जिनके नाम पर मिली छुट्टी : उन महापुरुषों को भूल गए अफसर;सरकार सरकारी आदेश भी भूली-
लखनऊ : सरकारी अफसर और कर्मचारी, जिन महापुरुषों के नाम पर यूपी में छुट्टी पा रहे हैं, उन्हीं को याद नहीं रखते। हाल यह है कि जयंती मनाने के लिए सरकार जो पैसा देती है, उससे भी कोई अयोजन नहीं होता। जयंती मनाने के लिए राष्ट्रीय एकीकरण जो पैसा भेजती है अब वह लौटाया जा रहा है।
"जिलों ने महापुरुषों के नाम आवंटित धन खर्च क्यों नहीं किया, इसके लिए जिलों को पत्र लिखा गया है। जवाब आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकेगी।"
-अशोक कुमार, सचिव, राष्ट्रीय एकीकरण विभाग
कार्यक्रम-आवंटित धन खर्च -बच गया पैसा
राष्ट्रीय एकता एवं सांप्रदायिक सद्भाव 2625000-815000-1810000
पटेल के जन्मदिन -375000-216000- 159000
कौमी एकता सप्ताह-375000-202000- 173000
डा. अंबेडकर का जन्मदिन-2625000- 1638000-987000
राष्ट्रीय एकता पुरस्कार-200000-कुछ नहीं -200000
सरकार सरकारी आदेश भी भूले-
सरकार की ओर से डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्मदिन मनाने के लिए शासनादेश जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि हर जिले को निश्चित रकम आवंटित की जा रही है। इससे जिलों में कार्यक्रम करने होते हैं। सरकार ने आदेश में कहा था कि सभी जिलों को आवंटित धनराशि शत प्रतिशत खर्च खर्च करनी है। सरकार के इस निर्देश के बाद भी जिलों ने डॉ. अंबेडकर का जन्मदिन मनाने में कोई रुचि नहीं दिखाया। सिर्फ अंबेडकर ही नहीं लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल का जन्मदिन राष्ट्रीय अखंडता दिवस के रूप में मनाने का फैसला हुआ। इसके लिए भी बजट आया लेकिन कहीं भी कोई कार्यक्रम नहीं किया गया।
नहीं हुए कार्यक्रम
महान विभूतियों के जन्मदिन पर राष्ट्रीय एकता एवं सांप्रदायिक सद्भाव कार्यक्रमों का आयोजन सभी जिलों में किए जाने का निर्णय सरकार की ओर से लिया गया था। इसके लिए सरकार ने 2625000 रुपये जिलों को दिया था। पूरा साल बीत गया लेकिन अधिकारियों को जो धन मिला था उसमें से मात्र 815000 रुपये ही खर्च कर पाए। बाकी की रकम जिलों ने शासन को वापस भेज दी। इसी तरह सरकार ने गुरु गोविंद सिंह राष्ट्रीय एकता पुरस्कार देने की घोषणा की थी।
खबर साभार : नवभारतटाइम्स
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