केन्द्र सरकार ने बेसिक शिक्षा के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को ही मंजूरी दी : केन्द्र सरकार से 1,35,842 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद का 12 महीने का वेतन मांगा-
१-केन्द्र ने लगभग 15,000 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को ही मंजूरी दी
२-ज्यादातर पैसा शिक्षकों के वेतन के मद में दिया गया
३-हालांकि किसी भी नए स्कूल, अतिरिक्त कक्ष को मंजूरी नहीं
राज्य मुख्यालय : यूपी में बुनियादी शिक्षा पर 2015-16 के शैक्षिक सत्र में 15,500 करोड़ रुपए खर्चे जाएंगे। केन्द्र सरकार ने यूपी के लगभग 20 हजार करोड़ के प्रस्ताव को काटते हुए 15,500 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को ही मंजूरी दी है। ये इस मायने में उल्लेखनीय है कि पिछली बार केन्द्र ने यूपी को एसएसए के तहत 8700 करोड़ रुपए का बजट ही स्वीकृत किया था। इसके अलावा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत यूपी में नए सत्र में 258 नए हाईस्कूल खोले जाएंगे।
नई दिल्ली में गुरुवार को हुई वार्षिक कार्ययोजना (पीएबी) की बैठक में हालांकि किसी भी नए स्कूल, अतिरिक्त कक्षा कक्ष या फिर अन्य प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी गई। 11 जिलों में आवासीय विद्यालयों के प्रस्तावों को भी अस्वीकृत कर दिया गया है।
ज्यादातर पैसा शिक्षकों के वेतन के मद में दिया गया है। राज्य ने केन्द्र सरकार से 1,35,842 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के पद का 12 महीने का वेतन मांगा था वहीं 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक, 29,334 जूनियर शिक्षक समेत 25 हजार सहायक अध्यापक के नए पदों के लिए भी वेतन का प्रस्ताव रखा था। इलाहाबाद व गोरखपुर में विकलांगों के लिए आवासीय विद्यालयों के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है |
खबर साभार : हिन्दुस्तान
सर्व शिक्षा अभियान की कई योजनाओं को नहीं दी मंजूरी : केंद्र ने यूपी के प्रस्तावों पर चलाई कैंची-
१-सर्व शिक्षा अभियान की कई योजनाओं को नहीं दी मंजूरी
२-20 हजार करोड़ के प्रस्ताव पर मिले 15 हजार करोड़
३-258 राजकीय हाईस्कूलों को मंजूरी
लखनऊ। केंद्र ने सर्व शिक्षा अभियान में उत्तर प्रदेश के प्रस्तावों पर कैंची चला दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में बृहस्पतिवार को हुई प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में राज्य सरकार के 20,000 करोड़ के प्रस्ताव में से 15,000 करोड़ को ही मंजूरी दी गई। इसके अलावा यूपी में 1748 नए परिषदीय स्कूल खोलने को मंजूरी भी नहीं दी गई, 11 जिलों में बेघर बच्चों के लिए खोले जाने वाले आवासीय विद्यालयों को भी हरी झंडी नहीं मिली। स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष और बाउंड्रीवाल के निर्माण पर भी कैंची चली है।
बेसिक शिक्षा की अधिकतर योजनाएं सर्व शिक्षा अभियान से संचालित होती हैं। राज्य सरकार इस अभियान में प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजती है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय में होने वाली पीएबी की बैठक में प्रस्तावों को विचार-विमर्श के बाद मंजूरी दी जाती है। राज्य सरकार ने इस बार 20,000 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव भेजा था। इसमें 1549 प्राथमिक व 199 उच्च प्राथमिक स्कूल, 5232 अतिरिक्त क्लास रूम और 32585 स्कूलों में चारदीवारी बनाने का प्रस्ताव था।
इसी तरह स्कूल न जाने वाले बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देने, इन्हें स्कूल तक आने-जाने के लिए मुफ्त यातायात सुविधा, आश्रयहीन बेघर बच्चों के लिए अलीगढ़, बागपत, बलिया, बलरामपुर, गाजियाबाद, कानपुर नगर, लखनऊ, मुजफ्फरनगर, वाराणसी व शामली में 11 आवासीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव था। पर, केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी। बैठक में शामिल अधिकारियों के मुताबिक केंद्र ने यूपी के अधिकारियों से कहा है कि निर्माण कार्य के लिए विगत वर्ष दिए गए पैसों का पहले इस्तेमाल करते हुए प्रमाण पत्र दें, तभी नए प्रस्तावों पर विचार होगा। हालांकि, शिक्षकों के वेतन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
258 राजकीय हाईस्कूलों को मंजूरी-
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में प्रदेश सरकार से भेजे गए प्रस्तावों पर भी कटौती की है, लेकिन इस साल यूपी में 258 राजकीय हाईस्कूल और इंटर की छात्राओं के लिए 50 छात्रावास खोलने को मंजूरी मिल गई है। बैठक में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में करीब 450 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है।
खबर साभार : अमरउजाला
0 Comments