Wednesday, July 24, 2019

MOBILE, TEACHER, ATTENDANCE, SELFI : यूपी में नहीं कटेगा स्कूल पहुंचकर 'सेल्फी' ना भेजने वाले शिक्षकों का वेतन, योगी सरकार ने वापस लिया फैसला, सरकार शिक्षकों के साथ है और उनका किसी भी सूरत में अपमान नहीं करना चाहती - बेसिक शिक्षा मंत्री

MOBILE, TEACHER, ATTENDANCE, SELFI : यूपी में नहीं कटेगा स्कूल पहुंचकर 'सेल्फी' ना भेजने वाले शिक्षकों का वेतन, योगी सरकार ने वापस लिया फैसला, सरकार शिक्षकों के साथ है और उनका किसी भी सूरत में अपमान नहीं करना चाहती - बेसिक शिक्षा मंत्री

नयी व्यवस्था को ‘सेल्फी अटेंडेंस मीटर’ नाम दिया गया था. इसके जरिए स्कूल पहुंचते ही अध्यापकों को एक सेल्फी क्लिक कर बेसिक शिक्षा अधिकारी के वेबपेज पर पोस्ट करनी होती है. इससे उनकी उपस्थिति दर्ज हो जाती है. सेल्फी अपलोड करने की समयसीमा सुबह आठ बजे की थी.
प्रतीकात्मक तस्वीर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में सुबह प्रार्थना के दौरान सेल्फी खींचकर न भेजने वाले शिक्षकों का वेतन काटने का फैसला राज्य सरकार ने वापस ले लिया है. प्रदेश की बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने मंगलवार को विधान परिषद में शून्यकाल के दौरान कार्यस्थगन की एक सूचना पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सेल्फी न भेजने वाले शिक्षकों का उस दिन का वेतन काटने का आदेश वापस ले लिया गया है.
शिक्षक दल के नेता ओम प्रकाश शर्मा, हेम सिंह पुंडीर और अन्य सदस्यों ने सूबे के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों द्वारा गत 20 जून को पत्र के माध्यम से सरकारी प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को रोज सुबह पाठशाला में प्रार्थना के दौरान सेल्फी खींचकर जिम्मेदार अधिकारी को भेजने के आदेश को नियम विरुद्ध करार देते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये यह मुद्दा उठाया.
पुंडीर और शर्मा ने कहा कि सेल्फी खींचकर भेजने की व्यवस्था में प्रोत्साहन के साथ दंड भी लगा दिया गया है, जो उचित नहीं है.
बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा ने कहा कि गांवों के लोग शिक्षकों के समय पर विद्यालय न आने की शिकायत करते हैं. इसीलिए स्कूलों में सेल्फी की व्यवस्था लागू की गई है. सरकार शिक्षकों के साथ है और उनका किसी भी सूरत में अपमान नहीं करना चाहती.
ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार ने बीते माह जारी आदेश में प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए सुबह प्रार्थना के दौरान बच्चों के साथ सेल्फी खींचकर भेजना अनिवार्य कर दिया था. ऐसा न करने वाले शिक्षकों का उस दिन का वेतन काटने को भी कहा था.
बता दें कि राज्य सरकार ने पिछले महीने जारी आदेश में प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों के लिये सुबह प्रार्थना के दौरान बच्चों के साथ सेल्फी खींचकर भेजना अनिवार्य कर दिया था.ऐसा ना करने वाले शिक्षकों का उस दिन का वेतन काटने के भी आदेश दिये गये थे.
   द्वारा - ABPNEWS

Saturday, July 20, 2019

MDM : बच्चों को महीने में एक दिन और मिलेगा फल, जिलाधिकारियों को निर्देश जारी, खबर के साथ आदेश भी देखें

बच्चों को महीने में एक दिन और मिलेगा फल


राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मिड-डे मील योजना के तहत जुलाई से बच्चों को स्कूल में महीने के आखिरी बृहस्पतिवार को भी ताजा और मौसमी फल मिलेंगे। अभी प्रदेश में राज्य सरकार की ओर से बच्चों को हर हफ्ते सोमवार को ताजा और मौसमी फल देने की व्यवस्था लागू है। अब केंद्र सरकार ने फ्लैक्सी फंड के तहत बच्चों को महीने में एक दिन और फल मुहैया कराने की मंजूरी दी है। महीने के आखिरी बृहस्पतिवार को अवकाश होने पर अगले शिक्षण दिवस में फल बांटे जाएंगे। बच्चों को फल सुबह स्कूल आते ही नाश्ते के तौर पर दिया जाएगा।

मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक विजय किरन आनंद की ओर से इस बारे में जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिये गए हैं।

Friday, July 19, 2019

MDM, CIRCULAR : मध्याह्न भोजन योजनान्तर्गत अतिरिक्त पोषक तत्व उपलब्ध कराये जाने के निमित्त फ्लैक्सी फण्ड से माह में एक दिवस (अंतिम बृहस्पतिवार) ताजा एवं मौसमी फल उपलब्ध कराये जाने के सम्बंध में आदेश जारी ।

MDM, CIRCULAR : मध्याह्न भोजन योजनान्तर्गत अतिरिक्त पोषक तत्व उपलब्ध कराये जाने के निमित्त फ्लैक्सी फण्ड से माह में एक दिवस (अंतिम बृहस्पतिवार) ताजा एवं मौसमी फल उपलब्ध कराये जाने के सम्बंध में आदेश जारी ।





Wednesday, July 17, 2019

SOCIAL MEDIA : UP के टीचर्स क्लास के टाइम सोशल मीडिया पर रहे एक्टिव तो जाएगी नौकरी

SOCIAL MEDIA : UP के टीचर्स क्लास के टाइम सोशल मीडिया पर रहे एक्टिव तो जाएगी नौकरी


उत्तर प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों ने क्लास में पढ़ाने के दौरान सोशल मीडिया का प्रयोग किया तो उनपर कड़ी कार्रवाई होगी.



'सरकारी टीचर की नौकरी अब आसान नहीं रही.' आपने भी किसी न किसी टीचर के मुंह से ये बात सुनी ही होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि दिन पर दिन शिक्षा नीति में बदलाव होते आ रहे हैं. शिक्षकों से हर छोटी से छोटी एक्टीविटी की रिपोर्ट मांगी जा रही है. अब फिर से एक और नया आदेश जारी किया गया है. यूपी की बेसिक शिक्षा एवं बाल विकास व पुष्टाहार राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने अफसरों व शिक्षकों के लिए कहा है कि अगर उत्तर प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों ने क्लास में पढ़ाने के दौरान सोशल मीडिया का प्रयोग किया तो उनपर कड़ी कार्रवाई होगी.

पढ़ाने से जुड़ा जो भी काम का एक्टीविटी वे कराएंगे उसकी रिपोर्ट शासन के व्हाट्सएप नंबर पर रोज भेजनी होगी. राज्यमंत्री अनुपमा ने यह चेतावनी जिला पंचायत सभागार में 'स्कूल चलो अभियान' का शुभारंभ करते हुए दी. उन्होंने कहा परिषदीय स्कूलों में ऐसा माहौल बनाने की पहल करें जिसमें अभिभावक खुद बच्चों दाखिला कराएं.

जिला पंचायत सभागार में परिषदीय स्कूलों के शिक्षक व बच्चों को जूते, मोजे, स्कूल बैग व ड्रेस दी गई. पुष्टाहार विभाग की तरफ से बच्चों को अन्नप्रासन व गर्भवती महिलाओं की गोद भराई भी कराई गई. राज्यमंत्री ने कहा परिषदीय स्कूलों में 2019 में एक करोड़ 80 लाख बच्चों के दाखिले का लक्ष्य है.

ANUDESHAK, MANDEYA : अनुदेशकों को नहीं मिलेगा पूरा मानदेय, जबकि ₹17000 मानदेय देने का है आदेश

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INCOME TAX : पुराने आयकर विवादों में माफी देगी सरकार, आठ लाख करोड़ रुपये के विवादों को तेजी से निपटाने का लक्ष्य

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BASIC SHIKSHA : 67574 करोड़ खर्च कर हिसाब देना भूले अफसर,बेसिक शिक्षा विभाग समेत इन विभागों के सबसे ज्यादा लंबित है उपभोग प्रमाणपत्र

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RECRUITMENT, SHIKDHAK BHARTI : शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सुप्रीमकोर्ट के फैसले से 68500 शिक्षक भर्ती एवं आगामी 69000 शिक्षक भर्ती भी होगी प्रभावित

RECRUITMENT, SHIKDHAK BHARTI : शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सुप्रीमकोर्ट के फैसले से 68500 शिक्षक भर्ती एवं आगामी 69000 शिक्षक भर्ती भी होगी प्रभावित



BOOKS, ONLINE SYSTEM : बेसिक शिक्षा की किताबें भी पढ़ सकेंगे ऑनलाइन

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ANUDESHAK, MANDEYA : अनुदेशकों को पहले अधिक मानदेय दिया, अब वसूला, कटौती के बाद तीन महीने का 6300 रूपये मिलेगा मानदेय

ANUDESHAK, MANDEYA : अनुदेशकों को पहले अधिक मानदेय दिया, अब वसूला, कटौती के बाद तीन महीने का 6300 रूपये मिलेगा मानदेय



SUPREME COURT : एक लाख सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीईटी के बाद बीएड-बीटीसी डिग्री लेने वालों को ठहराया था अयोग्य

SUPREME COURT : एक लाख सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीईटी के बाद बीएड-बीटीसी डिग्री लेने वालों को ठहराया था अयोग्य


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब एक लाख सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि टीईटी पास करने के बाद बीएड या बीटीसी की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थी भी सहायक शिक्षक बनने के पात्र हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 मई 2018 के फैसले में टीईटी रिजल्ट के बाद बीएड या बीटीसी की डिग्री पाने वालों को नौकरी के लिए अयोग्य करार दिया गया था। हाई कोर्ट के फैसले से प्रभावित शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चयनित शिक्षकों का कहना था कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) के लिए 4 अक्टूबर 2011 और 15 मई 2013 को जारी शासनादेश में इस बात का जिक्र नहीं था कि जिनके प्रशिक्षण (बीएड या बीटीसी) का परिणाम टीईटी के बाद आएगा उन्हें टीईटी का प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बीएड या बीटीसी में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थी भी टीईटी में शामिल हो सकते हैं। अगर वह टीईटी में सफल रहते हैं तो उनके प्रमाणपत्र भी वैध होंगे। लेकिन उन्हें नौकरी तभी मिलेगी, जब वो बीएड या बीटीसी की परीक्षा पास कर लेंगे। भर्ती के समय अभ्यर्थी के पास स्नातक, बीएड या बीटीसी और टीईटी की डिग्री होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियुक्ति हर राज्य के नियम के हिसाब से होती है। नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) के 23 अगस्त, 2010 को जारी दिशानिर्देशों में कहा गया था कि टीईटी में बीएड और बीटीसी में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थी भी शामिल होने के पात्र हैं।

वरिष्ठ वकील आर वेंकटरमणी, राकेश खन्ना ने पीड़ित सहायक शिक्षकों की तरफ से अदालत में दलील रखी। जबकि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से वकील राकेश मिश्र अदालत में मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के करीब एक लाख सहायक शिक्षकों की नौकरी बच गई है। इस आदेश का असर वर्तमान में चल रही 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती पर भी पड़ने वाला था।

सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का आदेश 50 हजार सहायक शिक्षकों को राहत, बीएड-बीटीसी से पहले टीईटी पास करने वालों का प्रमाण पत्र भी मान्य


TEACHER, SUPREME COURT : टीईटी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शिक्षकों के साथ सरकार को राहत

TEACHER, SUPREME COURT : टीईटी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शिक्षकों के साथ सरकार को राहत



UPTET, SUPREME COURT : यूपीटीईटी के मोर्चे पर भी मिली राहत

UPTET : यूपीटीईटी के मोर्चे पर भी मिली राहत

लखनऊ : शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद कक्षा एक से आठ तक की भर्ती के लिए टीईटी अनिवार्य है। इस क्रम में राज्य सरकार उप्र शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करती है। यूपीटीईटी उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी को सरकार इस आशय का प्रमाणपत्र देती है कि यह प्रमाणपत्र हासिल करने वाला ही शिक्षक नियुक्त हो सकता है। इस मामले में टीईटी को लेकर सवालिया निशान खड़े किए गए थे। यदि सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी होती तो बीटीसी/बीएड करते हुए यूपीटीईटी उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र भी अवैध हो जाते।



Tuesday, July 16, 2019

CIRCULAR, GRADED LEARNING : शैक्षिक सत्र 2019-20 में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में ग्रेडेड लर्निंग कार्यक्रम के संचालन सम्बन्धी दिशा निर्देश जारी

CIRCULAR, GRADED LEARNING : शैक्षिक सत्र 2019-20 में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में ग्रेडेड लर्निंग कार्यक्रम के संचालन सम्बन्धी दिशा निर्देश जारी





POWER, SURVEY : देश के 37% स्कूलों में बिजली नहीं, जबकि यूपी में 45% विद्यालयों में नहीं है बिजली की उपलब्धता। 

POWER, SURVEY : देश के 37% स्कूलों में बिजली नहीं, जबकि यूपी में 45% विद्यालयों में नहीं है बिजली की उपलब्धता। 

Friday, July 12, 2019

NPS, 7th PAY COMMISSION, INCOMETAX : एनपीएस में 60 प्रतिशत धन निकासी पर नहीं लगेगा TAX

NPS, 7th PAY COMMISSION : एनपीएस में 60 प्रतिशत धन निकासी पर नहीं लगेगा TAX

नई दिल्ली : नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश करने वालों को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ी खुशखबरी दी है. बजट में 18 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कई बड़ी राहत दी गई है. पहला एनपीएस से 60 फीसदी धन निकासी पर आयकर (इनकम टैक्स) नहीं लगेगा. यह योजना वित्तीय वर्ष 2020-21 से लागू होगी.


इसमें से कुछ बदलाव सातवें वेतन आयोग(7th Pay Commission) की सिफारिशों पर आधारित हैं. एनपीएस के प्रथम श्रेणी के खाते रिटायरमेंट अकाउंट हैं. जबकि द्वितीय श्रेणी के खाते वैकल्पिक हैं और इसमें धन निकासी आसानी से किया जा सकता है. 7वें वेतन आयोग वेतन प्रणाली के अनुसार अपना वेतन निकालने वाले सरकारी कर्मचारियों को लाभ मिलेगा.

केंद्र सरकार के अलावा कई राज्यों ने नई पेंशन योजना को अपनाया है. बजट में नए प्रस्ताव से कर्मचारियों को और लाभ मिलने वाला है. प्रस्ताव के अनुसार रिटायरमेंट के समय केंद्रीय कर्मचारियों को एनपीएस खाते से 60 प्रतिशत राशि की निकासी पर कोई कर नहीं देना होगा. जबकि, मौजूदा व्यवस्था में केवल 40 प्रतिशत राशि ही कर-मुक्त है.

प्रस्तावों के तहत पहली श्रेणी के एनपीएस खाते में कर्मचारियों का अंशदान 10 से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है. वहीं तीन साल में लॉक इन पीरियड के साथ द्वितीय श्रेणी के खाते में भी कर लाभ बढ़ाया जाएगा. धन की निकासी भी आसान होगी.

वहीं, द्वितीय श्रेणी के खातों में भी निवेश करने वालों को भी धारा 80सीसीडी(2) के तहत 1.50 लाख तक छूट का लाभ मिलेगा. लेकिन शर्त होगी वो कम से कम तीन साल पैसा न निकाला जाए.

एनपीएस में दो प्रकार के खाते हैं. टियर 1(प्रथम श्रेणी) और टियर 2 (द्वितीय श्रेणी). एनपीएस टियर -1 खाता एक सेवानिवृत्ति खाता है, जो अनिवार्य है, जबकि टियर -2 खाता एक वैकल्पिक खाता है जिसमें निकासी की सुविधा है.

MAN KI BAAT : शिक्षा नीति का विमर्श और कुछ बुनियादी सुधार

शिक्षा नीति का विमर्श और कुछ बुनियादी सुधार


जब मैं छोटा था, तब मेरे चचेरे भाई ने मुझसे एक सवाल पूछा- ‘तुम खाली पेट कितनी रोटियां खा सकते हो?’ मैंने बडे़ उत्साह से कहा, ‘सात’। भाई ने जोरदार ठहाका लगाया और कहा, ‘कोई भी आदमी खाली पेट एक रोटी से ज्यादा नहीं खा सकता, क्योंकि पहली रोटी खाने के बाद पेट खाली कहां रहता है?’ सरकारी स्कूलों के शौचालयों के बारे में मैं इससे मिलता-जुलता सवाल पूछ सकता हूं- किसी सरकारी स्कूल में कितने बच्चे शौचालय का इस्तेमाल कर सकते हैं? इसका भी जवाब वही होगा- अधिक से अधिक एक। क्योंकि इसके बाद वह शौचालय इस्तेमाल लायक बचेगा ही नहीं। क्योंकि ऐसे ज्यादातर शौचालयों में पानी होता ही नहीं। कई बार तो मैंने देखा है कि जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में प्रिंसिपल के कार्यालय का शौचालय भी इस्तेमाल योग्य नहीं होता, क्योंकि यूरीनल की पाइप टूटी होती है और शौचालय में पानी भी नहीं होता। 


बात सिर्फ शौचालय की नहीं है, हमारे ज्यादातर सरकारी प्राइमरी स्कूलों में या तो उन सुविधाओं का अभाव है, जिन्हें हम बुनियादी सुविधाएं कहते हैं या फिर वे सुविधाएं ऐसी स्थिति में हैं कि उनका बहुत ज्यादा और नियमित इस्तेमाल नहीं हो सकता। किसी भी ढांचे को दुरुस्त रखने के लिए हमें बजट की, उसके रखरखाव पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था की, और उसके इस्तेमाल के सलीके की जरूरत होती है। राज्यों के अपने अनगिनत दौरों में मैंने कितने ही ऐसे स्कूल, डाइट व शिक्षा कार्यालय देखे हैं, जिनमें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।  

अनगिनत स्कूलों में बच्चों को ऐसी कक्षाओं में बैठने को मजबूर किया जाता है, जो असुरक्षित, गंदे और सीखने के लिहाज से कतई उचित नहीं हैं। दीवारों के प्लास्टर झड़ रहे हैं, सालों से उनकी रंगाई नहीं हुई है, बैठने के लिए बेंच नहीं हैं, यहां तक कि जिस फर्श पर बच्चों को बैठने को कहा जाता है, वह भी ऊबड़-खाबड़ और असुविधाजनक होती है। तालीम तक पहुंच की गुणवत्ता और पर्याप्तता में भारी सुधार की जरूरत है। हमें ऐसी कक्षाएं मुहैया करानी होंगी, जो सुरक्षित, साफ-सुथरे, खुशनुमा, हवादार हों और जिनमें पानी न टपकता हो। साथ ही, हर दर्जे के लिए अलग कक्षा होनी चाहिए। हमें कक्षाओं को उपयुक्त बेंच, ब्लैकबोर्ड, रंगी हुई दीवारें और छत मुहैया करानी होगी। शिक्षा का अधिकार कानून ने स्कूलों के लिए कुछ बुनियादी सुविधाओं को परिभाषित किया है। इनको भली-भांति उपलब्ध कराना होगा। लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय होने चाहिए, जिनमें पानी हमेशा उपलब्ध हो। 

मध्याह्न भोजन कार्यक्रम पहले से ही लागू था, मगर वर्ष 2006 में उसे अनिवार्य बनाया गया। उसका मुख्य उद्देश्य था योजना के दायरे में आने वाले हरेक बच्चे को पका हुआ गरम खाना मुहैया कराना, जिससे 450 कैलोरी ऊर्जा, 12 ग्राम प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व बच्चे को मिल सके। इस कार्यक्रम के लिए आवंटित बजट समेत इसके क्रियान्वयन की प्रभावोत्पादकता का गंभीर मूल्यांकन करना हमारे लिए जरूरी है। हजारों प्रधानाचार्य बच्चों को उपयुक्त खाना मुहैया कराने के लिए जरूरी सब्जियां, मसाले और दूसरी सामग्री जुटाने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करते हैं। इनका भुगतान महीनों तक अटका रहता है। योजना के लिए जो बजट  होता है, वह इसके उद्देश्य के लिहाज से अपर्याप्त है। 

अनेक शोधों से यह बात साबित हुई है कि स्कूलों की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में स्कूल नेतृत्व की अहम भूमिका होती है। इसके बावजूद बहुत सारे स्कूलों में या तो प्रधानाचार्य होते ही नहीं या उनकी जगह तदर्थ प्रभारी होते हैं। यही बात अनेक जिलों के जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों यानी कि डाइट पर लागू होती है। बिना प्रधानाचार्य के डाइट दिशाहीन हो जाते हैं।  

हम शिक्षा नीति पर कितने भी विमर्श कर लें, इन बुनियादी मसलों को हल किए बगैर और स्कूलों को अपने उद्देश्य में कामयाब होने लायक बनाए बगैर  गुणवत्तापूर्ण तालीम की उम्मीद नहीं पाल सकते। जहां एक तरफ देश के 25 फीसदी स्कूली बच्चे बेहतर सुविधाओं से लैस हैं, यहां तक कि एयर-कंडीशन स्कूलों में पढ़ते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ 75 फीसदी बच्चे स्कूलों की बदइंतजामी का शिकार बनने को मजबूर हैं। इसी स्थिति को बदलने की जरूरत है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Monday, July 08, 2019

MDM, CONVERSATION CAST, CIRCULAR : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों हेतु वर्तमान में प्रचलित परिवर्तन लागत की वृद्धि के सम्बंध में

MDM, CONVERSATION CAST, CIRCULAR : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों हेतु वर्तमान में प्रचलित परिवर्तन लागत की वृद्धि के सम्बंध में



Thursday, July 04, 2019

ALLAHABAD HIGHCOURT, ANUDESHAK, MANDEYA : अनुदेशकों को देना होगा बढ़ा मानदेय

अनुदेशकों को देना होगा बढ़ा मानदेय



विधि संवाददाता: लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले याची शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिये जाने के आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कार्यकारी कमेटी व निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान द्वारा जारी 9800 रुपये मानदेय के आदेशों को रद कर दिया है।

कोर्ट ने याचियों को मार्च 2017 से 17 हजार का मानदेय देने व बढे हुए मानदेय पर नौ फीसद सलाना ब्याज का भी भुगतान करने का आदेश दिया है। यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चैहान की बेंच ने अनुराग व एक अन्य तथा अमित वर्मा व अन्य की ओर से दाखिल दो अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया। याचियों का कहना था कि वे अनुदेशक शारीरिक शिक्षा के पद पर नियुक्त हुए थे। याचियों ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कार्यकारी कमेटी के 21 दिसम्बर 2017 व स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सर्व शिक्षा अभियान के दो जनवरी 2018 के आदेशों को चुनौती दी थी। याचिकाओं में कहा गया कि उक्त आदेशों के माध्यम से प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड के 27 मार्च 2017 के आदेश पर पुनर्विचार कर, याचियों का मानदेय 9800 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था। जबकि प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड ने मानदेय 17 हजार रुपये किये जाने का आदेश दिया था।

Tuesday, July 02, 2019

CLERK, GOVERNMENT ORDER, TRANSFER : प्रदेश भर के बीएसए / डीआईओएस एवं अन्य कार्यालयों में नियुक्त बाबुओं का स्थानांतरण आदेश जारी क्लिक कर देखें।

CLERK, GOVERNMENT ORDER, TRANSFER : प्रदेश भर के बीएसए / डीआईओएस एवं अन्य कार्यालयों में नियुक्त बाबुओं का स्थानांतरण आदेश जारी क्लिक कर देखें।






















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