logo

Basic Siksha News.com
बेसिक शिक्षा न्यूज़ डॉट कॉम

एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

एडेड जूनियर हाई स्कूलों में प्राइमरी टीचरों को भी मिले सरकारी वेतन -

एडेड जूनियर हाई स्कूलों में प्राइमरी टीचरों को भी मिले सरकारी वेतन -

• सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा वह प्राथमिक ईकाई के अध्यापकों / कर्मचारियों को सरकारी अनुदान से मना नहीं कर सकती

नई दिल्ली (एसएनबी)। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-प्रदेश सरकार से कहा है कि वह एक से पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों को सरकारी अनुदान के मामले में जूनियर हाई स्कूल से अलग नहीं कर सकती। अगर किसी जूनियर हाई स्कूल को सरकारी अनुदान मिलता है और उस विद्यालय में एक से पांचवीं कक्षा तक की विंग भी है तो कक्षा पांच तक की प्राथमिक इकाई के अध्यापकों और कर्मचारियों को सरकारी अनुदान से मना नहीं किया जा सकता।

चीफ जस्टिस राजेंद्र मल लोढा, जस्टिस जगदीश सिंह केहर, जस्ती चेलमेश्वर, एके सीकरी और रोहिंटन नरीमन की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। उत्तर-प्रदेश सरकार ने प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1978 की व्याख्या करते हुए एक से पांचवीं कक्षा को जूनियर हाई स्कूल से अलग कर दिया था। छह से आठवीं कक्षा को जूनियर हाई स्कूल मानकर सरकारी अनुदान देने का निर्णय किया गया जबकि उसी जूनियर हाई स्कूल या उच्चतर विद्यालय की प्राथमिक शाखा (एक से पांचवीं तक) को अलग करके अनुदान समाप्त कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला 2006 से लंबित था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। संविधान पीठ ने अध्यापकों की ओर से पेश हुए वकील एमपी राजू की इस दलील को स्वीकार किया कि छह से 14 साल के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य करने के कानून के अमल में आने के बाद राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार उन स्कूलों के प्राथमिक शिक्षकों को सीधे वेतन प्रदान करेगी जिनके जूनियर हाई स्कूल विंग को पहले से सरकार अनुदान प्रदान कर रही है। एक से पांचवीं कक्षा तक विंग को जूनियर हाई स्कूल से विभक्त करके अनुदान से वंचित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-प्रदेश सरकार बनाम पवन कुमार द्विवेदी तथा छह अन्य याचिकाओं पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा को लेकर विभिन्न कानूनों के अलावा एक अप्रैल, 2009 से लागू अनिवार्य शिक्षा के कानून की व्याख्या करते हुए शिक्षकों को यह लाभ दिया।

       खबर साभार : राष्ट्रीय सहारा

Post a Comment

0 Comments