Monday, February 29, 2016

इनकम टैक्स छूट सीमा नहीं बढ़ाने से 22 लाख कर्मचारी और शिक्षक नाराज : कर्मचारी संगठनों के नेताओं का कहना है कि इसका खामियाजा भाजपा को यूपी में होने वाले विधानसभा में चुनाव में पड़ सकता है भुगतना

इनकम टैक्स छूट सीमा नहीं बढ़ाने से 22 लाख कर्मचारी और शिक्षक नाराज : कर्मचारी संगठनों के नेताओं का कहना है कि इसका खामियाजा भाजपा को यूपी में होने वाले विधानसभा में चुनाव में पड़ सकता है भुगतना


लखनऊ । केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा इनकम टैक्स की छूट सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का वादा नहीं निभाने से यूपी के 22 लाख कर्मचारी और शिक्षक खासे नाराज हैं। कई कर्मचारी संगठनों के नेताओं का कहना है कि इसका खामियाजा भाजपा को यूपी में होने वाले विधानसभा में चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीपी मिश्रा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी, उपाध्यक्ष यदुवीर सिंह और महामंत्री अतुल मिश्रा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (एसपी तिवारी गुट) के प्रदेश अध्यक्ष एसपी तिवारी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हरिशरण मिश्र, आरके निगम, यूपी सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र, महामंत्री ओंकार तिवारी, सचिवालय राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष शिव गोपाल सिंह, महामंत्री शिव शंकर द्विवेदी, सचिवालय सीधी भर्ती सेवा संघ के अध्यक्ष आशुतोष पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशिकांत शुक्ला और महामंत्री कुंवर अभय रंजन सिंह, सचिवालय निजी सचिव संघ के अध्यक्ष कृष्ण स्वरूप शर्मा, अपर निजी सचिव संघ के अध्यक्ष अमर सिंह पटेल, लेखा संघ के अध्यक्ष केबीएल श्रीवास्तव, सचिवालय कंप्यूटर सहायक और सहायक समीक्षा अधिकारी संघ के अध्यक्ष सौरभ सिंह, उपाध्यक्ष संजीव सिन्हा, जवाहर भवन-इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पांडेय और महामंत्री सुशील कुमार बच्चा सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी नेताओं ने केंद्र सरकार के बजट में इनकम टैक्स सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपए नहीं किए जाने पर निराशा जताई है।

कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीपी मिश्रा ने कहा कि बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से हुई बैठक में उन्होंने इनकम टैक्स सीमा बढ़ाने और पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा किया था, लेकिन बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं करके यूपी के 22 लाख कर्मचारी शिक्षकों को नाराज कर दिया है। उन्होंने कहा कि बजट में सातवें वेतन आयोग के बारे में भी अतिरिक्त धन की व्यवस्था करने का कोई प्रावधान स्पष्ट नहीं किया गया है। यह मामला कर्मचारियों में जिज्ञासा का विषय बना है। केंद्र सरकार को इस बारे में स्पष्ट करना चाहिए।

अप्रशिक्षित एवं स्नातक शिक्षामित्रों एवं समाज कल्याण के अप्रशिक्षित अध्यापकों के द्वितीय एवं तृतीय चरण के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के अभ्यर्थियों के प्रयोगात्मक/आंतरिक मूल्यांकन के अंक प्रेषण के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

अप्रशिक्षित एवं स्नातक शिक्षामित्रों एवं समाज कल्याण के अप्रशिक्षित अध्यापकों के द्वितीय एवं तृतीय चरण के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के अभ्यर्थियों के प्रयोगात्मक/आंतरिक मूल्यांकन के अंक प्रेषण के सम्बन्ध में आदेश जारी

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अंशकालिक अनुदेशक के चयनित/छूटे हुए अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र जारी करने हेतु सम्बंधित वेबसाइट खोलने के सम्बन्ध में आदेश-निर्देश जारी । 

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अंशकालिक अनुदेशक के चयनित/छूटे हुए अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र जारी करने हेतु सम्बंधित वेबसाइट खोलने के सम्बन्ध में आदेश-निर्देश जारी । 

द्वितीय चरण में प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षामित्रों के समायोजन की मांग : प्रदेश के 14 हजार शिक्षामित्रों की समस्याएं दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं तथा वे प्रशिक्षण प्राप्त होने के बावजूद 35 सौ रपए पर पढ़ाने को मजबूर

द्वितीय चरण में प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षामित्रों के समायोजन की मांग : प्रदेश के 14 हजार शिक्षामित्रों की समस्याएं दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं तथा वे प्रशिक्षण प्राप्त होने के बावजूद 35 सौ रपए पर पढ़ाने को मजबूर

लखनऊ (एसएनबी)। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने रविवार को दारुलशफा स्थित प्रांतीय कार्यालय में बैठक कर द्वितीय चरण में प्रशिक्षण प्राप्त प्रदेश के 14 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन सहायक अध्यापक के पद पर करने की मांग की।संघ के प्रांतीय अध्यक्ष गाजी इमाम आला ने कहा कि प्रदेश के 14 हजार शिक्षामित्रों की समस्याएं दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं तथा वे प्रशिक्षण प्राप्त होने के बावजूद 35 सौ रपए पर पढ़ाने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि जनपदों में सहायक अध्यापक के पद रिक्त होने के बावजूद संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा समायोजन की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा रहा है, जबकि इन शिक्षा मित्रों के समायोजन में कोई विधिक अड़चन भी नहीं है।

हाउस होल्ड सर्वे में निकल जाएंगी गर्मी की छुट्टियां : तीन से पांच से बच्चों को तलाश कर बनायेंगे रिपोर्ट, तो इस तरह छुट्टियों में गांव-गांव जाकर शिक्षक करेंगे सर्वे 

हाउस होल्ड सर्वे में निकल जाएंगी गर्मी की छुट्टियां : तीन से पांच से बच्चों को तलाश कर बनायेंगे रिपोर्ट, तो इस तरह छुट्टियों में गांव-गांव जाकर शिक्षक करेंगे सर्वे 

बीएड छात्रों को जल्द बड़ा तोहफा मिलने की उम्मीद : वर्तमान में इंटर्नशिप के दौरान किसी तरह का भुगतान करने की व्यवस्था नहीं

बीएड छात्रों को जल्द बड़ा तोहफा मिलने की उम्मीद : वर्तमान में इंटर्नशिप के दौरान किसी तरह का भुगतान करने की व्यवस्था नहीं

लखनऊ। बीएड कर रहे स्टूडेंट्स को जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग की ओर से बड़ा तोहफा मिलने की उम्मीद है। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार ने कहा है कि इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यदि प्रस्ताव पारित होता है तो स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी। इसका एक फायदा यह भी होगा कि जिन कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है वहां भी शिक्षण कार्य बेहतर होगा क्योंकि इंटर्नशिप के दौरान ये वह सभी जिम्मेदारी निभाएंगे जो कि एक शिक्षक की होती है। मालूम हो कि वर्तमान में इंटर्नशिप के दौरान किसी तरह का भुगतान करने की व्यवस्था नहीं है।

नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स ट्रेनिंग एनसीटीई ने 2015 से बीएड की पढ़ाई को दो साल का किया है। साथ ही इसके सिलेबस में भी बदलाव हुए हैं। लखनऊ विवि में डीन एजुकेशन प्रो. निधि बाला ने कहा कि जब बीएड एक साल का था तो उसमें केवल 40 लेसन की प्रैक्टिस टीचिंग होती थी, लेकिन दो साल के पाठ्यक्रम में 16 हफ्ते यानी करीब चार माह की इंटर्नशिप का हिस्सा भी शामिल किया गया है जिससे कि स्टूडेंट्स चीजों को प्रैक्टिकली सीखें और गुणवत्तापरक प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी पूरी हो। इंटर्नशिप का पार्ट सेकंड ईयर के कोर्स में शामिल है। यदि शासन पेड इंटर्नशिप की व्यवस्था इसी वर्ष लागू कर देती है तो दो वर्षीय बीएड के पहले बैच के स्टूडेंट्स को भी इसका लाभ मिल जाएगा।

क्रमिक अनशन जारी : शिक्षक भर्ती में पद न बढ़ाए जाने पर प्रमाण पत्र वापस करने की चेतावनी

क्रमिक अनशन जारी : शिक्षक भर्ती में पद न बढ़ाए जाने पर प्रमाण पत्र वापस करने की चेतावनी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : पंद्रह हजार शिक्षकों की भर्ती में और पद बढ़ाने की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन की अनदेखी पर अभ्यर्थियों ने रविवार को बीटीसी प्रशिक्षण और और टीईटी के प्रमाणपत्रों की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। इसी बीच उनका क्रमिक अनशन जारी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि मांग पूरी न होने तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

इस बीच अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदेश के मंत्रियों से भी संपर्क किया है और उन्हें ज्ञापन दिया है। अभ्यर्थियों के अनुसार पंद्रह हजार शिक्षकों की भर्ती में कई बार आवेदन की तिथियां बढ़ाकर नए अभ्यर्थियों को तो शामिल किया गया लेकिन पद नहीं बढ़ाए गए। उनका कहना है कि सरकार 16448 नव सृजित भर्तियों को इसी में जोड़कर भर्ती प्रक्रिया पूरी करे। रविवार को अवकाश के बावजूद अनशन स्थल पर सभा की जिसमें बीटीसी बेरोजगार संघ के प्रदेश संयोजक रवीश ने कहा कि यदि यह मांग पूरी न की गई तो अभ्यर्थियों के टीईटी और बीटीसी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र का भविष्य में कोी मूल्य नहीं रह जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि चूंकि उन्हें प्रशिक्षण बेसिक शिक्षा परिषद से ही प्राप्त हुआ है, इसलिए मांग पूरी न होने पर वे अपने प्रमाणपत्र परिषद को वापस लौटाएंगे। सभा को विकास दुबे, प्रेम वर्मा, शशि कुमार, यजेंद्र त्रिपाठी संजय यादव आदि ने संबोधित किया ।

शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 50 हजार बेसिक शिक्षकों को डिमोट करना शुरू कर दिया : नाराज शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन और चक्का जाम की चेतावनी दी

पदावनति शुरू होने पर भड़के दलित शिक्षक : गाजियाबाद-हाथरस में हुई कार्रवाई, आज निदेशक से मिलकर जताएंगे विरोध

लखनऊ (ब्यूरो)। प्रमोशन में आरक्षण का लाभ लेने वाले दलित शिक्षकों को पदावनत करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। गाजियाबाद में 60 और हाथरस में 11 शिक्षकों को पदावनत किया गया है। इसका दलित शिक्षकों ने जबरदस्त विरोध किया है। शिक्षकों ने शिक्षा विभाग पर मनमानी का आरोप लगाते हुए सोमवार को इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक से मिलने का फैसला किया है। अगर बात नहीं बनी तो स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई ठप करने की चेतावनी दी है।

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि प्रदेश में 50 हजार शिक्षकों को गोपनीय तरीके से रिवर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि शनिवार को गाजियाबाद में बैकलॉग के तहत पदोन्नति पाए उच्च प्राथमिक स्कूलों के 60 सहायक अध्यापकों को पदावनत कर दिया गया है। हाथरस में भी 11 शिक्षकों को पदावनत किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर बेसिक शिक्षा विभाग ने इस कार्रवाई को वापस नहीं लिया तो 4 मार्च से आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़े सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों को उनके मूल पद पर भेजने का आदेश दिया है।

शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 50 हजार बेसिक शिक्षकों को डिमोट करना शुरू कर दिया : नाराज शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन और चक्का जाम की चेतावनी दी

लखनऊ : शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 50 हजार बेसिक शिक्षकों को डिमोट करना शुरू कर दिया है। गाजियाबाद में पहले चरण में 60 जूनियर शिक्षकों को प्राइमरी शिक्षक के तौर पर डिमोट कर दिया गया। अन्य जिलों में भी लिस्ट तैयार हो चुकी है। नाराज शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन और चक्का जाम की चेतावनी दी है। 

डिमोट होने वाले शिक्षकों ने रविवार को 'आरक्षण बचाओ, संघर्ष समिति' के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें शिक्षकों ने बताया कि जिन्होंने बैकलॉग से प्रमोशन पाया था, उनको भी डिमोट कर दिया गया है। समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि बेसिक शिक्षा निदेशक ने उन्हें ऐसा न करने का आश्वासन दिया था, फिर भी डिमोशन कर दिया। सोमवार को वे बेसिक शिक्षा निदेशक से मिलेंगे। इसके बाद 4 मार्च को बैठक करके प्रदेश भर में आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा।

मॉडल स्कूलों में शिक्षक भर्ती निरस्त : प्रदेश में 193 मॉडल स्कूलों में होनी थी प्रधानाचार्य एवं टीजीटी के पदों पर भर्ती

मॉडल स्कूलों में शिक्षक भर्ती निरस्त : प्रदेश में 193 मॉडल स्कूलों में होनी थी प्रधानाचार्य एवं टीजीटी के पदों पर भर्ती

इलाहाबाद (ब्यूरो)। शिक्षक भर्ती के दावेदार एक बार फिर से राज्य सरकार की ओर से छले गए हैं। सरकार की ओर से मॉडल स्कूलों के लिए टीजीटी एवं प्रधानाचार्य भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने के साथ फीस वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की तर्ज पर प्रदेश भर में 193 मॉडल स्कूल खोलने की योजना से केंद्र एवं प्रदेश सरकार के हाथ खींच लेने पर टीजीटी एवं प्रधानाचार्य की भर्ती निरस्त कर दी गई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अभियान अब आवेदन शुल्क वापस करने के लिए दिशा निर्देश जारी कर देने के बाद प्रदेश में लाखों की संख्या में बीएड बेरोजगार एक बार फिर ठगे गए हैं। सरकार की ओर से अभ्यर्थी की फीस बैंक सेवा शुल्क कटौती के बाद वापसी शुरू हो गई है।

प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से मॉडल स्कूल योजना के तहत 193 मॉडल स्कूलों में प्रधानाचार्य पद के लिए 21 फरवरी से नौ मार्च 2015 तक राज्य स्तर तथा टीजीटी पद के लिए 17 मार्च से सात अप्रैल 2015 के बीच आवेदन मांगे गए थे। सरकार की ओर से प्रदेश के हर जिले में चुनिंदा उच्च प्राथमिक विद्यालयों को उच्चीकृत करके उसे मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने का काम लगभग पूरा हो चुका है।

अब अंतिम समय में भारत सरकार की ओर से मॉडल स्कूल योजना को डी-लिंक किए जाने के बाद योजना के प्रबंधन के लिए धन उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसके बाद राज्य सरकार ने योजना के संचालन के लिए गठित राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ एवं मॉडल स्कूल संगठन उत्तर प्रदेश को खत्म कर दिया है। मॉडल स्कूल संगठन भंग कर दिए जाने के बाद टीजीटी एवं प्रधानाचार्य पद के लिए आवेदन करने वालों के शुल्क वापसी का फैसला किया गया है।

एक बार फिर से ठगे गए बीएड बेरोजगार

- मॉडल स्कूल शिक्षक भर्ती के लिए एक-एक अभ्यर्थी ने प्रदेश के सभी 18 शिक्षा मंडलों में संयुक्त शिक्षा निदेशकों के नाम आवेदन किए थे। आवेदन में एक-एक अभ्यर्थी की ओर से हजारों खर्च करने के बाद भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई। केंद्र एवं प्रदेश सरकार की इस नीति से एक बार फिर से प्रशिक्षित बीएड बेरोजगार ठगे गए हैं। इससे पहले राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में भी शिक्षक भर्ती के अधर में फंसे होने से अभ्यर्थी परेशान हैं। प्रदेश में 2012 में नई सरकार के गठन के बाद से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से एक भी पद पर भर्ती नहीं हो सकी है। अब मॉडल स्कूल में अवसर खत्म होने से अभ्यर्थी परेशान हैं।

फीस वापसी की अंतिम तिथि 28 मार्चः

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अभियान की ओर से बैंक सेवा शुल्क की कटौती के बाद धनराशि वापसी के लिए 24 फरवरी से 28 मार्च 2016 की अवधि तय की गई है। प्रधानाचार्य एवं टीजीटी के पद अभ्यर्थियों की ओर से ऑन लाइन जमा किए गए शुल्क को पंजाब नेशनल बैंक की ओर से पेमेंट गेटवे वेंडर केसहयोग से नेट बैंकिंग के माध्यम से वापस किया जाएगा। अभ्यर्थी ने जिस शाखा से ई-चालान किया था, उसी में भुगतान किया जाएगा। तय तिथि के बाद शुल्क की वापसी नहीं होगी। अभ्यर्थी शुल्क वापसी के लिए वेबसाइट www.modelschool.in तथा www.uprmsa.in पर जानकारी अपलोड कर सकते हैं।

Sunday, February 28, 2016

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (UPPSS) का दशकों बाद अपना आन्दोलन : मित्रों वर्ष 1986 के पश्चात् 16 मार्च 2016 को UPPSS अकेले अपने दम पर अपनी माँगों के समर्थन में आन्दोलन कर रहा है जिसमें आप सबको सादर आमंत्रित ।

UPPSS का दशकों बाद अपना आन्दोलन : मित्रों वर्ष 1986 के पश्चात् 16 मार्च 2016 को UPPSS अकेले अपने दम पर अपनी माँगों के समर्थन में आन्दोलन कर रहा है जिसमें आप सबको सादर आमंत्रित ।

                 - द्वारा UPPSS अध्यक्ष

सर्व शिक्षा अभियान (SSA) द्वारा यूनिसेफ (UNICEF) के सहयोग से चिन्हित किये गये उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में RTE Awareness Study कराये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी : क्लिक कर देखें ।

सर्व शिक्षा अभियान (SSA) द्वारा यूनिसेफ (UNICEF) के सहयोग से चिन्हित किये गये उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में RTE Awareness Study कराये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी : क्लिक कर देखें

बीएड स्टूडेंट्स को पेड इंटर्नशिप का मिलेग अवसर : सूबे के बीएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुए हो चुका 17 दिन से अधिक

बीएड स्टूडेंट्स को पेड इंटर्नशिप का मिलेग अवसर : सूबे के बीएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुए हो चुका 17 दिन से अधिक

लखनऊ। बीएड कर रहे स्टूडेंट्स को जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग की ओर से बड़ा तोहफा मिल सकता है। विभाग ऐसा प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिससे कि बीएड स्टूडेंट्स को पेड इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा। शनिवार को यहां नवयुग कन्या महाविद्यालय के एक कार्यक्रम में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार ने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यदि प्रस्ताव पारित होता है तो स्टूडेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी। इसका एक फायदा यह भी होगा कि जिन कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है वहां भी शिक्षण कार्य बेहतर होगा क्योंकि इंटर्नशिप के दौरान ये वह सभी जिम्मेदारी निभाएंगे जो कि एक शिक्षक की होती है। मालूम हो कि वर्तमान में इंटर्नशिप के दौरान किसी तरह का भुगतान करने की व्यवस्था नहीं है।

16 हफ्ते की होगी इंटर्नशिप :

नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स ट्रेनिंग (एनसीटीई) ने 2015 से बीएड की पढ़ाई को दो साल का किया है। साथ ही इसके सिलेबस में भी बदलाव हुए हैं। लखनऊ विवि में डीन एजुकेशन प्रो. निधि बाला ने कहा कि जब बीएड एक साल का था तो उसमें केवल 40 लेसन की प्रैक्टिस टीचिंग होती थी, लेकिन दो साल के पाठ्यक्रम में 16 हफ्ते यानी करीब चार माह की इंटर्नशिप का हिस्सा भी शामिल किया गया है जिससे कि स्टूडेंट्स चीजों को प्रैक्टिकली सीखें और गुणवत्तापरक प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी पूरी हो। इंटर्नशिप का पार्ट सेकंड ईयर के कोर्स में शामिल है। यदि शासन पेड इंटर्नशिप की व्यवस्था इसी वर्ष लागू कर देती है तो दो वर्षीय बीएड के पहले बैच के स्टूडेंट्स को भी इसका लाभ मिल जाएगा। जितेंद्र कुमार ने बताया कि शासनादेश निकालकर यह भी निर्देश दिए जाएंगे कि कॉलेज इंटर्नशिप करने में बीएड स्टूडेंट्स को पूरा सहयोग करें।

कॉलेज ने कहा- आगामी सत्र में कैसे होगा प्रवेश :

नवयुग कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या नीरजा गुप्ता ने जितेंद्र कुमार को बताया कि उनके यहां बीएड में 80 सीटें हैं। जबकि विभाग में स्वीकृत शिक्षकों के नौ में से पांच रिक्त हैं। दो वर्षीय बीएड होने के बाद पहले वर्ष तो कॉलेज ने पढ़ाई करा ली लेकिन आगामी सत्र में वह इतने शिक्षकों की स्थिति में प्रवेश लेने में असमर्थ है। इस पर जितेंद्र कुमार ने प्राचार्या से कहा कि वह लिखित शिकायत दें जिससे कि समाधान पर कार्यवाही हो सके। यह समस्या नवयुग कॉलेज नहीं बल्कि सूबे के 112 अनुदानित कॉलेजों की है जहां आगामी सत्र में बीएड की 1100 सीटों पर प्रवेश का संकट है।

10 दिन में होगा उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का गठन :

सूबे के बीएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुए 17 दिन से अधिक हो चुके हैं। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अनुदानित कॉलेजों में कैसे प्रवेश लिए जाएंगे। इसका कारण है कि दो वर्षीय बीएड के लिए एनसीटीई ने नए मानक निर्धारित किए हैं। इसके अनुसार कॉलेज में 50-50 स्टूडेंट्स के एक सेक्शन पर सात-सात शिक्षक होने चाहिए। लेकिन किसी भी कॉलेज में यह मानक पूरे नहीं है। स्ववित्तपोषित कॉलेज तो अपने मानक खुद पूरे कर भी सकते हैं, लेकिन अनुदानित कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से की जाती है। जबकि वर्तमान स्थिति यह है कि सूबे में आयोेग के सदस्य ही पूरे नहीं। जितेंद्र कुमार ने बताया कि प्रयास है कि 10 दिन में आयोग का गठन कर लिया जाएगा, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया होगी।

गांवों के गरीब बच्चों को भी निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिला : नए शासनादेश में वार्ड की अनिवार्यता समाप्त, अब एक किलोमीटर के अंदर ले सकेंगे दाखिले

गांवों के गरीब बच्चों को भी निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिला : नए शासनादेश में वार्ड की अनिवार्यता समाप्त, अब एक किलोमीटर के अंदर ले सकेंगे दाखिले

लखनऊ। नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अनुसार दुर्बल व अलाभान्वित वर्ग के बच्चे अब गांवों के निजी स्कूलों में भी नि:शुल्क दाखिले पा सकेंगे। शिक्षा विभाग के इस वर्ष जारी नए शासनादेश में वार्ड संबंधी अनिवार्यता हटा ली गई है। पिछले शासनादेश में निजी स्कूलों में नि:शुल्क दाखिले की बात शहरी क्षेत्र के केवल उन वार्डों के लिए कही गई थी, जिनमें एक भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल नहीं थे। इस वर्ष ‘पड़ोस’ शब्द को वार्ड के बजाय एक किलोमीटर कर दिया गया है। इससे शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी गरीब बच्चों के लिए दाखिलों के दरवाजे खुल जाएंगे।

🌑 यहां क्लिक कर - गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालयों में "अलाभित समूह" एवं 25% कोटे के "अंतर्गत निर्बल वर्ग" और कैन्सर से पीड़ित माता-पिता के बच्चों के प्राइवेट और मान्यता प्राप्त स्कूलों के नामांकित करने के लिए कई प्रतिबंधों में परिवर्तन के साथ शासन ने जारी किया संशोधित शासनादेश ।

शासनादेश के अनुसार बच्चे को सबसे पहले राजकीय या अनुदानित विद्यालय में दाखिले के लिए आवेदन करना होगा। इन स्कूलों में बच्चों को कॉपी-किताब व यूनिफॉॅर्म नि:शुल्क मिलती है। सरकारी स्कूल की एक कक्षा में 30 एडमिशन होने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह दुर्बल व अलाभान्वित वर्ग के बच्चों का नि:शुल्क दाखिला पड़ोस केे निजी स्कूल में कराएं। फीस की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार करेगी। अभी तक ‘पड़ोस’ शब्द का अर्थ संबंधित वार्ड था। वार्ड शहरी क्षेत्र में ही होते हैं, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूल नजदीक न होने पर भी बच्चों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क दाखिला नहीं मिल पा रहा था।

तीस एडमिशन के बाद दाखिले से मना नहीं कर सकेंगे सरकारी स्कूल

नए शासनादेश में सरकारी स्कूल में दाखिले की अधिकतम संख्या में बदलाव के बाद एक कक्षा में अधिकतम दाखिलों की संख्या 40 से घटकर 30 हो गई है। सरकारी स्कूल की एक कक्षा में 30 से ज्यादा दाखिले होने के बाद भी अलाभान्वित या दुर्बल वर्ग के बच्चों को दाखिले से मना नहीं किया जा सकेगा।

...पर आरटीई एक्ट का मकसद नहीं हो पा रहा पूरा

अधिनियम की मुख्य मंशा हर बच्चे को आठवीं तक नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार देना है। इसके लिए अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को छोड़कर बाकी सभी निजी विद्यालयों को 25 फीसदी सीटों पर नि:शुल्क दाखिला देना अनिवार्य है, जबकि शासनादेश में सरकारी स्कूलों की सीटें फुल होने के बाद ही निजी स्कूलों की सीटों पर नि:शुल्क दाखिलों की बात कही गई है। ऐसे में शासनादेश निजी स्कूलों को 25 फीसदी सीटों पर अनिवार्य रूप से दाखिले की बात नहीं कर रहा। दाखिले न देने पर स्कूलों पर कार्रवाई की बात भी शासनादेश से नदारद है।

शासनादेश में ‘पड़ोस’ शब्द की परिभाषा पर काफी कन्फ्यूजन था। नए शासनादेश से यह बात साफ हो गई है। वार्ड संबंधी अनिवार्यता हटने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र के निजी स्कूलों में नि:शुल्क दाखिले हो सकेंगे। सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है।
-समीना बानो, भारत अभ्युदय फाउंडेशन

बेसिक स्कूलों में टेबल-बेंच पर बैठकर पढ़ेंगे बच्चे : राज्य सरकार बजट का करवा रही आकलन, करीब दो करोड़ बच्चों को मिलेगी सुविधा

बेसिक स्कूलों में टेबल-बेंच पर बैठकर पढ़ेंगे बच्चे : राज्य सरकार बजट का करवा रही आकलन, करीब दो करोड़ बच्चों को मिलेगी सुविधा

लखनऊ (ब्यूरो)। जल्द ही बेसिक स्कूलों में भी बच्चे टेबल-बेंच पर बैठकर पढ़ते हुए मिलेंगे। राज्य सरकार के निर्देश पर इसके लिए जरूरी बजट का आकलन किया जा रहा है। अगले वित्त वर्ष में सभी स्कूलों में यह व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया है।

प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के 1 लाख 58 हजार 396 स्कूल हैं। इनमें 1.92 करोड़ छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं, लेकिन किसी भी स्कूल में उनके बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग इन स्कूलों को टाट-पट्टी या चटाई खरीदने के लिए बजट देता है। हाल ही में स्कूलों में सुविधाओं की बाबत बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन व विभाग के उच्चाधिकारियों के बीच एक बैठक हुई। इसमें अफसरों ने बताया कि ठंड के तीन-चार महीने तो बच्चे टाट-पट्टी या चटाई पर बैठकर ठीक तरह से पढ़ ही नहीं पाते।

अगर उनके बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था हो जाए तो उन्हें काफी सुविधा होगी। ऐसा होने पर बेसिक स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी स्कूलों की बराबरी भी कर सकेंगे। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे यह आकलन कर बताएं कि हर स्कूल को फर्नीचर उपलब्ध कराने में कितना खर्च आएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के एक अफसर ने बताया कि खर्च का आकलन कराया जा रहा है। जल्द शासन को एस्टीमेट बनाकर दे दिया जाएगा। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने भी इस योजना को हरी झंडी दे दी है।

बेसिक स्कूलों में बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर का इंतजाम करने के बारे में मुख्यमंत्री से बात हुई है। इस पर आने वाले खर्च का आकलन कराया जा रहा है।
-अहमद हसन, बेसिक शिक्षामंत्री

RECENT POSTS

BASIC SHIKSHA NEWS, PRIMARY KA MASTER : अभी तक की सभी खबरें/आदेश/निर्देश/सर्कुलर/पोस्ट्स एक साथ एक जगह, बेसिक शिक्षा न्यूज ● कॉम के साथ क्लिक कर पढ़ें ।

BASIC SHIKSHA NEWS, PRIMARY KA MASTER : अभी तक की सभी खबरें/ आदेश / निर्देश / सर्कुलर / पोस्ट्स एक साथ एक जगह , बेसिक शिक्षा न्यूज ●...