logo

Basic Siksha News.com
बेसिक शिक्षा न्यूज़ डॉट कॉम

एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

असाध्य रोगों में कर्मियों को मुफ्त इलाज : चिकित्सा परिचर्या नियमावली-2014 (प्रथम संशोधन) कर कर्मचारियों के नि:शुल्क इलाज

असाध्य रोगों में कर्मियों को मुफ्त इलाज : चिकित्सा परिचर्या नियमावली-2014 (प्रथम संशोधन) कर कर्मचारियों के नि:शुल्क इलाज

जासं, इलाहाबाद : शासन ने चिकित्सा परिचर्या नियमावली में संशोधन करते हुए चार असाध्य बीमारियों में कर्मचारियों के निश्शुल्क इलाज का रास्ता साफ कर दिया है लेकिन श्रेणी तय कर दिए जाने से कर्मचारियों में आक्रोश भी है।

प्रदेश सरकार ने असाध्य रोगों के निश्शुल्क उपचार के लिए चिकित्सा परिचर्या नियमावली-2013 में संशोधन कर दिया है। अब इसे असाध्य रोगों के निश्शुल्क उपचार के लिए (प्रथम संशोधन) नियमावली-2014 कहा जाएगा। इसमें चार असाध्य रोगों कैंसर, लीवर, किडनी और हृदय रोग से पीड़ित कर्मचारियों के निश्शुल्क इलाज का प्रावधान किया गया है। लेकिन यह लाभ उन्हीं कर्मियों को मिलेगा जो बीपीएल कार्डधारक हैं, जिनके पास तीन एकड़ खेत है अथवा वार्षिक आमदनी 35 हजार रुपये है। यानी कि हर महीने तीन हजार रुपये से कम भुगतान पाने वाले कर्मचारियों को मुफ्त इलाज संभव होगा। यह सुविधा केवल सूबे के राजकीय मेडिकल कालेजों, चिकित्सीय संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों में मिलेगी।
------------
रोग की श्रेणी तय करेगी समिति

प्रावधान के तहत रोगों की जांच के लिए नोडल समिति बनेगी। मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्य, संस्थानों के निदेशक, चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा चिकित्सा विश्वविद्यालय और कालेजों में नोडल समितियों का गठन किया जाएगा। इसके सदस्यों में मेडिकल कालेज, संस्थान, चिकित्सा विश्वविद्यालय के सुपरिटेंडेंट, नामित नोडल अधिकारी, उपचार करने वाले संबंधित चिकित्सक और विशेषज्ञ व संबंधित नर्स शामिल होंगी। नोडल समिति असाध्य श्रेणी का निर्धारण रोगी का इलाज कर रहे चिकित्सक की संस्तुति के आधार पर करेगी।
----------
समायोजन एक वित्तीय वर्ष में
उपचार की व्यवस्था निश्शुल्क है। इसलिए संस्थाओं का दायित्व होगा कि रोगी के उपचार का खर्च अथवा उसकी प्रतिपूर्ति शासन द्वारा आवंटित बजट सीमा तक करें। किसी एक वित्तीय वर्ष की लंबित धनराशि अगले वित्तीय वर्ष में समायोजित नहीं होगी।
--------------
कर्मचारियों को बीपीएल श्रेणी में रखना उचित नहीं है। सचिवालय के कर्मचारियों पर यह प्रतिबंध नहीं है। इसलिए अन्य कार्यालयों के कर्मियों से भी यह प्रतिबंध हटना चाहिए।
-विनोद पांडेय, महामंत्री उप्र. राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद।

Post a Comment

0 Comments