Wednesday, September 30, 2015

हाईकोर्ट के आदेश के बाद से ही सदमे में थे शिक्षामित्र रजनेश : शिकोहाबाद विधायक ओमप्रकाश वर्मा, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. दिलीप यादव, विधायक प्रतिनिधि गौरव यादव ने घर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद से ही सदमे में थे शिक्षामित्र रजनेश : शिकोहाबाद विधायक ओमप्रकाश वर्मा, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. दिलीप यादव, विधायक प्रतिनिधि गौरव यादव ने घर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी।

फीरोजाबाद : शिकोहाबाद के गांव नगला आमरी निवासी शिक्षामित्र रजनेश कुमार यादव का मंगलवार को निधन हो गया। परिजनों की माने तो जिस दिन से समायोजित शिक्षामित्रों को हटाने संबंधी आदेश आया था। उसी दिन से रजनेश सदमे में चल रहे थे।

42 वर्षीय रजनेश कुमार यादव पुत्र डोरीलाल यादव गांव के ही प्राथमिक स्कूल में शिक्षामित्र के रूप में तैनात थे। पत्नी सुषमा लता देवी का कहना है जिस दिन से न्यायालय का आदेश आया था, उसी दिन से वह सदमे में थे तथा उनकी तबियत खराब हो गई। बीते बीस दिन से उनका स्वास्थ्य निरंतर बिगड़ रहा था। मंगलवार को तबियत ज्यादा खराब होने पर उन्हें आगरा ले जाते वक्त मार्ग में निधन हो गया। रजनेश के एक बेटी एवं दो बेटे हैं। परिजनों ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही अंतिम संस्कार कर दिया। शिकोहाबाद विधायक ओमप्रकाश वर्मा, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. दिलीप यादव, विधायक प्रतिनिधि गौरव यादव ने घर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी।

        साभार : दैनिकजागरण

श्रीमती मेनका संजय गांधी ने 1.70 लाख शिक्षामित्रों के प्रकरण को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी को लिखा पत्र : क्लिक कर पत्र की प्रति देखें |

श्रीमती मेनका संजय गांधी ने 1.70 लाख शिक्षामित्रों के प्रकरण को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी को लिखा पत्र : क्लिक कर पत्र की प्रति देखें |

      ~द्वारा कौशल किशोर सिंह

बदला स्कूलों का समय, धूप देख असहज छात्र : शिक्षा विभाग की नियमावली के तहत अक्टूबर माह से स्कूलों के समय में परिवर्तन होता है ; विद्यालय के टाइमटेबल भी देखें |

बदला स्कूलों का समय, धूप देख असहज छात्र : शिक्षा विभाग की नियमावली के तहत अक्टूबर माह से स्कूलों के समय में परिवर्तन होता है।

विद्यालय पर शिक्षको की उपस्थिति 8.50 प्रातः

9.00-9.10 प्रार्थना एवम् गतिविधिया
9.10 -9.50 प्रथम वादन
9.50-10.30 द्वितीय वादन
10.30-11.10 तृतीय वादन
11.10-11.50 चतुर्थ वादन
11.50-12.20 मध्यावकाश
12.20-13.00 पंचम वादन
13.00-13.40 षष्टम वादन
13.40-14.20 सप्तम वादन
14.20-15.00 अष्टम वादन

फीरोजाबाद : गुरुवार से स्कूलों का समय बदल रहा है तो ¨चता शिक्षकों से लेकर छात्रों के चेहरों पर भी नजर आ रही है। वजह है मौसम का मिजाज। गर्मी का असर अभी कम नहीं हुआ है। दोपहर में घरों में पंखे में बैठने पर भी उसम चैन नहीं लेने देती है, ऐसे में दोपहर 12 बजे के बाद स्कूलों में बगैर पंखा कैसे कटेगा? परिषद के कई स्कूलों में पंखे नहीं हैं तो माध्यमिक के स्कूलों का भी हाल बेहाल है।

शिक्षा विभाग की नियमावली के तहत अक्टूबर माह से स्कूलों के समय में परिवर्तन होता है। परिषदीय के साथ मान्यता प्राप्त स्कूलों का वक्त सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक होता है तो माध्यमिक स्कूलों का संचालन सुबह 8 बजकर 40 मिनट से दोपहर तीन बजे तक संचालित करने का निर्देश है। सबसे ज्यादा ¨चता परिषदीय के उन शिक्षकों के चेहरों पर है, जिनके स्कूलों में पंखे तक नहीं हैं। अभी तो दोपहर 12 बजे तक का वक्त जैसे-तैसे कट जाता था, लेकिन अब दोपहर 12 बजे के बाद जब सूर्यदेव सिर पर होते हैं, ऐसी स्थिति में वक्त काटना मुश्किल होगा।

ट्यूशन के खेल में माध्यमिक स्कूलों में नहीं बदला है वक्त

एक अक्टूबर से हर वर्ष टाइम बदलता है, लेकिन माध्यमिक स्कूलों में अभी तक समय परिवर्तन नहीं किया गया है। इसके पीछे एक वजह ट्यूशन का खेल भी है। माध्यमिक स्कूलों के कई शिक्षक ट्यूशन पढ़ाते हैं तो इनकी को¨चग में वित्तविहीन स्कूलों के छात्र भी आते हैं। वित्तविहीन स्कूलों में अभी टाइम नहीं बदला है, ऐसे में इन शिक्षकों के द्वारा भी वक्त परिवर्तन का विरोध स्कूल में अंदरखाने किया जा रहा है।

मान्यता प्राप्त स्कूल भी खुलेंगे नौ बजे

'बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, अशासकीय मान्यता प्राप्त स्कूल एक अक्टूबर से सुबह नौ बजे खुलेंगे और छुंट्टी दोपहर तीन बजे होगा। स्कूल निर्धारित संशोधित समय सारिणी के अनुरूप ही स्कूलों का संचालन करें।'
-बालमुकुंद प्रसाद जिला बेसिक शिक्षाधिकारी
फीरोजाबाद


मार्कसीट फर्जीवाड़े की जांच तेज : अनुदेशक भर्ती, बीएड व बीपीएड और स्नातक की 1185 मार्कसीट अब तक मिले हैं फर्जी

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कुर्सी को लेकर दो खण्डशिक्षाधिकारी आपस में भिड़े : एक खण्डशिक्षाधिकारी ने पुलिस थाने में दर्ज कराया मामला

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प्राइमरी स्कूल में अनुपस्थित विद्यार्थी ज्यादा : बेसिक शिक्षा विभाग ढंग से करे जांच तो 18 फिसदी से अधिक होगी संख्या

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लेने पड़े 13 गरीब बच्चों के दाखिले : सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद लगा सीएमएस झटका

लेने पड़े 13 गरीब बच्चों के दाखिले : सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद लगा सीएमएस झटका

Hon. Supreme court of India ordered City Montessori School, Gomti nagar, Lucknow to take admission of 13 student according to RTE Act 2009.

ITEM NO.41+62                           COURT NO.13                SECTION XI&X

                               S U P R E M E C O U R T O F      I N D I A
                                       RECORD OF PROCEEDINGS

     Petition(s) for Special Leave to Appeal (C)               No(s).   27341/2015

     (Arising out of impugned final judgment and order dated 10/09/2015
     in SA No. 333/2015 passed by the High Court Of Judicature at
     Allahabad, Lucknow Bench)

     CITY MONTESSORI SCHOOL                                            Petitioner(s)

                                                 VERSUS

     STATE OF U.P. & ORS.                                              Respondent(s)

     (with appln. (s) for exemption from filing O.T. and interim relief)
     With
     WP(C) No. 700/2015
     (With Appln. For exemption from filing OT and Stay and Office
     Report)

     Date : 28/09/2015 These                 petitions were called on for hearing
     today.

     CORAM :             HON'BLE MR. JUSTICE A.K. SIKRI
                         HON'BLE MR. JUSTICE ROHINTON FALI NARIMAN

     For Petitioner(s)             Mr.   Shanti Bhushan, Sr. Adv.
                                   Mr.   Kartik Seth, Adv.
                                   Mr.   Manish Vaish, Adv.
                                   Mr.   Srinath Agarwal, Adv.
                                   Mr.   R. P. Gupta,Adv.

                                   Mr.   Gopal Subramanyam, Sr. Adv.
                                   Mr.   K.V. Vishwanathan, Sr. Adv.
                                   Mr.   Manish Vaish, Adv.
                                   Ms.   Mehul Milind Gupta, Adv.
                                   Mr.   R. P. Gupta,Adv.

     For Respondent(s)

Signature Not Verified

Digitally signed by
ASHWANI KUMAR
Date: 2015.09.29
                          UPON hearing the counsel the Court made the following
                                             O R D E R
14:41:50 IST
Reason:

      Special Leave Petition (C) No(s). 27341/2015
                                         2

    Issue notice,      returnable within            four weeks    on the      Special

Leave Petition as well as on stay application.

    It is argued by Mr. Shanti Bhushan, learned senior counsel

appearing for the petitioner that 13 students, in respect of whom

directions are given to the petitioner school to admit them, are

not living in the 'neighbourhood'. He further submits that there

are various schools in the neighbourhood and vacancies in those

schools are also available. He makes a categoric statement that

those schools are ready to admit these students. His plea is that

it would be better in the interest of these students to seek

admission in those schools rather than the petitioner school.

    Having   regard    to   the   fact       that    the    Academic    Session    has

already been started, we direct the                 petitioner school to admit

these students forthwith.         After notice to the respondents and

verifying the position as explained by Mr. Shanti Bushan, if it

becomes necessary, directions can always be given to shift those

students to other schools.

WP(C) No. 700/2015

    Issue    notice,   returnable    within          four    weeks     on   the   Writ

Petition as well as on stay application.

         (Ashwani Thakur)                                        (Renu Diwan)
          COURT MASTER                                           COURT MASTER

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री दिनेश चन्द्र शर्मा ने कहा शिक्षकों की लम्बित समस्याओं के लिए होगा आन्दोलन : पेंशन व्यवस्था, मृतक आश्रितों की नौकरी सहित सभी समस्या होंगे शामिल

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री दिनेश चन्द्र शर्मा ने कहा शिक्षकों की लम्बित समस्याओं के लिए होगा आन्दोलन : पेंशन व्यवस्था, मृतक आश्रितों की नौकरी सहित सभी समस्या होंगे शामिल

सरकारी स्कूल सम्बन्धी हाईकोर्ट का आदेश मानेगी सरकार : बेसिक शिक्षा मंत्री ने सांसदों, विधायकों, नगरीय निकायों व पंचायत प्रतिनिधियों को लिखा पत्र

सरकारी स्कूल सम्बन्धी आदेश मानेगी सरकार : बेसिक शिक्षा मंत्री ने सांसदों, विधायकों, नगरीय निकायों व पंचायत प्रतिनिधियों को लिखा पत्र

√नौकरशाहों, जनप्रतिनिधियों को अपने बच्चों को परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने का मामला

√बेसिक शिक्षा मंत्री ने सांसदों, विधायकों, नगरीय निकायों व पंचायत प्रतिनिधियों को लिखा पत्र

लखनऊ : नौकरशाहों, जनप्रतिनिधियों, न्यायापालिका और सरकारी खजाने से वेतन व लाभ पाने वाले लोगों को अपने बच्चों को परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने के हाई कोर्ट के आदेश का राज्य सरकार पूरी तरह अनुपालन करेगी। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने इस सिलसिले में सभी सांसदों, विधायकों, राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्षों व महासचिवों, स्थानीय नगरीय निकायों व पंचायतों के प्रतिनिधियों, आइएएस, आइपीएस, पीसीएस, पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्षों व सचिवों, राज्य कर्मचारियों के संगठनों, सेंट्रल व स्टेट बार एसोसिएशन को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए सहयोग, समर्थन और सुझाव मांगा है। इस तथ्य को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए कि शासन-प्रशासन में बैठे लोक सेवकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के सभी वर्गों के बच्चे परिषदीय स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजे जाएं।

   खबर साभार : दैनिकजागरण

शिक्षामित्रों और TET बेरोजगारों में बढ़ी रार, आंदोलन की तैयारी : प्रशिक्षु शिक्षक भी फंसे टीईटी पास बेरोजगारों ने संभाला मोर्चा शिक्षामित्र 5 से तो टीईटी बेरोजगार 2 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर करेंगे प्रदर्शन

शिक्षामित्रों और TET बेरोजगारों में बढ़ी रार, आंदोलन की तैयारी : प्रशिक्षु शिक्षक भी फंसे टीईटी पास बेरोजगारों ने संभाला मोर्चा शिक्षामित्र 5 से तो टीईटी बेरोजगार 2 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर करेंगे प्रदर्शन

लखनऊ : शिक्षामित्रों और टीईटी पास बेरोजगारों के बीच रार बढ़ती ही जा रही है। एक तरफ शिक्षामित्र केंद्र पर दबाव बनाने के लिए दिल्ली में जंतर-मंतर पांच से सात अक्टूबर तक प्रदर्शन करने की तैयारी में है। वहीं टीईटी पास बेरोजगार शिक्षामित्रों से पहले ही दो से चार अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने ये तय करना मुश्किल होगा कि किस गुट की मांगें मानी जाएं।
प्रदेश सरकार ने 1.72 लाख शिक्षामित्रों को शिक्षक बना दिया था। हाई कोर्ट ने इसे गलत बताते हुए नियुक्तियां रद करने का आदेश दिया है। आदेश के बाद शिक्षामित्रों ने प्रदेश भर में जबरदस्त आंदोलन किया। प्रदेश सरकार भी उनके साथ खड़ी है। इसके अलावा कई केंद्रीय नेता भी उनके पक्ष में हैं। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक उनके लिए रास्ता निकालने का आश्वासन दे चुके हैं।
उधर टीईटी पास करने वालों की प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती भी सरकार ने इस दौरान की थी। कुल 72 हजार में से लगभग 59 हजार को नौकरी मिल चुकी है। छह महीने की जगह उनके प्रशिक्षण को आठ महीने हो गए हैं। उसके बावजूद अभी उन्हें नई तैनाती नहीं मिली है। वेतन भी अभी नहीं दिया जा रहा और प्रशिक्षण अवधि का मानदेय भी नहीं मिल रहा। सूत्रों का कहना है गुटों में बंटे शिक्षकों के बीच सरकार तय नहीं कर पा रही कि क्या करे/ इसकी वजह है कि अभी शिक्षामित्रों और प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के बाद वरिष्ठता का भी झगड़ा फंसेगा।
संख्या बल के आधार पर दोनों केंद्र पर दबाव बनाने में जुटे  हैं। इसे देखते हुए टीईटी पास बेरोजगार भी संख्या बल दिखाकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने में जुट गए हैं। उन्हें आशंका है कि हाई कोर्ट का आदेश तो उनके पक्ष में है लेकिन कहीं केंद्र सरकार ने टीईटी में छूट दे दी तो शिक्षामित्रों की राह साफ हो जाएगी।

एनसीटीई अगर कोर्ट में दूसरा हलफनामा दे देगी तो कोर्ट को भी अपना फैसला बदलना पड़ सकता है। टीईटी संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु राणा के अनुसार चार साल में टीईटी पास करने वाले भी चार लाख हैं। वे पिछले वर्षों में टीईटी पास करने वालों को एक जुट कर रहे हैं।

            साभार : एनबीटी

75 जिलों का विकल्प, 10 दिनों में तीन काउंसलिंग फिर भी बीटीसी सीटें खाली : सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर 21 सितंबर को एडमिशन बंद करने के आदेश दे दिए गए

75 जिलों का विकल्प, 10 दिनों में तीन काउंसलिंग फिर भी बीटीसी सीटें खाली : सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर 21 सितंबर को एडमिशन बंद करने के आदेश दे दिए गए

लखनऊ : कुल 75 जिलों का विकल्प, 10 दिनों में तीन काउंसलिंग फिर भी बीटीसी सीटें खाली। दरअसल खाली सीटों की सूचना देने के लिए कोई केंद्रीय व्यवस्था न होने के चलते ज्यादातर निजी कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए तरसते रहे। ऐसा तब है जब बीटीसी में सीटों के मुकाबले 50 गुना आवेदक बुलाए गए थे। आवेदकों को पता ही नहीं चल पाया कि किस जिले में कितनी सीटें खाली हैं। उसके बाद अचानक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर 21 सितंबर को एडमिशन बंद करने के आदेश दे दिए गए। अब छात्र और कॉलेज दोनों परेशान हैं। इससे नाराज कॉलेज प्रबंधक अब फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि 22 से नया सत्र शुरू कर दिया जाए। ऐसे में 21 तक ही दाखिले हो सकते थे। इसमें हम अपनी ओर से कोई निर्णय नहीं ले सकते। 
~ नीना श्रीवास्तव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी, इलाहाबाद

खराब काउंसलिंग से सत्र लेट हुआ। अब अव्यवस्थित ढंग से काउंसलिंग कराई और दाखिले बंद कर दिए। हम इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे और खाली सीटों पर सीधे दाखिले की मांग करेंगे।
~  विनय त्रिवेदी, अध्यक्ष स्ववित्तपोषित महाविद्यालय असोसिएशन

कॉलेज प्रबंधकों का कहना है कि यह दो साल की बीटीसी का आखिरी सत्र है। ऐसे में ज्यादातर लोग दाखिला लेना चाहते हैं और उसके लिए मारामारी है। एनसीटीई के नियमानुसार अगले साल से इंटर के बाद चार साल की बीटीसी की तैयारी है। 

इंटर कॉलेज भर्थना को 12 स्टूडेंट ही मिले हैं। कुनाल कॉलेज आगरा में 100 में से एक, स्प्रिंगडेल कॉलेज बरेली में 200 में 77, भगवती प्रसाद कॉलेज बांदा में 100 में चार, ब्लूमिंग बड्स कॉलेज गोरखपुर में 100 में 54 सीटें ही भरी हैं। वहीं लखनऊ में काउंसलिंग तो हो गई है पर छात्रों के आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। अभी कॉलेजों को आवंटन की लिस्ट जारी नहीं की गई है।

उधर, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि 22 सितंबर से नया सेशन शुरू हो जाए। इसे देखते हुए परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने समय पर सेशन शुरू करने के आदेश कर दिए और दाखिलों पर रोक लगा दी। अब भी प्रदेश में छात्र दाखिला लेना चाहते हैं लेकिन वे परेशान हैं। इटावा के सरस्वती महाविद्यालय में 50 सीटों के मुकाबले 17, अंकलिकर महाविद्यालय इटावा को महज एक को दिया गया। जिलेवार मेरिट के विज्ञापन अखबारों में दिए गए। कुछ विज्ञापन पूरे प्रदेश में छपे तो कुछ दो-चार जिलों में ही। 

कुछ डायट में तो ऑनलाइन मेरिट जारी की गई लेकिन ज्यादातर में ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने समस्या यह थी कि वे कैसे पता करें कि किस जिले में कितनी मेरिट गई है। पहली काउंसलिंग 10 सितंबर से शुरू हुई। उसमें पांच गुने छात्र बुलाए गए लेकिन दाखिले नहीं हुए। जिन्होंने कई जिलों में आवेदन किए वे अपने मनचाहे जिले में नाम आने का इंतजार करते रहे। वहीं जिनकी मेरिट अच्छी थी, वे सभी जगह  सिलेक्ट हो गए। दूसरी और तीसरी काउंसलिंग में 30 गुने और 50 गुने अभ्यर्थी भी बुलाए गए लेकिन फिर अच्छी मेरिट वालों से जगह भरी रही। निचली मेरिट वालों को मौका ही नहीं मिला। जल्दी में अभ्यर्थियों को पता नहीं चल पाया कि किस जिले में कितनी  मेरिट है। 

बीटीसी का सत्र पहले ही डेढ़ साल पीछे चल रहा है। वर्ष 2014-15 के दाखिलों के लिए सितंबर में काउंसलिंग की गई। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रदेश स्तर पर मांगे गए थे। आवेदन आने के बाद जिला स्तर पर दाखिले शुरू हुए। अभ्यर्थियों को सभी जिलों का विकल्प दिया गया था। दाखिले जिलेवार शुरू हुए। इसका जिम्मा डायट(जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों)

मुफ्त दाखिले की उम्मीद बढ़ी : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 900 नीजि स्कूलों में आरटीआई के तहत एक लाख से अधिक सीटें मिलने की गुंजाइश

मुफ्त दाखिले की उम्मीद बढ़ी : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 900 नीजि स्कूलों में आरटीआई के तहत एक लाख से अधिक सीटें मिलने की गुंजाइश

लखनऊ : आरटीई के तहत एडमिशन देने से इनकार करते हुए सीएमएस प्रबंधन ने 18 अप्रैल को रिट दायर की थी। इस रिट पर सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने 6 अगस्त को सीएमएस प्रबंधन के खिलाफ फैसला सुनाया। डबल बेंच में भी सीएमएस के खिलाफ फैसला आया। सीएमएस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी पुराने फैसले को ही बरकरार रखा।

सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में आर्थिक रूप से कमजोर घरों के बच्चों के दाखिले के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब शहर के निजी स्कूलों में हर साल लगभग एक लाख से अधिक निर्धन घरों के बच्चों को दाखिला मिल सकेगा। शहर में यूपी बोर्ड के साढ़े 700 से अधिक स्कूल हैं। वहीं, सीबीएसई के 103 और आईसीएसई के 84 स्कूल हैं। इनमें कुछ माईनॉरिटी इंस्टिट्यूशंस को हटा दिया जाए तब भी लगभग 900 ऐसे निजी स्कूल हैं, जो आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के दायरे में आते हैं। ऐसे में इन स्कूलों हर साल एक लाख से अधिक गरीब बच्चों के एडमिशन की गुंजाइश बनती है।

आरटीई के तहत हर स्कूल को कक्षा एक से आठ तक की 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को मुफ्त एडमिशन देना है। ज्यादातर स्कूलों में नर्सरी, प्रेप और केजी की कक्षाएं भी चलती है। वहीं, हर कक्षा में दो से तीन सेक्शन चलते हैं और हर सेक्शन में कम से कम 40 बच्चे होते हैं। एक सेक्शन के हिसाब से भी दाखिले दिये जाएं तो हर स्कूल में 11 कक्षाओं में दस प्रतिशत के हिसाब से 110 बच्चों की गुंजाइश वर्तमान में बनती है।

अब तक लखनऊ में आरटीई के तहत 564 बच्चों के ही एडमिशन हुए हैं। इसमें सत्र 2014-15 में मात्र चार एडमिशन हुए थे। वहीं, इस बार सत्र 2015-16 में जागरूकता और कई लोगों के प्रयास के कारण 560 एडमिशन हो चुके हैं। ये एडमिशन शहर के सिर्फ 50 स्कूलों में किए गए हैं। अन्य स्कूलों के लिए आवेदन ही नहीं आए। सबसे अधिक 31 आवेदन सीएमएस इंदिरानगर के लिए आए थे।

मुफ्त दाखिले की उम्मीद बढ़ी

अगर एडमिशन के समय बच्चे आरटीई के मानक पूरे करते हैं तो हम उन्हें एडमिशन जरूर देंगे। समस्या तब आती है, जब सीटें भर जाती हैं और उसके बाद आरटीई के तहत आवेदन आते हैं।
~ जावेद आलम खान, प्रबंधक, लखनऊ पब्लिक कॉलिजिएट

आरटीई के तहत एडमिशन प्रक्रिया चैनलाइज करने की जरूरत है। हमें कोई दिक्कत नहीं। हम कभी आरटीई के खिलाफ नहीं रहे, लेकिन जब बच्चे नहीं आते हैं तो खाली सीट रह जाने से स्कूल का नुकसान होता है।
~ जावेद हाशमी, मैनेजर, डीपीएस

नियमों के विरुद्ध हमारा स्कूल कभी नहीं रहा। कोई बच्चा एडमिशन की योग्यता रखता है तो हम उसे एडमिशन देंगे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद तो इसमें कोई शक रह ही नहीं गया है।
~ एसपी सिंह, एलपीएस प्रबंधक

आरटीई के तहत प्रशासन समय से लिस्ट भेजे तो एडमिशन में कोई मुश्किल नहीं है। मुश्किल तब आती है कि जब आधा सत्र गुजरने के बाद आवेदन आते हैं। बाकी कोर्ट का निर्णय सर्वोपरि है।
~ सर्वेश गोयल, प्रबंधक, जीडी गोएनका

एडमिशन से किसी को इनकार नहीं है। हमारे यहां कोई भी आएगा तो उसे दाखिला देंगे। हालांकि, अन्य स्कूलों के बच्चों के शैक्षिक स्तर में थोड़ा अंतर हो सकता है। हम उस गैप को भरने का भी विशेष प्रयास करेंगे।
~ अनिल अग्रवाल, प्रबंधक, सेंट जोसफ स्कूल

अगले साल बड़ा अभियान, 10 हजार एडमिशन का लक्ष्य

बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया कि अगले साल आरटीई के लिए बड़ा अभियान चलाया जाएगा। इसमें शहर की गली-गली में जितने भी निरक्षर बच्चे हैं, उन्हें साक्षर करने की मुहिम चलाई जाएगी। साथ ही उन्हें आरटीई के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि वे अपनी पसंद के स्कूल में एडमिशन ले सकें। आरटीई के तहत अभियान चलाने वाली भारत अभ्योदय फाउंडेशन की संचालक समीना बानो ने कहा कि अगले साल लखनऊ से दस हजार से अधिक बच्चों के एडमिशन का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही आरटीई के तहत राज्य सरकार का वह आदेश बदलने की मुहिम चलाई जाएगी, जिसमें कहा गया है कि पहले सरकारी स्कूल भरे जाएं और बाद में निजी। हालांकि, कोर्ट ने भी सरकार को इसे परिवर्तित करने के निर्देश दिए हैं।
शहर का हर स्कूल अपने यहां हर कक्षा के कितने सेक्शन चलाता है, इसका शिक्षा विभाग के पास कोई ब्योरा नहीं है। अप्रैल में डीएम ने स्कूलों से यह ब्योरा देने को कहा था ताकि यह पता लग सके कि किस स्कूल में आरटीई के तहत कितनी सीटे हैं। हालांकि, स्कूलों ने यह ब्योरा दिया ही नहीं। अगर यह ब्योरा मिल जाता है तो आरटीई की सीटों की संख्या एक लाख से अधिक हो सकती है। हालांकि, शिक्षा विभाग का दावा है कि यह ब्योरा जुटाया जा रहा है।

               साभार : एनबीटी

समायोजित होकर सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों को समान शिक्षक के समस्त अनुलाभ वेतन/अवकाश इत्यादि के सन्दर्भ में पूर्ववत अनुदेशों का परिपालन करना सुनिश्ति करने के सम्बन्ध में निर्देश जारी |

समायोजित होकर सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों को समान शिक्षक के समस्त अनुलाभ वेतन/अवकाश इत्यादि के सन्दर्भ में पूर्ववत अनुदेशों का परिपालन करना सुनिश्ति करने के सम्बन्ध में निर्देश जारी |

       ~द्वारा संतोष कुशवाहा कुशीनगर

पंचायत सामान्य निर्वाचन 2015 सकुशल संपन्न करने हेतु ध्यान रखने योग्य बिंदु

पंचायत सामान्य निर्वाचन 2015 हेतु कुछ महत्तवपूर्ण ध्यान रखने योग्य बाते


विज्ञान/गणित शिक्षकों की नियुक्ति के सम्बन्ध में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने बीएसए को जारी किया फरमान : क्लिक कर पढ़े, सीधे-सीधे आदेश देने के बजाए गोलमोल दिये गये निर्देश

विज्ञान/गणित शिक्षकों की नियुक्ति के सम्बन्ध में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने बीएसए को जारी किया फरमान : सीधे-सीधे आदेश देने के बजाए गोलमोल दिये गये निर्देश

लखनऊ : उच्च प्राथमिक स्कूलों में 29334 विज्ञान/गणित शिक्षकों की नियुक्ति में स्पष्ट आदेश न होने से बेसिक शिक्षा अधिकारी उहापोह का शिकार हैं। ‘दैनिक जागरण’ ने 18 जिलों में नियुक्ति पत्र न बंटने की खबर मंगलवार को प्रमुखता से उजागर की तो बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर फिर निर्देश भेजे हैं। इसमें कई बिंदुओं पर क्या करें व क्या न करें पर सीधे-सीधे आदेश देने के बजाए गोलमोल निर्देश दिया गया है। ऐसे में अफसरों के उसके निहितार्थ अपनी तरह से निकालने से इनकार नहीं किया जा सकता।

इग्नू की योग्यता का प्रकरण
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से स्नातक या फिर बीएड उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विज्ञान/गणित विषय के सहायक अध्यापकों की नियुक्ति में मान्य है। इसमें शासनादेश के अनुरूप चलें।

उप्र टीईटी का प्रकरण
कई जनपदों से यह पूछा गया है कि तमाम अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने के बाद प्रशिक्षण योग्यता (बीएड या बीटीसी) उत्तीर्ण की है। इस संदर्भ में कहा गया कि शासनादेश के प्रावधानों का अनुपालन करें जिसमें स्पष्ट है कि पहले प्रशिक्षण योग्यता और बाद में टीईटी होना चाहिए।

प्रोफेशनल योग्यता प्रकरण
उच्च न्यायालय की सत्येंद्र कुमार सिंह व अन्य बनाम उप्र राज्य व अन्य में पारित आदेश के अनुक्रम में जिला चयन समिति कार्यवाही करें। इस याचिका में कहा गया है कि स्नातक में विज्ञान एवं गणित विषय वालों को ही नियुक्ति पत्र दिया जाएं। हालांकि प्रोफेशनल अभ्यर्थियों का दावा है कि हाईपावर कमेटी ने उनके तमाम पाठ्यक्रमों को विज्ञान व गणित शिक्षक बनने के लिए सही पाया है।

सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने बीएसए को जारी किया फरमानबेसिक शिक्षा अधिकारियों ने पूछा है कि प्राथमिक विद्यालयों में काउंसिलिंग करा चुके अभ्यर्थी क्या उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए भी अर्ह होंगे। दरअसल, सूबे में बड़ी तादाद में ऐसे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय दोनों की शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की है। इसमें सचिव ने निर्देश दिया है कि प्रशिक्षु वालों को जूनियर में मौका नहीं दिया जा सकेगा। उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्धारित धारणाधिकार संबंधी प्राविधान कार्यरत परिषदीय अध्यापकों पर नियमानुसार लागू है। इसके अनुरूप कार्यवाही की जाए। साफ है कि परिषद के स्कूलों में तैनात प्रशिक्षु शिक्षकों को मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि वह अभी परिषद के अधीन नहीं है।

         साभार : दैनिकजागरण

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