Wednesday, February 28, 2018

CM, MEETING, BASIC SHIKSHA NEWS : कैबिनेट बैठक निरस्त, अध्यापक सेवा नियमावली में होना था संशोधन।

CM, MEETING, BASIC SHIKSHA NEWS : कैबिनेट बैठक निरस्त, अध्यापक सेवा नियमावली में होना था संशोधन।

MAN KI BAAT : बच्चों का भविष्य संवारने की चुनौती है वास्तव में बच्चे हकीकत के सामूहिक-सामाजिक जीवन से अलग - थलग हो रहे हैं, आज भारत में छह से 15 वर्ष आयु समूह में करीब 28 करोड़ बच्चे हैं, उनका मानसिक विकास सही तरह से हो और वे देश की आवश्यकतानुरूप विकसित हों, यह चिंता......

MAN KI BAAT : बच्चों का भविष्य संवारने की चुनौती है वास्तव में बच्चे हकीकत के सामूहिक-सामाजिक जीवन से अलग - थलग हो रहे हैं, आज भारत में छह से 15 वर्ष आयु समूह में करीब 28 करोड़ बच्चे हैं, उनका मानसिक विकास सही तरह से हो और वे देश की आवश्यकतानुरूप विकसित हों, यह चिंता......

पिछले कुछ वर्षो में बाल और किशोर अपराधों के साथ-साथ बच्चों में विकृत-असामान्य व्यवहार के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। बच्चों की ओर से आक्रामक मनोवृत्ति का प्रदर्शन करने और यहां तक कि हिंसा, हत्या, दुष्कर्म की घटनाओं में शामिल होने की खबरें अब आए दिन दिखाई पड़ रही हैं। समस्या गांव से लेकर शहर और गरीब से लेकर अमीर, सभी तबकों में जिस तरह से फैल रही है वह एक महामारी का रूप धारण कर सकती है। इस खतरनाक हालत की वजहें जानने की कोशिश करने के साथ उनके समाधान में शिक्षा व्यवस्था की भूमिका पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। इस क्रम में यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या सिर्फ बच्चों का ही शिक्षण पर्याप्त है?

पिछले कुछ सालों में भारतीय समाज काफी बदल गया है। नगरीकरण, शिक्षा, रोजगार इत्यादि के लिए नई जगहों में प्रवास, टूटते संयुक्त परिवार और बढ़ते हुए एकल परिवार के साथ आधुनिक जीवनशैली ने नए दवाबों को जन्म दिया है। अब वह सामूहिक टोला-मोहल्ला संस्कृति नहीं रही जिसमें समाज के बड़े-बुजुर्ग का दबाव बच्चों पर होता था। इस संस्कृति में हर बड़ा व्यक्ति चाचा या दादा हुआ करता था, जो गलत काम के लिए बच्चों-किशोरों को डांट भी सकता था। इसके अतिरिक्त बढ़ती हुई भौतिकता, आगे बढ़ने की अंधी होड़, पति-पत्नी, दोनों का कामकाजी होना, घर में दादा-दादी आदि के न होने से बच्चों को सही-गलत बताने वाला कोई नहीं रहा। ऊपर से कोढ़ में खाज की तरह टेलीविजन, इंटरनेट, सोशल मीडिया के उफान ने बच्चों को एक अंधी सुरंग में धकेल दिया है।

टेलीविजन में पश्चिमी समाज-संस्कृति से प्रभावित ऐसे ऊटपटांग किस्म के सीरियल दिखाए जा रहे हैं जहां हर कोई हर किसी का प्रतिद्वंद्वी या दुश्मन है। बच्चों में लोकप्रिय काटरून चैनलों की हालत भी बुरी है। उनमें हर चरित्र यहां तक कि पौराणिक धार्मिक-ऐतिहासिक बाल नायक भी उग्र रूप में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उनकी आंखों में बालसुलभ सौम्यता की जगह आक्रामकता झलकती है। हिंदी काटरूनों की बात करें तो मोटू-पतलू, तेनालीरामा, गली गली सिमसिम, अकबर-बीरबल जैसे इने-गिने सीरियल हैं जो बाल मन पर वैसा कुप्रभाव नहीं छोड़ते। विदेशी काटरूनों की डबिंग करके हिंदी भाषा में पेश कर बच्चों के सामने एक ऐसी संस्कृति परोसी जा रही जहां बड़े-छोटे का लिहाज, समरसता, नम्रता और करुणा आदि भावों के लिए कोई जगह ही नहीं। ऊपर से इंटरनेट, वीडियो गेम्स और सोशल मीडिया ने बच्चों को ऐसी आभासी दुनिया में ला पटका है जहां हिंसा, अपराध और विकृत व्यवहार भी सहज खेल ही बन गए हैं। इन चीजों ने बच्चों को हकीकत के सामूहिक-सामाजिक जीवन से और भी अलग-थलग कर दिया है। आज पांचवीं- छठीं कक्षा के बच्चों के भी फेसबुक, वाट्सएप आदि के अकाउंट हैं। परंपरागत वैकल्पिक साधनों की अनुपस्थिति के कारण बच्चे सोशल मीडिया की लत का शिकार हो रहे हैं। आठवीं कक्षा के विद्यार्थी द्वारा ई-मेल पर अपनी शिक्षिका के साथ कैंडिल लाइट डिनर और फिर शारीरिक संबंध के प्रस्ताव की एक ताजा खबर भयावह स्थितियों का संकेत मात्र है।

समाधान के विविध आयाम हो सकते हैं। एक शिक्षार्थी होने के नाते मेरा दृष्टिकोण शिक्षापरक है। इस संदर्भ में पहला सुझाव है कि स्कूली शिक्षा में प्राचीन भारतीय संस्कृति के तत्वों का समावेश अर्थात नैतिक और मूल्यपरक शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। हाल में सीबीएसई बोर्ड ने अपने से जुड़े स्कूलों में कक्षा छह से आठ के विद्यार्थियों के लिए एक तीन वर्षीय मूल्यपरक कोर्स का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत विद्यार्थियों को भाईचारा, विनय और करुणा से संबद्ध मानवीय गुणों की शिक्षा दी जाएगी, लेकिन इस स्वागतयोग्य प्रस्ताव की कुछ सीमाएं हैं। एक तो यह स्कूलों के लिए स्वैच्छिक होगा यानी वे इसे अपनाएं या न अपनाएं जबकि इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए। दूसरे, यह पाठ्यक्रम साल भर में 16 पीरियड का प्रस्तावित है, जबकि इसे कम से कम प्रति सप्ताह एक यानी 32 पीरियड का होना चाहिए। इसे सिर्फ सीबीएसई बोर्ड तक ही न होकर पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए और, अंतत: इसमें उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया जाना चाहिए। दूसरा सुझाव है कि नौवीं से 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए श्रम संबंधित पाठ्यक्रम की अनिवार्यता हो। हमारे गुरुकुलों में राजपुत्र से लेकर सामान्य बालक को भी लकड़ी चुनने से लेकर आश्रम व्यवस्था में हाथ बंटाने के विभिन्न श्रम-संबंधित कार्य करने पड़ते थे।

आधुनिक युग में विवेकानंद से लेकर गांधीजी ने भी श्रम के महत्व पर जोर दिया है। यह ठीक है कि आधुनिक युग में लकड़ी चुनने जैसे कार्य संभव नहीं, लेकिन श्रम संबंधित शिक्षा में बागवानी या विभिन्न हस्तकलाओं जैसी चीजों का ज्ञान कराने से एक तरफ भविष्य में रोजगार की संभावना रहेगी तो दूसरी तरफ श्रम की महत्ता और उसके प्रति सम्मान का भाव भी बच्चों में पनपेगा। इस सबसे उनकी विपुल ऊर्जा कुप्रभावों की ओर न जाकर एक सकारात्मक दिशा में अग्रसर होगी। विद्यार्थियों के अलावा माता-पिता को जागरूक करना भी आज बहुत जरूरी हो गया है।

भौतिकता की अंधी दौड़ में शामिल माता-पिता के पास आज बच्चों के लिए समय नहीं है और न ही उन्हें यह पता है कि आज की परिस्थितियों यथा इंटरनेट-सोशल मीडिया की आंधी में बच्चों का कैसे मार्गदर्शन करें? यूरोपीय देशों ने इस समस्या के लिए सामुदायिक बाल केंद्रों की स्थापना की है। इनमें स्कूल उपरांत बच्चों को व्यस्त रखने से लेकर माता-पिता को भी प्रशिक्षित किया जाता है। अपने देश में संसाधनों केअभाव में ऐसी व्यवस्था निकट भविष्य में संभव तो नहीं है, लेकिन अभिभावकों के लिए ग्राम पंचायतों, सार्वजनिक भवनों या सामुदायिक केंद्रों में पाक्षिक या मासिक वर्कशॉप-व्याख्यान होने चाहिए। इसके लिए गैर सरकारी संगठनों की मदद ली जा सकती है।

वहीं कोष कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी यानी सीएसआर के तहत जुटाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मीडिया के भी शिक्षण की जरूरत है। जिस तरह की चीजें विभिन्न मीडिया माध्यम परोस रहे हैं उसके प्रति उन्हें आगाह करने का वक्त आ गया है। इसके लिए मीडिया संगठनों को चार-छह माह में नियमित तौर पर रिव्यू या वर्कशॉप जैसा कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। इस तरह का आदेश सूचना-प्रसारण मंत्रलय या अन्य मीडिया संगठन दे सकते हैं। इसी क्रम में मीडिया नीति शास्त्र का पेपर मीडिया कोर्स का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। भारत में छह से 15 वर्ष आयु समूह में करीब 28 करोड़ बच्चे हैं। उनका मानसिक विकास सही तरह से हो और वे देश की आवश्यकतानुरूप विकसित हों, यह चिंता सभी को करनी चाहिए।

- लेखक डॉ निरंजन कुमार
(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं)

INTERDISTRICT TRANSFER, BASIC SHIKSHA NEWS : अंतरजिला तबादला आवेदनों का सत्यापन 5 तक, आदेश जारी ।

INTERDISTRICT TRANSFER, BASIC SHIKSHA NEWS : अंतरजिला तबादला आवेदनों का सत्यापन 5 तक, आदेश जारी ।

UPPSS, MOBILE, BASIC SHIKSHA NEWS : जनपद सहारनपुर व गाजियाबाद में प्राथमिक शिक्षकों की उपस्थिति सेल्फी से लेने की प्रक्रिया रोकने हेतु उत्तर प्रदेशीय प्रा0शि0संघ ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को लिखा अनुरोध पत्र, क्लिक कर देखें ।

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UPPSS, BASIC SHIKSHA NEWS : यूपीबोर्ड के इण्टरमीडिएट वर्ष-2018 की वार्षिक परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्न पत्र में बेसिक शिक्षकों की भावनाओं को आहत किये जाने वाले प्रश्न-पत्र बनाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही किये जाने के सम्बन्ध में अपर मुख्य सचिव बेसिक को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने लिखा पत्र, क्लिक कर देखें ।

UPPSS, BASIC SHIKSHA NEWS : यूपीबोर्ड के इण्टरमीडिएट वर्ष-2018 की वार्षिक परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्न पत्र में बेसिक शिक्षकों की भावनाओं को आहत किये जाने वाले प्रश्न-पत्र बनाने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही किये जाने के सम्बन्ध में अपर मुख्य सचिव बेसिक को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने लिखा पत्र, क्लिक कर देखें ।

SALARY, BASIC SHIKSHA NEWS : राज्य कर्मचारियों को आज जारी होगा वेतन, होली के त्योहार को देखते हुए सरकार ने जारी किया फरमान

SALARY, BASIC SHIKSHA NEWS : राज्य कर्मचारियों को आज जारी होगा वेतन, होली के त्योहार को देखते हुए सरकार ने जारी किया फरमान

लखनऊ : होली के त्योहार को देखते हुए सरकार ने सचिवालय कर्मचारियों के साथ राज्यकर्मियों, सहायताप्राप्त शिक्षण व प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों और कार्य प्रभारित कर्मचारियों को बुधवार को ही फरवरी के वेतन का भुगतान करने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि पेंशन भुगतान का आदेश न होने से नाराज पेंशनधारकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बुधवार को ही यह आदेश जारी करने की मांग की है।

📌 GOVERNMENT ORDER, SALARY : होली से कर्मचारियों को दिनांक 28 फरवरी, 2018 को वेतन का भुगतान करने के सम्बन्ध में ।

होली से पहले कर्मचारियों को वेतन के भुगतान के लिए वित्त विभाग की ओर से मंगलवार को इस बारे में सभी जिलाधिकारियों, मुख्य व वरिष्ठ कोषाधिकारियों और समस्त विभागों को जारी शासनादेश में कहा गया है कि एक मार्च को होलिका दहन और दो मार्च को होली का पर्व है। इसलिए कर्मचारियों को फरवरी माह के वेतन का भुगतान 28 फरवरी को हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र ने पर्व से पहले वेतन दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया है। दूसरी तरफ सचिवालय पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव एनपी त्रिपाठी ने वेतन की तरह सेवानिवृत्त कार्मिकों को पर्व से पहले पेंशन न दिए जाने को अन्याय करार दिया है। त्रिपाठी ने बुधवार को ही आदेश जारी कर पेंशनधारकों के खाते में रकम पहुंचाने की मांग की है।


SHIKSHAK BHARTI, EXAMINETION : परिषदीय स्कूलों में 68500 शिक्षक भर्ती की वीडियो कांफ्रेंसिंग पांच को, सहायक अध्यापक भर्ती की पहली बार लिखित परीक्षा 12 मार्च को होगी सम्पन्न

SHIKSHAK BHARTI, EXAMINETION : परिषदीय स्कूलों में 68500 शिक्षक भर्ती की वीडियो कांफ्रेंसिंग पांच को, सहायक अध्यापक भर्ती की पहली बार लिखित परीक्षा 12 मार्च को होगी सम्पन्न


इलाहाबाद । परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा को लेकर शासन भी खासा गंभीर है। इस परीक्षा की तैयारियों को लेकर पांच मार्च को शाम साढ़े चार बजे अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे।

अफसरों को परीक्षा में नकल रोकने के कड़े निर्देश दिए जाएंगे और अब तक तैयारियों का हाल भी पूछा जाएगा। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती की पहली बार लिखित परीक्षा 12 मार्च को होनी है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन, केंद्र निर्धारण हो चुका है, जबकि प्रवेशपत्र का वितरण कराया जा रहा है। अब परीक्षा तैयारियों पर सभी ने ध्यान केंद्रित किया है।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव डा. सुत्ता सिंह ने बताया कि अपर मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग की सूचना सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित शिक्षा महकमे के अफसरों को भेज दी गई है। इसका एजेंडा भी तय कर लिया गया है ।

इलाहाबाद : शिक्षक भर्ती की वीडियो कांफ्रेंसिंग पांच को

इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा को लेकर शासन भी खासा गंभीर है। इस परीक्षा की तैयारियों को लेकर पांच मार्च को शाम साढ़े चार बजे अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे। अफसरों को परीक्षा में नकल रोकने के कड़े निर्देश दिए जाएंगे और अब तक तैयारियों का हाल भी पूछा जाएगा। 

Tuesday, February 27, 2018

GOVERNMENT ORDER, SALARY : होली से कर्मचारियों को दिनांक 28 फरवरी, 2018 को वेतन का भुगतान करने के सम्बन्ध में ।

GOVERNMENT ORDER, SALARY : होली से कर्मचारियों को दिनांक 28 फरवरी, 2018 को वेतन का भुगतान करने के सम्बन्ध में ।

SHIKSHAK BHARTI, EXAMINETION, BASIC SHIKSHA NEWS : प्रदेश के 235 केंद्रों पर होगी 68500 शिक्षक भर्ती की परीक्षा, परीक्षा 12 मार्च को 10 से एक बजे की पाली में सभी मंडल मुख्यालय वाले जिलों में कराई जाएगी।

SHIKSHAK BHARTI, EXAMINETION, BASIC SHIKSHA NEWS : प्रदेश के 235 केंद्रों पर होगी 68500 शिक्षक भर्ती की परीक्षा, परीक्षा 12 मार्च को 10 से एक बजे की पाली में सभी मंडल मुख्यालय वाले जिलों में कराई जाएगी।

हिन्दुस्तान टीम,इलाहाबाद । बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा प्रदेश के 235 केंद्रों पर होगी। परीक्षा 12 मार्च को 10 से एक बजे की पाली में सभी मंडल मुख्यालय वाले जिलों में कराई जाएगी। अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र सोमवार को वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं।

साथ ही उन अभ्यर्थियों की लिस्ट भी वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है जिनके फार्म विभिन्न कारणों से निरस्त किए गए हैं। परीक्षा के लिए 124938 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 4092 के ऑनलाइन आवेदन विभिन्न कारणों से निरस्त कर दिए गए हैं। इस प्रकार 120846 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे।

इलाहाबाद में सर्वाधिक 12712 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे और यहां सबसे अधिक 26 केंद्र बनाए गए हैं। लखनऊ के 24 केंद्रों पर 11991, आगरा के 23 पर 10915, कानपुर नगर के 16 केंद्रों पर 9616, वाराणसी के 14 केंद्रों पर 9017 और गोरखपुर के 11 केंद्रों पर 6723 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। अलीगढ़ में 8, आजमगढ़ 17, बरेली 10, फैजाबाद 17 और मेरठ में 19 सेंटर परीक्षा के लिए बनाए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए मुसीबत बनी परीक्षा देने की शर्त इलाहाबद। शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में सम्मिलित होने की शर्त अभ्यर्थियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है।

सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ. सुत्ता सिंह ने निर्देश दिया है कि परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण योग्यता का प्रमाणपत्र या प्रशिक्षण योग्यता के अंतिम सेमेस्टर की निर्गत अंकपत्र की मूल प्रति या उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा/केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रमाणपत्र में से किसी एक प्रमाणपत्र को अनिवार्य रूप से लाना होगा। परीक्षा के लिए जारी प्रवेश पत्र के साथ ऑनलाइन आवेदन में अंकित आधार कार्ड की मूल प्रति भी लाना होगा। जबकि 12460 शिक्षक भर्ती में काउंसिलिंग करा चुकी ऋचा सिंह व रुचि सिंह का कहना है कि उनके सभी अंक पत्र व प्रमाण पत्र डायट हरदोई में जमा हैं। अब उन्हें निकलवाने में मशक्कत करनी पड़ेगी। परीक्षा की तैयारी भी जरूरी है और इधर होली की छुट्टियां भी हो रही हैं जिसमें डायट बंद रहेंगे।

TRANSFER, BSA, BASIC SHIKSHA NEWS : तबादलों में सत्यापन की गड़बड़ी पर बीएसए जिम्मेदार, आवेदन पत्रों के सत्यापन जांच का प्रमाणपत्र 27 फरवरी को दोपहर 3 बजे तक परिषद को भेज दें

TRANSFER, BSA, BASIC SHIKSHA NEWS : तबादलों में सत्यापन की गड़बड़ी पर बीएसए जिम्मेदार, आवेदन पत्रों के सत्यापन जांच का प्रमाणपत्र 27 फरवरी को दोपहर 3 बजे तक परिषद को भेज दें

हिन्दुस्तान टीम, लखनऊ । शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादलों में बेसिक शिक्षा परिषद ने अधिकारियों को अपनी गलती सही करने का एक और मौका दिया है। वहीं सभी बीएसए से ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन प्रमाणपत्र भी मांगा है। जिस जिले से सत्यापन प्रमाणपत्र नहीं भेजा जाएगा, उस जिले से तबादले नहीं होंगे।

सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 26 फरवरी यानी सोमवार को सत्यापन की कार्रवाई पूरी करनी थी लेकिन जिलों से बीएसए की मनमानी की शिकायतों के कारण बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने फिर सभी बीएसए को आदेश दिए हैं कि वे आवेदन पत्रों के सत्यापन जांच का प्रमाणपत्र 27 फरवरी को दोपहर 3 बजे तक परिषद को भेज दें। यदि शिक्षकों के आवेदन पत्रों के सत्यापन में बीएसए से कोई गलती हो गई है तो इसके बारे में वे परिषद को सूचित कर दें ताकि उसे सही करने की प्रक्रिया की जाए। यदि जांच के दौरान उन्हें लगता है कि किसी अध्यापक के सत्यापन में चूक हो गई है तो उसके आवेदन पत्र संख्या भी परिषद को बताएं ताकि उस आवेदन पत्र को सही करने के लिए एनआईसी उसे पुर्नसत्यापित करने के लिए रीसेट करे।

वहीं सत्यापन प्रमाणपत्र के अभाव में उस जिले से शिक्षकों के तबादले नहीं होंगे जिसके लिए बीएसए जिम्मेदार होंगे। दरअसल शिक्षकों के तबादले में पारदर्शिता का अभाव रहा है। कई जिलों में बीएसए मनमानी कर मानकों के आधार पर सत्यापन न कर, अपने हिसाब से सत्यापन कर रहे हैं जिसकी शिकायतें अध्यापकों ने लखनऊ से लेकर इलाहाबाद तक में की है। उन शहरों के लिए ज्यादा आवेदन हैं जहां रिक्त सीटें पहले ही कम हैं। इस मारामारी का फायदा जिले के अधिकारी उठा रहे हैं और मनमाने तरीके से सत्यापन कर रहे हैं। इसी से निपटने के लिए विभाग सत्यापन प्रमाणपत्र भी ले रहा है ताकि उसकी जवाबदेही तय की जा सके। इस बार विभाग ने वरीयता तय करने के लिए गुणवत्ता अंकों का निर्धारण किया है। तबादले इन्हीं अंकों के आधार पर किए जाने हैं।

PROTEST, BASIC SHIKSHA NEWS : टीईटी 2011 पास बीएड अभ्यर्थियों ने कफन ओढ़ कर किया प्रदर्शन, की नियुक्ति की मांग

PROTEST, BASIC SHIKSHA NEWS : टीईटी 2011 पास बीएड अभ्यर्थियों ने कफन ओढ़ कर किया प्रदर्शन, की नियुक्ति की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ । यूपी की भाजपा सरकार की वादा खिलाफी से नाराज टीईटी 2011 पास बीएड अभ्यर्थियों ने सोमवार को गांधी प्रतिमा के समक्ष कफन ओढ़ कर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार उनकी नियुक्ति नही कर रही है।

जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष सोमवार को काफी तादात में अभ्यर्थी एकत्र हुए। अभ्यर्थियों ने कफन ओढ़ कर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री से प्राथमिक विद्यालयों मे नियुक्ति देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे बीएड टीईटी 2011 उत्तीर्ण अचयनित संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मुकेश राय ने कहा कि प्रदेश के करीब 70 हजार बीएड अभ्यर्थी टीईटी 2011 की परीक्षा पास कर चुके हैं।

पूर्ववर्ती सरकार की उपेक्षा की वजह से बीते सात सालों से नियुक्ति के लिए बेरोजगार अभ्यर्थी भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और वर्तमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्र नाथ पांडेय ने सरकार बनने पर नियुक्ति का भरोसा दिया लेकिन उसे पूरा नही किया।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को अपने आदेश में कहा था कि सभी अंतरिम आदेशों का पालन किया जाए और प्रदेश सरकार को छूट दी जाती है कि 7 दिसंबर 2012 को 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती का निकाला गया विज्ञापन वैध है।

संदीप कुमार ने बताया कि बीती 29 जनवरी को बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल और विभाग के निदेशक डा. सर्वेन्द्र विक्रम सिह से मुलाकात की थी। उन्होंने प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया लेकिन अभी तक कार्यवाही शुरू नही हुई।

नौकरी की मांग कर बीएड अभ्यर्थियों का धरना

हिन्दुस्तान टीम, लखनऊ । नियुक्ति न मिलने से नाराज बीएड टेट-2011 के उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार तरीके से अपना आक्रोश व्यक्त किया। सोमवार को गांधी प्रतिमा पार्क में प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थी विरोध स्वरूप कफन ओढ़कर लेट गए। इससे पहले की उनकी शव यात्रा निकाली जाती जिला प्रशासन हकरत में आई और शासन स्तर पर जल्द वार्ता कराने का आश्वासन देकर शांत कराया। वहीं अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय के बाद भी वार्ता नहीं कराई गई तो सामूहिक आत्मदाह करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। यह लोग बीएड टेट 2011 अचयनित संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एकजुट हुए थे।

सोमवार सुबह काफी संख्या में अभ्यर्थी चारबाग में एकत्र हुए। इसके बाद सभी गांधी प्रतिमा स्थल पहुंच और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मोर्चा के अध्यक्ष मुकेश राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी बीएड टेट 2011 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं हुआ है, जबकि प्रदेश की बीजेपी सरकार ने उनको प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति दिलाने का वादा किया था। उन्होंने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। संदीप कुमार ने कहा कि कोर्ट ने समस्त अंतरिम आदेशों का पालन करने का आदेश देते हुए प्रदेश सरकार को छूट दी थी कि वह सात दिसंबर 2012 को जारी किए गए 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती का विज्ञापन 15वें व 16वें संशोधनों के तहत वैध है, जिस विज्ञापन पर अभ्यर्थियों का 291 करोड़ रुपए सरकार के पास जमा है। सरकार अभ्यर्थियों के हित को देखते हुए इस विज्ञापन पर लंबित भर्ती प्रकिया को आगे बढ़ाकर उनको न्याय दे सकती है। उन्होंने जल्द ही काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर भर्ती पूरी करने की मांग की।

SHIKSHAK BHARTI, BASIC SHIKSHA NEWS, EXAMINETION : बिना वैध प्रमाणपत्रों के नहीं दे पाएंगे शिक्षक भर्ती परीक्षा, 68500 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए दिशा-निर्देश हुए जारी

SHIKSHAK BHARTI, BASIC SHIKSHA NEWS, EXAMINETION : बिना वैध प्रमाणपत्रों के नहीं दे पाएंगे शिक्षक भर्ती परीक्षा, 68500 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए दिशा-निर्देश हुए जारी

MADARASA, BASIC SHIKSHA NEWS : फर्जी मदरसे सरकार को लगा रहे थे 100 करोड़ की चपत, वेबपोर्टल से हुई सरकारी खजाने की बचत, मदरसा आधुनिकीकरण व मिनी आइटीआइ योजना के जरिये चल रहा था फर्जीवाड़ा

MADARASA, BASIC SHIKSHA NEWS : फर्जी मदरसे सरकार को लगा रहे थे 100 करोड़ की चपत, वेबपोर्टल से हुई सरकारी खजाने की बचत, मदरसा आधुनिकीकरण व मिनी आइटीआइ योजना के जरिये चल रहा था फर्जीवाड़ा

लखनऊ : कागजों में चल रहे फर्जी मदरसे हर साल सरकार को 100 करोड़ रुपये की चपत लगा रहे थे। मदरसों के पंजीकरण के लिए बनाए गए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के वेबपोर्टल से यह जानकारी सामने आई है। यह वे मदरसे हैं जो सरकार से हर साल करोड़ों रुपये अनुदान लेकर सरकारी खजाने को चपत लगा रहे थे। सबसे अधिक फर्जीवाड़ा मदरसा आधुनिकीकरण व मिनी आइटीआइ योजना में सामने आया है।

दरअसल, प्रदेश सरकार ने मदरसों का सारा विवरण एक जगह दर्ज करने के लिए एक वेबपोर्टल बनाया है। इसमें मदरसों की मान्यता से लेकर उनके यहां शिक्षकों तक का ब्योरा सहित हर एक सूचना वेबपोर्टल पर दर्ज करनी थी। सरकार ने साफ कर दिया था कि इस बार की मदरसा शिक्षा परिषद के परीक्षा फार्म भी उन्हीं के भरे जाएंगे जो इस वेबपोर्टल पर पंजीकरण कराएंगे।

इसके बावजूद प्रदेश के करीब दो हजार से अधिक मदरसे ऐसे हैं जिन्होंने अपना पंजीकरण वेबपोर्टल पर नहीं कराया। स्थिति यह है कि प्रदेश में मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त 19213 मदरसे हैं। इनमें से करीब 17 हजार के आस-पास मदरसों ने ही अपना पंजीकरण कराया है। जांच में पता चला कि इससे वह मदरसे हट गए जो केवल कागजों में चल रहे थे।

कागजों में चल रहे थे आधुनिकीकरण योजना के मदरसे : वेबपोर्टल पर पंजीकरण न कराने वाले मदरसों में ज्यादातर मदरसा आधुनिकीकरण योजना के मदरसे शामिल हैं। यह कागजों में संचालित हो रहे थे। इनमें हंिदूी, अंग्रेजी, गणित व विज्ञान जैसे आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए शिक्षकों को सरकार मानदेय देती है। प्रदेश में 8171 मदरसे इस योजना के तहत सरकार से मानदेय पा रहे हैं। इसमें स्नातक के साथ बीएड डिग्री वाले शिक्षकों को आठ हजार रुपये व परास्नातक के साथ बीएड करने वाले शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय मिलता है। पंजीकरण न कराने वाले दो हजार मदरसों में ज्यादातर यही मदरसे हैं।

मिनी आइटीआइ चलाने वाले 20 मदरसों ने नहीं कराया पंजीकरण : मिनी आइटीआइ चलाने वाले 20 मदरसों ने भी अपना पंजीकरण नहीं कराया। इस योजना में 140 मदरसे शामिल थे लेकिन, इनमें से 120 ने ही अपना पंजीकरण कराया है। ऐसे में कागजों में चल रहे फर्जी मदरसों ने पंजीकरण न कराकर इस योजना से किनारा कर लिया है।

एक ही शिक्षक के नाम कई-कई मदरसों में थे दर्ज : वेब पोर्टल से उन शिक्षकों की भी पोल खुल गई जिनका नाम कई-कई मदरसों में दर्ज थे। सरकार ने मदरसों के साथ ही शिक्षकों का विवरण भी वेबपोर्टल पर दर्ज कराया है।1 ऐसे में उन मदरसों ने इस पोर्टल में पंजीकरण नहीं कराया जिनमें शिक्षक तक अपने नहीं थे। इधर-उधर से शिक्षक लेकर यह मदरसे फर्जी तरीके से संचालित हो रहे थे।

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