Thursday, July 31, 2014

समायोजित हो रहे शिक्षामित्रों के लिए टीईटी जरूरी : सुनवाई 7 अगस्त को

समायोजित हो रहे शिक्षामित्रों के लिए टीईटी जरूरी : सुनवाई 7 अगस्त को

इलाहाबाद: प्रदेश सरकार भले ही बड़े पैमाने पर शिक्षामित्रों का समायोजन कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार के अधीन मंत्रलय और शैक्षिक संस्थान प्रदेश सरकार के इस कदम से सहमत नहीं है। नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन ने जन सूचना अधिकार के जवाब में कहा है कि शिक्षामित्रों को भी टीईटी की परीक्षा से गुजरना होगा। इन टिप्पणियों से भले ही अभी नियुक्ति प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ रहा है, लेकिन कोर्ट में जो याचिकाएं लंबित हैं, इससे संघर्ष समिति को बल मिलना तय है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के समायोजन के लिए बीते 19 जून को शासनादेश जारी किया था। 58 हजार शिक्षामित्रों को 31 जुलाई तक नियुक्ति पत्र देना है। उधर, बीटीसी संघर्ष समिति और टीईटी मोर्चा उत्तर प्रदेश ने समायोजन की इस प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस प्रकरण में तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। वैसे कोर्ट ने अभी तक समायोजन प्रक्रिया को रोका नहीं है। इसी बीच मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने एक जनसूचना के जवाब में स्पष्ट किया है कि शिक्षामित्रों की नियुक्ति में टीईटी करवाना जरूरी है, इसमें यूपी सरकार को कोई राहत नहीं दी गई है। मंत्रलय के साथ ही एनसीटीई ने भी इस पर मुहर लगायी है।

साभार : दैनिक जागरण

    ‘शिक्षामित्रों को टीईटी जरूरी’ 

इलाहाबाद : प्रदेश सरकार भले ही बड़े पैमाने पर शिक्षामित्रों का समायोजन कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार के अधीन मंत्रलय और शैक्षिक संस्थान प्रदेश सरकार के इस कदम से सहमत नहीं है। एनसीटीई ने जन सूचना के जवाब में कहा है कि शिक्षामित्रों को भी टीईटी की परीक्षा से गुजरना होगा। इन टिप्पणियों से भले ही अभी नियुक्ति प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ रहा है, लेकिन कोर्ट में जो याचिकाएं लंबित हैं, इससे संघर्ष समिति को बल मिलना तय है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के समायोजन के लिए बीते 19 जून को शासनादेश जारी किया था। इस प्रक्रिया में शिक्षकों की नियुक्ति की नियमावली भी बदली गई है। उसके आधार पर जुलाई महीने में जनपदवार शिक्षामित्रों की काउंसिलिंग हुई और विकल्प मांगे जा रहे हैं। 58 हजार शिक्षामित्रों को 31 जुलाई तक नियुक्ति पत्र दिया जाना है। उधर, बीटीसी संघर्ष समिति और टेट मोर्चा उत्तर प्रदेश ने समायोजन की इस प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। बताते हैं कि इस प्रकरण में तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। वैसे कोर्ट ने अभी तक समायोजन प्रक्रिया को रोका नहीं है। इसी बीच मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने भी एक जनसूचना के जवाब में स्पष्ट किया है कि शिक्षामित्रों की नियुक्ति में टीईटी करवाना जरूरी है, इसमें यूपी सरकार को कोई राहत नहीं दी गई है। मंत्रलय के साथ ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई ने भी इस पर मुहर लगायी है। मथुरा के तालाब शाही कोसीकलां निवासी ब्रजेश कुमार को जनसूचना के जवाब में एनसीटीई ने स्पष्ट किया है कि शिक्षामित्रों को भी टीईटी की परीक्षा से गुजरना होगा। शिक्षामित्रों में शैक्षिक गुणवत्ता लाने के लिए उन्हें प्रशिक्षित कराया जाना जरूरी है। एनसीटीई ने यह जवाब यूपी सरकार के शिक्षामित्रों की समायोजन प्रक्रिया को देखते हुए नहीं दिया है, बल्कि 2011 में ही दो टूक कहा था कि टीईटी सभी के लिए अनिवार्य है। हाल में ही उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी शिक्षामित्रों की नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य बताया है। इस उठापटक से बेपरवाह प्राथमिक शिक्षा विभाग शिक्षामित्रों को नियुक्ति पत्र देने जा रहा है। माना जा रहा है कि यह काम महज दो दिन में ही पूरा हो जाएगा।

    महिला शिक्षामित्रों ने कराई काउंसिलिंग-

इलाहाबाद : प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन दुरुस्त करने के लिए शासन शिक्षामित्रों का समायोजन सहायक अध्यापक पद पर कर रहा है। इसके तहत सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय पर महिला शिक्षामित्रों की काउंसिलिंग हुई। एक जनवरी 1982 से 15 जून 1990 आयुवर्ग की अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। बुधवार को दिनभर चली काउंसिलिंग में बुलाए गए 250 शिक्षामित्रों में 248 ने भाग लिया। इलाहाबाद में 1400 शिक्षामित्रों का समायोजन है। इसमें पुरुष शिक्षामित्रों की काउंसिलिंग पहले हो चुकी है। काउंसिलिंग कराने वाले शिक्षामित्रों को शुक्रवार को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा।

    शिक्षामित्रों के मसले पर सुनवाई 7 को-

इलाहाबाद : शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाने की सरकारी नीति के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई सात अगस्त को मुख्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ एवं न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ करेगी। याचिका में बिना टीईटी पास किए शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाने की वैधानिकता को चुनौती दी गई है।

"हम प्रदेश सरकार के आदेश पर शिक्षामित्रों के समायोजन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। केंद्र सरकार के मंत्रालय और शैक्षिक संस्थानों की मंशा की जानकारी नहीं है और न ही सरकार ने कोई ऐसा आदेश दिया है। इसलिए जल्द ही शिक्षामित्र चरणवार सहायक शिक्षक बन जाएंगे"
                                                                  - राजकुमार। बेसिक शिक्षा अधिकारी इलाहाबाद।

सह-समन्‍वयकों के प्रधानाध्‍यापक पद पर पदोन्‍नति के फलस्‍वरूप नहीं जायेगा सह-समन्‍वयक का पद, मा0उच्‍च न्‍यायालय के आदेश के अनुपालन में हुआ आदेश जारी-


सह-समन्‍वयकों के प्रधानाध्‍यापक पद पर पदोन्‍नति के फलस्‍वरूप नहीं जायेगा सह-समन्‍वयक का पद, मा0उच्‍च न्‍यायालय के आदेश के अनुपालन में हुआ आदेश जारी-

शिक्षामित्रों ने मांगी केंद्र से टीईटी पर साफ राय -

शिक्षामित्रों ने मांगी केंद्र से टीईटी पर साफ राय

राज्य मुख्यालय। शिक्षमित्रों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह पैराटीचर के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा पर अपना मत स्पष्ट करे। यूपी मे शिक्षमित्रों के बिना टीईटी समायोजन पर केन्द्र ने एक आरटीआई के जवाब मे कहा है कि ये अधिकार केवल केन्द्रसरकार के पास है और यूपी ने इस बाबत उससे कोई अनुमति नहीं ली। लेकिन पंजाब मे एक आरटीआई के जवाब मे लिखा है कि टीईटी से छूट का अधिकार राज्यों के पास है।


अब शिक्षमित्रों ने इसी पत्र को आधार बनाकर केन्द्र से पूंछा है कि वह दो अलग-अलग राज्यों मे टीईटी पर अलग-अलग जवाब कैसे दे सकता है? प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष गाजी इमाम आला ने कहा की उनके संघ ने केंद्र में सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक और सम्बंधित शासन के अधिकारीयों से संपर्क साध कर इस सम्बन्ध में सपष्ट दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है।

साभार : हिन्दुस्तान

शिक्षामित्रों ने मांगी केंद्र से टीईटी पर साफ राय -

शिक्षामित्रों ने मांगी केंद्र से टीईटी पर साफ राय

राज्य मुख्यालय। शिक्षमित्रों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह पैराटीचर के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा पर अपना मत स्पष्ट करे। यूपी मे शिक्षमित्रों के बिना टीईटी समायोजन पर केन्द्र ने एक आरटीआई के जवाब मे कहा है कि ये अधिकार केवल केन्द्रसरकार के पास है और यूपी ने इस बाबत उससे कोई अनुमति नहीं ली। लेकिन पंजाब मे एक आरटीआई के जवाब मे लिखा है कि टीईटी से छूट का अधिकार राज्यों के पास है।


अब शिक्षमित्रों ने इसी पत्र को आधार बनाकर केन्द्र से पूंछा है कि वह दो अलग-अलग राज्यों मे टीईटी पर अलग-अलग जवाब कैसे दे सकता है? प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष गाजी इमाम आला ने कहा की उनके संघ ने केंद्र में सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक और सम्बंधित शासन के अधिकारीयों से संपर्क साध कर इस सम्बन्ध में सपष्ट दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है।

साभार : हिन्दुस्तान

शिक्षमित्रों को एनसीटीई ने नहीं दी टीईटी से छूट : आरटीआई के तहत मिली सूचना से हुई पुष्टि -


शिक्षमित्रों को एनसीटीई ने नहीं दी टीईटी से छूट : आरटीआई के तहत मिली सूचना से हुई पुष्टि -

शिक्षक भर्ती में 12 तक ठीक करनी होंगी गलतियां-

शिक्षक भर्ती में 12 तक ठीक करनी होंगी गलतियां -

१-डायट प्राचार्यों को प्रत्यावेदन ठीक कराने के निर्देश

२-एनआईसी से तैयार सॉफ्टवेर जिलों मे भेजे गए

लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों में 72,825 शिक्षकों की भर्ती के लिए जिलेवार आए प्रत्यावेदनों के आधार पर 12 अगस्त तक गलतियां सुधारी जाएंगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने इस संबंध में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्यों को निर्देश दे दिया है। उनसे कहा गया है कि गलतियां ठीक करने के लिए नेशनल इंफारमेटिक सेंटर (एनआईसी) से तैयार किए गए साॅफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि एक जिले में गलतियां ठीक होने के साथ ही सभी स्थानों पर ठीक हो जाएं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में टीईटी मेरिट के आधार पर 72,825 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। बेसिक शिक्षा विभाग ने जिलेवार आए आवेदनों में गलती सुधारने के लिए अभ्यर्थियों से दो चरणों में पहले 7 जुलाई फिर 21 जुलाई तक प्रत्यावेदन मांगे। विभागीय जानकारों की मानें तो 70 लाख से भी अधिक प्रत्यावेदन जिलों को प्राप्त हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में आए प्रत्यावेदनों के आधार पर डायट प्राचार्यों को मूल प्रत्यावेदन ठीक करने हैं।

इसके लिए एनआईसी से एक विशेष साॅफ्टवेयर तैयार कराया गया है। एससीईआरटी ने इस साॅफ्टवेयर को जिलों को भेज दिया है और वेबसाइट पर भी डाल दिया है। डायटों में इस साॅफ्टवेयर के माध्यम से गलतियां ठीक की जाएंगी। इसके लिए 12 अगस्त का समय दिया गया है। इसके बाद शिक्षक भर्ती के लिए मेरिट बनाने का काम होगा। मेरिट बनने के बाद जिलेवार काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

साभार : अमरउजाला

परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को यूनीफॉर्म का समय से मिल पाना इस बार भी टेढ़ी खीर -

परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को यूनीफॉर्म का समय से मिल पाना इस बार भी टेढ़ी खीर -

सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए नई यूनीफॉर्म का समय से मिल पाना इस बार भी टेढ़ी खीर लग रहा है। शिक्षा सत्र का एक महीना बीतने के बाद भी यूनीफॉर्म वितरण का शासनादेश तक नहीं हो सका है। अब शासनादेश हो भी जाए तो पिछले वषों का अनुभव देखते हुए यह संभव नहीं लगता कि यूनीफॉर्म जल्दी मिल पाएगी। सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों के कक्षा आठ तक के बच्चों को हर साल दो जोड़ी यूनिफॉर्म निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन हर साल यह व्यवस्था सरकारी सुस्ती का शिकार हो जाती है। सरकारी कार्यशैली तो जिम्मेदार है ही, ड्रेस के लिए निर्धारित बजट और प्रक्रिया भी कम अवरोधपूर्ण नहीं है। दो जोड़ी निशुल्क यूनीफॉर्म के लिए महज चार सौ रुपये का बजट निर्धारित है।

इस बजट में 65 फीसद केंद्र और 35 फीसद राज्य सरकार का अंशदान होता है। इस बजट के लिहाज से हिसाब लगायें तो कपड़ा और सिलाई सहित सौ रुपये में एक पैंट और इतने में ही एक शर्ट देनी होती है। सहज ही कल्पना की जा सकती है कि इतनी रकम में यह यूनीफॉर्म कैसे तैयार होती होगी। दूसरा अवरोध वितरण की प्रक्रिया है। खरीदारी और वितरण की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंध समितियों पर है, लेकिन वह इतने बजट में यह जिम्मेदारी पूरी करने में कतराती हैं। यही वजह है कि पूरा सत्र शासनादेश जारी होने, बजट का इंतजार करने, सस्ता कपड़ा और सस्ता दर्जी तलाशने में गुजर जाता है। पिछले शिक्षा सत्र में यही हुआ। जो ड्रेस सत्र शुरू होने के साथ मिल जानी चाहिए, वह कई स्कूलों में इस साल जनवरी तक मिल पायी। जहां गुणवत्ता देखी गई वहां एक जोड़ी ड्रेस ही बमुश्किल उपलब्ध हुई और जहां दो जोड़ी का आंकड़ा पूरा किया गया वहां गुणवत्ता किनारे रखनी पड़ी। 

इस बार भी यही कहानी न दोहरायी जाए, इसके लिए पिछले अनुभव से सीख लेकर बजट की राशि और खरीद प्रक्रिया को तार्किक बनाने की जरूरत है। कुछ नया सोचने की आवश्यकता है। एक सुझाव है कि यूनीफॉर्म तैयार कराने की जिम्मेदारी में स्वयं सहायता समूहों को जोड़ लिया जाए तो इससे अतिरिक्त रोजगार का सृजन हो सकता है और समय पर गुणवत्तापरक परिधान मिलना भी संभव हो सकता है। अन्य उपाय भी हो सकते हैं लेकिन इसके लिए सरकारी सहायता को खैरात की तरह बांटने वाली मानसिकता से ऊपर उठकर सोचना होगा।

साभार : दैनिक जागरण सम्पादकीय

समायोजित हो रहे शिक्षामित्रों के लिए टीईटी जरूरू-

समायोजित हो रहे शिक्षामित्रों के लिए टीईटी जरूरी -

इलाहाबाद: प्रदेश सरकार भले ही बड़े पैमाने पर शिक्षामित्रों का समायोजन कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार के अधीन मंत्रलय और शैक्षिक संस्थान प्रदेश सरकार के इस कदम से सहमत नहीं है। नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन ने जन सूचना अधिकार के जवाब में कहा है कि शिक्षामित्रों को भी टीईटी की परीक्षा से गुजरना होगा। इन टिप्पणियों से भले ही अभी नियुक्ति प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ रहा है, लेकिन कोर्ट में जो याचिकाएं लंबित हैं, इससे संघर्ष समिति को बल मिलना तय है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के समायोजन के लिए बीते 19 जून को शासनादेश जारी किया था। 58 हजार शिक्षामित्रों को 31 जुलाई तक नियुक्ति पत्र देना है। उधर, बीटीसी संघर्ष समिति और टीईटी मोर्चा उत्तर प्रदेश ने समायोजन की इस प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस प्रकरण में तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। वैसे कोर्ट ने अभी तक समायोजन प्रक्रिया को रोका नहीं है। इसी बीच मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने एक जनसूचना के जवाब में स्पष्ट किया है कि शिक्षामित्रों की नियुक्ति में टीईटी करवाना जरूरी है, इसमें यूपी सरकार को कोई राहत नहीं दी गई है। मंत्रलय के साथ ही एनसीटीई ने भी इस पर मुहर लगायी है।

साभार : दैनिक जागरण

Wednesday, July 30, 2014

शिक्षामित्रों की शिक्षक पद पर नियुक्ति के निर्देश : श्री संजय सिन्‍हा, सचिव ने जारी किये निर्देश -

शिक्षामित्रों की शिक्षक पद पर नियुक्ति के निर्देश : श्री संजय सिन्‍हा, सचिव ने जारी किये निर्देश -

    सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिया निर्देश।


परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत और दूरस्थ शिक्षा विधि से बीटीसी, बीटीसी उर्दू और विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए उप्र बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। नियुक्ति पत्र का प्रारूप भी भेजा गया है। यह भी कहा गया है कि नियुक्ति उच्च न्यायालय में योजित विभिन्न रिट याचिकाओं में पारित किए जाने वाले अंतिम निर्णय के अधीन होगी। सरकार ने दूरस्थ शिक्षा विधि से बीटीसी, बीटीसी उर्दू, विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षामित्रों को अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देते हुए उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त करने का फैसला किया था। शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने के लिए बीती 19 और 30 जून को शासनादेश जारी हुए थे। पहले चरण में दूरस्थ शिक्षा विधि से बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त तकरीबन 59 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने की कार्रवाई चल रही है। परिषदीय शिक्षकों का नियुक्ति प्राधिकारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी होता है। इसलिए उन्हें कार्रवाई का निर्देश दिया है।

Tuesday, July 29, 2014

प्राथमिक स्कूलों से लेकर अब माध्यमिक कालेजों में साप्ताहिक पाठ्यक्रम : इस क्रम में इलाहाबाद में फरमान जारी-

प्राथमिक स्कूलों से लेकर अब माध्यमिक कालेजों में साप्ताहिक पाठ्यक्रम : इस क्रम में इलाहाबाद में फरमान जारी-


जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : प्राथमिक स्कूल से लेकर माध्यमिक कालेजों तक में इस बार शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में इलाहाबाद के कालेजों में तो साप्ताहिक पाठ्यक्रम लागू करने का फरमान जारी किया गया है। इससे पठन-पाठन का बेहतर माहौल बनेगा साथ ही शिक्षकों की जवाबदेही भी जरूरी होगी।

मौजूदा शैक्षिक सत्र को सुचारू रूप से संचालित कराने के लिए सोमवार को जिला विद्यालय निरीक्षक प्रथम कोमल यादव ने संतअंथोनी ग‌र्ल्स इंटर कालेज में प्रधानाचार्यो की बैठक की। डीआइओएस कोमल यादव ने कहा कि समय पर छात्रवृत्ति और मास्टर डेटा न फीड किया जाना जनपद के लिए असंतोष की बात है। उन्होंने प्रधानाचार्यो से कहा कि जनपद में कार्यो को बेहतर ढंग से पूर्ण किया जाए। वित्त एवं लेखाधिकारी संजय सिंह ने कहा कि अब शिक्षा विभाग के वेतन की समस्या लगभग समाप्त हो गयी है, परन्तु आटो जनरेट वेतन के कारण अब कोई आयकर छिपाने का प्रयास करेगा या फिर समय पर विवरण नहीं भेजेगा तो उसे आयकर विभाग के चक्कर काटने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए 2005 के बाद नियुक्त अध्यापकों और कर्मचारियों के आंशिक पेंशन योजना का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। सभी कर्मचारियों के विवरण को समयबद्ध तरीके से विद्यालयों को भेजना पड़ेगा अन्यथा बोझ बढ़ेगा।

प्रधानाचार्यो की बैठक में जिले में दो-दो जिला विद्यालय निरीक्षकों की तैनाती विशेष रही। ज्ञात हो कि जिला विद्यालय निरीक्षक प्रथम के पद पर कोमल यादव व डीआइओएस द्वितीय के पद पर आरएन विश्वकर्मा को शासन ने नियुक्त किया है। समाज कल्याण अधिकारी ने छात्रवृत्ति के निर्देशों को बताया। संचालन सह जिला विद्यालय निरीक्षक सत्य नारायण चौरसिया ने किया। यहां पर डॉ. हरि प्रकाश, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. अर्जुन प्रसाद, डॉ. जय प्रकाश वर्मा, लवकुश सिंह, उपेंद्र वर्मा, कामाक्षी सिंह, श्याम शंकर यादव, करुणा शंकर, मो. जावेद, दिवाकर, चंद्रशेखर सिंह, डॉ. दिलीप अवस्थी, अशोक कुमार, डॉ. अनिल सिंह, रवींद्र कुमार, कुमार दीपक आदि थे।

साभार : दैनिक जागरण

सूचना न देने पर महराजगंज बीएसए पर जुर्माना : 25 हजार रूपये का जुर्माना हुआ-

सूचना न देने पर महराजगंज बीएसए पर जुर्माना : 25 हजार रूपये का जुर्माना हुआ-

Tue, 29 Jul 2014 10:39 PM (IST)

लखनऊ। समय से सूचना उपलब्ध न कराने पर राज्य सूचना आयोग ने महराजगंज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया है। रतनपुर के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के संबंध में राम नरेश सिंह ने नौ अप्रैल 2012 को तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश से सूचना मांगी थी। जब बीएसए ने सूचना नहीं उपलब्ध कराई तो अपील राज्य सूचना आयोग में की गई। आयोग ने बीएसए को सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद भी सूचना नहीं दी गई। सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त सैय्यद हैदर अब्बास रिजवी ने बीएसए पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया। यह उनके वेतन से तीन बराबर किस्तों में काटने का निर्देश दिया।

  साभार : दैनिक जागरण

महिला, विकलांग को मनचाहे स्कूल : कल 362 शिक्षामित्राें से विद्यालय का विकल्प लिया जाएगा

महिला, विकलांग को मनचाहे स्कूल : कल 362 शिक्षामित्राें से विद्यालय का विकल्प लिया जाएगा

महराजगंज। शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक बनने में केवल चंद घंटे बाकी हैं। 30 जुलाई को विकलांग और महिला शिक्षामित्रों से मनचाहे विद्यालय पर तैनाती के लिए विकल्प लिया जाएगा। शेष 457 शिक्षामित्राें को रोस्टर के अनुसार विद्यालय पर तैनात किया जाएगा। सभी 819 शिक्षामित्रों को 31 जुलाई तक सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दे दी जाएगी।
पहले चरण में 819 शिक्षामित्राें को सहायक अध्यापक बनाया जाना है। 17,18 और 19 जुलाई को काउंसिलिंग के बाद से शिक्षामित्र विद्यालय पर तैनात किए जाने को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग का चक्कर लगा रहे थे। रविवार और ईद की छुट्टी को लेकर शिक्षामित्र 31 जुलाई तक विद्यालयों पर तैनात हो जाने को लेकर सशंकित थे। सोमवार को जिले भर के शिक्षामित्र बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। सुबह से ही शिक्षामित्राें का जमावड़ा लगा रहा।

 शिक्षामित्र संजय गुप्त, प्रेमकिशन, मुन्ना निषाद, रामकिशुन यादव, अनिल सिंह, अमरनाथ यादव ने बीएसए से मुलाकात की। बीएसए ने 30 जुलाई तक कार्यवाही पूरी करके समय से विद्यालय पर नियुक्त कर देने का आश्वासन दिया। इस संबंध में सोमवार को देर शाम बीएसए ने विज्ञप्ति प्रकाशित कर दिया। बीएसए जयप्रकाश ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक विद्यालय पर सहायक अध्यापक पद पर तैनाती के लिए 819 शिक्षामित्रों की काउंसिलिंग हुई है। इसमें 346 महिला और 16 विकलांग शिक्षामित्र हैं। पहले महिला शिक्षामित्र और विकलांग पुरुष शिक्षामित्राें से 30 जुलाई को सुबह 10 बजे से डायट पर विद्यालयों का विकल्प लिया जाएगा। शेष 457 शिक्षामित्राें को रोस्टर के अनुसार तैनात किया जाएगा। पहले एकल विद्यालयों पर नियुक्त किया जाएगा। 31 जुलाई तक सभी शिक्षामित्रों को नियुक्ति पत्र देने की कोशिश होगी।


साभार : अमर उजाला

शिक्षमित्रों को टीईटी से छूट नहीं : निर्धारित न्यूनतम योग्यता मे छूट का अधिकार केंद्र सरकार के पास-

शिक्षमित्रों को टीईटी से छूट नहीं : निर्धारित न्यूनतम योग्यता मे छूट का अधिकार केंद्र सरकार के पास-

शिक्षक प्रशिक्षु चयन 2011 चयन प्रकिया में दिशा निर्देश जारी : 12 अगस्‍त तक संसोधन की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश -

शिक्षक प्रशिक्षु चयन 2011 चयन प्रकिया में दिशा निर्देश जारी : 12 अगस्‍त तक संसोधन की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश -

Monday, July 28, 2014

उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान/गणित विषय के सहायक अध्‍यापकों के पद पर नियुक्ति हेतु आयोजित द्वितीय काउन्‍सलिंग की सूचना के सम्‍बन्‍ध में, तृतीय काउन्‍सलिंग की उम्‍मीद जल्‍द-


शिक्षामित्रों के सहायक अध्‍यापको के पद पर समायोजन हेतु नियुक्ति पत्र जारी करने के आदेश जारी और साथ में नियुक्ति आदेश का प्रारूप -

शिक्षामित्रों के सहायक अध्‍यापको के पद पर समायोजन हेतु नियुक्ति पत्र जारी करने के आदेश जारी और साथ में नियुक्ति के आदेश का प्रारूप -

सर्व शिक्षा अभियान : स्कूल न जाने वाले बच्चों के सर्वे का बदला मानक -

सर्व शिक्षा अभियान : स्कूल न जाने वाले बच्चों के सर्वे का बदला मानक -

१-नि:शक्त व 3 से 5 वर्ष के बच्चों कीभी होगी पहचान

२-मलिन बस्तियों व झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों का भी होगा सर्वे 

लखनऊ। सर्व शिक्षा अभियान में स्कूल न जाने वाले बच्चों के चिह्नीकरण का मानक बदल गया है। अब केवल 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों का ही सर्वे नहीं होगा बल्कि हाउस होल्ड (स्कूल न जाने वाले) बच्चों के सर्वे में 3 से 5 वर्ष वालों को भी शामिल किया जाएगा। यही नहीं, वोटर लिस्ट के आधार पर मलिन बस्ती और झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों को भी चिह्नित किया जाएगा। यह अभियान 16 से 31 अगस्त तक चलेगा। सर्व शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक कुमुदलता श्रीवास्तव ने इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेजे हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के आधार पर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में बच्चों को दाखिला देने के लिए 31 जुलाई तक स्कूल चलो अभियान चलाया जाता है। इस दौरान प्रभात फेरियां निकाल कर अभिभावकों को प्रेरित किया जाता है कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें। शिक्षक और शिक्षा मित्र घर-घर जाकर बच्चों को दाखिला भी देते हैं। परिषदीय स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया 15 अगस्त तक चलती है ताकि कोई बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रह जाए। इसके बाद भी स्कूल न जाने वाले बच्चों को चिह्नित करने के लिए हाउस होल्ड सर्वे कराया जाता है। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय ने इस बार सर्वे का मानक बदल दिया है।

3 से 14 वर्ष के बच्चों का लिया जाएगा विवरण
हाउस होल्ड सर्वे में अब 3 से 5 वर्ष की आयु वाले बच्चों को भी चिह्नित किया जाएगा। छह से 14 वर्ष की आयु वालों को आउट ऑफ स्कूल माना जाएगा। सर्वे में 3 से 14 वर्ष की आयु वाले बच्चों का पूरा विवरण लिया जाएगा। इसमें बच्चों का नाम भी शामिल रहेगा। इस दौरान अभिभावकों से मिली सूचना को रजिस्टर पर दर्ज करने के साथ ही उनका नाम पता लिखते हुए उनके हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगवाया जाएगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि स्कूल न जाने वाले निशक्त बच्चे कितने हैं। मंडल मुख्यालय के जिलों पर बीएसए दो ऐसे स्कूल चिह्नित करेंगे जिसमें स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी से सर्वे कराया जाएगा। अन्य स्थानों पर शिक्षकों व शिक्षा मित्रों से ही सर्वे कराया जाएगा।
माइग्रेट बच्चों की अलग बनेगी सूची
माइग्रेट होने वाले (दूसरे स्थान से आने वाले) बच्चों को भी चिह्नित किया जाएगा। ग्राम सभा या वार्ड से कोई परिवार माइग्रेट होता है या कोई परिवार दूसरे स्थान से आया है तो उसकी सूचना विद्यालय प्रबंधन समिति और वार्ड शिक्षा समिति के सचिव सर्वे रजिस्टर पर दर्ज करेंगे। ऐसे बच्चों का पूरा विवरण माइग्रेट करने वाले स्थान के जिले व प्रदेश से शिक्षा अधिकारियों को भेजा जाएगा। सर्वे के समय माइग्रेट बच्चों की सूचना अलग से रखी जाएगी ताकि इनकी अलग से पहचान हो सके।

साभार : अमरउजाला

मैनपुरी का मिड-डे मील घोटाला : पूर्व बीएसए की तलाश में सीबीआई का छापा

मैनपुरी का मिड-डे मील घोटाला : पूर्व बीएसए की तलाश में सीबीआई का छापा

१-दो शिक्षकों को अपने साथ ले गयी सीबीआई टीम

२-शनिवार देर रात चार स्थानों पर जिले मे मारा गया छापा

मैनपुरी (ब्यूरो)। मिड-डे मील घोटाले की जांच कर रही सीबीआई टीम ने शनिवार देर रात मैनपुरी में चार स्थानों पर छापा मारा। टीम के सदस्य दो शिक्षकों को अपने साथ ले गए हैं। सीबीआई टीम ने बीएसए कार्यालय के एक पूर्व लिपिक से भी पूछताछ की है। इस चर्चित मिड-डे मील घोटाले में तत्कालीन डीएम एसएन दुबे व सीडीओ जेबी सहित कई को गिरफ्तार कर चुकी सीबीआई को अब मैनपुरी के पूर्व बीएसए केडीएन राम की तलाश है।

सीबीआई को जानकारी मिली है कि केडीएन राम कुछ दिन पहले मैनपुरी में आए थे और यहां चार दिन तक रुके थे। उनकी तलाश में सीबीआई की टीम ने नगर की आवास विकास कालोनी, राजा का बाग और नगला गोवर्धन में छापे मारे। बताया जा रहा है कि भोगांव में भी एक शिक्षक नेता के यहां सीबीआई ने छापा मारा। टीम के सदस्य दो शिक्षकों अपने साथ ले गए हैं। बीएसए कार्यालय के एक पूर्व लिपिक के घर भी सीबीआई ने छापा मारा और उससे पूछताछ की। टीम पूर्व लिपिक को अपने साथ ले गई है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
जिले में तीन वर्ष पूर्व यह घोटाला हुआ था। धांधली और गलत तरीके से भुगतान की शिकायत पर तत्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद ने जांच कराई थी।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि 44888.15 कुंतल खाद्यान्न की हेराफेरी कर सात करोड़ 63 लाख 48 हजार 521 रुपये का गलत भुगतान किया गया है। आपूर्ति विभाग के निरीक्षक संजय मिश्रा ने बीएसए केडीएन राम, पूर्व बीएसए रघुवीर सिंह, लिपिक विशुन दयाल राजपूत, सर्च के जिला समन्वयक प्रशांत मिश्रा, सचिव विवेक सुदर्शन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
सीबीआई ने लंबी जांच के बाद सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें पूर्व डीएम एसएन दुबे, डीसी शुक्ला, सीडीओ जेबी सिंह व एचएस चतुर्वेदी, पूर्व बीएसए रघुवीर सिंह, केडीएन राम, लिपिक विशुनदयाल राजपूत, सर्च के जिला समन्वयक प्रशांत मिश्रा, सचिव विवेक सुदर्शन को घोटाले का दोषी पाया गया है। आरोपियों में कुछ को सीबीआई ने गिरफ्तार किया तो कुछ ने कोर्ट में समर्पण कर दिया। इस मामले में तत्कालीन बीएसए केडीएन राम और सीडीओ एचएस चतुर्वेदी अभी फरार चल रहे हैं।

साभार : अमरउजाला

शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाने की प्रक्रिया शुरू : बलरामपुर में बंटे नियुक्ति पत्र लेकिन नियुक्ति हाईकोर्ट के निर्णय के अधीन होगी


शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाने की प्रक्रिया शुरू : बलरामपुर में बंटे नियुक्ति पत्र लेकिन नियुक्ति हाईकोर्ट के निर्णय के अधीन होगी

१-वेतनमान 9300-34800 व ग्रेड पे 4200 रुपये दिया जाएगा

२-पत्र में साफ कहा गया है कि नियुक्ति हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन होगी

३-शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त करने की प्रक्रिया १९ जून से प्रारम्भ हुई थी

४-शासनादेश के अनुसार ३१ जुलाई तक नियुक्ति पत्र निर्गत करना है

लखनऊ। शासनादेश के मुताबिक शिक्षा मित्रों को प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बलरामपुर में शिक्षा मित्रों को नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं। शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक का वेतनमान 9300-34800 ग्रेड पे 4200 रुपये दिया जाएगा। वे एक साल तक अस्थायी शिक्षक के रूप में कार्य करेंगे। पत्र में साफ किया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन होगी।

बलरामपुर जिले में बांटे गए नियुक्ति पत्र के मुताबिक महिला शिक्षा मित्रों को विकल्प के आधार पर तथा पुरुष शिक्षा मित्रों को बंद व एकल स्कूलों में तैनाती दी जा रही है। शिक्षा मित्रों को नियुक्ति पत्र इस शर्त के साथ दी गई है कि यदि काउंसलिंग के दौरान उनके दिखाए गए प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो उनका चयन स्वत: निरस्त हो जाएगा। उत्तर प्रदेश आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र शाही, उत्तर प्रदेश शिक्षा मित्र संघ के अध्यक्ष गाजी इमाम आला और उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने राज्य सरकार का आभार जताते हुए शेष बचे शिक्षा मित्रों को सोमवार शाम तक नियुक्ति पत्र दिलाने का अनुरोध किया है।

 गौरतलब है कि शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती देने का कार्यक्रम 19 जून को जारी किया गया। पहले चरण में 58,826 शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाया जा रहा है। जिलों में चयन समिति से अनुमोदन कराते हुए 31 जुलाई तक नियुक्ति पत्र दे दिया जाएगा।

साभार : अमरउजाला

Sunday, July 27, 2014

90 फीसदी को ईद से पहले मिला वेतन : डीएम ने ट्रेजरी रूल-27 के तहत वेतन भुगतान का दिया था आदेश -

90 फीसदी को ईद से पहले मिला वेतन : डीएम ने ट्रेजरी रूल -27 के तहत वेतन भुगतान का दिया था आदेश -

इलाहाबाद (ब्यूरो)। ईद से पहले 26 जुलाई को 90 फीसदी राजकीय कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर दिया गया। इनमें बहुत से विभागों के पास बजट नहीं था लेकिन उन्होंने डीएम से संपर्क किया और डीएम ने ट्रेजरी रूल-27 के तहत वेतन भुगतान का आदेश जारी कर दिया। इसके बावजूद दस फीसदी विभागों के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका।

 साथ ही शासन ने पेंशनरों के लिए भी कोई आदेश जारी नहीं किया। शासन के इस रवैये से पेंशनरों में नाराजगी है। संयोजक हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि जब शासन को निर्देश था कि 26 जुलाई को वेतन का भुगतान कर दिया जाए तो आहरण वितरण अधिकारियों को इसके लिए प्रयास करना चाहिए था। उन्हें मालूम था कि वेतन के लिए बजट पूरा नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद न तो बजट की मांग की गई और न ही ट्रेजरी रूल-27 के तहत वेतन भुगतान का कोई प्रयास किया गया।

   साभार : अमरउजाला

बलरामपुर अस्पताल में शिक्षामित्रों का हंगामा : चिकित्सा प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर मामला गरमाया

बलरामपुर अस्पताल में शिक्षामित्रों का हंगामा : चिकित्सा प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर मामला गरमाया

लखनऊ (एसएनबी)। चिकित्सा प्रमाण पत्र बनवाने सैकड़ों की संख्या में आये शिक्षा मित्रों ने शनिवार को बलरामपुर अस्पताल में हंगामा किया। उनकी मांग थी कि जांच करके तत्काल रिपोर्ट दी जाये। इसके लिए शिक्षा मित्र अस्पताल के निदेशक कार्यालय पहुंचे, जहां मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. यूएन रॉय ने खून की जांच छोड़कर एक्सरे और आंखों की जांच अवधि बढ़ाने के निर्देश दिये। इसके चलते साढ़े चार बजे तक जांच कार्य चला। ऐसे में चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो गयी। रक्त की जांच से वंचित रहे तमाम शिक्षा मित्र सोमवार को बुलाये गये हैं। शनिवार को मुख्य चिकित्साधिकारी से चिकित्सा प्रमाण के लिए जांच पर्ची को लेकर सैकड़ों की संख्या में शिक्षा मित्र बलरामपुर अस्पताल पहुंचे, जहां पैथालॉजी में पूर्वाह्न 11 बजे रक्त के नमूने लेने का समय खत्म हो चुका था। शिक्षा मित्रों ने दबाव बनाया तो रक्त के नमूने संग्रह का समय आधा घण्टा बढ़ा दिया गया, लेकिन अभ्यर्थियों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही थी। लखनऊ ही नहीं आसपास के जिलों के शिक्षा मित्रों के आने का क्रम जारी रहा। ऐसे में पैथालॉजी के कर्मचारी ने रक्त के नमूने लेने से मना कर दिया। इससे नाराज शिक्षा मित्रों ने हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति को बिगड़ते देख कर्मचारियों ने जांच कर तत्काल रिपोर्ट देने की मांग की साढ़े चार बजे तक चला जांच कार्य रक्त की जांच कराने वाले तमाम शिक्षामित्र सोमवार को बुलाये गये |

पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने स्थिति को नियंतण्रमें किया। इसके बाद शिक्षा मित्र अस्पताल के निदेशक कार्यालय पहुंचे, जहां उनकी मांग पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. यूएन रॉय ने खून की जांच छोड़कर एक्सरे व नेत्र की जांच अवधि बढ़ाने के निर्देश दिये। पैथालॉजी में 184 शिक्षा मित्रों ने जांच करायी, जबकि एक्सरे विभाग में जांच कराने वाले अभ्यर्थियों की संख्या तीन सौ के करीब पहुंच गयी। इसी तरह नेत्र जांच कराने वाले रहे। बड़ी संख्या में शिक्षा मित्रों की जांच के कारण तमाम मरीज बिना जांच कराये लौट गये।

     साभार : राष्ट्रीय सहारा

एलटी शिक्षकों की भर्ती को बदलेगी नियमावली : मंडलीय संयुक्त निदेशक को दिया जाएगा भर्ती का अधिकार

एलटी शिक्षकों की भर्ती को बदलेगी नियमावली : मंडलीय संयुक्त निदेशक को दिया जाएगा भर्ती का अधिकार

१-एलटी ग्रेड नियमावली बदलने की तैयारी

२-मनचाहे जिलों में आवेदन करने की होगी छूट

३-आनलाइन आवेदन लेने से मेरिट बनाने में होगी आसानी

लखनऊ। राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में शिक्षक भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधीनस्थ सेवा की एलटी ग्रेड नियमावली बदलने की तैयारी है। इसमें भर्ती का अधिकार उप निदेशक क्षेत्रीय से हटाकर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को देने की योजना है। इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन लेते हुए निर्धारित समय के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। शिक्षक भर्ती के लिए मनचाहे जिलों में आवेदन करने की छूट देने का भी प्रावधान रहेगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग इसके लिए संशोधित प्रस्ताव शीघ्र ही कार्मिक विभाग को भेजेगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में काफी समय से शिक्षकों की भर्तियां नहीं हो पाई हैं। 

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 6645 पदों पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा मनोज कुमार सिंह चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर दी जाए। इसके लिए नियमावली संशोधित की जा रही है। इसमें भर्ती का अधिकार बदलने के साथ ही तय समय के अंदर प्रक्रिया पूरी करने का प्रावधान किया जा रहा है। इसके अलावा अभ्यर्थियों को मनचाहे जिलों में आवेदन की छूट भी होगी। ऑनलाइन आवेदन लेने से मेरिट बनाने में आसानी होगी और भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।

      साभार : अमरउजाला

बीएसए ऑफिस में लूट लीं निविदाएं : कर्मचारियों से की हाथापाई डीएम ने तलब की रिपोर्ट -

बीएसए ऑफिस में लूट लीं निविदाएं : कर्मचारियों से की हाथापाई डीएम ने तलब की रिपोर्ट -

बहराइच (ब्यूरो)। बीएसए कार्यालय में शनिवार शाम अराजक तत्वों ने हंगामा किया। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के लिए आमंत्रित निविदाएं जब सील होने लगीं, तभी बदमाश निविदा प्रपत्र के पैकेट लूटकर भाग निकले। कर्मियों से हाथापाई हुई। डीएम ने मामले की रिपोर्ट तलब की है। बीएसए ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। 14 विकासखंडों में 15 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। इनकी छात्राओं को भोजन, नाश्ता, यूनीफॉर्म व स्टेशनरी की सप्लाई के लिए प्रतिवर्ष ठेका होता है। उसी के तहत ठेके का आवंटन करने को निविदा मांगी गई थी। बीएसए डॉ. अमरकांत सिंह ने बताया कि 50 निविदाएं बिकी थीं। शनिवार शाम ठेकेदारों ने निविदा प्रपत्र बॉक्स में डाल दिए और बॉक्स सील होने जा रहा था तभी कुछ लोगों ने पैकेट लूट लिया।

   साभार : अमरउजाला

मास्टरी की दौड़ में पिछड़ जाएंगे 1.80 लाख अभ्यर्थी : 72825 की भर्ती के बाद 1.80 लाख अभ्यर्थी हैं मास्टरी की दौड़ में -

मास्टरी की दौड़ में पिछड़ जाएंगे 1.80 लाख अभ्यर्थी : 72825 की भर्ती के बाद 1.80 लाख अभ्यर्थी हैं मास्टरी की दौड़ में -

कमल तिवारी/एसएनबी लखनऊ। परिषदीय स्कूलों में अब सरकारी मास्टरी हासिल कर पाना मुश्किल होगा। प्रदेश में चल रही 72825 शिक्षकों की भर्ती के बाद 1.80 लाख अभ्यर्थी मास्टरी की दौड़ से बाहर हो जाएंगे और शिक्षकों के पद खाली रहने के बाद भी सूबे में बीटीसी व टीईटी बेरोजगारों की फौज खड़ी हो जाएगी। हालांकि टीईटी में सफलता की अहमियत पांच वर्ष रहेगी, लेकिन शिक्षक भर्ती में टीईटी की मेरिट लाखों अभ्यर्थियों के लिए मुश्किल पैदा करेगी।

 सूत्रों का कहना है कि 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती में वर्ष 2011 में टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 2.53 लाख अभ्यर्थियों को शामिल होने का मौका दिया गया है। इनमें ज्यादातर बीएड डिग्रीधारक हैं जबकि बीटीसी प्रशिक्षितों की तादाद काफी कम है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने परिषदीय स्कूलों में बीएड अभ्यर्थियों की भर्ती के लिए मार्च 15 तक की ही मोहलत दे रखी है। ऐसे में इस भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों के लिए यह आखिरी मौका होगा, इसके बाद उनकी टीईटी पात्रता तो बनी रहेगी, लेकिन परिषदीय स्कूलों की प्राथमिक कक्षाओं में मास्टरी पाने की रेस से बाहर हो जाएंगे। उनके पिछड़ने का एक बड़ी वजह मेरिट से भर्ती भी बनेगी। 

72825 पदों पर भर्ती होने के बाद भी 1.80 लाख टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी इस बार नौकरी पाने की ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाएंगे। इसी व्यवस्था को भविष्य में भी लागू रखा गया तो वर्ष 2013 में दो बार हुई टीईटी में बेहतर मेरिट लाने वाले उन पदों के दावेदार होंगे, लेकिन एनसीटीई की शर्त तथा मेरिट उनकी राह मुश्किल कर देगी। जानकारों का कहना है कि अगले वर्ष से प्रदेश में करीब 40 हजार बीटीसी अभ्यर्थी उपलब्ध होंगे, लेकिन इनमें बीएड वालों के लिए कोई स्कोप नहीं रहेगा। हालांकि उनकी उम्मीद अभी सुप्रीम कोर्ट से आने वाले अंतिम फैसले पर टिकी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती वर्ष 2011 के विज्ञापन के आधार पर करने का आदेश दिया है और आगे वह अपना निर्णय बाद में सुनाएगा। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को उम्मीद है कि राज्य सरकार को इसके बाद राहत मिल सकती है। राज्य सरकार टीईटी की मेरिट के बजाय एकेडमिक मेरिट के आधार पर भर्ती के हक में है, सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक राज्य सरकार के तर्क से भर्ती हुई तो बीटीसी के कम मेरिट वाले अभ्यर्थी राहत पा सकेंगे। खड़ी हो जाएगी बेरोजगारों की फौज सुप्रीम कोर्ट के अन्तिम फैसले पर उम्मीद टिकी है |

     
साभार : राष्ट्रीय सहारा

Saturday, July 26, 2014

गणित-विज्ञान शिक्षकों की भर्ती पर भारी पड़ रही : प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती 72825

गणित-विज्ञान शिक्षकों की भर्ती पर भारी पड़ रही : प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती 72825

कमल तिवारी/एसएनबी लखनऊ। प्रदेश में उच्च प्राथमिक स्कूलों में होने वाली विज्ञान व गणित के शिक्षकों की भर्ती पर प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती भारी पड़ रही है। जूनियर स्कूलों में 29300 शिक्षकों की भर्ती के लिए दो चरणों में काउंसलिंग हो चुकी है, फिर भी पद भर नहीं पा रहे हैं। ऐसे में तीसरी बार काउंसलिंग होनी तय बतायी जा रही है। प्रदेश में बड़ी तादाद में ऐसे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने दोनों में भर्ती के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन उनकी प्राथमिकता प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती है और गणित शिक्षक भर्ती में मेरिट में होने के बाद भी वह काउंसलिंग से कन्नी काट चुके हैं। जानकारों का कहना है कि जूनियर स्कूलों में भर्ती को लेकर अभी अड़ंगेबाजी लग सकती इसकी वजह से वह प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती पर नजर टिकाये हैं। प्रदेश में परिषदीय स्कूलों में 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती चल रही है। इसके पूर्व ही जूनियर स्कूलों में विज्ञान व गणित के शिक्षकों की सीधी भर्ती से 29300 पद भरे जाने हैं। दोनों की भर्ती मेरिट से हो रही है। टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने बड़ी संख्या में दोनों में आवेदन किया है। अब उनकी प्राथमिकता सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती है, इसके चलते विज्ञान-गणित शिक्षक भर्ती की मेरिट में रहने के बाद भी वह काउंसलिंग में हिस्सा लेने से कतरा रहे हैं। पहले चरण की काउंसलिंग में पूरे प्रदेश में छह हजार आवेदक नहीं आये, नतीजतन मेरिट को घटाकर द्वितीय चरण की काउंसलिंग करायी गयी, इसमें भी पद खाली रहना तय है। प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में अभी देरी है, लेकिन एक बार किसी काउंसलिंग में शामिल होने के बाद फिर मूल काजगात वहीं जमा करा लिये जा रहे हैं, इसके बाद अभ्यर्थी दूसरी भर्ती की मेरिट में होने के बाद भी हिस्सा नहीं ले सकेगा। इसी उहापोह में आवेदक पड़े हैं और वे प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती को अपनी प्राथमिकता लेकर चलने लगे हैं। ऐसे में विज्ञान-गणित शिक्षक भर्ती में एक और काउंसलिंग की नौबत आ सकती है। उच्च प्राथमिक स्कूलों में सभी पद प्रोन्नति से भरे जाते हैं, ऐसे में प्राथमिक स्कूलों में तैनात शिक्षकों ने सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट में गुहार लगा रखी है, उनका कहना है कि इस भर्ती से उनकी प्रोन्नति की राह बंद हो जाएगी जबकि बड़ी संख्या में शिक्षकों का प्रमोशन होना है और उनमें विज्ञान व गणित के शिक्षक भी हैं।

उच्च प्राथमिक स्कूलों में जाने से कतरा रहे हैं आवेदन कर्ता शैक्षिक कागजातों के फंस जाने का जोखिम नहीं लेना चाहते आवेदक विज्ञान गणित के हैं 29300 पद जबकि प्रशिक्षु शिक्षक के लिए होनी है 72825 भर्तियां |

   साभार : राष्ट्री़य सहारा

हाउस होल्‍ड सर्वे 2014-15 के दिशा निर्देश जारी : 16 अगस्‍त से 31 अगस्‍त 2014 तक होगा सर्वे -







हाउस होल्‍ड सर्वे 2014-15 के दिशा निर्देश जारी : 16 अगस्‍त से 31 अगस्‍त 2014 तक होगा सर्वे -

सरकारी विद्यालयों में मनाया जाएगा बच्चों का ‘हैप्पी बर्थडे’ : परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक उन्नयन का प्रयास -

सरकारी विद्यालयों में मनाया जाएगा बच्चों का ‘हैप्पी बर्थडे’ : परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक उन्नयन का प्रयास -
< मित्रों महराजगंज जिले निचलौल के शिक्षक भाई पंडित जावेद भारती जी ने "हैप्पी बर्थडे" प्राथमिक स्कूलों मे बच्चों का मनाने का क्रम २०१३ से प्रारम्भ कर दिया था उनको बधाई....जिसका फोटो पोस्ट के साथ लगा रहा हूँ|

  "दुरी लम्बी है पर ठहरना छोड़ दें
कोई भी बहाने करना छेड़ दें
अब मजबूत इरादों से मैं हूँ इनके बीच
खुशियों से कह दो केवल वो शहरों में रहना छोड़ दे |"
आलोक दूबे/एसएनबी गोरखपुर (एसएनबी)। शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ सरकार ने सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शैक्षिक उन्नयन के लिए प्रयास शुरू कर दिये हैं। पढ़ाई से वंचित बच्चों को पढ़ने के लिए ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाया जा रहा है तो वहीं प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री ने सरकारी स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। पढ़ाई के परम्परागत र्ढे की बजाए अब सरकारी स्कूलों में कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर बच्चों में सीखने एवं व्यक्तित्व विकास के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित होंगे। विद्यालय में अपनत्व की भावना विकसित करने के लिए अब बच्चों का ‘हैप्पी बर्थडे’ भी मनाया जाएगा। उधर, शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इन उपायों का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के कदमों से प्राथमिक स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था में सुधार होगा।

बीएसए कमलाकर पांडेय ने इस संबंध में सभी खंड शिक्षाधिकारियों को इन सुझावों के क्रियान्वयन का निर्देश दिया है। प्राथमिक शिक्षा पर पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी शैक्षिक स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। यह स्थिति सरकार के लिए चिंता का सबब बनी है। प्राथमिक स्कूलों में भारी संख्या में नामांकन के बावजूद बच्चों की कम उपस्थिति स्कूलों की दुर्दशा बयां करती है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि दरअसल प्राथमिक शिक्षा को समय की मांग के अनुरूप नहीं ढाले जाने से शिक्षा व्यवस्था में गिरावट आ रही है। सरकारी स्कूलों में परम्परागत ढंग से पढ़ाई भी बच्चों में स्कूल जाने की दिलचस्पी कम कर रही है। बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने के लिए स्कूलों में विविध कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत है। बहरहाल, शैक्षिक सत्र की शुरूआत होने के साथ ही प्रदेश सरकार ने शैक्षिक उन्नयन की दिशा में प्रयास तेज कर दिये हैं।

सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री ने इस संबंध में विभागीय अफसरों को कई उपाय सुझाएं हैं। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर अब बराबर नजर रखी जाएगी। अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं आ रहा तो संबंधित स्कूल के शिक्षक उसके माता-पिता से संपर्क कर इसका कारण जानेंगे। बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालयों के निरीक्षण दिवस के दौरान अगर किसी बच्चे का जन्मदिन है तो उसे मनाने के लिए कुछ क्षण निकाले जा सकते हैं। बहरहाल, बेसिक शिक्षा मंत्री के इन सुझावों को अमलीजामा पहनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। हर महीने होगी अभिवावकों की बैठक बेसिक शिक्षा मंत्री ने शैक्षिक परिवेश को बेहतर बनाने के लिए हर माह की अंतिम तारीख को विद्यालयों में अभिवावक गोष्ठियां आयोजित करने को कहा है। इस बैठक में जनप्रतिनिधि भी आमंत्रित किये जाएंगे। बच्चों की प्रतिभा विकसित करने के लिए सीखने और व्यक्तित्व विकास के लिए कार्यक्रम होंगे। शिक्षा विभाग के अफसर इन गोष्ठियों में उपस्थित रहेंगे। अतिथि कक्षा अध्यापक बनेंगे क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अब क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के संभ्रात व्यक्तियों की मदद ली जाएगी। बेसिक शिक्षा मंत्री ने इस बाबत कहा कि दस-पंद्रह दिनों के अंतराल पर प्राथमिक स्कूलों में जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के संभ्रांत व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाए। ऐसे लोगों को अतिथि कक्षा अध्यापक का दर्जा प्रदान किया जाएगा। यह लोग बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के अलावा विद्यालय के समक्ष उत्पन्न कठिनाईयों को दूर करने में प्रभावी भूमिका निभाएंगे। बेसिक शिक्षा मंत्री ने शैक्षिक उन्नयन के लिए उपाय सुझाए बच्चों में सीखने एवं व्यक्तित्व विकास के लिए कार्यक्रम हों गे बच्चों के गैरहाजिर रहने पर उनके अभिवावकों शिक्षक से संपर्क करेंगे |

      साभार : राष्ट्रीयसहारा व दयानन्द त्रिपाठी

प्रोफेशनल डिग्री धारकों को बीएसए कर रहे बाहर : सचिव ने मांगा दिशा निर्देश

प्रोफेशनल डिग्री धारकों को बीएसए कर रहे बाहर : सचिव ने मांगा दिशा निर्देश

१-बीटेक, बीएससी (कृषि) बीफार्मा वाले बाहर

२-विज्ञान-गणित शिक्षक भर्ती में प्रोफेशनल डिग्री धारकों को बीएसए कर रहे बाहर

३-सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने शासन से मांगा इस बारे में दिशा निर्देश

इलाहाबाद (ब्यूरो)। उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए विज्ञान-गणित शिक्षकों की भर्ती में बीटेक, बीफार्मा, बीसीए, बीएससी (कृषि) डिग्री धारकों को काउंसलिंग में शामिल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अभ्यर्थियों में असमंजस है। दो चरणों की काउंसलिंग पूरी हो जाने के बाद हालत यह है कि कुछ जिलों के बीएसए बीएससी गणित, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान एवं बीएससी जुलॉजी, बॉटनी एवं केमेस्ट्री एक विषय के रूप में डिग्री में होने पर ही अभ्यर्थियों को ही काउंसलिंग में शामिल होने का मौका दे रहे हैं।

बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से उच्च प्राथमिक विद्यालयों केे 29334 पदों की घोषणा के दौरान स्पष्ट शासनादेश में स्पष्ट किया गया था कि विज्ञान-गणित शिक्षक के लिए डिग्री स्तर पर विज्ञान और गणित एक विषय के तौर पर होना चाहिए। अब काउंसलिंग के दौरान कुछ जिलों में बीएसए बीटेक एवं बीएससी कृषि वालों को मौका दे रहे हैं, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों सहित प्रतापगढ़ भी में बीएससी (गणित), बीएससी (बायो) को छोड़कर दूसरे वर्ग के अभ्यर्थियों को मौका नहीं दिया जा रहा है।

शासनदेश के बाद भी कुछ जिलों के बीएसए की ओर से बीटेक, बीएससी (कृषि), बीफार्मा एवं बीसीए वालों को यह कहकर मौका नहीं दिया जा रहा है कि वह गणित और विज्ञान एक विषय के तौर पर नहीं बल्कि एक प्रश्नपत्र के रूप में पढ़े हैं। इलाहाबाद के बीएसए राजकुमार का कहना है कि सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने बताया है कि उनकी ओर से शासन से इस मामले में दिशा निर्देश मांगा गया है, इसके मिलने के बाद ही नियुक्ति पर फैसला होगा। उन्होंने बताया कि बीटेक और बीएससी (कृषि) को काउंसलिंग में शामिल कर रहे हैं जबकि बीफार्मा और बीसीए के बारे में शासन से दिशा निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई होगी।

     साभार : अमरउजाला

शिक्षक भर्ती मामला : काउंसिलिंग शुरू नहीं हुई तो पांच को घेरेंगे विधानभवन

शिक्षक भर्ती मामला : काउंसिलिंग शुरू नहीं हुई तो पांच को घेरेंगे विधानभवन

१-यूपीटीईटी उत्तीर्ण 2011 संघर्ष मोर्चा ने दी चेतावनी

२-25 मार्च को हुआ था आदेश, 12 सप्ताह में करनी थी सरकार को नियुक्ति

३-30 नवम्बर 2011 को सूबे में पहली बार टीईटी की हुई थी परीक्षा

जागरण संवाददाता, लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक सूबे में सहायक प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से नाराज यूपीटीईटी उत्तीर्ण 2011 संघर्ष मोर्चा ने एक बार फिर सरकार को चेतावनी दी है। संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने बैठक कर ऐलान किया है कि अगर पांच अगस्त तक काउंसिलिंग शुरू नहीं हुई तो विधानभवन का घेराव किया जाएगा।

मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष गणोश शंकर दीक्षित और सचिव राकेश यादव ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि सर्वोच्च अदालत के आदेश के बावजूद अब तक सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। शिक्षा विभाग के अफसर काउंसिलिंग को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। बैठक में अरुणोन्द्र प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, योगेंद्र सिंह, रोहित शुक्ला, मीना तोमर, सरिता यादव व अवधेश रावत आदि ने भी सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद 25 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने भी आदेश कर दिया है। अब मुख्यमंत्री को जल्द से जल्द चयन प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने 12 सप्ताह में भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था।1गौरतलब है 30 नवंबर 2011 को सूबे में सहायक प्राथमिक अध्यापकों की टीईटी हुई थी। सपा सरकार ने सात अगस्त 2102 को नया शासनादेश जारी करते हुए सहायक शिक्षकों की भर्ती शैक्षिक गुणांक के आधार पर करने का निर्देश दिया। इसके बाद सात दिसंबर को सरकार ने शैक्षिक गुणांक के आधार पर चयन करने का विज्ञापन निकाला। इसी विज्ञापन के आधार पर हाई कोर्ट में अपील हुई, जिस पर चार फरवरी 2013 को स्टे हो गया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट गया, जहां पर 25 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला यथावत लागू करने का आदेश दिया है।

      साभार : दैनिक जागरण

आंदोलनों में जेल जा चुके शिक्षक भी पा सकेंगे राज्य पुरस्कार : मदरसा शिक्षकों के लिए सरकार करने जा रही संशोधन

आंदोलनों में जेल जा चुके शिक्षक भी पा सकेंगे राज्य पुरस्कार : मदरसा शिक्षकों के लिए सरकार करने जा रही संशोधन

१-हर साल छ: मदरसा शिक्षकों को पुरस्कार देने की सरकार की योजना

२-मिलेगा राज्य पुरस्कार लेकिन नियमावली के अनुसार जेल गये शिक्षक को नहीं मिलेगा पुरस्कार

लखनऊ। आंदोलनों में जेल जा चुके मदरसा शिक्षक भी अब राज्य पुरस्कार पा सकेंगे। प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षकों की पुरस्कार वितरण नियमावली में यह व्यवस्था करने जा रही है। इस संशोधन के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ऐसे मदरसा शिक्षकों को राज्य पुरस्कार पाने से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

राज्य सरकार ने इस साल से मदरसा शिक्षकों को भी राज्य पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है। इसके तहत हर साल प्रदेश के छह मदरसा शिक्षकों को सम्मानित किया जाना है। इसके लिए भी बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों की ही तर्ज पर पुरस्कार देने के लिए नियमावली बनाई गई। इसे विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद आठ जुलाई की कैबिनेट में रखा भी गया। लेकिन मंत्री ने इसमें संशोधन करने के निर्देश दे दिए।

हर साल छह मदरसा शिक्षकों को पुरस्कार देने की योजना
संशोधन की जरूरत क्यों
दरअसल, बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों की नियमावली में साफ है कि ऐसे शिक्षक जो किसी भी वजह से जेल गए हों, उन्हें राज्य पुरस्कार नहीं दिया जा सकता है। इसी नियमावली की तरह ही अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ ने भी नियमावली तैयार की थी। लेकिन विभागीय मंत्री मो. आजम खां ने इसमें संशोधन कर कैबिनेट की बैठक में रखने के लिए कहा है। अब नियमावली में उस बिंदु को हटाया जा रहा है जिसमें यह प्रतिबंध था कि आंदोलनों में शामिल होने वाले या फिर जेल जा चुके शिक्षक इसमें शामिल नहीं किए जाएंगे।

राज्य पुरस्कार में यह मिलेगा
राज्य पुरस्कार के तहत हर शिक्षक को 10 हजार रुपये नकद, एक प्रशस्ति पत्र व शॉल भेंट की जाएगी। इसके अलावा इन शिक्षकों को भी रोडवेज की बस में 4000 किलोमीटर की मुफ्त यात्रा का लाभ मिलेगा। हालांकि यह सुविधा केवल उसी साल मिलेगी जिस साल उन्हें सम्मान मिलेगा। जबकि बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों को पूरी नौकरी के दरम्यान रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ मिलता है।

    साभार : अमरउजाला

कस्तूरबा गांधी विद्यालय के कर्मचारियों का मामला : वेतन विसंगतियां दूर करने का आश्वासन


कस्तूरबा गांधी विद्यालय के कर्मचारियों का मामला : वेतन विसंगतियां दूर करने का आश्वासन

लखनऊ (ब्यूरो)। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) शिक्षक-शिक्षणेतर यूनियन ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से मिलकर पार्ट टाइम शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कराने सहित विभिन्न मांगों पर कार्यवाही की मांग की है। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि वह इस संबंध में जल्द कार्यवाही कराएंगी। यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल कुमार बंसल व महामंत्री गणेश प्रसाद सिंह ने एक बयान में बताया कि केंद्रीय मंत्री से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की गई। इस दौरान मंत्री ने सभी राज्यों से पूरी स्थिति की रिपोर्ट मांगने और किसी भी दशा में अन्याय न होने देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि केजीबीवी से पुरुष शिक्षकों को हटाए जाने के प्रस्ताव पर भी विरोध जताया गया है।

      साभार : अमरउजाला

Friday, July 25, 2014

लिपिकीय संवर्ग के स्‍थानान्‍तरण के सम्‍बन्‍ध में जारी शासनादेश -

लिपिकीय संवर्ग के स्‍थानान्‍तरण के सम्‍बन्‍ध में शासनादेश जारी -

ईद से पहले कर्मचारियों को वेतन मिलना मुश्किल : 75 फिसदी कर्मचारियों को वेतन मिलना मुश्किल -

ईद से पहले कर्मचारियों को वेतन मिलना मुश्किल : 75 फिसदी कर्मचारियों को वेतन मिलना मुश्किल -

इलाहाबाद। प्रदेश सरकार ने भले ही राज्य कर्मियों को ईद से पहले 26 जुलाई को वेतन दिए जाने का फरमान जारी कर दिया हो लेकिन 75 फीसदी कर्मचारियों को त्योहार से पहले वेतन की मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। जुलाई के महीने में तिमाही आयकर और तीन फीसदी इंक्रीमेंट की गणना होनी है। इसमें देर हो रही है। बाकी कसर बजट की कमी ने पूरी कर दी है। तमाम विभागों के पास बजट न होने के कारण अब तक वेतन बिल भी तैयार नहीं किए जा सके हैं।

ट्रेजरी के सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण बजट काफी देर से प्रस्तुत किया गया। इससे पहले सरकार ने विभागों को चार-चार माह का लेखा अनुदान जारी कर दिया था। सरकार ने भले ही 26 जुलाई को वेतन भुगतान का आदेश जारी कर दिया हो लेकिन विभागों के पास वेतन के लिए बजट ही नहीं है। हालांकि आदेश जारी होने के बाद पुलिस विभाग सहित कुछ विभागों के बजट जारी कर दिए गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य, कृषि जैसे बड़े महकमों का बजट अब तक नहीं आया है जबकि वेतन का भुगतान 26 जुलाई को होना है। इसके अलावा कर्मचारियों को जुलाई माह के वेतन के साथ तीन फीसदी का इंक्रीमेंट भी दिया जाता है। साथ ही जुलाई में तिमाही आयकर की गणना कर वेतन से टीडीएस की कटौती की जाती है। वेतनवृद्धि और आयकर कटौती की गणना में वक्ता लगता है। सरकार ने छह दिन पहले ही वेतन भुगतान का आदेश जारी किया है। ऐसे में विभागों का बजट जारी भी हो गया तो इंक्रीमेंट और आयकर कटौती की गणना में देरी के कारण त्योहार से पहले वेतन का भुगतान मुश्किल होगा। जिन विभागों को बजट नहीं मिला है, उनके लिए डीएम ट्रेजरी रूल-27 के तहत अलग से वेतन भुगतान का आदेश जारी कर सकते हैं। कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव ने मांग की है कि जिन विभागों का बजट नहीं जारी हुआ है, डीएम वहां ट्रेजरी रूल-27 के तहत वेतन भुगतान का आदेश जारी करें ताकि कर्मचारियों को त्योहार पर राहत मिल सके।

     साभार : अमरउजाला

जूनियर विज्ञान/गणित विषय विशेष भर्ती में Professional Course सम्मिलित करने में पेंच -

जूनियर विज्ञान/गणित विषय विशेष भर्ती में Professional Course सम्मिलित करने में पेंच -

29334 जूनियर गणित/विज्ञान की भर्ती में Professional Course यथा बी0टेक, बी0फार्मा0, बी0एस0सी0 एजी0, बी0एस0सी0 होमसाइन्‍स, बी0सी0ए0, बी0एच0एम0एस0 डिग्री धारियों के लिए सम्मिलित करने में पेंच है। अधिकारीवर्ग भी इनको सम्मिलित करने में संशय की स्थिति में है। चूॅकि जूनियर गणित/विज्ञान की भर्ती एक विषय विशेष भर्ती है, भर्ती के इस सम्‍बन्‍ध में शासन द्वारा शासनादेश संख्या 2651(1)/79-5-12-1(04) दि0 11 जुलाई 2013 एवं शासनादेश संख्या 3227/79-5-2013-1(4)/13 दि0 23 अगस्त 2013 जारी किये गये, जिसके अनुसार भर्ती की कार्यवाही पूर्ण की जानी है। जिसमें यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि उक्‍त भर्ती में ऐसे अभ्‍यर्थी ही पात्र होगें जो भारत में विधि द्वारा स्‍थापित किसी विश्‍वविद्यालय से स्‍नातक योग्‍यता की उपाधि या उसके समकक्ष मान्‍यता प्राप्‍त कोई उपाधि जिसमें यथा स्थिति विज्ञान या गणित एक विषय के रूप में उत्‍तीर्ण की है। इस प्रकार स्‍पष्‍ट है कि जिन अभ्‍यर्थियों के पास बी0एस0सी0 की उपाधि है, और उनके विषय के रूप में गणित/भाैतिक विज्ञान/जीव विज्ञान/रसायन विज्ञान/वनस्‍पति विज्ञान विषय के रूप में रही हो, ही पात्र होगें। 
शासनादेश के अनुसार स्‍पष्‍ट है कि स्‍नातक डिग्री के समकक्ष कोई भी उपाधि यथा बी0टेक, बी0फार्मा0, बी0एस0सी0 (एजी0), बी0एस0सी0(होमसाइन्‍स), बी0सी0ए0, बी0एच0एम0एस0 में उक्‍त विषय एक विषय के रूप में तीनों वर्ष नहीं रहता है, जिससे इनको सम्मिलित करने पर संशय उत्‍पन्‍न हो गया है। यदि उक्‍त उपाधिधारक के पास विज्ञान या गणित एक विषय के रूप में तीनो वर्ष सम्मिलित रहा हो, वह उक्‍त पदों पर चयन का हकदार हो सकता है। परन्‍तु Professional Course प्रमाण पत्रों से यह विषय तीनों वर्ष नहीं होते है, इसके साथ ही विज्ञान/गणित वर्ग का अभ्‍यर्थी के पास इ‍ण्‍टरमीडिएट में विज्ञान/गणित विषय के रूप में रहा होना अनिवार्य है। विज्ञान वर्ग में जो विषय निर्धारित है, उनमें मुख्‍यता- भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, वनस्‍पति विज्ञान विषय के रूप में पाया जाता है। 

सचिव, उ0प्र0 बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा अपने पत्र दिनॉंक 27-08-2013 के द्वारा मात्र वरिष्‍ठ तकनीकी विशेषज्ञ, एन0आई0सी0 लखनऊ को साफटवेयर में सुधार हेतु मात्र दिशा निर्देश प्रदान किये है। चूॅकि विषय विशेष भर्ती में Professional Course बी0टेके, बी0फार्मा0, बी0एस0सी0 एजी0, बी0एस0सी0 होमसाइन्‍स, बी0सी0ए0, बी0एच0एम0एस0 डिग्री धारियों के लिए सम्मिलित करने के निर्देश एन0आई0सी0 लखनऊ के देने और Professional Course को इस प्रक्रिया में सम्मिलित करने के विरूद्व मा0उच्‍च न्‍यायालय में Case :- SERVICE SINGLE No. - 5348 of 2013 Petitioner :- Ved Vishal Chaudhary, Respondent :- State Of U.P. Prin.Secy.Basic Edu.Civil Sectt.Lucknow & Ors. योजित की गई, जिसमें खण्‍डपीठ द्वारा Professional Course को सम्मिलित करने की प्रक्रिया को शासनादेश से बाहर करने के निर्देश देकर अपने आदेश दि0 20-09-2013 के अनुसार निम्‍न निर्णय दिया गया - 
"Hon'ble Sudhir Kumar Saxena,J. 
Heard learned counsel for petitoner, Sri Ajay Kumar for Basic Shiksha Parishad and Sri Prashant Jaiswal for State. 
In pursuance of an advertisement dated 29.8.2013, petitioner has tried to apply for the post of Assistant Teacher in Upper Primary School for Science/Math Classes but due to illegal impugned guidelines (Annexure No.1), petitioner could not fill his form. Para 4 of the form is not in consonance with the Government Order dated 23.8.2013. Government Order does not make any specific mention of B.Sc. BAMS, BHMS and BUMS subjects and the impugned guidelines have introduced a new criteria. BCA has been included but there is no mention of BBA while both have Maths as one subject. 
Contention is that Parishad has changed the criterion contrary to government order. It cannot add or subtract what is provided in Government Order. 
Sri Ajay Kumar could not justify the change of criterion. In these circumstances, authentic version must come. 
Secretary, Basic Shiksha Parishad-IV, Allahabad will file personal affidavt and will also appear in this Court on 25.9.2013. 
List on 25.9.2013 for further hearing. "
Order Date :- 20.9.2013 

मा0उच्‍च न्‍यायालय इलाहाबाद के आदेश दि0 20-09-2013 के अनुपालन में सचिव महोदय द्वारा एन0आई0सी0 को दिया गया आदेश वापस कर लिया गया है, ऐसा उन्‍होनें लिखित रूप में पत्र मा0उच्‍च न्‍यायालय में दिया गया, उक्‍त को ध्‍यान रखकर मा0उच्‍च न्‍यायालय इलाहाबाद के आदेश दि0 30-09-2013 में अन्तिम आदेश पारित किया गया - 
"Sri Sanjay Sinha, Secretary Basic Education Board, U.P. has appeared today
alongwith his counsel Sri Mukund Asthana.
Sri Sinha informs that he has written to NIC to remove the guidelines which
have been impugned in this petition and guidelines have been removed by the
NIC.
Since last date for submitting application has been expired, a proposal has
been sent to State Government to extend last date.
In view of this assurance given by Sri Sinha, this petition has been rendered
infructuous. It is accordingly dismissed as such."
Order Date :- 30.9.2013

(By- Purushottam Singh Verma - EMIS Incharge)

परिषदीय स्कूल के बच्चे सीखेंगे आपदा प्रबन्धन : प्रदेश के सभी जिलों के बीएसए को भी दिया गया निर्देश-

परिषदीय स्कूल के बच्चे सीखेंगे आपदा प्रबन्धन : प्रदेश के सभी जिलों के बीएसए को भी दिया गया निर्देश-

इलाहाबाद। बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे आने वाले दिनों में आपदा प्रबंधन के तरीके सीखेेंगे। राज्य परियोजना निदेशक कुमुदलता श्रीवास्तव की ओर से इस संबंध में प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश भेज दिए हैं। यह निर्देश बेसिक शिक्षामंत्री द्वारा सभी जनप्रतिनिधियों के लिए लिखे गए पत्र के आधार पर दिया गया है।

परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को पढ़ाई के साथ दूसरी व्यवहारिक और सामाजिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देकर उनके व्यक्तित्व का विकास करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। बच्चों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए जिले के आपदा प्रबंधन प्रशिक्षकों का सहयोग लिया जाएगा। यह प्रशिक्षण सिर्फ एक बार नहीं बल्कि समय-समय पर दिया जाएगा। जिससे बच्चे इन्हें अच्छी तरह आत्मसात कर सके और अगर जरूरत पड़े तो समय पड़ने में बच्चों का सहयोग भी लिया जा सके। हालांकि बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए जिन आपदा प्रबंधन प्रशिक्षकों को बुलाया जाएगा, उन्हें मानदेय दिया जाएगा या फिर उनसे सहयोग देने के लिए निवेदन किया जाएगा यह अभी तय नहीं है।

     साभार : अमरउजाला काम्पैक्ट

मुख्यमंत्री अखिलेश : जनप्रतिनिधि बच्चों को स्कूल भेजने में करें मदद

मुख्यमंत्री अखिलेश : जनप्रतिनिधि बच्चों को स्कूल भेजने में करें मदद 

लखनऊ (ब्यूरो)। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्राथमिक शिक्षा उच्च शिक्षा की नींव है। जनप्रतिनिधि प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद करें। प्राइमरी स्कूलों में दाखिला बढ़ाने के लिए 31 जुलाई तक चलने वाले स्कूल चलो अभियान में वे बढ़चढ़ कर हिस्सा लें। जनप्रतिनिधि यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र का कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रह जाए।

      साभार : अमरउजाला

04 सितम्बर 2000 का शासनादेश :उ0प्र0 बेसिक शिक्षा परिषद के अन्‍तर्गत सेवारत शिक्षकों/शिक्षणेत्‍तर कर्मचारियों की सेवाकाल में मृत्‍यु होने जाने की स्थिति में उनके आश्रितों के सेवायोजन के सम्‍बन्‍ध में -





उ0प्र0 बेसिक शिक्षा परिषद के अन्‍तर्गत सेवारत शिक्षकों/शिक्षणेत्‍तर कर्मचारियों की सेवाकाल में मृत्‍यु होने जाने की स्थिति में उनके आश्रितों के सेवायोजन के सम्‍बन्‍ध में : 04 सितम्बर 2000 का शासनादेश -

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