Saturday, April 30, 2016

डी0एल0एड0 (बी0टी0सी0)/डी0पी0एसई0 (एन0टी0टी0) समबद्धता 2016-17 हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित : क्लिक कर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले निजी संस्थानों के निरीक्षण का प्रारूप और आवेदन पत्र डाउनलोड कर देखें ।

डी0एल0एड0 (बी0टी0सी0)/डी0पी0एसई0 (एन0टी0टी0) समबद्धता 2016-17 हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित : क्लिक कर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले निजी संस्थानों के निरीक्षण का प्रारूप और आवेदन पत्र डाउनलोड कर देखें ।

🌑 निजी बी0टी0सी0 सम्बद्धता 2016-17 से या आवेदन हेतु विज्ञप्ति !    

🌑 NCTE से मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों से सत्र 2016-17 में बी0टी0सी0/एन0टी0टी0 पाठयक्रम संचालन की सम्बद्धता हेतु निरीक्षण आवेदन पत्र ्र 

🌑 NCTE से मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों से सत्र 2016-17 में बी0टी0सी0/एन0टी0टी0 पाठयक्रम संचालन की सम्बद्धता हेतु आवेदन पत्र  

किशोर न्याय समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में बाल सुधार गृहों में निवासित बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रवेश देने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी।

किशोर न्याय समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में बाल सुधार गृहों में निवासित बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रवेश देने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी।

प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था के सम्बन्ध में, निर्धारित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध करायें ।

प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था के सम्बन्ध में, निर्धारित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध करायें

डायट प्राचार्य मुरादाबाद में नए बीएसए मुरादाबाद : क्लिक कर शुक्रवार को शासन से जारी हुआ आदेश देखें ।

डायट प्राचार्य मुरादाबाद में नए बीएसए मुरादाबाद : क्लिक कर शुक्रवार को शासन से जारी हुआ आदेश देखें ।

परिषदीय स्कूलों में निःशुल्क पुस्तक वितरण हेतु पुस्तकों की छपाई का टेंडर फिर : पहली बार टेंडर लेने वाली फर्म ने किया इंकार शुक्रवार को फिर से दोबारा माँगा गया टेंडर

परिषदीय स्कूलों में निःशुल्क पुस्तक वितरण हेतु पुस्तकों की छपाई का टेंडर फिर : पहली बार टेंडर लेने वाली फर्म ने किया इंकार शुक्रवार को फिर से दोबारा माँगा गया टेंडर

स्कूलों में नए शौचालयों के निर्माण की जगह खराब अवस्था में पड़े शौचालयों की मरम्मत और नवीकरण पर केंद्रित एक नए अभियान की शुरुआत

स्कूलों में नए शौचालयों के निर्माण की जगह खराब अवस्था में पड़े शौचालयों की मरम्मत और नवीकरण पर केंद्रित एक नए अभियान की शुरुआत

नई दिल्ली । भारत के स्कूलों में नए शौचालयों के निर्माण की जगह खराब अवस्था में पड़े शौचालयों की मरम्मत और नवीकरण पर केंद्रित एक नए अभियान की शुरुआत की गई है। अमेरिका स्थित पर्सनल केयर कारपोरेशन, किंबेर्ले-क्लार्क (के-सी) ने शहर में स्थित एनजीओ चैरिटीज एड फाउंडेशन के सहयोग से हाल ही में यहां ‘‘टॉयलेट्स चेंज लाइव्स’ के नाम से एक अभियान की शुरुआत की है। अभियान स्कूलों में शौचालयों की मरम्मत के जरिए स्वच्छता की जरूरत को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए शुरू किया गया है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के पांच राज्यों- दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों में पहले से निर्मित लेकिन बेकार पड़े 100 शौचालयों की मरम्मत कराना है। केसी के अध्यक्ष अचल अग्रवाल के अनुसार स्वच्छता के मुद्दे को तीन भागों में बांटा जाना चाहिए-शौचालयों का निर्माण, शौचालयों की देखरेख करते रहना और शौचालय का इस्तेमाल कर रहे लोगों का समर्थन करना।

‘‘मेन्यू’ बदलकर एमडीएम संस्थाएं भर रहीं जेबें मंत्री का आदेश भी बेमानी : नौ महीने से लटकी है जांच, चेतावनी देकर छोड़ा गया है संस्थाओं को

‘‘मेन्यू’ बदलकर एमडीएम संस्थाएं भर रहीं जेबें
मंत्री का आदेश भी बेमानी : नौ महीने से लटकी है जांच, चेतावनी देकर छोड़ा गया है संस्थाओं को

लखनऊ (एसएनबी)। मिड डे मील के तहत नगरीय क्षेत्रों के स्कूलों में ‘‘मेन्यू’ बदलकर खाना परोसने वाली संस्था के ठेकेदारों की जांच कराने तथा उन पर कार्रवाई करने के लिए तत्कालीन बाल विकास पुष्टाहार एवं बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री वसीम अहमद ने एमडीएम निदेशक सुश्री श्रद्धा मिश्रा को निर्देशित किया था। इसके बाद भी नगर क्षेत्र की तीन संस्थाएं उन्मेष, फेयरडील ग्रामोद्योग, शाश्वत सेवा संस्थान व अवध ग्राम सेवा समिति ने नियमों को धता बताकर कई महीनों तक बच्चों को दलिया ही बांट कर जेबें भरी थीं। यही नहीं स्कूलों के रजिस्टर में भी दलिया, मीठी दलिया, खीर व नमकीन दलिया बांटे जाने की बात दर्ज है। जब यह मामला सामने आया तो तत्कालीन बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री वसीम अहमद ने संज्ञान लेते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश निदेशक एमडीएम को दिये थे, लेकिन अभी तक इस जांच का ‘‘स्टेटस’ अधिकारी बताने को तैयार नहीं हैं। एमडीएम की निदेशक श्रद्धा मिश्रा व एडी बेसिक महेन्द्र सिंह राणा ने माना कि एमडीएम का ‘‘मेन्यू’ बदलना भी अपराध है और संस्था को दिये गये आदेश में यह साफ लिखा हुआ है कि वे मेन्यू के अनुसार ही शुद्ध भोजन देंगे। श्री राणा ने कहा कि यह जांच एमडीएम के अधिकारी ही देखते हैं, अत: उन्हें चारों संस्थाओं पर की जा रही जांच का ‘‘स्टेटस’ नहीं पता है।

लखनऊ (एसएनबी)। महीनों से गलत मेन्यू के अनुसार खाना बांट रहीं चार संस्थाओं को भुगतान पर बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने कहा कि संस्थाओं के खिलाफ जांच अभी भी लम्बित है। उन्होंने कहा कि चूंकि जब तक अन्यत्र व्यवस्था नहीं की जाती है तब तक उन्हें चेतावनी दी गयी है और इसके बाद ही उन्हें भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि 30 जून-2016 तक ही इन संस्थाओं को कार्य करने के लिए अनुमति दी गयी है, इस बीच उनके गुण-दोष के आधार पर ही उन्हें आगे के लिए अनुमति दी जाएगी। 

जांच के बावजूद हो गया दागी संस्थाओं का भुगतान
मात्र स्पष्टीकरण मांगकर पूरी की जाती है जांच
गरीब बच्चों को प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने के लिए प्रेरित करने व शिक्षित करने के लिए चलायी जा रही केन्द्र सरकार की मिड डे मील (एमडीएम) योजना कुछ संस्थाओं के लिए मात्र जेबें भरने का साधन बन गयी हैं। एनजीओ की लापरवाही से न केवल स्कूली बच्चों को घटिया खाना परोसने बल्कि ‘‘मेन्यू’ बदलकर बच्चों को खाना खिलाने वाली राजधानी की चार संस्थाओं पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

आरोप है कि एमडीएम की निगरानी के लिए लगाये गये अधिकारी न केवल इन संस्थाओं पर उदार हैं बल्कि वे महत्वपूर्ण मामलों में स्पष्टीकरण मांगकर ही काम चलाते हैं और लाखों रुपये का भुगतान कर दे रहे हैं। नगरीय क्षेत्रों में खाना बांट रहीं संस्थाओं का हाल सर्वाधिक बुरा है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र के कुछ इलाकों के करीब 45,000 बच्चों को खाना परोस रहीं इन संस्थाओं के पास न तो अत्याधुनिक मशीने हैं और न ही कहीं और काम करने का अनुभव। कागजों पर चाक-चौबन्द व्यवस्था दिखाने वाली इन संस्थाओं को नगरीय क्षेत्रों में खाना परोसने का काम सौंप दिया गया। इन संस्थाओं ने भी अपनी मनमानी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

संस्थाओं के ठेकेदार शासन द्वारा दिये गये ‘‘मेन्यू’ को ही बदल दे रहे हैं तो वहीं बच्चों की संख्या में भी खासा गड़बड़ी कर भुगतान ले रहे हैं। पिछले वर्ष 15 जुलाई से नया मेन्यू जारी करते हुए मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण ने भले ही सोमवार व बृहस्पतिवार को रोटी व सब्जी का प्राविधान किया हो, लेकिन राजधानी में करीब पांच हजार बच्चों को खाना बांट रही संस्था उन्मेष, फेयरडील ग्रामोद्योग, शाश्वत सेवा संस्थान व अवध ग्राम सेवा संस्थान ने जुलाई, अगस्त, सितम्बर व अक्टूबर के महीनों में दलिया बांटकर लाखों रुपये जेब में रखे। मजेदार बात यह है कि स्कूलों के रजिस्टर में भी वही दर्ज किया गया है, इसके बाद भी वे पूरा भुगतान लेने में सफल रहे हैं। लाखों रुपये के इन बिलों को इसी 31 मार्च 2016 को को भुगतान कर दिया गया है। वहीं डीएम राजशेखर के आदेश पर खाने में कीड़ा पाये जाने पर छत्तीसगढ़ सामाजिक सेवा संस्थान को काली सूची में डाल दिया गया है। इस बाबत बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया कि इस संस्था की भी अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आ पायी है, लेकिन पिछला भुगतान कर दिया गया है। 

प्रशिक्षु शिक्षक चयन-2011 (चतुर्थ चरण) का परीक्षा परिणाम जारी : क्लिक कर डाउनलोड कर देखें ।

प्रशिक्षु शिक्षक चयन-2011 (चतुर्थ चरण) का परीक्षा परिणाम जारी : क्लिक कर डाउनलोड कर देखें ।

38 हजार अभ्यर्थी ‘हिट विकेट’ : ओएमआर शीट न भरने की वजह से परीक्षा से बाहर

38 हजार अभ्यर्थी ‘हिट विकेट’ : ओएमआर शीट न भरने की वजह से परीक्षा से बाहर

राब्यू, इलाहाबाद : शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2015 में इस बार 38 हजार अभ्यर्थी ‘हिट विकेट’ हो गए हैं। यानी उन्होंने अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार ली। युवा अपनी ओएमआर शीट सलीके से नहीं भर सके। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुए बिना ही वह रेस से बाहर से हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए परीक्षा देने वाले ऐसे युवाओं की तादाद प्राथमिक की अपेक्षा चार गुना अधिक रही है।

टीईटी 2015 में प्राथमिक विद्यालयों के लिए दो लाख 58 हजार 372 युवाओं ने पंजीकरण कराया था, उनमें से दो लाख 37 हजार 620 परीक्षा में बैठे। इनमें महज 17 फीसद युवा उत्तीर्ण हुए। एनआइसी लखनऊ ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी को परिणाम जारी करने के बाद जो रिपोर्ट सौंपी है वह दिलचस्प है। इसमें 4242 ऐसे युवा हैं जिन्होंने अपनी ओएमआर शीट में उत्तर पुस्तिका का सीरियल नंबर यानी क्रमांक नहीं भरा। वहीं 3628 युवा ऐसे थे जिन्होंने ओएमआर शीट में भाषा का कॉलम काला नहीं किया। इस बार टीईटी में भले ही अलग से भाषा का प्रश्नपत्र नहीं था, लेकिन जिस भाषा के सवालों का जवाब देना था उस गोले को काला किया जाने का निर्देश था। ऐसे ही उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए छह लाख 71 हजार 796 युवाओं ने पंजीकरण कराया था, उनमें से छह लाख 22 हजार 437 परीक्षा में बैठे। इनमें से 5801 युवा ऐसे थे जिन्होंने ओएमआर शीट में सीरियल नंबर नहीं डाला। 7941 ऐसे युवा थे जिन्होंने भाषा का उल्लेख नहीं किया। 16 हजार 811 अभ्यर्थी ऐसे थे, जिन्होंने उत्तर पुस्तिका के ए, बी, सी और डी सीरीज में से किसी एक का अंकन ओएमआर शीट में नहीं किया। इन कमियों के कारण उनकी ओएमआर शीट का मूल्यांकन ही नहीं किया गया। युवा इसके लिए कक्ष निरीक्षकों को दोषी मानते हैं।

अंग्रेजी का उत्तीर्ण प्रतिशत बेहतर : प्राथमिक विद्यालयों के लिए अंग्रेजी भाषा को लेकर परीक्षा देने वाले युवाओं की सफलता का ग्राफ सबसे अधिक रहा। अंग्रेजी भाषा की परीक्षा 72 हजार 283 युवाओं ने दी थी उनमें से 28 हजार 393 यानी 39.28 फीसद सफल रहे। ऐसे ही संस्कृत भाषा की परीक्षा देने वालों की तादाद काफी अधिक एक लाख 54 हजार 18 रही, लेकिन सफल 29 हजार 983 यानी 19.47 फीसद हो सकें। वहीं, उर्दू के लिए 11 हजार 319 ने परीक्षा दी और केवल 686 यानी 6.06 फीसद सफल हो पाए। उच्च प्राथमिक विद्यालय की भाषा परीक्षा में संस्कृत सबसे आगे रही। दो लाख 27 हजार 794 युवाओं ने परीक्षा दी और 42 हजार 286 यानी 18.56 फीसद सफल रहे। ऐसे ही अंग्रेजी में तीन लाख 84 हजार 782 ने परीक्षा दी और 44 हजार 133 यानी 11.47 फीसद सफल हुए। उर्दू की परीक्षा में 9861 शामिल हुए, उनमें 934 यानी 9.47 फीसद सफल हो पाए हैं।

एक जनवरी 2016 से लागू होने वाले सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलने का इंतजार जल्‍द खत्‍म : सरकारी कर्मचारियों को जून-जुलाई तक मिल सकती है बढ़ी हुई सैलरी 

एक जनवरी 2016 से लागू होने वाले सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलने का इंतजार जल्‍द खत्‍म : सरकारी कर्मचारियों को जून-जुलाई तक मिल सकती है बढ़ी हुई सैलरी 

नई दिल्‍ली : एक जनवरी 2016 से लागू होने वाले सातवें वेतन आयोग का लाभ केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने का इंतजार जल्‍द खत्‍म हो सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सातवें वेतन आयोग के तहत अगले दो महीनों में केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी का लाभ मिल सकता है। एक न्‍यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी जून या जुलाई महीने तक मिल सकती है।

इस रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सचिवों की अधिकार प्राप्त समूह सैलरी और पेंशन देने को लेकर वेतन आयोग की सिफारिशों पर जल्‍द सहमति प्रदान कर सकती है।

बता दें कि सरकार ने इसके लिए जनवरी में ही हाई पावर्ड पैनल बना दिया था, जिसे कैबिनेट सेक्रेट्री पीके सिन्‍हा हेड कर रहे हैं। इस पैनल को 7वें वेतन आयोग के सुझावों को लागू करवाना है। अगर 7वां वेतन आयोग लागू होता है तो इससे 47 लाख कर्मचारियों और 52 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। नए पे स्‍केल लागू होने के बाद एक अनुमान के तौर पर सरकार के ऊपर 1.02 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा।
7वें वेतन आयोग को 2016-17 में लागू किया जाना है। 7वें वेतन आयोग को लागू करने से खजाने पर पड़ने वाले बोझ संबंधी रिपोर्ट तैयार हो रही है।

गौर हो कि केंद्र सरकार से सातवें वेतन आयोग ने सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कर्मचारियों के वेतन और भत्ते 23.55 फीसदी बढ़ाने की सिफारिश की थी और सैनिकों की तर्ज पर असैन्य कर्मचारियों के लिए भी ‘वन रैंक - वन पेंशन’ की व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की थी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंपी गई वेतन आयोग की रिपोर्ट में मौजूदा कमर्चारियों के मूल वेतन में 16%, भत्तों में 63% और पेंशन में 24% इजाफे की सिफारिश की गई थी। न्यायमूर्ति एके माथुर की अगुवाई वाले इस सातवें वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18 हजार और अधिकतम 2.25 लाख रुपये तय करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में सालाना तीन फीसदी वृद्धि की भी सिफारिश की है। छठा वेतन आयोग 1 जनवरी, 2006 से लागू हुआ था और माना जा रहा है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू हो जाएंगी। यानी कर्मचारियों को एरियर एक जनवरी 2016 से मिलेगा। आमतौर पर राज्यों द्वारा भी कुछ संशोधनों के साथ इन्हें अपनाया जाता है। एक महत्वपूर्ण सिफारिश में आयोग ने ग्रैच्युटी निर्धारण में अधिकतम वेतन की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है और जब कभी महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत तक बढ़ेगा, तो वेतन की अधिकतम सीमा में 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।

Friday, April 29, 2016

यूपी के 100 सरकारी स्कूलों में होंगी ‘स्मार्ट क्लास’ : चुने गए प्रत्येक स्कूल को राज्य सरकार ने 50-50 लाख रुपये का बजट जारी

यूपी के 100 सरकारी स्कूलों में होंगी ‘स्मार्ट क्लास’ : चुने गए प्रत्येक स्कूल को राज्य सरकार ने 50-50 लाख रुपये का बजट जारी

लखनऊ : सूबे की सरकार ने सरकारी स्कूलों में भी प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूलों की तरह ही आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की ओर एक अहम कदम बढ़ाया है। ‘क्लीन स्कूल-ग्रीन स्कूल योजना’ के तहत प्रदेश के सौ राजकीय बालक और बालिका इंटर कॉलेजों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए जाएंगे। साथ ही वहां सोलर पॉवर सिस्टम जैसी ढांचागत सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।

इसके लिए चुने गए प्रत्येक स्कूल को राज्य सरकार ने 50-50 लाख रुपये का बजट जारी किया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसके इस्तेमाल के लिए वित्त विभाग से अनुमति मांगी है। मई में सभी चयनित विद्यालयों को धनराशि भेजने की योजना है।

योजना के तहत स्कूलों को दी जाने वाली राशि के इस्तेमाल के लिए भी नियम तय कर दिए गए हैं। इनमें 10 लाख रुपये फर्नीचर पर, 20 लाख रुपये रख-रखाव और 20 लाख रुपये स्मार्ट क्लास व अन्य सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे।

स्मार्ट क्लासेज में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इसके लिए पाठ्यक्रम से संबंधित मैटेरियल का सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा निर्बाध पॉवर सप्लाई के लिए 5 केवीए का सोलर पॉवर सिस्टम स्कूलों में लगाया जाएगा।

दिल्ली सरकार की Mentor Teacher Scheme भर्ती : लगभग 200 शिक्षक सरकारी स्कूलों से जुड़ेंगे, ये शिक्षक रिसोर्स पर्सन/मेंटर की निभायेंगे भूमिका

दिल्ली सरकार की Mentor Teacher Scheme भर्ती : लगभग 200 शिक्षक सरकारी स्कूलों से जुड़ेंगे, ये शिक्षक रिसोर्स पर्सन/मेंटर की निभायेंगे भूमिका

मा0 बेसिक शिक्षा मंत्री जी की अध्यक्षता में दिनांक 05 मई 2016 को आयोजित समीक्षा बैठक में प्रतिभाग करने हेतु एजेण्डा प्रेषण के सम्बन्ध में।

मा0 बेसिक शिक्षा मंत्री जी की अध्यक्षता में दिनांक 05 मई 2016 को आयोजित समीक्षा बैठक में प्रतिभाग करने हेतु एजेण्डा प्रेषण के सम्बन्ध में।

15 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया सम्मिलित अभ्यर्थियों द्वारा पद बढ़ाये जाने की मांग एवं नियुक्ति प्रक्रिया के अग्रिम चरण की कार्यवाही हेतु माँगा गया स्पष्टीकरण।

15 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया सम्मिलित अभ्यर्थियों द्वारा पद बढ़ाये जाने की मांग एवं नियुक्ति प्रक्रिया के अग्रिम चरण की कार्यवाही हेतु माँगा गया स्पष्टीकरण।

शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण वैध : प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को दूरस्थ माध्यम से बीटीसी प्रशिक्षण दिए जाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैध ठहराया

शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण वैध : प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को दूरस्थ माध्यम से बीटीसी प्रशिक्षण दिए जाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैध ठहराया

विधि संवाददाता, इलाहाबाद : प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को दूरस्थ माध्यम से बीटीसी प्रशिक्षण दिए जाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैध ठहराया है। कोर्ट ने फिलहाल इसके खिलाफ याचिका खारिज कर दी है और कहा है कि चूंकि मामला खंडपीठ से तय हो चुका है इसलिए हस्तक्षेप का औचित्य नहीं है। छह माह के लंबे अंतराल बाद शिक्षामित्रों ने राहत की सांस ली है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षा मित्रों को दूरस्थ पद्धति से दो साल का प्रशिक्षण दिया गया था। इसके खिलाफ बीटीसी अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) से दूरस्थ विधि से दिया गया प्रशिक्षण नियमों के अनुसार नहीं है।

तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में यह मामला पहले आ चुका है जिसमें बीटीसी अभ्यर्थियों को राहत नहीं मिली थी। कोर्ट ने तर्को से सहमति जताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि 12 सितंबर को शिक्षामित्रों का समायोजन रद करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दूरस्थ शिक्षा से प्रशिक्षण देने के मामले की वैधता एनसीटीई पर छोड़ दी थी। उस समय हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशिक्षण के मामले में एनसीटीई (नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजूकेशन) का निर्णय ही मान्य होगा। बाद में खंडपीठ का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व बरेली के एक अभ्यर्थी की ओर से मांगी गई जनसूचना का जवाब देते हुए एनसीटीई ने बीटीसी के दूरस्थ प्रशिक्षण को वैध माना था। उप्र दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि हाईकोर्ट के इस फैसले से शिक्षा मित्रों का मनोबल बढ़ा है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ और आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने भी कोर्ट से फैसले का स्वागत किया और सुभाष चौराहे पर मिठाइयां बांटी।







√√ दूरस्थ बीटीसी के विरोध में दायर की गई थी याचिका

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन का कार्यकाल बढ़ाए जाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि लखनऊ पीठ में इसी मामले को लेकर विचाराधीन नूतन ठाकुर की याचिका पर याची को अर्जी देने की छूट है। यह याचिका पंजाब के पूर्व डीजीपी जेएफ रिबेरो और अन्य पूर्व अधिकारियों ने दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते हुए यह आदेश चीफ जस्टिस डॉ डीवाई चन्द्रचूड और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने दिया है। याचिका पर वकील सतीश चतुर्वेदी और राज्य सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।
नहीं है। शिक्षामित्रों के प्रशिक्षण को बीटीसी अभ्यर्थियों द्वारा चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

शिक्षमित्रों का समायोजन रद करते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दूरस्थ शिक्षा के जरिए प्रशिक्षण देने के मामले की वैधता एनसीटीई पर छोड़ दी थी। बाद में खण्डपीठ के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया। इसके बाद बीटीसी अभ्यर्थियों ने दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण को चुनौती दी। उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने इस फैसले पर खुशी जताई है।



शिक्षामित्रों को दूरस्थ अध्ययन से प्रशिक्षण का रास्ता साफ, याचिका खारिज : उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने यह जानकारी देते हुए फैसले पर खुशी जतायी है।

प्रदेश के पौने दो लाख शिक्षामित्रों को दूरस्थ अध्ययन से बीटीसी प्रशिक्षण दिये जाने के विरोध में दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों का मामला खण्डपीठ से तय हो चुका है और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए हस्तक्षेप का औचित्य नहीं है। प्रशिक्षण की बीटीसी अभ्यर्थियों द्वारा चुनौती दी गयी थी। अदालत ने फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।उल्लेखनीय है कि शिक्षमित्रों का समायोजन रद्द करते हुए हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने दूरस्थ शिक्षा से प्रशिक्षण देने के मामले की वैधता एनसीटीई पर छोड़ दी थी। बाद में खण्डपीठ का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया। बीटीसी अभ्यर्थियों ने दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण को चुनौती दी थी। 

मुख्य सचिव के खिलाफ याचिका खारिज

इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन का कार्यकाल बढ़ाये जाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि लखनऊ पीठ में इसी मामले को लेकर विचाराधीन नूतन ठाकूर की याचिका पर याची को अर्जी देने की छूट दी है और पंजाब के पूर्व डीजीपी जेएफ रिबेरो व अन्य पूर्व अधिकारियों की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डॉ.डीवाई चंद्रचूड तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सतीश चतुर्वेदी व राज्य सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।
      -राष्ट्रीय सहारा


प्राथमिक से हाईस्कूलों में नियुक्ति को मंजूरी

प्राथमिक से हाईस्कूलों में नियुक्ति को मंजूरी

इलाहाबाद : प्राइमरी स्कूलों में 72,825 टीईटी शिक्षक भर्ती के साथ ही जूनियर हाईस्कूलों में 29,334 गणित-विज्ञान के सहायक अध्यापक भर्ती में भी चयनित अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट ने तीन माह में नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

इन अभ्यर्थियों की याचिका पर जस्टिस बी. अमित स्थालेकर ने सुनवाई की। राजेन्द्र सहित 20 लोगों ने याचिका दाखिल कर कहा कि वे 72,825 सहायक अध्यापकों की भर्ती के तहत चयनित हुए और कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। बाद में उनका चयन सहायक अध्यापकों की भर्ती में भी हो गया था। अब उन्हें जॉइिनंग नहीं दी जा रही।

UP में शिक्षा विभाग के स्कूल चलो अभियान में झुलस रहे बच्चे : सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों पर ज्यादा से ज्यादा एडमिशन का दबाव

UP में शिक्षा विभाग के स्कूल चलो अभियान में झुलस रहे बच्चे : सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों पर ज्यादा से ज्यादा एडमिशन का दबाव

आजमगढ। स्वरमिल चंद्रा। आजमगढ़ में नया सत्र शुरू होते ही सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों पर ज्यादा से ज्यादा एडमिशन का दबाव है। इसके लिए ये अध्यापक गांव-गांव घूम घूमकर अभिभावकों को उनके बच्चों के एडमिशन के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। इसी कवायद में स्कूल चलो रैली के भी आयोजन हर स्कूल में हो रहे हैं। 

स्कूल से लेकर ब्लाक रिसोर्स सेंटरों तक रैलियों की धूम है लेकिन इस जागरूकता अभियान में मासूम बच्चे पिस रहे हैं। इस तेज धूप में इन रैलियों का मुख्य हिस्सा प्राइमरी स्कूलों में पढने वाले बच्चे ही होते हैं। जो 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रैली में शामिल होते हैं। खास यह है कि इनमें से कई बच्चे बिना चप्पल जूते के ही रैली में शिरकत करने को मजबूर होते हैं। 

ताजा मामला अजमतगढ ब्लाक संसाधन केंद्र का है जहां ब्लाक क्षेत्र के चार प्राइमरी स्कूलों के बच्चों ने स्कूल चलो रैली में हिस्सा लिया। इनमें से कई बच्चे बिना चप्पल जूतों के थे और तपते रास्तों पर कांपते होंठों से सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े नारे लगा रहे थे।

टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट : पंजीकरण, अनुक्रमांक, जन्मतिथि व वर्ष भरकर पा सकेंगे प्रमाणपत्र

टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट : पंजीकरण, अनुक्रमांक, जन्मतिथि व वर्ष भरकर पा सकेंगे प्रमाणपत्र

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद । शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2015 उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट दिया जाएगा। शासन ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। एनआइसी की वेबसाइट से अभ्यर्थी इसका प्रिंट ले सकेंगे। इसके लिए अभ्यर्थियों को पंजीकरण नंबर, अनुक्रमांक, जन्मतिथि, परीक्षा वर्ष भरना होगा, तभी प्रमाणपत्र हासिल कर सकेंगे। प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने वाले महकमे परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने इस बार टीईटी का प्रमाणपत्र निर्गत करने के नियमों में संशोधन किया है। पहले 90 फीसद अंक पाने वाले सामान्य वर्ग एवं 55 फीसद से अधिक अंक पाने वाले आरक्षित वर्ग एवं 82 और इससे अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को पात्रता प्रमाणपत्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के जरिए दिया जाता था। हाईटेक होती व्यवस्था में परीक्षा नियामक ने इस सर्टिफिकेट को पारदर्शी बनाया है।

इस बार से अभ्यर्थियों को ई-प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है। अभ्यर्थियों के अंक का विवरण एनआइसी लखनऊ की वेबसाइट पर जारी होगा। बदले नियमों के तहत ऑनलाइन आवेदन में अभ्यर्थी का नाम, माता-पिता का नाम या फिर वर्तनी में त्रुटि है तो ई-प्रमाणपत्र प्राप्त होने के एक माह के अंदर अपने आवेदन पत्र की हार्डकॉपी, संबंधित अभिलेख तथा सचिव के नाम 300 रुपये के डिमांड देना होगा। जांच के बाद दावा सत्य होने पर संशोधित ई-प्रमाणपत्र वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

15 मई के बाद मिलेगा प्रमाणपत्र

एनआइसी की वेबसाइट पर ई-प्रमाणपत्र का प्रकाशन परीक्षाफल घोषित होने के चार सप्ताह में किए जाने का दावा किया है। हालांकि इस बार यह समयावधि बुधवार को ही पूरी हो गई है। अभी एनआइसी की ओर से बनाई जाने वाली वेबसाइट की पड़ताल होगी और सारा रिकॉर्ड अपलोड किया जाएगा। ऐसे में कम से कम एक पखवारे का वक्त लगेगा। रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि अभ्यर्थी 15 मई के बाद ई-प्रमाणपत्र हासिल कर सकेंगे।

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