पेंशन की जंग : सेवानिवृत्त शिक्षक को अगले माह से मिलती है पेंशन ,कार्य निस्तारण कर पेंशनरों को करते हैं सहयोग
बलरामपुर : उम्र की आखिरी दहलीज पर खड़े पेंशनर्स की परेशानियों को अपना समझ कर सहयोग करने वालों की भी कमी नहीं है। यह अलग बात है कि पेंशनर्स की मद्द करने वाले गिनती भर ही हैं, लेकिन जो हैं उनके सेवाभाव के चर्चा भी आम है। आम तौर पर सरकारी कार्यालयों में आम जन से सलीके से व्यवहार न करने की शिकायतें तो आम है।
जिला कोषागार कार्यालय में साल में एक बार जीवित प्रमाण पत्र के लिए आने वाले पेंशनर्स से कर्मी सीधे बात तक नहीं करते हैं। बैंकों में तो कर्मी पेंशनर को उनके खाते में शेष धनराशि की जानकारी भी नहीं बताते हैं। दैनिक जागरण के पेंशन की जंग अभियान में पेंशनर्स की परेशानियों को उजागर किया गया। जिला कोषागार कार्यालय व बैंक शाखाओं में अपने कार्य के लिए जाने वाले पेंशनरों की सीढि़यां ही चढ़नी पड़ती है। बुजुर्गो के सीढि़यां न चढ़नी पड़े इसके लिए रैंप की व्यवस्था नहीं है। जबकि इनके लिए रैंप जरूरी है।
-सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं
इस अभियान में वरिष्ठ कोषागार अधिकारी आरबी सिंह का कार्य पेंशनर्स की मद्द करने की है। कहते हैं सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है। सेवा का भी प्रमाण भी है। सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती है। सेवक हनुमान और भगवान राम का प्रमाण सबके सामने है। हनुमान जी सेवक थे। इसलिए उन्हें समुद्र पार करने के लिए पुल की आवश्यकता नहीं पड़ी और भगवान राम को समुद्र पार करने के लिए पुल बनाना पड़ा। सेवा का सभी को फल मिलता है। इसका प्रमाण है। इसी उद्देश्य के साथ कार्यालय आने वाले पेंशनर्स की सेवा करते है। कर्मचारियों को भी सेवाकाल की शिक्षा देते हैं। बताया कि बीमार व चलने से असमर्थ पेंशनर्स को बिना किसी लागलपेट के गेट पर ही उनके कार्य का निस्तारण करते हैं। पहली बार पेंशन के लिए पत्रावलियां तैयार करने वालों को प्राथमिकता देते हैं। दो गवाह की औपचारिकता पूरी करने तत्काल उनके खाते में धनराशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर देते है। साल में एक बार पेंशनर्स को कार्यालय आना पड़ता है। कभी भी आ सकते हैं। जिले में अभी हाल ही में आए हैं। इसलिए अभी कुछ विशेष नहीं हो सका है, लेकिन पेंशनर्स को आने वाले दिनों में विशेष सहूलियत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
-सेवानिवृत्त शिक्षक को अगले माह से मिलती है पेंशन
वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) आनंद कुमार भी पेंशनरों के रहनुमा हैं। लगभग चार साल से वह इस जिले में कार्यरत हैं। अन्य कार्यो में भले विलंब हों, लेकिन रिटायर होने वाले शिक्षकों का अगले माह से पेंशन मिलने लगती है। वह कहते हैं कि इसके लिए किसी शिक्षक की वह रोज मद्द नहीं करते हैं। जिसकी तिथि सेवानिवृत्त की नजदीक होती है उसकी पेंशन संबंधी फाइल वह दुरुस्त करने में जुट जाते हैं। इसी का परिणाम है कि सेवानिवृत्त के बाद किसी शिक्षक को पेंशन के लिए कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है।
1 Comments
📌 पेंशन की जंग : सेवानिवृत्त शिक्षक को अगले माह से मिलती है पेंशन, कार्य निस्तारण कर पेंशनरों को करते हैं सहयोग
ReplyDelete👉 READ MORE 👆👇 http://www.basicshikshanews.com/2015/11/blog-post_60.html