logo

Basic Siksha News.com
बेसिक शिक्षा न्यूज़ डॉट कॉम

एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

UPPSS : शिक्षकों के मुद्दे पर दो टूक संदेश- पहले वार्ता, समाधान नहीं तो संसद घेराव, दीपावली से पहले केंद्र सरकार से वार्ता का भरोसा।

UPPSS : शिक्षकों के मुद्दे पर दो टूक संदेश- पहले वार्ता, समाधान नहीं तो संसद घेराव, दीपावली से पहले केंद्र सरकार से वार्ता का भरोसा।

2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से मुक्त कराने के लिए विधानसभा से केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव- बृजेश पाठक जी
दीपावली से पहले केंद्र सरकार से वार्ता का भरोसा- नीरज सिंह जी
 शीतकालीन सत्र में संसद घेराव की चेतावनी- डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जी

लखनऊ। शिक्षक हितों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के प्रथम वार्षिक अधिवेशन में आज का माहौल पूरी तरह शिक्षकों की मांगों के केंद्र में रहा। मंच से सरकार के प्रतिनिधियों ने जहां समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया, वहीं संगठन ने भी साफ कर दिया कि वार्ता से समाधान हुआ तो स्वागत, लेकिन मांगें अनसुनी रहीं तो आंदोलन को संसद तक ले जाया जाएगा।
      अधिवेशन में 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त करने, पुरानी पेंशन बहाल करने, पदोन्नति एवं स्थानांतरण सहित शिक्षकों की विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक जी ने मंच से शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचाकर समाधान का प्रयास किया जाएगा।


2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए विधानसभा से केंद्र को भेजेंगे प्रस्ताव-

      उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त कराने के लिए विधानसभा से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान और हितों के लिए उनके दरवाजे 24 घंटे खुले हैं।

उन्होंने शिक्षक प्रतिनिधियों से कहा कि जनपद या प्रदेश स्तर पर किसी भी प्रकार की विभागीय अथवा प्रशासनिक समस्या हो तो उन्हें परिवार का सदस्य मानकर अवगत कराया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक जी ने कहा कि TET अनिवार्यता से मुक्ति, पुरानी पेंशन बहाली, पदोन्नति और स्थानांतरण समेत मांगपत्र में शामिल सभी प्रमुख मुद्दों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और समाधान के लिए पूरी ताकत से प्रयास किया जाएगा।

‘दीपावली से पहले केंद्र के साथ वार्ता कराने का प्रयास’
अधिवेशन में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे भाजपा के प्रांतीय उपाध्यक्ष, लखनऊ सांसद एवं केंद्रीय रक्षामंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी के प्रतिनिधि नीरज सिंह जी ने भी शिक्षकों को केंद्र सरकार के स्तर पर पहल का भरोसा दिया।
         उन्होंने कहा कि वे स्वयं शिक्षक परिवार से हैं और शिक्षकों के सम्मान एवं सहयोग को अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि TFI के मांगपत्र में केंद्र सरकार से संबंधित बिंदुओं पर संगठन और मानव संसाधन विकास मंत्री के बीच दीपावली से पहले बैठक कराने का प्रयास किया जाएगा।

    नीरज सिंह जी ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि केंद्र सरकार के स्तर से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हो और शिक्षकों को दीपावली से पहले समाधान की दिशा में ठोस पहल का उपहार मिल सके।
संघर्ष, वार्ता और समाधान—इसी नीति पर आगे बढ़ेगा संगठन-

TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा जी ने अधिवेशन को संबोधित करते हुए संगठन की आगामी रणनीति स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि संगठन की नीति ‘संघर्ष, वार्ता और समाधान’ की है।

        उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के माध्यम से संगठन का मांगपत्र मुख्यमंत्री तक और नीरज सिंह जी के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचेगा। सरकार के साथ वार्ता होगी और संगठन को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए शिक्षकों की समस्याओं का समाधान निकलेगा।

       डॉ. शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वार्ता के बाद भी शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो TFI शीतकालीन सत्र के दौरान संसद का घेराव करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षकों की मांगों को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को निर्णायक चरण तक ले जाया जाएगा।

       एक मंच पर जुटे विभिन्न राज्यों के शिक्षक प्रतिनिधि
TFI के प्रथम वार्षिक अधिवेशन में देश के विभिन्न प्रांतों से संगठन के पदाधिकारी पहुंचे। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेशभर के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। अधिवेशन में शिक्षकों की समस्याओं, संगठन की भूमिका और सरकार के साथ संवाद के माध्यम से समाधान की रणनीति पर चर्चा हुई।

      मंच से दिए गए वक्तव्यों में एक ओर जहाँ सरकार के प्रतिनिधियों ने शिक्षकों की मांगों को गंभीरता से लेने और संबंधित स्तर पर वार्ता कराने का भरोसा दिया, वहीं संगठन ने भी यह संदेश दिया कि सरकार के साथ संवाद के दरवाजे खुले हैं, लेकिन समाधान के लिए समयबद्ध पहल जरूरी है।
        अधिवेशन के अंत में शिक्षकों की प्रमुख मांगों को लेकर सरकार तक प्रभावी ढंग से आवाज पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर व्यापक आंदोलन की रणनीति पर संगठन की प्रतिबद्धता स्पष्ट नजर आई।
खास बातें..
• 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से मुक्ति की मांग
• विधानसभा से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने का भरोसा
• पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा
• पदोन्नति और स्थानांतरण की समस्याओं के समाधान की मांग
• दीपावली से पहले केंद्र सरकार से वार्ता कराने का प्रयास
• समाधान नहीं हुआ तो शीतकालीन सत्र में संसद घेराव की चेतावनी
अधिवेशन से निकला स्पष्ट संदेश
"वार्ता से समाधान पहली प्राथमिकता, लेकिन समाधान नहीं तो संघर्ष का अगला पड़ाव संसद होगा।"

Post a Comment

0 Comments