Monday, November 30, 2015

परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के चयन में बी0एल0एड0 (BLED) उपाधि को अहर्ता के रूप में सम्मिलित किये जाने का प्रस्ताव उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में पत्र जारी : क्लिक कर देखें ।

परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के चयन में बी0एल0एड0 (BLED) उपाधि को अहर्ता के रूप में सम्मिलित किये जाने का प्रस्ताव उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में पत्र जारी : क्लिक कर देखें ।

दो घंटे में देने होंगे 150 प्रश्नों के जवाब : ओएमआर शीट के गोले को काला कर देना होगा उत्तर, सचिव परीक्षा नियामक की वेबसाइट पर पाठय़क्रम है उपलब्ध : सचिव

दो घंटे में देने होंगे 150 प्रश्नों के जवाब : ओएमआर शीट के गोले को काला कर देना होगा उत्तर, सचिव परीक्षा नियामक की वेबसाइट पर पाठय़क्रम है उपलब्ध : सचिव

इलाहाबाद (एसएनबी)।यूपी टीईटी-2015 की परीक्षा दो सत्रों में दो फरवरी को होने जा रही है। इस दौरान दो घण्टे में अभ्यर्थियों को 150 प्रश्नों का उत्तर देना होगा।यह प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे।ऐसे में अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट के गोलों को काला करना होगा।अभ्यर्थियों को इन गोलों को इस तरह से काला करना होगा जिससे कि ओएमआर शीट के नीचे लगी हुईकार्बन शीट पर भी गोले का निशान आ जाये।अभ्यर्थियों को उत्तर देने के लिए गोला पूरी तरह से काला करना होगा। आधा या कम गोला काला करने पर उत्तर नहीं माना जायेगा और अंक नहीं मिलेगा। इससे अभ्यर्थियों का नुकसान होगा।सबसे बड़ी बात यह है कि परीक्षा में मानइस मार्किग नहीं है।इससे अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी और उनको नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
 

टीईटी की प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में पांच विषयों से प्रश्न पूछे जायेंगे।इनमें गणित, बाल मनोविज्ञान, हिन्दी, संस्कृत-अंग्रेजी और उर्दू में से किसी एक विषय का उत्तर देना है जबकि पांचवां विषय पर्यावरण अध्ययन का है। अभ्यर्थियों को प्रश्नों का उत्तर दो घण्टे में देना होगा।इसी प्रकार से उच्च प्राथमिक टीईटी परीक्षा में बीएड धारक अभ्यर्थीशामिल होंगे। इनको परीक्षा में गणित, बाल मनोविज्ञान, हिन्दी भाषा, संस्कृत-अंग्रेजी और उर्दू एवं विज्ञान या गणित के प्रश्नों का उत्तर देना होगा।इन पांचों प्रश्न पत्रों में अभ्यर्थियों को पास होना होगा।सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी श्रीमती नीना श्रीवास्तव ने बताया कि टीईटी का परीक्षा पाठ्यक्रम वेबसाइटपर उपलब्ध है। अभ्यर्थी परीक्षा के लिए वेबसाइट से पाठ्क्रम डाउनलोडकर तैयारी कर सकते है। उन्होंने बताया कि परीक्षा दो सत्रो में दो फरवरी को होगी।इसकी तैयारियां शुरूहो गयी है। जहां तक परीक्षा केन्द्रों की बात है अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र आने के बाद तय किया जायेगा कि कितने जिलों में कितने परीक्षा केन्द्र बनाये जाये। टीईटी का सार्टिफिकेट पांच वर्ष के लिए मान्य है।इस दौरान बीटीसी, बीएड धारक टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते है।सचिव परीक्षा श्रीमती नीना श्रीवास्तव ने बताया कि एनटीटी सहित ऐसे लोग आवेदन नहीं कर सकते है जिन पर रोक लगी है।

मण्डल मुख्यालय वाले जिलों पर बनेंगे अधिक परीक्षा केन्द्र

इलाहाबाद।यूपीटीईटी की परीक्षा के लिए एक हजार से अधिक परीक्षा केन्द्र बनेंगे क्योंकि परीक्षार्थियों की संख्या 10 लाख से अधिक होने की संभावना है।वर्ष 2014 के टीईटी परीक्षा में करीब नौ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।उसमें से साढ़े सात लाख अभ्यर्थीपरीक्षा में शामिल हुए थे।इन परीक्षार्थियों के लिए प्रदेश के 75 जिलों में 600 परीक्षा केन्द्र बनाये गये थे। इस बार के टीईटी परीक्षा में 10 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है।ऐसे में परीक्षा केन्द्रों की संख्या एक हजार से अधिक होगी।इसकी तैयारियां शुरूकर दी गयी है।सबसे अधिक परीक्षा केन्द्र इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ, मुरादाबाद, बरेली, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, चित्रकूट सहित अन्य मण्डल मुख्यालय वाले जिलों में बनेंगे क्योंकि यहां परीक्षार्थियों की संख्या अधिक होने की संभावना है।उधर, शिक्षामित्रों के टीईटी परीक्षा में शामिल होने जा रहे है।इससे अभ्यर्थियों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी।

32 हजार आये आवेदन

टीईटी-2015 के आनलाइन आवेदन लिये जाने के तीसरे दिन रविवार की शाम तक 32 हजार अभ्यर्थियों ने आनलाइन आवेदन किया है।ई-चालान से आवेदन शुल्क 27 नवंबर से जमा होना शुरूहो गया है।अभ्यर्थीसचिव परीक्षा नियामक की वेबसाइटhttp://upbasiceduboard.gov.in/ पर आनलाइन पंजीकरण 16 दिसम्बर की शाम छह बजे तक करा सकते है।आवेदन शुल्क 17 दिसम्बर तक जमा होगा।अभ्यर्थी आनलाइन आवेदन 18 दिसम्बर की शाम छह बजे तक कर सकते है।आवेदन पत्रों में संशोधन 21 दिसम्बर से शुरूहोकर 24 दिसम्बर की शाम छह बजे तक होगा। परीक्षा दो फरवरी को दोनों पालियों में होगी।पहली पाली की परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर ढ़ाई बजे से शाम पांच बजे तक होगी।

72825 शिक्षक भर्ती की होगी जांच : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने तलब किया रिकॉर्ड

72825 शिक्षक भर्ती की होगी जांच : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने तलब किया रिकॉर्ड

आगरा : लंबे इंतजार और लड़ाई के बाद 72825 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन इसकी फिर से जांच होगी। प्रदेश में आगरा सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी सामने आए हैं, जिनके कट ऑफ से ज्यादा अंक हैं। इसके बाद भी उनका चयन नहीं हुआ है।

टीईटी पास 72,825 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरिट लिस्ट तैयार कर काउंसिलिंग हुई थी। इस पर अभ्यर्थियों ने उंगली उठाई है। आगरा के साढ़े तीन सौ से ज्यादा अभ्यर्थियों ने प्रत्यावेदन दिया है कि चयन के लिए जारी कटऑफ से ज्यादा उनके अंक थे। मगर इसके बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं हुई। इसमें सामान्य वर्ग में 70 फीसद और आरक्षित वर्ग में 60 फीसद से ज्यादा अंक वाले अभ्यर्थी शामिल हैं। नियुक्ति न होने पर ऐसे अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में सिविल याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका पर बेसिक शिक्षा सचिव से रिपोर्ट मांगी है। इसके तहत ही ऐसे अभ्यर्थियों से प्रत्यावेदन मांगे थे। आगरा में 100 पदों पर नियुक्ति होनी थी, लेकिन 350 से ज्यादा ने प्रत्यावेदन दिए हैं। सचिव ने बीएसए और डायट प्राचार्य को प्रत्यावेदन देने वालों का पूरा ब्योरा भी भेजा है। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभाग के हाथ पांव फूल गए हैं। बेसिक शिक्षा सचिव को तीन दिन में बीएसए और डायट प्राचार्य को नियुक्ति प्रक्रिया की पूरी रिपोर्ट देनी है। इसमें उन्हें बताना होगा कि कितने अभ्यर्थी काउंसिलिंग में शामिल नहीं हुए। कितने ऐसे थे, जो काउंसिलिंग में उपस्थित हुए लेकिन उनका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया। ऐसे कितने थे, जो काउंसिलिंग में आए, लेकिन चयन नहीं हुआ। कितने ऐसे थे जिनका चयन तो हुआ, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं लिए। 

चयन प्रक्रिया डायट ने पूरी की थी। उनके द्वारा दी गई अंतिम सूची पर हमने अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी। पूरा रिकॉर्ड उनके पास ही है, वो ही रिपोर्ट शासन को देंगे।
-धर्मेद्र सक्सेना, बीएसए।

वाइटनर का प्रयोग किया तो टीईटी से बाहर : राज्य शिक्षक पात्रता दो फरवरी,16 को प्रस्तावित,अभ्यर्थी परीक्षा कक्ष में नहीं ले जा सकेंगे कोई अतिरिक्त सामान

वाइटनर का प्रयोग किया तो टीईटी से बाहर : राज्य शिक्षक पात्रता दो फरवरी,16 को प्रस्तावित, अभ्यर्थी परीक्षा कक्ष में नहीं ले जा सकेंगे कोई अतिरिक्त सामान

इलाहाबाद: राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में वाइटनर का प्रयोग करने वाले अभ्यर्थियों की कापियां नहीं जंचेंगी। उन्हें परीक्षा से बाहर मान लिया जाएगा। 2011 में टीईटी में वाइटनर का प्रयोग करने वाले अभ्यर्थियों का मामला अदालत में जाने के बाद इस बार परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने पहले ही इस बारे में सचेत कर दिया है। इसके अलावा भी कई मार्गदर्शी सिद्धांत तय किए गए हैं। 

राज्य शिक्षक पात्रता दो फरवरी,16 को प्रस्तावित है। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है और लगभग पंद्रह लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए अभ्यर्थियों की गाइडलाइन तय कर दी गई है। किसी भी सवाल के उत्तर में परिवर्तन की गुंजाइश नहीं रहेगी। अभ्यर्थियों को सही जवाब पर टिक करने के लिए पहले सुनिश्चित होना होगा, अन्यथा उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वाइटनर का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि किसी अभ्यर्थी ने किया तो आप्टिकल स्कैनर उक्त कापी को खुद ही रिजेक्ट कर देगा। उत्तर पत्रक विशेष प्रकार का होगा जिसे आप्टिकल स्कैनर पर स्कैन किया जाएगा। टीईटी-2011 में हजारों अभ्यर्थियों ने वाइटनर का प्रयोग किया था और उनकी कापियां भी जांच ली गई थीं। इनमें कई सफल भी हुए थे और कुछ का चयन सहायक अध्यापक पदों पर किया भी जा चुका है। इसे अदालत में चुनौती दी गई है।

गाइडलाइन के अनुसार बुकलेट की भी पूरी जिम्मेदारी अभ्यर्थी की ही होगी। यदि कोई बुकलेट कम पाई गई तो माना जाएगा कि वह अभ्यर्थी अपने साथ ले गया है और उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। नकल पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए कक्ष में कई सामानों को ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। विशेष तौर पर इलेक्ट्रानिक डिवाइस। कैलकुलेटर, रूलर, इलेक्ट्रानिक घड़ी, मोबाइल फोन, पेजर यदि किसी भी अभ्यर्थी के पास पाया गया तो उसे परीक्षा कक्ष से बाहर कर दिया जाएगा। किसी भी सवाल का जवाब पेंसिल से देने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

सरकारी स्कूलों का निर्माण अगला सत्र शुरू होने से पहले पूरा करें, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश : कहा-समय रहते करें शिक्षकों की तैनाती

सरकारी स्कूलों का निर्माण अगला सत्र शुरू होने से पहले पूरा करें, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश : कहा-समय रहते करें शिक्षकों की तैनाती

लखनऊ । मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्य सचिव को निर्माणाधीन स्कूलों का काम अगला सत्र शुरू होने से पहले खत्म कर लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इन स्कूलों में शिक्षकों व कर्मचारियों की तैनाती, फर्नीचर और उपकरणों की व्यवस्था भी समय से कर लेने के लिए कहा है, ताकि अगले सत्र में इन स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो सके।

मुख्यमंत्री अखिलेश ने मुख्य सचिव आलोक निरंजन को निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्तर से इस संबंध में सभी विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करें, ताकि सभी तैयारियां समय से पूरी हो जाएं। साथ ही, शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के एजेंडे में भी इसे शामिल करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में आ रहे बदलावों के हिसाब से शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने से ही विद्यार्थी आगे बढ़ सकेंगे। भविष्य में देश और प्रदेश के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे। अच्छी शिक्षा के बगैर कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता। यही वजह है कि राज्य सरकार प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और तकनीकी शिक्षा पर ध्यान दे रही है। प्रदेश में शिक्षा का स्तर बेहतर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। हर स्तर के विद्यालयों की स्थापना के साथ नए विवि भी विकसित किए जा रहे हैं। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की जा रही है। राज्य सरकार की मंशा है कि गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ-साथ सभी को पढ़ाई का अवसर मिले।

आठवीं तक फेल न करने की नीति में बदलाव पर कांग्रेसी राज्यों में मतभेद : उत्तराखंड,हिमाचल प्रदेश और मिजोरम नीति को बदलने केपक्ष में, कर्नाटक ने प्रस्ताव को ठुकराया

आठवीं तक फेल न करने की नीति में बदलाव पर कांग्रेसी राज्यों में मतभेद : उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम नीति को बदलने केपक्ष में, कर्नाटक ने प्रस्ताव को ठुकराया

आठवीं तक फेल न करने की नीति में बदलाव पर कांग्रेसी राज्यों में मतभेद

 कर्नाटक ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रस्ताव को ठुकराया

उत्तराखंडहिमाचल प्रदेश और मिजोरम नीति को बदलने केपक्ष में

नई दिल्ली। कक्षा एक से आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति को बदलने के मुद्दे पर कांग्रेस शासित राज्यों की अलग-अलग राय सामने आई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अब तक 14 राज्यों ने अपनी राय पेश कर दी है। इनमें से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और मिजोरम ने कक्षा एक से आठवीं तक परीक्षा नहीं होने की नीति को खामियों भरा बताते हुए इसे बदलने की मांग मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की है।

वहीं, कांग्रेस के लिए सबसे प्रमुख राज्य कर्नाटक ने इस नीति को हटाने के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रस्ताव का विरोध किया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय को बिहार, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, यूपी, उत्तराखंड, पुड्डुचेरी, दिल्ली और कर्नाटक ने कक्षा एक से आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति के मुद्दे पर अपनी राय भेज दी है। इन राज्यों में से सिर्फ कर्नाटक ही अकेला राज्य है, जिसने इस नीति को बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया है। कर्नाटक ने तर्क दिया है कि इस नीति से पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है, क्योंकि पहले बच्चे फेल होने की स्थिति में निराश होकर शिक्षा छोड़ देते थे।

नो डिटेंशन पॉलिसी यूपीए सरकार के समय लागू हुई थी। इस नीति को लागू करने में पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अहम भूमिका थी। यह नीति शुरू से ही विवादों में रही। यूपीए सरकार के समय कांग्रेस शासित राज्य चुप रहे। लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से बुलाई गई केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों ने भी कहा कि नो डिटेंशन पॉलिसी से बच्चों में पढ़ाई का स्तर गिर रहा है और परीक्षा के नतीजे भी खराब आ रहे हैं। केरल भी कर्नाटक की राह पर चलकर नो डिटेंशन पॉलिसी को जारी रखने की वकालत कर सकता है।

टीईटी (TET) में परखा जाएगा अब बाल मनोविज्ञान : UPTET 2015 की तैयारियां शुरू, दस लाख से ज्यादा के शामिल होने की उम्मीद

टीईटी (TET) में परखा जाएगा अब बाल मनोविज्ञान : UPTET 2015 की तैयारियां शुरू, दस लाख से ज्यादा के शामिल होने की उम्मीद

इलाहाबाद । परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश की ओर से दो फरवरी को प्रस्तावित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी)2015 की तैयारी शुरू हो गई है। रजिस्ट्रार परीक्षा नियामक प्राधिकारी नवल किशोर ने बताया कि प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक टीईटी अलग-अलग होगी।

प्राथमिक टीईटी में गणित, बाल मनोविज्ञान, हिंदी भाषा, पर्यावरण अध्ययन, अंग्रेजी-संस्कृत-उर्दू और उच्च प्राथमिक टीईटी में पर्यावरण अध्ययन की जगह विज्ञान की परीक्षा होगी।

रजिस्ट्रार परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने बताया कि 2014 की टीईटी में नौ लाख अभ्यर्थी पंजीकृत थे, परीक्षा में 7.50 लाख शामिल हुए थे। 2014 की परीक्षा में प्रदेश भर में 600 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस बार उम्मीद है कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में काम कर रहे सभी शिक्षामित्र भी टीईटी में शामिल होंगे, ऐसे में उम्मीद है कि 2015 की टीईटी में परीक्षार्थियों की संख्या 10 लाख पार कर जाएगी। इसलिए परीक्षा नियामक की ओर से प्रदेश भर में एक हजार परीक्षा केंद्र बनाए जाने की तैयारी है। प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालयों में सर्वाधिक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।

Sunday, November 29, 2015

वित्तीय वर्ष 2015-16 में नान बी0पी0एल0 छात्रों को नि:शुल्क यूनीफॉर्म उपलब्ध कराये जाने के हेतु धनराशि जारी : क्लिक कर आदेश देखें ।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में नान बी0पी0एल0 छात्रों को नि:शुल्क यूनीफॉर्म उपलब्ध कराये जाने के हेतु धनराशि जारी : क्लिक कर आदेश देखें ।


      आभार/साभार : news.primarykamaster.com.com

सरकारी स्कूलों में सिर्फ लगती रही हाजिरी : सरकारी स्कूलों में नहीं हो सकी पाठ्यक्रम के अनुरूप पढ़ाई, शिक्षक चुनाव में व्यस्त, पढ़ाई ठप

सरकारी स्कूलों में सिर्फ लगती रही हाजिरी : सरकारी स्कूलों में नहीं हो सकी पाठ्यक्रम के अनुरूप पढ़ाई, शिक्षक चुनाव में व्यस्त, पढ़ाई ठप

इलाहाबाद : अमूमन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियां पठन-पाठन को बेहतर बनाने के लिए होती हैं, लेकिन इस साल नियुक्तियों के चलते स्कूलों में पढ़ाई की गाड़ी पटरी से उतर गई। शिक्षामित्र व शिक्षक नौकरी बचाने और नियमित करने के लिए आंदोलन की राह पकड़े रहे और स्कूलों में छात्र-छात्रओं की सिर्फ हाजिरी लगती रही। पाठ्यक्रम के अनुरूप पढ़ाई नहीं हो सकी और अब वार्षिक परीक्षाएं भी आ गई हैं।

राहत की बात यह है कि नियमों के कारण परीक्षार्थियों के फेल होने का खतरा नहीं है। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में इस वर्ष भले ही नया शैक्षिक सत्र अप्रैल से शुरू हुआ, लेकिन नियुक्तियों के चलते यहां पढ़ाई ठप हो गई है। स्कूलों में पहले नामांकन व प्रभातफेरियां निकलती रही। जब शैक्षिक गतिविधियां तेज हुईं उसी समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न केवल शिक्षामित्रों का समायोजन रद कर दिया, बल्कि एक लाख सत्तर हजार से अधिक शिक्षामित्रों की नियुक्ति अवैध ठहरा दी। शिक्षामित्र नौकरी बचाने के लिए आंदोलन की राह पर बढ़ चले। कई दिनों तक विद्यालयों में ताला पड़ा रहा और बाद में कार्य बहिष्कार जारी रहा। 

विद्यालयों में शिक्षामित्र अपनी मर्जी के अनुरूप जा रहे हैं। उनकी उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर भी ऊहापोह है। इस समय पंचायत चुनाव से फिर पढ़ाई प्रभावित है। कई स्कूलों में तो शिक्षकों की कमी से तालाबंदी की नौबत है। ऐसे में पाठ्यक्रम पूरा होने चाहिए परीक्षा पास करने भर की भी पढ़ाई नहीं हो पाई है। 

√ नियुक्तियों के चक्कर में हुआ पढ़ाई का बंटाधार

इस समय माध्यमिक स्कूलों में भी पढ़ाई ठप है। अधिकांश शिक्षक पंचायत चुनाव कराने में व्यस्त हैं और जो बचे हैं वह स्कूल संचालन भर में योगदान दे रहे हैं। साथ ही यूपी बोर्ड की परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे हैं। प्रायोगिक परीक्षाएं तो अगले महीने ही शुरू हो रही हैं जो मंडलवार अगले माह भी चलेंगी।

शिक्षक बनने की चाहत रखने वालों के लिए खुशखबरी : टीईटी का सर्टिफिकेट लाइफ टाइम के लिए होगा वैध

रायपुर। शिक्षक बनने की चाहत रखने वालों के लिए खुशखबरी है। अब नेट, सेट परीक्षा की तरह ही टीईटी (अध्यापक पात्रता परीक्षा) का सर्टिफिकेट लाइफ टाइम के लिए वैध होगा। शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों को बार-बार टीईटी देने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में जल्द ही सीजीटीईटी के लिए टीईटी सेल गठित होगा। परीक्षा के बाद 6 सप्ताह यानी 45 दिन के भीतर अब परिणाम घोषित करने होंगे। रिजल्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। सीटीईटी की तरह ही सीजीटीईटी का स्टैंडर्ड होगा। जिस तरह से अभी नेट की तरह सीजी सेट परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।

 अभी वैधता सिर्फ 7 साल

वर्तमान में टीईटी का सर्टिफिकेट सिर्फ सात साल के लिए वैध माना जाता है। यानी जिन अभ्यर्थियों ने 2010 में टीईटी पास किया है, उनका सर्टिफिकेट 2017 तक वैध होगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने पुराने नियम बदलने के साथ-साथ नए नियमों के लिए गाइड लाइन तैयार की है। इसकी अधिसूचना जल्द ही राज्यों को जारी कर दी जाएगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) ने एनसीटीई के नए एजेंडे पर तैयारी शुरू कर दी है। पिछले महीने टीईटी की नई गाइड लाइन को लेकर हुई बैठक में चर्चा के बाद अब एससीईआरटी ने भी एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि एनसीटीई की जारी अधिसूचना के मुताबिक देश की स्कूली शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को अब पात्रता के लिए टीईटी देनी होगी। शिक्षा के अधिकार के अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 के अंतर्गत कक्षा 1 से लेकर 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की नियुक्ति से पहले निर्धारित योग्यता का परीक्षण किया जाएगा, जिसमें यह टेस्ट शामिल है।

अब हाई एवं हायर सेकंडरी के लिए भी होगी टीईटी

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत एनसीटीई ने अभी तक सिर्फ पहली से आठवीं तक टीईटी लेने का निर्णय लिया था, लेकिन अब हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में भी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी आयोजित की जाएगी। टीईटी पास करने के बाद यदि कोई शिक्षक दो सब्जेक्ट पढ़ा सकता है तो वह सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, कॉमर्स आदि किसी भी सब्जेक्ट को चूज कर सकेगा।

कॉलेजों को रखना होगा रिकॉर्ड

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की गाइड लाइन के मुताबिक अब सभी कॉलेजों को टीईटी पास अपने छात्रों का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके लिए भी गाइड लाइन तय कर दी गई है। अब सभी शिक्षकों को टीईटी पास करना जरूरी होगा। छत्तीसगढ़ में जो टीईटी सेल गठित होगा उसे नियमित रूप से एनसीटीई के साथ कम्यूनिकेशन रखना होगा। साथ ही हाई एवं हायर सेकंडरी कक्षाओं में शिक्षकों की भर्ती के लिए अभी जो नियम बने हैं उनमें संशोधन कर टीईटी पास होने की अनिवार्यता रखनी होगी। निजी स्कूलों में भी टीईटी पास शिक्षकों को ही पढ़ाने के लिए काबिल माना जाएगा।

अभी ये है व्यवस्था

पहली से पांचवीं स्तर की टीईटी में दसवीं कक्षा के स्तर के सवालछठवीं से आठवीं तक 12वीं स्तर के पूछे जा रहे हैं सवालअब तक हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों के लिए टीईटी नहीं थीअभी सभी सब्जेक्ट में 60 फीसदी अंक लाना जरूरी हैटीईटी में 150 सवालों को हल करने के लिए 90 मिनट का समयटीईटी के सर्टिफिकेट की वैधता 7 साल

 

अब ये होगी व्यवस्था

अब पांचवीं स्तर की टीईटी में सिर्फ आठवीं स्तर के सवाल होंगेअब छठवीं से आठवीं स्तर की परीक्षा में सिर्फ दसवीं स्तर के सवाल होंगेअब हाई एवं हायर सेकंडरी कक्षा के शिक्षकों को भी टीईटी पास करना हैअब हर सब्जेक्ट में 33 फीसदी अंक के साथ 60 फीसदी कुल अंक लाना हैटीईटी परीक्षा के लिए 150 सवालों को अब 150 मिनट में हल करेंगेटीईटी पास करने के बाद अब जिंदगी भर इस सर्टिफिकेट की वैधता होगी

अब तक दो बार हो चुकी है राज्य में परीक्षा

शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 2 के तहत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। यह परीक्षा एनसीटीई के निर्देशानुसार संबंधित छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जाती है। इसके लिए छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल को नोडल एजेंसी बनाया गया है। पिछले सालों में अब तक दो बार परीक्षा हो चुकी है।

           खबर साभार : नईदुनिया

शिक्षामित्रों के मामले में लापरवाही डिंपल वर्मा को महंगी पड़ी : सूत्रों का कहना है, सरकार की अपेक्षा थी कि एसएलपी दायर करवाने को डिंपल ज्यादा समय दिल्ली में रहेंगी, लेकिन बीच-बीच में वे लखनऊ चली आईं।

शिक्षामित्रों के मामले में लापरवाही डिंपल वर्मा को महंगी पड़ी : सूत्रों का कहना है, सरकार की अपेक्षा थी कि एसएलपी दायर करवाने को डिंपल ज्यादा समय दिल्ली में रहेंगी, लेकिन बीच-बीच में वे लखनऊ चली आईं।

लखनऊ (ब्यूरो)। वरिष्ठ आईएएस अफसर डिंपल वर्मा को शिक्षामित्रों के समायोजन से जुड़े मामले में लापरवाही महंगी पड़ गई। उन्हें सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने में दो महीने से ज्यादा वक्त लग गया, जिसे सरकार ने खराब परफॉर्मेंस माना। हालांकि, वर्मा को हटाए जाने के संकेत शायद पहले ही मिल गए थे, इसलिए दो-तीन दिन से वे सचिवालय स्थित अपने दफ्तर में भी थोड़ी देर ही बैठ रही थीं।

हाईकोर्ट ने गत 12 सितंबर को शिक्षामित्रों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनका समायोजन रद्द कर दिया था। अदालत का कहना था कि इनके मामले में राज्य सरकार ने उन नियमों को शिथिल कर दिया था, जिन पर कोई निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के ही पास है। हालांकि, जब यह फैसला आया, उस वक्त प्राथमिक शिक्षा विभाग की कमान हीरालाल गुप्ता के पास थी। उनके रिटायर होने के बाद डिंपल वर्मा को प्रमुख सचिव (प्राथमिक शिक्षा) बनाया गया।

राज्य सरकार को उम्मीद थी कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने में वे तेजी दिखाएंगी, लेकिन शिक्षामित्रों के एक समूह और प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने राज्य सरकार से पहले सुप्रीम कोर्ट में जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए। सूत्रों का कहना है, सरकार की अपेक्षा थी कि एसएलपी दायर करवाने को डिंपल ज्यादा समय दिल्ली में रहेंगी, लेकिन बीच-बीच में वे लखनऊ चली आईं। इन सब वजहों से भी एसएलपी दायर होने में देरी हुई। अंतत: इसका नतीजा उन्हें हटाने के रूप में सामने आया।

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