Thursday, April 30, 2015

परिषदीय अंग्रेजी मॉडल विद्यालयों में अध्यापकों के पदस्थापन/समायोजन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी |

परिषदीय अंग्रेजी मॉडल विद्यालयों में अध्यापकों के पदस्थापन/समायोजन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी |

उच्च प्राथमिक स्कूलों में 29334 स0अ0 भर्ती में आज कोर्ट ने 29 अप्रैल को दिये गये आदेश को प्रभावी करते हुए 15 दिन के अन्दर नियुक्ति पत्र देने का दिया निर्देश : आदेश की मूल प्रति डाउनलोड करें |

उच्च प्राथमिक स्कूलों में 29334 स0अ0 भर्ती में आज कोर्ट ने 29 अप्रैल को दिये गये आदेश को प्रभावी करते हुए 15 दिन के अन्दर नियुक्ति पत्र देने का दिया निर्देश : आदेश की मूल प्रति डाउनलोड करें |

Court No. - 1
Case  :-  WRIT  - A  No. - 24818 of 2015
Petitioner  :-  Santosh Kumar  Mishra  And 4 Ors.
Respondent :-  State  Of U.P. And Anr.
Counsel  for  Petitioner  :-  Anoop Trivedi,Vibhu  Rai
Counsel  for  Respondent :-  C.S.C.,A.K. Yadav

~30/4/2015 का मूल आदेश पत्र क्लिक कर डाउनलोड करें |

Hon'ble  Pankaj Mithal,J.

Heard  Sri  Anoop  Trivedi,  learned  counsel  for  petitioner,  learned  Standing Counsel  for respondent  No.1 and Sri  A.K. Yadav  for respondent  No.2. The  petitioners   claim   that  they  have  been  selected  for  appointment  as Assistant  Teacher  in  primary  schools  but  they  have  not  been  issued  any appointment  letter. A  similar  controversy  by  some  other  selected  candidates  had  come  up  for consideration  before  learned  single  Judge  in  Writ  Petition  No.28686  of  2014 (Brahm  Dev  Yadav  and  others  Vs.  State  of  U.P.  and  others).  It  was  decided vide  judgment  and  order  dated  29.5.2014  directing  respondents-authorities  to complete  process  of  making  actual  appointments  within  a  period  of  two months  and  ensure  that  appointed  persons  join  their  respective  posts  within  a fortnight  thereafter.  The  aforesaid  order  has  been  upheld  by  the  Division Bench  in special  appeal. In  view  of  the  aforesaid  facts  and  circumstances,  with  the  consent  of  the parties,  the  writ  petition  is  disposed  of  in  same  terms  and  conditions  as contained  in  the  judgment  and  order  dated  29.5.2014  passed  in  the  above referred  writ  petition.

Order  Date  :-  30.4.2015
Brijesh

~29/4/2015 का आदेश पत्र यहां क्लिक कर डाउनलोड करें |

Court No.  34
Case :  WRIT  A No.  28686 of 2014 Petitioner  :  Brahm Dev Yadav And 5 Others Respondent : State  Of  U.P.  And 4 Others Counsel for Petitioner : Pankaj  Kumar  Ojha,Shailendra Counsel for Respondent : C.S.C.,A.K. Yadav

Hon'ble Sudhir Agarwal,J.

1. Heard   Sri  Shailendra,   Advocate  for  petitioners,   learned Standing  Counsel  for  respondents  no.  1  to  3  and  Sri  A.K. Yadav  and Sri  Bhanu Pratap Singh,  Advocates  for  respondents  no.  4 and 5.

 2. With  the  consent  of  learned  counsel  for  the  parties,  this Court  proceed  to  decide/dispose  of  the  matter  at  this  stage  under the  Rules  of  this  Court. 

3. The  grievance  of  petitioners  is  that  a  huge  number  of vacancies  in  Primary  Schools  are  continuing  for  years  together and  despite  the  fact  that  eligible  and  suitable  candidates  are available  and  there  is  no  obstruction  before  respondents  in  any manner  yet  for  sheer  inaction  or  apathy,  respondents  are  not completing  process  of  appointment  as  a  result  whereof  thousands of  Primary  Schools  are  running  without Teachers. 

4. The   right   to   primary   education   has   been   made   a fundamental  right  under  the  Constitution  of  India  for  budding upcoming  generation  and  for  accomplishment  thereof  Parliament has  also  enacted  Right  to  Education  Act,  still  the  basic  education department  of  State  of  U.P.  is  showing  a  total  callousness  by allowing  thousands  of  vacancies  of  Teachers  in  Primary  Schools, continuing  for  years  together. 

5. In  the  present  case  the  matter  relates  to  appointment  of about  30,000  Teachers  in  Senior  Primary  Schools,  i.e.,  the  schools imparting  education  from Class  5 to Class  8. 

6. For  appointment  of  29,333  posts  of  Assistant  Teachers  in Senior  Basic  Schools,  process  of  selection  commenced  pursuant to   Government   Order   dated  11.07.2013   but   till   date   those vacancies  have  not  been  filled  in  though  even  counselling  has been completed. 

7. It   is   a  serious  matter  when  thousands  and  thousands vacancies  of  Teachers  in  Primary  Schools,  across  the  State  are vacant  yet  the  State  Government  is  not  able  to  fill  in  those vacancies  since  a  long  time,  for  one  or  the  other  reasons  and many a  times  for  reasons  other  than valid  consideration.

 8. Sri  Shailendra,  learned  counsel  for  the  petitioners,  stated that  for  political  reasons  respondentState  is  indulging  in  diluting the  standard  by  making  amendments  in  recruitment  rules  so  as  to downgrade  the  requisite  qualifications  for  appointment  and  with an  intention  to  cover  a  large  chunk  of  otherwise  unsuitable persons  for  appointment  which  caused  a  spate  of  litigation  for  the last  few  years.  The  ultimate  casualty  is  the  primary  education  in the  State  and  the  consequence  is  that  vacancies  of  Assistant Teachers  of  several  thousands  are  continuing  as  a  result  whereof the  young  children  are  being  deprived  of  their  fundamental  right of  primary education  for  want  of Teachers. 

9. Learned   Standing   Counsel   attempted   to   counter   the allegation  of  inaction  and  apathy  on  the  part  of  State  by  stating that  due  to  several  sets  of  litigations,  the  actual  appointments could  not  be  made  but  the  fact  remains  that  department  of  Basic Education  has  miserably  failed  in  discharge  of  its  constitutional and  statutory  functions  of  ensuring  smooth  running  of  Primary Schools  in  State  of  U.P.  for  the  last  several  years.  Budgetary allocation  to  education  department  is  one  of  the  highest  in  the State   yet  it  has  not  resulted  in  improvement  of  standard  of Primary  Education  and  one  of  the  prime  reason  therefor  is  non appointment of Teachers. 

10. Be  that  as  it  may,  at  this  stage  since  all  preliminaries  and other  rituals  with  regard  to  selection  has  already  completed,  as stated  at  the  Bar,  I  do  not  find  it  an  occasion  to  make  any  further and  detail  observations  on  the  conduct  of  respondents,  except  of placing  on  record  a  serious  disapproval  and  condemnation  of  this Court  on  such  inaction  and  lethargy  as  also  incompetency  on  the part   of  State  in  so  doing.  Larger  public  interest  cannot  be permitted   to   subserve   for  otherwise  individual  or  personal interest  of  State  authorities.

 11. In  the  facts  and  circumstances  of  the  case,  the  writ  petition is   disposed   of   with   a   direction   to   respondentsCompetent Authority(ies)  to  complete  process  of  making  actual  appointments within  a  period  of  two  months  from  the  date  of  production  of  a certified   copy   of   this   order   before   concerned   appointing authorities;   and,   ensure   that   appointed   persons   join   their respective   posts   within  a  further  period  of  fifteen  days  and primary  institutions  starts  functioning  in  the  next  session,  i.e., from  July,  2014  and  onwards,  which  would  be  in  large  public interest. 

Order Date : 29.05.2014
AK

डायट गोरखपुर की राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त प्रवक्ता श्रीमती उमा श्रीवास्तव का सेवा विस्तार की अवधि 65 वर्ष करने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी |

डायट गोरखपुर की राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त प्रवक्ता श्रीमती उमा श्रीवास्तव का सेवा विस्तार की अवधि 65 वर्ष करने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी |

परिषदीय शिक्षकों/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वित्तिय वर्ष 2015-16 में वेतनादि हेतु धनराशि 35,49,19,79,000=00 रूपये का आवटंन जारी |

परिषदीय शिक्षकों/शिक्षणेत्तर कर्मचीरियों के वित्तिय वर्ष 2015-16 में वेतनादि हेतु धनराशि 35,49,19,79,000=00 रूपये का आवटंन जारी | 

बी0टी0सी0 दो वर्षीय पाठ्यक्रम परीक्षा बैच-2012 परीक्षा वर्ष-2015 का रिजल्ट घोषित : यहीं देखें और डाउनलोड करें |

बी0टी0सी0 दो वर्षीय पाठ्यक्रम परीक्षा बैच-2012 परीक्षा वर्ष-2015 का रिजल्ट घोषित : यहीं देखें और डाउनलोड करें |

परीक्षाफल यहां क्लिक कर डाउनलोड करें |

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नवचयनित अंशकालिक अनुदेशकों के आंवटित विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने पर स्थगन आदेश जारी-

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नवचयनित अंशकालिक अनुदेशकों के आंवटित विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने पर स्थगन आदेश जारी-

यूपी में अब बच्चों के कुपोषण की वेब आधारित निगरानी (वेब बेस्ड ट्रैकिंग) : सरकार की मंशा कम वजन के आधार पर बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटना-

यूपी में अब बच्चों के कुपोषण की वेब आधारित निगरानी (वेब बेस्ड ट्रैकिंग) : सरकार की मंशा कम वजन के आधार पर बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटना-

1-प्रदेश में मौजूदा समय में कम वजन के आधार के पर कुपोषित कुल बच्चों की संख्या 42 फीसदी है।
2- राज्य सरकार ने पोषण मिशन कार्यक्रम के तहत एक ‘न्यूट्रिशन सर्विलेन्स वेबसाइट’ शुरू करने का फैसला किया
3-सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1998 से वर्ष 2006 के बीच 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कम वजन की माप में प्रतिवर्ष एक फीसदी से भी कम की कमी आयी

राज्य मुख्यालय | प्रदेश में अब बच्चों के कुपोषण की वेब आधारित निगरानी (वेब बेस्ड ट्रैकिंग) होगी। राज्य सरकार ने पोषण मिशन कार्यक्रम के तहत एक ‘न्यूट्रिशन सर्विलेन्स वेबसाइट’ शुरू करने का फैसला किया है। इससे कुपोषित बच्चों की निगरानी की जायेगी। इसके पीछे सरकार की मंशा कम वजन के आधार पर बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटना है। 

मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बुधवार को इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिये हैं।प्रदेश में मौजूदा समय में कम वजन के आधार के पर कुपोषित कुल बच्चों की संख्या 42 फीसदी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1998 से वर्ष 2006 के बीच 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कम वजन की माप में प्रतिवर्ष एक फीसदी से भी कम की कमी आयी है। खुद मुख्य सचिव ने इस स्थिति को असंतोषजनक बताया है। उन्होंने कम वजन की समस्या से ग्रस्त बच्चों की नियमित निगरानी का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे बच्चों के चिन्हांकन के फलस्वरूप उनकी आवश्यकता के अनुसार निगरानी करते हुए जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि बच्चों में कम वजन की समस्या का निराकरण हो सके।

 मुख्य सचिव ने कहा है कि वेब आधारित निगरानी के तहत पहले चरण में वेबसाइट पर जिले में चिन्हित सभी कम वजन के बच्चों की निगरानी की जानी है। उन्होंने कहा है कि यह कार्य इसी महीने से शुरू कर दिया जाए। निगरानी के आधार पर वेबसाइट पर प्रत्येक बच्चे का ग्रोथ चार्ट रहेगा जिससे उस बच्चे के कुपोषण की स्थिति स्पष्ट हो सके। हर महीने की 10 तारीख तक वेबसाइट पर विवरण डाल दिया जायेगा। वेबसाइट पर निगरानी से संबंधित डाटा इण्ट्री के लिए राज्य पोषण मिशन हर जिले को प्रत्येक माह 10 हजार रु. देगा।

           खबर साभार : हिन्दुस्तान

अंग्रेजी शिक्षा के नाम पर गली-कूचों में चल रहे फर्जी स्कूलों : नए सिरे से होगी फर्जी स्कूलों की जांच-

अंग्रेजी शिक्षा के नाम पर गली-कूचों में चल रहे फर्जी स्कूलों : नए सिरे से होगी फर्जी स्कूलों की जांच-

क्लिक कर पढ़ें-कुकुरमुत्ते की तरह गली-गली अंग्रेजी स्कूल....सो हम आप झूठी दुहाई देते फिरते हैं rte-2009 की | तो प्रश्न खड़ा होता है कि क्या rte का कड़ाई से पालन करना सिर्फ सरकारी विद्यालयों के लिए ही लागू होता है या इन अंग्रेजी स्कूलों के लिए भी है ?

"नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 धारा 18-ए के तहत बिना मान्यता के कोई विद्यालय नहीं चल सकते'।"

इलाहाबाद : अंग्रेजी शिक्षा के नाम पर गली-कूचों में चल रहे फर्जी स्कूलों की नए सिरे से जांच कराई जा रही है। टीम उक्त मोहल्लों दोबारा पड़ताल करेगी, जहां एक बार कार्रवाई हो चुकी है। फर्जी चल रहे विद्यालयों को पांच मई से पहले बंद कराकर जिलाधिकारी भवनाथ सिंह को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। अगर इसके बाद भी कोई स्कूल चलता मिला तो प्रबंधन के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के साथ आर्थिक दंड भी वसूला जाएगा। जिलेभर में अभी तक 95 फर्जी स्कूल बंद कराए गए हैं।

'नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 धारा 18-ए के तहत बिना मान्यता के कोई विद्यालय नहीं चल सकते'। विद्यालयों में बच्चों के बैठने, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, शौचालय एवं खेलकूद की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन जिले के अधिकतर विद्यालय इन मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति यह है कि जिलेभर में दो से चार कमरों में स्कूल खोलकर अभिभावकों से अंग्रेजी शिक्षा के नाम पर मोटी फीस वसूली जा रही है। कुछ दिनों पहले हुई पड़ताल में जिलेभर में ऐसे 1165 विद्यालय चिह्नित हुए थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 1188 हो गई है। शहरीय क्षेत्र में 23 नए फर्जी विद्यालयों को नोटिस जारी की गई है। इसके साथ शहरीय क्षेत्र में फर्जी स्कूलों की संख्या 95 पहुंच गई है। पड़ताल अभी जारी है, इससे फर्जी स्कूलों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। बीएसए राजकुमार का कहना है चिह्नित फर्जी स्कूल बंद कराए जा रहे हैं, अभियान में कोई छूटे न उस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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मान्यता प्राप्त स्कूलों में मिलेगा दाखिला-

फर्जी स्कूलों के बंद होने पर उसमें पढ़ने वाले बच्चों को उनके घर के पास स्थित मान्यता प्राप्त व परिषदीय विद्यालयों में दाखिला कराया जाएगा। इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।

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आधा दर्जन स्कूल बचे-

फर्जी स्कूलों के खिलाफ चल रहे अभियान में कई ऐसे विद्यालय भी चपेट में आ गए, जिनकी मान्यता थी। शहरीय क्षेत्र में ऐसे आधा दर्जन विद्यालय हैं, जिन्हें काफी पहले मान्यता मिली थी। विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रमाण पत्र पेश करने पर उन्हें स्कूल चलाने की अनुमति दे दी गई है।

       खबर साभार : दैनिकजागरण

शिक्षकों ने गृह जिले में तैनाती के लिए दिया धरना : धरने के बाद प्रतिनिधि मंडल बेसिक शिक्षा प्रमुख सचिव से की मुलाकात; मांग पर विचार करने का मिला आश्वासन-

शिक्षकों ने गृह जिले में तैनाती के लिए दिया धरना : धरने के बाद प्रतिनिधि मंडल बेसिक शिक्षा प्रमुख सचिव से की मुलाकात; मांग पर विचार करने का मिला आश्वासन-

लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन (विशिष्ट बीटीसी) के बैनर तले शिक्षकों ने बुधवार को लक्ष्मण मेला मैदान में धरना दिया। शिक्षक गृह जिले मेें तैनाती की मांग कर रहे हैं। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह के अनुसार वर्ष 2012 और 2013 में स्थानांतरण के बाद लगभग 37 हजार शिक्षक अपने गृह जिले पहुंच गए हैं। जबकि 18 हजार शिक्षक अभी भी दूसरे जिले में तैनात हैं। समाजवादी पार्टी ने इन शिक्षकों के उनके गृह जिले में स्थानांतरण की बात कही थी। इसके बावजूद शैक्षिक सत्र 2014 में एक भी शिक्षक का स्थानांतरण नहीं हुआ। धरने के बाद संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव एचएल गुप्ता से मुलाकात की।

संगठन के महामंत्री आशुतोष मिश्र के अनुसार प्रमुख सचिव ने उनकी मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

       खबर साभार : अमरउजाला/नवभारत टाइम्स

प्राइमरी स्कूलों में नए सिरे से होगी 1939 उर्दू शिक्षकों की भर्ती : 2013 में लिए गए आवेदन पर ही होंगी भर्तियां,दोबारा जारी विज्ञापन होगा रद्द-

प्राइमरी स्कूलों में नए सिरे से होगी 1939 उर्दू शिक्षकों की भर्ती : 2013 में लिए गए आवेदन पर ही होंगी भर्तियां,दोबारा जारी विज्ञापन होगा रद्द-

लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के खाली 1939 पदों को भरने के विकल्पों पर नए सिरे से विचार शुरू हो गया है। मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में इन पदों को भरने के लिए विकल्पों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सुझाव दिया गया कि रिक्त पदों को भरने के लिए दुबारा जारी विज्ञापन को रद्द करते हुए पहले में हुए आवेदन के आधार पर ही भर्तियां की जाएं। मुख्य सचिव ने सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता से इसके आधार पर जल्द प्रस्ताव बनाकर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राइमरी स्कूलों में 4280 शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालते हुए 9 जुलाई से 20 अगस्त 2013 तक आवेदन लिए थे। इसमें मोअल्लिम और उर्दू बीटीसी वालों को पात्र माना गया तथा अदीब कामिल को स्नातक व अदीब माहिर को इंटर के समकक्ष माना गया। वहीं अदीब को हाईस्कूल के बराबर नहीं मानते काउंसलिंग म नहीं होने दिया गया। इस बीच तीन चरणों की काउंसलिंग प्रक्रिया में 2341 शिक्षकों के पदों को भर लिया गया। अदीब वालों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो फैसला उनके पक्ष में आया।

फिर बेसिक शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर संशोधित शासनादेश जारी करते हुए अदीब वालों से ऑनलाइन आवेदन मांग लिए। इसमें करीब 23,765 आवेदन आए। इसके विरोध में यूपी बोर्ड से हाईस्कूल करने वाले हाईकोर्ट चले गए और तर्क दिया कि पहले की भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई और नए सिरे से आवेदन ले लिए गए। हाईकोर्ट ने इसके आधार पर दूसरे विज्ञापन को रद्द करने का आदेश दे दिया। अब यह विचार किया जा रहा है कि उर्दू शिक्षकों के रिक्त 1939 पदों को पहले में दिए गए विज्ञापन के आधार पर भर लिया जाए, लेकिन इसमें अदीब के साथ यूपी मदरसा बोर्ड से मुंसी व मौलवी करने वालों को भी हाईस्कूल के समकक्ष मानते हुए भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया जाए।

          खबर साभार : अमरउजाला/हिन्दुस्तान

Wednesday, April 29, 2015

शिक्षामित्रों को आज मिलेगा नियुक्तिपत्र : जिन शिक्षामित्रों की जन्मतिथि फरवरी 1981 तक है, उन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाएगा-

शिक्षामित्रों को आज मिलेगा नियुक्तिपत्र : जिन शिक्षामित्रों की जन्मतिथि फरवरी 1981 तक है, उन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाएगा-

इलाहाबाद : इंतजार की घड़ियां खत्म हुई। द्वितीय बैच के शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद का नियुक्ति पत्र गुरुवार को दिया जाएगा। इसमें जिन शिक्षामित्रों की जन्मतिथि फरवरी 1981 तक है, उन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को तीन बजे से अलग-अलग स्थानों पर नियुक्ति पत्र मिलेगा।

गंगापार क्षेत्र एवं नगर क्षेत्र की महिला शिक्षामित्रों को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के पास स्थित नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय सीपीआई, यमुनापार क्षेत्र की समस्त महिला शिक्षामित्रों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान कार्यालय एवं जिले के सारे शिक्षामित्रों को सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय ममफोर्डगंज फव्वारा चौराहा से नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजकुमार ने बताया कि नियुक्ति पत्र लेने के लिए शिक्षामित्र तय समय पर संबंधित स्थान पर पहुंचे।

          खबर साभार : दैनिकजागरण

प्राथमिक स्कूलों में 15 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती में 57 हजार से अधिक ने किया आवेदन : डीएड को शामिल करते हुए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि थी 27 अप्रैल-

प्राथमिक स्कूलों में 15 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती में 57 हजार से अधिक ने किया आवेदन : डीएड को शामिल करते हुए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि थी 27 अप्रैल-

        खबर साभार : हिन्दुस्तान

यूपी में मुफ्त बंटने वाली यूनिफार्म का रंग बदल सकता फिर : अभी तक नई यूनिफार्म का कलर तय नहीं-

मुफ्त बंटने वाली यूनिफार्म का रंग बदल सकता फिर : अभी तक नई यूनिफार्म का कलर तय नहीं-

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में मुफ्त बंटने वाली यूनिफार्म का रंग बदल सकता है। दरअसल दो साल पहले तक लड़कों को नीली पैंट के साथ सफेद शर्ट, छोटी लड़कियों को नीली स्कर्ट के साथ सफेद शर्ट और बड़ी लड़कियों को सफेद सलवार और नीला कुर्ता दिया जाता था।

लेकिन दो साल पहले रंग बदलकर खाकी कर दिया गया। लेकिन बदले रंग से तमाम अभिभावक संतुष्ट नहीं थे। अभिभावकों की आपत्तियां देखते हुए विभाग ने रंग बदलने का निर्णय लिया है। कई रंग की यूनिफार्म का सैंपल मंगवाया भी गया है। अभी तक नई यूनिफार्म का कलर तय नहीं हो सका है।

     खबर साभार : दैनिकजागरण/हिन्दुस्तान

अब महाराणा प्रताप जयंती पर 9 मई को छुट्टी की तैयारी : सरकार इस बार जयंती पर छुट्टी देने की कर सकती है घोषणा-

अब महाराणा प्रताप जयंती पर 9 मई को छुट्टी की तैयारी : सरकार इस बार जयंती पर छुट्टी देने की कर सकती है घोषणा-

लखनऊ : सरकार अब महाराणा प्रताप जयंती पर छुट्टी देने की तैयारी कर रही है। क्षत्रिय समाज के लोगों की ओर से मंत्री अरविंद सिंह ‘गोप’ ने सीएम के सामने यह मांग रखी है। सीएम अखिलेश यादव ने इस पर विचार करने का भरोसा दिया है। समाजवादी पार्टी के क्षत्रिय विधायक और मंत्री भी महाराणा प्रताप की जयंती पर छुट्टी चाहते हैं। महाराणा प्रताप जयंती 9 मई को पड़ती है, सरकार इस बार जयंती पर छुट्टी देने की घोषणा कर सकती है।

चंद्रशेखर जयंती पर दिखाई थी एकता:
समाजवादी पार्टी के क्षत्रिय नेताओं ने 17 अप्रैल को अपनी एकजुटता दिखाई थी। चंद्रशेखर के बहाने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के सामने मंत्री अरविंद सिंह ‘गोप’, रघुराज प्रताप सिंह(राजा भैया) राजा महेंद्र अरिदमन सिंह, राज किशोर सिंह, सांसद नीरज शेखर, पूर्व सांसद भगवती सिंह और एमएलसी यशवंत सिंह समेत पार्टी के एक दर्जन से ज्यादा विधायक जुटे थे। इसके बाद सभी क्षत्रिय मंत्री-विधायक दूसरा मौका खोज रहे थे कि किस बहाने से एकजुटता दिखाई जाए। अब 9 मई को महाराणा प्रताप की जयंती पड़ रही है। सभी की इस मांग को सपा महासचिव और ग्राम्य विकास राज्य मंत्री अरविंद सिंह ‘गोप’ ने सीएम तक पहुंचाने का जिम्मा लिया था। दरअसल लोकसभा चुनावों की हार के बाद पार्टी में जाति की राजनीति कर रहे नेताओं को करारा झटका लगा था।

छुट्टियों पर सियासत: छुट्टियों को लेकर सियासत हमेशा से होती रही है। हाल ही में आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने हाईकोर्ट में जाति, धर्म और संप्रदाय के आधार पर छुट्टी न घोषित किए जाने की मांग भी रखी थी। उनका तर्क था कि पिछले कुछ सालों में छुट्टियों में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। अब सरकारी छुट्टियां 37 हो गई हैं, जो दूसरे राज्यों से ज्यादा है। यह मांग तब रखी गई जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 6 दिसंबर को अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस पर अवकाश करने की घोषणा की।

"क्षत्रिय समाज के लोगों ने ये मांग रखी थी, मैंने उनकी बात को मुख्यमंत्री जी तक पहुंचा दिया है।"
-अरविंद सिंह ‘गोप’, सपा महासचिव और ग्राम्य विकास, राज्य मंत्री

         खबर साभार : नवभारत टाइम्स

अर्हता को लेकर असमंजस में गणित एवं विज्ञान शिक्षक अभ्यर्थी : हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट अब तक अदालत में पेश नहीं-

अर्हता को लेकर असमंजस में गणित एवं विज्ञान शिक्षक अभ्यर्थी : हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट अब तक अदालत में पेश नहीं-

१-पशोपेश : अर्हता को लेकर असमंजस में शिक्षक अभ्यर्थी
२-29 हजार गणित एवं विज्ञान शिक्षकों की भर्ती का मामला
३-हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट अब तक अदालत में पेश नहीं

इलाहाबाद : प्रदेश के उच्च प्राथमिक स्कूलों में 29 हजार गणित और विज्ञान विषय के शिक्षकों की भर्ती में अर्हता विवाद का निपटारा न होने से शिक्षक अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति है। वे इस बात से आशंकित हैं कि कहीं विवाद पर फैसला आने से पहले ही नियुक्तियां न शुरू कर दी जाएं। इसके लिए उन्होंने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को अपना प्रत्यावेदन भी भेजा है।

~क्लिक कर पढ़ें-गणित व विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति की राह हुई आसान |

गणित एवं विज्ञान के शिक्षकों की भर्ती के लिए पहले शैक्षिक अर्हता बीएससी निर्धारित की गई थी। बाद में इसमें यह संशोधन किया कर दिया गया कि ऐसे अभ्यर्थी भी नियुक्ति किए जा सकते हैं जिनकी स्नातक उपाधि में एक विषय गणित या विज्ञान रहा हो। इस संशोधन के बाद बीएससी एजी, होम साइंस, बीटेक, बीसीए व बीफार्म डिग्री वालों ने भी इस पद के लिए आवेदन किए थे। काउंसिलिंग का आदेश जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने शासन के इस आदेश पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी। उच्च न्यायालय ने अंतिम सूची पर रोक लगा दी थी। इस बीच शासन ने अर्हता विवाद के निपटारे के लिए तीन सदस्यीय हाई पावर कमेटी का गठन कर दिया था।विभागीय सूत्रों के अनुसार कमेटी पिछले साल अगस्त माह में ही अपनी रिपोर्ट दे चुकी है। अभ्यर्थियों के अनुसार इसे आज तक उच्च न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। 

~यहां क्लिक कर पढ़ें-29 हजार जूनियर शिक्षक भर्ती होने की सम्भावना हुई बलवती |

दूसरी और इस भर्ती में नियुक्त पत्र जारी करने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाली नीलिमा कुमारी गौतम के अपनी याचिका वापस लेने के बाद माना जा रहा था कि नियुक्तियों का रास्ता साफ हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनकी याचिका के साथ कनेक्ट दो अन्य याचिकाओं के आधार पर स्थगन आदेश अभी भी प्रभावी है।अभ्यर्थियों का मानना है कि इन याचिकाओं पर जारी अंतरिम आदेश कभी हट सकता है और उसके बाद नियुक्ति का क्रम भी शुरू हो जाएगा। 

ऐसे में कहीं अर्हता विवाद के कारण वे पीछे न रह जाएं। बाद में यदि उन्हें नियुक्ति मिलती भी है तो भी वे अन्य अभ्यर्थियों से जूनियर साबित होंगे। अभ्यर्थियों ने प्रमुख सचिव को प्रत्यावेदन देकर उनसे अनुरोध किया है कि अर्हता विवाद खत्म होने के बाद सभी अभ्यर्थियों को एक साथ ही नियुक्ति दी जाए। इसके पीछे तर्क यह है कि सभी अभ्यर्थियों ने एक साथ ही आवेदन किया है |

       खबर साभार : दैनिकजागरण

सरकारी धन के दुरुपयोग करने के आरोप में हाईकोर्ट के आदेश पर रामपुर कारखाना पुलिस ने तत्कालीन डीआईओएस, बीएसए, बीईओ व गोनरिया इंटर कॉलेज के प्रबंधक पर धोखाधड़ी व जालसाजी का केस दर्ज-

सरकारी धन के दुरुपयोग करने के आरोप में हाईकोर्ट के आदेश पर रामपुर कारखाना पुलिस ने तत्कालीन डीआईओएस, बीएसए, बीईओ व गोनरिया इंटर कॉलेज के प्रबंधक पर धोखाधड़ी व जालसाजी का केस दर्ज-

गोरखपुर। सरकारी धन के दुरुपयोग करने के आरोप में हाईकोर्ट के आदेश पर रामपुर कारखाना पुलिस ने तत्कालीन डीआईओएस, बीएसए, बीईओ व गोनरिया इंटर कॉलेज के प्रबंधक पर धोखाधड़ी व जालसाजी का केस दर्ज किया है। केस दर्ज करने में लापरवाही बरतने पर कोर्ट ने डीजीपी, एसपी देवरिया और एसओ रामपुर कारखाना को अवमानना का नोटिस भी जारी किया है |

       खबर साभार : अमरउजाला

मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों को वेतन देने के लिए 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए : मदरसों को मासिक वेतन के लिए 3.15 अरब-

मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों को वेतन देने के लिए 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए : मदरसों को मासिक वेतन के लिए 3.15 अरब-

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने सहायता प्राप्त अरबी फारसी मदरसों के शिक्षकों के लिए 3.15 अरब रुपये जारी कर दिए हैं। इससे शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन दिया जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए। वहीं, नए आलिया स्तर के मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों को वेतन देने के लिए 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

         खबर साभार : अमरउजाला

समय पर स्कूल आएं और अच्छी शिक्षा दें : बेसिक शिक्षा की बदहाली पर मंत्री राम गोविंद चौधरी नाखुश;शिक्षकों को पत्र भेज कर सुधरने की दी हिदायत-

समय पर स्कूल आएं और अच्छी शिक्षा दें : बेसिक शिक्षा की बदहाली पर मंत्री राम गोविंद चौधरी नाखुश;शिक्षकों को पत्र भेज कर सुधरने की दी हिदायत-

1-बेसिक शिक्षा की बदहाली पर मंत्री राम गोविंद चौधरी नाखुश
2-शिक्षकों को पत्र भेज कर सुधरने की दी हिदायत

~बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी का अध्यापकों के नाम पत्र जारी की कापी देखने के लिए यहां क्लिक करें |

लखनऊ (ब्यूरो)। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी सूबे में प्राथमिक विद्यालयों की दुर्दशा पर खासे नाराज हैं। उन्होंने शिक्षकों को सुधरने की हिदायत देते हुए कहा कि समय पर स्कूल आएं और बच्चों को अच्छी शिक्षा दें। इस बाबत उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को पत्र भी लिखा है।

अपने पत्र में मंत्री ने विद्यालयों की खराब गुणवत्ता पर नाखुशी जताई है। उन्होंने कहा, परिषदीय स्कूलों के कक्षा पांच से आठ तक के छात्रों की हालत यह है कि उन्हें दो-तीन के पहाड़े तक नहीं आते। बच्चे हिन्दी के सरल वाक्यों को भी ठीक से नहीं पढ़ पाते। यह हमारे लिए चिंतनीय है। समाचार पत्रों व चैनलों में इसे बड़े ही हास्यास्पद ढंग से लिखा व दिखाया जाता है। शिक्षकों का हाल यह है कि वे समय पर विद्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। पठन-पाठन में भी रुचि नहीं दिखा रहे। यही वजह है कि परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या में भी कमी आई है। हाल ही में कुछ चैनलों ने स्टिंग ऑपरेशन किया। उसमें भी शिक्षकों की कलई खुल गई। कुछ शिक्षक तो प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं बता पाए। यह देखकर मैं खुद असहज हो गया।

बेसिक शिक्षा के स्कूलों में शिक्षा, किताबें व यूनिफार्म सभी मुफ्त है। दोपहर का भोजन भी मिलता है। विद्यालयों में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं इसके बावजूद लोग दो से तीन कमरों के स्कूलों में महंगी फीस देकर अपने बच्चों को पढ़ने भेज रहे हैं। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को अच्छा वेतन मिल रहा है। कई अन्य लाभ भी दिए जा रहे हैं। फिर भी वे अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। मंत्री ने अंत में लिखा कि इस पत्र को आप मेरा निवेदन मानिए या आदेश लेकिन यह सुनिश्चित करें कि आप समय पर विद्यालय जाएं। बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान कर उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनाने में योगदान दें। यह हम सबका दायित्व भी है।

खबर साभार : अमरउजाला/दैनिकजागरण/नवभारत टाइम्स/हिन्दुस्तान

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