएसए जगदीश शुक्ल को Fake record के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में चुने इन शिक्षकों के खिलाफ शिकायत मिली थी. जांच-पड़ताल के बाद सेवा समाप्त की गई है.

कहां हैं ये तीनों जगह जहां बर्खास्तगी हुई है-

निचलौल- उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले का एक कस्बा. नेपाल की सीमा यहां से 13 कि.मी. की दूरी पर है.

सिसवा- नेपाल और बिहार बार्डर पर स्थित महराजगंज जिले का सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन है सिसवा.

बृजमनगंज- पश्चिमी महराजगंज जिले के एक बिंदु पर स्थित, सिद्धार्थनगर जिले की सीमा है.

  News18 Hindi |August 18, 2019

Saturday, August 17, 2019

CM, SCHOOL : अटल के नाम पर खुलेंगे आवासीय विद्यालय

CM, SCHOOL : अटल के नाम पर खुलेंगे आवासीय विद्यालय

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का बहुआयामी व्यक्तित्व हमें आज भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और आदर्शो से समझौता नहीं किया। योगी ने कहा कि 25 दिसंबर को अटल जी की जयंती पर लोकभवन में उनकी 25 फीट ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 18 मंडलों में अटल के नाम पर श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए आवासीय विद्यालय खोले जाएंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री की पहली पुण्यतिथि पर लोकभवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज अटलजी की पहली पुण्यतिथि है और इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है। अटलजी का छह दशक का निष्कलंक राजनीतिक जीवन सदैव याद किया जायेगा। उन्होंने विकास की नई रूपरेखा तैयार की और उसे मूर्त रूप दिया।

श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि अटल जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए जवानों को शहीद का दर्जा देने के साथ ही उनके परिजनों को पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी आवंटित करने की व्यवस्था की। नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक प्रधानमंत्री के रूप में यह सोच भी नहीं सके। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि अटलजी ने राजनीति को संस्कृति की तरह जिया व प्रेरित किया। दीक्षित ने अटल से जुड़े कई रोचक संस्मरण सुनाए। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अटलजी के विचार आज भी हमें ऊर्जित करते हैं। शिखर पर पहुंचने के बाद भी अहंकार अटल जी को छू नहीं पाया। संचालन कर रहे उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने अटल से जुड़े संस्मरण साझा किये। इसके पहले विधानसभा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री ने लोकभवन में अटल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

अटल की स्मृति में कई योजनाएं : मुख्यमंत्री ने अटल के नाम पर राज्य सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का जिक्र किया। लखनऊ में चिकित्सा विश्वविद्यालय बनाया जा रहा है। बलरामपुर में केजीएमयू का सेटेलाइट सेंटर स्थापित हो रहा है जो बाद में मेडिकल कालेज के रूप में विकसित होगा। अटल की स्मृति में डीएवी कालेज, कानपुर में सेंटर आफ एक्सीलेंस की स्थापना तथा उनके पैतृक गांव बटेश्वर (आगरा) में एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा। सरकार ने लखनऊ में इकाना क्रिकेट स्टेडियम का नाम ‘भारत र} श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम’ किया है।

अटल के नाम हो सकता है लोकभवन : मुख्यमंत्री के पुराने कार्यालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के नाम पर है। अटल की जयंती पर लोकभवन में प्रतिमा स्थापना के साथ ही इसका नाम अटल भवन किया जा सकता है। इस बात के संकेत मिले हैं।

CTET : 13वें संस्करण का आयोजन 08 दिसंबर को होगी (CTET) केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा

CTET : 13वें संस्करण का आयोजन 08 दिसंबर को होगी (CTET) केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा

जासं, नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की तरफ से केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा (सीटेट) के 13वें संस्करण का आयोजन 8 दिसंबर को किया जाएगा। यह परीक्षा देशभर के 110 शहरों में 20 भाषाओं में एक साथ आयोजित की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 19 अगस्त से शुरू होगी।
बोर्ड के मुताबिक विस्तृत सूचना बुलेटिन सीटेट की आधिकारिक वेबसाइट 666.ङ्घ3ी3.ल्ल्रङ्घ.्रल्ल पर 19 अगस्त से ही उपलब्ध होगी।

CIRCULAR, COOK, RASOIYA : रसोइयों की तैनाती में नहीं चलेगी प्रधानों की मनमानी,  हटाने से पहले नोटिस आदि विधिक प्रक्रिया करनी होगी पूरी जारी आदेश देखें। 

CIRCULAR, COOK, RASOIYA : रसोइयों की तैनाती में नहीं चलेगी प्रधानों की मनमानी,  हटाने से पहले नोटिस आदि विधिक प्रक्रिया करनी होगी पूरी जारी आदेश देखें। 


लखनऊ : प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अब रसोइयों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा। हाल में जारी शासनादेश में ग्राम पंचायत और वार्ड समिति की रिपोर्ट पर संबंधित अधिकारी अब आगे की कार्रवाई करेंगे।

पूर्व में ग्राम प्रधानों की ओर से करीबियों की नियुक्ति आसानी से करा दी जाती थी, किसी को भी कभी भी हटा दिया जाता था, अब ऐसा नहीं हो सकेगा। पहले से तैनात रसोइयों की सेवाओं का आगामी शैक्षिक सत्र के लिए नवीनीकरण भी करना होगा। शासनादेश के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कार्यरत रसोइयों की सेवाएं यदि संतोषजनक हैं तो उन्हीं का आगामी शैक्षिक सत्र के लिए नवीनीकरण कर दिया जाएगा। यदि किसी पुराने रसोइया की ओर से पूर्व में दी गई सेवाएं संतोषजनक नहीं हैं तो उनकी तैनाती नहीं की जाएगी, लेकिन इसके लिए ग्राम पंचायत और वार्ड समिति को रसोइया की सेवाओं में गड़बड़ी के साक्ष्य भी प्रस्तुत करने होंगे।

इसके साथ ही कर्मचारी के वर्षभर का ब्योरा भी प्रस्तुत करना होगा। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ अमरकांत सिंह ने बताया कि जो भी शासनादेश है, उसका पालन कराया जाएगा।



Wednesday, August 14, 2019

TEACHERS, APPOINTMENT : 23 हजार सीटें खाली, भर्ती पूरी या अधूरी तय नहीं

TEACHERS, APPOINTMENT : 23 हजार सीटें खाली, भर्ती पूरी या अधूरी तय नहीं

राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की तस्वीर एक साल बाद भी साफ नहीं है। भर्ती के पदों में से 45 हजार से अधिक भरे जा चुके हैं। 23 हजार से अधिक रिक्त हैं। लिखित परीक्षा और पुनमरूल्यांकन रिजल्ट के बाद कटऑफ अंक पाने वालों को नियुक्ति भी दी जा चुकी है। अब शासन किसका इंतजार कर रहा है यह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यह भर्ती पूरी हो चुकी है या फिर अभी अधूरी है इसका औपचारिक एलान नहीं हुआ है।

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों के लिए पिछले वर्ष 68500 पदों की शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा कराई गई। 13 अगस्त को रिजल्ट आया तो 41556 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। उन्हें दो चरणों में नियुक्ति मिली।

Monday, August 12, 2019

SYLLABUS : संस्कृत में भी होगी पहली से आठवीं तक पढ़ाई, एनआइओएस ने स्कूली शिक्षा के लिए तैयार किया नया पाठ्यक्रम

SYLLABUS : संस्कृत में भी होगी पहली से आठवीं तक पढ़ाई, एनआइओएस ने स्कूली शिक्षा के लिए तैयार किया नया पाठ्यक्रम


नई दिल्ली

भारतीय ज्ञान परम्परा को बढ़ावा देने में जुटी सरकार अब संस्कृत में भी स्कूली शिक्षा देगी। इसके तहत पहली से आठवीं तक की पढ़ाई संस्कृत में होगी। इसके विषय राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा के तहत होंगे। इसमें भाषा, गणित और पर्यावरण विषय मुख्य रूप से शामिल रहते हैं। संस्कृत पाठ्यक्रम में भाषा के स्थान पर संस्कृत पढ़ाई जाएगी। गणित के स्थान पर वैदिक गणित और पर्यावरण विषय के स्थान पर वेदों में पर्यावरण से जुड़ाव से संबंधित पाठ पढ़ाए जाएंगे।

मानव संसाधन विकास मंत्रलय से जुड़ी संस्था राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) ने लंबी कवायद के बाद यह नया पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसमें सिंतबर से बच्चों को प्रवेश देने का काम भी शुरू हो जाएगा। इसे लेकर तेजी इसलिए भी दिखाई जा रही है क्योंकि यह सरकार और एनआइओएस के सौ दिनों के एजेंडे में शामिल है। स्कूलों में मौजूदा समय में पढ़ाई सिर्फ हंिदूी और अंग्रेजी में ही कराई जाती है।

एनआइओएस के अध्यक्ष प्रोफेसर सीबी शर्मा के मुताबिक स्कूली शिक्षा के लिए इस कोर्स को तैयार करने में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा का पूरा ध्यान रखा गया है। इसे कुछ इस तरह तैयार किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक कक्षा का अपना अलग पाठ्यक्रम होगा।

पहली से आठवीं तक की पढ़ाई के बीच परीक्षा सिर्फ तीन बार ही होगी। इनमें पहली परीक्षा तीसरी कक्षा के स्तर पर होगी, जो पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के पाठ्यक्रम पर आधारित होगी। दूसरी परीक्षा पांचवीं के स्तर पर होगी, जिसमें चौथी और पांचवीं का पाठ्यक्रम शामिल होगा। इसी तरह तीसरी परीक्षा आठवीं के स्तर पर होगी, जिसमें छठी, सातवीं और आठवीं का पूरा पाठ्यक्रम शामिल होगा।


STATE TRIBUNAL, EDUCATIONAL TRIBUNAL : शिक्षा सेवा अधिकरण को अमली जामा पहनाने को कमेटी गठित, शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण की स्थापना करने का किया फैसला

शिक्षा सेवा अधिकरण को अमली जामा पहनाने को कमेटी गठित, शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण की स्थापना करने का किया फैसला

शिक्षा सेवा अधिकरण के लिए कमेटी गठित


राज्य ब्यूरो, लखनऊ : उप्र शिक्षा सेवा अधिकरण को अमली जामा पहनाने के इरादे से शासन ने आठ सदस्यीय प्रारंभिक कमेटी गठित की है। यह समिति शिक्षा सेवा अधिकरण में पदाधिकारियों के चयन/नियुक्ति और उसकी कार्य संचालन प्रक्रिया आदि के निर्धारण के लिए नियमावली बनाएगी। कमेटी अपनी सिफारिशें शासन को 15 दिन में उपलब्ध कराएगी। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग ने इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है। विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार कमेटी के अध्यक्ष होंगे। राज्यपाल के सेवानिवृत्त सलाहकार एसएस उपाध्याय, सेवानिवृत्त विशेष सचिव जगन्नाथ पाल, संयुक्त सचिव माध्यमिक शिक्षा शत्रुंजय कुमार सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव एसके शुक्ला, पूर्व निदेशक माध्यमिक शिक्षा कृष्ण मोहन त्रिपाठी और लखनऊ विश्वविद्यालय के व्यावसायिक प्रबंध विभाग के प्रो.संजय मेधावी कमेटी के सदस्य बनाये गए हैं।

ALLAHABAD HIGHCOURT, ANUDESHAK : हाईकोर्ट ने दिया था अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का आदेश, अनुदेशकों ने भेजा सुप्रीम कोर्ट को पत्र

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PURANI PENSION : पुरानी पेंशन बहाली, जल्द कैडर पुनर्गठन की मांग, सांसद रीता जोशी ने समस्याओं को पीएम तक पहुंचाने का दिया भरोसा

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