Sunday, January 31, 2016

विज्ञान-गणित शिक्षकों को दो सत्यापन पर वेतन जारी : प्रशिक्षु शिक्षक भी मांग रहे थे दो सत्यापन पर वेतन

विज्ञान-गणित शिक्षकों को दो सत्यापन पर वेतन जारी : प्रशिक्षु शिक्षक भी मांग रहे थे दो सत्यापन पर वेतन

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के उच्च प्राथमिक स्कूल में नवनियुक्त विज्ञान व गणित के 107 शिक्षकों को दो सत्यापन पर वेतन जारी किया गया है। 20 सितम्बर को नियुक्त सहायक अध्यापकों का वेतन बेसिक शिक्षा अधिकारी राजकुमार ने 27 जनवरी को जारी किया है।

हाईस्कूल, इंटर, स्नातक व प्रशिक्षण में से किसी दो सत्यापन पर वेतन दिया जा रहा है। इनमें सर्वाधिक 31 शिक्षक कोरांव ब्लाक के हैं। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने शिक्षामित्रों की तर्ज पर शिक्षकों को दो सत्यापन पर वेतन जारी करने के आदेश 16 दिसम्बर को जारी किए थे।

वेतन जारी होने पर जयन्त शाह, सुरभि सिंह, सुधा गौतम, नेहा उमराव, रमा पटेल, अर्चना वर्मा, शालिनी, दिव्या, प्रभात साहू, बच्चू सिंह, प्रेम चंद व मो. अनवर आदि ने खुशी जताई है।

प्रशिक्षु शिक्षक भी मांग रहे दो सत्यापन पर वेतन

शिक्षामित्रों और विज्ञान गणित शिक्षकों की तरह प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में चयनित शिक्षक भी दो सत्यापन पर वेतन देने की मांग कर रहे हैं। प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित प्रशिक्षु शिक्षकों को नवम्बर से वेतन नहीं मिला है।

शिक्षकों ने सरकार से वादा निभाने की मांग की : पुरानी पेंशन योजना की बहाली के साथ अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ एवं संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से लक्ष्मण मेला मैदान में धरना-प्रदर्शन

शिक्षकों ने सरकार से वादा निभाने की मांग की : पुरानी पेंशन योजना की बहाली के साथ अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ एवं संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से लक्ष्मण मेला मैदान में धरना-प्रदर्शन

जागरण संवाददाता, लखनऊ : अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ एवं संयुक्त शिक्षक मोर्चा के शिक्षकों ने शनिवार को लक्ष्मण मेला मैदान में वादा निभाओ चेतावनी धरने का आयोजन किया। इस दौरान शिक्षकों ने प्रदेश सरकार से अपने वादे निभाने की मांग की।

धरने में शिक्षकों ने शैक्षिक न्यायाधिकरण के माध्यम से शिक्षकों की समस्याओं का निराकरण कराने एवं सेवानिवृति की आयु 65 वर्ष किए जाने की मांग की। साथ ही पुरानी पेंशन योजना की बहाली, शिक्षकों के लिए कैश लेस चिकित्सा की सुविधा एवं स्थानांतरण व पदोन्नति की समस्या का निराकरण कराने समेत अन्य मांगों को पूरा करने की मांग की। धरने में जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। इस दौरान चेतावनी दी गई कि अगर प्रदेश सरकार द्वारा उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो शिक्षक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।

धरने में अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष अरविंद कुमार दुबे, उपाध्यक्ष विजय कुमार त्रिपाठी, मंत्री बृजेंद्र बहादुर सिंह, संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष पीतांबर भट्ट एवं संयोजक तेज नारायण पांडेय समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के तत्वाधान में शिक्षकों नें भरी हुंकार, नहीं करेंगे गैर शैक्षणिक कार्य

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के तत्वाधान में शिक्षकों नें भरी हुंकार, नहीं करेंगे गैर शैक्षणिक कार्य

स्वैच्छिक संगठनों द्वारा शिक्षा सम्बन्धी कार्य तथा उन्हें दी जाने वाली आर्थिक सुविधाएं : प्राइमरी पाठशालाओं में अनुसूचित जाति के छात्रों की संख्या 50% से कम नहीं होना चाहिए ।

स्वैच्छिक संगठनों द्वारा शिक्षा सम्बन्धी कार्य तथा उन्हें दी जाने वाली आर्थिक सुविधाएं : प्राइमरी पाठशालाओं में अनुसूचित जाति के छात्रों की संख्या 50% से कम नहीं होना चाहिए

माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष वादों के त्वरित निस्तारण हेतु विभागों में नोडल अधिकारियों के कर्तव्य एवं दायित्व निर्धारित किये जाने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश ।

माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष वादों के त्वरित निस्तारण हेतु विभागों में नोडल अधिकारियों के कर्तव्य एवं दायित्व निर्धारित किये जाने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश




मानव संपदा मानव संसाधन प्रबन्धन प्रणाली के लिए कार्मिक का विवरण फीड कराये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

मानव संपदा मानव संसाधन प्रबन्धन प्रणाली के लिए कार्मिक का विवरण फीड कराये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी


अधीनस्थ राजपत्रित महिला शाखा के रिक्त पदों पर पदोन्नति हेतु पात्रता परिधि में आ रही शिक्षिकाओं/प्रवक्ताओं को विगत 10 वर्षो की गोपनीय आख्या/प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में आदेश जारी ।

अधीनस्थ राजपत्रित महिला शाखा के रिक्त पदों पर पदोन्नति हेतु पात्रता परिधि में आ रही शिक्षिकाओं/प्रवक्ताओं को विगत 10 वर्षो की गोपनीय आख्या/प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में आदेश जारी



पुरस्कार के लिए कड़ी कसौटी पर परखे जाएंगे स्कूल :  हर जिले से एक परिषदीय प्राथमिक स्कूल होगा हकदार, मार्च में आयोजित होगा समारोह, प्रत्येक स्कूल को मिलेंगे 1.2 लाख रुपये

पुरस्कार के लिए कड़ी कसौटी पर परखे जाएंगे स्कूल :  हर जिले से एक परिषदीय प्राथमिक स्कूल होगा हकदार, मार्च में आयोजित होगा समारोह, प्रत्येक स्कूल को मिलेंगे 1.2 लाख रुपये

लखनऊ : विद्यालय पुरस्कार योजना के तहत राज्य सरकार प्रदेश के हर जिले में सर्वश्रेष्ठ आंके गए एक परिषदीय प्राथमिक स्कूल को पुरस्कृत करेगी। पुरस्कार राशि के तौर पर प्रत्येक चयनित प्राथमिक स्कूल को 1.20 लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी। हालांकि पुरस्कार का हकदार बनने के लिए जो मानक तय किये गए हैं, स्कूलों को उनकी कसौटी पर खरा उतरना होगा। चयनित स्कूलों की विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा प्रधानाध्यापक को मार्च में राज्य स्तर पर आयोजित समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार की धनराशि का इस्तेमाल स्कूल के विकास के लिए किया जाएगा। प्रदेश में 1.13 लाख परिषदीय प्राथमिक विद्यालय हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है।

यह होंगे मानक :-

पुरस्कार के लिए चुने जाने के लिए शैक्षिक सत्र 2015-16 में विद्यालय में कम से कम 150 विद्यार्थी नामांकित होने चाहिए और पिछले तीन वर्षों में नामांकन में कोई गिरावट नहीं होनी चाहिए। विद्यालय के सेवित क्षेत्र के छह से 11 वर्ष तक के सभी बच्चे विद्यालय में नामांकित होने चाहिए और इस आयुवर्ग में कोई बच्चा स्कूल से बाहर न हो।

विद्यालय में बच्चों की औसतन मासिक उपस्थिति 60 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। अवकाश और अधिकृत अनुपस्थिति को छोड़कर बाकी दिनों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति होनी चाहिए। स्कूल में बालक व बालिकाओं के लिए न सिर्फ अलग-अलग शौचालय हों बल्कि उनका इस्तेमाल भी किया जा रहा हो। पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिए। विद्यालय भवन की रंगाई-पुताई व रखरखाव संतोषजनक होने के साथ परिसर साफ-सुथरा होना चाहिए।

बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर या प्लास्टिक की चटाई/टाट पट्टी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चों को मिड-डे मील नियमित रूप से मेन्यू के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा हो। उन्हें नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, वर्क बुक और यूनीफॉर्म के पूरे सेट मुहैया करा दिए गए हों।स्कूल में शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य बेसिक शिक्षा परिषद की समय सारिणी के मुताबिक पूरा होना चाहिए और विद्यार्थियों को गृह कार्य दिया गया हो। छात्र-छात्रओं द्वारा किये गए गृह और अभ्यास कार्यों की शिक्षकों की ओर से नियमित जांच होनी चाहिए। चालू शैक्षिक सत्र में निरीक्षण के दौरान स्कूल को उत्कृष्ट कोटि का पाया गया हो। विद्यालय के छात्र-छात्रओं के सीखने-समझने का स्तर भी उत्कृष्ट कोटि का होना चाहिए। विद्यालय प्रबंध समिति की मासिक बैठक नियमित रूप से हो रही हो। समिति की बैठकों में होने वाले फैसलों पर अमल भी हो रहा हो। पढ़ाई के साथ स्कूल में खेलकूद व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता हो।

तय किये गए मानकों के आधार पर खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र में संचालित प्राथमिक विद्यालयों में से 10 स्कूलों को चिन्हित कर उनमें से एक स्कूल का नाम सहित पूर्ण विवरण जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को 15 फरवरी तक उपलब्ध कराएंगे। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय चयन समिति फरवरी के अंत तक हर जिले में संस्तुत स्कूलों में से एक का चयन कर उसका नाम और विवरण सात मार्च तक बेसिक शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराएगी।

12091 शिक्षक भर्ती में लगेगा अनशन का तड़का : 72825 शिक्षकों की भर्ती के तहत प्रदेश भर में होनी हैं नियुक्तियां

12091 शिक्षक भर्ती में लगेगा अनशन का तड़का : 72825 शिक्षकों की भर्ती के तहत प्रदेश भर में होनी हैं नियुक्तियां

15 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी साल भर बाद भी भर्ती से दूर : हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को भर्ती पर स्थगनादेश जारी कर दिया

15 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी साल भर बाद भी भर्ती से दूर : हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को भर्ती पर स्थगनादेश जारी कर दिया

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 15 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया नौ दिसंबर 2014 से चल रही है। जनवरी 2015 से आवेदन लेने का सिलसिला इस तरह शुरू हुआ कि वह चार मर्तबा बीते 15 जनवरी 2016 तक चला। चौथी बार आवेदन लेने की प्रक्रिया पूरी होने पर परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया था कि एक फरवरी को नए दावेदारों की काउंसिलिंग कराकर पांच फरवरी को सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांट दिया जाए। इसी बीच महेंद्र प्रताप सिंह व सात अन्य बनाम उप्र राज्य व अन्य के याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को भर्ती पर स्थगनादेश जारी कर दिया। न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए परिषद ने भर्ती प्रक्रिया अग्रिम आदेशों तक के लिए रोक दिया है।

यहां क्लिक कर आदेश देखें - 15000 सहायक अध्यापकों का नियुक्ति परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित करने के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी ।

शिक्षकों की भर्ती का शासनादेश जारी होने के बाद पहली बार बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी, उर्दू बीटीसी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों, दूसरी बार में केवल डीएड यानी विशेष शिक्षा वाले अभ्यर्थियों से और तीसरी बार हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विशिष्ट बीटीसी 2004, 2007 एवं 2008 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन लिया को आवेदन करने का मौका दिया गया। चौथी बार हाईकोर्ट के निर्देश पर सबके लिए वेबसाइट खोली गई। इस भर्ती प्रक्रिया में लगातार अभ्यर्थियों की तादाद बढ़ती जा रही है, लेकिन सीटें ज्यों की त्यों हैं, जबकि अभ्यर्थी यह भी मांग कर रहे हैं कि जिस तरह से अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए वेबसाइट खोली गई ।

Saturday, January 30, 2016

बीएड डिग्रीधारी अगले पांच साल तक और बन सकते हैं प्राइमरी के मास्साब! वहीं, स्कूलों में पहले से कार्यरत अस्थाई शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अप्रशिक्षित शिक्षकों को जरूरी योग्यता हासिल करने का मौका भी मिलेगा।

बीएड डिग्रीधारी अगले पांच साल तक और बन सकते हैं प्राइमरी के मास्साब! वहीं, स्कूलों में पहले से कार्यरत अस्थाई शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अप्रशिक्षित शिक्षकों को जरूरी योग्यता हासिल करने का मौका भी मिलेगा।

नई दिल्ली : केंद्र सरकार शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के तहत राज्यों को शिक्षकों की नियुक्ति के नियमों में और पांच साल के लिए ढील दे सकती है। इससे जहां बीएड डिग्रीधारियों के लिए प्राइमरी शिक्षक नियुक्त होने के मौके बढ़ेंगे। वहीं, स्कूलों में पहले से कार्यरत अस्थाई शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अप्रशिक्षित शिक्षकों को जरूरी योग्यता हासिल करने का मौका भी मिलेगा।

शिक्षा के अधिकार कानून- 2011 में लागू हुए प्रावधानों के तहत पांच साल के भीतर स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार शिक्षक नियुक्त किए जाने थे। इसी प्रकार जो शिक्षक अप्रशिक्षित थे, उन्हें न्यूनतम योग्यताएं हासिल करनी थी, ताकि उनकी सेवाएं जारी रखी जा सके। लेकिन पांच साल में शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं हो सकी। न ही सभी अप्रशिक्षित शिक्षक ट्रेंनिंग हासिल कर सके। उल्टे केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार समेत डेढ़ दर्जन राज्यों को बीएड डिग्रीधारियों को प्राइमरी शिक्षक नियुक्त करने की अनुमति दे दी। लेकिन शर्त यह रखी कि वे प्राइमरी शिक्षक की छह महीने की विशेष ट्रेनिंग लेंगे। लेकिन यह कार्य पूरा नहीं हो सका।

सूत्रों के अनुसार नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने केंद्र को कहा है कि शिक्षकों की नियुक्ति और न्यूनतम अर्हता हासिल करने की समय सीमा को पांच साल के लिए और बढ़ाकर 2020 कर दिया जाए। राज्यों की तरफ से भी केंद्र को सुझाव आए हैं। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने 8 फरवरी को दिल्ली में राज्यों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी और फैसला लिया जाएगा। बता दें कि जिन राज्यों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत छूट दी गई हैं वे 31 मार्च 2016 को खत्म हो रही है।

जमीनी सच्चाई

- 19.83 लाख शिक्षकों के पद आरटीई के तहत स्वीकृत, 14.15 लाख शिक्षकों की ही हुई भर्ती
- 80 फीसदी कार्यरत शिक्षकों के पास ही पेशेवर डिग्री, शेष अप्रशिक्षित हैं या उनकी डिग्री मान्य नहीं है
- 06 लाख के करीब हैं अप्रशिक्षित या गैर मान्यता प्राप्त डिग्री धारण करने वाले शिक्षक,जो पढ़ा रहे हैं
- बीएड, या अन्य अप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए इग्नू एवं अन्य विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन कोर्स शुरू किए
- 35 से 40 हजार शिक्षक सालाना के दर से ही इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में लोगों को प्रशिक्षित किया जा सका है

बीएड डिग्रीधारियों को होगा फायदा

देश में शिक्षक प्रशिक्षण की करीब 14 लाख सीटें हैं। इनमें से 75 फीसदी सीटें बीएड की हैं, जबकि बाकी सीटें प्राइमरी डीईएलएड की हैं। इसलिए यदि आरटीई में शिक्षकों से जुड़ी छूट की अवधि बढ़ती है, तो बीएड डिग्रीधारियों को फिर फायदा होगा। राज्यों को उन्हें प्राइमरी शिक्षक नियुक्त करने की छूट फिर से मिल सकती है।

शिक्षकों की कमी

बिहार-2,54,066
झारखंड-69,163
उत्तर प्रदेश-2,91,871
मध्य प्रदेश-88,453
पश्चिम बंगाल-1,04,346
ओडिशा-63,355
छत्तीसगढ़-46,886
(स्रोत मानव संसाधन विकास मंत्रालय 2014-15)

समूह 'क' व 'ख' एवं अन्य अधिकारियों/अध्यापकों का सेवा विवरण ऑनलाइन किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी । 

समूह 'क' व 'ख' एवं अन्य अधिकारियों/अध्यापकों का सेवा विवरण ऑनलाइन किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी । 

वर्ष 2015-16 में प्रदेश स्तर पर बालक/बालिकाओं के खेलकूद कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं के आयोजन के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी ।

वर्ष 2015-16 में प्रदेश स्तर पर बालक/बालिकाओं के खेलकूद कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं के आयोजन के सम्बन्ध में आदेश/निर्देश जारी

प्रदेश के सभी जनपदों में दिनांक 27 जनवरी 2016 से 03 फरवरी 2016 तक "मातृत्व सप्ताह"आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में नवीन आदेश/निर्देश जारी ।

प्रदेश के सभी जनपदों में दिनांक 27 जनवरी 2016 से 03 फरवरी 2016 तक "मातृत्व सप्ताह"आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में नवीन आदेश/निर्देश जारी

मीना की दुनिया (Meena Ki Duniya) - रेडियो प्रसारण, एपिसोड - 66 । कहानी का शीर्षक - “पीपल का साया”

मीना की दुनिया (Meena Ki Duniya) - रेडियो प्रसारण, एपिसोड - 66 । कहानी का शीर्षक - “पीपल का साया”

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण
एपिसोड-66
दिनांक-29/01/2016
आकाशवाणी केन्द्र - लखनऊ,
समय - 11:15 से 11:30 तक
आज की कहानी का शीर्षक- “पीपल का साया”
    
   मीना और उसके दोस्त खो-खो का मैच हार जाने के कारण उदास बैठे हैं| वे आपस में बात करते हैं कि अगर मोनू होता तो वे मैच नहीं हारते| वे सब मोनू के न आने का कारण पता करने के लिए उसके घर की तरफ जाते हैं| जब वे सब उसके घर के पास पहुंचते हैं तो वहां से अजीब-अजीब आवाजें आती हैं| तभी वे देखते हैं कि माँ हाथ में एक छडी लिए आती है और ‘झाड़ू बाबा, झाड़ू बाबा जल्दी भूत भगाओ’ कहते हुए जमीन पर छड़ी से एक लाइन खींचती हैं तथा बच्चों को वहां से जाने की ओर लाइन  न पार करने की हिदायत देती हैं|

दीपू- कुछ गड़बड़ लगती है|

    सभी बच्चे वहां से यह कहकर लौटते हैं कि कल जब मोनू स्कूल आएगा तो उसी से पूँछ लेगें|

     अगले दिन भी मोनू स्कूल नही आया| इसलिए मीना और उसके दोस्त फिर से उसके घर की तरफ गए| मोनू के घर के पिछवाड़े के बहुत ज्यादा धुआँ उठ रहा है| सब बच्चे उस तरफ बढ़ जाते हैं| बच्चे देखते हैं कि ढोंगी बाबा मंत्र बोलते हुए आग में पत्ते डाल रहा है और उसके पास खड़ा मोनू काँप रहा है| सभी बच्चे डर कर वापस जाने के लिए मुड़ते हैं....तभी उनके पीछे खडी मोनू की माँ ने उन्हें झिड़का, ‘...तुमने वो लकीर पार क्यों की?तुम्हें यहाँ आने से मना किया था न|अब जाओ सब जल्दी से एक-एक मुठ्ठी चावल लेकर आओ, वरना वो भूत तुम्हें भी पकड़ लेगा|
मीना- सब ठीक तो है न चाची|
मोनू की माँ- क्या बताऊँ मीना बेटी, परसों शाम को मोनू बुरी तरह काँपता हुआ घर आया.....शरीर में जैसे जान ही नहीं थी, चेहरा बिलकुल सफेद| जब मैंने पूँछा कि कहाँ से आ रहा है तो बोला कि माँ मैं पीपल के पेड़ के पास खेल रहा था| बस वहीँ पीपल के भूत ने उसको पकड़ लिया|
मीना- क्या पीपल के पेड़ पर सचमुच कोई भूत है चाची?
मोनू की माँ- और नहीं तो क्या?याद नहीं वो रमेश उसे भी तो इसी पीपल के भूत ने पकड़ा था| उसका भूत भी झाड़ू बाबा ने उतारा था|अब जाओ तुम लोग भी एक-एक मुठ्ठी चावल लाओ|
मीना- लेकिन चाची, हमारी बहिन जी ने बताया था कि भूत वगैरह बेकार की बातें हैं| 
“अच्छा तेरी बहिन जी को ज्यादा पता है और ये जो झाड़ू बाबा हवन कर रहे हैं, ये भी बेकार है? बोल!” मोनू की माँ ने डपटा|

     तभी मोनू कांपते-कांपते बेहोश होकर गिर जाता है| उसकी माँ रोंर लगती है| मिली डरते हुए घर से एक-एक मुठ्ठी चावल लाने की बात कहती है| लेकिन मीना कहती है, “ मोनू को इस समय चावल से ज्यादा नर्स बहिन जी की जरूरत है|’’
      बच्चे नर्स बहिन जी को लेकर मोनू के घर पहुंचते हैं|
उन सब को देखकर मोनू की माँ रोते हुए कहती है, ‘उन बच्चों ने सब गड़बड़ कर दी, अब मेरा मोनू कभी ठीक नहीं होगा| झाड़ू बाबा ने कहा था कि अगर कोई भी यहाँ बिना चावल के आया तो भूत फिर से मोनू को पकड़ लेगा|’
     नर्स बहिन जी मोनू को देखकर कहती हैं, ‘ये काम भूत का नहीं, मलेरिया के मच्छरों का है क्योंकि ये सारे लक्षण मलेरिया के हैं|’
नर्स बहिन जी मोनू की माँ समझाती हैं, ‘घर में कोई भी बीमार हो तो सबसे पहले डॉक्टर दीदी या एएनएम बहिन जी के पास जाना चाहिए, न कि झाड़ू बाबा जैसे लोगों के पास| आप जल्दी से मोनू का इलाज शुरु करवाएं क्योंकि मलेरिया जानलेवा भी हो सकता है|
    मोनू की माँ, बच्चों को उनकी आँखें खोलने के लिए शुक्रिया कहती है|
....और फिर एक महीने बाद दुबारा खो-खो का खेल होता है और मीना की टीम मोनू के कारण जीत जाती है|

मीना,मिठ्ठू की कविता-

   “ध्यान से सुन ले बात ये मान, सेहत की कीमत पहचान|
    खूब हिफाजत करना इसकी नीम हकीम खाते में जान ||”

आज का गाना-

लिख के रख लो बात ये मेरी रोज याद करना|
अपनी सेहत से समझौता कभी नहीं करना||-२
सुबह हो गयी खटिया छोडो,अब तुम फिर चद्दर न ओढो |
उठो फटाफट, बाहर जाके खेलो कूदो भागो दौड़ो|
बात हो सेहत की तो फिर न पीछे हटना|
बात हो सेहत की आँखें बंद नहीं करना|
अपनी सेहत ..................................
अच्छा खाना अच्छा पीना, सेहत सिखलाती है जीना|
असली-नकली को पहचानो, बोला मिठ्ठू बोली मीना|
नीम हकीम है जान का खतरा,हाँ इनसे डरना|
नीम हकीमों के चक्कर में कभी नहीं पड़ना|
अपनी सेहत....................................
सेहत अपनी दौलत,सेहत अपनी ताकत |
सेहत नहीं तो कुछ भी नहीं है,इसकी करो हिफाजत|
अपनी सेहत...................................|

आज का खेल- ‘कड़ियाँ जोड़ पहेली तोड़’

“चार पैर  होते  हैं इसके,
आड़े तिरछे बाल हैं इसके|
बैठना हो तो इसे लिटाओ,
नींद नही आये बिन इसके|”

आज की कहानी का सन्देश-

‘प्रदूषण और अशिक्षा, फैलाये बीमारी और अन्धकार|
नहीं होगा बोध जब इसका,तभी चमकेगा नीम-हकीम का व्यापार||’’

आदेश के बावजूद यूपी के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में टीचरों की नियुक्ति नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया बेसिक और माध्यमिक सचिवों को अवमानना नोटिस

आदेश के बावजूद यूपी के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में टीचरों की नियुक्ति नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया बेसिक और माध्यमिक सचिवों को अवमानना नोटिस

नई दिल्ली : यूपी में उच्च प्राथमिक लेवल में आर्ट सेक्शन में टीचर की नियुक्ति नहीं किए जाने के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के बेसिक एजुकेशन सेक्रेटरी और माध्यमिक शिक्षा परिषद के सेक्रेटरी को अवमानना नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य में आर्ट सेक्शन के 50 हजार टीचरों की कमी है और तीन साल से यूपी सरकार नियुक्ति नहीं कर रही। ऐसे में उक्त अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2012 को दिए आदेश में तमाम राज्यों से कहा था कि वो सभी सरकारी और सरकार की सहायता से चलने वाले स्कूल में पर्याप्त संख्या में टीचरों की नियुक्ति करें। इसके लिए छह महीने का वक्त दिया गया था। साथ ही, स्कूल में अन्य सुविधाएं जैसे टॉयलेट व ड्रिंकिंग वॉटर आदि की व्यवस्था करने को कहा था। याचिकाकर्ता का आरोप है की यूपी सरकार ने तीन साल बीतने के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया।

हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मनी लॉन्डरिंग केस में जेल में बंद शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक संजय मोहन की जमानत अर्जी खारिज कर दी : 2011 मे टीईटी परीक्षा के दौरान याची ने भ्रष्टाचार करते हुए चयन के लिए लोगों से रुपये लिये

हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मनी लॉन्डरिंग केस में जेल में बंद शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक संजय मोहन की जमानत अर्जी खारिज कर दी : 2011 मे टीईटी परीक्षा के दौरान याची ने भ्रष्टाचार करते हुए चयन के लिए लोगों से रुपये लिये

लखनऊ : हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मनी लॉन्डरिंग केस में जेल में बंद शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक संजय मोहन की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जस्टिस बच्चू लाल ने अपने आदेश में कहा कि प्रकरण में तथ्यों को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं है। संजय मोहन की ओर से जमानत अर्जी पेश कर कहा गया था कि उनके पास से जिन रुपयों की बरामदगी बताई जा रही है।

वह उन्होंने अपनी बेटी के इलाज के लिए बैंक से निकाली थी, वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि 2011 मे टीईटी परीक्षा के दौरान याची ने भ्रष्टाचार करते हुए चयन के लिए लोगों से रुपये लिये। इस मामले में कुल एक करोड़ तेरह लाख से अधिक रुपये बरामद किए गए थे।

फरवरी 2015 में सिद्धार्थ नगर में प्राइमरी शिक्षक के तौर पर मिली जॉइनिंग पर ऐसे ही प्रदेश के 11 महीने से सैलरी को भटक रहे प्रशिक्षु शिक्षक : 72 हजार प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती के तहत हुई थी नियुक्ति

फरवरी 2015 में सिद्धार्थ नगर में प्राइमरी शिक्षक के तौर पर मिली जॉइनिंग पर ऐसे ही प्रदेश के 11 महीने से सैलरी को भटक रहे प्रशिक्षु शिक्षक : 72 हजार प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती के तहत हुई थी नियुक्ति

लखनऊ : महानगर की पूजा को फरवरी 2015 में सिद्धार्थ नगर में प्राइमरी शिक्षक के तौर पर जॉइनिंग मिली। उन्होंने नौकरी जॉइन भी कर ली, लेकिन ग्यारह महीने तक नौकरी करने के बाद भी अब तक उन्हें सैलरी नहीं मिली। ऐसे 35 प्रशिक्षु हैं जिन्हें जॉइनिंग के बाद से सैलरी नहीं मिली है। इन अभ्यर्थियों की सैलरी यह कहकर रोकी गई थी कि इन्हें काउंसलिंग के बिना जॉइनिंग दी गई थी। जबकि अभ्यर्थियों का कहना था कि वो काउंसलिंग के जरिए ही आए हैं। सैलरी न मिलने से परेशान शिक्षकों ने गुरुवार को निशातगंज स्थित एससीईआरटी निदेशक सर्वेंद्र विक्रम को ज्ञापन दिया तो शुक्रवार को सचिव आशीष गोयल से मिलने गए लेकिन मुलाकात नहीं हुई। शिक्षकों का कहना है कि 11 माह से विभाग की जांच पूरी नहीं हो सकी है जिससे उनकी सैलरी अटकी हुई है। 

गोमतीनगर की शशिलता ने कहा कि अगर विभाग को हमें हटाना है तो हटा दे, जिससे दूसरे जनपद मे आवेदन कर सकें। हम सभी के नंबर 107 से 109 के बीच में है। जबकि अन्य जनपदों में 105 तक की मेरिट आ चुकी है। ऐसे में हम वहां आवेदन नहीं कर पा रहे क्योंकि हम यहां नियुक्त है। जहां नियुक्ति मिली हैं वहां सैलरी नहीं मिल रही। बेसिक सचिव आशीष गोयल से इस संबंध भी इस संबंध में दो बार मुलाकात हो चुकी है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

हमारे स्तर से सारी जांच और पत्रावली आगे भेजी जा चुकी है।अब यह जांच जिला चयन समिति के स्तर पर लंबित है। आगे के निर्णय वही लेगी।
-  सर्वेंद्र विक्रम,  निदेशक, एससीईआरटी,  लखनऊ

बेस्ट प्राइमरी स्कूलों को मिलेगा अवार्ड : पुरस्कार में मिलेगी एक लाख 20 हजार रुपए की धनराशि, तय करेगी चयन कमेटी

बेस्ट प्राइमरी स्कूलों को मिलेगा अवार्ड : पुरस्कार में मिलेगी एक लाख 20 हजार रुपए की धनराशि, तय करेगी चयन कमेटी

यहां क्लिक कर आदेश देखें - प्राथमिक विद्यालयो में प्रथमबार पुरस्कार योजना हो रहा प्रारम्भ, विद्यालयो में प्रतिस्पर्था और गुणवत्तापरक शिक्षा सम्बर्धन के लिए वर्ष 2015-16 के लिए विद्यालयों को चयन करेगी जनपदीय कमेटी के सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी ।

लखनऊ। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के उन शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है जो अपने विद्यालय को उत्कृष्ट बनाने में लगे हैं। ऐसे विद्यालयों को अब अवार्ड दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक उत्कृष्ट प्राथमिक विद्यालय को एक लाख 20 हजार रुपए के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक डीबी शर्मा ने निर्देश जारी कर दिए। मौजूदा समय में प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 1,59,400 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें एक लाख 30 हजार बच्चे कक्षा एक से पांच तथा करीब 49 लाख बच्चे छह से आठ तक के विद्यालय में पढ़ते हैं। सरकार की ओर से इन विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा से लेकर मिड-डे-मील, यूनीफार्म और किताबें भी फ्री दी जाती हैं। साथ ही शिक्षकों पर करोड़ों रुपए वेतन के भी खर्च होते हैं। बावजूद इसके परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा। ऐसे में इन विद्यालयों में पठन-पाठन एवं परिवेश में सुधार तथा प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न कराने के लिए पुरस्कार योजना शुरू की गई है। प्रत्येक जनपद में जिला चयन समिति की ओर से एक-एक प्राथमिक विद्यालय को पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कार की धनराशि एक लाख 20 हजार रुपए प्रति विद्यालय दी जाएगी।15 फरवरी तक देने होंगे स्कूलों के नाममानक के अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में संचालित प्राथमिक विद्यालयों में से 10 विद्यालयों को चिन्हित करेंगे और उसका स्थलीय निरीक्षण करेंगे। परीक्षण के बाद चिन्हित 10 में से एक विद्यालय के नाम की संस्तुति कर बीएसए को 15 फरवरी तक भेजेंगे। जनपदीय समिति फरवरी माह के अंत तक विद्यालय का निरीक्षण कर विवरण का सत्यापन करेंगे। उसके बाद फाइनल रूप से एक विद्यालय का चयन किय जाएगा। चयनित विद्यालय का नाम सात मार्च तक बेसिक शिक्षा निदेशालय को भेजना होगा।
राज्य सरकार ने शुरू की विद्यालय पुरस्कार योजना
विद्यालय पुरस्कार के लिए जनपद स्तर पर प्राथमिक विद्यालय का चयन कमेटी करेगी। इनमें डायट प्राचार्य अध्यक्ष, बीएसए सदस्य सचिव, जिलाधिकारी द्वारा नामित एक सदस्य शामिल होंगे।मार्च में मिलेगा सम्मानचयनित विद्यालय की एसएमसी के अध्यक्ष एवं विद्यालय के प्रधानाध्यापक को मार्च में राज्य स्तर पर समारोह आयोजित कर पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही विद्यालय के सभी शिक्षकों को जनपद स्तरीय समिति की ओर से प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा।

ये होंगे विद्यालय पुरस्कार के प्रमुख मानक:-

* शैक्षिक सत्र 2015-16 में विद्यालय में कम से कम 150 छात्र-छात्राएं नामांकित हों। तीन साल में छात्र नामांकन में कोई गिरावत न हुई हो।
* विद्यालय के सेवित क्षेत्र के 6 से 11 वय वर्ग के सभी बच्चे विद्यालय में नामांकित हों एवं इस आयु वर्ग में कोई बच्चा आउट ऑफ स्कूल न हो।
* बच्चों की विद्यालय में मासिक औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत से अधिक न हो।
* अवकश एवं अधिकृत अनुपस्थिति को छोड़ शेष दिनों में शिक्षकों की उपस्थिति शत-प्रतिशत हो।
* शिक्षकों द्वारा पाठ्यक्रम शिक्षण कार्य समय से पूरा किया गया हो और छात्र-छात्राओं को गृह कार्य दिया गया हो।
* सत्र 2015-16 में निरीक्षण में विद्यालय को उत्कृष्ट कोटि का पाया गया हो।
* विद्यालय के छात्र-छात्राओं का अधिगम स्तर उत्कृष्ट कोटि का हो।
* विद्यालय भवन की रंगाई-पुताई एवं रखरखाव संतोषजनक हो। परिसर साथ सुथरा हो।
* विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर अथवा प्लास्टिक की चटाई की सुविधा हो।
* स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो। शौचालय अलग-अलग हों और क्रियाशील हों।
* सभी बच्चों के पास फ्री किताबें, वर्कबुक एवं यूनीफार्म के दो सेट उपलब्ध हों।
* शिक्षकों द्वारा शैक्षणिक, प्रशिक्षण एवं अन्य गतिविधियों में प्रतिभाग किया गया हो।

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