Tuesday, September 30, 2014

कल 1 अक्टूबर को मनाया जायेगा बुजुर्ग दिवस : सूबे के परिषदीय विद्यालयों में -

केंद्रीयकर्मियों को अब 212 फीसद डीए : वित्त मंत्रालय ने जारी किया आदेश-

केंद्रीयकर्मियों को अब 212 फीसद डीए : वित्त मंत्रालय ने जारी किया आदेश-

जासं, इलाहाबाद : केंद्र सरकार ने उन केंद्रीय कर्मियों और केंद्रीय स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को दशहरा, बकरीद और दीपावली के पहले त्योहारों का तोहफा दिया है जो छठे वेतनमान के लाभ की जगह पांचवें वेतनमान का लाभ ही पा रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में एक जुलाई 2014 से 12 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह से अब इन कर्मचारियों को 212 प्रतिशत डीए मिलेगा। इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिया है।

छठें वेतनमान का लाभ पाने वाले केंद्रीयकर्मियों और पेंशनरों के डीए में एक जुलाई 2014 से सात फीसद की वृद्धि पहले ही हुई है। इसका आदेश भी केंद्र सरकार द्वारा जारी किया जा चुका है। उन्हें 107 प्रतिशत डीए मिल रहा है। लेकिन उन कर्मचारियों और स्वायत्तशासी संस्थाओं के कर्मचारियों के लिए डीए की घोषणा नहीं हुई थी, जो कर्मचारी पांचवें वेतनमान के तहत वेतन और भत्ते पा रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों के डीए में 12 फीसद की वृद्धि का आदेश वित्त मंत्रालय ने जारी कर दिया है। अब कर्मचारियों को 212 प्रतिशत डीए की रकम नकद मिलेगी। पांचवें वेतनमान के तहत वेतन पाने वाले कर्मियों को एक जनवरी 14 से 200 फीसद डीए मिल रहा था। केंद्रीय कर्मचारी संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष टीपी मिश्रा का कहना है कि इस संबंध में आदेश जारी हो गया है।

       खबर साभार : दैनिकजागरण

26 हजार न्यूनतम वेतन चाहते हैं केंद्रीय कर्मचारी : सातवें वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों ने की मांग-

26 हजार न्यूनतम वेतन चाहते हैं केंद्रीय कर्मचारी : सातवें वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों ने की मांग-

अजय तिवारी/एसएनबी नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारी अपना न्यूनतम वेतन 26,000 रपए महीना कराना चाह रहे हैं। न्यायमूर्ति अशोक माथुर की अध्यक्षता वाले सातवें वेतन आयोग से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए इतना ही वेतन मांगा गया है। अभी उनका न्यूनतम वेतन सात हजार रपए महीना है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई पर काबू पाने में सरकार नाकाम रही है, इसलिए गुजारा करने के लिए उनका वेतन इस सीमा तक बढ़ाना जरूरी है।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय परामर्शदात्री समिति जेसीएम ने सातवें वेतन आयोग में केंद्र सरकार के 36 लाख कर्मचारियों के लिए इतने ही वेतन की मांग की है। वेतन आयोग को यह बात स्पष्ट तौर पर कही गई है कि सरकार के कैबिनेट सचिव और छोटे कर्मचारी के वेतन के बीच एक अनुपात आठ से अधिक का फासला नहीं होना चाहिए। छठे वेतन आयोग में यह फासला एक अनुपात दस रखा गया था। सातवें वेतन आयोग में सरकार के सबसे बड़े कर्मचारी कैबिनेट सचिव का वेतन 1,60,000 महीना हो जाने का अनुमान लगाया गया है।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अधिक वेतन की दलील के लिए जेसीएम ने जिस फामरूले को आधार बनाया है, वह 15वें श्रम सम्मेलन का है। इस पर अदालत भी सहमति जता चुकी है। इसके मुताबिक 107% डीए वेतन में ही समाहित हो जाएगा। जेसीएम ने यह बात भी जोर देकर कही है कि सातवें वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों के पद किसी भी सूरत में कम नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि पहले ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर काम का ज्यादा बोझ है। कर्मचारियों के पद घटाने का इस आधार पर भी विरोध किया गया है कि इसके जरिए सरकारी दफ्तरों में ठेका श्रमिकों को बढ़ावा मिलेगा। जेसीएम के अध्यक्ष एम. राघवैया ने कहा कि कर्मचारियों के लिए अधिक वेतन नहीं मांगा जा रहा है, जो मांगा जा रहा है वह जायज है और फामरूले के तहत से मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे देना ही होगा, क्योंकि इसे देकर वह कोई मेहरबानी नहीं करेगी, श्रम के बदले वाजिव पगार मांगना हक है। जेसीएम के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा का कहना है कि अभी हमारी मांग यही है कि जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं हुआ है, तब तक अंतरिमराहत की घोषणा की जाए, क्योंकि कर्मचारी महंगाई की मार से परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग में कर्मचारियों के पद समाप्त नहीं होने दिए जाएंगे और यह बात आयोग को कही भी गई है। मिश्रा ने कहा कि रेलवे में एक लाख नई भर्ती हो रही है और इसी प्रकार से और जगह भी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, क्योंकि सरकारी दफ्तरों में निजीकरण रोका जाना है। जम्मू-कश्मीर नहीं जा सकी आयोग की टीम : वेतन आयोग को वहां पदस्थ केंद्र सरकार के कर्मचारियों का पक्ष जानने के लिए श्रीनगर जाना था, पर जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की आपदा की वजह से वेतन आयोग की टीम वहां नहीं जा सकी है। आयोग की टीम के श्रीनगर जाने का कार्यक्रम वहां आई बाढ़ की वजह से स्थगित कर दिया गया था। जल्द ही आयोग की टीम वहां जाने का कार्यक्रम घोषित करेगी।

        खबर साभार : राष्ट्रीय सहारा 

यू-डायस दिवस (30 सितंबर ) पर जनवाचन संबंधी विज्ञप्ति जारी-

टीईटी प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद नियुक्ति पत्र : 72825 प्रशिक्षु का मामला -

टीईटी प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद नियुक्ति पत्र : 72825 प्रशिक्षु का मामला -

लखनऊ | प्राइमरी स्कूलों में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीईटी प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने के बाद ही नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने कहा कि इससे धोखाधड़ी कर नौकरी पाने की चाहत रखने वालों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा |

      खबर साभार : अमरउजाला

दिवाली से पहले मिल सकता है डीए और बोनस : मंहगाई भत्ता देने संम्बन्धी प्रस्ताव पर कार्यवाही प्रारम्भ-

दिवाली से पहले मिल सकता है डीए और बोनस : मंहगाई भत्ता देने संम्बन्धी प्रस्ताव पर कार्यवाही प्रारम्भ-

लखनऊ (ब्यूरो) | राज्य कर्मचारियों को दीपावली के पहले सात प्रतिशत बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता व एक महीने का बोनस मिल सकता है। प्रदेश के वित्त विभाग ने इससे जुड़ी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

प्रदेश सरकार केंद्र के निर्णय के अनुसार सूबे में कार्यरत केंद्रीय सेवा के अफसरों को बढ़ा महंगाई भत्ता देने का आदेश पहले ही कर चुकी है। इस समय पेंशनरों व राज्य कर्मियों को महंगाई भत्ता देने संबंधी प्रस्ताव पर कार्रवाई चल रही है।

सूत्रों के अनुसार जुलाई से सितंबर तक का बढ़ा हुआ सात प्रतिशत डीए जीपीएफ में जमा किया जा सकता है। कर्मचारी 100 प्रतिशत डीए पहले से पा रहे हैं। इस तरह 107 फीसदी डीए अक्तूबर के वेतन के साथ जुड़कर नकद मिल सकता है। वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्र ने अपने कर्मचारियों के लिए बोनस का भी ऐलान कर दिया है। प्रदेश में भी एक महीने का बोनस अधिकतम 3500 रुपये की सीमा में दिया जाता रहा है। वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार दीपावली के पहले बोनस भी दिया जा सकता है|

       खबर साभार : अमरउजाला

गणित-विज्ञान शिक्षकों की होगी एक और काउंसलिंग : मेरिट में आने वाले सभी अभ्यर्थी हो सकेंगे शामिल-

गणित-विज्ञान शिक्षकों की होगी एक और काउंसलिंग : मेरिट में आने वाले सभी अभ्यर्थी हो सकेंगे शामिल-

लखनऊ | उच्च प्राइमरी स्कूलों में गणित व विज्ञान शिक्षकों के रिक्त पदों के लिए एक और काउंसलिंग कराई जाएगी। पांचवीं काउंसलिंग के लिए अभ्यर्थियों को बुलाने की कोई सीमा नहीं होगी। मेरिट में आने वाले सभी अभ्यर्थी काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे। शासन ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से रिक्त पदों के ब्यौरे के साथ अगले चरण की काउंसलिंग के लिए प्रस्ताव मांगा है।

बेसिक शिक्षा विभाग ने पहली बार उच्च प्राइमरी स्कूलों में 29,334 गणित व विज्ञान शिक्षक पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन मांगा था। शासन स्तर पर गणित-विज्ञान शिक्षक के पदों को भरे जाने के संबंध में अब तक हुई काउंसलिंग पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें बताया गया कि चार चरणों की काउंसलिंग के बाद भी सभी पद अभी नहीं भर पाए हैं। इसलिए एक और काउंसलिंग कराने पर मंथन चल रहा है।

         खबर साभार : अमरउजाला व डीएनए

Monday, September 29, 2014

एडेड स्कूल में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर पदों पर नई भर्ती पर रोक हटाये जाने के सम्बन्ध में-

वित्तीय वर्ष 2014-15 में साख सीमा योजनान्तर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्‍यमिक विद्यालय के शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन भुगतान के संबंध में।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आजमगढ़और रायबरेली के स्थानांतरण के सम्बन्ध में-

श्री सूर्य प्रकाश सिंह तत्‍कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, महराजगंज को निलम्‍बन से बहाल करते हुए वरष्ठि प्रवक्‍ता, डायट, जालौन के पद पर तैनात किये जाने विषयक।

सहारनपुर मंडल के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (एल ०टी०) ग्रेड के सहायक अध्यापक/अध्यापिका के रिक्त पदों हेतु विज्ञापन जारी -

छात्रवृति के गलत फॉर्म भेजने पर फंसेंगे अफसर : नई नियमावली में इन्हें माना गया अपराध-

छात्रवृति के गलत फॉर्म भेजने पर फंसेंगे अफसर : नई नियमावली में इन्हें माना गया अपराध

• गलत जानकारी मिलने पर शिक्षण संस्थान और छात्र होंगे ब्लैक लिस्टेड

लखनऊ। शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए भरे गए आवेदन पत्र में गलत जानकारी मिलने पर शिक्षण संस्थान व संबंधित विभाग के अफसरों और छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इतना ही नहीं, डीएम उस संस्थान और छात्र को न सिर्फ काली सूची में डालेंगे, बल्कि तत्काल इसकी सूचना शासन को भी देंगे। यह जानकारी जिलास्तरीय अधिकारियों को दो दिन चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में दी गई।

छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की नई नियमावली में राज्य मुख्यालय स्थित ट्रेजरी से सीधे छात्रों के खाते में रकम भेजने की व्यवस्था की गई है। बैंक खातों में रकम पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के माध्यम से जाएगी। शनिवार और रविवार को भागीदारी भवन में समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के जिलास्तरीय अधिकारियों को पीएफएमएस सॉफ्टवेयर की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनईआईसी) की राज्य इकाई के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक आरएच खान ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन में सही जानकारी देने की जिम्मेदारी विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों की होगी। जिलास्तरीय अधिकारियों को दस्तावेजों या विद्यार्थियों की संख्या में हेराफेरी की संभावना पर नजर रखनी होगी।

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक रामकेवल ने बताया कि नई नियमावली में शुल्क प्रतिपूर्ति आवेदन में किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षण संस्थान, छात्र-छात्राओं और प्रथम दृष्ट्या संलिप्तता मिलने पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी। शिक्षण संस्थान की मान्यता रद्द करने की कार्यवाही भी शुरू होगी।

खबर साभार : अमरउजाला

वेतन सीमा के साथ बढ़ी पेंशन की रकम : 30 सितम्बर तक सभी पेंशन नई पेंशन में ट्रांसफर-

वेतन सीमा के साथ बढ़ी पेंशन की रकम : 30 सितम्बर तक सभी पेंशन नई पेंशन में ट्रांसफर-

१-कम से कम एक हजार, अधिकतम साढ़े सात हजार होगी पेंशन

२-सितंबर की पेंशन के साथ मिलेगी बढ़ी हुई राशि, डाटा तैयार

इलाहाबाद (ब्यूरो)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पेंशनरों को दो दिनों के भीतर बड़ी राहत मिलने जा रही है। जिन्हें अब तक एक हजार रुपये से कम पेंशन मिल रही थी, इस बार उनके खाते में सितंबर की पेंशन के रूप में कम से कम एक हजार रुपये पहुंचेंगे। ऐसे पेंशनरों का डाटा तैयार कर लिया गया है। अगले दो दिनों के भीतर सभी पेंशनरों के खाते में रकम ट्रांसफर कर दी जाएगी।

केंद्र सरकार की इस योजना से देश भर में 32 लाख और इलाहाबाद में 24 हजार से अधिक पेंशनरों को लाभ मिलेगा। इलाहाबाद में इस योजना का उद्घाटन 30 सितंबर (मंगलवार) को शाम चार बजे उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती करेंगी। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अनिल कुमार प्रीतम ने बताया कि पूरे देश में ईपीएफओ के 50 लाख और इलाहाबाद में 41,412 पेंशनर हैं। देश में 32 लाख और इलाहाबाद में 24,224 पेंशनरों को प्रतिमाह एक हजार रुपये से कम पेंशन मिल रही है लेकिन अब उन्हें केंद्र सरकार की योजना के तहत कम से कम एक हजार रुपये पेंशन मिलेगी। सितंबर माह की पेंशन भुगतान के साथ इस योजना की शुरुआत हो जाएगी। 30 सितंबर तक सभी पेंशनरों के खाते में नई पेंशन ट्रांसफर कर दी जाएगी। डॉटा तैयार किया जा चुका है।

योजना के तहत अनिवार्य वेतन सीमा भी 6500 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है। ऐसे में अधिकतम पेंशन की रकम भी अब 3250 रुपये से बढ़कर 7500 रुपये हो गई है।
कम से कम एक हजार, अधिकतम साढ़े सात हजार होगी पेंशन
सितंबर की पेंशन के साथ मिलेगी बढ़ी हुई राशि, डाटा तैयार

खबर साभार : अमरउजाला

Sunday, September 28, 2014

शिक्षक का पद एक, नियम अनेक-

शिक्षक का पद एक, नियम अनेक-

जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : विभाग एक, पद एक, कॉलेज का स्तर एक। अंतर है तो केवल सरकारी और वित्त पोषित का। इस मामूली से अंतर वाले कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया बिल्कुल अलग-अलग है। एक के लिए अभ्यर्थी लिखित परीक्षा देते हैं और फिर साक्षात्कार से जूझते हैं, वहीं दूसरे कॉलेज में सिर्फ साक्षात्कार से ही बन जाते हैं 'मास्साब'।

प्रदेश सरकार राजकीय माध्यमिक कॉलेजों में 6645 एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। यह भर्ती मंडल स्तर पर पुरुष एवं महिला शिक्षकों की होगी व इसमें साक्षात्कार के माध्यम से चयन किया जाएगा। वहीं, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भी टीजीटी-पीजीटी 2013 की परीक्षा कराने जा रही है। इसमें भी पद छह हजार से अधिक हैं। एक ओर सरकार राजकीय कॉलेजों में एलटी ग्रेड शिक्षक की भर्ती साक्षात्कार से करा रही है तो दूसरी ओर प्रदेश के वित्त पोषित कॉलेजों में इसी पद के लिए शिक्षकों की भर्ती के लिए बाकायदे लिखित परीक्षा होगी, जिसकी तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं।

एक ही विभाग में एक ही पद के लिए दो अलग-अलग नियम होने से प्रतियोगी छात्र खासे खफा हैं। टीजीटी-पीजीटी संघर्ष मोर्चा के रिंकू सिंह ने कहा है कि इस मुद्दे पर वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। प्रतियोगी छात्र तीस सितंबर को शिक्षा निदेशालय का घेराव करेंगे और इस मुद्दे पर तब तक शांत होकर नहीं बैठेंगे जब तक सरकार नियमों में एकरूपता नहीं लाती।

2011 की परीक्षा के लिए अध्यक्ष को घेरेंग

2011 की परीक्षा के लिए अध्यक्ष को घेरेंगे

जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : टीजीटी-पीजीटी परीक्षा कराने को लेकर आए दिन आंदोलन करने वाले युवा अब 2011 एवं 2013 की पहले परीक्षा कराने को लेकर उलझ गए हैं। जूनियर अभ्यर्थियों की मांग है कि 2011 की परीक्षा पहले कराई जाए। इसी मुद्दे को लेकर रविवार को सभी ने साथ बैठकर रणनीति बनाई और यह तय किया कि सोमवार को इस मुद्दे पर चयन बोर्ड के अध्यक्ष का घेराव किया जाएगा।

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने पहले टीजीटी-पीजीटी 2013 की परीक्षा कराने का एलान किया है। इस निर्णय से वैसे आम अभ्यर्थी प्रसन्न हैं, लेकिन जूनियर अभ्यर्थी निर्णय बदलने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनका हक मारा जाएगा इसलिए पहले 2011 की परीक्षा कराई जाए। इसी मुद्दे पर रविवार को चंद्रशेखर आजाद पार्क में अभ्यर्थियों की बैठक राकेश वर्मा व दीपांकर वर्मा की अगुवाई में हुई। इसमें यह तय किया गया कि सोमवार को अभ्यर्थी चयन बोर्ड के अध्यक्ष का घेराव करेंगे और उनसे अनुरोध करेंगे कि 2011 की परीक्षा से संबंधित विसंगतियां दूर करके उसे ही पहले कराया जाए। अनुराग वर्मा, प्रेम मिश्रा, राकेश वर्मा, महेंद्र सिंह यादव, केजी वर्मा, आशीष यादव, धर्मेद्र, संपूर्णानंद पांडेय समेत तमाम अभ्यर्थी मौजूद थे।

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चयन बोर्ड की दूसरी बैठक आज

इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की सितंबर माह में ही दूसरी बैठक सोमवार को होगी। माना जा रहा है कि यह बैठक काफी हंगामेदार होगी और इसमें तमाम निर्णय लिए जाएंगे। इसकी वजह यह है कि बोर्ड सभी मुद्दों पर इस बैठक में चर्चा करने जा रहा है। बोर्ड की पिछली बैठक 18 सितंबर को हुई थी उसमें टीजीटी-पीजीटी 2013 की परीक्षा कराने पर फैसला हुआ था।

पोलियो उन्मूलन में धन्यवाद उपेक्षा पर झलका शिक्षकों का दर्द : सोशल मीडिया/फेसबुक से मुख्यमंत्री को दर्ज करा रहे विरोध-

पोलियो उन्मूलन में धन्यवाद उपेक्षा पर झलका शिक्षकों का दर्द : सोशल मीडिया/फेसबुक से मुख्यमंत्री को दर्ज करा रहे विरोध-

अमर उजाला ब्यूरो फतेहपुर। पल्स पोलियो उन्मूलन में यूनीसेफ द्वारा सूबे के मुखिया को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया । मुखिया को सम्मानित करते दिखाए जाने वाले सरकारी विज्ञापन की धन्यवाद लिस्ट में किसी भी शिक्षक का नाम न देखकर जिले के शिक्षकों में भारी असंतोष है। शिक्षकों का कहना है कि पोलियो उन्मूलन अभियान को सफ ल बनाने उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होने के बाद भी सरकार ने सूची में उनका नाम नहीं शामिल किया। शिक्षक मुख्यमंत्री के ट्विटर पेज व फेसबुक पेज पर अपनी बात रख रहे हैं।

इस मुहिम में राज्य के लगभग हर जिले से शिक्षक सोशल मीडिया के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे है। इस मुद्दे को अमर उजाला ने भी प्राथमिक शिक्षकों का मन टटोलने की कोशिश की, तो प्रदेश के मुखिया द्वारा न याद किये जाने का दर्द उभर आया। पोलियो अभियान में चिकित्सकों के अलावा प्रत्येक रविवार को शिक्षकों ने नि:शुल्क समर्पण भाव से इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को सफल बनाने मे अपनी महती भूमिका निभाई है। शिक्षकों के साथ बच्चे भी समय-समय पर रैलियां निकाल कर समाज में जागरूकता फैलाई है। सरकार के इस दोयम दर्जे के व्यवहार से शिक्षक व छात्र आहत हैं। शिक्षकों में रोष है कि सरकार ने उन्हें धन्यवाद के पात्र भी नहीं समझा है|
प्रवीण त्रिवेदी कहते हैं कि अगर यह अभियान विफल हो गया होता तो मीडिया बड़ी सी हेडिंग में छापता है कि शिक्षकों के असहयोग से पल्स पोलियो का कार्यक्रम विफल हो गया। कहना है कि यह अन्याय शिक्षकों से ज्यादा बच्चों पर किया गया है जो भूखे पेट भरी दोपहर में बच्चों को घर से बुलाकर दो बूंद जिंदगी की पिलाते रहे हैं।
शिक्षक बृजेंद्र सिंह सेंगर कहते हैं कि नींव के पत्थर नींव में ही रह जाते हैं उनका सारा समर्पण व त्याग सब बेकार हो जाता है।
शिक्षक डा. विवेक शुक्ल कहते हैं कि निश्चित तौर पर यह उपलब्धि है, लेकिन शिक्षकों के प्रयासों का प्रतिफल उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में शिक्षक हतोत्साहित हुआ है।
शिक्षक रश्मी श्रीवास्तव कहती हैं कि जब दुष्प्रचार का नाम आए, तो शिक्षक को सबसे पहले और जब श्रेय का मौका आया तो हम भुला दिए गए। 
शिक्षक सुधांसु व गिरीश कहते है कि पिछले 15 सालों से हम सब पल्स पोलियो कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपने संडे बलिदान किए और विषम परिस्थिति में भी पूरी तन्मयता से शिक्षक और बच्चे इस कार्य में लगे रहे...लगता है शीर्ष नेतृत्व धृतराष्ट हो गए है।

दिल्ली की हुई है पुनरावृत्ति-

फतेहपुर। करीब साल भर पहले कें द्र सरकार ने भी पोलियो उन्मूलन के लिए धन्यवाद विज्ञापन जारी किया था। जिसमें एनजीओ, स्वास्थ्य महकमा, धर्मगुरु आदि सभी का धन्यवाद के पात्र मानते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया था। जिसमें शिक्षकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। मामले को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दोबारा विज्ञापन छपवाया था, जिसमें शिक्षकों को शामिल किया गया था |

TET भर्ती में हुए ये 5 बवाल , जो हमेशा रहेंगे याद : 14 अगस्त तक पूरी होनी थी प्रक्रिया-

TET भर्ती में हुए ये 5 बवाल , जो हमेशा रहेंगे याद : 14 अगस्त तक पूरी होनी थी प्रक्रिया

१-आवेदन ही बन गये बवाल-ए-जान
२-वेबसाइट न खुलने पर बवाल
३-काउंसलिंग में शामिल न करने पर बवाल
४-टीईटी मेरिट में हुआ बवाल
५-नए प्रारूप को लेकर हूआ बवाल

लखनऊ : 72,825 शिक्षक भर्ती की काउंसलिंग दूसरे चरण में है। जल्द ही टीईटी पास बीएड वालों के सहायक अध्यापक बनने की हसरत पूरी हो जाएगी।

सहायक अध्यापक बनने के लिए छह माह के प्रशिक्षण के साथ ही एक और परीक्षा के दौर से गुजरना होगा। नवंबर 2011 में टीईटी परीक्षा आयोजित होने के बाद से ही प्रक्रिया में कई दिक्कतें आईं।

पहले तो सरकार बदली, फिर प्रशासकीय स्तर पर लापरवाही के कारण भर्ती प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 अगस्त तक दी गई समय सीमा में पूरी न हो सकी।

अब उम्मीद की जा रही है कि काउंसलिंग पूरी होने के बाद आवेदकों को नियुक्ति पत्र मिल जाएगा, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में आवेदकों को जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वो उन्हें हमेशा याद रहेंगी। यहां हम शिक्षक भर्ती से जुड़ी ऐसी बातें आपको बता रहे हैं जो कि आवेदकों और प्रशासन दोनों के लिए ही बवाल-ए-जान रही।

ऐसा कभी नहीं हुआ होगा कि एक पद के लिए आवेदक को 30 से 35 हजार रुपये का आर्थिक भार उठाना पड़ा हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई वर्ष 2011 के 72825 सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों की नियुक्ति प्रक्रिया में यही हुआ।

मायावती सरकार में पहले अधिकतम पांच जनपदों में आवेदन का विकल्प दिया। 500 प्रति जनपद शुल्क जमा कराया। फिर इसी शुल्क पर प्रदेश के सभी जनपदों में आवेदन की छूट दे दी गई।

फिर अखिलेश सरकार में इन्हीं पदों के लिए नए सिरे से आवेदन मांगे। प्रत्येक जनपद के लिए आवेदन का शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया। ऐसे में जनपद वार नियुक्तियां होने की स्थिति में ज्यादातर आवेदकों ने औसतन 40 से 45 जनपदों में आवेदन किए और 20 से 25 हजार रुपये आर्थिक भार उठाया।

इससे आवेदकों पर आर्थिक भार तो पड़ा ही, वहीं गलती सुधारने के लिए आए लगभग 70 लाख प्रत्यावेदन भी बेसिक शिक्षा विभाग के लिए आफत बन गए।

सहायक शिक्षक भर्ती मामले में तकनीकी कारणों से भी आवेदकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शिक्षक भर्ती के लिए पहली मेरिट जारी होते ही ट्रैफिक इतना बढ़ गया कि साइट ही बैठ गई।

कई जिलों में वेबसाइट खुल नहीं सकी। इस पर सचिव बेसिक शिक्षा हीरालाल गुप्त ने तकनीकी समस्या पर विचार और निराकरण के लिए में बैठक बुलाई थी।

कई जिलों में पांच दिनों बाद आवेदक अपना विव‌रण सके। इसके अलावा, टीईटी मेरिट में इतनी गलतियां थी कि आवेदकों के लिए प्रत्येक जिले में जाकर गलतियां सुधरवाना एक चुनौती बन गया।

बहुत से अभ्यर्थियों के टीईटी अंक गलत चढ़े हुए थे। नाम, जन्म तिथि आदि की गड़बड़ियां बहुत ही ज्यादा थीं।

टीईटी 2011 में उत्तीर्ण कुछ अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल न किए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। एक याची के अधिवक्ता के अनुसार टीईटी 2011 का परिणाम 25 नवंबर 2011 को घोषित कर दिया गया।

तमाम ऐसे अभ्यर्थी थे जिनका परिणाम हाईकोर्ट के आदेश पर देर से फरवरी और मार्च 2012 में घोषित किया गया। तब तक शिक्षक पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया समाप्‍त हो चुकी थी। इन अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट से भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए जाने की मांग की थी।

जिसे संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। अभ्यर्थियों का यह भी कहना था कि प्रशासकीय हीला-हवाली का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है, जो कि सही नहीं है।
4. टीईटी मेरिट पर हुआ बवाल

शिक्षक भर्ती में तीसरी बड़ी मुश्किल तब आई जब अखिलेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से टीईटी की मेरिट के आधार पर शिक्षकों के चयन के इलाहाबाद के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की अपील की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षकों के चयन टीईटी की मेरिट के आधार पर किए जाने का आदेश दिया था और बसपा सरकार में 30 नवंबर, 2011 को जारी हुए भर्ती विज्ञापन को सही ठहराया था। जबकि अखिलेश सरकार ने 31 अगस्त 2012 के शासनादेश को रद्द कर दिया था।

अखिलेश सरकार का कहना था कि अगस्त, 2012 के शासनादेश को रद्द करने और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में जारी किए गए नवंबर, 2011 को जारी भर्ती विज्ञापन को सही ठहराए जाने के हाईकोर्ट का आदेश उचित नहीं है।

सपा सरकार ने 2012 में जारी किए गए शासनादेश में टीईटी को मात्र अर्हता माना था और चयन का आधार शैक्षणिक गुणांक कर दिया गया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के इनकार कर दिया।

प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में पहली मेरिट आने के बाद प्रत्यावेदन का नया प्रारूप भी आवेदकों के लिए परेशानी का सबब बना। अभ्यर्थियों के अनुसार एक्सेल फॉर्मेट में जारी नए प्रारूप में कुछ और सूचनाएं मांगी गईं।

ऐसे में समझ में नहीं आ रहा है कि पहले कम सूचनाओं के साथ भेजे गए प्रत्यावेदन फॉर्म स्वीकार होंगे या नहीं।

वहीं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने प्रारूप में किसी भी तरह का परिवर्तन होने से इंकार कर दिया था।

बहरहाल, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अब पूरी होती हुई नजर आ रही है। लेकिन, ये कुछ ऐसी दिक्कतें थीं, जिसे आवेदनकर्ता हमेशा याद रखेंगे।

     खबर साभार : अमरउजाला

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