Tuesday, February 28, 2017

MAN KI BAAT : बच्चों से ज्यादा तनाव में अभिभावक क्यों! मेरा मानना है कि बच्चों का अपना मनोविज्ञान होता है, जिसे उन्हीं के चश्मे से देख कर समझना चाहिए और उनके बौद्धिक स्तर पर.....

MAN KI BAAT : बच्चों से ज्यादा तनाव में अभिभावक क्यों! मेरा मानना है कि बच्चों का अपना मनोविज्ञान होता है, जिसे उन्हीं के चश्मे से देख कर समझना चाहिए और उनके बौद्धिक स्तर पर.....

बोर्ड की सालाना परीक्षा का समय आ रहा है। विद्यालय, विभाग, अभिभावक और बच्चे सभी तैयारी में जुटे हैं। स्वाभाविक है कि सब पर दबाव होगा, लेकिन बच्चे एक अलग तरीके के तनाव में होंगे। उन्हें परीक्षा पास कर वांछित करियर के योग्य खुद को बनाना है। लेकिन यह भी देखने में आया है कि ऐसे मौके पर बच्चों से अधिक माता-पिता, अभिभावक तनाव में रहते हैं। इसी चिंता में वह अपने बच्चों को बार-बार नसीहत देते रहते हैं, या यूं कहें टोकते रहते हैं।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अधिकतर अभिभावक बच्चों को गाइड करने के नाम पर उन पर प्रेशर डालते हैं। ऐसे अभिभावक मानते हैं कि बच्चे के भविष्य के बारे में उनकी जो योजना है, वही पूर्ण सत्य है। बच्चा अभी नादान है, नासमझ है। न तो सही निर्णय ले पाएगा और न उस दिशा में प्रयास कर पाएगा। बच्चा अपना लक्ष्य भूल सकता है, राह से भटक सकता है। अपनी भूमिका में अभिभावक सही हो सकते हैं, एकदम सौ टका।

आखिर उनकी भी अपनी ख्वाहिशें रही हैं, जिंदगी के अधूरे सपने बचे हैं, वे समय के पारखी हैं, अनुभव के धनी हैं। इसलिए बच्चे के मामले में दखल देना उनका परमकर्तव्य है। हर बच्चे की क्षमता अलग-अलग होती है, ग्रहण करने का स्तर भिन्न-भिन्न होता है, बैठकर पढ़ने की सामथ्र्य अपनी-अपनी होती है। पढ़ने की शैली भी जुदा-जुदा होती है, विषय अपने-अपने होते हैं, पसंद के विषय भी अलग-अलग होते हैं। या यूं कहा जा सकता है कि हर बच्चे की प्रकृति और परवरिश में अंतर होता है। ऐसे में सभी एक ही ढंग से पढ़ाई करें ऐसा होना नामुमकिन है। कई बार बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा होता है, वह खुद को रिफ्रेश करना चाहता है, लेकिन घर के बड़े उन्हें ऐसा करने से रोक देते हैं। उसे पढ़ाई का धर्म याद दिलाते हैं। ये बात अभिभावक ही नहीं, विद्यालय के शिक्षकों पर भी लागू होती है। इस प्रकार के अंकुश से धीरे-धीरे बच्चा ऊब जाता है। इसे प्रवचन मानने लगता है, खुद को प्रतिकूल परिस्थिति से बचाने के लिए कोई बहाना खोजने लगता है। या फिर नसीहत की संभावना भांप तुरंत किताब खोलकर बैठ जाता है। जिन बच्चों की पढ़ाई ठीक है, पढ़ने की आदत बन चुकी है, विद्यालय में भी अच्छे नंबर आ रहे हैं। उससे शिक्षक और घर के बड़े सभी खुश रहते हैं। उसे कोई नहीं टोकता। इस श्रेणी के अलावा के बच्चों का स्वभाव दो तरह का होता है। एक वह, जो अपना आक्रोश किसी न किसी रूप में निकाल लेता है, यानी बहिमरुखी। ऐसा बच्चा तत्काल दबाव मुक्त हो जाता है, उसकी हरकतों से सयाने लोग खीज सकते हैं, उस पर अपना आदेश न मानने की तोहमत भी जड़ सकते हैं। दूसरे वह, जो अपने बचाव का तरीका नहीं खोज पाता, अपनी बात कह भी नहीं पाता। यानी अंतमरुखी। दूसरे तरह का बच्चा तनाव में आ जाता है। उस पर पियर प्रेशर अथवा साथियों का दबाव रहता है, तो घर के बड़ों के सपने पूरे करने का बोझ भी। एक बात और, ऐसे बच्चे पर पढ़ाई से ज्यादा परफॉर्मेस का तनाव रहता है। यह भी देखने में आता है कि स्कूली शिक्षा से ज्यादा प्रोफेशनल पढ़ाई के दरम्यान यह स्थिति अधिक आ सकती है।

अगर उम्मीद के मुताबिक उपलब्धि नहीं रही तो विद्यालय के शिक्षक क्या कहेंगे, संगी-साथी कैसी प्रतिक्रिया देंगे और घर के बड़े किस रूप में लेंगे, आदि-आदि। ऐसे में उसका मस्तिष्क विचलित हो सकता है। गलत कदम उठाने की सोच सकता है। ठीक यही वक्त है जब उसे संभालना जरूरी होता है। उसके मन की बात सुनने और समझने वाला कोई होना चाहिए। हल्की सी भी मदद उसकी राह बदल सकती है। उसे कामयाबी के शीर्ष तक पहुंचा सकती है। कोई उसे इतना भर याद दिला दे कि कॅरियर के तीन हजार से ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। हर बच्चे को एक ही तरह के कॅरियर से खुद को साबित करने की आवश्यकता नहीं। जो भी करो, अपना शत-प्रतिशत लगा कर करो। घर के बड़ों को अपने इरादे से अवगत कराओ, उनकी शुभकामनाएं हासिल करो। उनको अपनी क्षमताओं के बारे में बताओ। सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, ईमानदारी से प्रयास करो, पूरी कायनात आपके साथ होगी। सफलता खुद-ब-खुद आपके चरण छुएगी। सफल हो जाओगे तो जो अभी नाराज हैं, वह भी खुश हो जाएंगे। दरअसल बच्चों की मूल प्रकृति खुश रहना है। इसीलिए स्कूल-कालेज में अधिकतर बच्चे तनाव मुक्त रहते हैं। अगर उन पर कोई दबाव रहता है तो वह है पियर प्रेशर। वैसे पियर प्रेशर भी जरूरी है, वही अपनी काबिलियत और रुचि के मुताबिक करियर चुनने के लिए तैयार करता है। अपने साथियों की बातचीत बच्चों को अधिक प्रेरित करती है। इसीलिए अभिभावकों को भी अगर उन्हें गाइड करना है तो उनके साथ घुल-मिल कर रहना होगा, कई दिन तक उनके रूटीन की 24 घंटे मानीटरिंग के बाद ही एक दोस्त की तरह अपनी राय देनी होगी।

ऐसे भी कह सकते हैं कि बच्चों का अपना मनोविज्ञान होता है, जिसे उन्हीं के चश्मे से देख कर समझना चाहिए और उनके बौद्धिक स्तर पर खुद को ढालकर ही उन्हें नसीहत दी जानी चाहिए। तभी बात उनके दिलो-दिमाग पर प्रभाव डाल सकती है। उम्मीद की जाती है, इसे पढ़कर बच्चे और अभिभावक दोनों ही अपने तर्को की कसौटी पर तौलेंगे, कुछ पल खुद से बात कर, इस पर मंथन करेंगे। उनके तराजू में खरा उतर जाए तो अपनी कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव कर लक्ष्य हासिल करने के लिए अग्रसर होंगे।

       -जगदीश जोशी

BED, ONLINE APPLICATION : सूबे में दो वर्षीय बीएड कोर्स में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन दस मार्च से शुरू

BED, ONLINE APPLICATION : सूबे में दो वर्षीय बीएड कोर्स में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन दस मार्च से शुरू

जासं, लखनऊ : सूबे में दो वर्षीय बीएड कोर्स में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन दस मार्च से शुरू होंगे। 25 मार्च तक अभ्यर्थी बिना विलंब शुल्क के ऑनलाइन फॉर्म भर सकेंगे। इसके बाद 26 से 31 मार्च तक विलंब शुल्क भरकर अभ्यर्थी फॉर्म भर सकेंगे। शासन ने परीक्षा की जिम्मेदारी लविवि को दी है। तीन मई को बीएड में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। बीएड का ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए इस बार आधार कार्ड अनिवार्य होगा। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक प्रो. एनके खरे ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन शुल्क अभी तय नहीं है।

GOVERNMENT ORDER, EXAMINATION SCHEME : प्रदेश भर के परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाएं 18 से, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने सोमवार को जारी कर दिया कार्यक्रम, यहीं क्लिक कर जारी आदेश देखें ।

GOVERNMENT ORDER, SCHEME : प्रदेश भर के परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाएं 18 से, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने सोमवार को जारी कर दिया कार्यक्रम, यहीं क्लिक कर जारी आदेश देखें ।

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश भर के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं 18 मार्च से होंगी। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने सोमवार को इसका कार्यक्रम जारी कर दिया है। इम्तिहान 21 मार्च तक चलेगा। जिलों में परीक्षा की प्रक्रिया दो मार्च से ही शुरू हो जाएगी।

परिषद सचिव ने मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेजे आदेश में लिखा है कि दो मार्च को जिले में समय सारिणी एवं अन्य निर्देशों को विकासखंड, संकुल विद्यालय एवं विद्यालय तक भेजे जाएंगे। तीन मार्च को जिला स्तर पर कक्षा एक से पांच एवं कक्षा छह से आठ तक के प्रश्नपत्रों का निर्माण होगा। 13 मार्च को जिला स्तर पर प्रश्नपत्रों का मुद्रण एवं शील्ड पैकेट जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट प्राचार्य की कस्टडी में रखा जाएगा। 15 मार्च को डायट प्राचार्य प्रश्नपत्रों के शील्ड पैकेट खंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे। 16 मार्च को खंड शिक्षा अधिकारी प्रश्नपत्रों को केंद्रीय विद्यालय भेजेंगे। केंद्रीय विद्यालय से समय सारिणी के अनुसार परीक्षा की तारीख पर संबंधित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। 21 मार्च को इम्तिहान पूरा होने के बाद 24 से 26 मार्च तक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन होगा।

Monday, February 27, 2017

BTC, TRAINING, EXAMINATION SCHEME : प्रशिक्षण 2015 के अंतर्गत डायट एवं निजी संस्थानों में प्रवेश लेने वाले प्रथम सेमेस्टर के अभ्यर्थियों की परीक्षा दिनांक 18.04.17 से 20.04.17 में प्रस्तावित आदेश क्लिक कर प्रति देखें

BTC TRAINING, EXAMINATION SCHEME : प्रशिक्षण 2015 के अंतर्गत डायट एवं निजी संस्थानों में प्रवेश लेने वाले प्रथम सेमेस्टर के अभ्यर्थियों की परीक्षा दिनांक 18.04.17 से 20.04.17 में प्रस्तावित आदेश क्लिक कर प्रति देखें

MATERNITY LEAVE : संविदा अनुदेशकों को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश

मथुरा : संविदा अनुदेशकों को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश

मथुरा। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ाने वाले संविदा अनुदेशकों को भी मातृत्व अवकाश मिलेगा। अब तक ये लाभ स्थाई शिक्षिकाओं को मिल रहा था।

सर्वशिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को जारी किए पत्र में मातृत्व अवकाश दिए जाने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला हाईकोर्ट के आदेश पर लिया गया है। लखनऊ की रहने वाली एक अनुदेशक ने मातृत्व अवकाश को आवेदन किया था, लेकिन बीएसए ने नियमों का हवाला देकर इंकार कर दिया था। तब अनुदेशक ने हाईकोर्ट में मातृत्व अवकाश की गुहार लगाई थी।

ADMISSION, RTE : बीएसए कार्यालय से मिलेंगे फॉर्म, आरटीई के ऑफलाइन आवेदन आज से

बीएसए कार्यालय से मिलेंगे फॉर्म, आरटीई के ऑफलाइन आवेदन आज से

लखनऊ: राइट टु एजुकेशन के तहत शहर के निजी स्कूलों की 25% प्रतिशत सीटों पर दाखिले के लिए ऑफलाइन आवेदन 27 फरवरी से शुरू होंगे। इच्छुक अभिभावक सिटी स्टेशन स्थित बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक एक से दो दिन में ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू हो जाएगा।

बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया कि कार्यालय में इसके लिए अलग से काउंटर बनाया गया है। फॉर्म पूरी तरह नि:शुल्क है। इसे संबंधित प्रमाणपत्रों की कॉपी लगाकर कार्यालय में ही जमा करना होगा। आरटीई से संबंधित जानकारी भी अभिभावकों को कार्यालय में मिलेगी। बच्चे का चयन होने के बाद फोन पर ही इसकी सूचना दी जाएगी।

विभाग की ओर से नहीं किया गया प्रचार

विभाग की ओर से इस बार ऑनलाइन आवेदन तो कर दिया गया है, लेकिन किस यूआरएल पर आवेदन करना है, उसका कोई प्रचार प्रसार नहीं किया गया। ऐसे में लोगों को पता ही नहीं है कि ऑनलाइन कहां आवेदन करना है।

UPTET : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि यूपीटीईटी का वर्ष 2017 में भी आयोजन एक बार ही हो पाएगा, टीईटी 2017 सितंबर में होने के आसार

UPTET : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि यूपीटीईटी का वर्ष 2017 में भी आयोजन एक बार ही हो पाएगा, टीईटी 2017 सितंबर में होने के आसार
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि यूपीटीईटी का वर्ष 2017 में भी आयोजन एक बार ही हो पाएगा। विधानसभा चुनाव के कारण फरवरी में टीईटी कराने की योजना सफल नहीं हो सकी है। अब नई सरकार के गठन के बाद सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से नए सिरे से इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। उम्मीद है कि परीक्षा सितंबर या फिर अक्टूबर में होगी।
यूपीटीईटी 2016 का परिणाम जल्द आने के आसार हैं। इसके पहले ही सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने यूपीटीईटी 2017 को लेकर तैयारियां शुरू की थी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का निर्देश है कि टीईटी साल में दो बार आयोजित की जाए। निर्देश है कि साल में एक बार अनिवार्य रूप से परीक्षा कराई जाए। परीक्षा नियामक कार्यालय ने 2017 से दो बार टीईटी कराने की तैयारियां कई माह पहले ही शुरू कर दी थीं। उसके कुछ दिन बाद विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई। यूपी बोर्ड की परीक्षा को लेकर चुनाव आयोग ने जिस तरह से तेवर दिखाए उसके बाद से शिक्षा विभाग के अधिकांश अफसरों ने कुछ नया करने से किनारा कर लिया।
अब तैयारी है कि सूबे में नई सरकार बनने के बाद मार्च के अंत या फिर अप्रैल में टीईटी कराने का नया प्रस्ताव सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से भेजा जाएगा। मई से आवेदन लेने एवं सितंबर या फिर अक्टूबर में इम्तिहान कराने की योजना बन रही है। ऐसे हालात में इस साल भी दो बार परीक्षा होने के बिल्कुल आसार नहीं है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने बताया कि टीईटी के लिए नया प्रस्ताव होली के बाद भेजा जाएगा और जो निर्देश होंगे उसी के कार्य होगा।

Sunday, February 26, 2017

CASUAL LEAVE, GO, HOLIDAYS, IMPORTANT, LEAVE : रविवार व अन्य अवकाशों को आकस्मिक अवकाश में न जोड़े जाने के संबंध में शासनादेश ।

CASUAL LEAVE, GO, HOLIDAYS, IMPORTANT,  LEAVE : रविवार व अन्य अवकाशों को आकस्मिक अवकाश में न जोड़े जाने के संबंध में शासनादेश

CASUAL LEAVE, GO : नसबन्दी ऑपरेशन कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को विशेष आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति का आदेश देखें ।

CASUAL LEAVE, GO : नसबन्दी ऑपरेशन कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को विशेष आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति का आदेश देखें ।

EXAMINATION, BASIC SHIKSHA, SCHOOL : बेसिक शिक्षा परिषद की वार्षिक परीक्षाओं की तैयारियां हुईं तेज, परिषद ने परीक्षा कार्यक्रम बनाकर अनुमोदन के लिए भेजा

EXAMINATION, BASIC SHIKSHA, SCHOOL : बेसिक शिक्षा परिषद की वार्षिक परीक्षाओं की तैयारियां हुईं तेज, परिषद ने परीक्षा कार्यक्रम बनाकर अनुमोदन के लिए भेजा

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाओं की तैयारियां तेज हो गई हैं। परिषद ने परीक्षा कार्यक्रम बनाकर अनुमोदन के लिए भेजा है, माना जा रहा है कि अगले सप्ताह कार्यक्रम का औपचारिक एलान हो जाएगा। शिक्षकों के चुनाव ड्यूटी में व्यस्त होने की वजह से होली बाद ही परीक्षा शुरू होने की उम्मीद है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद के शैक्षिक सत्र को लेकर उहापोह कायम है, लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद का शैक्षिक सत्र अप्रैल माह से ही शुरू होगा। मौजूदा सत्र शुरू होने के पहले ही वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन होना है। परिषद मुख्यालय से इसका प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस पर शिक्षा निदेशक बेसिक का अनुमोदन होना है। ऐसे संकेत है कि अगले सप्ताह इस संबंध में निर्देश जारी हो जाएंगे। परिषद की अर्धवार्षिक परीक्षाएं बीते अक्टूबर माह में हुई थी। उस समय तक सभी स्कूलों में पाठ्य पुस्तकें तक नहीं पहुंच सकी थी। विद्यालयों में सभी पुस्तकें वितरित हो चुकी हैं। चुनाव के कारण परीक्षा कार्यक्रम की घोषणा में भी विलंब हुआ है, लेकिन अब देरी करने में परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं।

UPTET, RESULT : उत्तर प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2016 का रिजल्ट हुआ तैयार, आयोग की झंडी का इंतजार

UPTET, RESULT: उत्तर प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2016 का रिजल्ट हुआ तैयार, आयोग की झंडी का इंतजार

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2016 का परीक्षा परिणाम तैयार हो गया है। इस समय विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू है। यूपी बोर्ड के परीक्षा कार्यक्रम पर आयोग की सख्ती के बाद से सतर्क परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने चुनाव आयोग से परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी है। साथ ही विभागीय अफसरों से मार्ग दर्शन लिया जा रहा है कि इसमें आचार संहिता आड़े तो नहीं आएगी। सूत्रों का कहना है कि अफसर रिजल्ट जारी करने के पक्ष में है। यदि सब कुछ दुरुस्त रहा तो 28 फरवरी को रिजल्ट घोषित किया जाएगा। इस बार टीईटी-2016 की परीक्षा प्रदेश के सभी जिलों के 858 केंद्रों पर हुई। सुबह की पाली में उच्च प्राथमिक के लिए पांच लाख एक हजार 821 व दूसरी पाली में प्राथमिक शिक्षक के लिए दो लाख 54 हजार 68 पंजीकृत में से दोनों पालियों में 92 फीसद अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। उसके बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव एवं अन्य अफसरों का तबादला हो गया। नई सचिव डा. सुत्ता सिंह ने तय कार्यक्रम के मुताबिक की उत्तरकुंजी जारी कराई और अभ्यर्थियों से आपत्तियां ली। संशोधित उत्तरकुंजी भी पिछले दिनों जारी हो चुकी है। परीक्षा शेड्यूल के मुताबिक टीईटी का परिणाम 28 फरवरी तक आना है। सचिव डा. सिंह ने बताया कि परीक्षा परिणाम तैयार हो गया है। अनुमति मिली तो 28 को रिजल्ट जारी करेंगे, अन्यथा जैसा निर्देश होगा उसी के अनुरूप कार्य किया जाएगा।

Saturday, February 25, 2017

TRAINING, KGBV : अध्यापकों द्वारा बच्चों का सामाजिकीकरण करना आवश्यक - संजय सिन्हा

TRAINING, KGBV : अध्यापकों द्वारा बच्चों का सामाजिकीकरण करना आवश्यक - संजय सिन्हा
   
इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता । अध्यापकों को बच्चों का सामाजिकीकरण का कार्य विद्यालय में ही करना चाहिए। बच्चों को व्यक्तिगत तथा सार्वजनिक रूप से बोलने का बार-बार अवसर प्रदान करना चाहिए। बच्चों को अपने मित्रों के अलावा भी अन्य बच्चों के साथ बैठने तथा बात करने का अवसर प्रदान करना चाहिए।

ऐसा लगातार करने से बच्चों में नये लोगों से मिलने की झिझक दूर होगी, जो उनके व्यक्तित्व विकास के लिए जरूरी है। ये विचार राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमैट) एलनगंज के निदेशक संजय सिन्हा ने व्यक्त किए।

श्री सिन्हा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के अध्यापिकाओं के चार दिवसीय प्रशिक्षण के चतुर्थ चक्र के उद्घाटन अवसर पर शुक्रवार को बोल रहे थे। यह प्रशिक्षण विशिष्ट कौशल विकास विषय पर आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा-‘वैसे तो बच्चे विद्यालय में पढ़ने के लिए ही आते हैं। परन्तु पढ़ाई के साथ-साथ कई अन्य विषयों में ज्ञान भी उनके लिए आवश्यक होता है। बच्चों के सामने भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिये उन्हें तैयार करने का काम अध्यापक का होता है।

कई बार देखा गया है कि बच्चे पढ़ाई में तो अव्वल होते हैं परन्तु किसी से मिलने-जुलने में झिझक महसूस करते हैं। ऐसा लगातार होने से वे समाज में घुलमिल नहीं पाते और भविष्य में उन्हें इसके दुष्परिणामों का सामना करना पड़ता है।

कार्यक्रम समन्वयक प्रभात मिश्रा ने कहा कि सीखने के लिए शैक्षिक वातावरण निर्माण की सभी व्यवस्थाएं सीमैट में की गयी हैं। विभागाध्यक्ष, डॉ. अमित खन्ना ने कहा कि प्रशिक्षण का लाभ बच्चों तक अवश्य पहुंचना चाहिए। प्रवक्ता पवन सावंत, सरदार अहमद, सुफिया फारूकी आदि उपस्थित रहीं।

GRECHUTI, 7th PAY COMMISSION : सातवें वेतन आयोग की सिफारिश, ग्रेच्युटी सीमा 20 लाख तक करने के प्रस्ताव पर सभी सहमत

GRECHUTI, 7th PAY COMMISSION : सातवें वेतन आयोग की सिफारिश, ग्रेच्युटी सीमा 20 लाख तक करने के प्रस्ताव पर सभी सहमत

🔴 संगठित क्षेत्र के कर्मी 20 लाख रु तक की कर मुक्त ग्रेच्युटी के पात्र होंगें

🌑 केंद्रीय श्रमिक संगठनों की श्रम मंत्रालय से सहमति

🔵 यूनियनों ने ग्रेच्युटी के भुगतान के संबंध में कुछ और मांगे रखी हैं

नई दिल्ली: संगठित क्षेत्र के कर्मचारी जल्दी ही 20 लाख रुपये तक के कर मुक्त ग्रेच्युटी के लिये पात्र होंगे. केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रम मंत्रालय के साथ त्रिपक्षीय विचार-विमर्श में प्रस्ताव पर सहमति जतायी है. यूनियनों ने ग्रेच्युटी के भुगतान के लिये प्रतिष्ठान में कम-से-कम 10 कर्मचारियों के होने तथा न्यूनतम पांच साल की सेवा की शर्तों को हटाने की मांग की है.

केंद्रीय ट्रेड यूनियन ग्रेच्युटी भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधन पर त्रिपक्षीय बैठक में अंतरिम उपाय के रूप में ग्रेच्युटी भुगतान की सीमा दोगुनी करने पर सहमत हो गये हैं. बैठक में सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये करने के लिये संशोधन का प्रस्ताव किया गया. सातवें वेतन आयोग की सिफारिश को सरकार ने स्वीकार कर लिया है. नियोक्ताओं के साथ राज्य प्रतिनिधियों ने भी ग्रेच्युटी की राशि बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने पर सहमति जतायी.

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने एक बयान में कहा, ‘‘अंतरिम उपाय के रूप में अधिकतम भुगतान सीमा 20 लाख रुपये करने को स्वीकार करते हुए यूनियनों ने कर्मचारियों की संख्या और सेवा वर्ष के संदर्भ में सीमा हटाये जाने की मांग की है.’’ श्रमिक संगठन ने कहा, ‘‘केंद्रीय ट्रेड यूनियन सरकार से यह अनुरोध करते रहे हैं कि ग्रेच्युटी की राशि की सीमा हटायी जानी चाहिए.’’ फिलहाल ग्रेच्युटी भुगतान कानून के तहत एक कर्मचारी ग्रेच्युटी के लिये उस समय पात्र होता है जब उसने न्यूनतम पांच साल की सेवा पूरी कर ली हो. साथ ही यह कानून ऐसे प्रतिष्ठानों में लागू होता है जहां कर्मचारियों की संख्या कम से कम 10 हो.

बयान के अनुसार अधिकतम राशि के संदर्भ में संशोधित प्रावधान एक जनवरी 2016 से प्रभाव में आने चाहिए जैसा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में हुआ है. यूनियनों ने यह भी मांग की कि सेवा के प्रत्येक साल के लिये ग्रेच्युटी भुगतान को 15 दिन के वेतन से बढ़ाकर 30 दिन के वेतन के बराबर किया जाना चाहिए. श्रमिक संगठनों ने कहा कि सरकार ने 15 फरवरी 2017 के पत्र के साथ ग्रेच्युटी कानून के भुगतान में संशोधन का जो प्रस्ताव दिया था, वह केवल कानून की धारा 4 (3) के तहत सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने से संबंधित था.

AADHAR CARD : चार करोड़ बच्चों को मिलेगा आधार, महाअभियान चलाएगा यूआईडीएआई, प्राधिकरण प्रधानाध्यापकों से लेकर आंगनबाड़ी सुपरवाइजर व एएनएम तक को अपने नेटवर्क में शामिल कर बच्चों का आधार नामांकन कराएगा

AADHAR CARD : चार करोड़ बच्चों को मिलेगा आधार, महाअभियान चलाएगा यूआईडीएआई, प्राधिकरण प्रधानाध्यापकों से लेकर आंगनबाड़ी सुपरवाइजरएएनएम तक को अपने नेटवर्क में शामिल कर बच्चों का आधार नामांकन कराएगा

लखनऊ। प्रदेश में आधार नामांकन से छूटे करीब चार करोड़ बच्चों को जल्द ही आधार से जोड़ा जाएगा। 18 वर्ष तक इन सभी बच्चों को भी इनकी पहचान का नम्बर मिलेगा। इस महाअभियान के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने मुहिम शुरू कर दी है। इस बार प्राधिकरण प्रधानाध्यापकों से लेकर आंगनबाड़ी सुपरवाइजर व एएनएम तक को अपने नेटवर्क में शामिल कर बच्चों का आधार नामांकन कराएगा।आंकड़ों में भले ही प्रदेश आधार नामांकन में अव्वल हो लेकिन बच्चों को आधार से जोड़ने में अभी बड़ा रास्ता तय करना है। वैसे तो प्रदेश की 82 फीसदी आबादी 17.5 करोड़ को आधार से जोड़ा जा चुका है। पर इनमें बच्चों की संख्या बहुत कम है। छह से 18 वर्ष आयु वर्ग में अभी केवल 60 फीसदी बच्चों करीब चार करोड़ को आधार नम्बर मिल सका है। वहीं शून्य से पांच वर्ष आयु वर्ग में तो मात्र 35 फीसदी 80 लाख लक्ष्य हासिल हुआ है। यूआईडीएआई की डीडीजी रीमा होता सिंह बताती हैं कि इधर हर कल्याणकारी योजना में आधार नम्बर अनिवार्य हो रहा है। सरकार इसी आधार पर फंड जारी करेगी। 18 वर्ष तक के सभी बच्चों को आधार से जोड़ने की इस मुहिम में प्राधिकरण जिला प्रशासन से मदद तो लेगा ही। साथ ही वह अब सीधे स्कूल, कॉलेज के प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी सुपरवाइजर, एएनएम को अपने नेटवर्क में शामिल किया है।

🔴 छह से 18 वर्ष तक के 40 फीसदी बच्चों के पास नहीं आधार

🔵 कुल आधार नामांकन 82 फीसदी 18 वर्ष से अधिक 97 फीसदी6 से 18 वर्ष 60 फीसदी 0 से 5 वर्ष 35 फीसदी

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