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साक्षरता दिवस आज : मुहिम की कछुआ चाल : दुश्वारियाँ हजार : कहां कितना प्रतिशत साक्षारता दर-

साक्षरता दिवस आज : मुहिम की कछुआ चाल : दुश्वारियाँ हजार : कहां कितना प्रतिशत साक्षारता दर-

१-साक्षरता मुहिम की कछुआ चाल 

२-पांच जिलों में एक भी प्रेरक का चयन नही

३- यूपी में लखनऊ छठे स्थान पर साक्षरता दर मे

लखनऊ : साक्षरता की अलख जगाने के मकसद से शुरू किया गया साक्षर भारत अभियान सूबे में कई दुश्वारियां ङोल रहा है। अभियान की सुस्ती का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि चयनित जिलों की ग्राम पंचायतों में स्थापित किए गए लोक शिक्षा केंद्रों में प्रेरकों के चयन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। वहीं प्रेरकों को मानदेय का भुगतान करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

प्रेरकों का चयन पूरा नहीं :

निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए प्रत्येक लोक शिक्षा केंद्र में दो प्रेरक नियुक्त किये जाने हैं। पांच जिले ऐसे हैं जिनमें अब तक एक भी प्रेरक का चयन नहीं हो सका है। इन जिलों में अंबेडकर नगर, गोरखपुर, जालौन, सहारनपुर व सोनभद्र शामिल हैं। इन जिलों की ग्राम पंचायतों में कुल 7700 प्रेरकों का चयन होना बाकी है। इनके अलावा भी 38 जिले ऐसे हैं जिनमें कुल 59598 प्रेरक नियुक्त किए जाने हैं, लेकिन अब तक 51597 की नियुक्ति ही हो पाई है।

मानदेय के भुगतान में दिक्कतें बनी दुश्वारियां :

आठ सितंबर 2009 को देशव्यापी स्तर पर शुरू किया गया साक्षर भारत अभियान प्रदेश के उन 66 जिलों में चलाया जा रहा है जिनमें वर्ष 2001 की जनगणना में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं की साक्षरता दर 50 फीसद से कम पायी गई थी। अभियान का मकसद पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता दरों के अंतर को घटाकर 10 फीसद तक लाना है। वर्ष 2009-10 में अभियान के पहले चरण में 26 जिलों का चयन किया गया था। वहीं 2011-12 में दूसरे चरण में बाकी बचे 40 जिलों में अभियान को लागू करने की मुहिम शुरू हुई।

       खबर साभार : दैनिक जागरण

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