FAKE, SHIKSHAK BHARTI : फर्जी शिक्षिका मामला में बीएसए, सर्व शिक्षा अभियान अधिकारी के दर्ज किए गए बयान

FAKE, SHIKSHAK BHARTI : फर्जी शिक्षिका मामला में बीएसए, सर्व शिक्षा अभियान अधिकारी के दर्ज किए गए बयान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज आठ जिलों में नौकरी करने वाली अनामिका शुक्ला पर कर्नलगंज में दर्ज मामले में तीसरे दिन पुलिस एक बार फिर बीएसए कार्यालय पहुंची। यहां पुलिस ने वादी मुकदमा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व सर्व शिक्षा अभियान बालिका शिक्षा के जिला समन्वयक से पूछताछ की। साथ ही उनके बयान भी दर्ज किए। पुलिस का कहना है कि जल्द ही एक टीम जांच के लिए सोरांव स्थित स्कूल भी जाएगी। आठ जिलों में एक ही नाम की शिक्षिका अनामिका शुक्ला की नियुक्ति का खुलासा होने ेक बाद प्रदेश भर में हड़कंप है। जिले में सोरांव स्थित कस्तूरबा गंाधी आवासीय बालिका विद्यालय मं भी इस नाम की शिक्षिका की नियुक्ति की बात सामने आने पर उसके खिलाफ कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।मंगलवार को कर्नलगंज पुलिस एक बार फिर जांच के लिए बीएसए कार्यालय पहुंची। यहां टीम ने मुकदमा वादी बीएसए संजय कुशवाहा से मामले की जानकारी ली और उनका बयान भी दर्ज किया। इसके अलावा सर्व शिक्षा अभियान बालिका शिक्षा के जिला समन्वयक ताज मोहम्मद का भी बयान दर्ज किया। बता दें कि जिला समन्वयक के पत्र के आधार पर ही बीएसए की ओर से मामले की तहरीर दी गई है जिसमें इस पत्र का भी जिक्र किया गया है।सूत्रों की मानें तो दोनों अफसरों से आरोपी शिक्षिका की नियुक्ति के संबंध में कई और जानकारी हासिल की गई। अफसरों ने यही बताया है कि फर्जी दस्तावेज पर नियुक्ति का मामला तब खुला जब निवास प्रमाणपत्र का ऑनलाइन सत्यापन कराया गया। कर्नलगंज पुलिस का कहना है कि बयान दर्ज किए जा चुके हैं। मामले में जांच के लिए जल्द ही एक टीम सोरांव स्थित स्कूल जाएगी जहां नियुक्ति से संबंधित अन्य कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे।

कई सवालों के जवाब मिलना बाकी

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कई सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना मूल शैक्षिक अभिलेख प्रस्तुत किए आखिर कैसे शिक्षिका को न सिर्फ नियुक्ति पत्र दिया गया, बल्कि कार्यभार भी ग्रहण करा दिया गया। दरअसल तहरीर में आरोप लगाया गया है कि आरोपी शिक्षिका ने वार्डन व कार्यालय को गुमराह कर कार्यभार ग्रहण कर लिया और मांगे जाने के बावजूद मूल शैक्षिक अभिलेख नहीं दिखाए।वैसे तो संभव नहीं दिखता। लेकिन अगर मान भी लिया जाए कि वार्डन व कार्यालय को गुमराह कर कार्यभार ग्रहण किया गया तो क्या मूल शैक्षिक अभिलेख नहीं दिखाए जाने संबंधी कोई जानकारी वार्डन या कार्यालय की ओर से अफसरों को उपलब्ध कराई गई? अगर नहीं तो ऐसा क्यों और अगर हां तो अफसरों ने इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की? सूत्रों का कहना है कि विवेचना के दौरान इन सवालों के जवाब मिले तो कई जिम्मेदार भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।

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