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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

हेड मास्साब को पढ़ाई से ज्यादा दूध की चिंता! : कल से मिड-डे-मील में सभी बच्चों को देना है दूध कल से मिड-डे-मील में सभी बच्चों को देना है दूध सरकार का आदेश पर दूध आएगा कहां से पता नहीं

हेड मास्साब को पढ़ाई से ज्यादा दूध की चिंता! : कल से मिड-डे-मील में सभी बच्चों को देना है दूध कल से मिड-डे-मील में सभी बच्चों को देना है दूध सरकार का आदेश पर दूध आएगा कहां से पता नहीं

√40 लाख ली. दूध की जरूरत होगी बुधवार को
√62 लाख अपर प्राइमरी के बच्चों को दिया जाता है एमडीएम
√1.38 करोड़ प्राइमरी के बच्चों को दिया जाता है एमडीएम
√54 हजार अपर प्राइमरी स्कूल हैं यूपी में
√1.15लाख प्राइमरी स्कूल हैं यूपी में
√कल से मिड-डे-मील में सभी बच्चों को देना है दूध
√सरकार का आदेश पर दूध आएगा कहां से पता नहीं

लखनऊ : जुलाई में स्कूल खुलते ही पढ़ाई, नई किताबों और यूनिफॉर्म की बातें होती हैं। लेकिन यूपी के सरकारी स्कूलों के हेड मास्साब को पढ़ाई से ज्यादा चिंता यह सता रही है कि वे बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था कैसे करें। सरकारी आदेश हैं कि 15 जुलाई से बच्चों को स्कूलों में दूध उपलब्ध कराया जाए। हेड मास्टरों की चिंता यह भी है कि एक ही दिन में इतना दूध आएगा कहां से/ दूध न मिला या खराब हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी/ वे ग्राम प्रधान के लेकर अफसरों तक से पूछ रहे हैं, लेकिन उनके सवालों का जवाब नहीं मिल रहा। जिले के अफसर भी शासनादेश की प्रति और मिड डे मील का नया मेन्यू थमा देते हैं, जिसमें सप्ताह में एक दिन बच्चों को दूध देने की बात कही गई है। शहरों में एनजीओ मिड डे मील की आपूर्ति करते हैं तो गांवों में हेडमास्टर और ग्राम प्रधान की जिम्मेदारी है। लेकिन आखिर में जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की होती है क्योंकि उसी को यह प्रमाणित करना है कि भोजन शुद्ध है और सभी बच्चों को दिया गया। वे पहले से ही मिड डे मील से परेशान थे। अब दूध दिए जाने की नई व्यवस्था ने उनकी मुसीबत और बढ़ा दी है।

प्रदेश सरकार की सोच अच्छी है लेकिन कतई व्यावहारिक नहीं है। बच्चों को स्वस्थ बनाने की बजाए उनके स्वास्थ्य से खिलावाड़ होने की संभावना ज्यादा है।
-विनय कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन

इतनी कम कीमत में कैसे मिलेगा शुद्ध दूध

यह है नया बदलाव कहां से आएगा इतना दूध

प्राइमरी स्कूलों में 3.59 और अपर प्राइमरी में 5.38 रुपये प्रति बच्चा मिड डे मील के लिए दिया जाता है। इसी में दूध भी दिया जाना है। शिक्षकों का सवाल भी है कि बुधवार को 8 रुपये प्रति बच्चा दूध का अतिरिक्त खर्च होगा।

ऐसे में सवाल यह भी है कि इतनी कम कीमत में शुद्ध दूध कहां से आएगा/हर बुधवार को सभी बच्चों को मिड डे मील में कोफ्ता चावल के साथ 200 मिली दूध दिया जाना है

बुधवार को पुराने मेन्यू के अनुसार कढ़ी चावल या खीर का प्रावधान था।

शाहजहांपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय पड़रा, सिकंदरपुर के प्रधानाध्यापक और जूनियर शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह कहते हैं कि पूरे शाहजहांपुर में सभी बड़ी कंपनियों के दूध की सप्लाई 19000 लीटर प्रति दिन है। जिले में 60 फीसदी बच्चों की स्कूल में उपस्थिति के अनुसार यह संख्या करीब ढाई लाख होती है। उन्हें 200 मिली दूध दिया जाना है। हफ्ते में एक दिन सिर्फ बच्चों के लिए ही अलग से 45 हजार लीटर दूध की जरूरत होगी। वह दूध कहां से आएगा/ निश्चित तौर पर मिलावटी दूध मिलेगा, जो बच्चों के लिए खतरनाक होगा। बच्चों को कुछ हुआ तो पहले कार्रवाई हेड मास्टर पर ही होगी |

खबर साभार : नवभारतटाइम्स/दैनिकजागरण/अमरउजाला

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