बदलेगा अप्रैल से सेशन का फैसला! : सरकार ने दिए समीक्षा के निर्देश, मांगा अप्रैल से अगस्त तक दाखिलों का ब्योरा प्राथमिक से माध्यमिक तक के शिक्षक संगठन भी कर रहे हैं विरोध
√यूपी बोर्ड में बदलेगा अप्रैल से सेशन का फैसला!
√पिछले साल सीबीएसई की तर्ज पर हुई थी अप्रैल से सत्र की शुरुआत
लखनऊ : यूपी बोर्ड का नया सत्र एक अप्रैल से शुरू करने का फैसला फिर बदल सकता है। प्रदेश सरकार ने इसकी समीक्षा के निर्देश दिए हैं। प्रदेश भर में स्कूलों से यह ब्योरा मांगा गया है कि पिछले साल अप्रैल, मई में कितने एडमिशन हुए और जुलाई, अगस्त में कितने हुए। इसका भी आकलन कराया जा रहा है कि साल भर में कितने दिन पढ़ाई हुई और ऐसे में मार्च से पहले परीक्षाएं कराना कैसे संभव होगा?
यूपी बोर्ड का नया सत्र हमेशा जुलाई से शुरू होता है और जून तक चलता है। पिछले साल सरकार ने अप्रैल से नया सत्र शुरू करने के आदेश दिए थे। सरकार का यह प्रयोग पूरी तरह असफल रहा। रिजल्ट मई में ही आया। ऐसे में छात्र अप्रैल और मई में दाखिले लेने के लिए ही नहीं आए। उधर शिक्षक भी यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियां जांचने में व्यस्त रहे। इन वजहों से 80 फीसदी दाखिले जुलाई और अगस्त में ही हुए।
उसके बाद से पंचायत चुनाव में ड्यूटी और अन्य कई वजहों से ज्यादा दिन पढ़ाई नहीं हो पाई है। ऐसे में जनवरी-फरवरी में परीक्षाएं कराना और अप्रैल से नया सत्र शुरू करने में फिर दिक्कतें आनी तय हैं। इन सभी दिक्कतों की वजह से सरकार ने इसकी समीक्षा करने का फैसला किया है। स्कूलों से ब्योरा मिलने के बाद सेशन पर फैसला लिया जाएगा।
शिक्षक संगठन भी कर रहे हैं विरोध
सभी शिक्षक संगठन भी लगातार अप्रैल से सत्र का विरोध कर रहे हैं। विधान परिषद में भी शिक्षक विधायक इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं। पिछले दिनों कई शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री और माध्यमिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन देकर मांग की थी कि सत्र जुलाई से ही किया जाए। इसके बाद नए माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में भी निर्देश दिए थे कि पिछले साल अप्रैल से लेकर अगस्त तक दाखिलों का ब्योरा इकट्ठा किया जाए। साथ ही इसका भी आकलन किया जाए कि अप्रैल में नया सत्र शुरू करना है तो कितने दिन पढ़ाई हो पाई है और कोर्स कैसे पूरा होगा/ दाखिलों और पढ़ाई के दिनों की रिपोर्ट आने के बाद सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है।
पिछले साल सरकार अप्रैल से सत्र लागू करके देख चुकी है। वह सफल नहीं हुए। ऐसे में फिर पुराना पैटर्न ही कारगर है।
-डॉ. आरपी मिश्र, प्रांतीय मंत्री
माध्यमिक शिक्षक संघ
अप्रैल से नया सत्र शुरू करने का प्रयोग पूरी तरह असफल रहा है। रिजल्ट जून में ही आता है और बच्चे दाखिला नहीं लेते तो सिर्फ कागजों पर ही सत्र चलता है।
-डॉ.जेपी मिश्र,
अध्यक्ष उ. प्र. प्रधानाचार्य परिषद
शिक्षकों की ओर से अप्रैल, मई में कम और जुलाई अगस्त में दाखिले ज्यादा होने की बात आई थी। पढ़ाई के कम दिन मिलने का मुद्दा उठा था। इसी का आकलन किया जा रहा है। फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
-बलराम यादव, माध्यमिक शिक्षा मंत्री
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