Thursday, December 31, 2015

मंत्री ने की 5वीं व 8वीं में बोर्ड परीक्षा की वकालत : चौथी तक ही बच्‍चों को पास किया जाए

मध्‍यप्रदेश के मंत्री ने की 5वीं व 8वीं में बोर्ड परीक्षा की वकालत : चौथी तक ही बच्‍चों को पास किया जाए

प्रतीकात्‍मक फोटो

भोपाल: देशभर में पांचवीं और आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा होने की संभावना है। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन के सुझाव पर सेंट्रल एडवायजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन (कैब) की उप-समिति ने पांचवीं और आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा कराने की सिफारिश की है। केंद्रीय मंत्री परिषद को अब इस पर फैसला करना है। शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के मकसद से बैठक में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा कराए जाने पर चर्चा हुई।

चौथी तक ही बच्‍चों को पास किया जाए

राज्य के शिक्षा मंत्री पारस जैन ने सुझाव दिया कि मौजूदा अधिनियम के प्रावधान के अनुसार, कक्षा चौथी तक तो बच्चों को उत्तीर्ण किया जाता रहे, लेकिन कक्षा पांचवीं में बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा कराई जाए। परीक्षा में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को एक माह का समय देकर उनकी पुन: परीक्षा ली जाए। ऐसी व्यवस्था आठवीं कक्षा के लिए भी रहे।

शिक्षकों का उत्‍तरदायित्‍व तय किया जाए

जैन के अनुसार उप-समिति ने इस बात की भी अनुशंसा की है कि प्रत्येक कक्षा का लर्निग स्तर हो। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए। स्कूली पाठ्यक्रम भी समयानुसार पूरा हो, ताकि विद्यार्थी की स्कूल जाने की आदत बनी रहे। उप-समिति की बैठक में राजस्थान के स्कूल शिक्षा मंत्री वासुदेव देवयानी, उत्तराखंड के स्कूल शिक्षा मंत्री एम.एस. नाथानी और महाराष्ट्र के शालेय शिक्षा मंत्री विनोद श्रीधर तावडे ने भाग लिया। राजस्थान के शिक्षा मंत्री देवयानी उप-समिति के अध्यक्ष हैं।


चौथी कक्षा तक ही हो 'फेल न करने की नीति': महाराष्ट्र सरकार

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर...

नयी दिल्ली: महाराष्ट्र ने छात्रों को ‘फेल ना करने’ की नीति में सुधार की सिफारिश करते हुए कहा है कि यह नीति चौथी कक्षा तक ही होनी चाहिए।

राज्य शिक्षा मंत्रियों की केंद्रीय शिक्षा परिषद की उप समिति की बैठक में महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि यह नीति चौथी कक्षा से आगे के लिए नहीं होनी चाहिए।

'5वीं से 8वीं कक्षा वालों को मिले एक और मौका'
हालांकि पांचवीं से आठवीं कक्षा तक नियमित परीक्षाएं होनी चाहिए। अगर छात्र परीक्षा में फेल होते हैं तो उन्हें एक महीने के भीतर दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाना चाहिए। अगर वे दोबारा परीक्षा में फेल होते हैं तो उन्हें उसी कक्षा में बनाए रखना चाहिए।


तावड़े ने वर्तमान नीति से निपटने के लिए टीचर्स को खास ट्रेनिंग दिए जाने पर भी जोर दिया।

दिल्ली और राजस्थान जैसे कई राज्यों ने नीति का विरोध किया है। नीति छात्रों से दबाव कम करने और उनके स्कूल छोड़ने को रोकने के लिए लायी गयी थी।

केंद्र की समिति ने की 8वीं कक्षा में बोर्ड एग्जाम की सिफारिश : समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से चौथी कक्षा तक छात्रों को फेल नहीं करने की सिफारिश करने का फैसला किया

केंद्र की समिति ने की 8वीं कक्षा में बोर्ड एग्जाम की सिफारिश : समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से चौथी कक्षा तक छात्रों को फेल नहीं करने की सिफारिश करने का फैसला किया

नई दिल्ली: केंद्र द्वारा गठित एक समिति ने स्कूली बच्चों के लिए फेल नहीं करने की नीति में कुछ बदलाव का समर्थन किया है जिसमें आठवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा लेना भी शामिल है।

राजस्थान में शिक्षा मंत्री वासुदेव देवयानी की अध्यक्षता वाली समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से चौथी कक्षा तक छात्रों को फेल नहीं करने की सिफारिश करने का फैसला किया है जबकि सभी कक्षाओं में मूल्यांकन पर जोर दिया है।

इसने पांचवीं कक्षा के लिए परीक्षा लेना राज्य सरकारों पर छोड़ने का निर्णय किया है।

गौरतलब है कि फेल नहीं करने की नीति के तहत आठवीं कक्षा तक छात्रों को फेल नहीं किया जाता है।

राजस्थान सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार समिति ने छठी और सातवीं कक्षा में फेल नहीं करने का समर्थन करते हुए आठवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा की सिफारिश करने का फैसला किया है।

बयान में देवयानी के हवाले से बताया गया है कि समिति ने इस मुद्दे पर 22 राज्यों से सुझाव मांगे और 18 राज्यों ने इसे बदलने के तरीके और इसे बेहतर करने के बारे में अपने विचार सौंपे हैं।
       सौजन्य : ndtv

मन की बात (Man Ki Baat) : दुर्भावनाग्रस्त शुभकामनाओं से कोई बचाए मुझे, मैं समझ सकता हूं कि सबके लिए अलग से शुभकामना लिखने का न तो वक्त है न हुनर..मैं भारत में आए शुभकामना संकट को राष्ट्रीय संकट मानता हूं क्योंकि..........

मन की बात (Man Ki Baat) : दुर्भावनाग्रस्त शुभकामनाओं से कोई बचाए मुझे, मैं समझ सकता हूं कि सबके लिए अलग से शुभकामना लिखने का न तो वक्त है न हुनर..मैं भारत में आए शुभकामना संकट को राष्ट्रीय संकट मानता हूं क्योंकि..........

नववर्षागमन की पूर्व संध्या की बेला पर लिखने के लिए नया कुछ नहीं है। सारी बातें कही और लिखी जा चुकी हैं। लोग इस कदर बोर हो चुके हैं कि शुभकामनाओं की रिसाइक्लिंग करने लगे हैं। शुभकामनाओं का भी अर्थशास्त्र के सीमान्त उपयोगिता ह्रास नियम के तहत मूल्यांकन होना चाहिए। एक ही शुभकामना अगर कई लोगों से होते हुए आप तक पहुंचे तो उसका क्या असर होगा। कई साल से इस्तेमाल में हो तब क्या कोई असर बाकी रह सकता है। गन्ने की तरह हमने शुभकामनाओं से रसों को आख़िरी बूंद तक निचोड़ लिया है।

मैं समझ सकता हूं कि सबके लिए अलग से शुभकामना लिखने का न तो वक्त है न हुनर। जिनको अंग्रेज़ी नहीं आती उनका अंग्रेज़ी में न्यू ईयर विश देखकर टेंशन में आ जाता हूं कि ये कब सीख लिया इसने। हर शुभकामना में समृद्धि होती है। क्यों होती है और इससे क्या हम समृद्ध होते हैं? कुछ लोग हैप्पी न्यू ईयर का वर्ण विस्तार करेंगे। एच से कुछ बताएंगे तो वाई से कुछ। हम तो स्कूल में यही पढ़कर निकले कि वाई से सिर्फ याक होता है। किसी ने नहीं बताया कि ईयर भी होता है।

मैं शुभकामनाओं के आतंक से घबराया हुआ हूं। बाज़ार में वही पुरानी शुभकामनाएं हैं, जिनमें साल हटाकर कभी होली तो कभी दीवाली लिख देते हैं। अकर-बकर कुछ भी बके जा रहे हैं लोग। अकर-बकर आबरा का डाबरा का भोजपुरी रूपांतरण है। हम सब अपना और समाज का फालतूकरण कर रहे हैं। अंग्रेज़ी शब्द एब्सर्ड के एंबेसडर हो गए हैं। मेरा बस चलता तो एक शुभकामना पुलिस बनाता। जो भी पिछले साल की शुभकामनाओं का वितरण करता पाया गया उसे कमरे में बिठाकर एक हज़ार बार वही शुभकामनाएं लिखवाता ताकि उसे जीवनभर के लिए याद रह जाता कि ये वही वाली शुभकामना है, जिसे भेजने पर पुलिस ले गई थी।

मैं भारत में आए शुभकामना संकट को राष्ट्रीय संकट मानता हूं। इस संकट को दूर करने के लिए अखिल भारतीय शुभकामना आयोग बनाना ही पड़ेगा। ईश्वर के लिए इस आयोग का चेयरमैन रिटायर्ड जज नहीं होगा। मैं रिटायर्ड जज वाले आयोगों से भी उकता गया हूं। जैसे किसी आयोग का जन्म रिटायर्ड जज के पुनर्जन्म के लिए ही होता है। आयोग से जजों का आतंक दूर करना भी मेरा मक़सद है। इसलिए शुभकामना आयोग का चेयरमैन ख़ुद बनूंगा। दुनिया से आह्वान करूंगा कि पुरानी शुभकामनाएं न भेजें। इससे लगता है कि पुराना साल ही यू-टर्न लेकर आ गया है। अगर आप शुभकामना नहीं भेजेंगे तब भी वर्षागमन तो होना ही है। जो लोग नया नहीं रच पाएंगे उनके लिए मैं मनोवैज्ञानिक चिकित्सा उपलब्ध कराऊंगा। ताकि उन्हें यकीन रहे कि बिना शुभकामना भेजे भी वो नए साल में जीने योग्य होंगे।

प्लीज, पुरानी शुभकामनाओं से नए साल को प्रदूषित न करें। कुछ नया कहें। कुछ नया सोचें। आपके आशीर्वाद से कोई समृद्ध होने लगे तो नेता आपके हाथ काट ले जाएंगे। अपने दफ्तर में टांग देंगे। इसलिए खुद को ही शुभकामना दीजिये कि आपको वर्षागमन पर किसी की शुभकामना की दरकार ही न हो। समृद्धि एक सामाजिक स्वप्न है या व्यक्तिगत हम यही तय नहीं कर पाए। सरकार सोचती है कि सबको समृद्ध करें। इंसान सोचता है कि खाली हमीं ही समृद्ध हों, लेकिन शुभकामनाओं की ये ग़रीबी मुझसे बर्दाश्त नहीं होती है।

इसलिए हे प्रेषकों, आपके द्वारा प्रेषित शुभकामनाओं से सदेच्छा संसार में बोरियत पैदा हो रही है। आप किसी के द्वारा प्रेषित घटिया शुभकामना को किसी और के इनबॉक्स में ठेलकर बदला न लें। जो जहां है, वहीं रहे। ये साल आकर चला जाएगा। कुछ काम नहीं है तो टाटा-407 बुक कीजिये। दस दोस्तों को जमा कीजिये और कहीं चले जाइये। मीट मुर्ग़ा भून भून के बनाते रहिए। स्वेटर उतार कर कमर से बांध लीजिये या कंधे पर रख लीजिये। एक ठो म्यूज़िक सिस्टम लेते जाइयेगा। जब तक धूप रहे खान पान और डांस करने के बाद घर आ जाइयेगा।
 
चला चलंती की बेला में ये साल सला सल का ठेला है। अल्ल-बल्ल कुछ भी बकिये लेकिन जान लीजिए कि हमारी आपकी जीवन पद्धति का बंदोबस्त हो चुका है। शहर, पेशा और वेतन के अंतरों से ही अंतरकायम है वर्ना हमारी दुनिया एकरस हो चुकी है। लोड मत लीजिये। ऐश कीजिये । मस्ती का बहाना, जिसके आने जाने से मिले, वही स्वागतयोग्य है। बस ध्यान रहे कि कूकर की सीटी सुनाई दे। वरना मुर्ग़ा जल-भुन गया तो मूड ख़राब हो जाएगा। आप अपना देखो जी। हम अपनी देखते हैं। दुर्भावनाओं से लगने वाले पकाऊ थकाऊ और उबाऊ शुभकामनाएं न भेजें।
    सौजन्य : रविस कुमार जी एनडीटीवी

🌹🌹🚩नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आप सब बन्धु-बान्धवों को "आज का प्राइमरी का मास्टर । बेसिक शिक्षा न्यूज" की पूरी टीम की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं ।।।

आहिस्ता  चल  जिंदगी,अभी 
कई  कर्ज  चुकाना  बाकी  है 
कुछ  दर्द  मिटाना   बाकी  है 
कुछ   फर्ज निभाना  बाकी है 
                   रफ़्तार  में तेरे  चलने से 
                   कुछ रूठ गए कुछ छूट गए 
                   रूठों को मनाना बाकी है 
                   रोतों को हँसाना बाकी है 
कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए 
कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए 
उन टूटे -छूटे रिश्तों के 
जख्मों को मिटाना बाकी है 
                    कुछ हसरतें अभी  अधूरी हैं 
                    कुछ काम भी और जरूरी हैं 
                    जीवन की उलझ  पहेली को 
                    पूरा  सुलझाना  बाकी     है 
जब साँसों को थम जाना है 
फिर क्या खोना ,क्या पाना है 
पर मन के जिद्दी बच्चे को 
यह   बात   बताना  बाकी  है 
                     आहिस्ता चल जिंदगी ,अभी 
                     कई कर्ज चुकाना बाकी    है 
                     कुछ दर्द मिटाना   बाकी   है   
                     कुछ  फर्ज निभाना बाकी है !
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🌹🚩 नव वर्ष की स्वर्णिम किरण ।
शुभ  हो  तुम्हारा  आगमन ।
            जाग्रत नवल हो चेतना ।
            संकल्पना     संवेदना ।
            सत्मार्ग हो सतकर्म हो,
            बस सत्य की हो वन्दना ।
नवीन पथ हो नव सृजन ।
शुभ हो तुम्हारा आगमन ।
             गेह सब जन का भरा हो ।
            नेह   सबका   उर्वरा  हो ।
            हो हरित नित धरा अपनी,
            मेह  अमृत रस  भरा हो ।
स्वस्थ तन, प्रमुदित हो मन ।
शुभ हो तुम्हारा आगमन ।
             न क्लेश हो न भ्रांति हो ।
             सबके आनन कांति  हो ।
             शोषण से मुक्त समाज हो,
             सारे जगत में शांति हो ।
खुशहाल हो अपना वतन ।
शुभ  हो तुम्हारा आगमन ।
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     🌹🚩नव वर्ष की पावन बेला पर आप सब बन्धु-बान्धवों को "आज का प्राइमरी का मास्टर । बेसिक शिक्षा न्यूज" की पूरी टीम की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं ।

18 राज्यों आरटीई (RTE) में 'कोई नजरबंदी नीति' को रद्द करने के लिए सहमत

18 राज्यों आरटीई (RTE) में 'कोई नजरबंदी नीति' को रद्द करने के लिए सहमत

एजुकेशन (आरटीई) के अधिकार कानून के तहत 'कोई नजरबंदी नीति' में "आवश्यक संशोधन के लिए" 18 राज्यों की सहमति के साथ बुधवार को राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव Devnani की अध्यक्षता में एक समिति नीति तय करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को सिफारिश भेजना रद्द कर दिया जाना चाहिए।

नीति के तहत, कोई भी छात्र विफल हो सकता है या आठवीं कक्षा तक निष्कासित कर दिया जा सकता है । हालांकि, राज्यों, राजस्थान सहित, पहले से ही दूर नीति के साथ किया है। अपनी सिफारिशों में समिति ने नई दिल्ली में इस पर निर्णय लिया प्रत्येक वर्ग के एक छात्र वह या वह है कि वर्ग के लिए पात्र है या नहीं यह जांच करने के लिए एक 'सीखने के स्तर' तय किया जाना चाहिए कि कहा गया है।

सिफारिशों में कहा गया है कि "छात्रों को कक्षाओं छठी और सातवीं में हिरासत में नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्हें आवश्यक 'सीखने के स्तर' को पूरा करना होगा ।

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18 States agree to revoke ‘no detention policy’ in RTE

With the consent of 18 States for “required amendments” in the ‘no detention policy’ under the Right to Education (RTE) Act, a committee headed by Rajasthan Education Minister Vasudev Devnani on Wednesday sent recommendations to the Central government, stating that the policy should be revoked.

Under the policy, no student can be failed or expelled till Class VIII. However, States, including Rajasthan, have already done away with the policy. The committee in its recommendations decided upon in New Delhi, stated that a ‘learning level’ must be fixed for each class to check whether a student is eligible for the class that he or she is in.

“Students must not be detained in Classes VI and VII. However, they must meet the required ‘learning levels’,” the recommendations stated.

उत्‍तर प्रदेश (सेवा संघों को मान्‍यता) नियमावली, 1979 के नियमों का अनुपालन के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

कार्मिक विभाग / कार्मिक अनुभाग 4

√यहां क्लिक कर डाउनलोड करें-18/2015/1-ई.एम./2006-का-4-2015

उत्‍तर प्रदेश (सेवा संघों को मान्‍यता) नियमावली, 1979 के नियमों का अनुपालन के सम्बन्ध में आदेश जारी

यूपी में दो साल बाद बेसिक शिक्षकों को ट्रांसफर का मौका : क्लिक कर पूरी खबर पढ़ें, ट्रांसफर एक अप्रैल को 2016-17 सत्र शुरू होने से पहले, अंतर-जनपदीय के लिए करना होगा इंतजार

यूपी में दो साल बाद बेसिक शिक्षकों को ट्रांसफर का मौका : क्लिक कर पूरी खबर पढ़ें, ट्रांसफर एक अप्रैल को 2016-17 सत्र शुरू होने से पहले, अंतर-जनपदीय के लिए करना होगा इंतजार

इलाहाबाद । बेसिक शिक्षा परिषद के प्राइमरी व उच्च प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों को दो साल बाद जिले के अंदर ट्रांसफर का मौका मिलेगा। स्थानान्तरण व समायोजन के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है जो नीति निर्धारण के लिए अपनी रिपोर्ट चार जनवरी तक शासन को देगी।

समिति में मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशक वाराणसी व मुरादाबाद के अलावा लखनऊ, झांसी, गोंडा, इलाहाबाद व कुशीनगर के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है। जिले के अंदर शिक्षकों का ट्रांसफर दो साल से नहीं हुआ है। 2015 में ट्रांसफर के लिए 31 अगस्त को प्रमुख सचिव एचएल गुप्ता ने नीति जारी की थी।

लेकिन 12 सितम्बर को शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने के बाद प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब फिर से प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ट्रांसफर एक अप्रैल को 2016-17 सत्र शुरू होने से पहले हो जाएंगे।

अंतर-जनपदीय के लिए करना होगा इंतजार

सरकारी प्राइमरी व उच्च प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों को अंतर-जनपदीय तबादले के लिए इंतजार करना होगा। सूत्रों के अनुसार फिलहाल इस पर कोई विचार नहीं हो रहा। इससे पहले 2013 में अंतर-जनपदीय तबादले हुए थे।

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के लाभ प्राप्त पदोन्नति अध्यापकों की पदावनत के सम्बन्ध में ।

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के लाभ प्राप्त पदोन्नति अध्यापकों की पदावनत के सम्बन्ध में

बीटीसी प्रशिक्षण 2013 तथा सेवारत (मृतक आश्रित)/ उर्दू बीटीसी 2013 परीक्षा वर्ष 2015 के तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा सम्पन्न कराये जाने के सम्बन्ध आदेश और कार्यक्रम जारी।

बीटीसी प्रशिक्षण 2013 तथा सेवारत (मृतक आश्रित)/ उर्दू बीटीसी 2013 परीक्षा वर्ष 2015 के तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा सम्पन्न कराये जाने के सम्बन्ध आदेश और कार्यक्रम जारी।

परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों को समय से नियमित भुगतान करने के सम्बन्ध में निर्देश जारी ।

परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों को समय से नियमित भुगतान करने के सम्बन्ध में निर्देश जारी ।

मन की बात (Man Ki Baat) : शिक्षा के तंत्र में उम्मीदें अब भी जीवित हैं क्योंकि देश भर में अच्छे लोग बेहतरीन काम कर रहे हैं, अब जब हम नए साल में प्रवेश करने...........

मन की बात (Man Ki Baat) : शिक्षा के तंत्र में उम्मीदें अब भी जीवित हैं क्योंकि देश भर में अच्छे लोग बेहतरीन काम कर रहे हैं, अब जब हम नए साल में प्रवेश करने...........

मैं यहां पांच कहानियां बता रहा हूं। ये कहानियां मैंने साल 2015 में देश के अलग-अलग हिस्सों से बटोरी हैं। गरम मैदानी इलाके में एक शिक्षक अपने छात्र के घर जाता है, उसे गोदी में उठाकर अपनी बाइक पर बिठाता है, और फिर दोनों साथ-साथ स्कूल आते हैं। जब छुट्टी होती है, तो फिर दोनों साथ-साथ वापस घर लौटते हैं। वह छात्र अशक्त है। वह बच्च शेष बच्चों से अलग नहीं है- यह बात हर कोई महसूस करता है, मगर आकर्षण के केंद्र में वह शिक्षक है।

ऊंची पहाड़ियों पर वह सप्ताह के किसी एक दिन यह देखने के लिए हर छोटी बस्ती में जाती हैं कि सभी बच्चे स्कूल में तो हैं। इस तरह वह आशा और खुशी नामक दो बालिकाओं के करीब आईं। उनका परिवार खानाबदोश था, हर दिन मजदूरी की तलाश में घूमने वाला। उन्होंने दोनों बच्चियों को अपने स्कूल में दाखिले के लिए तैयार कर लिया। मगर एक दिन वे चले गए। यह तय है कि बेहतर मजदूरी की तलाश में उन्होंने उस जगह को छोड़ा होगा।

राज्य के सबसे वरिष्ठ स्कूल शिक्षा अधिकारी का यहां स्थानांतरण हुआ, तो दो महीने के बाद ही उनके तबादले की अफवाह उड़ने लगी। मगर उनके पास प्राथमिकता के अनुसार काम करने की पूरी सूची थी। उन्होंने तमाम संसाधनों का इस्तेमाल किया- वित्त विभाग से मिलने वाली रकम, अपने विभाग के अच्छे लोग और बाहरी मदद। संभावित स्थानांतरण की सूचना और अपनी आलोचना के बावजूद वह अनवरत काम करते रहे। सुखद बात यह है कि अब तक उनका तबादला नहीं हुआ है।

बड़ी-बड़ी व चमकीली आंखों वाली वह महिला रोजाना झाड़ लगाती हैं। वह स्कूल इतना साफ है कि आप फर्श पर भी खा सकते हैं। यह उनका काम नहीं है। उनका काम मिड डे मील बनाना है। तो वह ऐसा क्यों कर रही हैं? जवाब है- अगर सरकार सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही है, शिक्षक जी-तोड़ मेहनत करते हैं, तो क्या मुङो स्कूल के लिए कुछ नहीं करना चाहिए?वह सबसे पहले आते हैं और सबसे आखिरी में बोलते हैं, फिर सारी समस्याएं मानो खत्म हो जाती हैं।

वह हेड टीचर हैं और सुबह होते ही स्कूल पहुंच जाते हैं। वह वहां दो शिक्षकों के साथ न सिर्फ पढ़ाते हैं, बल्कि स्कूल के बाकी काम भी करते हैं। स्कूल बंद होने से एक घंटे पहले वह अपनी साइकिल से दस किलोमीटर दूर दूसरे स्कूल में जाते हैं। वह उसे भी देर शाम तक चलाते हैं। जब तक कोई दूसरा शिक्षक वहां के लिए नियुक्त नहीं हो जाता, वह ऐसा करते रहेंगे। ये कहानियां हमारी सरकारी स्कूली व्यवस्था की हैं। देश भर में अच्छे लोग बेहतरीन काम कर रहे हैं। अब जब हम नए साल में प्रवेश कर रहे हैं, तो मेरा भरोसा अब भी कायम है। बस गुजारिश यही है कि जब भी शिक्षा में सुधार की कोई नीति सफल हो, तो इन अच्छे लोगों को भी बराबर का श्रेय मिले।
  (ये लेखक के अपने विचार हैं)
  सौजन्य : मन की बत में  अनुराग बेहरसीईओ,अजीम प्रेमजी फाउंडेशन

शिक्षामित्रों ने मंत्री से लगाई जल्द समायोजन की गुहार : दस्तावेजों का जल्द कराएं सत्यापन, बेसिक शिक्षामंत्री अहमद हसन से मुलाकात कर दूसरे बैच के 14 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन जल्द करने की मांग हुई

शिक्षामित्रों ने मंत्री से लगाई जल्द समायोजन की गुहार : दस्तावेजों का जल्द कराएं सत्यापन, बेसिक शिक्षामंत्री अहमद हसन से मुलाकात कर दूसरे बैच के 14 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन जल्द करने की मांग हुई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को बेसिक शिक्षामंत्री अहमद हसन से मुलाकात कर दूसरे बैच के 14 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन जल्द करने की मांग की। बेसिक शिक्षामंत्री को बताया कि पिछले छह महीने से मानदेय तक नहीं मिला है, जिससे तमाम आर्थिक परेशानियोें का सामना करना पड़ रहा है। बेसिक शिक्षामंत्री ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

बता दें कि पहले और दूसरे बैच के 1 लाख 32 हजार शिक्षामित्रों को राज्य सरकार ने सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित कर दिया है। हाईकोर्ट के समायोजन रद्द करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे मिल जाने के बाद समायोजित हो चुके इन शिक्षामित्रों को वेतन जारी करने का फैसला किया गया है। बेसिक शिक्षा परिषद ने भी सभी बीएसए को 1.32 लाख समायोजित शिक्षामित्रों को जल्द वेतन भुगतान के आदेश दे दिए हैं। कई जिलों में भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, लेकिन अब भी दूसरे और तीसरे बैच के काफी शिक्षामित्र समायोजित नहीं हो सके हैं।

दस्तावेजों का जल्द कराएं सत्यापन

उधर, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश महामंत्री पुनीत चौधरी ने समायोजित शिक्षामित्रों के दस्तावेजों को जल्द सत्यापित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 93 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन मई 2015 में किया गया था, लेकिन अभी तक इनमें से 50 फीसदी समायोजित शिक्षामित्रों के दस्तावेजों का ही सत्यापन हो सका है। मेरठ और इलाहाबाद के यूपी बोर्ड के कार्यालय और आगरा विश्वविद्यालय दस्तावेजों के सत्यापन में काफी देर कर रहे हैं।

अब मोबाइल पर होगी पढ़ाई : सीबीएसई ने लॉन्च की e-cbse मोबाइल लर्निंग ऐप

अब मोबाइल पर होगी पढ़ाई : सीबीएसई ने लॉन्च की e-cbse मोबाइल लर्निंग ऐप

"यह बोर्ड की एक बेहतर पहल है, जिसका लाभ सभी स्टूडेंट्स को मिलेगा। डिजिटाइजेशन के दौर में यह पहल स्टूडेंट्स को सही दिशा देगी।"
- जावेद आलम खान, सिटी को-ऑर्डिनेटर, सीबीएसई 

लखनऊ : बच्चों की पढ़ाई में बाधा माने जाने वाले मोबाइल फोन अब पढ़ाई का जरिया बनेगा। इसके लिए सीबीएसई ने हाल में ही e-cbse नाम की एक मोबाइल ऐप लॉन्च की गई है। इस ऐप पर स्टूडेंट्स को स्टडी मटेरियल मुहैया करवाया जाएगा। ऐप पर उपलब्ध ई-लर्निंग मटेरियल सीबीएसई ने खुद तैयार किया है। यह पहल डिजिटल इंडिया के तहत की गई है। 

लखनऊ में सीबीएसई के 102 स्कूल हैं, जिसमें एक लाख से स्टूडेंट बढ़ते हैं। इस ऐप से ये सभी स्टूडेंट लाभान्वित होंगे। ऐप पर लगभग सभी विषयों का स्टडी मटेरियल मौजूद है। इससे जहां स्टूडेंट्स को प्रॉजेक्ट वर्क और सिलेबस इंप्रूव करने में फायदा मिलेगा, वहीं टीचर्स के स्टडी कंटेंट में भी इजाफा होगा। 

ऐसे करें डाउनलोड

e-cbse ऐप गूगल प्ले या विंडोज मार्केट से डाउनलोड की जा सकती है। इसके अलावा सीबीएसई ने इससे जुड़ा एक पोर्टल भी लॉन्च किया गया है। ecbse.nic.in पर सर्च कर स्टूडेंट और टीचर अकेडमिक, वोकेशनल और स्टडी सपोर्ट मटेरियल का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसमें क्लास के हिसाब से स्टडी मटेरियल मौजूद है। पूरे मटेरियल को छह कैटगरी में बांटा गया है। पहली कैटगरी में कक्षा एक से पांच, दूसरी में छठी से आठवीं, तीसरी में कक्षा नौ से दस और अन्य दो कैटेगरी में 11वीं और 12वीं का स्टडी मटेरियल है। इसके अलावा अदर का भी एक ऑप्शन है, जिसमें नैतिक शिक्षा और अन्य स्टडी मटेरियल है।

पुरानी पेंशन के लिए शुरू होगा जनजागृति अभियान : निर्णय लिया गया कि अगर मार्च तक सरकार नहीं मानी तो विधान भवन का घेराव किया जाएगा, व्यापक जनजागरण के लिए उन्नाव से सभाओं की शुरुआत

पुरानी पेंशन के लिए शुरू होगा जनजागृति अभियान : निर्णय लिया गया कि अगर मार्च तक सरकार नहीं मानी तो विधान भवन का घेराव किया जाएगा, व्यापक जनजागरण के लिए उन्नाव से सभाओं की शुरुआत

लखनऊ : कर्मचारियों में लगातार नई पेंशन के खिलाफ आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार को टीचर्स एम्प्लाइज वेलफेयर असोसिएशन की बैठक राजाजीपुरम कार्यालय में हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि अगर मार्च तक सरकार नहीं मानी तो विधान भवन का घेराव किया जाएगा। व्यापक जनजागरण के लिए उन्नाव से सभाओं की शुरुआत की जा रही है।

प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार यादव बंधु ने बुधवार को बैठक में बताया कि 4 अप्रैल 2014 से शुरू हुई इस मुहिम में सबसे पहले मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख मुलायम सिंह को 14 अगस्त को ज्ञापन भेजा गया। पांच अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया। आठ अक्टूबर को गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। हाल ही में 23 दिसम्बर को कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के समक्ष भी अटेवा कार्यकर्ताओं ने गुहार लगाई। 24 दिसम्बर को बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन और भाजपा विधायक रामचन्द्र यादव को भी ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन अब तक कोई भी सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है। ऐसे में अभियान को जिला स्तर पर सभाओं का आयोजन किया जाएगा।

शारीरिक व्यायाम शिक्षकों (CPED) ने स्थायी नियुक्ति के लिए शिक्षकों ने दिया धरना : शारीरिक शिक्षक (BPED) 27 जनवरी को लक्ष्मण मेला धरना स्थल पर अनिश्चित कालीन आमरण अनशन करेंगे। 

शारीरिक व्यायाम शिक्षकों (CPED) ने स्थायी नियुक्ति के लिए शिक्षकों ने दिया धरना :शारीरिक शिक्षक 27 जनवरी को लक्ष्मण मेला धरना स्थल पर अनिश्चित कालीन आमरण अनशन करेंगे। 

लखनऊ : शारीरिक व्यायाम शिक्षकों ने स्थायी नियुक्ति के लिए बुधवार को हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर धरना दिया। इनका आरोप है कि सरकार लम्बे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। 1997 के पूर्व के सर्टिफिकेट ऑफ फिजीशियन एजुकेशन-सीपीएड बेरोजगार शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष निन्नू यादव ने प्रदेश के 1200 शिक्षकों की समस्याओं को धरने के माध्यम से उठाया। निन्नू यादव ने कहा कि सीपीएड और मुअल्लिम-ए-उर्दू शासनादेश के अंतर्गत 11 अगस्त 1997 से पहले के शिक्षण कार्य कर रहे हैं। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1268, 16 अगस्त 2013 के अनुसार मुअल्लिम-ए-उर्दू को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन सीपीएड को नजरअंदाज कर दिया गया।

शिक्षक 27 जनवरी को करेंगे अनशन
 लखनऊ : शारीरिक शिक्षक 27 जनवरी को लक्ष्मण मेला धरना स्थल पर अनिश्चित कालीन आमरण अनशन करेंगे। बुधवार को मेजर ध्यानचंद खेल उत्थान की ओर से संचालित, प्रशिक्षित बीपीएड संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्षों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। साथ ही कार्यकारिणी का विस्तार भी बैठक में किया गया। संगठन का हुआ विस्तार में सुलतानपुर के जेपी त्रिपाठी, फैजाबाद के घनश्याम सैनी, शामली के अमित सिरोहा, बरेली की सुनीता सिंह, शाहजहांपुर के रविकुमार, कानपुर देहात के निरिषकांत डिम्पी को प्रदेश कमिटी में स्थान दिया गया है।

देशभर में स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से पांचवीं और आठवीं की परीक्षाएं होंगी बोर्ड से : लंबे समय से स्कूली बोर्ड को शुरू करने के पक्ष में

देशभर में स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से पांचवीं और आठवीं की परीक्षाएं होंगी बोर्ड से : लंबे समय से स्कूली बोर्ड को शुरू करने के पक्ष में

नई दिल्ली । देशभर में स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से यानी एक अप्रैल से पांचवीं और आठवीं क्लास की परीक्षाएं स्कूली बोर्ड से कराई जा सकती हैं। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को लेकर गठित सेंट्रल बोर्ड ऑफ एजुकेशन की उप समिति ने अपनी रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की है। उप समिति ने इसकी रिपोर्ट भी मानव संसाधन मंत्रलय को भेज दी है। इस उप समिति में मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री को भी रखा गया है। जो लंबे समय से स्कूली बोर्ड को शुरू करने के पक्ष में है।

स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को लेकर गठित सेंट्रल बोर्ड ऑफ एजुकेशन की उप समिति ने इसके अलावा आरटीई एक्ट में बदलाव की भी सिफारिश की है, जिसके तहत अभी तक आठवीं तक शिक्षा को अनिवार्य किया गया था। यानी कोई भी बच्चा पढ़ने में चाहे कितना भी कमजोर हो, उसे आठवीं तक फेल नहीं किया जा सकता है। सिफारिश में इस अनिवार्यता को खत्म करने को कहा गया है। गुणवत्ता में सुधार को लेकर गठित उप समिति का अध्यक्ष राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री प्रो. बासुदेव देवनानी को बनाया गया है।

टीईटी-15 ऑनलाइन आवेदन में हुई त्रुटियों के संशोधन के सम्बन्ध में विज्ञप्ति जारी : क्लिक कर देखें ।

टीईटी-15 ऑनलाइन आवेदन में हुई त्रुटियों के संशोधन के सम्बन्ध में विज्ञप्ति जारी : क्लिक कर देखें ।

सम्बन्धित खबर यहां क्लिक कर देखें-टीईटी-15 आवेदन में कमी गुरुवार से सुधारें : टीईटी के लिए 9.42 लाख आदेवन, अभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक में आवेदन का अलग-अलग आंकड़ा नहीं


इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2015  के आवेदन में गुरुवार से सोमवार के बीच ऑनलाइन संसोधन किए जा सकेंगे। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी नीना श्रीवास्तव ने बताया कि, 29 दिसंबर तक शुल्क जमा कर चुके अभ्यर्थियों के लिए संशोधन का विकल्प दोपहर बाद खुलेगा। गड़बड़ी में सुधार 4 जनवरी की शाम छह बजे तक किया जा सकेगा।

नए साल में सुधरेगी बीटीसी की बिगड़ी चाल : तय समय से पीछे चल रहा बीटीसी सत्र आएगा पटरी पर, सुप्रीम कोर्ट ने आवेदन लेने व सत्र शुरू करने का तय किया कार्यक्रम

नए साल में सुधरेगी बीटीसी की बिगड़ी चाल : तय समय से पीछे चल रहा बीटीसी सत्र आएगा पटरी पर, सुप्रीम कोर्ट ने आवेदन लेने व सत्र शुरू करने का तय किया कार्यक्रम

√तय समय से पीछे चल रहा बीटीसी सत्र आएगा पटरी पर

√सुप्रीम कोर्ट ने आवेदन लेने व सत्र शुरू करने का तय किया कार्यक्रम

इलाहाबाद : शैक्षिक संस्थानों का रोग जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) व निजी बीटीसी कालेजों को भी लग गया है। लेटलतीफ चल रहे बीटीसी सत्र को तमाम प्रयासों के बाद पटरी पर नहीं लाया जा सका है। अफसरों के सभी प्रयास असफल होने पर सर्वोच्च न्यायालय ने बीटीसी का सत्र नियमित करने की पहल की है। कोर्ट ने कब आवेदन लिया जाए और कब से पढ़ाई शुरू हो इसका कार्यक्रम भी भेजा है। यह अलग बात है कि 2014 का सत्र शुरू करने में उस पर अमल नहीं हुआ है लेकिन अब तय कार्यक्रम के हिसाब से काम करने को अधिकारी तत्पर हैं।

शिक्षा निदेशालय परिसर में अक्सर मुट्ठी भींचे युवा यह गवाही दे रहे हैं कि बीटीसी अब शिक्षक बनने की गारंटी नहीं रही। यह कोर्स ही नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम का सत्र तक नियमित नहीं है। 2013 का सत्र शुरू करने के समय निजी कालेजों की एकाएक संख्या बढ़ने और फिर उनकी सीटों को भरने में जो आपाधापी मची उससे महकमा आज तक उबर नहीं पाया है। असल में सीटें भरने के कारण काउंसिलिंग आदि की प्रक्रिया में काफी विलंब हुआ। इससे सत्र तय समय से काफी देर से चला। देरी होने से आगे के सत्रों का समय भी खिसकता चला गया। इसका नतीजा यह है कि बीते अगस्त-सितंबर माह में 2014 सत्र के प्रवेश की काउंसिलिंग शुरू हुई। इस प्रकरण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

बीटीसी सत्र को नियमित करने के लिए शीर्ष कोर्ट ने बाबा शिवनाथ सिंह शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान बनाम नेशनल काउंसिलिंग फॉर टीचर एजूकेशन व अन्य के संबद्ध 10 अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए आठ सितंबर 2015 को आदेश दिया कि बीटीसी 2014 सत्र का प्रवेश पूरा करते हुए 22 सितंबर से कक्षाएं शुरू की जाएं। इस आदेश के बाद सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी नीना श्रीवास्तव ने कई बार डायट के प्राचार्यो को पत्र लिखा, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया अब तक जारी है। यही नहीं अधिकांश संस्थानों को कोर्ट का भी भय नहीं रहा, बाकायदे विज्ञापन जारी करके दिसंबर तक सीटें भरी गईं। हालांकि सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने स्पष्ट किया कि सत्र की शुरुआत 22 सितंबर 2015 से ही माना जाएगा।

शीर्ष कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 2015 का सत्र 22 सितंबर 2016 से शुरू किया जाएगा। इसके लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया की संभावित तारीख अप्रैल 2016 तय की गई है, ताकि सारी सीटें जुलाई तक भर ली जाएं। यानी कि बीटीसी की बिगड़ी चाल सुधारने की प्रक्रिया नए साल में ही गति पकड़ लेगी।

इसके बाद 2017 का बीटीसी सत्र एक जुलाई 2017 से शुरू हो जाएगा और इसके लिए आवेदन फरवरी 2017 से लिए जाएंगे। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय उप्र के रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि बीटीसी का सत्र नियमित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है उसका हर हाल में अनुपालन होगा।

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