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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

कोर्ट का आदेश दरकिनार, नहीं मिली पदोन्नति : शिक्षा का नया सत्र इस बार एक अप्रैल से शुरू ;अधिकारियों का कहना है कि सत्र लाभ देने या पदोन्नति को लेकर शासन से कोई निर्देश नहीं

कोर्ट का आदेश दरकिनार, नहीं मिली पदोन्नति : शिक्षा का नया सत्र इस बार एक अप्रैल से शुरू ;अधिकारियों का कहना है कि सत्र लाभ देने या पदोन्नति को लेकर शासन से कोई निर्देश नहीं

केस एक-प्राथमिक विद्यालय मीरापुर बालक की प्रधानाध्यापिका रजिया खातून की जन्मतिथि 30 जून 1953 है। उन्हें पदोन्नति पांच साल पहले होनी थी। कोर्ट के आदेशानुसार उन्हें सत्र लाभ मिलना था लेकिन 30 जून 2015 को उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया।

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केस दो- प्राथमिक विद्यालय मुंशीराम की बगिया नगर क्षेत्र की शिक्षिका महजबी की जन्मतिथि 19 मई 1953 है। उनहें बीते 30 जून को सेवानिवृत्त कर दिया गया। जबकि कोर्ट के आदेश के अनुरूप उन्हें सत्र लाभ मिलना था।

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इलाहाबाद : जिले में दर्जनभर शिक्षक-शिक्षिकाओं को कोर्ट के आदेश के बावजूद न सत्र लाभ मिला, न ही पदोन्नति। आदेश की अनदेखी करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने उन्हें 30 जून को सेवानिवृत्त कर दिया। इधर पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक के खाली पदों को भरने के लिए 780 शिक्षक-शिक्षिकाओं की पदोन्नति कर दी गई। पदोन्नति सूची जारी होते ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। उत्तर प्रदेशीय सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षक कल्याण परिषद इस अनियमितता को कोर्ट में ले जाने के साथ आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहा है।

शिक्षा का नया सत्र इस बार एक अप्रैल से शुरू कर दिया गया। परिषद के संरक्षक डॉ. सैयद हैदर अली नकवी का कहना है कि शिक्षा सत्र जल्द शुरू होने पर कोर्ट ने अपने आदेश में दो अप्रैल से 30 जून सन 1953 के अंतर्गत जिन शिक्षक-शिक्षिकाओं की जन्मतिथि है उन्हें सत्र लाभ देने का आदेश दिया था। इसके अंतर्गत सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को 31 मार्च 2016 को सेवानिवृत्त होना था। लेकिन जिले के दर्जनभर शिक्षक-शिक्षिका ऐसे हैं जिन्हें सत्र लाभ न देकर सेवानिवृत्त कर दिया गया।

इधर सैकड़ों प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों की पदोन्नति कर दी गई। कहा कि अधिकारियों ने अपना आदेश न बदला तो हम न्याय के लिए कोर्ट जाएंगे। इस मामले में कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि सत्र लाभ देने या पदोन्नति को लेकर शासन से कोई निर्देश नहीं मिला था। ऐसे में वह कैसे किसी को पदोन्नति दे देते।
       
       खबर साभार : दैनिकजागरण

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