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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

केंद्र सरकार ने मूल वेतन के साथ अन्य भत्तों को जोड़कर उस पर भविष्य निधि में अंशदान की मात्रा तय करने का किया प्रस्ताव-

केंद्र सरकार ने मूल वेतन के साथ अन्य भत्तों को जोड़कर उस पर भविष्य निधि में अंशदान की मात्रा तय करने का किया प्रस्ताव-

1-मसौदा विधेयक में वेतन का मतलब एक कर्मचारी को भत्तों के साथ दी जाने वाली कुल राशि

2-वर्तमान में पीएफ में अंशदान कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते पर तय होते हैं |

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मूल वेतन के साथ अन्य भत्तों को जोड़कर उस पर भविष्य निधि में अंशदान की मात्रा तय करने का प्रस्ताव किया है। इससे आने वाले समय में नियोक्ता के साथ-साथ कर्मचारियों को भी पीएफ में अधिक अंशदान करना पड़ेगा। ऐसे में कर्मचारियों को हाथ में मिलने वाले वेतन में कमी आएगी, वहीं भविष्य सुरक्षित करने के लिए वह पहले से ज्यादा राशि बचा पाएंगे। प्रस्तावित विधेयक में वेतन की दी गई परिभाषा के मुताबिक पीएफ अंशदान की मात्रा तय करने के लिए मूल वेतन में अन्य भत्तों को भी जोड़ा जाएगा। वर्तमान में पीएफ में अंशदान कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते पर तय किए जाते हैं। इसमें अन्य भत्ते शामिल नहीं होते। कर्मचारी ईपीएफ में 12 फीसदी का अंशदान करते हैं वहीं नियोक्ता भी इतनी ही राशि देता है। कर्मचारी भविष्य निधि विविध प्रावधान कानून, 1952 में संशोधन के लिए तैयार मसौदा विधेयक में वेतन का मतलब एक कर्मचारी को भत्तों के साथ दी जाने वाली कुल राशि है। इस बारे में ईपीएफओ के ट्रस्टी वृजेश उपाध्याय ने कहा कि नियोक्ता कर्मचारियों के वेतन को कई भत्तों में बांट देता है जिससे कि उनका पीएफ में अंशदान घट जाता है। विधेयक में वेतन की प्रस्तावित परिभाषा इस पर रोक लगाएगी। श्रम मंत्रालय इस विधेयक को अंतिम रूप देने में लगा है। इससे पहले नवंबर 2012 में ईपीएफओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सभी भत्तों को वेतन में शामिल करने की अधिसूचना जारी की थी, लेकिन वह उस वक्त प्रभावी नहीं हो पाया था।

  खबर साभार : अमरउजाला/दैनिकजागरण/डीएनए

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