बीएड के छात्र होंगे हाईटेक : बीएड का दो वर्षीय पाठ्यक्रम छात्रों को पढ़ने पढ़ाने के उन आधुनिक तरीकों से रूबरू कराएगा जो सरकारी से लेकर निजी स्कूलों की जरूरत बन गए-
कानपुर : बीएड का दो वर्षीय पाठ्यक्रम छात्रों को पढ़ने पढ़ाने के उन आधुनिक तरीकों से रूबरू कराएगा जो सरकारी से लेकर निजी स्कूलों की जरूरत बन गए हैं। नेशनल काउंसिल फार टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने इस साल से बीएड के पाठ्यक्रम में इंफोर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलाजी (आईसीटी) के विषय को जोड़ा है। कंप्यूटर व इंटरनेट के अलावा यह विषय छात्रों के व्यक्तित्व का विकास करने के साथ उन्हें अंग्रेजी भाषा में भी दक्ष बनाएगा।
एनसीटीई ने बीएड में कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य कर दी है। इसमें छात्र पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन, गूगल सर्च व ग्राफिक्स समेत अन्य विषयों की शिक्षा प्राप्त करेंगे। इस शिक्षा का दूसरा पहलू बीएड करने वाले छात्रों के व्यक्तित्व व उनके संचार को प्रभावी बनाने से जुड़ा होगा। बीएड पाठ्यक्रम में बदलाव किए जाने का उद्देश्य छात्र छात्राओं को उसे उन स्कूलों के अनुकूल तैयार करना है जिनमें शिक्षकों का हाईटेक व अपडेट होना अब जरूरी हो गया है। कंप्यूटर का यह प्रशिक्षण 20 हफ्ते का होगा।
पांच महीने की इंटर्नशिप करके निकलेंगे छात्र :-
बीएड के नए पाठ्यक्रम में पांच माह की इंटर्नशिप जोड़ दी गई है। जबकि पिछले साल तक छात्र प्रयोगात्मक अध्ययन के नाम पर केवल प्रेक्टिस टीचिंग करते थे। इस साल से प्रेक्टिस टीचिंग के साथ उन्हें पहले साल में एक महीने व दूसरे वर्ष में चार महीने की इंटरर्नशिप करनी होगी। नई नियमावली बनाने के अंतर्गत प्रयोगात्मक अध्ययन पर अधिक जोर दिया गया है। इस अध्ययन के अंतर्गत बीएड के प्रथम वर्ष में प्रशिक्षार्थियों को इंटर कॉलेज में चार हफ्ते पढ़ाना होगा। इस अध्ययन के तहत शुरुआती दौर में वह कक्षा छह से आठवीं तक के छात्रों को पढ़ाएंगे जबकि दूसरे वर्ष में उनके स्कूलों में पढ़ाने की अवधि को बढ़ाकर 16 हफ्ते कर दिया जाएगा। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध 180 बीएड कॉलेजों के 17 हजार सीटों पर प्रवेश लेने वाले छात्र इस नई शिक्षा प्रणाली से रूबरू होंगे।
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'एनसीटीई की नियमावली के अनुसार बीएड के कोर्स को डिजाइन किए जाने का काम शुरू हो चुका है। इसके बाद प्रयोगात्मक अध्ययन का प्रतिशत अधिक रखा जा रहा है। अब शिक्षकों को दो साल की पढ़ाई के दौरान आधे वर्ष तक पूरा स्कूल बतौर शिक्षक संभालना होगा।'
डा. सुभाष चंद्र अग्रवाल, डीन बीएड सीएसजेएमयू
खबर साभार : दैनिकजागरण
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