प्रयागराज : पीसीएस में भी सवाल बनी शिक्षित बेरोजगारी

प्रयागराज : पीसीएस में भी सवाल बनी शिक्षित बेरोजगारी
  
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का मुद्दा छाया हुआ है। पीसीएस 2019 की मुख्य परीक्षा में भी शिक्षित बेरोजगारी सवाल बनी। बृहस्पतिवार को दूसरी पाली में आयोजित सामान्य अध्ययन के तीसरे प्रश्रपत्र में उत्तर प्रदेश में शिक्षित बेरोजगारी के मुद्दे की आलोचनात्मक व्याख्यान करने के लिए कहा गया। हालांकि, इस प्रश्नपत्र में कृषि एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े कई सवाल पूछ गए। वहीं, दूसरी पाली में आयोजित चौथे प्रश्नपत्र की परीक्षा में ज्यादातर सवाल बतौर लोक सेवक अभ्यर्थियों की योग्यता को आंकने वाले रहे। बृहस्पतिवार को 24 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। उपस्थिति अभ्यर्थियों की कुल संख्या 4732 रही।पहली पाली में सामान्य अध्ययन का तृतीय प्रश्रपत्र और दूसरी पलाी में चतुर्थ प्रश्रपत्र की परीक्षा आयोजित की गई। चौथे प्रश्रपत्र में एक सवाल था, ‘आप पीसीएस अधिकारी बनने की कोशिश कर रहे हैं और विभिन्न चरणों को पार कर व्यक्तिगत साक्षात्कार हेतु अर्ह हो गए हैं। साक्षात्कार के लिए जाते समय रास्ते में आपने देखा कि बुजुर्ग व्यक्ति अपनी पोती के साथ कहीं जा रहा है। अचानक उसे आपके सामने दिल का दौरा पड़ता है और बुजुर्ग की पोती आपसे से सहायता की पुकार करती है। ऐसी दशा में आप क्या करेंगे? विस्तृत चर्चा कीजिए।’विशेषज्ञों के मुताबिक बतौर लोक सेवक अभ्यर्थियों की योग्यता और उनके निर्णय लेने की क्षमता को परखने के लिए चौथे प्रश्रपत्र में कई सवाल पूछे गए। लोक सेवक की नैतिक जिम्मेदारियां, लोकहित एवं सूचना का अधिकार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखने को कहा गया।साथ ही सिविल सेवा के संदर्भ में ‘पारदर्शकता’, ‘जवाबदेही’ एवं ‘दृढ़ विश्वास का साहस’ की प्रासंगिकता का परीक्षण करने को कहा गया। इसके आलवा कार्ल माक्र्स के सामाजिक एवं राजनीतिक विचारों की समकालीन लोकसेवा में भूमिका की परीक्षा करने को कहा गया। यह सवाल भी आया कि सार्वजनिक जीवन के सिद्धांत क्या हैं? क्या ये सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता है। इसके अलावा पूछा गया, ‘नीतिशास्त्र क्या है? मानव जीवन में इसकी भूमिका की विवेचना कीजिए।’ यह सवाल भी आया कि नैतिक मूल्यों के सुदृढ़ीकरण की क्या प्रक्रिया है? क्या नैतिक मूल्यों के सुदृढ़ीकरण से चरित्र निर्माण में सहायता प्राप्त होती है। इसके अलावा धार्मिक कट्टरता से संबंधित एक सवाल भी पूछा गया।पहली पाली में आयोजित सामान्य अध्ययन का तीसरा प्रश्रपत्र प्रौद्योगिकी, उद्योग और कृषि पर आधारित रहा। साथ ही अन्य समसामयिक मुद्दों से जुड़े कुछ सवाल भी पूछे गए। मसलन, ‘राष्ट्रीय शक्ति की वृद्धि में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका उदाहरण सहित समझाइए’, ‘लघु एवं सीमांत किसानों पर हरित क्रांति के प्रभावों की व्याख्यान करें।’, ‘ नई औद्योगिक नीति में नया क्या है? इस संदर्भ में नई औद्योगिक नीति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए और औद्योगिक विकास पर इसके प्रभाव की व्याख्या कीजिए।’, ‘भारत में कृषि विपणन सुधारों का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए। क्या वे समुचित हैं।’,
‘प्रौद्योगिकी स्भानांतरण से आप क्या समझते हैं। यह जटिल प्रौद्योगिकी के प्रसार में कैसे सहायक हो सकती है?’ इसके अलावा सवाला आया, ‘आंतरिक सुरक्षा के प्रति खतर के रूप में भ्रष्टाचार की विवेचन कीजिए।’, ‘ डिजिटल अधिकार क्या होते हैं? इनके उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।’, सोशल मीडिया को राष्ट्रीय सुरक्षा संवर्धन के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में किस तरह उपयोग में लाया जा सकता है? समझाइए।’
‘दोनों पेपर संतुलित और आसान थे। तृतीय प्रश्नपत्र में सोशल मीडिया और डिजिटल इकोनॉमी से जुड़े सवाल आए। उद्योग और कृषि आधारित सवाल भी पूछे गए। वहीं, नीतिशास्त्र पर आधारित चौथे प्रश्नपत्र में भी परंपरागत रूप से सवाल पूछे गए। जिस अभ्यर्थी ने अच्छे से अभ्यास किया होगा और सामसामयिक घटनाक्रम का ठीक से अभ्यास किया होगा, उन्होंने आसानी से पेपर हल कर लिया होगा।’ -अभिषेक उपाध्याय, सेंटर हेड, निर्माण आईएएस

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