SHIKSHAK BHARTI : 69000 शिक्षक भर्ती में प्रश्नों के गलत उत्तर को लेकर दाखिल याचिकाओं पर विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट तलब

SHIKSHAK BHARTI : 69000 शिक्षक भर्ती में प्रश्नों के गलत उत्तर को लेकर दाखिल याचिकाओं पर विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट तलब


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर बेसिक स्कूलों में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में प्रश्नों के गलत उत्तर को लेकर दाखिल याचिकाओं पर विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने रोहित शुक्ल, अंशू सिंह, सुनीता सहित कई अन्य याचिकाओं पर दिया है। जस्टिस पाडिया ने कहा कि पुनर्मूल्यांकन एवं स्क्रूटनी के लिए कोर्ट विशेषज्ञ नहीं है। राज्य सरकार ने उत्तरकुंजी जारी कर आपत्ति मांगी थी। साथ ही एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। आपत्तियों पर विचार कर कमेटी ने 18 जनवरी 2019 को रिपोर्ट पेश की थी। वही रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

याचियों का कहना है कि कई प्रश्नों के उत्तर विकल्प गलत हैं तो कुछ के दो उत्तर विकल्प हैं, जिससे परिणाम सवालों के घेरे में है। सरकार का कहना है कि प्रश्नों व उत्तरों को जारी कर आपत्ति मांगी गई थी। विशेषज्ञ कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट दी है। याची भी परीक्षा में बैठे हैं। चयन प्रक्रिया में कोई अवैधानिकता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर संशोधित उत्तर कुंजी जारी कर परिणाम घोषित किया गया है। इस पर कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट तलब की है। मामले पर अगली सुनवाई 30 मई को होगी।


उधर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ने प्रतिउत्तर देने के लिए याचियों के वकील को दिया वक्त

लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षक के 69 हजार पदों पर भर्ती मामले में सुनवाई चल रही है। गुरुवार को परीक्षा के चार विवादित सवालों के सम्बन्ध में राज्य सरकार समेत दो पक्षकारों की तरफ से जवाबी हलफ़नामा पेश किया गया। जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश देते हुए याचियों के अधिवक्ता को इसका प्रतिउत्तर आगामी 30 मई तक पेश करने का मौका दिया। अगली सुनवाई शनिवार को होगी।


न्यायामूर्ति आलोक माथुर ने गुरुवार को चेंबर में सुनवाई की। रिषभ मिश्र व दो अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल एक याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की गयी। अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चार सवालों के विवादित उत्तरों के सम्बन्ध में विशेषज्ञों की समिति गठित कर पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। इसके साथ ही अंतरिम राहत के तौर पर चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने की अपील की है। याचियों के अधिवक्ता अमित सिंह भदौरिया के मुताबिक 8 मई को जारी उत्तर कुंजी के चार उत्तरों को लेकर अभ्यर्थियों को आपत्ति है। आपत्ति के सम्बंध में अभ्यर्थियों ने सम्बंधित अधिकारियों के समक्ष भी अपना पक्ष रखा था। कोई सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। इसमें भारत में गरीबी का आकलन, नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक, सामाजिक प्रेरक व एक परिभाषा से सम्बंधित सवाल हैं।

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