Sunday, September 30, 2018

DEARNESS ALLOWANCE : यूपी में 16 लाख राज्यकर्मियों को बोनस के साथ डीए, जानिए किस माह होगा भुगतान

DEARNESS ALLOWANCE : यूपी में 16 लाख राज्यकर्मियों को बोनस के साथ डीए, जानिए किस माह होगा भुगतान


प्रमुख संवाददाता, लखनऊ। यूपी के करीब 16 लाख राज्यकर्मियों को बढ़े दर से महंगाई भत्ता (डीए) का भुगतान अब बोनस के साथ ही हो सकता है। सितंबर माह का वेतन जो अक्टूबर में दिया जाना है उसके लिए पे-बिल तैयार हो गया है, जिसमें डीए का जिक्र नहीं है। अब सरकार नवंबर महीने में दिए जाने वाले वेतन के साथ बोनस और डीए दोनों ही दे सकती है।

डीए से संबंधित फाइल अभी भी वित्त विभाग के पास है। बताया जाता है कि अब यह फाइल दस अक्टूबर के बाद ही मुख्यमंत्री के पास भेजी जाएगी। इस फाइल के साथ बोनस की फाइल भी भेजी जा सकती है। डीए और बोनस दोनों दीपावली से पहले देने पर सरकार विचार कर रही है। सरकार यदि दो फीसदी डीए बढ़ाती है तो खजाने पर दो हजार करोड़ सालाना का भार पड़ेगा। बोनस देने पर भी करीब 700 करोड़ रुपये खर्च होगा। 

GOVERNMENT ORDER, CELEBRATION, BIRTHDAY : राष्टपिता महात्मा गांधी के जन्मदिवस के अवसर पर 02 अक्टूबर 2018 को "गांधी जयन्ती समारोह" मनाये जाने सम्बन्धी आदेश जारी ।

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GOVERNMENT ORDER, IMPORTANT : सेवा सम्बन्धी विधिक वादों/अवमानना वादों के सम्बन्ध में।

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NIC, UPTET : खुला रहा एनआईसी, टीईटी में हालात सुधरने की उम्मीद, टीईटी-18 सर्वर खराब होने पर अभ्यार्थियों ने किया हंगामा, हालात नहीं सुधरे तो बढ़ सकती है अंतिम तिथि

NIC, UPTET : खुला रहा एनआईसी, टीईटी में हालात सुधरने की उम्मीद, टीईटी-18 सर्वर खराब होने पर अभ्यार्थियों ने किया हंगामा, हालात नहीं सुधरे तो बढ़ सकती है अंतिम तिथि

टीईटी के ऑनलाइन आवेदन की समस्या के कारण एनआईसी कार्यालय शनिवार को अवकाश के दिन भी खुला रहा। बेसिक शिक्षा के विशेष सचिव और निदेशक ने दिन में पहुंचकर स्थिति के बारे में जानकारी ली। रविवार से हालात सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। शनिवार रात 12 बजे के बाद सर्वर कुछ देर रोककर तकनीकी कमियां दूर करने की कोशिश की गई।.

हालात नहीं सुधरे तो बढ़ सकती है अंतिम तिथि : टीईटी के ऑनलाइन आवेदन की स्थिति रविवार को नहीं सुधरती तो पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ सकती है। टीईटी-18 के लिए 18 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू हुए थे। पंजीकरण की अंतिम तिथि चार अक्टूबर शाम छह बजे तक है। आवेदन शुल्क पांच अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। पूर्ण रूप से भरे हुए ऑनलाइन आवेदन के प्रिंट लेने की आखिरी तारीख छह अक्टूबर शाम छह बजे तक है।

अंतिम तिथि बढ़ाने को एक अक्टूबर को प्रदर्शन : युवा मंच टीईटी आवेदन के लिए सर्वर दुरस्त कराने व अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग को लेकर एक अक्टूबर को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करेगा।

नैनी। हाईकोर्ट के स्टोनोग्राफर पद के लिए महेवा तिराहा के समीप बनाए गए परीक्षा केंद्र में शनिवार को अभ्यार्थियों ने हंगामा किया। सर्वर डाउन होने के कारण कुछ अभ्यार्थियों की परीक्षा खराब हो गई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें समझा बुझाकर शांत कराया।

SLP, PRIMARY SCHOOL : 'यूपी में कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ रहे' हाईकोर्ट के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर

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SHIKSHAK BHARTI, SCAM : 8 हजार आवेदकों ने मांगी सेकंड कॉपी, व्यापक पैमाने पर हुई गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद अभ्यर्थियों की बढ़ी संख्या

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UPTET, WEBSITE : सर्वर क्रैश होने से टीईटी के दो लाख से अधिक फॉर्म फंसे, परेशान अभ्यर्थी लगा रहे चक्कर, नहीं हो रहा कोई समाधान, समस्या यथावत रही तो बढ़ सकती है आवेदन की तारीख

UPTET, WEBSITE : सर्वर क्रैश होने से टीईटी के दो लाख से अधिक फॉर्म फंसे, परेशान अभ्यर्थी लगा रहे चक्कर, नहीं हो रहा कोई समाधान, समस्या यथावत रही तो बढ़ सकती है आवेदन की तारीख

इलाहाबाद : यूपी-टीईटी 2018 के करीब दो लाख फॉर्म फंस गए हैं। पिछले छह दिनों से वेबसाइट क्रैश होने के कारण कई प्रयासों के बाद भी अभ्यर्थी आवेदन फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। अभ्यर्थियों के खाते से कई-कई बार फीस का रुपया कट चुका है लेकिन फॉर्म सबमिट नहीं हो रहा। इसके साथ ही प्रिंट भी नहीं निकल रहा, जिससे अभ्यर्थी परेशान हैं। इसे लेकर अभ्यर्थी लगातार पीएनपी पहुंच रहे हैं और हंगामा भी कर रहे हैं। हालांकि स्थिति में सुधार नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि अगर अगले दो तीन दिनों तक यही हाल रहा तो पंजीकरण और फॉर्म सबमिट करने की तारीख बढ़ानी पड़ सकती है।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के अनुसार पांच लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने अब तक रजिस्ट्रेशन करवाया है। लेकिन बमुश्किल सवा दो लाख फॉर्म ही अंतिम रूप से जमा हो सके हैं। ऐसे में करीब ढाई लाख अभ्यर्थी ऐसे हैं, जो ऑनलाइन आवेदन पत्र पूरा नहीं कर सके हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की मानें तो स्टेट डेटा सेंटर का सर्वर और एनआईसी की वेबसाइट ओवरलोड होने के कारण क्रैश हो गई है। इसे लेकर लगातार आ रही शिकायतों के बाद बात शासन स्तर तक पहुंची है और बताते हैं कि शनिवार को भी एनआईसी में इस खामी को दुरुस्त करने के लिए काम होता रहा।

SWEATER, UNIFORM, BSA, BUDGET : यूपी के सरकारी स्कूलों में 31 अक्टूबर तक बंटेंगे स्वेटर, बेसिक शिक्षा निदेशक ने बीएसए को जारी किए निर्देश, नहीं आया बजट, कैसे होगी खरीदारी?

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ANGANBADI, PROMOTION : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रमोशन देने की तैयारी

ANGANBADI, PROMOTION : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रमोशन देने की तैयारी

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर प्रमोशन देने जा रही है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की डेटा फीडिंग का काम शुरू हो गया है। इसके बाद इनकी मेरिट लिस्ट बनाई जाएगी। इस समय सुपरवाइजर के 489 पद रिक्त हैं। यह पद प्रमोशन से भरे जाने हैं। इन पदों के लिए करीब 1.42 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अर्हता पूरी करती हैं। ऐसे में एक पद पर प्रमोशन पाने के लिए औसतन 290 दावेदार मैदान में हैं।

सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर प्रमोशन देने के लिए नियम व शर्ते पहले से ही तय हैं। प्रमोशन के लिए न्यूनतम हाईस्कूल पास होना जरूरी है। 10 साल की सेवा पूरी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही इस पद के लिए अर्हता पूरी करेंगी। साथ ही 50 वर्ष से कम उम्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ही इस पद पर प्रमोशन दिया जाएगा।

प्रमोशन के लिए जो नियमावली बनाई गई है उसके अनुसार जिसकी जितनी अधिक सेवा होगी उसे उतने अधिक नंबर दिए जाएंगे।

ALLAHABAD HIGHCOURT, BTC : बीटीसी तृतीय सेमेस्टर रिजल्ट में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट ने माँगा जवाब, याचियों का आरोप मनमानी से 9000 से अधिक को दिखाया फेल, सुनवाई को मिली अगली डेट

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RESERVATION : दिव्यांगों को नौकरियों में चार फीसदी आरक्षण, सरकार ने जारी किया गजट, कुल पांच श्रेणियों में रखे गए निशक्तजन

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PM, EDUCATION : शिक्षा में नई सोच समय की जरूरत, प्रधानमंत्री मोदी ने दिए पांच मंत्र

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UPTET, WEBSITE : यूपीटेट 2018 का सर्वर जाम,अभ्यर्थी अधर में, छठवें दिन भी समस्या ज्यों की त्यों, फार्म भरे लेकिन, आवेदन नहीं हुए

UPTET, WEBSITE : यूपीटेट 2018 का सर्वर जाम,अभ्यर्थी अधर में, छठवें दिन भी समस्या ज्यों की त्यों, फार्म भरे लेकिन, आवेदन नहीं हुए

 इलाहाबाद : उप्र शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी यूपी के लिए ऑनलाइन आवेदन की समस्या ज्यों की त्यों है। लगातार छठवें दिन भी सर्वर दुरुस्त नहीं हो सका है। हजारों अभ्यर्थी और उनके अभिभावक भोर से लेकर रात तक साइबर केंद्रों का चक्कर काटने को मजबूर हैं। वह अभ्यर्थी खासे परेशान हैं, जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन फार्म भरा है और परीक्षा शुल्क का पैसा भी कट गया है लेकिन, शुल्क की न रसीद मिली है और न आवेदन भरा जा सका है। 1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 97 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती इम्तिहान से पहले ही बड़े विवाद में घिर गई है। 17 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू हुआ लेकिन, पिछले छह दिन से सर्वर काम नहीं कर रहा है। प्रदेश के हर जिले में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परेशान हैं। 1पहले सर्वर धीमे कार्य कर रहा था, जिससे घंटों इंतजार के बाद जैसे-तैसे आवेदन हो रहे थे लेकिन, शुक्रवार से ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) न आने की समस्या खड़ी हो गई। असल में अभ्यर्थी को दो बार ओटीपी आती है एक बार बैंक की ओर से शुल्क के लिए व दूसरी बार आवेदन सम्मिट करने के लिए। कहा जा रहा है कि आवेदन न हो पाने की वजह ओवरलोडिंग से सर्वर जाम होना है। टीईटी के लिए आवेदन का चार अक्टूबर तक समय निर्धारित है। अभ्यर्थी आवेदन के चक्कर में पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि उन्हें आगे टीईटी व शिक्षक भर्ती के लिए दो परीक्षाएं देनी हैं।

पहले से दबाव में है एनआइसी

प्रदेश के अधिकांश सरकारी विभागों का कार्य एनआइसी के जरिये ही होता है। वहां स्टाफ व सिस्टम अपग्रेडेशन की समस्या पहले से है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में आवेदन व स्टेट रैंक आदि जानने के लिए अधिक हिट होने से कई बार सर्वर सही से कार्य न करने की समस्या आती रही है। के लिए आवेदन इतनी बड़ी संख्या में होंगे इसका अफसरों को अंदाजा नहीं हुआ। इसीलिए प्रक्रिया धड़ाम हो गई।

UPTET : यूपीटेट 2018 में आवेदन में आ रही दिक्कत को लेकर एक को PNP कार्यालय घेरेंगे अभ्यर्थी

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इलाहाबाद । प्रतियोगी आवेदन न होने से गुस्से में हैं और एक अक्टूबर को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय का घेराव करने का अल्टीमेटम दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले पहचानपत्र के मात्र तीन विकल्प देकर परेशान किया गया, अब सर्वर की समस्या खड़ी हो गई है।

UPTET, ONLINE APPLICATION : यूपीटेट 2018 आज से आवेदन शुरू होने की उम्मीद, शासन ने किये पुख्ता इंतजाम

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इलाहाबाद । परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कहा है कि सिस्टम दुरुस्त करने को बाहर से टीम बुलाई गई है। शनिवार की मध्यरात्रि में सिस्टम बंद करके उसकी क्षमता बढ़ाने की तैयारी है। उम्मीद है कि रविवार सुबह से आवेदन व पंजीकरण की प्रक्रिया पटरी पर लौट आएगी। उन्होंने कहा कि अभी आवेदन की समय सीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है, क्योंकि चार अक्टूबर तक का समय शेष है। उस समय तक आवेदन पूरे नहीं होंगे तब शासन निर्णय लेगा।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कहा है कि सिस्टम दुरुस्त करने को बाहर से टीम बुलाई गई है। शनिवार की मध्यरात्रि में सिस्टम बंद करके उसकी क्षमता बढ़ाने की तैयारी है। उम्मीद है कि रविवार सुबह से आवेदन व पंजीकरण की प्रक्रिया पटरी पर लौट आएगी। उन्होंने कहा कि अभी आवेदन की समय सीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है, क्योंकि चार अक्टूबर तक का समय शेष है। उस समय तक आवेदन पूरे नहीं होंगे तब शासन निर्णय लेगा।

CIRCULAR, SALARY, BUDGET : वित्तीय वर्ष 2018-19 की द्वितीय छमाही के वेतनादि के भुगतान हेतु मदवार जनपदवार आवंटन जारी

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CIRCULAR, CM, HELPLINE, BASIC SHIKSHA NEWS : प्रदेश में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के अंतर्गत जनपदों से सम्बंधित बेसिक शिक्षा विभाग के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के सम्बन्ध में ।

CIRCULAR, CM, HEAPLINE, BASIC SHIKSHA NEWS : प्रदेश में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के अंतर्गत जनपदों से सम्बंधित बेसिक शिक्षा विभाग के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के सम्बन्ध में ।

DEARNESS ALLOWANCE : राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों को बढ़े डीए के नकद भुगतान को नवंबर तक का करना होगा इंतजार

DEARNESS ALLOWANCE : राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों को बढ़े डीए के नकद भुगतान को नवंबर तक का करना होगा इंतजार

लखनऊ : राज्य कर्मचारियों को अब बढ़े हुए महंगाई भत्ते (डीए) के नकद भुगतान के लिए नवंबर तक इंतजार करना होगा। उन्हें दीपावली के मौके पर बढ़े हुए डीए का नकद भुगतान होने की संभावना है। केंद्र सरकार पहली जुलाई से अपने कर्मचारियों का डीए उनके मूल वेतन के सात प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत करने का आदेश जारी कर चुकी है। डीए के मामले में राज्य की केंद्र से समानता है। लिहाजा राज्य कर्मचारी भी केंद्र की तर्ज पर डीए बढ़ाये जाने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों को बढ़े हुए डीए के भुगतान का आदेश जारी कर दिया है। कर्मचारियों को बढ़े डीए का नकद भुगतान सितंबर के वेतन के साथ अक्टूबर के महीने में करने के बारे में वित्त विभाग ने फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कुछ और जानकारियां मांगते हुए यह फाइल वापस कर दी है।

DELED : डीएलएड 2017 वालों ने भी पुनर्मूल्यांकन को घेरा कार्यालय, हिंदी, सामाजिक अध्ययन, विज्ञान व बाल विकास में बहुत कम अंक

DELED : डीएलएड 2017 वालों ने भी पुनर्मूल्यांकन को घेरा कार्यालय, हिंदी, सामाजिक अध्ययन, विज्ञान व बाल विकास में बहुत कम अंक

इलाहाबाद : बीटीसी 2015 तृतीय सेमेस्टर के रिजल्ट के बाद अब के परिणाम से अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं है। हंिदूी, सामाजिक अध्ययन, विज्ञान व बाल विकास विषयों में तमाम अभ्यर्थियों को इकाई में अंक मिले हैं। प्रशिक्षुओं का कहना है कि यह गड़बड़ी मूल्यांकन सही से न होने की वजह से हुई है इसलिए कॉपियों का नए सिरे से मूल्यांकन कराया जाए।

डीएलएड संयुक्त मोर्चा संघ ने शनिवार को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय का घेराव किया। प्रदेश अध्यक्ष राहुल यादव का कहना है कि 25 सितंबर को जारी परिणाम में 47199 प्रशिक्षु गलत मूल्यांकन के कारण अनुत्तीर्ण हो गए हैं। जिस तरह से बीटीसी 2015 तृतीय सेमेस्टर में कुछ अभ्यर्थियों को पूर्णाक से अधिक अंक मिल गए थे, वैसे ही डीएलएड प्रथम सेमेस्टर में हंिदूी व सामाजिक अध्ययन जैसे सरल विषयों में दो-दो अंक मिले हैं। प्रशिक्षुओं का दावा है कि यदि सही से मूल्यांकन हो जाए तो वे अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो जाएंगे। कंप्यूटर विषय की कॉपी मनमाने तरीके से जांची गई हैं। हर अभ्यर्थी को बहुत कम अंक मिले हैं।

प्रशिक्षुओं ने सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि दोबारा मूल्यांकन में गड़बड़ी मिलने पर दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई की जाए। प्रशिक्षुओं ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन करने को बाध्य होंगे। दुर्गेश कुमार, धनंजय सोनकर, पूनम, स्वाती, अंजना आदि थे।

Saturday, September 29, 2018

SALARY, CIRCULAR : वरिष्ठ अध्यापकों का वेतन उनसे कनिष्ठ अध्यापकों के वेतन के बराबर करने के सम्बन्ध में।

SALARY, CIRCULAR : वरिष्ठ अध्यापकों का वेतन उनसे कनिष्ठ अध्यापकों के वेतन के बराबर करने के सम्बन्ध में।

MAN KI BAAT : संकट में सरकारी स्कूलों का अस्तित्व है क्योंकि एक ऐसे दौर को जिसे ज्ञान की शक्ति का युग कहा जा रहा है तब भारत में सरकारी स्कूल बन्द कराने का अप्रत्याशित चलन प्रारम्भ हो रहा मेरा मानना है कि क्या किसी भी सरकार ने कहीं भी और कभी भी बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने के लिए नि:शुल्क वाहन-व्यवस्था प्रबंधन सफलतापूर्वक किया है? क्या यह कर पाना संभव है? यदि नहीं, तो क्या एक छोटी उम्र के बच्चे से.......

MAN KI BAAT : संकट में सरकारी स्कूलों का अस्तित्व है क्योंकि एक ऐसे दौर को जिसे ज्ञान की शक्ति का युग कहा जा रहा है तब भारत में सरकारी स्कूल बन्द कराने का अप्रत्याशित चलन प्रारम्भ हो रहा मेरा मानना है कि क्या किसी भी सरकार ने कहीं भी और कभी भी बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने के लिए नि:शुल्क वाहन-व्यवस्था प्रबंधन सफलतापूर्वक किया है? क्या यह कर पाना संभव है? यदि नहीं, तो क्या एक छोटी उम्र के बच्चे से.......


देश के कई राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे में एक बात पता चली कि लोगों में सरकारी स्कूलों के बंद होने की शंका बढ़ रही है। वे सवाल कर रहे हैं कि क्या सरकार अपने सभी स्कूल बंद करने जा रही है? यह प्रश्न उठना अस्वाभाविक भी नहीं है, क्योंकि तमाम स्कूलों का एक-दूसरे में विलय किया जा रहा है। इस पर दलील यह है कि ये स्कूल व्यावहारिक नहीं रह गए हैं और यहां संसाधन झोंकना समझदारी नहीं है। एक ऐसे दौर को जिसे ज्ञान की शक्ति का युग कहा जा रहा है तब भारत में सरकारी स्कूल बंद कराने का अप्रत्याशित चलन आरंभ हो रहा है। सरकार दूरदराज के इलाकों को स्कूलों से दूर कर रही है।

आखिर इस पर क्यों नहीं ध्यान दिया गया कि साल दर साल सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या क्यों घटती गई और आज हजारों की तादाद में स्कूलों को बंद करने या उनके विलय की मजबूरी क्यों सामने आई है? जो स्थिति बनी है उसे समग्र रूप से समझने के लिए एक बेहद प्रभावकारी नवाचार को याद करना जरूरी है। राजस्थान के तिलोनिया में 1984-86 में सोशल वर्क एंड रिसर्च सेंटर नामक संस्था ने तीन प्रायोगिक स्कूल चलाए। इसमें उपलब्ध स्थानीय शिक्षित व्यक्तियों को अध्यापन के लिए नियुक्त किया गया। उन्हें शिक्षा कर्मी नाम दिया गया और लगातार सेवाकालीन प्रशिक्षण दिया गया। पाठ्यक्रम और शिक्षण विधा को स्थानीयता से जोड़ा गया।

चूंकि पाठ्यक्रम में स्थानीय समस्याओं की जानकारी तथा समाधान भी शामिल थे, लिहाजा सभी लोगों और परिवारों ने इस ‘स्कूल’ में रुचि ली और यथासंभव सहयोग दिया। परिवर्तन के लिए स्थानीयता का ज्ञान और समझ आवश्यक माना गया। स्थानीय व्यक्ति ही समाज से पूरी समझ के साथ जुड़ सकता है। कालांतर में आंगन पाठशालाएं सफलतापूर्वक चलाई गईं और स्कूल छोड़ चुके बच्चों के लिए सुविधानुकूल समय पर ‘प्रहर पाठशालाएं’ भी संचालित हुईं। यह पूरी कवायद इसलिए की गई, क्योंकि उस क्षेत्र में सरकारी स्कूल लगभग निष्क्रिय हो गए थे। विकल्प की तलाश में यह प्रयोग अत्यंत सफल रहा। चूंकि उन दिनों पूरी दुनिया में ‘कठिन, पहाड़, जनजातीय तथा दूरगामी क्षेत्रों’ में शिक्षा को पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास हो रहे थे तो इस नवाचार की ओर सभी का ध्यान गया। भारत में भी अनेक राज्यों ने इसका अध्ययन किया और अपने यहां इसे लागू करना प्रारंभ किया।

इधर कई राज्यों ने शिक्षा कर्मी शब्द अपना लिया है, मगर उन्होंने मानय में कटौती कर दी है। जिसने भी सहज ढंग से इसका अध्ययन किया उसने पाया कि जब तक बेहतर व्यवस्था न हो सके तब तक इससे ही काम चलाया जाए। यह प्रयोग उन स्थानों के लिए नहीं था जहां प्रशिक्षित अध्यापक उपलब्ध थे। स्कूल उनकी नियुक्ति के बाद सुचारू रूप से चल रहे थे या चल सकते थे, मगर नौकरशाही ने इसे एक बड़ा अवसर समझा। उन्होंने थोड़े से मानय पर नियुक्ति से सरकारी खर्च को बचाने के एवज में इसका श्रेय लेना शुरू कर दिया। स्वतंत्र भारत में सरकारी अधिकारियों ने अध्यापकों को ‘अपवाद छोड़कर’ कभी अंतर्मन से सम्मान नहीं दिया। उन्होंने सदैव यही माना कि बच्चों को पढ़ाना कोई महत्वपूर्ण, कुशलता वाला या ज्ञान-आधारित कार्य नहीं है। इसे कोई भी कर सकता है। जिस श में बेरोजगारी लगातार बढ़ती ही जा रही हो वहां सरकार को थोड़े से थोड़े मानय पर भी लोग तो मिल ही जाएंगे, फिर नियमित अध्यापक नियुक्त करने की क्या ही आवश्यकता है? जो नवाचार विशेष परिस्थितियों के लिए अल्पकालीन प्रावधान के रूप में संकल्पित और प्रमाणित किया गया था, उसे भारत के लगभग हर राज्य में लागू कर दिया गया। कुछ राज्यों ने तो नियमित अध्यापकों के सेवानिवृत्त होने पर भी केवल थोड़े से मानय पर शिक्षक नियुक्त करने शुरू कर दिए।

अध्यापकों को गैर सरकारी कामों में लगाने में राज्य सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्शों तक की लगातार अनखी की। यह आज भी जारी है। स्कूलों की कार्यसंस्कृति पर इसका प्रभाव पड़ा है। अध्यापकों की अन्यमनस्कता भी अपने कार्य के प्रति बढ़ती गई। जहां नियमित नियुक्तियों के प्रयास हुए भी, वे परीक्षा के दौरान की अनियमितताओं के शिकार होते रहे। इससे उनका भविष्य अधर में लटके रहना एक परिपाटी सी बन गई।

आज स्थिति यह है कि सरकारी स्कूलों में अध्यापकों के लगभग दस लाख पद रिक्त हैं। यह संख्या इससे भी अधिक होगी, क्योंकि राज्य सरकारें पैरा-टीचर्स, जिनकी संख्या भी कई लाख है, भरे हुए पदों में शामिल कर लेती हैं। देश में एक लाख से अधिक ऐसे स्कूल हैं जो महज एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। केंद्र सरकार यहां एक अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति के लिए तीन दशकों से राज्यों को अनुदान रही है। 2016 में संसद को सूचित किया गया कि झारखंड, बिहार और उत्तर प्रश में कक्षा आठ तक के स्कूलों में अध्यापकों के क्रमश: 38.39 प्रतिशत, 34.37 प्रतिशत और 22.99 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसका परिणाम अब सामने आ रहा है। पुराने और प्रतिष्ठित सरकारी स्कूल भी अब अपनी आभा और स्वीकार्यता खो चुके हैं।

इसका मुख्य कारण यह है कि सरकारों ने शिक्षा की बढती मांग से चिंतित होकर अपने हाथ खींच लिए और निजी निवेश को सुविधाएं और प्रोत्साहन ना शुरू किया। समाज में जिन लोगों के पास संसाधन बढ़ते गए उन्होंने भी धीरे-धीरे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया। इस समय सरकारी स्कूलों में समाज के उन वर्गो के बच्चे ही जा रहे हैं जिन्हें शिक्षा की सबसे अधिक जरूरत है। उनकी प्रगति के लिए शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है। यदि उनके लिए ही स्कूल की सुविधा छिन जाती है तो इससे निश्चित ही उनका विकास प्रभावित होगा।

एक अनुमान के अनुसार देश में करीब छह करोड़ बच्चे स्कूलों में नामांकित नहीं हैं और बीस करोड़ कक्षा पांच से पहले ही स्कूल छोड़ ते हैं। यानी करीब 26 करोड़ अशिक्षित युवाओं को श अंधकारमय भविष्य के लिए ‘अकेला’ छोड़ रहा है? स्कूलों के विलय से क्या इस संख्या के और बढ़ने की आशंका नहीं? और यदि है तो उसका समाधान क्या है? कोई भी इन सरकारी वायदों पर विश्वास नहीं करेगा कि स्कूल विलय के बाद बच्चों के आने-जाने की समस्या का समाधान वाहन भत्ता कर किया जा सकता है!

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों, कोरापुट, झाबुआ, बस्तर में कहां वाहन मिलेगा और कब और कितना भत्ता हासिल होगा? क्या किसी भी सरकार ने कहीं भी और कभी भी बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने के लिए नि:शुल्क वाहन-व्यवस्था प्रबंधन सफलतापूर्वक किया है? क्या यह कर पाना संभव है? यदि नहीं, तो क्या एक छोटी उम्र के बच्चे से उसके स्कूल को दूर कर ना उचित होगा? लगभग दो दशक पहले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने एक संकल्पना श के सामने रखी थी। इसे ‘गांवों में शहर सरीखी सुविधाएं पहुंचाने’ के लक्ष्य के तौर पर जाना गया। इसमें अच्छी सड़कों से लेकर बिजली और स्कूल आदि सुविधाएं गांवों की हरी तक पहुंचाने की संकल्पना थी। यदि इस देश के कुछ हिस्सों में भी लागू कर दिया गया होता तो शायद लोग आज स्कूल विलय पर भी भरोसा कर लेते।

- जगमोहन सिंह राजपूत

(लेखक एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक हैं)

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