Monday, July 31, 2017

GOVERNMENT ORDER, DELED : डी0एल0एड0 प्रशिक्षण 2016—17 शून्य घोषित होने के सम्बन्ध में शासनादेश ।

GOVERNMENT ORDER, DELED : डी0एल0एड0 प्रशिक्षण 2016—17 शून्य घोषित होने के सम्बन्ध में शासनादेश

SHIKSHAMITRA, MEETING : शिक्षामित्रों की एक भी मांग स्वीकार नहीं, शासन ने सुनाई अपनी मंशा समायोजित हो चुके शिक्षामित्रों को 10000/ माह मानदेय और असमायोजित को 3500/माह मानदेय, निकालेंगें सीधी भर्ती शिक्षा मित्रों को देंगे वेटज कितना यह कन्फर्म नहीं ।

MEETING : शिक्षामित्रों की एक भी मांग स्वीकार नहीं, शासन ने सुनाई अपनी मंशा समायोजित हो चुके शिक्षामित्रों को 10000/ माह मानदेय और असमायोजित को 3500/माह मानदेय, निकालेंगें सीधी भर्ती शिक्षा मित्रों को देंगे वेटज कितना यह कन्फर्म नहीं ।

#शिक्षामित्र_प्रकरण_अपडेट - जितनी भी मांगे शिक्षामित्र संगठनों की ओर से रखी गई थी उसमें से शिक्षामित्रों की एक भी मांग स्वीकार नही की गई। शासन ने सिर्फ अपनी मंशा सुनाई की समायोजित हो चुके शिक्षा मित्रों को 10000/ माह मानदेय और असमायोजित को 3500/माह मानदेय पर रख सकते हैं। हम सीधी भर्ती निकालेंगे और उसमें शिक्षा मित्रों को वेटज कितना देंगें यह कन्फर्म नहीं ।

SHIKSHAMITRA, MEETING : अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा फिर करेंगे शिक्षामित्रों से मुलाकात, आज शाम 5.30 बजे कार्यालय पर होगी मुलाकात ।

SHIKSHAMITRA, MEETING : अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा फिर करेंगे शिक्षामित्रों से मुलाकात, आज शाम 5.30 बजे कार्यालय पर होगी मुलाकात

MEMORANDUM, PROTEST, SHIKSHAMITRA : अमित शाह से मिलने जा रहे शिक्षामित्रों को रोका, सुबह नौ बजे से परिवार के साथ धरने पर बैठे रहे शिक्षामित्र, भाजपा मुख्यालय को जाते समय पुलिस ने रोका, लिया ज्ञापन, अब कैसे चुकाएंगे लोन

MEMORANDUM, PROTEST, SHIKSHAMITRA : अमित शाह से मिलने जा रहे शिक्षामित्रों को रोका, सुबह नौ बजे से परिवार के साथ धरने पर बैठे रहे शिक्षामित्र, भाजपा मुख्यालय को जाते समय पुलिस ने रोका, लिया ज्ञापन, अब कैसे चुकाएंगे लोन

भाजपा मुख्यालय को जाते समय पुलिस ने रोका, लिया ज्ञापन, अब कैसे चुकाएंगे लोन


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जागरण संवाददाता, लखनऊ: शिक्षामित्रों ने रविवार को रेजीडेंसी स्थित शहीद स्मारक पर धरना दिया। साथ में उनके परिवारीजन भी शामिल हुए। करीब तीन बजे अमित शाह को ज्ञापन देने के लिए भाजपा मुख्यालय की ओर जा रहे शिक्षामित्रों को जिला प्रशासन ने रोक लिया। इससे नाराज शिक्षामित्रों की पुलिस कर्मियों से नोकझोंक भी हुई। हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट व एसपीटीजी द्वारा समझाने और ज्ञापन लेने के बाद शिक्षामित्र लौट गए। 1समायोजन रद्द होने से शिक्षामित्रों की नाराजगी कम होती नजर नहीं आ रही। शहीद स्मारक पर सुबह नौ बजे से धरने पर बैठे शिक्षामित्रों का नारा सिर्फ एक था, नौकरी दो या फांसी दो। धरना-प्रदर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ, तो कुछ अपने बूढ़े पिता के साथ शामिल हुईं। धरना स्थल पर इस दौरान काफी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रही। दोपहर करीब तीन बजे सैकड़ों शिक्षामित्रों को बीजेपी मुख्यालय की ओर जाते देख जिला प्रशासन के अधिकारियों में खलबली मच गई। मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने शिक्षामित्रों को रास्ते में रोक लिया। बहस के बीच एसीएम विवेक श्रीवास्तव व एसपी ट्रांस गोमती नरेंद्र कुमार ने बीच बचाव कर शिक्षामित्रों को शांत कराया। इस दौरान उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष गाजी इमाम आला, उपमहामंत्री रमेश मिश्र, संगठन मंत्री शिवशंकर राजभर, प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील भदौरिया, संगठन मंत्री श्रीराम त्रिवेदी, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष एसपी तिवारी समेत कई लोग मौजूद रहे।1समर्थन में आए संगठन1रविवार को शिक्षामित्रों के समर्थन में कई संगठन सामने आ गए। समर्थन देने वालों में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन,भारतीय किसान यूनियन, दलित परिषद इंडियन माइनारिटीज फ्रंट समेत कई संगठन शामिल रहे।संवाद सूत्र, माल : सुप्रीमकोर्ट के फैसले से समायोजित शिक्षामित्र गहरे सदमे में हैं। इन समायोजित शिक्षामित्रों ने मोटे वेतन के चलते होम लोन, वाहन लोन तो किसी ने बेटी, बहन की शादी के लिये बैंक से लोन ले रखा था। बड़खोरवा के मनिहारखेड़ा निवासी रामकुमार का समायोजन शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक के पद पर प्रावि तरौना में हुआ था। रामकुमार ने बताया कि घर निर्माण के लिए ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त से साढ़े छह लाख रुपया बीते नवम्बर में कर्ज लिया था। अभी मात्र नौ किस्तें ही जमा कर पाया हूं। अब शेष कर्ज को लेकर घर के सभी लोग परेशान हैं कि अदायगी कैसे होगी। वहीं शिक्षामित्र भगौती प्रसाद की नियुक्ति प्रावि. नरोसा में हुई थी। उन्होंने बताया कि वेतन चालीस हजार था। बैंक से साढ़े पांच लाख रुपये कर्ज लेकर लखनऊ में प्लाट खरीद लिया। कोर्ट के फैसले से लोन की किस्त और गृहस्थी चलाने का संकट खड़ा कर दिया है। कुछ ऐसी ही परेशानी सैमसी प्रावि में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात मंझी के शिक्षामित्र लालता प्रसाद की भी है।अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देते शिक्षा मित्र

CM : शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ने से होगा सरकारी स्कूलों में विकास, वह खुद भी सरकारी स्कूल में पढ़े हैं, इसलिए शिक्षा की चाहते हैं बेहतरी

CM : शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ने से होगा सरकारी स्कूलों में विकास, वह खुद भी सरकारी स्कूल में पढ़े हैं, इसलिए शिक्षा की चाहते हैं बेहतरी

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गुरुदक्षिणा कार्यक्रम में रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के कई मंत्री शिष्य की भूमिका में नजर आए और दक्षिणा भी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना चाहिए। इससे इन स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा। वह खुद भी सरकारी स्कूल में पढ़े हैं, इसलिए शिक्षा की बेहतरी चाहते हैं।

निरालानगर स्थित माधव सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी तो पूरे प्रदेश का विकास होगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी व्यक्ति विशेष की नहीं आम आदमी की है। सरकार की योजनाओं में सबको शामिल होने की जरूरत है। हमारा लक्ष्य प्रदेश का विकास है। संघ का गुरु पूजन कार्यक्रम रविवार को गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ जो पंद्रह दिन तक चलेगा। संघ की हर शाखा में इसका आयोजन किया जाता है। इस अवसर संघ के ध्वज की पूजा होती है। ध्वज को गुरु मानते हुए सीएम योगी समेत कई मंत्रियों ने गुरुदक्षिणा दी। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन, बृजेश पाठक भी शामिल थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से रविवार को राजधानी में कई स्थानों पर गुरुदक्षिणा कार्यक्रम हुए। लालकुआं शाखा के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर इंदुभूषण पांडेय ने संघ के विचारों से स्वयंसेवकों को अवगत कराया। उनके साथ जिला संघ चालक हरि कुमार भी मौजूद थे।

SHIKSHAMITRA SAMAYOJAN : शिक्षामित्रों को लेकर चुनौतियों से जूझेगी सरकार, यह मसला भाजपा सरकार के गले की ऐसी फांस बन गया है जो न उगलते बन रहा है, न निगलते ।

SHIKSHAMITRA SAMAYOJAN : शिक्षामित्रों को लेकर चुनौतियों से जूझेगी सरकार, यह मसला भाजपा सरकार के गले की ऐसी फांस बन गया है जो न उगलते बन रहा है, न निगलते ।

हरिशंकर मिश्र ’ लखनऊ । सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद सड़क पर उतरे शिक्षा मित्रों के लिए राह निकालना सरकार के लिए आसान नहीं है। उसके सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ पौने दो लाख शिक्षामित्रों का मसला है तो दूसरी ओर लगभग एक लाख टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी कि वे नियुक्ति की पूरी पात्रता रखते हैं। यह मसला भाजपा सरकार के गले की ऐसी फांस बन गया है जो न उगलते बन रहा है, न निगलते।

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी को देखते हुए 2000 में ग्रामीण क्षेत्रों में और 2006 में नगरीय क्षेत्रों में शिक्षा मित्रों की नियुक्तियां की गई थीं। इनकी अर्हता इंटरमीडिएट रखी गई थी। हालांकि बीएड को वरीयता देने की बात भी कही गई थी। प्रारंभ में इनका मानदेय 2250 रुपये तय किया गया था जिसे 2006 में बढ़ाकर 3500 कर दिया गया। इनका चयन ग्राम शिक्षा समितियों ने किया था जिसके अध्यक्ष ग्राम प्रधान थे। दस साल बाद 2009 तक इनकी संख्या सवा लाख से ऊपर हो चुकी थी और इसी समय से इन्हें वोट बैंक के रूप में देखा जाने लगा।

स्पष्ट था कि प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार ने स्पष्ट नियम घोषित कर रखे हैं, इसके बावजूद शिक्षा मित्रों को स्थायी नियुक्ति का चारा फेंका गया। राजनीतिक फायदे की पहल तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने की और राष्ट्रीय अध्यापक अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को यह प्रस्ताव भेज दिया कि शिक्षा मित्रों को दूरस्थ बीटीसी प्रशिक्षण कराया जा सकता है। 2011 में इसकी अनुमति मिल गई। इसके पीछे सरकार मंशा शिक्षा मित्रों को नियुक्ति देकर राजनीतिक लाभ हासिल करने की थी हालांकि सरकार चली जाने से ऐसा न हो सका। इसके बाद आई अखिलेश सरकार ने इसका लाभ उठाया और 1.73 शिक्षा मित्रों को समायोजित करने का फैसला किया। दो चरणों में 1.37 लाख शिक्षा मित्रों को नियुक्ति दी गई और उन्हें सरकारी खजाने से वेतन भी मिलने लगा। सपा सरकार अपने इस फैसले के प्रति इतना आग्रही थी कि उसने सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व के फैसलों की भी अनदेखी कर दी और टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नाराजगी का खतरा भी उठाया।

इन्ही अभ्यर्थियों ने समायोजन को चुनौती दी और अंतत: सुप्रीम कोर्ट में शिक्षा मित्रों के समायोजन को तर्क संगत न ठहराया जा सका। दूसरी ओर एक लाख से अधिक टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण अभ्यर्थी हैं जो लगातार सरकार पर इस बात के लिए सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं कि उनकी योग्यता के आधार पर उन्हें नियुक्ति दी जाए। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी है। सरकार अपने हलफनामे में यह बात कह भी चुकी है कि वह उन्हें नियुक्तियां देगी। टीईटी संघर्ष मोर्चा के संजीव कुमार मिश्र कहते हैं कि सरकार को पहले हमारी ओर देखना होगा। हमारे बीच बीएड, एमएड और पीएचडी भी हैं। योग्य टीचरों की अनदेखी भला कैसे की जा सकती है।

हरिशंकर मिश्र ’ लखनऊ । सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद सड़क पर उतरे शिक्षा मित्रों के लिए राह निकालना सरकार के लिए आसान नहीं है। उसके सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ पौने दो लाख शिक्षामित्रों का मसला है तो दूसरी ओर लगभग एक लाख टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी कि वे नियुक्ति की पूरी पात्रता रखते हैं। यह मसला भाजपा सरकार के गले की ऐसी फांस बन गया है जो न उगलते बन रहा है, न निगलते।

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी को देखते हुए 2000 में ग्रामीण क्षेत्रों में और 2006 में नगरीय क्षेत्रों में शिक्षा मित्रों की नियुक्तियां की गई थीं। इनकी अर्हता इंटरमीडिएट रखी गई थी। हालांकि बीएड को वरीयता देने की बात भी कही गई थी। प्रारंभ में इनका मानदेय 2250 रुपये तय किया गया था जिसे 2006 में बढ़ाकर 3500 कर दिया गया। इनका चयन ग्राम शिक्षा समितियों ने किया था जिसके अध्यक्ष ग्राम प्रधान थे। दस साल बाद 2009 तक इनकी संख्या सवा लाख से ऊपर हो चुकी थी और इसी समय से इन्हें वोट बैंक के रूप में देखा जाने लगा।

स्पष्ट था कि प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार ने स्पष्ट नियम घोषित कर रखे हैं, इसके बावजूद शिक्षा मित्रों को स्थायी नियुक्ति का चारा फेंका गया। राजनीतिक फायदे की पहल तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने की और राष्ट्रीय अध्यापक अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को यह प्रस्ताव भेज दिया कि शिक्षा मित्रों को दूरस्थ बीटीसी प्रशिक्षण कराया जा सकता है। 2011 में इसकी अनुमति मिल गई। इसके पीछे सरकार मंशा शिक्षा मित्रों को नियुक्ति देकर राजनीतिक लाभ हासिल करने की थी हालांकि सरकार चली जाने से ऐसा न हो सका।

DELED, ADVERTISEMENT : डी0 एल0 एड0 (बी0टी0सी0) प्रशिक्षण 2017 हेतु ऑनलाइन आवेदन ।

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PROTEST : शिक्षामित्रों के समायोजन पर राज्यपाल रामनाईक बोले, सीधे सीएम योगी से करेंगे बात, शिक्षामित्रों ने छुट्टी के दिन भी किया प्रदेश के प्रत्येक जिलों पर प्रदर्शन

PROTEST : शिक्षामित्रों के समायोजन पर राज्यपाल रामनाईक बोले, सीधे सीएम योगी से करेंगे बात, शिक्षामित्रों ने छुट्टी के दिन भी किया प्रदेश के प्रत्येक जिलों पर प्रदर्शन

टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ । सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द होने के बाद से शिक्षामित्रों का आंदोलन जारी है। रविवार को एक प्रतिनिधिमंडल रामपुर में राज्यपाल राम नाईक से मिला और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने शिक्षामित्रों को कानून बनाकर सहायक अध्यापक बनाने की मांग की है।

राज्यपाल ने भी शिक्षामित्रों को इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया है। साथ ही शिक्षामित्रों से किसी भी तरह की हिंसा न करने की अपील की।

पांच दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने का फैसला सुनाया था। इसके बाद से प्रदेशभर में शिक्षामित्र आंदोलनरत हैं। रविवार सुबह से ही शिक्षामित्रों का डायट पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।

यहां शिक्षामित्रों ने धरना दिया। केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सैय्यद जावेद मियां के नेतृत्व में पांच शिक्षामित्रों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस लाइन में राज्यपाल राम नाईक से मिला।

*1.72 लाख शिक्षामित्रों के भविष्य पर संकट*

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से प्रदेश के 1.72 लाख शिक्षामित्रों का भविष्य अंधेरे में चला गया है। उनके परिवारों के समक्ष रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

लेकिन प्रदेश सरकार ने पांच दिन बाद भी शिक्षामित्रों की समस्या का समाधान नहीं खोजा। ऐसे में शिक्षामित्रों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

राज्यपाल ने शिक्षामित्रों की पूरी बात सुनने के बाद इस मामले में मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया है। साथ ही शिक्षामित्रों से किसी भी तरह की हिंसा न करने की अपील की। इस मौके पर हरीश कुमार, कविता सोढ़ी, गुरप्रीत सिंह, राजपाल सिंह मौर्य आदि मौजूद रहे।

*डीएम चौराहे पर शिक्षामित्रों का प्रदर्शन, रोड जाम*

इसके अलावा यूपी के अलग-अलग जिलों में शिक्षामित्रों का प्रदर्शन जारी रहा। बहराइच में शिक्षामित्रों ने कलेक्ट्रेट में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर डीएम आवास चौराहे के सामने जाम लगा दिया। गुजर रहे बलरामपुर के गैसड़ी विधायक का घेराव कर उन्हें शिक्षामित्रों की समस्या से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा।

प्रांतीय प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षामित्रो के मामले में सरकार चुप्पी तोड़े। वरना आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन के चलते अफरा-तफरी की स्थिति रही। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

जिले के प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों के मामले में बीते दिनों सुप्रीमकोर्ट ने विपरीत फैसला देते हुए उनका समायोजन रद्द कर दिया था। इससे प्रदेश के साथ जिले के शिक्षामित्र भी आहत हैं। निरंतर प्रदर्शन चल रहा है। रविवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के बैनर तले जिले के शिक्षामित्र कलेक्ट्रेट के धरना स्थल पर एकत्रित हुए।

*बोले-टूट रहा है शिक्षामित्रों के सब्र का बांध*

यहां सभी ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर धरना शुरू कर दिया। धरने को संबोधित करते हुए संघ के प्रांतीय प्रवक्ता व जिलाध्यक्ष शिवश्याम मिश्र ने कहा कि कोर्ट के निर्णय से आहत शिक्षामित्रों के सब्र का बांध टूट रहा है।

सरकार की चुप्पी के चलते शिक्षामित्र आत्महत्या कर रहे हैं। सिर्फ सरकार इतना कह रही है कि शिक्षामित्र बहकावे मे न आएं। यह सरकार की ओछी मानसिकता दर्शाती है।

प्रांतीय प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षामित्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। शिक्षक संगठनों को धमकी दी जा रही है।

*शिक्षामित्रों के आंदोलन को शिक्षक व कर्मचारी संघों का समर्थन*

शिक्षामित्रों के आंदोलन को निरंतर समर्थन मिल रहा है। रविवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष आनंद पाठक, जिला मंत्री विजय उपाध्याय, रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष पंकज मिश्र, कर्मचारी महासंघ के संरक्षक सरदार सरजीत सिंह, आनंद मोहन आदि ने समर्थन देते हुए आरपार के संघर्ष का एलान किया।

*शिक्षामित्रों ने जुलूस निकाल जाम किया हाईवे*

गोंडा में सहायक अध्यापक पद की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे शिक्षामित्रों ने रविवार को पांचवे दिन कलेक्ट्रेट से दीवानी कचेहरी तक जुलूस निकाला और नारेबाजी की। जुलूस निकाल रहे शिक्षामित्र अचानक गोंडा लखनऊ हाईवे पर लेट गए और सड़क जाम कर दी। इस स्थिति से जिला प्रशासन के अफसर सकते में आ गए।

प्रशासन की मान मानौव्वल के शिक्षामित्र रास्ते से हटे। इसके बाद शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।

सहायक अध्यापक पद से समायोजन निरस्त होने के बाद जिले के 3269 शिक्षामित्र अपनी नौकरी की बहाली की मांग को लेकर सड़क पर हैं और जिला पंचायत के सामने अनवरत धरना प्रदर्शन कर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
आंदोलन के पांचवे दिन रविवार को बड़ी संख्या में शिक्षामित्र जिला पंचायत सभागार के सामने चल रहे धरनास्थल पर पहुंचे और अपने साथियों के साथ बैठकर रणनीति तैयार की। दोपहर बाद करीब एक बजे धरना दे रहे शिक्षामित्र सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन करना शुरु कर दिया। इसके बाद शिक्षामित्रों का हुजूम कलेक्ट्रेट से अंबेडकर चौराहे की तरफ चल पड़ा।

*हाईवे पर बीच सड़क पर लेट गए*

नारेबाजी करते हुए शिक्षामित्र अबंडकर चौराहा होते हुए दीवानी कचेहरी के गेट पर पहुंचे और गोंडा लखनऊ हाईवे पर बीच सड़क पर लेट गए। इससे सड़क पर जाम लग गया और दोनो तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई।

सड़क जाम देखकर जिला प्रशासन के अफसरों के हाथ पांव फूल गए। काफी देर तक मान मनौव्वल के बाद शिक्षामित्र माने और दीवानी कचेहरी होते हुए फिर से धरनास्थल तक पहुंचे। यहां आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के मीडिया प्रभारी अवधेश मणि मिश्रा ने कहा कि प्रदेश की सरकार पर शिक्षामित्रों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

*जनप्रतिनिधियों के घरों का घेराव करेंगे शिक्षामित्र*

जिला पंचायत के सामने धरना दे रहे शिक्षामित्र जिले के सांसदों व विधायकों के रुख को लेकर भी बहुत आहत हैं। समायोजन रद्द होने के फैसले के बाद अब तक जिले का कोई भी नेता इनको तसल्ली देने भी नही पहुंचा है। रविवार को धरने में शिक्षामित्रों का यह दर्द भी छलका।

धरने को संबंधित करते हुए शिक्षामित्र चंद्र प्रकाश ने जिले के सांसदों व विधायकों पर शिक्षामित्रों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिले का कोई भी विधायक या सांसद अब तक शिक्षामित्रों को सांत्वना देने भी नहीं आया है। उन्होने कहा कि जल्द ही शिक्षामित्र सांसद व विधायकों के घरों का घेराव करेंगे।

*हक लिए बिना चुप नहीं बैठेंगे*

रायबरेली में आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की अगुवाई में पांचवें दिन भी विकास भवन में शिक्षामित्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। मुख्य अतिथि व एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने कहा कि सहायक अध्यापक पद एवं सामान्य कार्य का समान वेतन से कम कोई समझौता स्वीकार नहीं है। सरकार विधेयक में संशोधन करते हुए सहायक अध्यापक के पद पर पदास्थापित करे। बिना हक लिए हम सब चुप नहीं बैठेंगे।

प्रांतीय उपाध्यक्ष लक्ष्मी प्रताप सिंह ने कहा कि दो दिन में सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है तो सभी लोग विधानसभा का घेराव करने को मजबूर हो जाएंगे। जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई ठप चल रही है। बावजूद सरकार इस दिशा में कोई निर्णय नहीं ले रही है।

हक मांगने पर दबाने की कोशिश की जा रही है, जिस पर चुप नहीं बैठा जाएगा। महामंत्री पुष्पेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि सरकार शांतिपूर्वक धरने को हमारी कमजोरी न समझें। जरूरत पड़ी तो हम लोगों का धरना लखनऊ तक जाएगा।

*मांगें पूरी होने तक होगा आंदोलन*

सुल्तानपुर में रविवार को पांचवें दिन भी शहर के तिकोनिया पार्क में बड़ी संख्या में शिक्षामित्र एकत्र हुए। नाराज शिक्षामित्रों ने सरकार के नियमावली में संशोधन का मसला उठाते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।

रविवार को पांचवें दिन शिक्षामित्रों ने तिकोनिया पार्क में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष बृजेश पांडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शिक्षामित्र काफी आहत हैं। हमें अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करना होगा। सरकार को नियमावली में संशोधन करना चाहिए। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी शिक्षामित्र अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षामित्रों ने पैदल मार्च निकाला। इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को दिया। प्रदर्शन करने वालों में पवन कुमार, प्रमोद कुमार दुबे, राम प्रसाद मिश्र, संपूर्णानंद पांडेय, शैलेंद्र सिंह, मनोज वर्मा, रामअवतार वर्मा आदि शिक्षामित्र शामिल रहे।

*शिक्षामित्रों ने छुट्टी के दिन भी किया कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन*

अंबेडकरनगर में समायोजन रद होने से आंदोलित शिक्षामित्र अवकाश के बावजूद रविवार को कलेक्ट्रेट के निकट अनिश्चित कालीन धरने पर डटे रहे। उन्होंने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कहा गया कि उनकी मांग के संबंध में शीघ्र ही प्रदेश सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन करेंगे।

शिक्षामित्र संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में चल रहे धरने के दौरान प्राथमिक शिक्षामित्र संघ जिलाध्यक्ष केके द्विवेदी ने कहा कि समायोजन रद होने से शिक्षामित्रों के समक्ष कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। अधिक उम्र वाले शिक्षामित्रों का भविष्य अंधकारमय दिख रहा है।

उनका परिवार सदमे में हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को उनके हित को देखते हुए आवश्यक कदम उठाना चाहिए। शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन जिलाध्यक्ष अनिल विश्वकर्मा ने कहा कि 14 वर्ष से स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों को एक झटके में सड़क पर ला दिया गया। इसके विरुद्ध बड़ा संघर्ष छेड़ा जाएगा।

रविवार को भी हुजूम बनाकर सड़क पर उतरे शिक्षामित्र


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राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद1समायोजन रद होने के बाद से शिक्षामित्रों का आक्रोश इस कदर पूरे प्रदेश में व्याप्त है कि रविवार को अवकाश का दिन होने के बावजूद प्रदर्शन हुए। अधिकारी नहीं मिले तो क्या, जन प्रतिनिधियों को ही जगह-जगह घेरा। हालांकि तेवर पहले जैसे गरम नहीं रहे। कई जिलों में सड़क जाम किया, अर्धनग्न प्रदर्शन हुए। पैदल मार्च और कैंडल मार्च निकाला।1इलाहाबाद में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले सैकड़ों शिक्षामित्रों ने दोपहर बाद श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर उर्फ मन्नू कोरी का घेराव किया। कबीर जयंती कार्यक्रम में पहुंचे राज्यमंत्री से मिलने के दौरान शिक्षामित्रों का हुजूम रहा। शिक्षामित्रों की पीड़ा जानने के बाद राज्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे शाम को ही इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता करेंगे। शिक्षामित्रों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। इस घेराव का नेतृत्व संघ के जिलाध्यक्ष वसीम ने किया। देर शाम जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से सुभाष चौक तक कैंडल मार्च निकाला गया। इससे पहले डायट कार्यालय पर मौजूद शिक्षामित्रों ने प्राथमिक विद्यालय लखनपुर मेजा में शिक्षक रहीं बबिता सरोज सहित पूरे प्रदेश में दिवंगत हुए 18 साथियों को श्रद्धांजलि दी। सोमवार को बीएसए दफ्तर, एसएसएफ दफ्तर सहित अन्य शिक्षाधिकारियों के कार्यालय पर प्रदर्शन करने का कार्यक्रम है। कौशांबी जिलाध्यक्ष रचकर सिंह के अनुसार रविवार को शिक्षामित्रों ने आपसी विचार विमर्श कर अगली रणनीति तय की है। कहा कि चुप नहीं बैठेंगे।1फैजाबाद में हजारों की तादाद में शिक्षामित्रों ने सांसद लल्लू सिंह का आवास घेरा। अंबेडकरनगर में कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन के बाद पैदल मार्च निकाला और टांडा मार्ग पर जाम लगा दिया। गोंडा में शिक्षामित्रों ने अंबेडकर चौराहे पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। गोंडा-लखनऊ हाईवे पर जाम लगा दिया। बहराइच में शिक्षामित्रों ने कलेक्ट्रेट धरना स्थल पर धरना दिया। डीएम आवास के सामने बहराइच-लखनऊ हाईवे जाम कर दिया। लखीमपुर में गांधी विद्यालय चौराहे पर टीईटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु राणा का पुतला फूंका। बलरामपुर में क्षेत्रीय सांसद दद्दन मिश्र व चारों विधायक सदर पल्टूराम, तुलसीपुर कैलाश नाथ शुक्ल, उतरौला राम प्राताप वर्मा व गैंसड़ी शैलेश कुमार सिंह ने धरना स्थल पर पहुंच कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन शिक्षामित्र नहीं माने।1मैनपुरी में अर्धनग्न प्रदर्शन : आगरा में शिक्षामित्रों ने डायट परिसर में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करने के बाद फतेहाबाद क्षेत्र से भाजपा विधायक जितेंद्र वर्मा के आवास पर पहुंच ज्ञापन सौंपा। मथुरा में रैली निकाल जाम लगाया। 1प्रदर्शन के दौरान दो शिक्षामित्रों की हालत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मैनपुरी में शिक्षामित्रों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। मुरादाबाद में अर्धनग्न होकर धरना-प्रदर्शन किया।राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद1समायोजन रद होने के बाद से शिक्षामित्रों का आक्रोश इस कदर पूरे प्रदेश में व्याप्त है कि रविवार को अवकाश का दिन होने के बावजूद प्रदर्शन हुए। अधिकारी नहीं मिले तो क्या, जन प्रतिनिधियों को ही जगह-जगह घेरा। हालांकि तेवर पहले जैसे गरम नहीं रहे। कई जिलों में सड़क जाम किया, अर्धनग्न प्रदर्शन हुए। पैदल मार्च और कैंडल मार्च निकाला।1इलाहाबाद में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले सैकड़ों शिक्षामित्रों ने दोपहर बाद श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर उर्फ मन्नू कोरी का घेराव किया। कबीर जयंती कार्यक्रम में पहुंचे राज्यमंत्री से मिलने के दौरान शिक्षामित्रों का हुजूम रहा। शिक्षामित्रों की पीड़ा जानने के बाद राज्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे शाम को ही इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता करेंगे। शिक्षामित्रों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। इस घेराव का नेतृत्व संघ के जिलाध्यक्ष वसीम ने किया। देर शाम जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से सुभाष चौक तक कैंडल मार्च निकाला गया। इससे पहले डायट कार्यालय पर मौजूद शिक्षामित्रों ने प्राथमिक विद्यालय लखनपुर मेजा में शिक्षक रहीं बबिता सरोज सहित पूरे प्रदेश में दिवंगत हुए 18 साथियों को श्रद्धांजलि दी। सोमवार को बीएसए दफ्तर, एसएसएफ दफ्तर सहित अन्य शिक्षाधिकारियों के कार्यालय पर प्रदर्शन करने का कार्यक्रम है। कौशांबी जिलाध्यक्ष रचकर सिंह के अनुसार रविवार को शिक्षामित्रों ने आपसी विचार विमर्श कर अगली रणनीति तय की है। कहा कि चुप नहीं बैठेंगे।1फैजाबाद में हजारों की तादाद में शिक्षामित्रों ने सांसद लल्लू सिंह का आवास घेरा। अंबेडकरनगर में कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन के बाद पैदल मार्च निकाला और टांडा मार्ग पर जाम लगा दिया। गोंडा में शिक्षामित्रों ने अंबेडकर चौराहे पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। गोंडा-लखनऊ हाईवे पर जाम लगा दिया। बहराइच में शिक्षामित्रों ने कलेक्ट्रेट धरना स्थल पर धरना दिया। डीएम आवास के सामने बहराइच-लखनऊ हाईवे जाम कर दिया। लखीमपुर में गांधी विद्यालय चौराहे पर टीईटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु राणा का पुतला फूंका। बलरामपुर में क्षेत्रीय सांसद दद्दन मिश्र व चारों विधायक सदर पल्टूराम, तुलसीपुर कैलाश नाथ शुक्ल, उतरौला राम प्राताप वर्मा व गैंसड़ी शैलेश कुमार सिंह ने धरना स्थल पर पहुंच कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन शिक्षामित्र नहीं माने।1मैनपुरी में अर्धनग्न प्रदर्शन : आगरा में शिक्षामित्रों ने डायट परिसर में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करने के बाद फतेहाबाद क्षेत्र से भाजपा विधायक जितेंद्र वर्मा के आवास पर पहुंच ज्ञापन सौंपा। मथुरा में रैली निकाल जाम लगाया। 1प्रदर्शन के दौरान दो शिक्षामित्रों की हालत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मैनपुरी में शिक्षामित्रों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। मुरादाबाद में अर्धनग्न होकर धरना-प्रदर्शन किया।श्रम और सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर उर्फ मन्नू कोरी को ज्ञापन देते शिक्षामित्र। सुभाष चौराहा पर कैंडल मार्च निकालते शिक्षामित्र ’ जागरण

BHARTI, SHIKSHAMITRA : शिक्षामित्रों को लेकर दोहरी चुनौती से जूझेगी योगी सरकार, लगभग एक लाख टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों पर भी करना होगा विचार ।

BHARTI, SHIKSHAMITRA : शिक्षामित्रों को लेकर दोहरी चुनौती से जूझेगी योगी सरकार, लगभग एक लाख टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों पर भी करना होगा विचार

SHIKSHAK BHARTI : सरकार को लौटाने होंगे बेरोजगारों के 290 करोड़, दिसंबर 2012 में एकेडमिक रिकार्ड पर शुरू हुई थी नियुक्ति, कई ने सभी 75 जिलों में किया था आवेदन, 40 हजार रुपये तक किया था खर्च

SHIKSHAK BHARTI : सरकार को लौटाने होंगे बेरोजगारों के 290 करोड़, दिसंबर 2012 में एकेडमिक रिकार्ड पर शुरू हुई थी नियुक्ति, कई ने सभी 75 जिलों में किया था आवेदन, 40 हजार रुपये तक किया था खर्च

इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता । प्रदेश सरकार को बेरोजगारों के तकरीबन 290 करोड़ रुपये लौटाने होंगे। सरकारी स्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सभी विवादों का अंत हो गया है। इसी के साथ बेसिक शिक्षा परिषद को अपने खाते में रखे रुपये लौटाने के लिए प्रक्रिया शुरू करनी होगी। ये रुपये साढ़े तीन साल से पड़े हैं।बसपा सरकार ने 30 नवंबर 2011 को प्राथमिक स्कूलों में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती टीईटी मेरिट से शुरू की थी। लेकिन टीईटी में धांधली के आरोप लगने के बाद सपा सरकार ने मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी से प्रकरण की जांच कराई।जांच के बाद सरकार ने 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती टीईटी मेरिट की बजाय एकेडमिक रिकार्ड के आधार पर करने का निर्णय लिया। इस भर्ती के लिए नये सिरे से दिसंबर 2012 में विज्ञापन जारी हुआ। अभ्यर्थियों से प्रत्येक जिले में आवेदन के लिए 500-500 रुपये फीस ली गई। कई अभ्यर्थियों ने सभी 75 जिलों से फार्म भरे। जिन्होंने 75 जिलों से आवेदन किया उन्हें 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़े थे।

SHIKSHAMITRA : मनमानी नीतियों की वजह से फंस गए शिक्षामित्र, अधिकार के बाहर लिए गए फैसले ।

SHIKSHAMITRA : मनमानी नीतियों की वजह से फंस गए शिक्षामित्र, अधिकार के बाहर लिए गए फैसले ।

Sunday, July 30, 2017

FORM, GOVERNMENT ORDER, MEDICAL TEST : राष्ट्रीय अध्यापक कल्याण प्रतिष्ठान से आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र का संशोधित प्रारूप ।

FORM, GOVERNMENT ORDER, MEDICAL TEST : राष्ट्रीय अध्यापक कल्याण प्रतिष्ठान से आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र का संशोधित प्रारूप

DELED : डीएलएड 2017 के लिए आवेदन एक से, जुलाई 2017 को 18 वर्ष पूरा करने वाले अभ्यर्थी कर सकेंगे दावेदारी

DELED : डीएलएड 2017 के लिए आवेदन एक से, जुलाई 2017 को 18 वर्ष पूरा करने वाले अभ्यर्थी कर सकेंगे दावेदारी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : डीएलएड (पूर्व बीटीसी) 2017 का संशोधित हो गया है। इसमें डीएलएड 2016 का सत्र शून्य करके आए आवेदनों को 2017 प्रवेश वर्ष में मान्य करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही जिन अभ्यर्थियों की आयु एक जुलाई 2017 को 18 वर्ष पूरी हो गई है वे भी अब एक अगस्त से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रक्रिया 12 अगस्त तक चलने के आसार हैं। उसके बाद काउंसिलिंग और फिर अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाएगा।

शासन के निर्देश पर जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के दूसरे हफ्ते तक डीएलएड 2016 के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। 6 लाख अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। उन्हें ऑनलाइन आवेदन में संशोधन करने का भी मौका मुहैया कराया जा चुका है। इसी बीच ‘दैनिक जागरण’ ने शीर्ष कोर्ट के उस निर्देश को प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसमें 2017 से डीएलएड का सत्र नियमित करने का निर्देश हुआ था। पहले उम्मीद थी कि इस वर्ष दो सत्रों के लिए प्रवेश होंगे, लेकिन विस चुनाव ने उस पर पानी फेर दिया। ऐसे में शासन ने बैठक करके डीएलएड 2016 का सत्र शून्य करने का निर्णय लिया।

TET : टीईटी पास शिक्षकों को वर्तमान पद पर बनाए रखने की मांग।

TET : टीईटी पास शिक्षकों को वर्तमान पद पर बनाए रखने की मांग।

SHIKSHAMITRA : राज्यपाल बोले- समायोजन का रास्ता खोज रही सरकार, उन्होंने शिक्षा मित्रों के प्रतिनिधि मंडल से कहा कि वे इस बाबत मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।

SHIKSHAMITRA : राज्यपाल बोले- समायोजन का रास्ता खोज रही सरकार, उन्होंने शिक्षा मित्रों के प्रतिनिधि मंडल से कहा कि वे इस बाबत मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।

समायोजन निरस्त होने के बाद आंदोलन कर रहे शिक्षा मित्रों को राज्यपाल राम नाईक ने भरोसा दिलाया कि सरकार उनके समायोजन का रास्ता तलाश कर रही है। इसलिए किसी को निराश होने की आवश्यकता नहीं है। राज्यपाल राम नाईक शनिवार को अधिवक्ता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गोंडा आए थे। उन्होंने शिक्षा मित्रों के प्रतिनिधि मंडल से कहा कि वे इस बाबत मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।

उधर, शिक्षक भर्ती के लिए नए आयोग के गठन का रास्ता साफ

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग को भंग कर नए आयोग के गठन की तैयारी तकरीबन पूरी हो गई है। नए आयोग में एक अध्यक्ष के साथ चयन बोर्ड एवं चयन आयोग के छह-छह सदस्य होंगे। अपर मुख्य सचिव उच्च एवं माध्यमिक शिक्षा संजय अग्रवाल ने दोनों विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर इसका खाका भी तैयार कर लिया है।

माना जा रहा है कि 15 अगस्त के पहले यह अस्तित्व में आ जाएगा। बैठक में तय किया गया है कि नए आयोग में तैनात होने वाले सदस्यों की योग्यता पूर्व की भांति रहेगी, लेकिन शिक्षाविद के अंतर्गत आने वाले सदस्यों की न्यूनतम आयु 55 वर्ष एवं शासकीय/अनुमोदित कॉलेज के प्राचार्य के रूप में 10 वर्ष का अनुभव भी सम्मिलित होगा।

Saturday, July 29, 2017

PROTEST : योगी के आश्वासन के बाद भी नहीं माने शिक्षामित्र, आंदोलन जारी

PROTEST : योगी के आश्वासन के बाद भी नहीं माने शिक्षामित्र, आंदोलन जारी

लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद प्रदेशभर में शिक्षामित्र लगातार चौथे दिन आंदोलनरत है। शुक्रवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को हल निकालने का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी शिक्षामित्रों का प्रदर्शन जारी है। अब तक इस प्रदर्शन के दौरान दो शिक्षामित्रों की मौत हो चुकी है। राज्यभर में हजारों शिक्षामित्रों ने स्कूल में ताले लगा दिए हैं और सड़कों पर उतर आए है। बरेली में 3400 शिक्षामित्र परिवार अघोषित भूख हड़ताल पर हैं। वे केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के आफिस में भी प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

वहीं मुरादाबाद में तीन दिन से आंदोलनरत शिक्षामित्र खामोश नहीं बैठने के मूड में हैं। भारी संख्या में शिक्षा मित्र बुद्धि विहार स्थित सांसद और एमएलसी के आवास पर पहुंच रहे हैं।

उधर गोरखपुर में भी शिक्षामित्रों का आंदोलन जारी है, शिक्षामित्रों ने शनिवार को खजनी क्षेत्र में गोरखपुर-गोला मार्ग पर जाम लगा दिया। वहीं कुछ शिक्षामित्र बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर भी पहुंचे। डायट परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। लगातार चौथे दिन आंदोलनरत शिक्षामित्रों ने शनिवार को ब्‍लाक रिसोर्स सेंटरों पर धरना दिया। इस बीच प्रशासन ने अपना रवैया सख्‍त कर लिया है।

शनिवार को खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने इलाके के विद्यालयों की जांच कर बंद विद़यालयों के प्रधानाध्‍यापकों और शिक्षकों को सख्‍त चेतावनी दी। प्रशासन ने कहा है कि शिक्षामित्रों को वापस अपने काम पर लौट जाना चाहिए। सरकार उनके बारे में विचार कर रही है। संघर्ष से समस्‍या का समाधान होने के बजाये इसके और जटिल हो जाने की आशंका है।

शिक्षामित्रों के लिए विधिसंगत रास्ते तलाश रही सरकार : योगी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार विधानसभा में बोलते हुए कहा था कि पिछली सरकारों की गलती की वजह से ही यह स्थिति पैदा हुई है। लेकिन शिक्षामित्र किसी के बहकावे में आकर तोड़फोड़ और हिंसा का रास्ता न अख्तियार करें, सरकार उनके लिए विधिसंगत रास्ते तलाश रही है।
विधान परिषद में बजट पर चचार् का जवाब देते हुए योगी ने कहा, 'शिक्षामित्रों के समायोजन में ही गलती थी। पूर्व की सरकारों ने गलत किया। मैंने अपर मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह शिक्षामित्रों का प्रतिवेदन लेकर सरकार के साथ बैठें। सरकार विधिसंगत रास्ते तलाश रही है।

उन्होंने कहा, 'जब सरकार विचार कर रही है तो सड़क पर हिंसा करना ठीक नहीं है। सड़क पर तोड़फोड़ न करें, हिंसा न करें, किसी के बहकावे में न आएं। विपक्ष उन्हें केवल वोट बैंक मानता है।' पिछले दो दिनों में हुई हिंसक झड़पों पर मुख्यमंत्री ने सख्त लहजों में कहा कि हिंसा होगी और हिंसा का शिकार कोई निदोर्ष होगा तो सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'वे सभी शिक्षामित्रों की बातें सुन रहे हैं। जिनका समायोजन नहीं हुआ था, सरकार ने उनका मानदेय बढ़ाया है। लोकतंत्र में रास्ता निकलता है। हम रास्ता निकालेंगे। सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी।'

SHIKSHAMITRA, MANTRI : शिक्षामित्रों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले जावड़ेकर, हमनें शिक्षा मित्रों को 2 साल का वक्त दिया, माननीय मंत्री जी की भाषा खोलती है राजनीतिक पोल ।

SHIKSHAMITRA, MANTRI : शिक्षामित्रों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले जावड़ेकर, हमनें शिक्षा मित्रों को 2 साल का वक्त दिया, माननीय मंत्री जी की भाषा खोलती है राजनीतिक पोल

दिल्ली- #shikshamitra को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले जावड़ेकर, हमनें शिक्षा मित्रों को 2 साल का वक्त दिया है।

YOGA : योग शिक्षक बनाने के नाम पर शुरू हुआ गोरखधंधा, नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से हो रहा छल

YOGA : योग शिक्षक बनाने के नाम पर शुरू हुआ गोरखधंधा, नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से हो रहा छल

जागरण टीम, लखनऊ: योगी सरकार ने किया सभी स्कूलों, अस्पतालों, गांव में योग शिक्षा अनिवार्य.. आने वाली योगा की वैकेंसी में मान्य और प्रमाणित डिप्लोमा.. यह खबर नहीं एक विज्ञापन का स्लोगन है। खबर यह है कि ऐसे ही स्लोगनों को वादों और दावों का रंग देकर बेरोजगारों से छल का सिलसिला चल निकला है। सिर्फ एक-दो जिले में नहीं प्रदेश भर में गली-मुहल्लों में पिछले कुछ दिनों में ऐसे तमाम इंस्टीट्यूट खुल गए हैं जो अलग-अलग संस्थानों से सबद्धता-मान्यता का दावा कर सर्टिफिकेट, डिप्लोमा से लेकर डिग्रियां तक बांट रहे हैं। कहा जा रहा है कि जल्द ही योग शिक्षकों की बंपर भर्तियां आने वाली हैं। तब इन प्रमाणपत्रों की जरूरत पड़ेगी। बैकडेट में पंजीकरण कर पांच से पचीस हजार तक में सर्टिफिकेट बांटे जा रहे हैं। बरगलाने के लिए उत्तराखंड में शीघ्र ही आठ सौ योग शिक्षकों की भर्ती संबंधी खबर व योग पाठ्यक्रम से जुड़ी अखबारों की कतरनों को वाट्सएप पर वायरल किया जा रहा है।1गोंडा शहर में कुछ कंप्यूटर सेंटरों पर योग की डिग्री दी जा रही है। बाराबंकी, बहराइच व हरदोई में कोचिंगों की तर्ज पर कुछ योग प्रशिक्षण केंद्र सिर्फ प्रमाणपत्र देने के लिए ही खोले गए हैं। इनकी योग कक्षाएं कहां चलती हैं, पता नहीं। लखीमपुर में पांच से 25 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। कई तो इस बात की गारंटी भी देते हैं कि उनका डिप्लोमा नौकरी में मान्य होगा जबकि न तो ऐसे वैकेंसी का अभी कोई अता-पता है न योग्यता निर्धारित की गई है। बलरामपुर में कुछ संस्थाएं नकदी लेकर प्रमाण पत्र बांट रही हैं। रायबरेली के डलमऊ में योग की कोचिंग खोली गई जिनमें योग शिक्षक के प्लेसमेंट की गारंटी ली जाती है।1’>>कोचिग, कंप्यूटर सेंटर और योग संस्थान खोल बांटी जा रहीं डिग्रियां1’>>डिग्री-डिप्लोमा देने के नाम पर वसूले जा रहे पांच से 25 हजारबीएसए दफ्तर में हो रही पूछताछ1पिछले एक महीने में सीतापुर के बीएसए दफ्तर में 15 से 20 बेरोजगार योग शिक्षक की भर्ती में अर्हताओं आदि की जानकारी लेने आ चुके हैं। बीएसए पन्नाराम इसकी पुष्टि करते हैं। हालांकि वे कहते हैं, योग शिक्षकों की भर्ती के बारे में अभी कोई आदेश नहीं है। लखीमपुर के बीएसए बुद्धप्रिय सिंह का कहना है कि उन तक इस बारे में कोई आदेश या निर्देश नहीं मिले हैं इसलिए लोग इसके फर्जीवाड़े में न फंसे।

AGITATION, SHIKSHAMITRA, TEACHING QUALITY : शिक्षामित्र नौकरी और वेतन के लिए ही सड़क पर उतरे हैं, शिक्षा के लिए नहीं इस देश में सरकारें शुरू से शिक्षा के साथ खिलवाड़ करती आई हैं, अच्छी शिक्षा के लिए कभी तो कोई आंदोलन करता?????

AGITATION, SHIKSHAMITRA, TEACHING QUALITY : शिक्षामित्र नौकरी और वेतन के लिए ही सड़क पर उतरे हैं, शिक्षा के लिए नहीं इस देश में सरकारें शुरू से शिक्षा के साथ खिलवाड़ करती आई हैं, अच्छी शिक्षा के लिए कभी तो कोई आंदोलन करता?????

शिक्षामित्र (नाम कितना अच्छा है!) फिर हड़ताल पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सहायक अध्यापक पद पर उनका समायोजन रद कर दिया। जब वे तैनात किए गए थे, तब तय था कि वे अध्यापक नहीं बनाए जाएंगे। इसलिए उनकी अर्हता अध्यापक लायक नहीं रखी गई थी। बाद में सरकार ने उन्हें धीरे-धीरे सहायक अध्यापक बना दिया। यह शिक्षा के साथ खिलवाड़ था। इस देश में सरकारें शुरू से शिक्षा के साथ खिलवाड़ करती आई हैं। शिक्षामित्रों के साथ हमें सहानुभूति है। उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए, वेतन मिलना चाहिए। वे नौकरी और वेतन के लिए ही सड़क पर उतरे हैं, शिक्षा के लिए नहीं। शिक्षा के लिए कोई सड़क पर नहीं उतरता। शिक्षक न सरकार, स्कूल न अभिभावक। सब उसके साथ खिलवाड़ करते हैं।

सरकारी स्कूल खिलवाड़ हैं। मुफ्त की कॉपी-किताबें-बस्ता-ड्रेस-मध्याह्न भोजन आदि खिलवाड़ के अलावा और क्या हैं/ इन सबसे बच्चे कैसी शिक्षा पा रहे हैं/ कक्षा पांच का बच्चा कक्षा दो का सवाल हल नहीं कर पाता। स्कूल में दिन में खाना मिलेगा, इसलिए स्कूल जाओ। शिक्षा मिलेगी, इसलिए नहीं। भोजन के बहाने बच्चों को स्कूल बुलाना एक तरीका हो सकता है, लेकिन उसमें पेट की भूख बड़ी हो जाती है, शिक्षा की भूख गायब। मध्याह्न भोजन के कीड़े अक्सर खबरों में दिखते हैं। शिक्षा में पड़े कीड़े किसी को दिखते नहीं। कोई शायद ही उन्हें देखना चाहता हो।

महंगे, पंचतारा निजी स्कूल और भी बड़ा खिलवाड़ हैं। वे वंचित तबके के लिए सबसे बड़ी ईर्ष्या हैं। उनके मुंह पर तमाचा हैं। सरकारी स्कूलों और पंचतारा निजी स्कूलों के बीच स्कूलों की विविध श्रेणियां हैं। वहां अभिभावकों की सामाजिक-आर्थिक औकात का भौंडा प्रदर्शन होता है। रिजल्ट में डिवीजन और नंबरों के प्रतिशत की प्रतियोगिता होती है। ज्यादातर बच्चों के हिस्से कुंठा आती है। इन स्कूलों से निकले बच्चे कैसे पढ़े-लिखे नागरिक बनते हैं, हम सब उसके गवाह हैं।

इस देश की संसद ने सबको शिक्षा का अधिकार भी दे ही दिया है। शिक्षा पाना हर बच्चे का अधिकार बन गया है। यह अपने आप में कम बड़ा मजाक नहीं। संविधान ने बहुत सारी चीजें हमें बतौर नागरिक दे रखी हैं, लेकिन किससे पूछें कि वे मिलती क्यों नहीं और मिलती हैं तो कितनी और किस रूप में। शिक्षा के अधिकार के तहत हर निजी स्कूल को कुछ सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला देना जरूरी है।

शिक्षा के लिए गरीब और अमीर बच्चे का भेद क्यों होना चाहिए, हमें तो यही समझ में नहीं आता। चलिए, होता है तो महंगे निजी स्कूल गरीब बच्चों को दाखिला देने से ही इनकार कर देते हैं। प्रशासन का डंडा चलने पर दाखिला दे देते हैं, लेकिन उनके साथ अछूतों जैसा व्यवहार करते हैं। उन्हें ‘अमीर’ बच्चों के साथ नहीं बैठाते। उनके लिए अलग समय पर अलग कक्षा चलाते हैं। शिक्षक/शिक्षिका भी उनके लिए स्तरीय नहीं होते। उन्हें किसी तरह पढ़ते हुए दिखाना होता है। औपचारिकता पूरी करनी होती है। ये बच्चे कैसी शिक्षा पा रहे होंगे, कैसी कुंठा उनके मन में भर रही होगी। संवैधानिक अधिकार के नाम पर इन बच्चों के साथ कैसा खिलवाड़ हो रहा है।

शिक्षामित्रों को पक्की नौकरी चाहिए। पूरी नौकरी वाले शिक्षकों को बढ़ा हुआ वेतनमान चाहिए। अभिभावकों को स्कूल का बड़ा नाम चाहिए। बड़े स्कूल को बड़ा मुनाफा चाहिए। अच्छा इनसान बनाने वाली शिक्षा किसी को नहीं चाहिए। असली शिक्षा के लिए कोई सड़क पर नहीं उतरता। अच्छी शिक्षा के लिए कभी तो कोई आंदोलन करता?

सम्पादकीय पृष्ठ से नवीन जोशी जी ।

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