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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

UPPSS : डॉ दिनेश चंद्र शर्मा की अगुवाई में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का शिक्षकों की समस्याओं को लेकर 18 नवंबर को प्रदेशव्यापी धरना, सात सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को भेजेंगे ज्ञापन


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने 18 नवंबर 2026 को प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस दिन प्रदेश के सभी जिलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। इसके बाद सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की ओर से 4 नवंबर को जारी पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए शासन और विभाग को कई बार पत्राचार एवं वार्ता के माध्यम से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इस लिए विवश होकर करके संगठन ने आंदोलन का निर्णय लिया है।

पुरानी पेंशन बहाली की प्रमुख मांग....

संघ की प्रमुख मांगों में एक अप्रैल 2005 या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों को नई पेंशन व्यवस्था से मुक्त कर पुरानी पेंशन योजना का लाभ देना शामिल है। संगठन का कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था में शिक्षक एवं सरकार के अंशदान से प्राप्त धनराशि का लाभांश तीसरे पक्ष को मिल रहा है, जबकि शिक्षक इससे संतुष्ट नहीं हैं।

टीईटी की अनिवार्यता और सेवा सुरक्षा का मुद्दा

संघ ने एक सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के शिक्षकों के सामने उत्पन्न स्थिति पर भी चिंता जताई है। संगठन की मांग है कि पूर्व में निर्धारित योग्यता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार संसद में कानून बनाने की पहल करे, ताकि न्यायालय के निर्णय के पूर्वगामी प्रभाव से शिक्षकों को राहत मिल सके।

       इसके अलावा, बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के शैक्षिक एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स से कराए जाने के निर्देश पर भी संगठन ने आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि नियुक्ति के समय प्रमाणपत्रों का विधिवत सत्यापन कराया जा चुका है और उसके बाद ही वेतन आहरण शुरू हुआ है। ऐसे में दोबारा जांच की प्रक्रिया शिक्षकों के उत्पीड़न का कारण बन सकती है। संगठन ने इस मामले में उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील किए जाने और शासनादेश पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

प्रधानाध्यापक पदों पर पदोन्नति की मांग.....

संघ ने 10 वर्ष के अंतराल के बाद जारी पदोन्नति आदेशों का स्वागत करते हुए कहा है कि कई जिलों में छात्र संख्या के आधार पर पदों की उपलब्धता सीमित होने से बड़ी संख्या में शिक्षक पदोन्नति से वंचित रह जाएंगे। संगठन ने सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नति की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

इसके साथ ही टीईटी संबंधी न्यायालय के आदेश के बाद बीएड योग्यताधारी शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर उत्पन्न स्थिति पर भी राहत देने की मांग की गई है। संगठन ने 30 जून 2027 तक टीईटी का वैध प्रमाणपत्र प्राप्त करने की छूट देते हुए गैर-टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ करने की मांग उठाई है।

स्थानांतरण और उपार्जित अवकाश का लाभ देने की मांग.....
   ज्ञापन में विशेष श्रेणी के अंतर्गत आने वाले शिक्षकों के गृह जनपद में स्थानांतरण का मुद्दा भी उठाया गया है। संघ का कहना है कि शासनादेश में निर्धारित समय के अनुसार स्थानांतरण हो जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक प्रक्रिया लंबित है। संगठन ने स्थानांतरण सूची शीघ्र जारी करने की मांग की है।

इसके अलावा शिक्षकों को उपार्जित अवकाश का लाभ देने तथा जिन शिक्षकों के विरुद्ध कोई शिकायत या जांच लंबित नहीं है, उनसे कार्यालयों में प्रमाणपत्र जमा नहीं कराने की मांग की गई है।

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी तिथि बाद में घोषित की जाएगी। संगठन ने सभी जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों से 18 नवंबर के कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।
 

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