Monday, October 31, 2016

MAN KI BAAT : शिक्षा की जड़ पर प्रहार हो रहा है लेकिन अलगाववादियों को शायद यह नहीं पता कि इसी धरती के लाल एकलब्य भी थे जो बिना गुरु और बिना गुरुकुल के महान धनुर्धर की विद्ववता हासिल किया था, अलगाववादियों का मुख्य लक्ष्य यही है कि न रहेगा बांस न बजेगी बाँसुरी, इनकी इसी............

MAN KI BAAT : शिक्षा की जड़ पर प्रहार हो रहा है लेकिन अलगाववादियों को शायद यह नहीं पता कि इसी धरती के लाल एकलब्य भी थे जो बिना गुरु और बिना गुरुकुल के महान धनुर्धर की विद्ववता हासिल किया था, अलगाववादियों का मुख्य लक्ष्य यही है कि न रहेगा बांस न बजेगी बाँसुरी, इनकी इसी............

अगर ईश्वर ने मनुष्य के घर जन्म दिया है तो सभी लोगों की सोच भी अच्छी होनी चाहिए। लेकिन आज के समय में लोगों की सोच ऐसी घटिया स्तर की होती जा रही है कि वह एक प्रकार से इस मानवीय सृष्टि के लिए अपवाद साबित हो रहे है,और अगर अपवाद की बात करें तो इसमें कश्मीर के अलगाववादी पहले नम्बर पर गिने जाएंगे। क्योंकि ये अलगाववादी जम्मू और कश्मीर के अंदर जो राजनीति कर रहे है वो बहुत ही घिनौना है।

भारत के पैसे पर पलने वाले ये अलगाववादी अपने को पाकिस्तान का बताते है। इनको अपने को भारत का कहने में शर्म महसूस होती है। खाना चाहिए भारत का ,गाड़ी चाहिए भारत का,सुविधा चाहिए भारत का ,बाढ़ मे जान बचाए भारत की सेना,लेकिन एहसान मानेंगे पाक का, गुणगान गाएंगे पाक का।

आज कितने सालों से ये अलगाववादी भारत के खिलाफ रोटी सेंक रहे है,और जनता को गुमराह कर रहे है। अलगाववादियों की ये गन्दी सोच कहे या चालाकी ,ये अपने लड़को को तो पढ़ाई के लिए विदेश भेज देते है,जिससे कि वे निर्वाध रूप से शिक्षा ग्रहण करते रहे और कश्मीर में जो बच्चे पढ़ने वाले है उनको पढ़ने से रोका जा रहा है, बच्चों के स्कूलों को आग के हवाले किया जा रहा है।

अब सबसे बढ़ा सवाल ये उठता है कि स्कूलों को निशाना बना के ये अलगाववादी किस बात का सबूत देना चाह रहे है। ये अलगाववादी स्कूलों को जला कर आखिर शिक्षा की कमर तोड़ने पर क्यों उतारू हो रहे है। विद्यालय को जलाने का मतलब तो यही है कि ये अलगाववादी शिक्षा की जड़ पर प्रहार कर रहे है क्योंकि स्कूल से ही शिक्षा का अर्जन शुरू होता है। और विद्यालय ही नही रहेंगे तो बच्चे पढ़ेंगे कहां। शायद अलगाववादियों की अलग होने की प्रवृति से इनका दिमाग भी काम करना बन्द कर दिया है। इनकी घटिया सोच यही है कि अगर विद्यालय को ही जला दिया जाय तो बच्चे किस जगह बैठ कर पढ़ाई करेंगे। अगर विद्यालय नही होगा तो क्या पढ़ाई नही हो सकती है।

इन अलगाववादियों को शायद यह नही पता कि इसी धरती के लाल एकलब्य भी थे जो बिना गुरु और बिना गुरुकुल के महान धनुर्धर की विद्ववता हासिल किया था। अलगाववादियों का मुख्य लक्ष्य यही है कि न रहेगा बांस न बजेगी बाँसुरी। इनकी इसी तरह की सोच है कि न स्कूल रहेगा और न बच्चे शिक्षित होंगे। जब बच्चे शिक्षित नही होंगे तो फिर उनको आतंकवादी बनाना आसान हो जायेगा,क्योंकि निरक्षर ब्यक्ति को आसानी से आतंक के क्षेत्र में भेजा जा सकता है। अगर ऊँचे दर्जे तक ब्यक्ति पढ़ा हो तो उसको आतंक के क्षेत्र में ले जाना बहुत मुश्किल होता है।

ऐसा भी नही है कि आतंक के क्षेत्र मे सभी अनपढ़ लोग ही जाते है,इसमें औसत थोड़ा ज्यादा होता है। अनपढ़ों का ब्रेन वाश करना थोड़ा आसान जरूर होता है। इसी चक्कर में अलगाववादी लोग स्कूलों को जलाने का काम कर रहे है। देखने वाली बात ये है कि ये अलगाववादी अपने इस कारनामे में कितना सफल होते है ।
- द्वारा नीरज कुमार पाठक नोएडा, -दैनिक जागरण, 

SHIKSHAK BHARTI : 10 हजार शिक्षक भर्ती दिसंबर से, अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन के बाद बीएडधारकों को शिक्षक बनने का मौका जल्द

SHIKSHAK BHARTI : 10 हजार शिक्षक भर्ती दिसंबर से, अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन के बाद बीएडधारकों को शिक्षक बनने का मौका जल्द

लखनऊ । अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन के बाद बीएडधारकों को शिक्षक बनने का मौका जल्द मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग दिसम्बर में 10 हजार सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) भर्ती कराने की तैयारी कर रहा है।

भर्ती प्रदेश स्तर पर : इस बार प्रदेश स्तर पर भर्ती होगी। सरकारी इंटर कॉलेजों में शिक्षकों के 1954 पद रिक्त हैं वहीं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत मिले स्कूलों में 4659 पद खाली हैं।

कई पद खाली : इसके अलावा पिछले दो सालों से ज्यादा समय से चल रही पौने सात हजार शिक्षक भर्ती में भी अभी 4 हजार पद खाली हैं। लिहाजा इन सभी पदों पर अब एक साथ भर्तियां की जाएंगी।

लंबी प्रक्रिया : अभी तक एलटी ग्रेड में मंडल स्तर पर विज्ञापन निकाल कर आवेदन लिए जाते रहे हैं। इस भर्ती प्रक्रिया में काफी समय लगता है क्योंकि एक आवेदक हर मंडल में आवेदन करता है और एक जगह नियुक्ति होने पर बाकी मंडलों में उसकी जगह रिक्त हो जाती है। ये प्रक्रिया काफी लम्बी हो जाती है।

CPED, SHIKSHAK BHARTI : अध्यापकी के इंतजार में गुजर गए दो दशक, सूबे के 600 से अधिक सीपीएड बेरोजगारों की आंखें सरकारी टीचरी की आस देखते-देखते पथरा गईं

CPED : अध्यापकी के इंतजार में गुजर गए दो दशक, सूबे के 600 से अधिक सीपीएड बेरोजगारों की आंखें सरकारी टीचरी की आस देखते-देखते पथरा गईं

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश के 600 से अधिक बेरोजगारों की आंखें सरकारी टीचरी की आस देखते-देखते दो दशक में पथरा गईं। यूपी में सरकारें आती-जाती रहीं और शारीरिक शिक्षा की ट्रेनिंग लेने वाले ये बेरोजगारों नौकरी की गुहार लगाते रहे लेकिन इन 20 वर्षों में सुनवाई नहीं हो सकी।

फिलहाल चुनाव की ओर बढ़ रहे प्रदेश में सबकी झोली खुशियों से भर रहे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अब इन बेरोजगारों की उम्मीद बंधी हुई है। 1997 से पहले मोअल्लिम-ए-उर्दू की तरह सर्टिफिकेट इन फिजिकल एजुकेशन (सीपीएड) का कोर्स कराया जाता था। समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद मोअल्लिम-ए-उर्दू डिग्रीधारियों को 4280 उर्दू शिक्षक भर्ती में अवसर दिया गया। लेकिन सीपीएड करने के बावजूद नौकरी से वंचित 600 से अधिक बेरोजगारों का भला नहीं हुआ।

पिछले दिनों उच्च प्राथमिक स्कूलों में 32,022 अंशकालिक अनुदेशकों की भर्ती शुरू होने के बाद इन बेरोजगारों ने ऑनलाइन आवेदन का प्रयास किया लेकिन वर्तमान नियमों के अनुसार उम्र अधिक होने व योग्यता कम होने के कारण आवेदन नहीं कर सके ।1997 से पूर्व के सीपीएड बेरोजगार शिक्षक संघ ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा से मुलाकात कर गुहार लगाई है। सचिव ने उनकी मांगें शासन के संज्ञान में लाने का भरोसा दिलाया है।

UPTET, CENTER : सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही बनेगे,टीईटी केंद्र, परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने जारी किया आदेश ।

UPTET, CENTER : सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही बनेगे,टीईटी केंद्र, परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने जारी किया आदेश ।

SALARY, 7TH PAY COMMISSION : वेतन विसंगति पर विचार के समय दूसरे राज्यों में मिल रहे लाभ पर भी हो रहा गौर, कई संगठनों ने राज्य वेतन समिति से दुसरे राज्यों से तुलना कर मांगें थे लाभ, कई जगह समान तो कई जगह बेहतर लाभ पा रहे सरकारी कर्मचारी, यूपी की हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान व बिहार से कराई गयी तुलना

SALARY, 7TH PAY COMMISSION : वेतन विसंगति पर विचार के समय दूसरे राज्यों में मिल रहे लाभ पर भी हो रहा गौर, कई संगठनों ने राज्य वेतन समिति से दुसरे राज्यों से तुलना कर मांगें थे लाभ, कई जगह समान तो कई जगह बेहतर लाभ पा रहे सरकारी कर्मचारी, यूपी की हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान व बिहार से कराई गयी तुलना

TRAINEE TEACHERS, PROTEST : प्रशिक्षु शिक्षकों ने किया दीपावली का बहिष्कार, मौलिक नियुक्ति के लिए जीओ जारी करने की मांग को लेकर रविवार को भी धरना जारी

TRAINEE TEACHERS, PROTEST : प्रशिक्षु शिक्षकों ने किया दीपावली का बहिष्कार, मौलिक नियुक्ति के लिए जीओ जारी करने की मांग को लेकर रविवार को भी धरना जारी

इलाहाबाद । प्रशिक्षु शिक्षकों का मौलिक नियुक्ति के लिए जीओ जारी करने की मांग को लेकर रविवार को भी धरना जारी रहा। प्रशिक्षु शिक्षकों ने दीपावली का बहिष्कार करते हुए शिक्षा निदेशालय पर धरना दिया। नेतृत्व कर रहे अशोक द्विवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अधिकारी पालन नही कर रहे हैं।

अधिकारियों की उदासीनता के चलते 839 प्रशिक्षु शिक्षक दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं। इस अन्याय के खिलाफ हर स्तर पर आवाज बुलंद की जाएगी।

धरना स्थल पर प्रशिक्षु शिक्षकों ने देश के शहीद सैनिकों के नाम दीप जलाकर उनकी शहादत को नमन किया। प्रदर्शन में प्रभात मिश्र, नीरज राय, आलोक श्रीवास्तव, संदीप पांडेय, अरविंद सिंह, नवीन शुक्ल, प्रदीप, राजेश, रवि आनंद, अकबर, कपिलदेव मौजूद रहे।

ELECTION : नए सिरे से वोटर बनाने में शिक्षक नेताओं को करनी होगी मशक्कत, निर्वाचन की बढ़ी तारीख

ELECTION : नए सिरे से वोटर बनाने में शिक्षक नेताओं को करनी होगी मशक्कत, निर्वाचन की बढ़ी तारीख

इलाहाबाद । इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक निर्वाचन की तारीख क्या बढ़ी, नेताओं के सामने मुसीबत ही आ गई है। महीनों तक मशक्कत करके उन्होंने जो वोटर बनाए थे, उसकी सूची निरस्त होने से सारी तैयारी नए सिरे से शुरू करनी पड़ रही है। इसके चलते नेताओं को स्कूलों की दौड़ लगाकर शिक्षकों से सदस्य बनने की मान-मनौव्वल करनी पड़ रही है। मौके की नजाकत को भांपकर शिक्षक भी उन्हें अपनी अहमियत का एहसास कराने से नहीं चूक रहे।

इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक चुनाव पहले अक्टूबर के अंत या नवंबर के प्रथम पखवारे में होना था। इसको लेकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट, चेतनारायण गुट, ठकुराई गुट सहित वित्तविहीन शिक्षक संगठनों ने जोर-शोर से तैयारी की। शिक्षक सम्मेलन कराने के साथ हजारों शिक्षकों को वोटर बनाया। इधर किसी ने चुनाव आयोग से शिकायत कर दी कि वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी है। शिक्षक के साथ तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी वोटर बनाए गए हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग ने पहले की वोटर लिस्ट निरस्त तो कर ही दी, साथ ही नए सिरे से वोटर बनाने का आदेश दे दिया। यह आदेश उत्तर प्रदेश के साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित कई प्रदेशों में लागू है। यूपी में वोटर की अंतिम सूची 30 दिसंबर को जारी होगी, जिसके बाद चुनाव होगा। यही कवायद नेताओं की परेशानी का सबब बन चुकी है।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के प्रांतीय सदस्य डॉ. शैलेश पांडेय का कहना है कि नए सिरे से सारी कवायद करने से थोड़ी दिक्कत आ रही है लेकिन हम परेशान नहीं हैं। कहा कि सुरेश त्रिपाठी के लिए हर शिक्षक स्वयं काम कर रहे हैं, जिससे हमारा काम आसान हो गया है। ठकुराई गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष मुहर्रम अली कहते हैं कि चुनाव आगे खिसकने से सबको दिक्कत हुई है, लेकिन हम हताश व निराश नहीं हैं। चेतनारायण गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष रामसेवक त्रिपाठी का कहना है कि नए वोटर बनाने में हम सबसे आगे हैं। वहीं वित्तविहीन शिक्षक नेता विद्याधर द्विवेदी कहते हैं हम पहले भी आगे थे और आज भी हैं। समय बढ़ने से हमें और काम करने का मौका मिल गया।

Sunday, October 30, 2016

ADMISSION, BTC : बाहरी डायट के सीधे प्रवेश होंगे मानदेय, बीटीसी सत्र 2015 की प्रवेश प्रक्रिया सितम्बर 2016 में की गयी पूरी

ADMISSION, BTC : बाहरी डायट के सीधे प्रवेश होंगे मानदेय, बीटीसी सत्र 2015 की प्रवेश प्रक्रिया सितम्बर 2016 में की गयी पूरी

YOGA, SYLLABUS, SUPREME COURT : स्कूलों में योग को अनिवार्य  बनाये जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, 7 नवम्बर को होगी मामले की सुनवाई, अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने दायर की है याचिका

SYLLABUS, SUPREME COURT : स्कूलों में योग को अनिवार्य  बनाये जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, 7 नवम्बर को होगी मामले की सुनवाई, अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने दायर की है याचिका

EL, LEAVE : रिटायरमेंट तक जुड़ेगा अब अर्जित अवकाश, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिया आदेश, कर्मियों को हर साल मिलता है 30 दिन का अवकाश, किसी कर्मचारी का अवकाश 300 दिन होने के बाद नहीं जोड़ा जाता था

EL, LEAVE : रिटायरमेंट तक जुड़ेगा अब अर्जित अवकाश, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिया आदेश, कर्मियों को हर साल मिलता है 30 दिन का अवकाश, किसी कर्मचारी का अवकाश 300 दिन होने के बाद नहीं जोड़ा जाता था

इलाहाबाद : केन्द्र व राज्य कर्मचारियों का अर्जति अवकाश रिटायरमेंट तक जोड़ने का रास्ता साफ हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पांच अक्तूबर के फैसला देशभर के लाखों केन्द्र व राज्य कर्मचारियों के लिए नजीर बन गया है। इस आदेश से सरकारी कर्मचारियों में खुशी है।

दरअसल सरकारी कर्मचारियों को हर साल 30 दिन (एक जनवरी को 15 दिन व एक जुलाई को 15 दिन) का अर्जति अवकाश मिलता है। यदि कर्मचारी अवकाश नहीं लेते तो वह जुड़ता जाता है। लेकिन 300 दिन होने के बाद यह अवकाश जुड़ता नहीं।
300 दिन के बाद यदि कर्मचारी अवकाश नहीं लेते तो लैप्स हो जाता है। इससे नाराज दो कर्मचारियों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका कर दी थी। उनका कहना था कि 300 दिन अर्जति अवकाश होने के बाद लैप्स करना अवैधानिक है। इस पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 300 दिन से अधिक अर्जति अवकाश होने के बावजूद उसे रिटायरमेंट तक जोड़ने का आदेश सुनाया है। पांच अक्तूबर के इस आदेश से केन्द्र व राज्य कर्मचारी खुश है। अर्जति अवकाश अधिक होने पर वे आपात स्थिति में इस्तेमाल कर सकेंगे।

🔴 उपार्जति अवकाश का यह बहुत बढ़िया आदेश है। यद्यपि इसे विभागीय अधिकारियों द्वारा सभी संबंधित आम शिक्षकों को यदि सहजता से प्रदान किया जाए तो तो इस आदेश की 100 प्रतिशत सार्थकता सिद्ध हो पाएगी। शिक्षक भी निर्धारित कार्यावधि के अतिरिक्त कार्य करने में रुचि लेंगे।
-आमोद श्रीवास्तव, विधि सलाहकार

🔵 अर्जित अवकाश रिटायरमेंट तक जोड़े जाने का पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश ऐतिहासिक है। यह देशभर के केन्द्र व राज्य कर्मचारियों के लिए नजीर है।
- मुश्ताक अहमद, महासचिव को वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी/ लेखा परीक्षा अधिकारी संगठन

SCHOOL, TOILET, WATER : स्कूलों में शौचालय, पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश, प्राथमिक विद्यालयों की बहाली पर सुप्रीम कोर्ट के रूख से प्रदेशीय सरकार चौकन्नी

SCHOOL, TOILET, WATER : स्कूलों में शौचालय, पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश, प्राथमिक विद्यालयों की बहाली पर सुप्रीम कोर्ट के रूख से प्रदेशीय सरकार चौकन्नी

FAMILY PENSION, MRITAK ASHRIT : प्रदेशीय सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मियों के नि:शक्त बच्चों को अब देगी आजीवन पारिवारिक पेंशन, केन्द्र सरकार ने अपने कर्मियों के लिए यह वयवस्था 16 जनवरी 2013 के आदेश से ही लागू कर दी, यूपी सरकार को लागू करने में लगे तीन साल

FAMILY PENSION, MRITAK ASHRIT : प्रदेशीय सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मियों के नि:शक्त बच्चों को अब देगी आजीवन पारिवारिक पेंशन, केन्द्र सरकार ने अपने कर्मियों के लिए यह वयवस्था 16 जनवरी 2013 के आदेश से ही लागू कर दी, यूपी सरकार को लागू करने में लगे तीन साल



🔴 रिटायर्ड राज्यकर्मियों के दिव्यांग बच्चों को आजीवन पेंशन देगी यूपी सरकार - सीएम अखिलेश का दीवाली धमाका

मृत या रिटायर्ड राज्यकर्मियों के दिव्यांग संतानों को प्रदेश सरकार आजीवन पारिवारिक पेंशन देगी। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

पेंशन की व्यवस्था तो पहले से थी लेकिन पहले विवाह बाद पारिवारिक पेंशन बंद कर दी जाती थी। ताजा फैसले के बाद केंद्र की तरह ही रिटायर्ड या मृत राज्यकर्मियों के मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम संतान जो रोजी-रोटी कमाने में समर्थ नहीं हैं उन्हें शादी बाद भी पारिवारिक पेंशन मिलती रहेगी।

इसका फायदा उनको भी मिलेगा जिनकी विवाह के बाद पारिवारिक पेंशन बंद हो गई है। सचिव वित्त अजय अग्रवाल ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।

केंद्र पहले ही लागू कर चुका है यह फैसला
वित्त महकमे के एक अफसर ने बताया कि 12 नवंबर-1997 के शासनादेश के अनुसार राज्य के सेवानिवृत्त व मृत कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम अविवाहित पुत्र और पुत्री को आजीवन पारिवारिक पेंशन दिए जाने की व्यवस्था है।
हालांकि इसमें यह भी व्यवस्था थी कि दिव्यांग पुत्री के विवाह के बाद उसकी पारिवारिक पेंशन बंद कर दी जाएगी।

केंद्र सरकार 16 जनवरी-2013 के आदेश के जरिये अपने रिटायर्ड व मृत कर्मियों के दिव्यांग बच्चों की शादी के बाद भी पारिवारिक पेंशन जारी रखने की व्यवस्था लागू कर चुकी है। प्रदेश सरकार ने भी इस फैसले को लागू कर दिया है।


VACANCY, SHIKSHAK BHARTI : पद न भर्ती फिर भी पांच लाख दावेदार, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती से नहीं भरे जाएंगे शिक्षकों के पद

VACANCY, SHIKSHAK BHARTI : पद न भर्ती फिर भी पांच लाख दावेदार, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती से नहीं भरे जाएंगे शिक्षकों के पद

धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद । किसी भी भर्ती में बड़ी संख्या में आवेदन होना आम बात है, लेकिन यहां तो सीधी भर्ती की दूर-दूर तक उम्मीद न होने के बाद भी दावेदारों की भरमार है। जी हां, हम बात कर रहे हैं शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2016 की। इसमें उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए पांच लाख से अधिक युवाओं ने आवेदन किया है, जबकि इन स्कूलों में सारे पदों को प्रमोशन से ही भरा जाना है। प्राथमिक स्कूलों में सीधी भर्ती होती है, लेकिन वहां ढाई लाख दावेदार ही सामने आए हैं।

प्रदेश के शिक्षक बनने के इच्छुक युवाओं की यूपी टीईटी के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसकी परीक्षा 19 दिसंबर को कराया जाना प्रस्तावित है। सूबे में यह परीक्षा इसके पहले चार बार कराई जा चुकी है, लेकिन उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान-गणित के 29334 युवाओं की सीधी भर्ती ही हुई है। बेसिक शिक्षा परिषद ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमावली में उच्च प्राथमिक सहायक अध्यापकों के पद प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के प्रमोशन से भरे जाने का प्रावधान है, लिहाजा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए आगे कोई सीधी भर्ती नहीं होगी। इस पर युवाओं का तर्क था कि जब भर्ती नहीं होनी है तो टीईटी में यह परीक्षा ही क्यों कराई जा रही है इसे खत्म किया जाए। विवाद बढ़ने पर यह आशंका थी कि उच्च प्राथमिक के लिए इस बार आवेदन बहुत कम होगा।

पुराने अनुमानों को धता बताते हुए इस बार भी उच्च प्राथमिक विद्यालय युवाओं की पसंद रहे हैं। इसीलिए सबसे अधिक आवेदन पांच लाख आठ हजार 44 हुए हैं, वहीं प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती समय-समय पर होती रहती है वहां के लिए महज दो लाख 54 हजार 16 युवाओं ने आवेदन किया है।

इस उलटफेर का मायने परीक्षा नियामक महकमा भी खोज नहीं सका है, बल्कि उसका कहना है कि उनके यहां से आवेदन मांगे गए थे, युवाओं को अपनी पसंद के अनुसार दावेदारी करनी थी। यह पसंद किसी एक क्षेत्र की नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में अधिकांश युवाओं का रुझान उच्च प्राथमिक विद्यालय ही हैं। माना जा रहा है कि टीईटी इम्तिहान का परिणाम आने के बाद सीधी भर्ती के लिए युवा दबाव बना सकते हैं।

APPOINTMENT, VACANCY : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में तमाम भर्तियों के बाद भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली चल रहे, नवंबर में आदेश जारी होगा, लेकिन बीटीसी प्रशिक्षु 30 हजार पदों पर भर्तियां शुरू कराने के लिए आंदोलन छेड़ रखा

APPOINTMENT, VACANCY : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में तमाम भर्तियों के बाद भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली चल रहे, नवंबर में आदेश जारी होगा, लेकिन बीटीसी प्रशिक्षु 30 हजार पदों पर भर्तियां शुरू कराने के लिए आंदोलन छेड़ रखा

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद । बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में तमाम भर्तियों के बाद भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। पिछले माह उर्दू एवं अन्य शिक्षक भर्तियां कराने की सुगबुगाहट तेज हुई थी, लेकिन अभी तक आदेश जारी होने की राह देखी जा रही है। वहीं, युवा 30 हजार पदों पर भर्तियां शुरू कराने के लिए आंदोलन छेड़ें हैं। अब नवंबर के दूसरे पखवारे में ही आदेश जारी होने की उम्मीद है।

परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरा करने के लिए इधर कुछ वर्षो में कई भर्तियां हुई हैं। इस समय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अंशकालिक अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच बीटीसी 2013 बैच के युवा शिक्षा निदेशालय में अनवरत धरना देकर 30 हजार पदों पर भर्तियां कराने की मांग कर रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार की भी मंशा है कि विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के मौके पर शिक्षक भर्तियां चलती रहें। शायद इसीलिए पिछले माह नौ हजार सामान्य शिक्षक व उर्दू शिक्षकों की भर्ती करने की तैयारी हुई थी। अभी तक उसका आदेश जारी नहीं हो सका है।

उम्मीद है कि नवंबर में आदेश जारी होगा, लेकिन बीटीसी प्रशिक्षु इतने पदों पर भर्ती के लिए राजी नहीं है। इस समय प्रदेश में सहायक अध्यापकों के 42758 पद खाली हैं, जबकि प्रधानाध्यापक के 15275 पद रिक्त हैं यदि वह भी भर दिए जाएं तो शिक्षकों के करीब 58 हजार पद खाली होंगे। बीटीसी प्रशिक्षुओं का कहना है कि 30 हजार पदों पर भर्तियां होने के बाद भी पद रिक्त रहेंगे। हालांकि इसी बीच जिलों में शिक्षकों के प्रमोशन हुए हैं। इसमें भी सहायक अध्यापकों के पद रिक्त हुए हैं। उनकी रिपोर्ट जिलों से मंगाई गई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद भर्तियों की घोषणा होगी। वहीं, बीटीसी प्रशिक्षु अब भी बेमियादी धरने पर डटे हैं।

PROTEST, TRAINEE TEACHERS : दीवाली पर भी निदेशालय में डटे प्रशिक्षु शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन 839 शिक्षकों की ट्रेनिंग कराई जा चुकी है और इसका रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया है लेकिन मौलिक नियुक्ति का आदेश नहीं जारी किया गया

PROTEST, TRAINEE TEACHERS : दीवाली पर भी निदेशालय में डटे प्रशिक्षु शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन 839 शिक्षकों की ट्रेनिंग कराई जा चुकी है और इसका रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया है लेकिन मौलिक नियुक्ति का आदेश नहीं जारी किया गया

राब्यू, इलाहाबाद : ट्रेनिंग के बाद भी अब तक मौलिक नियुक्ति का आदेश न जारी होने पर प्रशिक्षु शिक्षकों ने दीवाली न मनाने का निर्णय लिया है। शिक्षा निदेशालय पर उनका धरना लगातार छठे दिन जारी रहा।

शिक्षकों का कहना है कि जब तक मौलिक नियुक्ति का शासनादेश नहीं जारी होता, वह निदेशालय पर डटे रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन 839 शिक्षकों की ट्रेनिंग कराई जा चुकी है और इसका रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया है लेकिन मौलिक नियुक्ति का आदेश नहीं जारी किया गया। प्रशिक्षु शिक्षक इससे नाराज हैं। शिक्षक अशोक द्विवेदी ने बताया कि दीपावली के दिन भी वे लोग घर नहीं जाएंगे और निदेशालय में ही रहेंगे।

INTERDISTRICT TRANSFER : यूपी में तीन हजार और शिक्षकों का दूसरे जिलों में होगा तबादला, अंतर्जनपदीय तबादले के लिए आवेदन करने वाले बेसिक शिक्षकों के लिए अच्छी खबर, शिक्षकों को अंतर्जनपदीय तबादला नीति का लाभ मिलेगा

INTERDISTRICT TRANSFER : यूपी में तीन हजार और शिक्षकों का दूसरे जिलों में होगा तबादला, अंतर्जनपदीय तबादले के लिए आवेदन करने वाले बेसिक शिक्षकों के लिए अच्छी खबर, शिक्षकों को अंतर्जनपदीय तबादला नीति का लाभ मिलेगा

लखनऊ । अंतर्जनपदीय तबादले के लिए आवेदन करने वाले बेसिक शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। जिनके आवेदनों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, उनके मामलों में एक बार फिर विचार का फैसला लिया गया है।

माना जा रहा है कि इससे करीब तीन हजार और शिक्षकों को अंतर्जनपदीय तबादला नीति का लाभ मिलेगा।

प्रदेश में दो साल बाद चालू सत्र में बेसिक शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादले खोले गए। दूसरे जिलों में तबादले के लिए कुल 13 हजार 500 शिक्षकों ने आवेदन किया, इनमें से आठ हजार शिक्षकों को लाभ मिल गया है। जबकि, करीब 5500 शिक्षकों को उनकी प्राथमिकता वाले जिले में तैनाती नहीं दी जा सकी।

ढ़ाई हजार शिक्षकों ने इन जिलों में किया था आवेदन

इनमें से ढाई हजार वे शिक्षक हैं, जिन्होंने लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद के लिए आवेदन किया था। चूंकि, इन तीन जिलों में अभी भी स्थान रिक्त नहीं हैं, इसलिए वहां के लिए आए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

लेकिन, बाकी बचे तीन हजार शिक्षकों के आवेदनों पर शासन ने उदारतापूर्वक विचार करने के निर्देश दिए हैं। सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद को कहा गया है कि अगर उन जिलों में छात्र संख्या के लिहाज से शिक्षकों की कमी है, तो अंतर्जनपदीय तबादले के लिए आवेदन कर चुके शिक्षकों को वहां भेज दिया जाए।

सचिव, बेसिक शिक्षा अजय कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि जिन शिक्षकों को आवेदन करने के बावजूद अभी तक अंतर्जनपदीय तबादला नीति का लाभ नहीं मिला है, उनके मामले में पुनर्विचार किया जा रहा है।

DEARNESS ALLOWANCE, 7th PAY COMMISSION, DA : सूबे में सातवां वेतनमान लागू होने के बाद ही डीए की उम्मीद, राज्य वेतन समिति नये वेतनमान पर कर रही विचार, नवम्बर अंत तक नए वेतन का लाभ सम्भव

DEARNESS ALLOWANCE, 7th PAY COMMISSION : सूबे में सातवां वेतनमान लागू होने के बाद ही डीए की उम्मीद, राज्य वेतन समिति नये वेतनमान पर कर रही विचार, नवम्बर अंत तक नए वेतन का लाभ सम्भव

NON ACADEMIC, CBSC, TEACHERS : अब पढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं करेंगे गुरुजन, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से (सीबीएसई) से सम्बद्ध सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक, यहीं क्लिक कर खबर के साथ आदेश-निर्देश भी देखें ।

NON ACADEMIC, CBSC, TEACHERS : अब पढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं करेंगे गुरुजन, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से (सीबीएसई) से सम्बद्ध सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक, यहीं क्लिक कर खबर के साथ आदेश-निर्देश भी देखें ।

कानपुर । केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से (सीबीएसई) से सम्बद्ध सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक क्लासेज में पढ़ाने के अलावा अन्य काम नहीं करेंगे। शिक्षकों को स्कूल की बसों में भी किसी तरह की डय़ूटी नहीं लगाई जा सकती है। उसकी जगह लेडी गार्ड व अटेंडेंट रखे जाएंगे।

इस संबंध में सीबीएसई ने सभी स्कूलों के लिए गाइडलाइंस जारी की है। सीबीएसई ने स्कूलों के प्रबंधन व प्रधानाचायरे को कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी होगी कि वह इस गाइडलाइंस का पालन करवाएं। शिक्षा का अधिकार कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कायरे में नहीं लगाया जा सकता है।

हाल में हुई सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड अॉफ एजुकेशन की बैठक में यह उठाया गया था। इसको ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने कहा है कि शिक्षकों को शिक्षण व उससे जुड़े काम जैसे प्रोफेशनल अपग्रेडेशन, परीक्षा डय़ूटी आदि में ही लगाया जा सकता है। इसके अलावा कार्यालयी कार्य, कैंटीन, परिवहन आदि में भी शिक्षकों की डय़ूटी नहंी लगाई जा सकती है। इसके लिए स्कूलों को अलग से स्टाफ रखना होगा।

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