SHIKSHAMITRA : शिक्षामित्रों को लगातार झटका, दो भर्तियों बाद भी खाली हाथ, शिक्षामित्र से शिक्षक और फिर बन गए शिक्षामित्र

SHIKSHAMITRA : शिक्षामित्रों को लगातार झटका, दो भर्तियों बाद भी खाली हाथ, शिक्षामित्र से शिक्षक और फिर बन गए शिक्षामित्र 



वहीं 69000 शिक्षक भर्ती में न्यूनतम उनकी सेवा के लिए 2.5 अंक प्रति वर्ष कटऑफ अंकों में कोई राहत न मिलने के कारण शिक्षा मित्रों को बड़ा झटका लगा है दो भर्तियों के बाद भी वे खाली हाथ हैं। 25 जुलाई, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि राज्य सरकार इन्हें आगे आने वाली दो भर्तियों कुछ छूट देते हुए मौका दें। 68500 और 69000 शिक्षक भर्ती के बाद शिक्षामित्र अब निराश हैं। 


उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि उनके भविष्य को लेकर सरकार ठोस निर्णय लें। हाईकोर्ट के फैसले के बाद लगभग दो हजार शिक्षा मित्र ही ऐसे हैं जो शिक्षक बनने की रेस में शामिल हो सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने के लिए कई तरह की और अधिकतम 25 अंक भारांक के रूप में दिए जाएंगे। इसे शिक्षक भर्ती के लिए बनने वाली मेरिट में जोड़ा जाता है। इसके बाद हुई 2018 में हुई 68500 शिक्षक भर्ती में इन्हें मौका मिला और लगभग 7 हजार शिक्षामित्र इस भर्ती में चयनित भी हुए।  


69000 शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्र 40 व 45 अंकों के क्वालीफाइंग अंक के लिए लड़ाई लड़ रहे थे क्योंकि 69000 शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में शामिल 20 हजार शिक्षामित्र इस दायरे में आ जाते। लेकिन ताजा फैसला 60 व 65% अंकों पर आया है तो लगभग दो हजार ही ऐसे शिक्षामित्र बचे हैं जो शिक्षक बनने के लिए पात्र होंगे। 


शिक्षामित्रों को भारांक मिलने से सफल होने की आशंका पर मेधावियों को पिछड़ने के डर से मामला पहुंचा था न्याय की चौखट पर। 

शिक्षामित्र से शिक्षक और फिर बन गए शिक्षामित्र 

यूपी में 2000 से शिक्षामित्र रखे गए। 2011 में तत्कालीन सपा सरकार ने पौने दो लाख शिक्षामित्रों को शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया। जून 2014 और अप्रैल 2015 में तत्कालीन सपा सरकार ने नियमों की अनदेखी करते हुए 1.30 लाख शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती दे दी। सितम्बर 2015 में हाईकोर्ट ने समायोजन रद्द कर दिया। इस फैसले के खिलाफ शिक्षामित्र सुप्रीम कोर्ट गए और जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी।



मेधावियों को पिछड़ने का था डर 
दरअसल मेधावी अभ्यर्थियों को यह डर था कि यदि 40-45 फीसदी न्यूनतम कटऑफ कर दिया गया तो शिक्षामित्र 25 अंकों के भारांक के साथ काफी आगे निकल जाएंगे। वहीं 60 व 65 फीसदी कटऑफ होने पर केवल मेधावी ही इस चयन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। इस शिक्षक भर्ती में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने भले ही विशेष अपील दायर कर दी हो लेकिन अभ्यर्थी इस बाबत लचर पैरवी का आरोप लगाते रहे। अभ्यर्थियों ने कई बार लखनऊ से लेकर इलाहाबाद तक की सड़कों पर उतरें और महाधिवक्ता के हाईकोर्ट में पेशन होने पर प्रदर्शन किया।

Post a Comment

0 Comments