Tuesday, June 30, 2015

आठवीं तक के स्कूल अब 4 तक बंद, 6 जुलाई से खुलेंगे : मौसम को देखते हुए लिया फैसला

आठवीं तक के स्कूल अब 4 तक बंद, 6 जुलाई से खुलेंगे : मौसम को देखते हुए लिया फैसला

मौसम को देखते हुए लिया फैसला

जिले में संचालित आठवीं क्लास तक के स्कूलों में अब चार जुलाई तक छुट्टी रहेगी। आठवीं तक के सभी स्कूल अब रविवार बाद 6 जुलाई से निर्धारित समयानुसार खुलेंगे। 

ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नर्सरी से 12वीं तक के स्कूल-कालेज पठन पाठन के लिए बुधवार एक जुलाई से खुल रहे थे। अब सिर्फ कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं का संचालन ही बुधवार एक जुलाई से शुरू होगा। यह जानकारी जिलाधिकारी राज शेखर ने मंगलवार को दी।

उन्होंने बताया कि बीते दिनों हुई बरसात के बाद बढ़ी उमस और मौसम विभाग द्वारा आने वाले दो चार दिनों में मौसम के मिजाज में फिर होने वाले बदलाव को देखते हुए प्रशासन ने नर्सरी से कक्षा आठ तक की कक्षाओं में चार जुलाई तक अवकाश रखे जाने का निर्देश सभी आईसीएससी, सीबीएससी व यूपी बोर्ड से संबद्ध शिक्षण संस्थाओं के संचालकों को दिया है। 

पांच जुलाई को रविवार के बाद कक्षा आठ तक के स्कूल अब 6 जुलाई सोमवार से खुलेंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि कक्षा 9 से 12 वीं तक की कक्षाओं का संचालन बुधवार एक जुलाई से किया जा सकेगा। उन्होंने सभी स्कूल कालेजों के प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि अभिभावकों को परेशानी से बचाने के लिए चार जुलाई तक घोषित अवकाश के संबंध में अभिभावकों को भी समय रहते जानकारी दे दी जाए।

बुधवार से खुलेंगे नौंवी से ऊपर के स्कूल

गर्मी की छुट्टी के बाद बुधवार से राजधानी के स्कूलों में आधी-आधी रौनक लौटेगी। बुधवार से राजधानी के लगभग सभी स्कूल खुल जाने थे लेकिन जिला अधिकारी ने खराब मौसम को देखते हुए चार जुलाई तक आठवीं तक के सभी स्कूल बंद करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। 
जिला अधिकारी के निर्देश के बाद अब केवल कक्षा नौ से ऊपर के स्कूल अपने तय समय से खुलेंगे। दो दिन पहले तक हो रही भयंकर गर्मी को देखते हुए जिला अधिकारी ने पांचवी तक के स्कूल सुबह साढ़े सात बजे से 11 बजे के बीच खुलने के निर्देश दे रखे थे। 

बारिश के बाद तापमान में आई गिरावट की वजह से जिला अधिकरी ने सोमवार से सुबह साढ़े सात बजे से 11 बजे के बीच स्कूल खोलने की अनिवार्यता हटा ली थी। सिटी मांटेसरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय को छोड़कर बाकी स्कूल बुधवार से अपने तय समय के हिसाब से खुलने थे। 

ये दोनों स्कूल पिछले सप्ताह ही खुल गए थे। लेकिन जिला अधिकारी के निर्देश के कारण अब केवल कक्षा नौ से ऊपर के स्कूल अपने तय से खुलेंगे। जिला अधिकारी ने स्कूल बंद करने का फैसला एक और दो जुलाई को भयंकर उमस और तीन तथा चार जुलाई को बारिश के अनुमान के कारण किया है। 

     खबर साभार : अमरउजाला/दैनिकजागरण

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की याचिका पर बेसिक शिक्षा सचिव के सत्र लाभ पर दिए निस्तारण के खिलाफ उच्च न्यायालय की (स्टे) रोक : 2 अप्रैल के बाद की जन्मतिथि वाले होंगे 31 मार्च 2016 को (सेवानिवृत्त) रिटायर

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की याचिका पर बेसिक शिक्षा सचिव के सत्र लाभ पर दिए निस्तारण के खिलाफ उच्च न्यायालय की (स्टे) रोक : 2 अप्रैल के बाद की जन्मतिथि वाले होंगे 31 मार्च 2016 को (सेवानिवृत्त) रिटायर

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD, LUCKNOW BENCH 

Court No. - 10 

Case :- SERVICE SINGLE No. - 3685 of 2015 

Petitioner :- U.P.Prathmik Shikshak Sangh Throu Its President And Ors. 
Respondent :- State Of U.P.Thru.Prin.Secy.Deptt.Of Madhyamik Edu.Lko.& Ors 
Counsel for Petitioner :- Sharad Pathak 

Counsel for Respondent :- C.S.C.,Sandep Kumar Yadav,Sobhit Mohan Shukla,Vindhyawashini 

Hon'ble Rajan Roy,J. 
Heard Sri Sharad Pathak, learned counsel for the petitioner, Sri Ajay Kumar for opposite party no.4, Sri Shobhit Mohan Shukla for opposite party no. 5, Sri Sandeep Kumar Yadav for opposite party no. 6 and learned Chief Standing Counsel for official opposite parties. 

By means of this writ petition the petitioners have challenged the order dated 15.06.2015 passed by the Secretary, Basic Education, Government of U.P., rejecting the representation of the members of petitioner no. 1 for being allowed to continue in service till the end of academic session i.e. 31st March, 2016 in view of the change in the academic session brought about by the Government Order dated 09.12.2014, and consequential order dated 22.01.2015. 

This Court has already considered this issue in a similar Writ Petition No. 3632 (SS) of 2015 filed by the teachers of the schools run by the Basic Education Board and has passed a detailed interim order on 29.06.2015 which reads as under:-- 
"By means of this writ petition the petitioner is seeking continuance in service till the end of Academic Session, i.e. 31st March. The petitioner has also challenged a part of the Government Order dated 09.12.2014 and the consequential order dated 22.1.2015. 

Earlier the Academic Session, as defined in Rule 2 (aa) of the Rule 29 of the 1981 Rules, commenced from 1st of July and ended on 30th June thereafter. Based on the aforesaid provision Rule 29 of the 1981 Rules provided that if the date of retirement of the Head Master or the Assistant Teacher of a recognized school falls on or after July to during the Academic Session, then he shall retire on 30th June following next after the said date. 

Now, by means of the Government Order dated 9.12.2014 period of Academic Session has been changed. With effect from 2015-16 the Academic Session has commenced from 1st April and shall end on 31st March following next after the said date. The dates mentioned in Rule 29(1) have a rational co-relation to the Academic Session. The object of the Rule 
is to ensure that teaching of students should not suffer on account of retirement of teachers in mid Academic Session. Once the period of Academic Session has changed from 1st July to 30th June to 1st April to 31st March, the logical corollary of it is that any teacher whose date of retirement falls during the changed Academic Session, shall be entitled to continue till the end of the Session. This is how Rule 29 has to be read in the changed circumstances. The dates mentioned therein, in the absence of an amendment, have to be read down and understood in context of the changed Academic Session, otherwise the provision would be rendered irrational and will lead to absurdity. 

The contention of the learned standing counsel based on para 3 of the Government Order dated 09.12.2014 that though the period of Academic Session has changed, but this has been done only for the purposes of admission and promotion etc. of students and it has no bearing upon the continuance of the teachers, which, in view of the last line of the aforesaid para 3, continues to be governed by the earlier arrangement and this line is in consonance with the definition of Academic Session contained in Rule 2(aa) and Rule Rule 29 of the 1981 Rules, meaning thereby in spite of the aforesaid change the teachers whose date of retirement falls in mid Academic Session can continue only till 30 June, and not 31 March, 2016. 

This contention prima facie is incongruous with the object of Rule 29. The dates mentioned in Rule 29 have a rational connection with the period of Academic Session. Once the period has changed and now it is from 1st April to 31st March, then Rule 29 has to be applied keeping in mind the aforesaid Session, and not otherwise. The Academic Session and continuance of teachers cannot be treated separately. The dates mentioned in Rule 29 has to have a rational connect with the Academic Session, therefore, the dates mentioned therein have to be read down as 1st of April to 31st of March, otherwise the provision will be rendered irrational and unconstitutional. 

A similar change of Academic Session has been made in respect to the schools governed by the U.P. Intermediate Education Act, 1921. 
In view of the above, as the petitioner's date of birth falls in mid Academic Session which has commenced from 1st April, 2015 and shall end on 31 March 2016, he is entitled to continue till the end of Academic Session. 

Let counter affidavit be filed within four weeks. 

List thereafter. 

It is accordingly provided, subject to verification of the petitioner's date of birth, he be allowed to continue till the end of Academic Session i.e. 31.3.2016 and shall be paid salary regularly subject, however, to the final result of the Writ Petition." 
For the reasons mentioned in the above quoted order the reason given in para 4 of order dated 15.06.2015 is not in consonance with the object of Rule 29 of the Rules 1981. As far as para 5 of the impugned order is concerned the same does not suffer from any error and the writ petitions involving similar issue wherein the teachers had attained the age of superannuation prior to 1st April, 2015 but were continuing till the end of academic session as per earlier arrangement, have already been dismissed.� 

Suffice it to say that the benefit of the interim order dated 29.06.2015 passed in Writ Petition No. 3632 (SS) of 2015 shall be available to the petitioners also. 

Let counter affidavit be filed by the opposite parties within 4 weeks.� 
Connect this petition with Writ Petition No. 3632 (SS) of 2015. 
Order Date :- 30.6.2015 
Shaakir
(Rajan Roy,J.) 

कॉपी का विकल्प,अब स्लेट पर पढ़ेंगे आठवीं तक के बच्चे : कुल 60 स्कूलों का चयन इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया प्रयोग सफल रहा तो इसे आगे सभी स्कूलों में लागू कराने के लिए शासन को भेजा जायेगा प्रस्ताव

कॉपी का विकल्प,अब स्लेट पर पढ़ेंगे आठवीं तक के बच्चे : कुल 60 स्कूलों का चयन इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया प्रयोग सफल रहा तो इसे आगे सभी स्कूलों में लागू कराने के लिए शासन को भेजा जायेगा प्रस्ताव

"मेरठ मंडल के पांच जिलों में बेसिक शिक्षा परिषद के 60 स्कूलों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट"

नोएडा। बेसिक शिक्षा परिषद के 60 स्कूलों में कक्षा आठ तक के बच्चों को अभ्यास के लिए स्लेट दिया जाएगा। मेरठ मंडल के पांच जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर जुलाई से इस योजना की शुरुआत की जा रही है। बेसिक शिक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों का तर्क है कि जिस तरह से कंप्यूटर युग आने के बाद भी ब्लैक बोर्ड का कंसेप्ट समाप्त नहीं हुआ।

उसका महत्व आज भी बना हुआ है। उसी तरह से अभ्यास के लिए कार्य पुस्तिका की जगह पर स्लेट का प्रयोग कराया जाए तो इससे बच्चों के साथ ही स्कूलों पर कई प्रकार के बोझ कम होंगे। साथ ही यह एक अभिनव प्रयोग होगा। योजना के प्रथम चरण में मेरठ मंडल के अंतर्गत पांच जिलों मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ के अलग-अलग ब्लॉक से चुनिंदा स्कूलों को प्रयोग के लिए चुना जाएगा।

कुल 60 स्कूलों का चयन इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया जाना है।

योजना के तहत बच्चाें को स्लेट मुहैया कराने के लिए एनजीओ सहित अन्य संस्थाओं से सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा विभाग के फंड का प्रयोग करने की अनुमति भी मांगी जाएगी।

कॉपी का विकल्प

बच्चों की किताबों में पाठ समाप्त होने के बाद कार्य पुस्तिका के लिए दो-तीन पेज छोड़े जाते हैं। लेकिन उनमें अभ्यास करना बेहद कठिन होता है। स्लेट के प्रयोग से यह समस्या दूर होगी। बच्चों को अभ्यास के लिए ज्यादा से ज्यादा जगह मिलेगी।

आर्थिक बोझ कम होगा

इससे आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार के बच्चों पर आर्थिक बोझ कम होगा। उन्हें अभ्यास के लिए बार-बार कॉपी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्कूलों की ओर से दिए जाने वाले स्लेट से उनके अभ्यास का काम चल जाएगा।

शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव

प्रयोग सफल रहा तो इसे आगे सभी स्कूलों में लागू कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी योजना की सफलता के लिए पूरी कोशिश करेंगे ताकि अगले दौर में यह जिले के सभी स्कूलों में लागू हो सके।

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मेरठ मंडल के पांच जिलों के 60 स्कूलों में नया प्रयोग करते हुए बच्चों को रोजाना के अभ्यास के लिए स्लेट दिया जाएगा। प्रयोग सफल रहा तो योजना को सभी स्कूलों में लागू कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।
- विनय कुमार गिल, सहायक निदेशक (बेसिक),मेरठ मंडल ।

मेरठ मंडल के पांच जिलों में बेसिक शिक्षा परिषद के 60 स्कूलों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

     खबर साभार : अमरउजाला

प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के यूनिफॉर्म की नाप स्कूलों में ही लेनी होगी : राज्य परियोजना निदेशालय ने भेजा प्रस्ताव

प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के यूनिफॉर्म की नाप स्कूलों में ही लेनी होगी : राज्य परियोजना निदेशालय ने भेजा  प्रस्ताव

नोएडा (ब्यूरो)। प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के यूनिफॉर्म की नाप स्कूलों में ही लेनी होगी। वरिष्ठ अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि बच्चों को वितरित यूनिफॉर्म की फिटिंग सही नहीं होती। ठेकेदार द्वारा लापरवाही की बात सामने आई है।दरअसल, यूनिफॉर्म की सिलाई के लिए ठेके पर काम दिया जाता है। इसमें प्रत्येक बच्चों के कपड़ों की नाप न लेकर एक ही नाप के कपड़े सिलकर वितरित करने की बात पता चली है।

इसी को देखते हुए राज्य परियोजना निदेशालय के प्रस्ताव में स्कूलों में हर बच्चे की यूनिफॉर्म की नाप लेने की बात कही गई है। इस पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना है। बता दें कि प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में बच्चों को प्रत्येक वर्ष दो-दो सेट यूनिफॉर्म वितरित करना होता है। इसके लिए 400 रुपये मिलते हैं।

      खबर साभार : अमरउजाला

दाखिला पूरा नहीं बी0टी0सी0 परीक्षा कराने का हुआ एलान : बगैर पढ़ायें परीक्षा लेने के फरमान से अभ्यर्थी पशोपेश में

दाखिला पूरा नहीं बी0टी0सी0 परीक्षा कराने का हुआ एलान : बगैर पढ़ायें परीक्षा लेने के फरमान से अभ्यर्थी पशोपेश में

       खबर साभार : दैनिकजागरण

बारिश के चलते किताबें लेने नहीं आए शिक्षक : एक जुलाई से शुरू हो रहा है परिषदीय विद्यालयों का शिक्षा सत्र;29 जून से ही अध्यापकों को विद्यालय खोलने के निर्देश

बारिश के चलते किताबें लेने नहीं आए शिक्षक : एक जुलाई से शुरू हो रहा है परिषदीय विद्यालयों का शिक्षा सत्र;29 जून से ही अध्यापकों को विद्यालय खोलने के निर्देश

एक जुलाई से परिषदीय विद्यालयों का शिक्षा सत्र शुरू होने जा रहा है। बीएसए के निर्देश है कि पहले दिन से ही बच्चों के हाथों में किताब होनी चाहिए। इसके लिए शिक्षकों को दो दिन पहले ही विद्यालय खोलकर साफ-सफाई कराने व बीआरसी से किताबें हासिल करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन ऐसा हो न सका। सोमवार को विद्यालय तो खुले, लेकिन बारिश के चलते अधिकांश शिक्षक किताबें लेने बीआरसी नहीं पहुंच पाए। ऐसे में किताबें एक कक्ष में ही बंद रह गईं। हर साल नई उम्मीदों, दावों के साथ शिक्षा सत्र शुरू किया जाता है। पहले दिन विद्यालय खोलना किसी चुनौती से कम नहीं हुआ, उससे बड़ी चुनौती हर बच्चे को नई किताबें देना होता है।

इस बार भी एक जुलाई को शिक्षा सत्र शुरू किया जाएगा। इसके लिए 29 जून से ही अध्यापकों को विद्यालय खोलने के निर्देश दिए गए ताकि कक्षों, परिसर आदि की साफ सफाई करवाई जा सके। सोमवार को निर्देशों के तहत कुछ विद्यालय तो खुले, लेकिन अधिकांश में ताला पड़ा रहा। जो विद्यालय खोले गए वहां पर शिक्षकों ने साफ सफाई करवाई। लेकिन बीआरसी केंद्र पर एक भी शिक्षक किताबें लेने के लिए नहीं पहुंची। इसके पीछे वजह रही भारी बारिश। सुबह से शुरू हुई बारिश दोपहर बाद तक होती रही। बीआरसी कार्याल्य में कर्मचारी इसी इंतजार में बैठे रहे कि कब शिक्षक आएं और किताबें बांटी जाएं, लेकिन बारिश के चलते इंतजार लंबा ही खिंचता चला गया।

अब मंगलवार को शिक्षक संभवत: बीआरसी पहुंचेंगे, अगर ऐसा हुआ तभी शिक्षा सत्र के पहले दिन बच्चों के हाथ में किताबें आ पाएंगी। इस सम्बन्ध में बीआरसी अरूण कुमार वर्मा ने कहा कि बीआरसी पर किताबें रखवा दी गई हैं, जिन्हें स्कूलों के शिक्षकों को वितरित किया जाएगा। एक जुलाई से सत्र शुरू होने जा रहा है, कोशिश रहेगी कि पहले दिन सभी बच्चों को किताबें वितरित कर दी जाएं।

            खबर साभार : डीएनए

बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक 64 वर्ष में ही सेवानिवृत्त होंगे पुरस्कार प्राप्त शिक्षक : सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने किया आदेश जारी

बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक 64 वर्ष में ही सेवानिवृत्त होंगे पुरस्कार प्राप्त शिक्षक : सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने किया आदेश जारी 


लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में तैनात राज्य अथवा राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक 64 वर्ष की आयु में ही सेवानिवृत्त होंगे। राज्य सरकार ने उनकी 65 साल की आयु में सेवानिवृत्त की मांग पर असहमति जताते हुए उसे खारिज कर दिया। इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने आदेश जारी कर दिया है।

माध्यमिक विद्यालयों की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों के राज्य अथवा राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने तीन साल के सेवाविस्तार की मांग की थी। इसको लेकर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में रिट भी दाखिल की थी।

लेकिन राज्य सरकार ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। शासन का कहना है कि 62 साल की आयु पूरी करने वाले पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को दो साल का ही सेवानिवृत्त मिल सकता है। इसलिए 64 वर्ष की आयु पर ही सेवानिवृत्त होगी।

         खबर साभार : डीएनए

प्राइमरी स्कूलों में अब छुट्टी पर बजेगी घंटी : विषयवार टाइम टेबिल बनाकर होगी पढ़ाई, सभी शिक्षकों के नाम और पद नाम को दीवार पर अंकित कराने के निर्देश

प्राइमरी स्कूलों में अब छुट्टी पर बजेगी घंटी : विषयवार टाइम टेबिल बनाकर होगी पढ़ाई, सभी शिक्षकों के नाम और पद नाम को दीवार पर अंकित कराने के निर्देश

आगरा : बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में अब छुट्टी की घंटी बजेगी। स्कूलों में विषयवार टाइम टेबिल बनाकर पढ़ाई करानी होगी। साथ ही क्लास का समय खत्म होने पर भी घंटा बजाया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने पढ़ाई के स्तर को सुधारने और छात्रों को प्राइवेट स्कूलों जैसा माहौल देने के लिए परिषद ने यह कदम उठाया है। साथ ही परिषद ने बेसिक शिक्षाधिकारियों को स्कूलों की साफ-सफाई कराने के भी निर्देश दिए हैं। परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को सुधारने के लिए यह निर्देश शासन की ओर से जारी किए गए हैं। 

सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि स्कूल में कक्षाओं को विषयवार टाइम टेबिल के अनुसार लगाया जाएगा। इससे कि छात्र हर विषय की पढ़ाई कर सकेंगे। यह फैसला पिछले सत्र में शिक्षकों द्वारा कई विषयों की पढ़ाई न करने की शिकायतों के बाद लिया है। शासन ने स्कूल में घंटा लगाने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही टाइम टेबिल के हिसाब से एक कक्षा का समय खत्म होने पर घंटा बजाने को भी कहा है। शासन ने बेसिक शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्कूल में सभी शिक्षकों के नाम और पद नाम को दीवार पर अंकित कराया जाए। साथ ही शिक्षक की योग्यता और स्कूल में कक्षावार पढ़ाए जाने वाले विषयों की जानकारी भी दीवार पर अंकित कराई जाए।

        खबर साभार : हिन्दुस्तान

एनटीटी और सीटी नर्सरी वाले नहीं दें सकेंगे यूपीटीईटी : सितम्बर में प्रस्तावित 2015 की टीईटी से दोनों कोर्स को किया गया बाहर, इस बार नहीं होगी भाषा टीईटी

एनटीटी और सीटी नर्सरी वाले नहीं दें सकेंगे यूपीटीईटी : सितम्बर में प्रस्तावित 2015 की टीईटी से दोनों कोर्स को किया गया बाहर, इस बार नहीं होगी भाषा टीईटी

इलाहाबाद : प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) में एनटीटी (नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग) और सीटी (सर्टिफिकेट ऑफ टीचिंग) नर्सरी अभ्यर्थियों को शामिल नहीं किया जाएगा। सितम्बर में प्रस्तावित 2015 की टीईटी से दोनों कोर्स को बाहर कर दिया गया है। इस बार भाषा टीईटी भी नहीं होगी।

उत्तर प्रदेश अध्यापक सेवा नियमावली में एनटीटी और सीटी नर्सरी अर्हता न होने से इन अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती में अवसर नहीं दिया जा रहा। 2013 और 2014 की टीईटी पास करने के बाद ये अभ्यर्थी सरकार पर भर्ती का दबाव बनाने लगे। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी नीना श्रीवास्तव ने बताया कि एनटीटी व सीटी नर्सरी को शामिल नहीं किए जाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है।

          खबर साभार : हिन्दुस्तान

सीधे रसोइयों के खाते में भेजा जाएगा मानदेय : निदेशक एमडीएम प्राधिकरण ने वार्ता में दिया आश्वासन

सीधे रसोइयों के खाते में भेजा जाएगा मानदेय : निदेशक एमडीएम प्राधिकरण ने वार्ता में दिया आश्वासन

लखनऊ। मानदेय अब सीधे रसोइयों के खाते में भेजा जाएगा। यह आश्वासन सोमवार को निदेशक एमडीएम प्राधिकरण ने रसोइयों के साथ हुई वार्ता में दिलाया है। राष्ट्रीय मध्याह्न् भोजन रसोइया फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष मदन सेन सिंह के नेतृत्व में सुबह से रसोइये लक्ष्मण मैदान में एकजुट हुए। सभी ने मानदेय निजी खाते में देने व हर वर्ष चयन प्रकिया समाप्त करने समेत पांच सूत्री मांगों को लेकर नारेबाजी की।

निदेशक एमडीएम प्राधिकरण बीबी सिंह से दल के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता हुई। मदन सेन सिंह ने बताया कि बीबी सिंह ने भुगतान सीधे रसोइयों के खाते में दिए जाने का आश्वासन दिलाया है।

          खबर साभार : हिन्दुस्तान

पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सेवा विस्तार देने से इन्कार : बेसिक शिक्षकों ने 65 वर्ष की आयु तक मांगा था विस्तार, माध्यमिक की तर्ज पर बेसिक शिक्षकों को एक और झटका

पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सेवा विस्तार देने से इन्कार : बेसिक शिक्षकों ने 65 वर्ष की आयु तक मांगा था विस्तार, माध्यमिक की तर्ज पर बेसिक शिक्षकों को एक और झटका

पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सेवा विस्तार देने से इन्कार
बेसिक शिक्षकों ने 65 वर्ष की आयु तक मांगा था विस्तार 
बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव किया खारिज

माध्यमिक शिक्षा विभाग की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग के राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को एक साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों को 64 साल की आयु में ही सेवानिवृत्त होना होगा। विभाग ने सोमवार को इस बाबत शासनादेश जारी कर दिया।

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों के दो साल के सेवा विस्तार में एक साल की वृद्धि की थी जिसके बाद उनकी सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष हो गई थी। इसी आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने भी ऐसी ही मांग की और मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। उच्च न्यायालय ने बेसिक शिक्षा विभाग को मामले के निस्तारण के आदेश दिए। बेसिक शिक्षा विभाग ने मांग को नामंजूर करते हुए अपने विभाग के राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 64 वर्ष ही रखने का निर्णय किया है।

         खबर साभार : दैनिकजागरण

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों के राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को 65 साल तक सेवा विस्तार देने से इन्कार कर दिया है। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने सोमवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया। उन्होंने कहा है कि पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को पूर्व से दो साल का सेवा विस्तार देते हुए 64 साल पर रिटायर किया जा रहा है। लिहाजा उन्हें 65 वर्ष की आयु तक सेवा विस्तार देने का कोई औचित्य नहीं है।

परिषदीय और सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों के राज्य व राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने यह तर्क दिया था कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेंकेंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) के पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को 65 वर्ष की आयु तक सेवा विस्तार दिया जाता है। इसको लेकर बिजनौर के प्रधानाध्यापक सआदत हुसैन व राजेश प्रसाद और भटनी देवरिया के जय नारायन तिवारी ने हाईकोर्ट में पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को दो साल के स्थान पर तीन साल का सेवा विस्तार देने का वाद दायर किया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इनका प्रत्यावेदन निस्तारित करने का आदेश दिया था। इसी तरह उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ जालौन के जिलाध्यक्ष बालक राम व्यास ने सेवा विस्तार तीन साल देने का अनुरोध राज्य सरकार से किया था।

परिषद पर नहीं लागू होता है सीबीएसई का प्रावधान :

सचिव बेसिक शिक्षा ने शासनादेश जारी करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को 62 वर्ष की आयु पर रिटायर किया जाता है। राष्ट्रीय व राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को उनकी उत्कृष्ट सेवा, उत्तम स्वास्थ्य व उत्तम आचरण के आधार पर दो साल का सेवा विस्तार देते हुए 64 साल पर रिटायर किया जाता है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद पर सीबीएसई का प्रावधान लागू नहीं होता है। इसलिए 65 वर्ष की आयु तक सेवा विस्तार देने का कोई औचित्य नहीं है।

          खबर साभार : अमरउजाला

बीएड की तरह बीटीसी में दाखिले भी करवाए यूनिवर्सिटी;बीटीसी सत्र 2014-15 शून्य नहीं होगा :  एससीईआरटी निदेशक ने प्राइवेट कालेजों के एसोसिएशन को दिया भरोसा

बीएड की तरह बीटीसी में दाखिले भी करवाए यूनिवर्सिटी;बीटीसी सत्र 2014-15 शून्य नहीं होगा :  एससीईआरटी निदेशक ने प्राइवेट कालेजों के एसोसिएशन को दिया भरोसा

बीटीसी सत्र 2014-15 शून्य नहीं होगा

एससीईआरटी निदेशक ने एसोसिएशन को दिलाया भरोसा

पंद्रह दिन में शुरू होंगे दाखिले

लखनऊ : बीटीसी सत्र 2014-15 को शून्य घोषित नहीं किया जाएगा। इसमें दाखिले की प्रक्रिया पंद्रह दिनों के अंदर शुरू कर दी जाएगी। यह भरोसा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह ने स्वावित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के पदाधिकारियों को दिलाया। एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने बताया कि 15 जुलाई से दाखिले की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

एससीईआरटी निदेशक से मिलने से पहले राजधानी में हुसैनगंज स्थित एक होटल में एसोसिएशन द्वारा पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया।

बीएड की तरह बीटीसी में दाखिले भी करवाए यूनिवर्सिटी :

एसोसिएशन ने कहा कि बीटीसी का सत्र 2013-14 अभी तक चल रहा है और 2014-15 में दाखिले नहीं हुए। ऐसे में दो-दो साल लेट हो रहे सत्र के पीछे एससीईआरटी की लेटलतीफी ही मुख्य कारण है। ऐसे में बीएड की तर्ज पर बीटीसी में दाखिले का काम भी यूनिवर्सिटी को दिया जाए।

       खबर साभार : दैनिकजागरण

निजी बीटीसी कॉलेजों में जमकर मनमानी : एक ही शिक्षक पढ़ा रहे बीटीसी कालेजों में, शिकायतों के बाद निदेशक एससीईआरटी ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से कॉलेजों का विवरण मांगा

निजी बीटीसी कॉलेजों में जमकर मनमानी : एक ही शिक्षक पढ़ा रहे बीटीसी कालेजों में, शिकायतों के बाद निदेशक एससीईआरटी ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से कॉलेजों का विवरण मांगा

प्रदेश में हाल के वर्षों में खुले निजी बीटीसी कॉलेजों में जमकर मनमानी चल रही है। इनमें तैनात शिक्षक एक से अधिक बीटीसी कॉलेंजों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऊपर से उनकी योग्यता भी पूर्ण नहीं है। प्रबंधन भी अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति करके छात्रों एवं अभिभावकों के साथ धोखा कर रहे हैं।

प्रदेश भर से मिल रही निजी बीटीसी कॉलेजों की शिकायतों के बाद निदेशक एससीईआरटी ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से कॉलेजों का विवरण मांगा है। इन कॉलेजों में नियुक्त शिक्षकों की योग्यता का प्रमाण मांगा गया है। बीएड एवं बीटीसी कॉलेजों में तैनात शिक्षकों को प्रबंधन की ओर से बहुत कम मानदेय दिया जाता है।

कुछ प्रबंधक एक ही कॉलेज में बीएड और बीटीसी दोनो कॉलेज चला रहे हैं। इस कारण इनके बीएड के ही शिक्षक बीटीसी कॉलेजों में सेवा दे रहे हैं। 

निजी बीटीसी कॉलेजों में जमकर मनमानी : एक ही शिक्षक पढ़ा रहे बीटीसी कालेजों में, शिकायतों के बाद निदेशक एससीईआरटी ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से कॉलेजों का विवरण मांगा

निजी बीटीसी कॉलेजों में जमकर मनमानी : एक ही शिक्षक पढ़ा रहे बीटीसी कालेजों में, शिकायतों के बाद निदेशक एससीईआरटी ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से कॉलेजों का विवरण मांगा

प्रदेश में हाल के वर्षों में खुले निजी बीटीसी कॉलेजों में जमकर मनमानी चल रही है। इनमें तैनात शिक्षक एक से अधिक बीटीसी कॉलेंजों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऊपर से उनकी योग्यता भी पूर्ण नहीं है। प्रबंधन भी अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति करके छात्रों एवं अभिभावकों के साथ धोखा कर रहे हैं।

प्रदेश भर से मिल रही निजी बीटीसी कॉलेजों की शिकायतों के बाद निदेशक एससीईआरटी ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से कॉलेजों का विवरण मांगा है। इन कॉलेजों में नियुक्त शिक्षकों की योग्यता का प्रमाण मांगा गया है। बीएड एवं बीटीसी कॉलेजों में तैनात शिक्षकों को प्रबंधन की ओर से बहुत कम मानदेय दिया जाता है।

कुछ प्रबंधक एक ही कॉलेज में बीएड और बीटीसी दोनो कॉलेज चला रहे हैं। इस कारण इनके बीएड के ही शिक्षक बीटीसी कॉलेजों में सेवा दे रहे हैं। 

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