BASIC SHIKSHA, CIRCULAR, AUDIT : सोशल ऑडिट से होगा 27 हजार परिषदीय व कस्तूरबा विद्यालयों का मूल्यांकन
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय व कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का अब सोशल ऑडिट कराया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यालयों की पढ़ाई से लेकर योजनाओं की जमीनी हकीकत तक परखी जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग प्रदेश के पांच प्रमुख विश्वविद्यालयों के सहयोग से यह सोशल ऑडिट कराएगा। इसकी संस्तुति के आधार पर वह आगे इसमें अपेक्षित सुधार का प्रयास भी करेगा।
प्रदेश के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे-मील से लेकर पढ़ाई से जुड़ी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। वहीं बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ाने के लिए कवायद की जा रही है। यह योजनाएं धरातल पर कितनी उतर पा रही हैं। योजनाओं का लाभ मिलने में बच्चों को क्या दिक्कत आ रही है। विद्यालयों में पढ़ाई का क्या स्तर है। बच्चों से किसी तरह का भेदभाव तो नहीं हो रहा, जैसी चीजों की जमीनी हकीकत इसके माध्यम से परखा जाएगा।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बताया है कि लखनऊ विवि, पं. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि महामना मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि गोरखपुर, स्वामी विवेकानंद सुभारती विवि मेरठ व इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ के विशेषज्ञ इस सोशल ऑडिट में शामिल होंगे। कुल विद्यालयों का 20 फीसदी (लगभग 27000) विद्यालयों का सोशल ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने सभी बीएसए को इसमें सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
सोशल आडिट के क्रियान्वयन हेतु आबद्ध विश्वविद्यालयों को सहयोग प्रदान करने के सम्बन्ध में।
अवगत कराना है कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा प्रदेश के 20 प्रतिशत परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक / कम्पोजिट विद्यालयों एवं समस्त कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का सोशल आडिट का कार्य निम्नलिखित विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है:-
1. दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर।
2. महामना मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर।
3. स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ।
4. इन्टीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ।
5. लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
उक्त सम्बन्ध में आपको निर्देशित किया जाता है कि राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा एम०ओ०यू० के माध्यम से आबद्ध उपरोक्त विश्वविद्यालयों के नामित प्रतिनिधियों को विद्यालयों के सोशल ऑडिट के कार्य को सम्पादित करने में अपना सहयोग प्रदान करें तथा अपने स्तर से अधीनस्थों को भी सहयोग प्रदान करने हेतु निर्देशित करने का कष्ट करें। इस सम्बन्ध में आपके स्तर से कोई व्यय वहन नहीं किया जाना है।




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