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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

उत्तर प्रदेश में बाल अधिकार संरक्षण आयोग जून में लॉन्च करेगा बाल मित्र टोल फ्री नंबर 1517 : बच्चे पाएंगे हर समस्या का निदान, बच्चे की काउंसलिंग की भी है तैयारी-

उत्तर प्रदेश में बाल अधिकार संरक्षण आयोग जून में लॉन्च करेगा बाल मित्र टोल फ्री नंबर 1517 : बच्चे पाएंगे हर समस्या का निदान, बच्चे की काउंसलिंग की भी है तैयारी-

१-फिलहाल टेस्टिंग मोड में है बाल मित्र
२-नंबर टॉल फ्री नंबर 24 घंटे काम करेगा
३- ‘1517’ पर बच्चे पाएंगे हर समस्या का निदान
४-उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग जून में लॉन्च करेगा टोल फ्री नंबर

लखनऊ | सूबे में 18 वर्ष तक के किशोर व बच्चे अपनी हर समस्या का समाधान महज एक कॉल कर पा सकेंगे। इसके लिए उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग टॉल फ्री नंबर 1517 लॉन्च करेगा। आयोग ने इसे ‘बाल मित्र’ का नाम दिया है। इसे जून के दूसरे सप्ताह में लॉन्च करने की तैयारी है। फिलहाल यह नंबर टेस्टिंग मोड में है। 1517 पर बच्चे अपनी समस्या के साथ ही शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह ने बताया कि बाल मित्र का मुख्य फोकस शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के क्षेत्र में आ रही समस्याओं पर होगा। लेकिन इस नंबर पर बच्चों के साथ होने वाले अपराधों की शिकायत भी दर्ज कराई जा सकेगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान भी पाया जाएगा। 

यही नहीं बच्चे उन समस्याओं को बता सकेंगे, जिन्हें किसी और से उन्हें शेयर करने में झिझक होती है। ऐसे बच्चों के लिए टेलिफोनिक काउंसलिंग की व्यवस्था होगी। टॉल फ्री नंबर 24 घंटे काम करेगा लेकिन काउंसलिंग के लिए एक निश्चित समय निर्धारित होगा।

उत्पीड़न-शोषण मामले में तत्काल मिलेगी मदद

1517 पर कॉल करने वाले बच्चे को अगर किसी मुसीबत में हों, जैसे उनका उत्पीड़न या शोषण किया जा रहा हो तो उन्हें तत्काल सहायता दी जाएगी। यानी इसके लिए कागजी कार्यवाही पूरी होने का इंतजार किए बगैर आयोग संबंधित जिला प्रशासन और पुलिस महकमे से खुद संपर्क करेगा। आयोग ने क्षेत्रवार सदस्य बनाने शुरू कर दिया है। सदस्यों को उत्पीड़न, शोषण व ऐसे अन्य मामले में की सूचना दी जाएगी ताकि जरूरत पड़ने पर वह स्वयं बच्चे तक पहुंच कर समस्या का समाधान कराएं।

बात पूरी न होने पर कॉल बैक करेगा आयोग

1517 शुरुआती चरण में एक साथ 15 लाइनें काम करेगी। इस नंबर पर बातचीत के दौरान अगर कॉल डिस्कनेक्ट होता है तो कॉल सेंटर की ओर से उस नंबर पर कॉल किया जाएगा। जिससे बच्चे की पूरी बात सुनी जा सके। आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह ने बताया कि जरूरत पड़ने पर लाइनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

बच्चे की काउंसलिंग की होगी व्यवस्था

सेवा शुरू होने के बाद पहले 15 दिनों तक यह पता लगाया जाएगा कि 1517 पर किस तरह की शिकायतें अधिक आ रही हैं। इसके आधार पर बच्चों की काउंसलिंग कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए कॉल सेंटर में बाल मनोचिकित्सक नियुक्त किए जाएंगे। अगर कोई बच्चा किसी तनाव से गुजर रहा है और अपनी समस्या किसी और से बताने में झिझक महसूस कर रहा है।

       खबर साभार : अमरउजाला

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