Thursday, March 31, 2016

सत्र 2015-16 में परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों के वार्षिक परीक्षा 2016 में अनुपस्थित रहने वाले छात्र-छात्राओं को कक्षोंन्नति प्रदान करने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी ।

सत्र 2015-16 में परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों के वार्षिक परीक्षा 2016 में अनुपस्थित रहने वाले छात्र-छात्राओं को कक्षोंन्नति प्रदान करने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी

वर्ष 2015 के राष्ट्रीय और राज्य शिक्षक पुरस्कारों के लिए आवेदन की तिथि बढ़ाकर 15 अप्रैल करने के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

वर्ष 2015 के राष्ट्रीय और राज्य शिक्षक पुरस्कारों के लिए आवेदन की तिथि बढ़ाकर 15 अप्रैल करने के सम्बन्ध में आदेश जारी

3500 सहायक अध्यापक (उर्दू भाषा) की नियुक्ति के सम्बन्ध में सचिव ने तृतीय कॉउंसलिंग के उपरांत रिक्त पदों का माँगा ब्यौरा ।

3500 सहायक अध्यापक (उर्दू भाषा) की नियुक्ति के सम्बन्ध में सचिव ने तृतीय कॉउंसलिंग के उपरांत रिक्त पदों का माँगा ब्यौरा

बीटीसी 2013 के प्रशिक्षण की दो वर्ष की मियाद पूरी हो चुकी, लेकिन अब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं, 1100 याचियों में से 238 की नियुक्ति अभी भी लटकी

बीटीसी 2013 के प्रशिक्षण की दो वर्ष की मियाद पूरी हो चुकी, लेकिन अब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं, 1100 याचियों में से 238 की नियुक्ति अभी भी लटकी

Wednesday, March 30, 2016

गरीब बच्चों को निशुल्क किताब व वर्दी पर सख्त निदेशालय


दिल्ली के विभिन्न निजी स्कूलों में पढ़ रहे आर्थिक रूप से पिछड़े व वंचित वर्ग बच्चों को स्कूलों की ओर से नि:शुल्क किताबें व वर्दी नहीं देने पर शिक्षा निदेशालय ने सख्त रवैया अपना लिया है। शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े व वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क किताबें व वर्दी उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसा न करने की सूरत में मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।

यहां बता दें कि स्कूलों में एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में अभिभावकों की ओर से वर्दी, किताबें व लिखित सामग्री खरीदी जा रही हैं। शिक्षा निदेशालय को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही है कि निजी स्कूल आर्थिक रूप से पिछड़े व वंचित वर्ग के अंतर्गत आने वाले बच्चों को नि:शुल्क किताबें, वर्दी व लिखित सामग्री देने में आनाकानी कर रहे हैं। निदेशालय को ऐसी शिकायत भी मिल रही है कि स्कूल इसके एवज में अभिभावकों से पैसों की भी माग कर रहे हैं। इस संबंध में उपशिक्षा निदेशक (एक्ट-1) पी लता तारा की ओर से आदेश जारी कर साफ कर दिया गया है कि स्कूल गरीब वर्ग के छात्रों से वर्दी व किताबों के नाम पर पैसे की माग नहीं कर सकते हैं। यदि ऐसा करते हैं तो इसे बड़ी गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही आरटीई के प्रावधानों के तहत स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बीएड प्रवेश परीक्षा में नहीं चलेगा नकल का कोई पैंतरा, एक साथ आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का होगा अलग-अलग परीक्षा केन्द्र, 10 अप्रैल से डाउनलोड होगा प्रवेश पत्र

बीएड प्रवेश परीक्षा में नहीं चलेगा नकल का कोई पैंतरा, एक साथ आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का होगा अलग-अलग परीक्षा केन्द्र, 10 अप्रैल से डाउनलोड होगा प्रवेश पत्र

आरटीई (RTE) से दाखिले की राह आसान नहीं, निजी स्कूलों में 25 हजार सीटें मगर अभी तक अधिकतम ढाई फिसदी पर हुआ दाखिला

आरटीई (RTE) से दाखिले की राह आसान नहीं, निजी स्कूलों में 25 हजार सीटें मगर अभी तक अधिकतम ढाई फिसदी पर हुआ दाखिला

शैक्षणिक सत्र 2016-17 हेतु परिषदीय विद्यालयों का शैक्षणिक कैलेंडर को शैक्षिक भ्रमण में प्रभावी करने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी : यहीं क्लिक कर जारी कैलेंन्डर भी देखें ।

शैक्षणिक सत्र 2016-17 हेतु परिषदीय विद्यालयों का शैक्षणिक कैलेंडर को शैक्षिक भ्रमण में प्रभावी करने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी : यहीं क्लिक कर जारी कैलेंन्डर भी देखें ।

70 फिसदी आंगनबाड़ी केन्द्र किराये के भवन में, अब मांग रहे मकान मालिक का खाता नम्बर

70 फिसदी आंगनबाड़ी केन्द्र किराये के भवन में, अब मांग रहे मकान मालिक का खाता नम्बर

बीपीएड (BPED) डिग्री वालों ने निकाला कैंडिल मार्च : 46 हजार पदों पर भर्ती की मांग को लेकर दे रहे धरना ।

बीपीएड (BPED) डिग्री वालों ने निकाला कैंडिल मार्च : 46 हजार पदों पर भर्ती की मांग को लेकर दे रहे धरना

बाल मन की बात अखिलेश सरकार के साथ में एक बार फिर राजधानी के गरीब बच्चे राज्य के मुख्यमंत्री से होंगे मुखातिब : उत्तर-प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शुरू कर दी तैयारियां

बाल मन की बात अखिलेश सरकार के साथ में एक बार फिर राजधानी के गरीब बच्चे राज्य के मुख्यमंत्री से होंगे मुखातिब : उत्तर-प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शुरू कर दी तैयारियां

लखनऊ  : बाल मन की बात अखिलेश सरकार के साथ में एक बार फिर राजधानी के गरीब बच्चे राज्य के मुख्यमंत्री से मुखातिब होंगे। बच्चों को अपने शहर से जुडी़ सभी समस्याओं को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने रखने का मौका मिलेगा। युवा संसद-2016 के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम के लिए उत्तर-प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

उत्तर-प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग युवा संसद-2016 को प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंचाने के लिए इसके प्रचार-प्रसार में जुट गया है। आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह के मुताबिक इस बार आयोग सभी गांव में जाकर बच्चों को इसके बारे में बताएगा और उनकी समस्याओं को सुनेगा। जो बच्चे सही ढंग से सामाजिक मुद्दों व अपनी समस्याओं को बताएंगे, उन्हें संसद के लिए चुना जाएगा।

बच्चों के मुद्दों पर किया जा रहा कामवर्ष 2015 में विधान भवन में हुई बाल संसद में विभिन्न जिलों से आए बच्चों ने कुपोषण, गांव में लड़कियों का उत्पीड़न, शिक्षा का गिरता स्तर और सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं से वंचित गांव जैसी तामाम समस्याएं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने रखी थीं। आयोग अध्यक्ष जूही सिंह की मानें तो इन समस्याओं के समाधान के लिए आयोग गांव-गांव जाकर काम कर रहा है।

प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में मुफ्त किताब बांटने के नाम पर हर साल अरबों रुपए की बर्बादी : अमेरिका, चीन के सरकारी स्कूलों में ही बच्चों को किताबें दी जाती है जिसे वे घर नहीं ले जा सकते।

प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में मुफ्त किताब बांटने के नाम पर हर साल अरबों रुपए की बर्बादी : अमेरिका, चीन के सरकारी स्कूलों में ही बच्चों को किताबें दी जाती है जिसे वे घर नहीं ले जा सकते।

इलाहाबाद। यूपी के सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में मुफ्त किताब बांटने के नाम पर हर साल अरबों रुपए की बर्बादी पब्लिक के पैसे के गैरवाजिब खर्च की कहानी बयां करने को काफी है। एक ओर जहां अमेरिका और चीन जैसे अमीर देश बच्चों को एक ही किताब से कई साल पढ़ाते है वहीं भारत जैसे गरीब देश के उत्तर प्रदेश जैसे पिछड़े राज्य में हर साल 200 करोड़ के आसपास की मुफ्त किताबें बांटना इस योजना पर ही सवाल खड़े करता है।यहां एक बात साफ होनी चाहिए गरीब बच्चों को मुफ्त किताब उपलब्ध कराने में कुछ गलत नहीं है बल्कि उन किताबों से दो-तीन साल तक बच्चों को पढ़ाने के बजाय नए सिरे से टेंडर-प्रिंटिंग और उसकी आड़ में होने वाले करोड़ों रुपए कमीशन का खेल ठीक नहीं।

अमेरिका के सरकारी स्कूलों में ही बच्चों को किताबें दी जाती है जिसे वे घर नहीं ले जा सकते। अगली क्लास में जाने पर उन्हें स्कूल में ही आगे की पढ़ाई के लिए किताबें मिल जाती हैं।चीन में भी हर साल प्राइमरी और मिडिल स्कूल में मुफ्त किताबें बांटी जाती है लेकिन बच्चों को इस हिदायत के साथ कि वे उसे अच्छे तरीके से रखेंगे ताकि अगले साल दूसरे बच्चे उसे पढ़ सकें। किताबों के दोबारा से न सिर्फ पर्यावरण का संरक्षण होता है (क्योंकि कागज तैयार करने के लिए बार-बार पेड़ नहीं काटने पड़ते) बल्कि पब्लिक के करोड़ों-अरबों रुपए लोकहित की दूसरी योजनाओं में लगाने में मदद मिलती है।

अंग्रेजी स्कूलों में कमीशन के लिए बदलते हैं किताबें : सरकारी स्कूलों में ही नहीं अंग्रेजी स्कूलों में भी हर साल किताबें बदल दी जाती हैं। प्राइवेट अंग्रेजी स्कूल कमीशन के लिए हर साल पब्लिशर देते हैं ताकि अभिभावकों को मजबूर होकर नई किताब खरीदनी पड़े और स्कूल संचालकों को लम्बा-चौड़ा कमीशन।

डॉलर-युआन के आगे नहीं टिकता भारतीय रुपया :  हर साल मुफ्त किताब के लिए करोड़ों रुपए की बर्बादी ठीक नहीं है। ये स्थिति तब है जबकि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर और चीन के युआन के आगे नहीं टिकता। एक अमेरिकी डॉलर की भारतीय मुद्रा में कीमत 66.79 जबकि एक युआन की कीमत 10.26 रुपए है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि जब तक किताबें रिवाइज नहीं होती तब तक जितने समय तक संभव हो एक ही किताब से बच्चों को पढ़ाया जाए।

हर साल जो किताबें खराब होती हैं केवल वे ही बदली जाएं। इसकी जिम्मेदारी हेडमास्टर को दी जाए। इससे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि पब्लिक के पैसे का दुरुपयोग बंद होगा।
-एलपी पांडेय, पूर्व बेसिक शिक्षा निदेशक

यूपी-टीईटी (UPTET) 2015 में सफल अभ्यर्थियों को कम्प्यूटर जी से ई-सर्टिफिकेट दिलवाने की तैयारी : नवम्बर 2011 से शुरू हुई यूपी-टीईटी में यह व्यवस्था पहली बार लागू होने जा रही ।

यूपी-टीईटी (UPTET) 2015 में सफल अभ्यर्थियों को कम्प्यूटर जी से ई-सर्टिफिकेट दिलवाने की तैयारी : नवम्बर 2011 से शुरू हुई यूपी-टीईटी में यह व्यवस्था पहली बार लागू होने जा रही ।

इलाहाबाद :  उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2015 में सफल अभ्यर्थियों को कम्प्यूटर जी से ई-सर्टिफिकेट दिलवाने की तैयारी है। बेसिक शिक्षा विभाग और टीईटी करवाने वाले परीक्षा नियामक प्राधिकारी के अफसर इलेक्ट्रानिक माध्यम से प्रमाण-पत्र देने पर मंथन कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा अभ्यर्थियों को यह होगा कि उन्हें प्रमाणपत्र के लिए डायट के चक्कर नहीं काटने होंगे।

सरकार को भी प्रमाणपत्र छपवाने, डायटों तक पहुंचाने आदि पर लाखों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। यही नहीं अभ्यर्थियों को डुप्लीकेट सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए हैरान नहीं होना पड़ेगा। दरअसल ई-सर्टिफिकेट वितरण की व्यवस्था कोई नया प्रयोग नहीं है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अपनी नेट परीक्षा के अभ्यर्थियों को 2010 से ही ई-सर्टिफिकेट देता आ रहा है। ई-सर्टिफिकेट बहुत कम समय में अभ्यर्थियों तक पहुंच जाता है। नवम्बर 2011 से शुरू हुई यूपी-टीईटी में यह व्यवस्था पहली बार लागू होने जा रही है।

सूत्रों के अनुसार ई-सर्टिफिकेट देने पर विचार हो रहा है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक कोई निर्णय हो जाएगा। सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अप्रैल अंत तक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में सफल 1,36,415 अभ्यर्थियों को ई-सर्टिफिकेट दे दिए जाएंगे। हालांकि फिलहाल इस पर कोई अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। गौरतलब है कि प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए 2,58,372 अभ्यर्थी पंजीकृत थे जिनमें से 2,37,620 परीक्षा में शामिल हुए। कक्षा 6 से 8 तक की टीईटी के लिए 6,71,796 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 6,22,437 ने परीक्षा दी थी। सोमवार को जारी टीईटी-15 के रिजल्ट में प्राथमिक स्तर में 59,062 (24.85 प्रतिशत) जबकि उच्च प्राथमिक स्तर में 87,353 (14.03 प्रतिशत) अभ्यर्थी यानि ओवरऑल 17 प्रतिशत अभ्यर्थी पास हुए हैं।

प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी के प्राइमरी स्कूलों में राष्ट्रगान हुआ अनिवार्य : अधिकांश स्कूलों में प्रार्थना के बाद राष्ट्रगान होता है, नोबल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित "जन गण मन" का जरूरी है गायन

प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी के प्राइमरी स्कूलों में राष्ट्रगान हुआ अनिवार्य : अधिकांश स्कूलों में प्रार्थना के बाद राष्ट्रगान होता है, नोबल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित "जन गण मन" का जरूरी है गायन

लखनऊ । प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी प्राइमरी स्कूलों में राष्ट्रगान जरुरी कर दिया है। हालांकि अब भी अधिकांश स्कूलों में विद्यालय शुरू होने पर प्रार्थना के बाद राष्ट्रगान होता है, लेकिन अब इसको शैक्षिक कैलेण्डर में शामिल कर लिया गया है। प्रदेश सरकार ने स्कूलों की गतिविधियों के लिए कैलेंडर जारी किया है। सरकार द्वारा संचालित सभी स्कूलों में अब हर सुबह राष्ट्रगान (जन गण मन ) का गायन जरुरी होगा।

आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यहां बताया कि प्रदेश सरकार ने नोबल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित जन गण मन को सभी प्राइमरी तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रार्थना के समय गाया जाना आवश्यक कर दिया है। सरकार द्वारा जारी स्कूलो के कैलेंडर के अनुसार सप्ताह के शुरुआती चार दिन के अंतिम घंटे खेलकूद और व्यायाम के लिए होंगे।

आखरी दो दिन स्काउट एवं गाइड की गतिविधियां करायी जाएगी। जारी कैलेंडर में स्कूलों में वाद विवाद प्रतियोगिता, अंताक्षरी, श्रुति लेख, चित्रकला, पेंटिंग और पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। साल में चार बार एक अप्रैल, एक जुलाई, दो नवम्बर, दो जनवरी के दिन स्कूल चलो अभियान चलाया जायेगा।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में सामान्य वर्ग के कक्षा 6 से 8 तक के अध्यनरत बालकों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण के क्रय की गयी पुस्तकों के भुगतान हेतु द्वितीय किश्त की धनराशि का आवंटन के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में सामान्य वर्ग के कक्षा 6 से 8 तक के अध्यनरत बालकों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण के क्रय की गयी पुस्तकों के भुगतान हेतु द्वितीय किश्त की धनराशि का आवंटन के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी।

मध्यान्ह भोजन योजना (MDM) हेतु वित्तीय वर्ष 2015-16 में योजनान्तर्गत निर्गत वित्तीय स्वीकृतियों की धनराशि के कोषागार से आहरण के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी । 

मध्यान्ह भोजन योजना (MDM) हेतु वित्तीय वर्ष 2015-16 में योजनान्तर्गत निर्गत वित्तीय स्वीकृतियों की धनराशि के कोषागार से आहरण के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी । 

आर0टी0ई0 (RTE) 2009 के परिप्रेक्ष्य में नव विकसित गुणवत्ता अनुश्रवण प्रपत्रों पर सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में ।

आर0टी0ई0 (RTE) 2009 के परिप्रेक्ष्य में नव विकसित गुणवत्ता अनुश्रवण प्रपत्रों पर सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में ।

बेसिक स्कूलों में "विद्यालय उत्सव समारोह" एवं "स्कूल चलो अभियान" का शुभारम्भ आज, यूपी सरकार ने जारी किया विज्ञापन - क्लिक कर देखें विज्ञापन

बेसिक स्कूलों में "विद्यालय उत्सव समारोह" एवं "स्कूल चलो अभियान" का शुभारम्भ आज, यूपी सरकार ने जारी किया विज्ञापन - क्लिक कर देखें विज्ञापन

वरिष्ठ कर्मियों को नहीं मिलेगा कनिष्ठ से कम वेतन :प्रदेश सरकार ने इस विसंगति को दूर कर दिया, अब सीनियर का वेतन जूनियर से नहीं होगा कम

वरिष्ठ कर्मियों को नहीं मिलेगा कनिष्ठ से कम वेतन :प्रदेश सरकार ने इस विसंगति को दूर कर दिया, अब सीनियर का वेतन जूनियर से नहीं होगा कम

लखनऊ । पदोन्नति या समय वेतनमान मिलने की स्थिति में कई वरिष्ठ राज्य कर्मचारियों को अपने कनिष्ठ की तुलना में कम वेतन मिलने लगता था। प्रदेश सरकार ने इस विसंगति को दूर कर दिया है। इससे दस हजार से अधिक कर्मचारी तुरंत लाभान्वित होंगे और भविष्य में भी ऐसी स्थिति नहीं उत्पन्न होगी।

काम संभालते समय उम्र के अंतर के कारण वैयक्तिक पदोन्नति या चयन वेतनमान मिलने की स्थिति में कई बार वरिष्ठ कर्मचारियों को कनिष्ठों की तुलना में निम्न ग्रेड वेतन या कम मूल वेतन अनुमन्य होता है। इस कारण वरिष्ठों का वेतन कम हो जाता है। कर्मचारी संगठन इस विसंगति को दूर करने का मुद्दा कई बार उठा चुके हैं। 

प्रमुख सचिव (वित्त) राहुल भटनागर ने मंगलवार को शासनादेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि वरिष्ठ का वेतन उस दिनांक से कनिष्ठ के समान कर दिया जाएगा, जिस दिनांक से कनिष्ठ का वेतन वरिष्ठ की तुलना में कम हुआ है। एक जनवरी 2006 के बाद 30 नवंबर 2008 तक लागू रही समयमान वेतनमान की व्यवस्था के दौरान हुई वेतन विसंगतियों के मामले में भी वरिष्ठों का वेतन कनिष्ठों के बराबर कर दिया जाएगा। 16 व 26 वर्ष की सेवा पर द्वितीय व तृतीय स्तरोन्नयन दिये जाने के प्रावधान पर अमल की स्थिति में सीधी भर्ती के ग्रेड वेतन से दूसरे व तीसरे ग्रेड वेतन निर्धारण में ग्रेड वेतन 2000 रुपये को इग्नोर किया जाएगा।

मन की बात : शिक्षा का बाजार बने बीएड कालेज, सवाल सिर्फ 83 फीसद युवाओं के अयोग्य ठहराये जाने का नहीं बल्कि उस पूरी प्रक्रिया के विफल होने का है जिससे गुजर कर वे इस परीक्षा......

मन की बात : शिक्षा का बाजार बने बीएड कालेज, सवाल सिर्फ 83 फीसद युवाओं के अयोग्य ठहराये जाने का नहीं बल्कि उस पूरी प्रक्रिया के विफल होने का है जिससे गुजर कर वे इस परीक्षा......

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में सिर्फ 17 फीसद अभ्यर्थियों के ही उत्तीर्ण होने की खबर चौंकाने वाली है। मूल्यांकन में सख्ती बरती गई, परचा कठिन आया या परीक्षार्थियों की तैयारी कम थी। कोई एक या सभी कारण हो सकते हैं पर सबसे अहम कारण की तलाश जरूरी है। यह काम अधिक कठिन भी नहीं है।

हरदोई से आयी एक खबर समस्या पर कुछ प्रकाश डाल सकती है। यहां परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में टीईटी अंक पत्र में गड़बड़ी पर 66 शिक्षक-शिक्षिकाओं को बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें से ज्यादातर वे लोग थे जिन्होंने 2011 में हुई टीईटी में भाग लिया था और मेरिट के आधार पर चयनित हुए थे। सिर्फ हरदोई ही नहीं, लगभग हर जिले से ऐसी खबरें आ चुकी हैं या आ रही हैं। जिस तरह टीईटी अंक पत्र में गड़बड़ी की शिकायत है, उसी तरह शिक्षा स्नातक उपाधि (बीएड) के अंक पत्रों में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। अब जरा इन तथ्यों के आलोक में विचार करें।

ऐसा नहीं कि जिन लोगों ने इस बार टीईटी दिया, वे मास्टरी का ख्वाब लेकर पहली बार कोई परीक्षा देने गए थे। पहले वे कहीं न कहीं से स्नातक हुए, फिर बीएड प्रवेश परीक्षा दी, काउंसिलिंग के बाद किसी कॉलेज में दाखिला लिया और महंगी फीस अदा कर कोर्स पूरा किया। इसके बाद वे टीईटी में शामिल हुए थे। फिर ऐसा परिणाम क्यों। सवाल सिर्फ 83 फीसद युवाओं के अयोग्य ठहराये जाने का नहीं बल्कि उस पूरी प्रक्रिया के विफल होने का है जिससे गुजर कर वे इस परीक्षा तक पहुंचे। बीएड कॉलेजों ने आखिर इन्हें क्या पढ़ाई और तैयारी कराई। वास्तविकता यह है कि अधिकतर को पढ़ाई कराई ही नहीं गई। सिर्फ उनका दाखिला लिया गया, फीस ली गई। बीएड करते ही सरकारी शिक्षक की नौकरी पक्की होने का सब्जबाग दिखाकर अतिरिक्त रकम की भी वसूली हुई और घर बैठे डिग्री थमा दी गई। 
यह कोई ऐसा तथ्य नहीं जो पहली बार उद्घाटित हो रहा बल्कि बीएड कॉलेजों के कदाचार की खबरें लगातार आती रही हैं। सिर्फ बीएड ही नहीं अधिकतर इंजीनियरिंग व प्रबंधन कॉलेजों का भी यही हाल है। परीक्षाएं सिर्फ नाम की होती हैं, फीस जमा होती है और डिग्री मिल जाती है। जब असल परीक्षा आती है तो परिणाम वही निकलता है जो टीईटी का निकला। ये परिणाम शिक्षा के बाजारीकरण का आईना पेश करते हैं। अक्स दुरुस्त करने की जरूरत है।
    [जागरण संपादकीय पृष्ठ]

अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों के 25% कोटे में कक्षा 1/पूर्व प्राथमिक कक्षा में प्रवेश में हुई धनराशि की स्वीकृति के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों के 25% कोटे में कक्षा 1/पूर्व प्राथमिक कक्षा में प्रवेश में हुई धनराशि की स्वीकृति के सम्बन्ध में आदेश जारी ।




Tuesday, March 29, 2016

मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत Replacement Of Kitchen Devices हेतु प्रति विद्यालय रू 5000/ की दर से धनराशि निर्गत किये जाने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश देखें : यहीं क्लिक कर जनपदवार धनराशि आवंटन भी देखें ।

मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत Replacement Of Kitchen Devices हेतु प्रति विद्यालय रू 5000/ की दर से धनराशि निर्गत किये जाने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश देखें : यहीं क्लिक कर जनपदवार धनराशि आवंटन भी देखें ।

परिषदीय विद्यालयों में नियुक्ति किये गए अध्यापकों एवं 31 मार्च 2016 को सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों के सम्बन्ध में सूचना प्रारूप में सूचना देते समय पृथक कालम में सूचना देने के सम्बन्ध में : क्लिक कर प्रारूप देखें ।

परिषदीय विद्यालयों में नियुक्ति किये गए अध्यापकों एवं 31 मार्च 2016 को सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों के सम्बन्ध में सूचना प्रारूप में सूचना देते समय पृथक कालम में सूचना देने के सम्बन्ध में : क्लिक कर प्रारूप देखें ।

उतर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2015 का परिणाम घोषित, 83 फीसद युवा शिक्षक बनने के योग्य नहीं

उतर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2015 का परिणाम घोषित, 83 फीसद युवा शिक्षक बनने के योग्य नहीं

इलाहाबाद । उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2015 में शामिल होने वाले 83 फीसद युवा शिक्षक बनने के योग्य नहीं हैं। इम्तिहान में असफल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या सफल होने वाले युवाओं से पांच गुना अधिक है।

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति पाने के लिए युवाओं का टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी उप्र की सचिव ने शासन के निर्देश पर टीईटी 2015 की परीक्षा में नौ लाख 30 हजार 168 अभ्यर्थियों को शामिल होना था, लेकिन 70 हजार 111 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी थी। शेष आठ लाख 60 हजार 57 अभ्यर्थियों का परिणाम सोमवार शाम को जारी किया गया है। सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि प्राथमिक स्तर की परीक्षा में दो लाख 58 हजार 372 अभ्यर्थी पंजीकृत थे जबकि दो लाख 37 हजार 620 परीक्षा में शामिल हुए। उनमें से 59 हजार 62 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। एक लाख 78 हजार 558 फेल हो गए हैं।

ऐसे ही उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में छह लाख 71 हजार 796 अभ्यर्थी पंजीकृत थे जबकि छह लाख 22 हजार 437 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए उनमें से 87 हजार 353 युवा उत्तीर्ण हुए हैं, वहीं पांच लाख 35 हजार 84 अभ्यर्थी फेल हो गए हैं। सचिव ने बताया कि परीक्षा का परिणाम वेबसाइट पर अपलोड है, इसे अभ्यर्थी अपना अनुक्रमांक भरकर देख सकते हैं। परिणाम का प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।6सात लाख 13 हजार 642 फेल, 70 हजार ने छोड़ी थी परीक्षा

अनुदेशकों ने सपा कार्यालय का किया घेराव : समायोजन की मांग कर रहे उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत अनुदेशकों ने सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन, पुलिस हुई नोंकझोंक

अनुदेशकों ने सपा कार्यालय का किया घेराव : समायोजन की मांग कर रहे उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत अनुदेशकों ने सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन, पुलिस हुई नोंकझोंक

लखनऊ : पिछले 33 दिनों से लक्ष्मण मेला मैदान में समायोजन की मांग कर रहे उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत अनुदेशकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।

लक्ष्मण मेला मैदान से अनुदेशक सैकड़ों की संख्या में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला के नेतृत्व में सपा कार्यालय पहुंचे और घेराव करते हुए नारेबाजी की। वे मुख्यमंत्री से मिलने की मांग करने लगे। इस बीच सपा कार्यालय के बाहर अनुदेशकों द्वारा नारेबाजी व विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस से नोकझोक भी हुई।

इसके बावजूद अनुदेशक डटे रहे और मुख्यमंत्री से मिलकर ही जाने पर ही अड़े रहे। अनुदेशकों द्वारा काफी देर तक हंगामा किए जाने के बाद मुख्यमंत्री के ओएसडी एसआरएस यादव ने उनसे मुलाकात की और मांगों को पूरा कराने तथा जल्दी ही मुख्यमंत्री से वार्ता कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद अनुदेशकों ने विरोध प्रदर्शन बंद किया।

संगठन के अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने कहा कि प्रदेश के 41 हजार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत अनुदेशकों को समायोजित करने के लिए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने 23 दिसंबर 2015 को वादा किया था, लेकिन उसके बाद से अब तक कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। विरोध प्रदर्शन में अनिल यादव, महेंद्र पाठक, प्रियंक मिश्र, मोहम्मद फैसल, प्रिया, ममता, सीता, प्रीती, माधवी, अभिनव सहित काफी संख्या में अनुदेशक शामिल रहे।

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