Friday, March 31, 2017

BLACK DAY : अटेवा पेंशन बचाओ मंच एक अप्रैल को मनाएगा काला दिवस, शिक्षक काली पट्टी बांध करेंगे विरोध

BLACK DAY : अटेवा पेंशन बचाओ मंच एक अप्रैल को मनाएगा काला दिवस, शिक्षक काली पट्टी बांध करेंगे विरोध

SCHOOL, SESSION : स्कूलों में शैक्षिक माहौल बेहतर करने की अपील, नए सत्र में गर्मजोशी और नए कलेवर में शिक्षण कार्य करने का किया अनुरोध ।

SCHOOL, SESSION : स्कूलों में शैक्षिक माहौल बेहतर करने की अपील, नए सत्र में गर्मजोशी और नए कलेवर में शिक्षण कार्य करने का किया अनुरोध

DRESS, TEACHERS : मर्यादित परिधान में ही आएं अधिकारी और शिक्षक, सभी परिषदों ने जारी किए दिशा निर्देश

DRESS, TEACHERS : मर्यादित परिधान में ही आएं अधिकारी और शिक्षक, सभी परिषदों ने जारी किए दिशा निर्देश

SHIKSHAMITRA, ANUDESHAK, MANDEYA, TOILET : बढ़ सकता है शिक्षामित्रों का मानदेय, केंद्र ने दस हजार रुपये करने पर विचार करने को कहा, अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी होगी वृद्धि, सूबे के परिषदीय स्कूलों में बनेंगे 17 हजार शौचालय

SHIKSHAMITRA, ANUDESHAK, MANDEYA, TOILET : बढ़ सकता है शिक्षामित्रों का मानदेय, केंद्र ने दस हजार रुपये करने पर विचार करने को कहा, अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी होगी वृद्धि, सूबे के परिषदीय स्कूलों में बनेंगे 17 हजार शौचालय

प्रस्ताव नामंजूर : सौ से अधिक छात्र नामांकन वाले स्कूलों में सोलर पैनल सिस्टम लगाने के प्रस्ताव को भी केंद्र सरकार ने मंजूरी देने से इन्कार कर दिया है।

सूबे के परिषदीय स्कूलों में बनेंगे 17 हजार शौचालय : मोदी सरकार के स्वच्छता मिशन को रफ्तार देने के लिए प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में परिषदीय स्कूलों में 17 हजार अतिरिक्त शौचालयों के निर्माण को भी अगले वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना में मंजूरी दी गई है। यह शौचालय उन स्कूलों में बनाये जाएंगे जहां बच्चों की संख्या ज्यादा है।

नए निर्माण कार्यो पर चली कैंची : प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में नये स्कूलों, अतिरिक्त क्लास रूम, विद्यालयों की चहारदीवारी आदि के निर्माण के प्रस्ताव पर एक बार फिर कैंची चल गई। केंद्र सरकार ने इन प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों की मुराद जल्द ही पूरी हो सकती है। 27 मार्च को नई दिल्ली में हुई सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार ने शिक्षामित्रों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने पर विचार करने पर सहमति जतायी है। अभी शिक्षामित्रों को 3500 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। यदि केंद्र सरकार ने राज्य की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर मुहर लगायी तो प्रदेश के 26,504 शिक्षामित्रों के मानदेय में तकरीबन तीन गुने का इजाफा हो जाएगा।1एसएसए के राज्य परियोजना कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए उत्तर प्रदेश की जो वार्षिक कार्ययोजना प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की मंजूरी के लिए भेजी थी, उसमें शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव था। एसएसए के राज्य परियोजना निदेशक डॉ. वेदपति मिश्र ने बताया कि प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार की ओर से शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने पर विचार करने के लिए कहा गया है।

बढ़ेगा अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय : प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार ने अंशकालिक अनुदेशकों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 10,000 रुपये करने पर भी सहमति जतायी है। अंशकालिक अनुदेशकों को अभी 8470 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। राज्य कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू होने के क्रम में एसएसए के राज्य परियोजना कार्यालय ने अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार की ओर से पहले तो अनुदेशकों के मानदेय में सिर्फ 10 प्रतिशत वृद्धि की बात की गई लेकिन, बाद में इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये करने पर सहमति बनी। सहमति के इस बिंदु पर अमल होने पर प्रदेश के 30,949 अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में लगभग डेढ़ हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी।

🔴 केंद्र ने दस हजार रुपये करने पर विचार करने को कहा,

🔵 अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी होगी वृद्धि

Thursday, March 30, 2017

SUPREME COURT, ORDER : त्रिपुरा राज्य में अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति उच्चतम न्यायालय ने किया रद्द, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के उल्लंघन को लेकर न्यायलय हुआ सख्त, क्लिक कर उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश डाउनलोड करें ।

SUPREME COURT : त्रिपुरा राज्य में अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति उच्चतम न्यायालय ने किया रद्द, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के उल्लंघन को लेकर न्यायलय हुआ सख्त, क्लिक कर उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश डाउनलोड करें ।

त्रिपुरा राज्य उच्च न्यायालय द्वारा उक्त के सम्बन्ध में पारित आदेश---

https://drive.google.com/file/d/0B2S2weXMNZhlT21OTWZoQ0d0OTg/view?usp=drivesdk

कल हुये त्रिपुरा केस का आर्डर अपलोड हो गया है, सुप्रीम कोर्ट का RTE एक्ट पर कड़ा रुख अपनाते हुए किसी भी तरह की हिवाहवाली से इंकार किया है  सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आर्डर को सही माना है और उस आर्डर के पैराग्राफ 123 में कुछ संशोधन करते हुये सरकार को ३१ दिसम्बर तक  सभी को समान अवसर देते हुए नई भर्ती करने का आदेश दिया है।

O R D E R
We   have  heard  learned  counsel  for  the  parties  and perused  the  record.  We  do  not  find  any  ground  to  interfere  with the impugned order.
While  setting  aside  the  selections,  the  High  Court  in Para 123 of the impugned order observed: “123. 

*The  State  on  or  before  31.12.2014  must complete  a  fresh  process  of  selection  of  teachers in  all  categories.  In  view  of  the  discussions  held above,  we  direct  that  the  State  should  frame  a  new Employment  Policy  within  two  months  from  today  and shall  carry  out  selections  in  accordance  with  the fresh  policy  as  early  as  possible  and  not  later than 31.12.2014.”*

While  issuing  notice  in  the  present  matters  this  Court by  its  order  dated  04.08.2014  stayed  the  directions  contained in aforesaid para 123 of the impugned order.

Since  we  do  not  find  any  ground  to  interfere  with  the impugned  order,  the  directions  in  para  123  now  required  to  be suitably modified. We, therefore, direct:

(a) New Employment Policy should be framed by the State by 30th  April,  2017  if  not  already  framed  and  advertisements for filling up the vacancies may be issued latest by 31st, May, 2017.

(b)  The  fresh  selection  process  be  completed  on  or  before 31st  December,   2017   and   till   the   fresh   process   is completed, the teachers already appointed shall continue.

(c)   *The  candidates  who  participated  in  the  selection process   pursuant   to   the   advertisements   in   question, whether selected or not, will be allowed to participate in the  fresh  selection  process  by  relaxing  their  age  but subject to their having necessary qualifications.*

(d) The qualifications in the case of teachers governed by the  provisions  of  the  Right  of  Children  to  Free  and Compulsory Education Act, 2009 shall be in conformity with the relevant statutory provisions of the said Act.

(e) The qualifications of teachers employed for Classes IX and   above  shall  be  strictly  in  compliance  with  the relevant provisions concerning such appointments.

Subject  to  the  aforesaid  modifications,  the  view  taken by  the  High  Court  in  the  impugned  order  is  affirmed  and  the special leave petitions are dismissed. Pending application(s),
if any, also stand disposed of.

GOVERNMENT ORDER, GRANT, SALARY : बेसिक शिक्षा के परिषदीय शिक्षकों/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए 19 अरब 42 करोड़ 6 लाख 53 हजार का वेतन अनुदान जनपदवार आवंटित हुआ, क्लिक कर जारी आदेश देखें ।

GOVERNMENT ORDER, GRANT, SALARY : बेसिक शिक्षा के परिषदीय शिक्षकों/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए 19 अरब 42 करोड़ 6 लाख 53 हजार का वेतन अनुदान जनपदवार आवंटित हुआ, क्लिक कर जारी आदेश देखें ।

GRANT, SALARY : बेसिक शिक्षकों के वेतन के लिए 1500 करोड़ रूपये जारी, गुरुवार तक शिक्षकों के खाते में वेतन भेजने का निर्देश ।

GRANT, SALARY : बेसिक शिक्षकों के वेतन के लिए 1500 करोड़ रूपये जारी, गुरुवार तक शिक्षकों के खाते में वेतन भेजने का निर्देश ।

ELECTRIFICATION, GRANT : प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बकाया विद्युत बिलों के भुगतान के हेतु अनुदान आवंटित, आदेश व जनपदवार आवंटित धनराशि देखें ।

ELECTRIFICATION, GRANT : प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बकाया विद्युत बिलों के भुगतान के हेतु अनुदान आवंटित, आदेशजनपदवार आवंटित धनराशि देखें ।

CM : गरीब के बच्चे नंगे पैर नहीं जायेंगे स्कूल, गरीब के बच्चों को यूनिफार्म के साथ जूते भी देगें

CM : गरीब के बच्चे नंगे पैर नहीं जायेंगे स्कूल, गरीब के बच्चों को यूनिफार्म के साथ जूते भी देगें

GAZETTE, MATERNITY LEAVE : महिलाओं को 26 हफ्ते का सवैतनिक मिलेगा मातृत्व अवकाश, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मातृत्व लाभ (संशोधन) कानून, 2017 को अपनी मंजूरी दे दी, क्लिक कर गजट भी देखें जो अभी केन्द्रीय व्यवस्थाओं में ही लागू ।

GAZETTE, MATERNITY LEAVE : महिलाओं को 26 हफ्ते का सवैतनिक मिलेगा मातृत्व अवकाश, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मातृत्व लाभ (संशोधन) कानून, 2017 को अपनी मंजूरी दे दी, क्लिक कर गजट भी देखें जो अभी केन्द्रीय व्यवस्थाओं में ही लागू ।

नई दिल्ली । नये कानून के तहत महिला कर्मचारियों को अब 12 हफ्ते की बजाए 26 हफ्ते का सवैतनिक अवकाश मिलेगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मातृत्व लाभ (संशोधन) कानून, 2017 को अपनी मंजूरी दे दी। महिला कर्मचारियों के फायदे के लिए 55 वर्ष पुराने कानून के कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है।

नये कानून के तहत 50 या ज्यादा कर्मचारियों वाले हरेक संस्थान के लिए निर्धारित दूरी के भीतर क्रेच (शिशु-गृह) की सुविधा होना आवश्यक है। नियोक्ता भी एक महिला को दिन में चार बार क्रेच जाने की अनुमति देने के लिए बाध्य होगा।

कानून कहता है कि हरेक प्रतिष्ठान को इसके तहत उपलब्ध हर सुविधा के बारे में हरेक महिला को उसकी शुरूआती नियुक्ति के वक्त लिखित और इलेक्ट्रॉनिक रूप से बताना होगा। नियोक्ता महिला को मातृत्व अवकाश पाने के बाद घर से काम करने की इजाजत दे सकता है।

इसमें कहा गया है, ऐसी स्थिति में जहां महिला को सौंपी गयी कार्य की प्रकति उस तरह की हो कि वह घर से काम कर सकती है तो नियोक्ता ऐसी अवधि के लिए मातृत्व लाभ हासिल करने के बाद उसे ऐसा करने की अनुमति दे सकता है और ऐसी स्थिति में नियोक्ता और महिला आपसी तालमेल से राजी हो सकते है।

कानून तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने और मां बनने (जैविक मां जो अपने अंडाणु को दूसरी महिला में प्रतिरोपित कर बच्चा पैदा करती हैं) वाली महिला को 12 हफ्ते मातृत्व छुटटी की अनुमति देता है ।

कानून के तहत 26 हफ्ते की सवैतनिक छुटटी केवल दो बच्चों के लिए है। दस या ज्यादा लोगों को नौकरी देने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होने वाला कानून कहता है कि दो या ज्यादा बच्चों वाली महिला 12 हफ्ते के मातृत्व अवकाश की हकदार होगी।

DED : डीएड अभ्यर्थियों को नहीं मिल रही नियुक्ति, 1500 से अधिक अभ्यर्थी चयनित होने के बाद भी भटक रहे, शिक्षक भर्ती में अवमानना याचिका दाखिल करने की तैयारी

DED : डीएड अभ्यर्थियों को नहीं मिल रही नियुक्ति, 1500 से अधिक अभ्यर्थी चयनित होने के बाद भी भटक रहे, शिक्षक भर्ती में अवमानना याचिका दाखिल करने की तैयारी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल रहा है। तीन वर्ष से चयनित अभ्यर्थी यहां से वहां भटक रहे हैं। यह हाल तब है जब उनके लिए विभाग में सीटें तक सुरक्षित छोड़ी गई हैं। अभ्यर्थियों ने अब अवमानना याचिका करके कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी है।

प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों में 16448 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए जारी शासनादेश में डीएड सामान्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं दिया गया था। अभ्यर्थियों ने इस शासनादेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

कोर्ट ने 17 अगस्त, 2016 को डीएड अभ्यर्थियों को मौका देने का आदेश दिया। उनकी काउंसिलिंग कराई गई और मेरिट में आने वाले अभ्यर्थियों की सीटें कोर्ट के निर्देश पर सुरक्षित कराई गई। उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी, 2017 को बेसिक शिक्षा सचिव को आदेश दिया कि तीन सप्ताह के भीतर सभी डीएड सामान्य अर्ह अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किया जाए।

इस आदेश के करीब 50 दिन बीत चुके हैं अब तक उसका अनुपालन नहीं हो सका है। इस बीच विधानसभा चुनाव के कारण यह प्रकरण अधर में रहा। इधर कुछ कार्य शुरू हुआ, तभी शासन ने सारी भर्ती प्रक्रिया रोक दी है। इससे करीब 1500 अभ्यर्थी चयनित होने के बाद भी नौ माह से भटक रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति में शासन का आदेश और अन्य भर्ती प्रक्रिया आड़े नहीं आएगी इसलिए जल्द नियुक्ति पत्र दिया जाए। अन्यथा अवमानना याचिका दाखिल करेंगे।

🌑 1500 से अधिक अभ्यर्थी चयनित होने के बाद भी भटक रहे

🔴 शिक्षक भर्ती में अवमानना याचिका दाखिल करने की तैयारी

BED : अब पांच तक भरे जा सकेंगे बीएड के फार्म, आवेदन शुल्क भरने में तकनीकी दिक्कतों के कारण बढ़ाई तारीख

BED : अब पांच तक भरे जा सकेंगे बीएड के फार्म, आवेदन शुल्क भरने में तकनीकी दिक्कतों के कारण बढ़ाई तारीख

लखनऊ : बीएड के दो वर्षीय कोर्स में दाखिले के लिए अभ्यर्थी अब पांच अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन फार्म भर सकेंगे। अभी बीएड में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 31 मार्च थी, जिसे लविवि ने बढ़ा दिया है।

बीएड के राज्य समन्वयक प्रो. एनके खरे ने बताया कि बैंक और एनआइसी के बीच तकनीकी गड़बड़ी के कारण अभ्यर्थियों को पांच दिन आवेदन शुल्क जमा करने में कठिनाई हुई। विद्यार्थियों को कठिनाई न हो इसलिए यह तारीख बढ़ाई गई है।

प्रो. एनके खरे ने बताया कि बीएड में दाखिले के लिए अभी तक करीब 3.32 लाख अभ्यर्थी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं और इसमें से अधिकांश आवेदन शुल्क भी भर चुके हैं। बीएड में दाखिले के लिए तीन मई को संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने मांगा है छह हफ्ते में जवाब : इलाहाबाद हाईकोर्ट में पिछले दिनों बीबीए अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की याचिका पर एनआइसी व लविवि से छह हफ्ते में जवाब मांगा गया है। इसमें रजिस्ट्रार द्वारा स्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों को प्रवेश परीक्षा में शामिल करने के क्लाज पर कोर्ट ने रोक लगाई है और जवाब मांगा है। लविवि की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा रही है, ऐसे में लविवि को उम्मीद है कि शायद उन्हें मिल जाए।

🔴 अभी 31 तक ही थी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख

🌑 आवेदन शुल्क भरने में तकनीकी दिक्कतों के कारण बढ़ाई तारीख

TENDER, BSA : बीएसए बिना टेंडर के ही छपवा डाली 48 लाख की साम्रगी, इलेक्शन के ठीक पहले डीएम को गुमराह कर बीएसए ने हासिल की अनुमति ।

TENDER, BSA : बीएसए बिना टेंडर के ही छपवा डाली 48 लाख की साम्रगी, इलेक्शन के ठीक पहले डीएम को गुमराह कर बीएसए ने हासिल की अनुमति ।

ALLAHABAD HIGHCOURT, SALARY : बेसिक शिक्षा सचिव को तीन माह में गाइडलाइन जारी करने का निर्देश, यहीं क्लिक कर हाईकोर्ट का आदेश देखें ।

ALLAHABAD HIGHCOURT, SALARY : बेसिक शिक्षा सचिव को तीन माह में गाइडलाइन जारी करने का निर्देश, यहीं क्लिक कर हाईकोर्ट का आदेश देखें ।

विसं, इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा उप्र को सत्र लाभ पाए अध्यापकों को बकाया वेतन भुगतान संबंधी गाइड लाइन तीन माह में जारी करने का निर्देश दिया है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोरखपुर ने यह कहते हुए वेतन देने से इन्कार कर दिया था कि इस संबंध में शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं है। बेसिक शिक्षा परिषद उप्र इलाहाबाद के वित्त नियंत्रक ने नौ जून, 2016 को ही सचिव को पत्र लिखकर गाइड लाइन जारी करने की प्रार्थना की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने प्राइमरी स्कूल खुटहन खास, गोरखपुर के प्रधानाचार्य महातम प्रसाद व अन्य अध्यापकों लालमन, श्रीमती शारदा देवी व रामरक्षा की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अनुराग शुक्ल ने बहस की।

मालूम हो कि राज्य सरकार ने शिक्षा सत्र में परिवर्तन किया। जुलाई से जून सत्र को अप्रैल से मार्च तक घोषित किया। सत्र लाभ देने के नियम के चलते 31 मार्च के बाद सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों को सत्र लाभ देने का निर्णय लिया गया।

याचीगण 30 जून 2015 को सेवानिवृत्त हो रहे थे। अप्रैल में सत्र शुरू होने के कारण उन्हें सत्र लाभ दिया गया तथा इन्हें 31 मार्च 2016 को सेवानिवृत्त किया गया, किंतु सरकार की तरफ से ऐसे अध्यापकों के वेतन भुगतान के संबंध में कोई गाइड लाइन न आने के कारण याचीगण को नौ माह का वेतन नहीं दिया गया।

ALLAHABAD HIGHCOURT, SALARY : 9 माह के वेतन का नही हुआ था भुगतान, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को दिया निर्देश, तीन माह में वेतन भुगतान को लेकर जारी करें गाइडलाइन

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9 माह के वेतन का नही हुआ था भुगतान,

प्रथमिक विद्यालय खुटहन ख़ास, ब्लॉक चरगावां,गोरखपुर में तैनात प्रधानाध्यापक श्री महात्मा प्रसाद को सत्र लाभ के कारण जुलाई 2015 से मार्च 2016 तक के वेतन भुगतान का है मामला।

हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को दिया निर्देश, तीन माह में वेतन भुगतान को लेकर जारी करें गाइडलाइन

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

Court No. - 17
Case :- WRIT - A No. - 12915 of 2017
Petitioner :- Mahatam Prasad
Respondent :- State Of U.P. And 4 Others
Counsel for Petitioner :- Anurag Shukla
Counsel for Respondent :- C.S.C.,Arun Kumar

Hon'ble Manoj Kumar Gupta,J.
Heard counsel for the petitioner, learned standing counsel for respondents no.1 & 2 and brief holder of Sri Arun Kumar for respondents no.3 to 5. With their consent, the writ petition is being disposed of finally without inviting a formal counter affidavit.

The petitioner retired from the post of Headmaster, Primary School Khutahan Khas, Block Chargawan, district Gorakhpur on 31.3.2016 after being given sessions benefit. The petitioner claimed arrears of salary for the period 1.7.2015 upto 31.3.2016 by filing Writ Petition No.38320 of 2016, which was disposed of by this Court by order dated 19.8.2016 directing the respondents to accord consideration to his representation. In pursuance thereof, the District Basic Education Officer has proceeded to decide the claim of the petitioner. It has been rejected solely on the ground that there is no clear cut direction for payment of arrears of salary of teachers who were taken back in service by giving them the sessions benefit. It is mentioned in the impugned order that guidance in this regard was sought from the Secretary, Basic Education on 9.6.2016.
Counsel for the petitioner submitted that considerable time has passed since the clarification/guidelines had been sought from the Secretary. It is urged that the petitioner cannot be made to suffer on account of indecision on part of the authorities.
Learned standing counsel appearing on behalf of the State respondents very fairly stated that in case the relevant guidelines have yet not been issued at the level of the State Government in pursuance of the communication dated 9.6.2016 by the Finance Controller, Basic Education Parishad, Uttar Pradesh, Allahabad, the first respondent shall accord consideration to the same and shall take decision.
Having regard to the facts of the case and the submissions made, this Court is of the opinion that interest of justice would be served in permitting the petitioner to approach the first respondent with a certified copy of this order and a fresh representation as well as photo copy of the impugned order. In that event, the first respondent shall take decision in the matter by issuing appropriate guidelines within a period of next three months. The impugned order shall abide by the decision that would be taken by the first respondent.
The writ petition stands disposed of accordingly.
(Manoj Kumar Gupta, J.)
Order Date :- 28.3.2017
SL

SHIKSHAMITRA, SALARY : असमायोजित शिक्षामित्रों ने मांगा पूरा वेतन, शिक्षामित्र के तौर पर सिर्फ 3500 रुपये ही मानदेय मिल रहा

SHIKSHAMITRA, SALARY : असमायोजित शिक्षामित्रों ने मांगा पूरा वेतन, शिक्षामित्र के तौर पर सिर्फ 3500 रुपये ही मानदेय मिल रहा

लखनऊ : असमायोजित शिक्षामित्रों ने राज्य सरकार से मांग की है कि जब तक उनका समायोजन प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक पद पर नहीं हो जाता तब तक उन्हें पूरा वेतन दें। अभी उन्हें शिक्षामित्र के तौर पर सिर्फ 3500 रुपये ही मानदेय मिल रहा है।

बुधवार को असमायोजित शिक्षक उत्थान समिति, उत्तर प्रदेश की ओर से यूपी प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिव किशोर द्विवेदी ने कहा कि हमें सिर्फ 11 महीने का ही मानदेय मिलता है। महंगाई के कारण अब जीवन यापन करना कठिन हो गया है। प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक पद पर समायोजित न हो पाने वाले शिक्षामित्र अरूण कुमार सिंह कहते हैं कि राज्य सरकार से हम मांग करते हैं कि वह सुप्रीम कोर्ट में चल रहे इस वाद में अपनी ओर से दमदार पैरवी करे। हम शिक्षामित्रों को उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।

MANDEYA, SHIKSHAMITRA, ANUDESHAK : बढ़ सकता है शिक्षामित्रों का मानदेय, केंद्र ने दस हजार रुपये करने पर विचार करने को कहा, अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी होगी वृद्धि

MANDEYA, SHIKSHAMITRA, ANUDESHAK : बढ़ सकता है शिक्षामित्रों का मानदेय, केंद्र ने दस हजार रुपये करने पर विचार करने को कहा, अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भी होगी वृद्धि

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों की मुराद जल्द ही पूरी हो सकती है। 27 मार्च को नई दिल्ली में हुई सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार ने शिक्षामित्रों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने पर विचार करने पर सहमति जतायी है। अभी शिक्षामित्रों को 3500 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। यदि केंद्र सरकार ने राज्य की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर मुहर लगायी तो प्रदेश के 26,504 शिक्षामित्रों के मानदेय में तकरीबन तीन गुने का इजाफा हो जाएगा।

एसएसए के राज्य परियोजना कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए उत्तर प्रदेश की जो वार्षिक कार्ययोजना प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की मंजूरी के लिए भेजी थी, उसमें शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव था। एसएसए के राज्य परियोजना निदेशक डॉ.वेदपति मिश्र ने बताया कि प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार की ओर से शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने पर विचार करने के लिए कहा गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि असल स्थिति प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक का कार्यवृत्त जारी होने पर पता चलेगी। इससे पहले पिछले दो वर्षो में भी राज्य की ओर शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था लेकिन, प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में नामंजूर कर दिया गया था।

बढ़ेगा अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय : प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार ने अंशकालिक अनुदेशकों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 10,000 रुपये करने पर भी सहमति जतायी है। अंशकालिक अनुदेशकों को अभी 8470 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। राज्य कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू होने के क्रम में एसएसए के राज्य परियोजना कार्यालय ने अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार की ओर से पहले तो अनुदेशकों के मानदेय में सिर्फ 10 प्रतिशत वृद्धि की बात की गई लेकिन, बाद में इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये करने पर सहमति बनी। सहमति के इस बिंदु पर अमल होने पर प्रदेश के 30,949 अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में लगभग डेढ़ हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी। राज्य सरकार ने वार्षिक कार्ययोजना के तहत 23,538 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे थे, जिसमें से प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड ने 20,500 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें से लगभग 17,500 करोड़ रुपये वेतन खर्च के हैं।

SCHOOL, SYLLABUS, SESSION : प्राथमिक स्कूलों में सत्र की तैयारियां अधूरी, पाठ्यक्रम बदलाव का अनुमोदन नहीं, बेसिक शिक्षा निदेशक का पद खाली

SYLLABUS, SESSION, SCHOOL : प्राथमिक स्कूलों में सत्र की तैयारियां अधूरी, पाठ्यक्रम बदलाव का अनुमोदन नहीं, बेसिक शिक्षा निदेशक का पद खाली

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी नए शैक्षिक सत्र को लेकर कोई तैयारी नहीं है। इस बार शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश तक नहीं मिले हैं, पिछले कुछ वर्षो से एक अप्रैल को सत्र शुरू होता आ रहा है। उसी लिहाज से इस बार भी खानापूरी हो जाएगी। नए सत्र के लिए विभागीय तैयारियां सिफर हैं। किताब, ड्रेस पर विचार तक नहीं हुआ है। सूबे की पूर्ववर्ती सरकार ने माध्यमिक के साथ प्राथमिक विद्यालयों में नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से लागू किया था। पिछले साल सत्र शुरू होने से पहले ही बेसिक शिक्षा सचिव ने शैक्षिक कैलेंडर जारी किया था और किताबों का समय पर इंतजाम करने की हिदायत दे दी गई थी। इस बार अब तक शैक्षिक कैलेंडर का अता-पता नहीं है और न ही किताबों के प्रकाशन की दिशा में ही कदम बढ़ाए गए हैं।

यह जरूर है कि पिछले सत्र में बांटे जाने वाले स्कूल बैग और मिडडे-मील के बर्तन अब स्कूलों को पहुंच रहे हैं, उनको वितरित करने की खानापूरी चल रही है। ड्रेस को लेकर अफसरों में ऊहापोह है। पिछले सत्र में अक्टूबर-नवंबर में किताबों का वितरण जैसे तैसे हो पाया था। नया सत्र शुरू करते समय कुछ पुरानी किताबें छात्र-छात्रओं को वितरित की गई थी। शिक्षक इस बार अपने मन से उसी का अनुकरण करते हुए उत्तीर्ण होने वाले बच्चों की किताबें जमा करने का आदेश दे रहे हैं।

लचर कार्यशैली की स्थिति यह है कि रायबरेली आदि जिलों में 28 व 29 मार्च की शाम तक अंक पत्र छपकर स्कूलों में पहुंचे हैं, उनका वितरण 30 मार्च को करने के निर्देश हैं। अंक पत्र मिलने में देर होने के कारण शिक्षक किसी तरह से 31 मार्च तक अंक पत्र बांट पाएंगे। यही नहीं स्कूलों में नया सत्र शुरू करने के लिए कोई निर्देश विभागीय अफसरों की ओर से नहीं पहुंचा है कि स्कूलों में साज-सज्जा व रंगोली आदि बनाई जाएंगी या फिर जनप्रतिनिधियों को बुलाकर कार्यक्रम होंगे या नहीं।

बेसिक शिक्षा निदेशक का पद खाली

बेसिक शिक्षा के निदेशक का पद इस समय खाली चल रहा है। बीते 28 फरवरी को दिनेश बाबू शर्मा इस पद से रिटायर हो गए। उस समय नियमानुसार वरिष्ठ अपर शिक्षा निदेशक को इसका अतिरिक्त दायित्व दिया जाना चाहिए था। इसमें बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा का नाम सबसे ऊपर था, लेकिन मनमाने तरीके से बेसिक शिक्षा सचिव अजय कुमार सिंह ने यह अतिरिक्त कार्यभार ले रखा है। इससे विभाग पूरी तरह से ठप हो गया है।

पाठ्यक्रम बदलाव का अनुमोदन नहीं

बेसिक शिक्षा की कुछ पुस्तकों को रिवाइज्ड किया गया है। राज्य शिक्षा संस्थान ने पिछले दिनों लंबे समय तक कार्यशाला चलाकर पाठ्य पुस्तकों में बदलाव करने का खाका खींचा। यह बदलाव इसलिए हुआ ताकि बच्चों को पढ़ने में आसानी हो और लिपि के बजाय चित्र अधिक हों। राज्य शिक्षा संस्थान ने इस संबंध में प्रस्ताव परिषद को भेजा है। उसका अनुमोदन अभी नहीं हुआ है। इसके बाद ही किताबों का प्रकाशन होगा।

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