Sunday, May 31, 2015

सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाचार्यों के खाली पड़े करीब 25 हजार पदों पर अध्यापकों को मिलेगी प्रोन्नति : इस पदोन्नति के बाद नए पदों के सृजन की आवश्यकता नहीं रहेगी-

सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाचार्यों के खाली पड़े करीब 25 हजार पदों पर अध्यापकों को मिलेगी प्रोन्नति : इस पदोन्नति के बाद नए पदों के सृजन की आवश्यकता नहीं रहेगी-

राज्य मुख्यालय : सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाचार्यों के पद पर पदोन्नति का इंतजार अब खत्म हुआ। जूनियर स्कूलों में प्रधानाचार्यों के खाली पड़े करीब 25 हजार पदों पर अध्यापकों को प्रोन्नति मिलेगी। साथ ही इसका फायदा समायोजन की राह देख रहे करीब इतने ही शिक्षामित्रों को भी मिलेगा। पदोन्नति के लिए बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने आदेश जारी कर दिया है।

दो सालों से लगी थी रोक-

जूनियर स्कूलों में प्रधानाचार्यों के पद पर 2013 से हाईकोर्ट की रोक लगी हुई थी। इन पदों पर पिछले तीन साल से ज्यादा समय से काम कर रहे प्राइमरी स्कूलों के प्रधानाचार्य और जूनियर स्कूल के सहायक अध्यापक प्रोन्नत होंगे। विवाद ज्येष्ठता को लेकर था।

25 हजार पद हैं खाली-

अभी शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद समायोजित करने में लगभग 22 हजार पद कम पड़ रहे हैं। जूनियर स्कूलों में प्रधानाचार्यों के 46129 पद हैं। जिनमें लगभग 20 हजार पद पर ही प्रधानाचार्य काम कर रहे हैं।

शिक्षामित्रों को होगा फायदा-

हालांकि शिक्षामित्रों को इसका फायदा तुरंत नहीं होगा क्योंकि इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने तक का समय लग सकता है। पहले इसमें ज्येष्ठता सूची बनेगी और फिर पदोन्नति की जाएगी। लेकिन इस पदोन्नति के बाद नए पदों के सृजन की आवश्यकता नहीं रहेगी।

रामपुर में पाक नागरिक को बना दिया सरकारी शिक्षक : बीएसए का यह कारनामा जब पकड़ में आया तो रामपुर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा;शासन की जो गाइडलाइन होगी उसके अनुसार कार्रवाई-

रामपुर में पाक नागरिक को बना दिया सरकारी शिक्षक : बीएसए का यह कारनामा जब पकड़ में आया तो रामपुर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा;शासन की जो गाइडलाइन होगी उसके अनुसार कार्रवाई-

रामपुर। रामपुर में पाकिस्तानी नागरिक को बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी दे दी गई। उसे सहायक अध्यापिका बना दिया गया। बीएसए का यह कारनामा जब पकड़ में आया तो रामपुर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया है। प्रमुख सचिव गृह ने इस मामले में डीएम-एसपी से रिपोर्ट तलब करते हुए दो जून को लखनऊ बुलाया है। उधर, शासन की सख्ती ने जिला प्रशासन की धड़कनें बढ़ा दी हैं। शनिवार को डीएम ने पुलिस और खुफिया तंत्र के अफसरों के साथ करीब घंटे भर इस गंभीर मुद्दे पर मंथन किया। बीएसए और इंस्पेक्टर एलआईयू से रिपोर्ट तलब की गई है।

शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आतिशबाज निवासी अख्तर अली की बेटी फरजाना उर्फ माहिरा अख्तर ने 17 जून 1979 को पाकिस्तान निवासी सिबगत अली से निकाह किया और पाकिस्तान चली गई। वहां उसे पाकिस्तान की नागरिकता मिल गई। बाद में उसने दो बेटियों को वहां जन्म दिया। जिनका नाम फुरकाना और आलिमा है। निकाह के तीन साल बाद उसके शौहर ने तलाक दे दिया। जिस पर वह अपनी दोनों बेटियों के साथ रामपुर अपने मायके आ गई। सालों मामला दबा रहा। 

वीजा अवधि खत्म होने के बाद एलआईयू की ओर से शहर कोतवाली में वर्ष 1983 में विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया। जिस पर 25 जून 1985 को उसे सीजेएम कोर्ट से कोर्ट की समाप्ति तक अदालत में मौजूद रहने की सजा सुनाई गई। बाद में एलआईयू की ओर से नोटिस जारी करते हुए वीजा अवधि बढ़वाने को कहा गया। जिस पर खुलासा हुआ कि यह महिला तो बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापिका के पद पर प्राथमिक विद्यालय कुम्हरिया कला में तैनात है। 

एलआईयू ने बीएसए के यहां से छानबीन शुरू की तो पता चला कि उसे 22 जनवरी 1992 में बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक की नौकरी दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एलआईयू ने रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी। जिसमें प्रथम दृष्ट्या बीएसए को दोषी माना गया है। मामला शासन स्तर तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। इस प्रकरण में प्रमुख सचिव गृह ने दो जून को शाम पांच बजे डीएम-एसपी को विस्तृत रिपोर्ट के साथ तलब किया है।

"पाकिस्तानी नागरिकता प्राप्त महिला को बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी दिए जाने का मामला प्रकाश में आया गया है। जिसको लेकर आज एसपी और एलआईयू के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। उसने रिपोर्ट मांगी गई है, दो जून को प्रमुख सचिव गृह ने इस प्रकरण में बुलाया है। आगे शासन की जो गाइडलाइन होगी उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।" 
-चंद्र प्रकाश त्रिपाठी, डीएम रामपुर

       खबर साभार : हिन्दुस्तान

परिषदीय विद्यालयों में प्रधानों से जुलाई माह से छिनेगा मिड-डे मील का जिम्मा : भोजन बांटने में प्रधानों की मिल रही शिकायतों के आधार पर शासन को भेजा गया प्रस्ताव-तरूणा सिंह न्यूट्रीशियन मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण |

परिषदीय विद्यालयों में प्रधानों से जुलाई माह से छिनेगा मिड-डे मील का जिम्मा : भोजन बांटने में प्रधानों की मिल रही शिकायतों के आधार पर शासन को भेजा गया प्रस्ताव-तरूणा सिंह न्यूट्रीशियन मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण |

           खबर साभार : हिन्दुस्तान

मन की बात : समझ नहीं आता की सरकार भुखमरी मिटा रही है या स्कूल व अध्यापक की बची खुची इज्जत कहते हैं जब देश पर संकट हो तो…………

मन की बात : समझ नहीं आता की सरकार भुखमरी मिटा रही है या स्कूल व अध्यापक की बची खुची इज्जत कहते हैं जब देश पर संकट हो तो…………

समझ नहीं आता की सरकार भुखमरी मिटा रही है या स्कूल व अध्यापक की बची खुची इज्जत कहते हैं जब देश पर संकट हो तो सभी को एकजुट होकर देश के साथ तन मन धन से खड़ा होना चाहिए । पर आज अध्यापक क्या इस भुखमरी की आपदा में ऐसा कर रहा है ?

"क्या कहा भुखमरी है कहाँ ? भाई अगर भुखमरी  नहीं  होती तो सरकार को क्या पड़ी थी की इस 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान में अपने स्कूलो को खोलकर लंगर चलवाती।"

आईये अब बात mdm की करते है , ये दुनिया की सबसे बड़ी योजना है जिसमे एक साथ करोड़ो बच्चे एक साथ बैठकर  भोजन करते है। योजना बहुत ही अच्छी है क्योंकि चाहे अनचाहे पर सत्य यही है की प्राइमरी में पढ़ने वाले बच्चे गरीब परिवार से आते है जहाँ आज भी शिक्षा आय का जरिया नहीं बन पायी है और ऐसे अभिभावको में बच्चे की टिफिन पर अभिभावकों का ध्यान नहीं होता ।

अतः यदि दोपहर में उन्हें स्कूल में mdm मिल  जाता है तो ये उनके शारीरिक व मानसिक विकास के लिए बहुत ही अच्छा है । मुझे याद है जब स्कूल में mdm की जगह अनाज मिलता था।तो स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में कई के गाल पिचके (कुपोषित) हुए होते थे । इसका कारण ये था की ऐसे बच्चे दोपहर में भोजन करने घर नहीं जाते थे । जब mdm प्रारंभ हुआ तो ये स्थिति काफी हद तक दूर हुई ।

अब इस अच्छी योजना की आड़ में खिलवाड़ की बात करते है ये दुनिया की सबसे सस्ती योजना है जिसमें 100 ग्राम अनाज व 3.59 और 5.38 रूपये प्रति छात्र की लागत में एक बच्चे को भोजन मिल जाता है । इस 3.59 और 5.38 रूपये में सब्जी दाल नमक तेल मशाला वो भी ब्रांडेड और लकड़ी की व्यवस्था शामिल है ।इसमें सबसे बड़ा योगदान अध्यापक का है ।अतः इस सस्ती योजना कइ संचालन को लेकर सरकार को कोई  तकलीफ नहीं है । और यही कारन है इस योजना के राजनितिक फायदों के लिए दुरूपयोग करने का । जैसे गर्मी की छुट्टी में स्कूल खोलना वो भी मात्र  mdm के लिए।

यदि सरकार भुखमरी मानती है तो क्या एक परिवार में एक बच्चे के लिए 40*100ग्राम =4kg अनाज व 131 रूपये का सहयोग कर भुखमरी मिटा रही है।

ये बिल्कुल उसी तरह है जैसे अभी कुछ दिन पहले सुखा राहत के नाम पर 60 रूपये का चेक देना। समझ नहीं आता की सरकार भुखमरी मिटा रही है या स्कूल व अध्यापक की बची खुची इज्जत। जहाँ अध्यापक का काम शिक्षण से ज्यादा बच्चों का पोषण होता जा रहा है जिसके लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार व स्वास्थ्य विभाग पहले से चल रहें है । सारांशतः गरीबों का सहयोग करना अलग बात है और सहयोग का दिखावा करना  बात है ।

आज मुझे इस समस्त घटनाक्रम पर एक कहानी याद आ रही है-

एक बार एक बन्दर को जंगल का राजा बना दिया गया उसके बाद जनता एक दिन अपनी शिकायत लेके उस बन्दर राजा के पास गई और उसे दूर करने के लिए मदद मांगी, इतना सुनते ही बन्दर एक पेड़ से दूसरे पेड़ और दूसरे से तीसरे पेड़ पर छलांग लगाने लगा | ये देख कर जनता ने हैरान होकर राजा से पूछा की आप ये क्या कर रहे है तो बन्दर बोला आप देख नहीं रहें है की मैं आपकी समस्याओ को लेकर कितनी भाग दौड़ कर रहा हूँ |
    ~भाई विनोद कुमार भदोही की कलम से

ऑन लाईन पेंशन स्वीकृति प्रणाली ''ई-पेंशन सिस्टम'' का क्रियान्वयन करते हुए सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों/कर्मचारियगणों के पेंशन प्रकरण पूर्व की व्यवस्था की भांति निस्तारित किये जाते रहेंगे |

ऑन लाईन पेंशन स्वीकृति प्रणाली ''ई-पेंशन सिस्टम'' का क्रियान्वयन करते हुए सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों/कर्मचारियगणों के पेंशन प्रकरण पूर्व की व्यवस्था की भांति निस्तारित किये जाते रहेंगे |

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाए;के सम्बन्ध में आदेश के बावजूद और कोर्ट के आदेशों की अवमानना होने से,नौतनवां ब्लाक के शिक्षकों को बी0एल0ओ0 कार्य में लगाये जाने से हुए आक्रोशित : उपजिलाधिकारी को दिया ज्ञापन |

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाए;के सम्बन्ध में आदेश के बावजूद और कोर्ट के आदेशों की अवमानना होने से,नौतनवां ब्लाक के शिक्षकों को बी0एल0ओ0 कार्य में लगाये जाने से हुए आक्रोशित : उपजिलाधिकारी को दिया ज्ञापन |

            खबर साभार : हिन्दुस्तान

शिक्षा की बुनियाद सुधारने पर ही बात बनेगी; उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश उन राज्यों में से हैं,जहां प्राथमिक स्कूलों से माध्यमिक स्कूलों तक पहुंचने वाली लड़कियों की संख्या बेहद कम चूंकि देश में प्रथमिक स्कूलों के लाखों बच्चों के लिए अब भी.………

शिक्षा की बुनियाद सुधारने पर ही बात बनेगी; उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश उन राज्यों में से हैं,जहां प्राथमिक स्कूलों से माध्यमिक स्कूलों तक पहुंचने वाली लड़कियों की संख्या बेहद कम चूंकि देश में प्रथमिक स्कूलों के लाखों बच्चों के लिए अब भी.………

"आईआईटी के होनहार बच्चे अपनी उपलिब्धयों के जरिये निरंतर सुर्खियों में रहते हैं। दूसरी ओर, देश में प्राथमिक स्कूलों के लाखों बच्चों के लिए अब भी सामान्य घटाव में मुश्किलें आती हैं।"

हर कोई जानता है कि जनसांख्यिकीय अवसर भारत के पक्ष में है। हम यह भी जानते हैं कि भारत दुनिया के युवतर देशों में एक है, जहां की 62 प्रतिशत से अधिक की कार्यशील आबादी 15 से 59 वर्ष के बीच है, और कुल जनसंख्या के 54 प्रतिशत से अधिक की आबादी 25 वर्ष की आयु से कम है। 2020 तक भारत की औसत उम्र 29 वर्ष हो जाएगी, जबकि तब अमेरिका की औसत उम्र 40, यूरोप की 46 और जापान की औसत उम्र 47 वर्ष होगी। अगले दो दशकों में विकसित, अमीर देशों की कामकाजी जनसंख्या में जहां चार प्रतिशत की गिरावट आएगी, वहीं भारत में कामकाजी लोगों की संख्या में 32 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। यह हमारे लिए बहुत बड़ा मौका होगा, बशर्ते हमारे युवा जरूरी कौशल और ज्ञान के जरिये इस अवसर का सही ढंग से इस्तेमाल कर पाएं।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कौशल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक नए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का गठन किया है। राष्ट्रीय कौशल नीति का मसौदा तैयार किया गया है और आईटीआई का आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। कौशल विकास के लक्ष्य में कई दूसरे देश भी हमारी मदद करने के इच्छुक हैं।

ये सभी अच्छी खबरें हैं। लेकिन मुख्यधारा के राष्ट्रीय विमर्श में बुनियादी शिक्षा और कौशल विकास के बीच संबंध का जिक्र ही नहीं हो रहा। गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा के बगैर युवाओं के कौशल विकास का लक्ष्य सफल नहीं हो सकता। हताश करने वाले आंकड़े जमीनी यथार्थ बताने के लिए काफी हैं। जैसे, आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले 25 फीसदी बच्चे दूसरी कक्षा का पाठ नहीं पढ़ सकते। जबकि गणित हर कक्षा में अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। एनजीओ प्रथम की 2014 की एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट बताती है कि देश में पढ़ाई का बुनियादी स्तर हताश करने वाला और ठीक वैसा ही है, जैसा पांच वर्ष पहले था। वर्ष 2009 में आठवीं कक्षा के करीब 60 प्रतिशत छात्र अंग्रेजी के सामान्य वाक्य पढ़ पाते थे; जबकि 2014 में केवल 47 फीसदी छात्र ही ऐसा कर पाए।

आईसीटी (इन्फॉरमेशन, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी) विशेषज्ञता में दुनिया भर में भारतीय युवाओं की साख है। आईसीटी के जरिये नेशनल मिशन ऑन एजुकेशन निरंतर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से संपर्क बनाए रखता है और उन्हें नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जोड़ता है। आईआईटी के होनहार बच्चे अपनी उपलिब्धयों के जरिये निरंतर सुर्खियों में रहते हैं। जबकि दूसरी ओर, देश में प्राथमिक स्कूलों के लाखों बच्चों के लिए अब भी सामान्य घटाव में मुश्किलें आती हैं। ग्रामीण स्कूलों के आंकड़े दिखाते हैं कि 60 फीसदी बच्चे अब भी गणित से जूझते हैं। वर्ष 2010 में चौथी कक्षा के 57.7 प्रतिशत बच्चे घटाव कर पाते थे, लेकिन 2014 में यह आंकड़ा घटकर 40.3 फीसदी रह गया।

स्कूलों में छात्रों के दाखिले में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विभिन्न कारणों से बड़ी संख्या में बच्चे अब भी स्कूल छोड़ देते हैं। स्कूलों में सुविधाएं बढ़ी हैं, पर शिक्षकों और छात्रों की कम उपस्थिति अब भी चिंता का कारण है। आंकड़े बताते हैं कि स्कूल में हाजिर रहने वाले बच्चे भी पर्याप्त नहीं सीख पाते। इसमें लैंगिक फर्क को भी जोड़ लें, तो स्थिति और भी चिंताजनक है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश उन राज्यों में से हैं, जहां प्राथमिक स्कूलों से माध्यमिक स्कूलों तक पहुंचने वाली लड़कियों की संख्या सबसे कम है। शिक्षा के क्षेत्र में लड़कों-लड़कियों का यह फर्क श्रम बाजार में भी दिखता है, जहां औरतों को तुलनात्मक रूप से कम वेतन मिलता है। ऐसे में, उन राज्यों में नई नौकरियां सृजित करने की जरूरत है, जो बुनियादी शिक्षा और ढांचागत सुविधाओं के मामले में पिछड़े हैं। ऐसे राज्यों में रोजगार सृजन के लिए युवाओं के तेज कौशल विकास की जरूरत पड़ेगी। लेकिन ऐसा हो, इससे पहले स्कूली शिक्षा में ढांचागत बदलाव और राष्ट्रीय प्रशिक्षु कार्यक्रम में कमोबेश विस्तार जरूरी होगा।

चूंकि हम शैक्षिक क्रांति के मामले में चीन का उल्लेख करते हैं, इसलिए यह समझना आवश्यक है कि वह देश आज इस ऊंचाई पर कैसे पहुंचा। इसकी सबसे बड़ी वजह दरअसल शिक्षा में उसका निवेश है। वर्ष 1998 से चीन ने शिक्षा क्षेत्र में व्यापक निवेश किया; जीडीपी का जितना हिस्सा शिक्षा के मद में वह खर्च करता था, उसका लगभग तिगुना उसने इस क्षेत्र में झोंक दिया। नतीजतन वहां कॉलेजों की संख्या में दोगुनी और छात्रों की संख्या में चार गुनी वृद्धि हुई। वर्ष 1997 में चीन में कॉलेज जाने वाले छात्रों की संख्या दस लाख थी, जो 2007 में बढ़कर 55 लाख हो गई। वर्ष 2010 में वहां शिक्षा की दर 95 प्रतिशत से अधिक थी, और इस क्षेत्र में लैंगिक अंतर घटकर महज पांच फीसदी रह गया-98 प्रतिशत लोगों की तुलना में 93 फीसदी महिलाएं शिक्षित थीं। तुलना करें, तो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में शिक्षा की दर 74.04 प्रतिशत है-यहां पुरुष शिक्षा दर 82.14 फीसदी और महिला शिक्षा दर 65.46 प्रतिशत है। शिक्षा के मामले में हमारे राज्यों के बीच भी भारी अंतर है। ऐसे में बुनियादी शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। शुरुआती वर्षों में मजबूत आधार के बगैर बच्चों का विकास नहीं हो सकता। शिक्षा के बुनियाद को सुधारे बिना कौशल विकास कार्यक्रम की सफलता संभव नहीं है।
-पत्रलेखा चटर्जी विकास संबंधी मुद्दों पर लिखने वाली वरिष्ठ स्तंभकार

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का चुनाव सम्पन्न लल्लन मिश्रा फिर बने प्रदेश अध्यक्ष : चुनाव को लेकर फिर बखेड़ा-खड़ा;दूसरे गुट ने लगाया चुनाव में घपले का आरोप-

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का चुनाव सम्पन्न लल्लन मिश्रा बने फिर प्रदेश अध्यक्ष : चुनाव को लेकर फिर बखेड़ा-खड़ा;दूसरे गुट ने लगाया चुनाव में घपले का आरोप-

1-सभी निर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई गई शपथ 2-शिक्षकों को बीएलओ आदि की ड्यूटी से मुक्ति दिलाने का दिलाया भरोसा

लखनऊ (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का प्रदेश अध्यक्ष लल्लन मिश्रा को चुना गया है। वहीं जबर सिंह यादव को महामंत्री और दिनेश चंद्र शर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। संजय सिंह को कोषाध्यक्ष और सुरेन्द्र यादव संयुक्त महामंत्री बनाए गए हैं। इस तरह 27 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति का गठन कर दिया गया है। नव निर्वाचित पदाधिकारियों और सदस्यों को शनिवार को उप्र कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक लल्लन पांडेय ने शपथ दिलाई। रिसालदार पार्क में स्थित शिक्षक भवन में हुए कार्यक्रम में नवनिर्वाचित अध्यक्ष लल्लन मिश्रा ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनका संघ शिक्षकों को बीएलओ आदि की ड्यूटी से मुक्ति दिलाने के लिए आंदोलन करेगा। 

दूसरे गुट ने लगाया चुनाव में घपले का आरोप-

लखनऊ (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के चुनाव को लेकर फिर बखेड़ा खड़ा हो गया है। दूसरे गुट ने चुनाव में घपला करने का आरोप लगाया है। इसका कहना है कि चुनाव कराया ही नहीं गया और लल्लन मिश्र को संगठन का अध्यक्ष बताते हुए पदाधिकारियों की सूची डिप्टी रजिस्ट्रार के दफ्तर में दाखिल कर दी गई। संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाले संगठन के महामंत्री उमाशंकर सिंह का तर्क है कि निर्वाचन की तिथि से एक महीने पूर्व मतदाता सूची का प्रकाशन होना चाहिए। पर, न तो सूची प्रकाशित की गई और न ही चुनाव कार्यक्रम ही सार्वजनिक किया गया।

पदाधिकारियों की सूची चुपचाप तैयार करके डिप्टी रजिस्ट्रार के कार्यालय में दाखिल कर दी गई। इस तरह के चुनाव का कोई मतलब नहीं है।

        खबर साभार : अमरउजाला

1-शिक्षकों को न बनाया जाए बीएलओ
2-उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कार्यसमिति में किया ऐलान 
3-लल्लन मिश्र अध्यक्ष और जबर सिंह महामंत्री बने

लखनऊ : उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रदेश कार्यसमिति का निर्वाचन शनिवार को संघ के रिसालदार पार्क स्थित कार्यालय पर संपन्न हुआ। प्रदेश कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के अध्यक्ष लल्लन पांडेय ने शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रदेशकार्यकारिणी का चुनाव किया गया तो लल्लन मिश्र को अध्यक्ष, जबर सिंह को महामंत्री, दिनेश चंद्र शर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेंद्र यादव को संयुक्त मंत्री और कोषाध्यक्ष संजय सिंह को बनाया गया है। इस मौके पर अध्यक्ष लल्लन मिश्र ने शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो से इतर किसी तरह की ड्यूटी लगाने की विरोध किया।

         संघर्ष मोर्चा बना :-

आदर्श अनौपचारिक शिक्षा अनुदेशक पर्यवेक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में शिक्षामित्र से बचे अनुदेशकों पर्यवेक्षकों की बैठक में आचार्य अनुदेशकों और मदरसा अनुदेशकों के साथ बैठक कर संयुक्त मोर्चे का गठन किया।

         खबर साभार : दैनिकजागरण

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का चुनाव सम्पन्न लल्लन मिश्रा फिर बने प्रदेश अध्यक्ष : चुनाव को लेकर फिर बखेड़ा-खड़ा;दूसरे गुट ने लगाया चुनाव में घपले का आरोप-

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का चुनाव सम्पन्न लल्लन मिश्रा बने फिर प्रदेश अध्यक्ष : चुनाव को लेकर फिर बखेड़ा-खड़ा;दूसरे गुट ने लगाया चुनाव में घपले का आरोप-

1-सभी निर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई गई शपथ 2-शिक्षकों को बीएलओ आदि की ड्यूटी से मुक्ति दिलाने का दिलाया भरोसा

लखनऊ (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का प्रदेश अध्यक्ष लल्लन मिश्रा को चुना गया है। वहीं जबर सिंह यादव को महामंत्री और दिनेश चंद्र शर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। संजय सिंह को कोषाध्यक्ष और सुरेन्द्र यादव संयुक्त महामंत्री बनाए गए हैं। इस तरह 27 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति का गठन कर दिया गया है। नव निर्वाचित पदाधिकारियों और सदस्यों को शनिवार को उप्र कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक लल्लन पांडेय ने शपथ दिलाई। रिसालदार पार्क में स्थित शिक्षक भवन में हुए कार्यक्रम में नवनिर्वाचित अध्यक्ष लल्लन मिश्रा ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनका संघ शिक्षकों को बीएलओ आदि की ड्यूटी से मुक्ति दिलाने के लिए आंदोलन करेगा। 

दूसरे गुट ने लगाया चुनाव में घपले का आरोप-

लखनऊ (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के चुनाव को लेकर फिर बखेड़ा खड़ा हो गया है। दूसरे गुट ने चुनाव में घपला करने का आरोप लगाया है। इसका कहना है कि चुनाव कराया ही नहीं गया और लल्लन मिश्र को संगठन का अध्यक्ष बताते हुए पदाधिकारियों की सूची डिप्टी रजिस्ट्रार के दफ्तर में दाखिल कर दी गई। संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाले संगठन के महामंत्री उमाशंकर सिंह का तर्क है कि निर्वाचन की तिथि से एक महीने पूर्व मतदाता सूची का प्रकाशन होना चाहिए। पर, न तो सूची प्रकाशित की गई और न ही चुनाव कार्यक्रम ही सार्वजनिक किया गया।

पदाधिकारियों की सूची चुपचाप तैयार करके डिप्टी रजिस्ट्रार के कार्यालय में दाखिल कर दी गई। इस तरह के चुनाव का कोई मतलब नहीं है।

        खबर साभार : अमरउजाला

1-शिक्षकों को न बनाया जाए बीएलओ
2-उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कार्यसमिति में किया ऐलान 
3-लल्लन मिश्र अध्यक्ष और जबर सिंह महामंत्री बने

लखनऊ : उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रदेश कार्यसमिति का निर्वाचन शनिवार को संघ के रिसालदार पार्क स्थित कार्यालय पर संपन्न हुआ। प्रदेश कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के अध्यक्ष लल्लन पांडेय ने शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रदेशकार्यकारिणी का चुनाव किया गया तो लल्लन मिश्र को अध्यक्ष, जबर सिंह को महामंत्री, दिनेश चंद्र शर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेंद्र यादव को संयुक्त मंत्री और कोषाध्यक्ष संजय सिंह को बनाया गया है। इस मौके पर अध्यक्ष लल्लन मिश्र ने शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो से इतर किसी तरह की ड्यूटी लगाने की विरोध किया।

         संघर्ष मोर्चा बना :-

आदर्श अनौपचारिक शिक्षा अनुदेशक पर्यवेक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में शिक्षामित्र से बचे अनुदेशकों पर्यवेक्षकों की बैठक में आचार्य अनुदेशकों और मदरसा अनुदेशकों के साथ बैठक कर संयुक्त मोर्चे का गठन किया।

         खबर साभार : दैनिकजागरण

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) जुलाई में कराने के प्रस्ताव पर शासन के मुहर का इंतजार : लाखों विद्यार्थियों को आवेदन तारीख के घोषणा का है इंतजार-

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) जुलाई में कराने  के प्रस्ताव पर शासन के मुहर का इंतजार : लाखों विद्यार्थियों को आवेदन तारीख के घोषणा का है इंतजार-

इलाहाबाद : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) जुलाई में कराने की तैयारी पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को शासन के मुहर का इंतजार है। परीक्षा नियामक ने जून में ऑनलाइन आवेदन लेने के बाद जुलाई में परीक्षा कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा था लेकिन एक महीने से यह अहम निर्णय लंबित है। इससे पहले परीक्षा नियामक के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) ने सर्वर पर लोड ज्यादा होने का हवाला देकर प्रक्रिया शुरू करने से इन्कार कर दिया था।

एनआइसी का कहना था कि सर्वर पर विभिन्न चरणों में संचालित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का दबाव है। इसमें मुख्य रूप से 72825, सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रकिया, 29334, गणित-विज्ञान शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया और 15000 सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शामिल है।

उधर,टीईटी परीक्षा में 11 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने का अनुमान परीक्षा नियामक कार्यालय को है। एनआइसी ने इतनी बड़ी संख्या में आवेदकों के दबाव को देखते हुए तत्काल आवेदन मांगने की प्रक्रिया शुरू करने से इन्कार कर दिया था। 

पहले टीईटी-2014 केलिए दिसम्बर में आनलाइन आवेदन मांगने और परीक्षा फरवरी-2015 में कराने की तैयारियां की गई थी। इसका प्रस्ताव भी सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से शासन को भेजा गया था लेकिन एनआइसी की वजह से मंजूरी नहीं मिली। अब नये सिरे से टीईटी कराने की तैयारियां शुरू हो गई है। अब कोशिश है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)- 2014 कराने को लेकर शासन से मंजूरी मिलने के बाद जुलाई में आवेदन लेकर अगस्त में टीईटी करा दी जाए।

     खबर साभार : दैनिकजागरण

शिक्षा विभाग में तरह-तरह के कारनामे उजागर होते :दो स्कूलों को पहले बताया फर्जी, फिर दी क्लीनचिट-

शिक्षा विभाग में तरह-तरह के कारनामे उजागर होते :दो स्कूलों को पहले बताया फर्जी, फिर दी क्लीनचिट-

इलाहाबाद : शिक्षा विभाग में तरह-तरह के कारनामे उजागर होते रहते हैं। जैसे विद्यालयों में पढ़ाई न होना, कापी, यूनीफार्म का घटिया होना या न पहुंचना। विद्यालय में बिजली, पानी एवं शौचालय की व्यवस्था नहीं होना आदि..आदि। इधर एक चौंकाने वाला नया मामला सामने आया है जो जसरा ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम निजी विद्यालयों का है। कुछ दिन पहले जिन विद्यालयों को फर्जी बताकर नोटिस थमाई गई, अब उन्हें क्लीनचिट दी जा रही है। शिक्षा विभाग का यह प्रकरण खासा चर्चा का विषय बना है। मामले में यहां पर तैनात खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

अंग्रेजी की पढ़ाई के नाम पर जिले भर में गली-कूचे में स्कूल खुले हुए हैं जिनकी लगातार बढ़ती संख्या और बच्चों से मनमानी फीस वसूली की शिकायत होती रही है, परंतु बेसिक शिक्षा अधिकारी मूकदर्शक की भूमिका में रहे। पानी सिर से ऊपर जाने पर पूर्व जिलाधिकारी भवनाथ सिंह ने आनन फानन में बैठक बुलाकर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई, जिसके बाद बीएसए हरकत में आए और फर्जी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की जांच शुरू कराई तो जिले में उनकी संख्या 1100 से अधिक मिली। इसी के तहत जसरा विकास खंड की खंड शिक्षाधिकारी सुमन केसरवानी ने 29 अप्रैल को फर्जी स्कूलों की सूची जारी की, जिसमें घूरपुर, मानपुर, जसरा, असरवई, लोटाढ़, परसरा, कांटी, गौहानी और टिकरी कला के 62 स्कूल फर्जी मिले। जो बिना मान्यता एवं मानक को पूरा किए बिना ही संचालित किए जा रहे थे। खंड शिक्षाधिकारी ने उक्त सभी स्कूलों को नोटिस जारी कर बंद करने की कार्रवाई शुरू की।

अब वही खंड शिक्षाधिकारी कह रही हैं कि घूरपुर का शिवालिक पब्लिक स्कूल बीकर और नेशनल कांवेंट घूरपुर की मान्यता है। दोनों का नाम उन्होंने गलती से गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची में जारी कर दिया था। अब यहां प्रश्न यह उठता है कि खंड शिक्षाधिकारी ने बिना जांच-पड़ताल के कैसे सूची जारी कर दी। बीएसए ने सूची की पड़ताल क्यों नहीं कराई। उक्त मामले में बीएसए राजकुमार का कहना है कि खंड शिक्षाधिकारी सुमन ने बिना जरूरी जांच-पड़ताल कर ही उक्त विद्यालयों को फर्जी बता दिया था। अब उनकी भूल सुधारी जा रही है।

        खबर साभार : दैनिकजागरण

बीपीएड डिग्री धारकों ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्थायी नियुक्ति की उठाई आवाज : एक जून से लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा-

बीपीएड डिग्री धारकों ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्थायी नियुक्ति की उठाई आवाज : एक जून से लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा-

श्रावस्ती: बीपीएड डिग्री धारकों ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्थायी नियुक्ति की आवाज उठाई है। प्रशिक्षित बीपीएड संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम केपी सिंह को सौंपा। चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो एक जून से लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

संघर्ष मोर्चा के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से शासनादेश जारी कर परिषदीय विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया गया है। इसके बावजूद शारीरिक शिक्षा विषय पढ़ाने के लिए बीपीएड डिग्री धारकों की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर संगठन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री व बेसिक शिक्षा सचिव से भी मुलाकात कर चुके हैं। इसको लेकर जब धरना-प्रदर्शन व आमरण अनशन किया गया तो प्रतिनिधि मंडल से वार्ता के दौरान एनसीटीई से राय लेकर नियुक्ति किए जाने का आश्वासन दिया गया था। जिला संयोजक आशीष आर्य ने कहा कि एनसीटीई ने राज्य सरकार के पत्र पर अपना जवाब भी दे दिया है। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एक जून तक यदि हमारी मांगे नहीं मानी गई तो संगठन फिर से लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। इस दौरान भानु प्रताप सिंह, मनोज वर्मा, मयंकर सिंह, करुणेंद्र शर्मा, अभिषेक राज सिंह, जीतेंद्र मिश्र, रूद्रसेन, वीरेंद्र मौर्य समेत काफी संख्या में बीपीएड डिग्री धारक मौजूद रहे।

        खबर साभार : दैनिकजागरण

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