बीएड से हो रहा युवाओं का मोहभंग : साल दर साल बढ़ रही खाली सीटों की संख्या -
लखनऊ। प्रदेश में युवाओं का बीएड से मोह भंग होता दिख रहा है। आंकड़े बताते हैं कि साल-दर-साल एडमिशन का ग्राफ तेजी से गिर रहा है। इस साल पहले चरण की काउंसलिंग के बाद 71,000 सीटें खाली हैं। हालांकि, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय इन सीटों को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में है।
प्रदेश में मौजूदा समय 1250 सरकारी और निजी कॉलेजों में 1,38,000 के आसपास सीटें हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए पहले चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बीएड प्रवेश परीक्षा कराने वाला विश्वविद्यालय केवल एक बार ही काउंसलिंग करा सकता है और इसके बाद खाली सीटें पूलिंग के आधार पर भरी जाएंगी। पूलिंग का सीधा सा मतलब है कि खाली सीटों के लिए काउंसलिंग नहीं होगी बल्कि जो इच्छुक हो उसको एडमिशन दे दिया जाएगा। इस बार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को बीएड प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी मिली थी। वह चाहता है कि दूसरे चरण की काउंसलिंग 21, 22 और 23 जुलाई को करा ली जाए। इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट की शरण में गया हुआ है, ताकि इजाजत मिलने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जा सके।
#बीटीसी का बढ़ा क्रेज
प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता स्नातक व बीटीसी है। बीटीसी दो वर्षीय कोर्स है और इसे स्नातक के बाद किया जा सकता है। प्रदेश में मौजूदा समय बीटीसी की 44,450 सीटें हैं। इसमें से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायटों) में 10,450 तथा 680 निजी कॉलेजों में 34,000 सीटें हैं। सीटों की संख्या अधिक होने की वजह से बीएड न कर युवा बीटीसी करने की ओर भाग रहे हैं। यही कारण है कि बीटीसी की एक-एक सीट के लिए 20 से 25 दावेदार हैं।
बीएड करने के बाद शिक्षक बनने की राह खुली हुई है। सीटें खाली रहने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इसके लिए ऐसे नियम बनाने चाहिए, ताकि सीटें भर जाएं। इस बाद भी जितनी सीटें खाली रह गई हैं उसे कॉलेज प्रबंधन से बात करते हुए पूलिंग के आधार पर भरना चाहिए।
लखनऊ। प्रदेश में युवाओं का बीएड से मोह भंग होता दिख रहा है। आंकड़े बताते हैं कि साल-दर-साल एडमिशन का ग्राफ तेजी से गिर रहा है। इस साल पहले चरण की काउंसलिंग के बाद 71,000 सीटें खाली हैं। हालांकि, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय इन सीटों को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में है।
प्रदेश में मौजूदा समय 1250 सरकारी और निजी कॉलेजों में 1,38,000 के आसपास सीटें हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए पहले चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बीएड प्रवेश परीक्षा कराने वाला विश्वविद्यालय केवल एक बार ही काउंसलिंग करा सकता है और इसके बाद खाली सीटें पूलिंग के आधार पर भरी जाएंगी। पूलिंग का सीधा सा मतलब है कि खाली सीटों के लिए काउंसलिंग नहीं होगी बल्कि जो इच्छुक हो उसको एडमिशन दे दिया जाएगा। इस बार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को बीएड प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी मिली थी। वह चाहता है कि दूसरे चरण की काउंसलिंग 21, 22 और 23 जुलाई को करा ली जाए। इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट की शरण में गया हुआ है, ताकि इजाजत मिलने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जा सके।
#बीटीसी का बढ़ा क्रेज
प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता स्नातक व बीटीसी है। बीटीसी दो वर्षीय कोर्स है और इसे स्नातक के बाद किया जा सकता है। प्रदेश में मौजूदा समय बीटीसी की 44,450 सीटें हैं। इसमें से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायटों) में 10,450 तथा 680 निजी कॉलेजों में 34,000 सीटें हैं। सीटों की संख्या अधिक होने की वजह से बीएड न कर युवा बीटीसी करने की ओर भाग रहे हैं। यही कारण है कि बीटीसी की एक-एक सीट के लिए 20 से 25 दावेदार हैं।
बीएड करने के बाद शिक्षक बनने की राह खुली हुई है। सीटें खाली रहने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इसके लिए ऐसे नियम बनाने चाहिए, ताकि सीटें भर जाएं। इस बाद भी जितनी सीटें खाली रह गई हैं उसे कॉलेज प्रबंधन से बात करते हुए पूलिंग के आधार पर भरना चाहिए।

0 Comments