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14 नवम्बर नेहरू जयंती विशेष : तुम गढ़ो, नया संसार : 125 वीं जयंती आज-

14 नवम्बर नेहरू जयंती विशेष : तुम गढ़ो, नया संसार : 125 वीं जयंती-

" What we really are matters more than what other people think of us."

" Time is not measured by the passing of years but by what one does, what one feels, and what one achieves." Jawaharlal Nehru-

बाल दिवस यानी बच्चों के लिए तय किया गया एक विशेष दिन। बच्चों की इस परिभाषा में प्रायमरी क्लास के स्टूडेंट्स से लेकर हायर सेकेंडरी के टीन एजर्स तक शामिल हो जाते हैं। यहां बच्चों से मतलब है उन लोगों से जो भविष्य यानी फ्यूचर को रचने में समाज और देश की मदद कर सकते हैं। बच्चों की ऊर्जा और उत्साह बड़ों को भी प्रेरणा दे सकता है। चलो, आज बात करते हैं चाचा नेहरू के ऐसे ही कुछ सपनों और विचारों की और जानते हैं कि उनसे कैसे तथा क्या सीख ली जा सकती है, जिनकी आज 125वीं जयंती है।

खुली आंखों के सफल सपने

नेहरू जी का एक बेहद प्रेरक विचार। जब तक आंखें खुली रखकर दुनिया को जानोगे नहीं, समझने की कोशिश नहीं करोगे, तब तक दुनिया को जी कैसे पाओगे। यह बात हर समय लागू होती है। चाहे एक्जाम्स हों या फिर स्पोर्ट्स की कोई कॉम्पिटीशन। जब तुम आंखें खोलकर, यानी कि अलर्ट रहकर अपने आस-पास और खुद की क्षमताओं को समझोगे नहीं, तब तक लक्ष्य को पाना मुश्किल होगा। यह याद रखना कि जितने भी सफल लोग हैं वे हमेशा नई चीजें सीखने और जानने को उत्सुक रहते हैं और हर बात के लिए अलर्ट भी। फिर चाहे वो विराट कोहली हो, सायना नेहवाल या फिर मेरिट में आने वाला कोई स्टूडेंट।

टेक्स्टबुक्स से बाहर की दुनिया

यह एक बहुत बड़ी सीख है जो हमें चाचा नेहरू से मिलती है। यानी अपने कोर्स की किताबों के अलावा अन्य किताबों को भी पढ़ो। होमवर्क और कोर्स, इन दोनों को बैलेंस करते हुए नॉलेज बढ़ाने वाली या मनोरंजन करने वाली किताबें पढ़ने के लिए समय निकालो। यह आदत तुम्हें केवल एक्स्ट्रा नॉलेज ही नहीं देगी बल्कि जीवन में हर समय तुम्हारे काम आएगी। यहां तक कि दुनिया के बारे में तुम्हें अपडेट रखने में भी मदद करेगी। इसके अलावा जो भी अच्छा या महत्वपूर्ण पढ़ो उसे समय मिलने पर एक डायरी में भी नोट करते चलो। नेहरू जी न केवल खूब पढ़ते थे बल्कि उन्होंने कई बहुत अच्छी किताबें लिखी भी हैं। जिनमें डिस्कवरी ऑफ इंडिया, लैटर्स फ्रॉम अ फादर टू हिज़ डॉटर जैसी पुस्तकें शामिल हैं। तुम इन्हें भी पढ़कर किताबों से दोस्ती की शुरूआत कर सकते हो।

खेलो-कूदो और बढ़ो

स्कूल हो या कॉलेज, एक्स्ट्रा करिक्युलर एक्टिविटीज का हिस्सा बनना हमेशा तुम्हें आगे बढ़ने में मदद कर सकता है। स्पोर्ट्स, कल्चरल प्रोग्राम्स, एनसीसी, एनएसएस या फिर कोई भी क्रिएटिव एक्टिविटी तुम्हें अपनी पर्सनालिटी को निखारने का भी मौका देगी और ढेर सारे लोगों से भी जोड़ेगी। अपनी किसी भी एक हॉबी को हमेशा अपने साथ रखो। इससे तुम्हें पॉजिटिव सोचने की शक्ति भी मिलेगी और एनर्जी भी। पढ़ने के साथ ही खेलों को भी अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाओ। इससे तुम्हें फिट रहने में भी मदद मिल सकती है। नेहरू जी खुद अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में कई एक्टिविटीज में भाग लिया करते थे। इन एक्टिविटीज ने उनकी पर्सनालिटी पर भी पॉजिटिव असर डाला और देश-विदेश में उनके कई सारे दोस्त भी बने।

डरो नहीं, मुकाबला करो

जीवन की हर परिस्थिति में यह सीख काम आ सकती है। चाहे किसी भी तरह का डर हो उस पर काबू पाने और उसे हराने का साहस सबमें होना चाहिए। नेहरू जी ने इसी ताकत के साथ अंग्रेजों का भी मुकाबला किया और देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा भी है कि डर से बढ़कर बुरी और खतरनाक चीज और कोई नहीं है। डर, आपके आगे बढ़ने के रास्ते बंद कर देता है। इसलिए डर को पीछे छोड़कर, सच को साहस के साथ सामने रखने की कोशिश करो।

साइंस, लैंग्वेज एंड नेशन

चाचा नेहरू का यह विचार केवल हमारे लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश और उससे भी बढ़कर, पूरी दुनिया को मिलकर रहने की सीख देता है। नेहरू जी हमेशा से तकनीक और विकास के लिए प्रयोग करते रहने की शिक्षा दिया करते रहे। उनका मानना था कि यदि हम विज्ञान को करीब से जानने, उसके प्रयोग करने और आम इंसान तक उसका फायदा पहुंचाने का लक्ष्य बनाएं तो हमें तरक्की से कोई नहीं रोक सकता। विज्ञान के एक्सपेरिमेंट्स और रिसर्च के क्षेत्र में मेहनत करने से हम खुद के साथ ही पूरे देश को फायदा पहुंचा सकते हैं।

इसके अलावा नई भाषाओं तथा संस्कृतियों को जानने तथा सीखने तथा अपने देश के लिए अपनी जिम्मेदारी समझने की सीख भी नेहरू जी से हमें मिलती है। खुद नेहरू जी हिंदी के अलावा अंग्रेजी, उर्दू और संस्कृत आदि भी पढ़े थे। और अपने देश की आजादी के लिए वे भी एक बड़ी चुनौती के सामने पूरी हिम्मत से खड़े रहे। उनके अनुसार एक जिम्मेदार नागरिक वही है जो देश हित के लिए केवल सोचता ही नहीं बल्कि काम भी करता है। और ऐसे ही नागरिक किसी भी देश को विकास के रास्ते पर बढ़ा सकते हैं।

तुम पर है विश्वास

बच्चों को हमेशा प्यार देने वाले चाचा नेहरू ने कहा था कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं। यदि उन्हें अच्छा माहौल और सही शिक्षा मिले तो वे समाज और देश की तरक्की में नींव की तरह काम कर सकते हैं। वे ही देश की असल ताकत हैं। खास बात यह भी है कि नेहरू जी ने कभी भी लड़के-लड़की में भेदभाव नहीं किया। वे मानते थे कि लड़के-लड़कियां दोनों समान ऊर्जा के साथ काम कर सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं और दोनों को ही समान अवसर मिलने चाहिए। बच्चों से उनके प्यार को देखते हुए ही उनके जन्मदिन, 14 नवंबर को 'बाल दिवस" के रूप में मनाया जाता है। तो उन्होंने जो विश्वास तुम बच्चों पर रखा है, अब उस विश्वास पर खरे उतरने की बारी तुम्हारी भी है।

    

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