अंबेडकरनगर : देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। नारी शिक्षा को हेय ²ष्टि से समाज में देखा जाता था। नगर के बाबू मिश्रीलाल आर्य क्रूर अंग्रेजी हुकूमत में जंगे आजादी में जेल से वापस आए। आर्य समाज के चौथे उपदेश नारी अशिक्षा का नाश हो शिक्षा का विकास हो, को साकार करने के लिए आर्य कन्या पाठशाला के रूप में जिस पौध को 1944 में वसंत पंचमी के दिन लगाया, वह अब वट वृक्ष बन गया है। इस शिक्षा मंदिर में प्राथमिक कक्षाओं से लेकर 12वीं कक्षा तक विज्ञान एवं साहित्य वर्गों में दो हजार से अधिक बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित की शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही साहित्यिक वर्ग में ¨हदी, अंग्रेजी, शिक्षाशास्त्र, समाज शास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, नागरिक शास्त्र, संस्कृत, उर्दू की शिक्षा बालिकाएं ग्रहण कर रही हैं। मात्र एक यही कॉलेज है, जहां संगीत की विधाओं की शिक्षा दी जा रही है। इंटर विज्ञान वर्ग की शिक्षा के लिए शासन ने अभी तक विद्यालय को सहायता सूची में शामिल नहीं किया है। विज्ञान वर्ग के शिक्षिकाओं की व्यवस्था प्रबंध तंत्र को करना पड़ रहा है। ¨हदी, गृहविज्ञान, संस्कृत, उर्दू विषयों के शिक्षिकाओं की वर्षों से कमी को शासन स्तर से पूर्ण नहीं किए जाने के कारण प्रबंध तंत्र अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठा रहा है। आधुनिक युग में बालिकाएं कंप्यूटर ज्ञान से अछूती रहें यह कैसे हो सकता है। कॉलेज में सभी हाइस्कूल व इंटर कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य है। छात्राएं ऐच्छिक विषय के रूप में भी कंप्यूटर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। कॉलेज में खेल का विशाल मैदान के साथ यहां खेलकूद, शारीरिक शिक्षा के लिए सुशीला यादव शिक्षिका नियुक्त हैं। विद्यालय का दावा है कि कबड्डी, खो-खो, बैड¨मटन, फुटबॉल के खेल छात्राओं के मध्य कराए जा रहे हैं। यह दूसरी बात है कि कोई छात्रा जिला स्तर की प्रतियोगिता में चयनित नहीं हो सकी है। विद्यालय का उद्देश्य नारी जाति को शिक्षा देना रहा। वहीं धर्म का वास्तविक ज्ञान बोध कराना भी है। प्राचीन सभ्यताओं एवं सांस्कारिक बोध कराए जाने के लिए प्रत्येक शनिवार को यज्ञ, भजन, उपदेश के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जिसमें सभी धर्मों की छात्राएं शामिल होती हैं।
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