Sunday, June 16, 2019

CIRCULAR, DIRECTOR, BASIC SHIKSHA NEWS, TRANSFER : सचिव, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय, प्रयागराज से लखनऊ स्थानांतरित किये जाने विषयक

CIRCULAR, DIRECTOR, BASIC SHIKSHA NEWS, TRANSFER : सचिव, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय, प्रयागराज से लखनऊ स्थानांतरित किये जाने विषयक


CIRCULAR, INTERDISTRICT TRANSFER : शैक्षिक सत्र 2019-20 हेतु अध्यापक/अध्यापिकाओं के अन्तरजनपदीय स्थानांतरण के प्रस्ताव प्रेषण के सम्बंध में ।

CIRCULAR, INTERDISTRICT TRANSFER : शैक्षिक सत्र 2019-20 हेतु अध्यापक/अध्यापिकाओं के अन्तरजनपदीय स्थानांतरण के प्रस्ताव प्रेषण के सम्बंध में ।




MAN KI BAAT : अवकाश, अध्यापक और अध्ययन पर जब चर्चा होती है तो यह बात भी उभर कर आता है कि हमारे देश में शिक्षा एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अध्यापक सबसे निरीह प्राणी है, उसी पर प्रशासन, शासन, समाज, यहां तक कि शैक्षिक संस्थाएं हर प्रकार की जोर आजमाइश.....

MAN KI BAAT : अवकाश, अध्यापक और अध्ययन पर जब चर्चा होती है तो यह बात भी उभर कर आता है कि हमारे देश में शिक्षा एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अध्यापक सबसे निरीह प्राणी है, उसी पर प्रशासन, शासन, समाज, यहां तक कि शैक्षिक संस्थाएं हर प्रकार की जोर आजमाइश.....

अवकाश का मतलब अपने काम से छुट्टी नहीं, बल्कि अवकाश में किसी नए काम की खोज करना है, जो अध्यापक को अधिक प्रभावशाली बना सके। वह उसके आगामी सत्र या अवकाश के बाद सोचे गए काम की तैयारी भी है।

दुनिया भर में जहां भी श्रेष्ठतम शिक्षा दी जाती है, वहां शैक्षिक अवकाश एक प्रकार की अनिवार्यता है। वहां शिक्षकों और छात्रों के अवकाश के कारण न तो गुणवत्ता प्रभावित हुई और न कार्य-संस्कृति नष्ट हुई। मगर हमारे देश में शिक्षा एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अध्यापक सबसे निरीह प्राणी है। उसी पर प्रशासन, शासन, समाज, यहां तक कि शैक्षिक संस्थाएं हर प्रकार की जोर आजमाइश करती हैं। अध्यापकों के लिए सम्मान और सहानुभूति का जो संस्कार किसी जमाने में था, उससे उसकी समाज में बौद्धिक प्रतिष्ठा थी।

आरोप लगाए जाते हैं कि इस प्रतिष्ठा को खुद अध्यापक ने ही नष्ट किया है। उसका अध्ययन-विमुख होना, उसका अध्यापन के प्रति ईमानदार न होना और गैर-शैक्षिक कार्यों में कभी सरकारी स्तर पर तो कभी निजी कारोबार के कारण व्यस्त रहना, अध्यापकीय प्रतिष्ठा के पतन का प्रमुख आरोप है। क्या यह सच है? पूरा सच है?

अध्यापक चाहे प्राथमिक स्कूल का हो या विश्वविद्यालय का, उसे अवकाश-विहीन करने की शिक्षा-नीतियों और निर्देशों ने उसका मानसिक धरातल क्षुब्ध कर दिया है। आज से चालीस-पचास साल पहले कोई नहीं कहता था कि अवकाशों के कारण कोर्स पूरा नहीं हुआ, पढ़ाई नहीं होती, कार्य-संस्कृति का विघटन हुआ या अध्यापक कामचोर और अध्ययन-अध्यापन से विमुख हुआ। बिना कोचिंग कक्षाओं, महंगे निजी फीस-फैशन वाले स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों के भी सरकारी संस्थाओं में अच्छी पढ़ाई होती थी।

जो अंगरेजी और गणित आज समस्या वाले विषय हैं वे उस जमाने में कभी ऐसा नहीं थे। उस जमाने के हाईस्कूल पास आज भी अंगरेजी और गणित के अच्छे शिक्षक हैं, अच्छे कर्मचारी और अच्छे अधिकारी माने जाते हैं। फिर ऐसा क्या हुआ, क्यों हुआ कि दो सौ दस दिन का शैक्षिक सत्र बनाने, सेमेस्टर सिस्टम लाने, अध्यापकों को अवकाश-रहित करने, बार-बार प्रशिक्षण, रिफ्रेशर का उन्मुखीकरण कोर्स देने के बावजूद आज न तो वैसा स्तर है, न वैसा समर्पण और न वैसी कार्य-संस्कृति है?

अध्यापक को अवकाश-विहीन करने के पीछे इरादा यह है कि उसे सदा व्यस्त रखो और ऐसे काम देते रहो, जिससे उसका मनोबल और आत्मविश्वास ही समाप्त हो जाए। वह केवल एक आज्ञाकारी सेवक बन जाए।

कभी विधानसभा, लोकसभा से लेकर पंचायत, नगर निगम आदि के प्रश्नों के जवाब एकत्रित करने वाला चलित मजदूर बन जाए, तो कभी जिला, संभाग और राज्य के शिक्षा विभाग या कलेक्टरेट का कर्मचारी बन कर वहां बाबूगिरी करता रहे। अध्यापक की स्वतंत्रता छीन कर आप शिक्षा से स्वतंत्रता का संस्कार कैसे दे सकते हैं! अध्यापक को आत्म-विश्वासहीन करके आप भावी पीढ़ी में विश्वास कैसे पैदा कर सकते हैं? ऐसे कई प्रश्न हैं।

आखिर अवकाश है क्या? अवकाश अध्यापक की आरामगाह नहीं है। यह उसके चिंतर, मनन, विचार और अध्ययन का एकांत है। उसकी शिक्षा के प्रति कुछ नया खोजने या सोचने की जगह है, साथ ही उन जिम्मेदारियों की जगह है, जो उसे परिवार और समाज में रह कर अवकाशकाल में ही निभानी होती है। उसका अवकाश छीन कर हम उसे कार्य-दिवसों के प्रति बेईमान बना देते हैं। वह अपनी घरेलू या सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए जब कार्य-दिवसों का इस्तेमाल करता है तो पढ़ाई प्रभावित होती है, वह बार-बार छुट््टी लेकर या नाजायज तरीकों से गायब होकर अपना अवकाश खुद पैदा करने लगता है। ऐसे अवैध अवकाशों के कारण वह कामचोर, बेईमान और कर्तव्य भ्रष्ट कहलाने लगता है। ऐसा क्यों? क्या नीतिकार और शासक-प्रशासक विचार करेंगे?

वास्तव में अवकाश एक प्रकार से सत्र भर की थकान से थोड़ी राहत का समय और स्पेस दोनों है। क्या अवकाशकाल में उसे तरह-तरह के सर्वे पकड़ा कर, सेमेस्टरों की परीक्षाएं करवा कर, सेमिनार या रिफ्रेशर करवा कर हम सचमुच उसका विषय-उन्नयन या बौद्धिक उत्थान कर पाते हैं? क्या हर समय परीक्षा लेते रहने, कॉपियां जांचते रहने या छोटे-छोटे सेमिनार-वर्कशॉप में जाने का एक विकल्प यह नहीं हो सकता कि हम उसे अवकाश काल में घर या बाहर रह कर संस्था से अलग हट कर कुछ सोचने का मौका दें? उसे नए शैक्षिक प्रयोगों, नवाचारों, अनुभवों और उपलब्धियों की पुस्तकें देकर उन पर अपनी समीक्षा देने का काम क्यों नहीं किया जा सकता?

अवकाशकाल में कुछ नया सोचने या करने के लिए उसकी इच्छा जानने का कोई प्रपत्र क्यों नहीं भरवाया जाता? छात्राओं-छात्रों से हर सत्र या सेमेस्टर के बाद यह क्यों नहीं पूछा जाता कि वे आगामी सत्र या सेमेस्टर कैसा चाहते हैं? सेमेस्टर प्रणाली क्या वार्षिक परीक्षा प्रणाली का बेहतर विकल्प है? क्या मासिक या पाक्षिक टेस्ट लेकर परीक्षा का सतत आतंक रचना उचित है? क्या अवकाश में विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूलों को एक साथ बैठा कर विषय के उन्नयन या नए ज्ञान के उन्मुखीकरण की एक वार्षिक योजना तैयार नहीं की जा सकती?

क्या समाज और सरकार के साथ मिल कर अध्यापक अपनी शैक्षिक शक्ति का उपयोग करके अपनी संस्था को संसाधन संपन्न बनाने, श्रेष्ठ बनाने का कार्य-पत्र नहीं बना सकते? विषय विशेषज्ञ अध्यापकों के समक्ष आने वाली जटिलताओं को कैसे सरल किया जाए, क्या इस विषय में उनका प्रबोधन नहीं कर सकते?

अवकाश का मतलब अपने काम से छुट््टी नहीं, बल्कि अवकाश में किसी नए काम की खोज करना है, जो अध्यापक को अधिक प्रभावशाली बना सके। वह उसके आगामी सत्र या अवकाश के बाद सोचे गए काम की तैयारी भी है। जब शिक्षक के अवकाश पर प्रशासन का आक्रमण होता है, तो ऐसा लगता है जैसे एक प्रशासक अपने दफ्तर के काम की तुलना शिक्षक के काम से कर रहा है। अपने अवकाशों से शिक्षक के अवकाश की तुलना कर शिक्षक के अवकाश से ईर्ष्या कर रहा है या अपनी कम छुट्टियों का ज्यादा छुट्टियों से प्रतिशोध ले रहा है।

अवकाश से शिक्षक कोई सत्र भर की थकान उतार कर आराम करना नहीं चाहता, बल्कि वह अपने अन्य कामों को निपटा कर, कार्य दिवसों को अधिक कार्यशील बनाना चाहता है। शिक्षक के प्रति प्रशासकों का मनोविज्ञान आतंक का मनोविज्ञान है। यहां तक कि हेड मास्टर, प्राचार्य, अध्यापक, उपनिरीक्षक, निरीक्षक से लेकर सर्वोच्च अधिकारी तक किसी भी शिक्षक का कभी भी सार्वजनिक रूप से या दफ्तर में अपमान कर देना अपने कर्तव्य और अनुशासन का हिस्सा मानता है। यह मनोविज्ञान बदलना होगा।

एक शिक्षक या प्राध्यापक अवकाशकाल में दैनिक रूटीन की परंपरागत जड़ता से मुक्त भी होता है। अध्यापकों के लिए अनेक प्रकार की जड़ताएं मुंह बाए खड़ी हैं। प्रवेश, पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तक, परीक्षाएं ये सब ऐसे काम हैं, जो आनंद नहीं रचते। आज तक स्कूल से विश्वविद्यालय तक ऐसा पाठ्यक्रम बना ही नहीं कि शिक्षा आनंद बन सके, जिज्ञासा बन सके, आत्मप्रेरित अनुसंधान, प्रयोग या नवाचार बन सके।

निजी स्कूलों में उच्च स्तर के नाम पर केवल ऊंची कमाई का फीस उद्योग है, इवान इलिच ने जब यह कहा था कि डॉक्टर किसकी सेवा करते हैं- क्या जनता या मरीज की? तो उसका उत्तर था नहीं, वे तो दवा उद्योग की सेवा करते हैं। इसी प्रकार स्कूल किसकी सेवा करते हैं? क्या बच्चों की, अध्यापकों की, आम जनता की? नहीं? वे भी स्कूल मालिकों की सेवा करते हैं और निजी तंत्र का एक शोषणतंत्र पैदा करते हैं।

अध्यापक के अवकाश को कुछ गलतफहमियों और विभागीय निर्णयों की निरंकुशता से मुक्त करना होगा। अवकाश को अध्यापक का अध्ययनकाल कहना होगा! उसका अवकाश छीन कर गुणवत्ता का गलत मनोविज्ञान नहीं रचा जा सकता। अवकाश शिक्षा में नवचिंतन की स्पेस है।
लेखक : रमेश दवे
प्रस्तुति : अध्यापक की सोच

Sunday, June 09, 2019

SERVICE, APPOINTMENT, BASIC SHIKSHA NEWS : बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा सेवाओं के लिए आयोग का प्रारूप तैयार, परीक्षा प्रणाली और आयोग का अंतिम स्वरूप मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद आएगा। 

SERVICE, APPOINTMENT, BASIC SHIKSHA NEWS : बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा सेवाओं के लिए आयोग का प्रारूप तैयार, परीक्षा प्रणाली और आयोग का अंतिम स्वरूप मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद आएगा। 

आयोग की शक्तियां परीक्षा कराने से लेकर उनके सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार तक का पैनल गठित करने का होगा। 'क' वर्ग की सेवाओं में 30 अंक का सामान्य ज्ञान, 70 अंक विषय के और 30 अंक साक्षात्कार के होंगे। 'ख' वर्ग की सेवाओं के लिए लिखित और साक्षात्कार के आधार पर मेरिट तैयार होगी, जिसके आधार पर परिणाम घोषित होंगे। 'ग' वर्ग की सेवाओं के लिए साक्षात्कार नहीं होंगे। परीक्षा और सीटीईटी या टीईटी के प्राप्त अंकों के एक चौथाई नंबर जोड़ते हुए तैयार की गई मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन होगा।

आयोग में एक अध्यक्ष और 14 सदस्य होंगे। आयोग के अध्यक्ष के लिए वही मानक रखे गए हैं, जो उच्चतर शिक्षा आयोग 1980 में परिभाषित हैं। आयोग के अध्यक्ष की अधिकतम उम्र 65 साल होगी। 14 सदस्यों को दो श्रेणियों में बांटा जाएगा। आठ सदस्य उच्चतर शिक्षा आयोग के मानकों पर होंगे जबकि बाकी छह माध्यमिक शिक्षा आयोग के मानकों के आधार पर होंगे। उच्चतर शिक्षा आयोग की तर्ज पर चयनित होने वाले सदस्य किसी भी सेवा के लोगों का साक्षात्कार कर सकेंगे जबकि माध्यमिक शिक्षा आयोग के मानकों पर चयनित सदस्य अपने ही वर्ग के लोगों का साक्षात्कार कर सकेंगे। आयोग का निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। अगर आयोग का फैसला बाराबर पर छूटता है तो अध्यक्ष को मत देने का अधिकार होगा। सचिव और परीक्षा नियंत्रक जैसे सरकारी पद भी इसमें होंगे।

प्रारूप में तय किया गया है कि तीन वर्ग की सेवाओं के लिए आयोग अभ्यर्थियों का चयन करेगा। 'क' वर्ग की सेवाओं में उच्च शिक्षा में सहायक आचार्य और महाविद्यालयों के प्राचार्यों के चयन संबंधी सेवाएं होंगी। 'ख' वर्ग में माध्यमिक शिक्षा के प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और एलटी ग्रेड के शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी सेवाएं होंगी। 'ग' वर्ग में प्राथमिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों की नियुक्ति संबंधी सेवाएं होंगी।

सूत्र बताते हैं कि अभी इस संबंध में कुछ और मीटिंगें होनी हैं। इसके बाद यह प्रस्ताव शिक्षा मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री के पास जाएगा। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद इसका अंतिम स्वरूप सामने आएगा। माना जा रहा है कि इसमें कुछ ही फेरबदल के साथ ही इसको अमल में लाया जा सकता है। 

तीन वर्ग की सेवा के लिए अभ्यर्थियों का होगा चयन• एनबीटी ब्यूरो, लखनऊ : उच्चतर और माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग के सम्मिलन का प्रारूप तैयार हो गया है। इसे यूपी एजुकेशन सर्विसेज कमीशन या यूपी स्टेट एजुकेशन सर्विसेज कमीशन नाम दिया जा सकता है। इसी प्रारूप के आधार पर दोनों आयोगों के सम्मिलन का प्रस्ताव तैयार होगा। इसके अलावा इस प्रारूप में बेसिक शिक्षा की भर्तियों के लिए भी व्यवस्था की गई है। इसके पहले बेसिक शिक्षा की सेवा के लिए चयन आयोग नहीं था। हाल ही में मुख्यमंत्री ने तीनों शिक्षा पद्धतियों की भर्तियों के लिए एक ही आयोग गठित करने की तैयारी करने का आदेश दिया था।

सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा विभाग ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर इस मसले पर एक मीटिंग की थी। इसके बाद यह प्रारूप सामने आया है।

Friday, June 07, 2019

CM, COMPULSORY RETIREMENT : अक्षम कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की रिपोर्ट तलब, 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मियों की स्क्रीनिंग का मामला

CM, COMPULSORY RETIREMENT : अक्षम कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की रिपोर्ट तलब, 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मियों की स्क्रीनिंग का मामला



CM, RECRUITMENT, POLICY : शिक्षकों की तेज होगी भर्ती जल्द निपटाने उनके विवाद, बेसिक से उच्च शिक्षा तक के लिए होगा केवल एक शिक्षा आयोग, बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिए निर्देश

CM, RECRUITMENT :  शिक्षकों की तेज होगी भर्ती जल्द निपटाने उनके विवाद, बेसिक से उच्च शिक्षा तक के लिए होगा केवल एक शिक्षा आयोग, बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिए निर्देश






DELED : प्रदेशभर में डीएलएड सेमेस्टर परीक्षा आज से शुरू

DELED : प्रदेशभर में डीएलएड सेमेस्टर परीक्षा आज से शुरू



ALLAHABAD HIGHCOURT, ADD SCHOOL, GRANT : कालेजों से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों को ग्रांट देने का आदेश

ALLAHABAD HIGHCOURT, ADD SCHOOL, GRANT : कालेजों से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों को ग्रांट देने का आदेश

विसं, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वित्तीय सहायता प्राप्त हाईस्कूल व इंटर कालेजों से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों को ग्रांट इन एड में शामिल करने का निर्देश देते हुए राज्य सरकार को नीति निर्धारित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2016 के शासनादेश के उस उपखण्ड को मनमानापूर्ण मानते हुए रद कर दिया है। जिसमें ग्रांट में शामिल करने की 21 जून 1973 की कटऑफ डेट तय की गयी थी। कोर्ट ने 13 जुलाई 2017 के संशोधन जिसके तहत पांच साल तक ग्रांट देने पर पुनर्विचार करने पर रोक लगायी थी, उसे रद कर दिया है।

जूनियर हाईस्कूल से संबद्ध स्कूलों को कोई लाभ देने से इन्कार करते हुए कोर्ट ने कहा है कि वे 2017 के संशोधन को चुनौती दे सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने जय राम सिंह व 11 अन्य सहित सैकड़ों याचिकाओं को निर्णीत करते हुए दिया है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत 27 अक्टूबर 2016 के शासनादेश से प्रदेश में 300 की आबादी व एक किलोमीटर की दूरी पर नए स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि जिन 2055 बस्तियों में स्कूल नहीं हैं उनमें 21 जून 1973 के पहले के एडेड हाईस्कूल व इंटर कालेज से सम्बद्ध प्राइमरी स्कूलों को अनुदान में शामिल किया जाए।

Thursday, June 06, 2019

CIRCULAR, REPORT, TRANSFER : परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में जनपद के भीतर स्थानांतरित अध्यापकों की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।

CIRCULAR, REPORT, TRANSFER : परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में जनपद के भीतर स्थानांतरित अध्यापकों की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।


ENGLISH MEDIUM : बेसिक शिक्षा में पढ़ाई की शुरुआत में  ही मातृभाषा दरकिनार, दो सत्रों से चल रहा नव प्रयोग। 

ENGLISH MEDIUM : बेसिक शिक्षा में पढ़ाई की शुरुआत में  ही मातृभाषा दरकिनार, दो सत्रों से चल रहा नव प्रयोग। 




AADHAR CARD, ADMISSION, BASIC SHIKSHA NEWS : बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुँचाने के लिए अब छात्र छात्राओं का होगा आधार नामांकन,  31 जुलाई तक शिविर लगा कर कार्य पूरा करने के निर्देश। 

AADHAR CARD, ADMISSION, BASIC SHIKSHA NEWS : बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुँचाने के लिए अब छात्र छात्राओं का होगा आधार नामांकन,  31 जुलाई तक शिविर लगा कर कार्य पूरा करने के निर्देश। 



BED : बीएड में दाखिले के लिए आज से शुरू होगी काउंसलिंग,  6 से 8 जून के मध्य अभ्यर्थी करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन। 

BED : बीएड में दाखिले के लिए आज से शुरू होगी काउंसलिंग,  6 से 8 जून के मध्य अभ्यर्थी करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन। 



Tuesday, June 04, 2019

CIRCULAR, DIRECTOR, AADHAR LINK, ADMISSION : प्रदेश में संचालित कक्षा-1 से 8 तक के विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का आधार नामांकन जुलाई के अंत तक पूर्ण कराए जाने के संबंध में आदेश जारी

CIRCULAR, DIRECTOR, AADHAR LINK, ADMISSION : प्रदेश में संचालित कक्षा-1 से 8 तक के विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का आधार नामांकन जुलाई के अंत तक पूर्ण कराए जाने के संबंध में आदेश जारी


WRIT, SUPREME COURT : परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में अंशकालिक अनुदेशकों की होनी थी भर्ती, उर्दू शिक्षकों व सहायक अध्यापक की भर्ती भी फंसी, प्राइमरी स्कूलों की 4 भर्तियों का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

WRIT, SUPREME COURT : परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में अंशकालिक अनुदेशकों की होनी थी भर्ती, उर्दू शिक्षकों व सहायक अध्यापक की भर्ती भी फंसी, प्राइमरी स्कूलों की 4 भर्तियों का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में चार भर्तियों का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने खाली पदों पर भर्ती का आदेश दिया था। लेकिन प्रदेश सरकार ने भर्ती करने की बजाय हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है। .

इनमें उच्च प्राथमिक स्कूलों में 32022 अंशकालिक अनुदेशकों और प्राथमिक स्कूलों में उर्दू विषय के 4000 सहायक अध्यापकों की भर्ती शुरू नहीं हो सकी है। जबकि 12460 और 16448 सहायक अध्यापक भर्ती के रिक्त पदों को भरने का मामला है। .

इसी के साथ उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान व गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती का विवाद भी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। .

प्रयागराज ' वरिष्ठ संवाददाता.

लोक सेवा आयोग की भर्तियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कैंडिल मार्च निकालते प्रतियोगी.

प्रयागराज। लोक सेवा आयोग की सहायक अध्यापक प्रशिक्षित स्नातक (एलटी ग्रेड) भर्ती परीक्षा 2018 को लेकर एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस भर्ती में शामिल कई अभ्यर्थियों ने अपनी ओएमआर सीट को खाली ही जमा कर दिया था। यह खुलासा किया है 29 जुलाई 2018 को हुई भर्ती परीक्षा में बतौर कक्ष निरीक्षक ड्यूटी करने वाले मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज के शिक्षक एवं कवि इमरान खान पामाल ने।.

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान इमरान की ड्यूटी मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज में लगी थी। इमरान का कहना है कि परीक्षा से पूर्व उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ अभ्यर्थियों से कहा गया है कि जिस प्रश्न का उत्तर सही-सही आ रहा है सिर्फ उसी का उत्तर देना है, बाकी ओएमआर को खाली जमा करना है। उन्होंने ऐसे अभ्यर्थियों से पूछा तो वे सकपका गए और बोले जितना आता है उतना ही किया। इमरान का कहना है कि उन्होंने यह भी पूछा कि जब माइनस मार्किंग नहीं है तो ओएमआर खाली क्यों छोड़ रहे हो तो अभ्यर्थियों ने कोई जवाब नहीं दिया।.

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर यूं ही सवाल खड़े नहीं हो रहे। बदल रहे समाज में एक ही व्यक्ति को असीमित अधिकार देने के कारण भी हालात बिगड़े हैं। जब 2012 से ही भर्तियों में भ्रष्टाचार के खुलेआम आरोप लग रहे हैं तो सरकार को पुरानी व्यवस्था में बदलाव कर देना चाहिए था। चयन की गोपनीयता बनाए रखने के लिए आयोग में पेपर सेट करवाने से लेकर मॉडरेशन और छपाई तक का काम सिर्फ और सिर्फ परीक्षा नियंत्रक के पास होता है। उनके अधिकार क्षेत्र में दखलअंदाजी की इजाजत किसी को नहीं है।.

प्रयागराज। लोक सेवा आयोग की भर्तियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन सोमवार को भी जारी रहा। प्रतियोगी छात्रों ने सोमवार की शाम आयोग के खिलाफ इविवि छात्रसंघ भवन के सामने से शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क तक कैंडल मार्च किया। वहीं दिन में प्रतियोगी छात्र संघर्ष न्याय मोर्चा की ओर से आंख पर काली पट्टी बांधकर धरना दिया गया। कैंडल मार्च में शामिल प्रतियोगी छात्रों ने आयोग प्रकरण में सरकार की ओर से उठाए गए कदम का स्वागत करते हुए आयोग के सचिव सहित भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य लोगों पर कार्रवाई की मांग की।.

लखनऊ। एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार और निलंबित हुईं यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंक्ष्क अंजू लता कटियार को पीसीएस एसोसिएशन विधिक सहायता उपलब्ध कराएगी। एसोसिएशन ने उनके मामले में अपने स्तर से जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी किया है। यह कमेटी प्रयागराज व वाराणसी जाकर सभी तथ्यों का पता लगाएगी। उल्लेखनीय है कि अंजूलता कटियार को आयोग की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार की गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। एसटीएफ ने दावा किया था उसके पास अंजूलता कटियार और कौशिक कुमार की मिलीभगत के साक्ष्य हैं।.

वाराणसी। एलटी ग्रेड भर्ती परीक्षा-2018 के पेपर लीक मामले की जांच कर रही एसआईटी पुख्ता सबूत जुटाने में लगी है। पुलिस नहीं चाहती कि मामले में कुछ ऐसा हो जिससे आरोपित दोषमुक्त हो जाएं और उनकी किरकिरी हो। यही वजह है कि मामले में यूपीपीएससी की परीक्षा नियंत्रक को छोड़कर अन्य आरोपितों को गिरफ्तारी नहीं हो रही है। इसलिए जांच टीम ने आयोग से कई तरह की जानकारी मंगाने के साथ सबसे पहले गवाह का कलमबंद बयान दर्ज कराया है। मामले में पेपर लीक के मास्टरमाइंड कोलकाता निवासी कौशिक कुमार की गिरफ्तारी के बाद उत्तर लोक सेवा अयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजु लता कटियार को गिरफ्तार किया गया है। मामले में सात वांछित हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगी हुई है। लेकिन गवाह और कौशिक को वांछितों के बारे में नाम के अलावा अन्य जानकारी नहीं होने से गिरफ्तारी कर पाना पुलिस के लिए मुश्किल हो रहा है। केस के विवेचक सीओ पिंडरा अनिल राय का कहना है कि जांच चल रही है। .

छह को है जमानत पर सुनवाई: यूपीपीएससी की परीक्षा नियंत्रक अंजु लता कटियार की जमानत अर्जी पर एंटी करप्शन तृतीय की कोर्ट में छह जून को सुनवाई होनी हैं। इससे पहले एसआईटी चाहती है कि कुछ ऐसे और सबूत एकत्र कर ले।.

ITR : आईटीआर भरने की समय सीमा बढ़ाई जाएगी, फॉर्म 16 जारी करने की तिथि में भी होगी बढ़ोतरी

ITR : आईटीआर भरने की समय सीमा बढ़ाई जाएगी, फॉर्म 16 जारी करने की तिथि में भी होगी बढ़ोतरी


लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने बिना जुर्माने के आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने की समयसीमा एक जुलाई से आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। फॉर्म 16 जारी करने की तारीख 30 जून से 10 जुलाई करने के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के फैसले के बाद ऐसी संभावनाओं को बल मिला है। 

कर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियों की ओर से कर्मचारियों को फॉर्म 16 दस जुलाई तक मिल पाता है तो 31 जुलाई तक सभी के लिए आईटीआर भरना संभव नहीं हो पाएगा। आखिरी वक्त पर आईटीआर भरने की होड़ से ई-फाइलिंग साइट भी ठप हो सकती है। ऐसे में आईटीआर भरने की अंतिम तिथि को कम से कम 31 अगस्त तक बढ़ाया जा सकता है। 

सीबीडीटी ने सोमवार को अधिसूचना जारी कर फॉर्म 16 जारी करने की तारीख 30 जून से दस दिन बढ़ाकर 10 जुलाई की है। पिछले साल भी सरकार ने पैन-आधार लिंकिंग जैसे कई कारणों से आईटीआर भरने की समयसीमा बढ़ाई थी और तय तारीख के बाद आईटीआर भरने वालों पर जुर्माना लगाया था। सरकार से इस बारे में विभिन्न पक्षों ने अपील भी की है। सीबीडीटी ने टीडीएस रिटर्न यानी फॉर्म 24क्यू की तारीख 31 मई से 30 जून की है, क्योंकि इसके फॉर्म में कई अहम बदलाव किए गए हैं। साथ ही आय के स्रोत के दस्तावेज फॉर्म 16 भी अब दस जुलाई तक जारी हो सकेगा। नए फॉर्म 16 में वेतन, भत्तों, आयकर छूट के दावों का अलग-अलग उल्लेख करना अनिवार्य किया गया है। 

नए बदलावों को देखते हुए महत्वपूर्ण

क्लियर टैक्स के सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा कि फॉर्म 16 और आईटीआर फॉर्म में हुए नए बदलावों को देखते हुए करदाताओं को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है। इससे नियोक्ता कंपनी, कर्मचारियों और आयकर विभाग के लिए भी रिटर्न की प्रोसेसिंग में आसानी होगी। फॉर्म 16 टीडीएस प्रमाणपत्र होता है, जो नियोक्ता कंपनी द्वारा कर्मचारी को जारी किया जाता है। इसमें आपको पूरे साल में दी गई रकम और कर कटौती का उल्लेख होता है। इसमें पार्ट ए में कर कटौती और पार्ट बी में वेतन के तमाम मदों का जिक्र होता है।

CIRCULAR, PROMOTION, DIRECTOR : बेसिक/माध्यमिक शिक्षा निदेशालय एवं एससीईआरटी के अन्तर्गत उ0प्र0 शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह "ख" श्रेणी में कार्यरत अधिकारियों के गोपनीय आख्या उपलब्ध कराने के संबंध में

CIRCULAR, PROMOTION, DIRECTOR : बेसिक/माध्यमिक शिक्षा निदेशालय एवं एससीईआरटी के अन्तर्गत उ0प्र0 शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह "ख" श्रेणी में कार्यरत अधिकारियों के गोपनीय आख्या उपलब्ध कराने के संबंध में






SUSPENSION, BSA : आगरा के बीएसए समेत दो अधिकारी निलम्बित, खबर सहित आदेश देखें

SUSPENSION, BSA : आगरा के बीएसए समेत दो अधिकारी निलम्बित, खबर सहित आदेश देखें



BED, COUNSELING : छह जून से होगी उप्र बीएड की काउंसिलिंग

BED, COUNSELING : छह जून से होगी उप्र बीएड की काउंसिलिंग

जासं, बरेली : उप्र बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग छह जून से शुरू होगी। उप्र में बीएड के लगभग 2431 कॉलेज हैं। इनमें 2.12 लाख के आस-पास सीटें हैं। खास बात यह है कि पहले चरण में उतने ही अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया है, जितनी कुल सीटें हैं। प्रवेश परीक्षा आयोजक एमजेपी रुविवि प्रशासन काउंसिलिंग की तैयारियों में जुट गया है। इस बार 5,66,400 अभ्यर्थियों ने बीएड की प्रवेश परीक्षा दी है। हर सीट पर प्रवेश के ढाई दावेदार हैं। इसीलिए काउंसिलिंग के केवल दो चरण हैं। पहले चरण की काउंसिलिंग छह जून से 18 जून तक चलेगी। दूसरे चरण की काउंसिलिंग के पंजीकरण 15 जून से शुरू हो जाएंगे। उसी तारीख से दूसरे चरण की काउंसिलिंग भी चालू कर दी जाए जो 28 जून तक चलेगी।


ARREAR, 7TH PAY COMMISSION : सातवें वेतनमान के बकाये का भुगतान इसी माह

ARREAR, 7TH PAY COMMISSION : सातवें वेतनमान के बकाये का भुगतान इसी माह


राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सातवें वेतनमान के एरियर की दूसरी किस्त के भुगतान की अरसे से प्रतीक्षा कर रहे 27 लाख राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनरों का इंतजार खत्म हो गया है।

राज्य सरकार ने उन्हें एक जनवरी से 31 दिसंबर 2016 तक सातवें वेतनमान (पुनरीक्षित वेतन मैटिक्स में वेतन) और जुलाई से दिसंबर 2016 तक दो प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) के एरियर के बचे हुए 50 प्रतिशत अंश का भुगतान करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी मिलने के बाद वित्त विभाग ने सोमवार को शासनादेश जारी कर दिया है। शासनादेश के मुताबिक एरियर का भुगतान यथासंभव 30 जून 2019 तक कर दिया जाएगा।


EDUCATION POLICY : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में किया बड़ा बदलाव, हिंदी की अनिवार्यता हुई खत्म


EDUCATION POLICY : मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में किया बड़ा बदलाव, हिंदी की अनिवार्यता हुई खत्म

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में बदलाव कर दिया है। अब हिंदी पढ़ने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। संशोधित मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले के तहत छात्र अब कोई भी तीन भाषा पढ़ने के लिए स्वतंत्र होंगे। हालांकि इनमें एक साहित्यिक भाषा जरूरी होगी। पुराने मसौदे में हिंदी, अंग्रेजी के साथ कोई एक स्थानीय भाषा पढ़ने का प्रावधान था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में यह बदलाव सोमवार को गैर-हिंदी भाषी प्रदेशों, खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों, से उठ रहे विरोध के सुर को देखते हुए किया गया है। इसकी शुरुआत तमिलनाडु से हुई थी, जहां द्रमुक सहित कई राजनीतिक दलों ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गए थे।
द्रमुक के अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। हालांकि, सरकार ने कहा था कि किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। यह अभी एक शुरुआती मसौदा है। सभी पक्षों से सलाह के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा।
संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले को लचीला कर दिया गया है। अब इनमें किसी भी भाषा का जिक्र नहीं है। छात्रों को कोई भी तीन भाषा चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों में पहले से दो भाषा पढ़ाई जा रही है। इनमें एक स्थानीय और दूसरी अंग्रेजी है। हालांकि संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में यह साफ कहा गया है कि स्कूली छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होगी।
नई शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर यह विवाद तब खड़ा हुआ है, जब सरकार ने इसे 31 मई को जारी कर लोगों से सुझाव मांगे। इसके तहत कोई भी व्यक्ति 30 जून तक अपने सुझाव दे सकता है। शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर मिल रहे सुझावों पर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय और नीति तैयार करने वाली कमेटी भी पैनी नजर रख रही है।
बदलाव का संगीतकार रहमान ने किया स्वागत
जाने-माने संगीतकार एआर रहमान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में बदलाव कर हिंदी की अनिवार्यता खत्म किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से छात्र अपनी पसंद की भाषा पढ़ने के लिए स्वतंत्र होंगे।
रहमान ने ट्वीट किया, 'तमिलनाडु में हिंदी अनिवार्य नहीं है। मसौदा नीति को बदल दिया गया है। बेहतर समाधान।' 


Monday, June 03, 2019

ARREAR, GOVERNMENT ORDER, 7TH PAY COMMISSION : दिनांक 01 जनवरी, 2016 से दिनांक 31 दिसम्बर, 2016 तक पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में वेतन तथा मंहगाई भत्ता एवं पुनरीक्षित पेंशन व महंगाई राहत के अवशेष की द्वितीय किश्‍त के भुगतान 30 जून तक करने के सम्बन्ध में।

ARREAR, GOVERNMENT ORDER, 7TH PAY COMMISSION : दिनांक 01 जनवरी, 2016 से दिनांक 31 दिसम्बर, 2016 तक पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में वेतन तथा मंहगाई भत्ता एवं पुनरीक्षित पेंशन व महंगाई राहत के अवशेष की द्वितीय किश्‍त के भुगतान 30 जून तक करने के सम्बन्ध में।


यहां क्लिक शासनादेश देखे और डाउनलोड करें

Sunday, June 02, 2019

ARREAR, 7th PAY COMISSION : सातवें वेतनमान के बकाये का भुगतान जल्द होगा, सूबे के मुख्यमंत्री को मंजूरी के लिए भेज गया प्रस्ताव, जल्द फैसला होने की संभावना

ARREAR, 7th PAY COMISSION : सातवें वेतनमान के बकाये का भुगतान जल्द होगा, सूबे के मुख्यमंत्री को मंजूरी के लिए भेज गया प्रस्ताव, जल्द फैसला होने की संभावना

राज्य ब्यूरो, लखनऊ: सातवें वेतनमान के एरियर की दूसरी किस्त के भुगतान की बाट जोह रहे प्रदेश के 27 लाख कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनरों का इंतजार जल्दी खत्म होगा। वित्त विभाग ने उन्हें एक जनवरी से 31 दिसंबर 2016 तक सातवें वेतनमान (पुनरीक्षित वेतन मैटिक्स में वेतन) और जुलाई से दिसंबर 2016 तक दो प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) के एरियर के बाकी बचे 50 प्रतिशत अंश का भुगतान करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के लिए भेज दिया है। इस पर जल्दी फैसला होने की संभावना है।

एरियर की धनराशि का 80 फीसद हिस्सा जीपीएफ/पीपीएफ/एनएससी के रूप में देने की मंशा है। बची हुई 20 फीसद राशि का आयकर कटौती के बाद नकद भुगतान करने का प्रस्ताव है। एरियर की दूसरी किस्त के भुगतान से खजाने पर करीब 8,500 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। इसका लाभ प्रदेश के 16.50 लाख राज्य कर्मचारियों, राजकीय व सहायताप्राप्त शिक्षण/प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों, नगरीय स्थानीय निकायों के कर्मचारियों और 10.50 लाख पेंशनर्स/पारिवारिक पेंशनर्स को मिलेगा।

गौरतलब है कि सातवें वेतनमान और जुलाई से दिसंबर 2016 तक दो प्रतिशत डीए के एरियर की पहली किस्त का भुगतान पिछले साल किया जा चुका है। राज्य कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनर्स अब दूसरी किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

Saturday, June 01, 2019

GOVERNMENT ORDER, TRANSFER : सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों की वार्षिक स्थानांतरण नीति।

GOVERNMENT ORDER, TRANSFER : सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों की वार्षिक स्थानांतरण नीति।


POLICY, RTE, EDUCATION POLICY : सार्वजनिक किया गया नई शिक्षा नीति का मसौदा, बढ़ेगा आरटीई का दायरा उच्च शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता पर रहेगा जोर

POLICY, RTE, EDUCATION POLICY : सार्वजनिक किया गया नई शिक्षा नीति का मसौदा, बढ़ेगा आरटीई का दायरा उच्च शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता पर रहेगा जोर



BED : एक जून से नहीं होगी बीएड की काउन्सलिंग, कॉउंसलिंग के हर चरण की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की तैयारी में रूहेलखंड विवि ने काउन्सलिंग टाली

BED : एक जून से नहीं होगी बीएड की काउन्सलिंग, कॉउंसलिंग के हर चरण की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की तैयारी में रूहेलखंड विवि ने काउन्सलिंग टाली



BED, EDUCATION POLICY : नई शिक्षा नीति में चार वर्षीय बीएड शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता बनाने की सिफारिश, बीच मे पढ़ाई छोड़ने वालों को उनकी पढ़ाई की अवधि के आधार पर दिया जाएगा डिप्लोमा एवं डिग्री

BED, EDUCATION POLICY : नई शिक्षा नीति में चार वर्षीय बीएड शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता बनाने की सिफारिश, बीच मे पढ़ाई छोड़ने वालों को उनकी पढ़ाई की अवधि के आधार पर दिया जाएगा डिप्लोमा एवं डिग्री

नई दिल्ली । मसौदे में निजी एवं सरकारी संस्थानों को समान मानने की अनुशंसा की गई है। भविष्य में शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय बीएड को न्यूनतम योग्यता बनाने की सिफारिश की गई है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग' और शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' की स्थापना की बात कही गई है।.


आने वाले समय में छात्रों के लिए तीन वर्षीय स्नातक के अलावा चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम का विकल्प होगा जिसमें ऑनर्स की डिग्री मिलेगी। वहीं,बीच में कोर्स छोड़ने वाले छात्रों को भी उनकी पढ़ाई की अवधि के आधार पर डिप्लोमा एवं डिग्री प्रदान की जाएगी।.


मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जारी नई शिक्षा नीति के मसौदे में यह प्रावधान किए गए हैं। मंत्रालय ने मसौदे पर सुझाव आमंत्रित किए हैं। सभी प्रकार के उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना, फंडिंग, प्रत्यायन एवं नियमन के लिए चार स्वतंत्र निकायों के गठन की सिफारिश की गई है। इसमें नियमन के लिए राष्ट्रीय उच्च शिक्षा नियमन प्राधिकरण की स्थापना की बात की है। इस संस्था के पास उच्च शिक्षा संस्थानों के नियमन का अधिकार होगा। इसी तरह, ‘नैक' के पास शिक्षा संस्थानों के प्रत्यायन का अधिकार होगा। पेशेवर मानक तय करने के लिए सभी पेशों से जुड़े निकायों के गठन का प्रस्ताव यूजीसी के स्थान पर एचईजीसी के गठन की अनुशंसा की गई है। .


मसौदे में निजी एवं सरकारी संस्थानों को समान मानने की अनुशंसा की गई है। भविष्य में शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय बीएड को न्यूनतम योग्यता बनाने की सिफारिश की गई है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग' और शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' की स्थापना की बात कही गई है।.


मसौदे में निजी एवं सरकारी संस्थानों को समान मानने की अनुशंसा की गई है। भविष्य में शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय बीएड को न्यूनतम योग्यता बनाने की सिफारिश की गई है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग' और शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' की स्थापना की बात कही गई है।.


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