Wednesday, May 31, 2017

URDU TEACHER : 20 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाले ब्लॉक में ही उर्दू शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला, प्रदेश के 350 विद्यालयों में उर्दू शिक्षक नियुक्ति की अनुमति

URDU TEACHER : 20 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाले ब्लॉक में ही उर्दू शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला, प्रदेश के 350 विद्यालयों में उर्दू शिक्षक नियुक्ति की अनुमति

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों की तैनाती नहीं होगी। अब केवल उन्हीं स्कूलों को उर्दू शिक्षक या फिर शिक्षिका मिलेंगे, जिन विकासखंडों में मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के 350 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में ही उर्दू शिक्षक नियुक्ति की दी है। 1सर्व शिक्षा अभियान की अपर परियोजना निदेशक राजकुमारी वर्मा ने बीते 31 मार्च को बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया था कि सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में नवीन उर्दू शिक्षक या फिर शिक्षिका की नियुक्ति न की जाए। अब अपर निदेशक ने बीएसए को अवगत कराया है कि भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने बीते 27 मार्च को बैठक करके उत्तर प्रदेश के 350 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में उर्दू शिक्षक नियुक्त करने का प्रावधान किया है। मंत्रलय ने यह अनुमति इस प्रतिबंध के साथ दी है कि यदि जरूरत हो तो उर्दू शिक्षकों की तैनाती उन्हीं विद्यालयों में की जाये जिन विकासखंडों में 20 फीसद से अधिक मुस्लिम आबादी है। अपर निदेशक ने बीएसए को सभी स्कूलों की सूची भेज दी है। उसी के अनुरूप अब शिक्षकों की नियुक्ति होगी।’

कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला

प्रदेश के 350 विद्यालयों में उर्दू शिक्षक नियुक्ति की अनुमति

SYLLABUS : प्राथमिक-माध्यमिक पाठ्यक्रमों में अनिवार्य हो कृषि शिक्षा

SYLLABUS : प्राथमिक-माध्यमिक पाठ्यक्रमों में अनिवार्य हो कृषि शिक्षा

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में कृषि को अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर जोर दिया है। परिषद ने इसके लिए प्रस्ताव पारित किया है। इसके अलावा केरल में वामपंथी ¨हसा पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की की गई है।1विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री सीमांतदास, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शोधार्थी शहजादी व केरल के प्रांत मंत्री पी श्यामराज ने मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के डीपीए सभागार में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने से भावी पीढ़ी में कृषि के प्रति लगाव व जानकारी बढ़ेगी। आधुनिक विधि, तकनीक, शोध आदि की जानकारी विद्यालयों को मिलनी चाहिए। मातृभाषा में कृषि शिक्षा दी जाए और राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति बनाई जाए। आइआइटी, आइआइएम की तर्ज पर कृषि संस्थान खोले जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय मंत्री सीमांत दास ने बताया कि इसी प्रस्ताव में चिकित्सा शिक्षा की कमियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया।1केरल के प्रदेश मंत्री पी श्यामराज ने बताया कि केरल की वामपंथी सरकार बनने के बाद वहां राजनीतिक विरोधियों का हिंसक दमन चल रहा है। वामपंथी कार्यकर्ता नृशंसता से विरोधियों की आवाज दबाना चाहते हैं। केरल में शैक्षिक वातावरण भी ठीक नहीं है। अभी हाल में केरल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा सरेआम गाय काटने की निर्मम घटना और वामपंथियों द्वारा बीफ पार्टी का आयोजन धार्मिक भावनाओं को भड़काने के नजरिए से किया गया। केरल में दो सौ स्थानों पर बीफ पार्टी की गई इसी से कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की मानसिकता का अनुमान लगाया जा सकता है।1राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैदराबाद की शोधार्थी शहजादी ने तीन तलाक का मुद्दा उठाया और कहा कि मुस्लिम महिलाओं की के अनुसार इसे प्रतिबंधित करना चाहिए। इसी प्रकार मुसलमानों को आरक्षण का भी विद्यार्थी परिषद विरोध करती है। 1विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन सेल टूर कार्यक्रम के माध्यम से संस्कृतियों को जोड़ने का काम कर रहा है। खासकर पूवरेत्तर के छात्र-छात्रएं एक माह के लिए यूपी व अन्य प्रदेशों में परिवारों में रहकर वहां के तौर-तरीके सीखते हैं।’>>अभाविप राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पारित किए दो प्रस्ताव 1’>>केरल में कम्युनिस्ट हिंसा पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की

AADHAR CARD : ननिहाल-ददिहाल गए बच्चों का आधार कैसे बनवाएं?

AADHAR CARD : ननिहाल-ददिहाल गए बच्चों का आधार कैसे बनवाएं?

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश सरकार वर्ष में 15 दिन का अवकाश पहले ही खत्म कर चुकी है। अब शिक्षकों गर्मी की छुट्टी का 40 दिन का अवकाश खराब होने को लेकर आशंकित हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे का आधार कार्ड और यूनीफार्म जून माह में बनवाने के आदेश से परिषदीय स्कूलों के शिक्षक परेशान हैं। उनकी परेशानी की वजह छुट्टी खराब होना ही नहीं है, बल्कि अवकाश में घर से बाहर गए बच्चों को बुलवाने के लिए वह क्या करें यह समझ नहीं पा रहे हैं। कुछ जिलों में तो शिक्षकों को ग्रीष्मावकाश में जिला न छोड़ने तक का आदेश दिया गया है।1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक अफसरों के तरह-तरह के आदेशों से परेशान हैं। बीमार होने पर छुट्टी मांगनी हो तो मोबाइल पर प्रार्थना पत्र भेजना पड़ रहा है। स्कूल में प्रार्थना करते बच्चों की सेल्फी लेकर हर दिन रिपोर्ट भेजनी होती है। मिडडे-मील व अन्य तमाम तरह के निर्देश अलग से लागू हैं। प्रदेश सरकार ने कुछ माह ने पिछले माह 15 महापुरुषों पर सार्वजनिक अवकाश खत्म कर दिया है। यहां तक गनीमत रही है, लेकिन बीते 20 मई के बाद से जिस तरह के निर्देश जारी हो रहे हैं उससे शिक्षकों की बेचैनी बढ़ी है। प्रदेश भर के परिषदीय, अशासकीय और मदरसा आदि में 20 मई से गर्मी की छुट्टी हो गई है। इसी बीच सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक ने आदेश दिया कि मई व जून माह में हर बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य रूप से बनवाया जाए। यह कार्य शिक्षकों के जुटे बगैर संभव नहीं है, लेकिन तमाम ऐसे बच्चे हैं जो छुट्टियों में अभिभावकों के साथ सुदूर या फिर नाना-बाबा के घर चले गए हैं। शिक्षक उनका आधार कैसे बनवाए? यह उन्हें नहीं सूझ रहा है। 1यही नहीं जून में ही हर छात्र-छात्र ही यूनीफार्म भी तैयार कराई जानी है, ताकि स्कूल खुलने पर 15 जुलाई तक उसका वितरण किया जा सके। इसमें भी शिक्षकों को अहम रोल अदा करना है, लेकिन बच्चों की गैरहाजिरी सबको अखर रही है। परिषद सचिव ने सोमवार को ही यूनीफार्म के लिए जवाबदेही भी तय कर दी है इससे अफसर शिक्षकों पर दबाव बनाये हैं कि वह यूनीफार्म हर हाल में इसी माह में तैयार करवा दें। लखनऊ मंडल के अफसरों ने शिक्षकों को जिला न छोड़ने का आदेश तक दिया है। इसके अलावा कक्षावार बच्चों की सूचना निश्शुल्क किताबों के लिए भी भेजी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल खुलने पर आधार व यूनीफार्म का कार्य प्राथमिकता पर पूरा कराया जा सकता है, लेकिन अफसर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।1राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश सरकार वर्ष में 15 दिन का अवकाश पहले ही खत्म कर चुकी है। अब शिक्षकों गर्मी की छुट्टी का 40 दिन का अवकाश खराब होने को लेकर आशंकित हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे का आधार कार्ड और यूनीफार्म जून माह में बनवाने के आदेश से परिषदीय स्कूलों के शिक्षक परेशान हैं। उनकी परेशानी की वजह छुट्टी खराब होना ही नहीं है, बल्कि अवकाश में घर से बाहर गए बच्चों को बुलवाने के लिए वह क्या करें यह समझ नहीं पा रहे हैं। कुछ जिलों में तो शिक्षकों को ग्रीष्मावकाश में जिला न छोड़ने तक का आदेश दिया गया है।1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक अफसरों के तरह-तरह के आदेशों से परेशान हैं। बीमार होने पर छुट्टी मांगनी हो तो मोबाइल पर प्रार्थना पत्र भेजना पड़ रहा है। स्कूल में प्रार्थना करते बच्चों की सेल्फी लेकर हर दिन रिपोर्ट भेजनी होती है। मिडडे-मील व अन्य तमाम तरह के निर्देश अलग से लागू हैं। प्रदेश सरकार ने कुछ माह ने पिछले माह 15 महापुरुषों पर सार्वजनिक अवकाश खत्म कर दिया है। यहां तक गनीमत रही है, लेकिन बीते 20 मई के बाद से जिस तरह के निर्देश जारी हो रहे हैं उससे शिक्षकों की बेचैनी बढ़ी है। प्रदेश भर के परिषदीय, अशासकीय और मदरसा आदि में 20 मई से गर्मी की छुट्टी हो गई है। इसी बीच सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक ने आदेश दिया कि मई व जून माह में हर बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य रूप से बनवाया जाए। यह कार्य शिक्षकों के जुटे बगैर संभव नहीं है, लेकिन तमाम ऐसे बच्चे हैं जो छुट्टियों में अभिभावकों के साथ सुदूर या फिर नाना-बाबा के घर चले गए हैं। शिक्षक उनका आधार कैसे बनवाए? यह उन्हें नहीं सूझ रहा है। 1यही नहीं जून में ही हर छात्र-छात्र ही यूनीफार्म भी तैयार कराई जानी है, ताकि स्कूल खुलने पर 15 जुलाई तक उसका वितरण किया जा सके। इसमें भी शिक्षकों को अहम रोल अदा करना है, लेकिन बच्चों की गैरहाजिरी सबको अखर रही है। परिषद सचिव ने सोमवार को ही यूनीफार्म के लिए जवाबदेही भी तय कर दी है इससे अफसर शिक्षकों पर दबाव बनाये हैं कि वह यूनीफार्म हर हाल में इसी माह में तैयार करवा दें। लखनऊ मंडल

CIRCULAR, AUDIT, SOCIAL AUDIT : सोशल ऑडिट एवं विद्यालय विकास योजना हेतु एक दिवसीय कार्यशाला के आयोजन के सम्बन्ध में ।

CIRCULAR, AUDIT, SOCIAL AUDIT : सोशल ऑडिट एवं विद्यालय विकास योजना हेतु एक दिवसीय कार्यशाला के आयोजन के सम्बन्ध में ।

Tuesday, May 30, 2017

DISTRICT COORDINATOR : 07 वर्ष से अधिक हो जाने पर जिला समन्वयक को अपने मूल पद पर प्रत्यावर्तित करने के आदेश ।

DISTRICT COORDINATOR : 07 वर्ष से अधिक हो जाने पर जिला समन्वयक को अपने मूल पद पर प्रत्यावर्तित करने के आदेश ।

DLAD : यूपी में बीटीसी बना डीएलएड कोर्स, संशोधन पर बैठक में लगी मुहर, नये सत्र से यह प्रभावी होगा।

DLAD : यूपी में बीटीसी बना डीएलएड कोर्स, संशोधन पर बैठक में लगी मुहर, नये सत्र से यह प्रभावी होगा।

इलाहाबाद : प्रदेश.में.दो.साल.का बेसिक.टीचिंग सर्टिफिकेट. (बीटीसी) कोर्स अब डिप्लोमा.इन.एलीमेंटरी.एजुकेशन.(डीएलएड) के नाम से जाना जाएगा। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए जरूरी बीटीसी कोर्स का नाम बदलने को बेसिक शिक्षा परिषद ने मंजूरी दे दी है। इस पर शासन की मुहर लगना भी तय है। यह कदम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई के निर्देश उठाया गया है। वैसे तो डीएलएड का कोर्स चार वर्ष का है, लेकिन यूपी में बीटीसी को ही डीएलएड कहा जाएगा।

उम्मीद है कि नये सत्र से यह प्रभावी होगा। राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान उप्र यानी सीमैट इलाहाबाद में शुक्रवार को परिषद की बैठक में करीब एक दर्जन से अधिक बिंदुओं पर चर्चा हुई और जिन पर आम सहमति बनी हैं, उन्हें शासन के पास मंजूरी के लिए जल्द ही भेजा जाएगा। अब बैठक नियमित करने पर भी सहमति बनी है।

असल में एनसीटीई पूरे देश में एक जैसा पाठ्यक्रम लागू करना चाहता है। देश के अन्य प्रांतों में डीएलएड लागू हो चुका है। यूपी में इस पर अब अमल होने जा रहा है। शिक्षा निदेशक बेसिक डा. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह, बेसिक शिक्षा परिषद सचिव संजय सिन्हा, राज्य शैक्षिक संस्थान के प्राचार्य दिव्यकांत शुक्ल, दिनेश शर्मा, लल्लन मिश्र, शिवशंकर पांडेय, जबर सिंह, संजय सिंह आदि रहे।

कक्षा एक से तीन की किताबों में संशोधन पर मुहर : एससीईआरटी के निर्देश पर राज्य शैक्षिक संस्थान ने कक्षा एक से तीन की किताबों में तमाम संशोधन किये हैं। पाठ्यक्रम को अभ्यास, चित्र आधारित व कविता, कहानी में पढ़ाने का निर्देश हुआ है। साथ ही उसे प्रयोग परक बनाया गया है। इसी तरह आठवीं कक्षा के विज्ञान विषय में डेंगू की रोकथाम को पाठ्यक्रम में जगह मिली है।

MAN KI BAAT : शिक्षा प्रणाली के स्तर को बढ़ावा देने के लिए सभी की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है क्योंकि शिक्षा समाज में सभी को अपने चारों ओर की वस्तुओं में हस्तक्षेप करके सकारात्मक रूप में बदलने में.........

MAN KI BAAT : शिक्षा प्रणाली के स्तर को बढ़ावा देने के लिए सभी की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है क्योंकि शिक्षा समाज में सभी को अपने चारों ओर की वस्तुओं में हस्तक्षेप करके सकारात्मक रूप में बदलने में.........

🔴 शिक्षा ही विकास का आधार

देश में शिक्षा प्रणाली के स्तर को बढ़ावा देने के लिए सभी की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है। स्कूल और कॉलेज प्राधिकरणों को अपने छात्रों में शिक्षा के लिए रुचि और जिज्ञासा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा के लिए कुछ मुख्य उद्देश्यों को निर्धारित करना होगा। शुल्क फीस संरचना पर भी व्यापक स्तर पर चर्चा करनी चाहिए क्योंकि अधिक शुल्क के कारण बहुत से विद्यार्थी अपनी शिक्षा को जारी रखने में सक्षम नहीं होते जो लोगों को जीवन के हरेक पहलु में असमानता की ओर ले जाती है। शिक्षा मनुष्य का सबसे पहला और अनिवार्य अधिकार है इसलिए सभी को शिक्षा में समानता मिलनी चाहिए। हमें लोगों के बीच में समानता के साथ ही पूरे देश में समान वैयक्तिक विकास लाने के लिए हमें सभी के लिए शिक्षा की सुविधा में संतुलन बनाना होगा। शिक्षा समाज में सभी को अपने चारों ओर की वस्तुओं में हस्तक्षेप करके सकारात्मक रूप में बदलने में मदद करती है। यह हमें हमारे शरीर, मस्तिष्क और अन्तर्मन में संतुलन बनाए रखने के साथ ही शिक्षा की तकनीकी में आवश्यक उन्नति को भी बढ़ावा देती है। यह देशों के वृद्धि और विकास के लिए समाज में प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देती है। यह समाज में सामान्य संस्कृति और मूल्यों को विकसित करने के द्वारा सभी को सामाजिक और आर्थिक दोनों रूपों से सक्षम बनाती है। स्पष्ट है कि शिक्षा और इसके महत्व से समाज का कोई भी पहलू अछूता नहीं है। यह प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण तंत्र है जो व्यक्ति के जीवन के साथ ही देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आजकल यह किसी भी समाज की नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन गई है। शिक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार के द्वारा 5 साल से 15 साल तक की आयु वाले सभी बच्चों के लिए शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है।

शिक्षा सभी के जीवन को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करती है और हमें जीवन की सभी छोटी और बड़ी समस्याओं का समाना करना सिखाती है। समाज में सभी के लिए शिक्षा की ओर इतने बड़े स्तर पर जागरूक करने के बाद भी देश के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा का प्रतिशत अभी भी समान है। पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी शिक्षा के उचित लाभ प्राप्त नहीं हो रहे हैं क्योंकि उनके पास धन और अन्य साधनों की कमी है। यद्यपि इन क्षेत्रों में इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार द्वारा कुछ नई और प्रभावी रणनीतियों की योजना बनाकर लागू किया गया है। शिक्षा ने मानसिक स्थिति को सुधारा है और लोगों के सोचने के तरीके को बदला है। यह आगे बढ़ने और सफलता और अनुभव प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास लाती है और सोच को कार्य रूप में बदलती है। बिना शिक्षा के जीवन लक्ष्य रहित और कठिन हो जाता है। इसलिए हमें शिक्षा के महत्व और दैनिक जीवन में इसकी आवश्यकता को समझना चाहिए। हमें पिछड़े क्षेत्रों में लोगों को शिक्षा के महत्व को बताकर इसे प्रोत्साहन देना चाहिए। विकलांग और गरीब व्यक्तियों को भी अमीर और सामान्य व्यक्तियों की तरह वैश्विक विकास प्राप्त करने के लिए शिक्षा की समान आवश्यकता है और उन्हें समान अधिकार भी प्राप्त है।

हममें से सभी को उच्च स्तर पर शिक्षित होने के लिए अपने सबसे अच्छे प्रयासों को करने के साथ ही सभी की शिक्षा तक पहुंच को संभव बनाना चाहिए जिसमें सभी गरीब और विकलांग व्यक्ति वैश्विक आधार पर भाग ले सकें।

शिक्षा समाज में सभी को अपने चारों ओर की वस्तुओं में हस्तक्षेप करके सकारात्मक रूप में बदलने में मदद करती है। यह हमें हमारे शरीर, मस्तिष्क और अन्तर्मन में संतुलन बनाए रखने के साथ ही शिक्षा की तकनीकी में आवश्यक उन्नति को भी बढ़ावा देती है। यह देशों के वृद्धि और विकास के लिए समाज में प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देती है ।

UNIFORM : 1.85 करोड़ छात्रों को 15 जुलाई तक मिलेगी ड्रेस, प्रा0/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ड्रेस वितरण के लिए सचिव ने जारी किए आदेश ।

UNIFORM : 1.85 करोड़ छात्रों को 15 जुलाई तक मिलेगी ड्रेस, प्रा0/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ड्रेस वितरण के लिए सचिव ने जारी किए आदेश

BIOMETRIC SYSTEM : अब स्कूलों में लगेगी बायोमेट्रिक उपस्थिति, विद्यालयों को खुद उठाना पड़ेगा खर्च, शिक्षक संघ बोला-कोई बंधुवा मजदूर नहीं हैं शिक्षक

BIOMETRIC SYSTEM : अब स्कूलों में लगेगी बायोमेट्रिक उपस्थिति, विद्यालयों को खुद उठाना पड़ेगा खर्च, शिक्षक संघ बोला-कोई बंधुवा मजदूर नहीं हैं शिक्षक

लखनऊ (डीएनएन)। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अब शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से समय से विद्यालय आना होगा। साथ ही निर्धारित समय के बाद ही विद्यालय से जाना भी होगा। इसके लिए इन विद्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति लगेगी। शासन के आदेश के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।राजधानी में कुल 108 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। कई बार अफसरों के निरीक्षण में देखने को मिला है कि शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी समय से विद्यालय में नहीं आते-जाते हैं। इससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है। चूंकि इनमें शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचरियों की उपस्थिति विद्यालय के रजिस्टर में लगती है। लिहाजा मनमाने तरीके से उपस्थिति का खेल चलता है। लेकिन अब इस पर रोक लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी विद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। उन्होंने इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने करने के भी सख्त निर्देश दिए हैं।

शासन ने बायोमैट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश जारी करने के साथ ही यह भी कहा है कि इसके लिए जो भी व्ययभार आएगा। वह संस्था अपने निजी स्त्रोतों से वहन करेगी। साथ ही भविष्य में इसके लिए शासकीय धनराशि की मांग नहीं की जाएगी।एडेड माध्यमिक विद्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति का उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि शिक्षक पढ़े-लिखे होते हैं न कि बंधुवा मजदूर जो बायोमेट्रिक उपस्थिति लगाएंगे। रही बात, खुद इस व्यवस्था का खर्च उठाने की तो विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक निशुल्क शिक्षा है। बच्चों से कोई पैसा नहीं लिया जाता। साथ ही विद्यालयों में कोई धनराशि भी अलग से नहीं मिलती है। स्थिति यह है कि चाक- डेस्टर की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। कक्षा एक से आठ निशल्क शिक्षा कर दी। बंधुवा मजदूर नहीं है। कहीं कोई शिकायत है तो प्रिंसिपल व मैनेजर की है।

CIRCULAR : चल अचल संपत्ति का विवरण तीन में उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

CIRCULAR : चल अचल संपत्ति का विवरण तीन में उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

TEACHERS : 20 नवंबर 1976, 25 मई 1977 के शासनादेश के तहत मांगी रिपोर्ट, 40 बरस पुराने आदेश से हटेंगे सरप्लस शिक्षक

TEACHERS : 20 नवंबर 1976, 25 मई 1977 के शासनादेश के तहत मांगी रिपोर्ट, 40 बरस पुराने आदेश से हटेंगे सरप्लस शिक्षक

धर्मेश अवस्थी ’ इलाहाबाद । अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के सरप्लस शिक्षकों की खोज 40 साल पुराने आदेश से हो रही है। इसके लिए कक्षावार और अनुभाग वार छात्र-छात्रओं की संख्या मांगी जा रही है। प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों के वादन को भी फेरबदल का आधार बनाने की तैयारी है। महकमे में सरप्लस शिक्षकों की रिपोर्ट मंगाने के लिए दो बार आदेश जारी हो चुके हैं लेकिन, विद्यालय और मंडलीय अफसर सूचनाएं नहीं दे रहे हैं।

प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में हाईस्कूल स्तर के 4556 व इंटरमीडिएट के 4025 विद्यालय हैं। इन स्कूलों के सरप्लस अध्यापकों की रिपोर्ट मांगने के लिए नौ मई को ही जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी हुआ है।

शिक्षा निदेशक माध्यमिक की ओर से उप शिक्षा निदेशक विभा शुक्ला ने जिलों को निर्देश दिया है कि वह 20 नवंबर 1976 और 25 मई 1977 के शासनादेश में निर्धारित मानक के अनुसार जिले के अशासकीय विद्यालयों में कक्षावार, अनुभागवार छात्र संख्या सृजित व कार्यरत अध्यापकों का विवरण भेजे। इंटरमीडिएट स्तर का भी विवरण मांगा गया। यह निर्देश एलटी ग्रेड व प्रवक्ता के लिए दिया गया। अफसर बताते हैं कि अशासकीय स्कूलों में मानक का स्टैंडर्ड अब भी 1976 व 1977 का ही लागू है।

यह जरूर है कि 1999 में अनुभाग का नए सिरे से गठन हुआ है। ज्ञात हो कि पहले एक अनुभाग में 40 बच्चे होते और बाद में इसे बढ़ाकर 65 कर दिया गया।

शासन केनिर्देश पर उप शिक्षा निदेशक ने 19 मई तक जिलों से रिपोर्ट मांगी थी लेकिन, एक भी जिले से सूचना नहीं पहुंची। 26 मई को शिक्षा निदेशक माध्यमिक अमरनाथ वर्मा ने संयुक्त शिक्षा निदेशकों से 30 मई तक रिपोर्ट मांगी है लेकिन, इस आदेश के बाद से जिलों में हड़कंप मचा है।

वादन भी होगा फेरबदल का आधार

माध्यमिक विद्यालयों में निर्देश है कि एक एलटी ग्रेड शिक्षक सप्ताह में कम से कम 36 वादन (पीरियड) जरूर पढ़ाए। यदि किसी स्कूल में एक ही विषय के दो एलटी ग्रेड शिक्षक हैं और उनके 36 वादन सप्ताह में पूरे नहीं होते हैं तो एक शिक्षक के हटने का कारण बनेगा। ऐसे ही प्रवक्ता को सप्ताह में 24 वादन पढ़ाना है यदि वह यह संख्या पूरी नहीं करता है तो प्रवक्ता सरप्लस की श्रेणी में आएगा।

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