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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

गुस्ताख अफसर~~~~~एक प्रशिक्षु आईएस को निलम्बन की सख्त सजा देकर प्रदेश सरकार ने मर्यादा......

       गुस्ताख अफसर की गुस्ताखी
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एक प्रशिक्षु आइएएस को निलंबन की सख्त सजा देकर प्रदेश सरकार ने मर्यादा की जो रेखा खींची है, उम्मीद करनी चाहिए कि वह समय के साथ धुंधली नहीं पड़ेगी। मथुरा जिले की तहसील महावन में तैनात एसडीएम अभिषेक सिंह को प्रदेश सरकार ने एक शिक्षक से बदसलूकी पर निलंबित कर दिया। आरोप है कि इस प्रशिक्षु आइएएस ने निर्वाचन कार्य में लगे एक शिक्षक को घर से बुलाया और कार्य पूरा न होने पर उसके बेटे के सामने ही उठक-बैठक लगाने की सजा दे दी। निसंदेह यदि शिक्षक की ड्यूटी निर्वाचन कार्य में लगी थी तो उसे समय पर काम पूरा करना चाहिए था, लेकिन इस लापरवाही की ऐसी अपमानजनक सजा किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराई जा सकती है।

जब इस तरह का अपमानजनक व्यवहार एक प्रशिक्षु आइएएस की ओर से किया जाए तो यह और भी गंभीर बात है। आखिर वह अफसर किस बात का प्रशिक्षण ले रहा है। यदि यही प्रशिक्षण है तो सोचना चाहिए कि कहीं प्रशिक्षण की प्रक्रिया में ही तो खामी नहीं है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी वरिष्ठ अफसर ने अपने मातहत के साथ अपमानजनक व्यवहार किया हो। पहले भी ऐसी घटनाएं प्रकाश में आ चुकी हैं। कुछ वर्ष पहले एक आइएएस ने अपने विभागीय क्लर्क को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया था। एक आइपीएस ने बंगले के बाहर लघुशंका करने पर सिपाही की लात-घूंसों से पिटाई की थी। ये वो घटनाएं हैं जो संबंधित कर्मचारी के आवेश और मीडिया की आंख से गुजरने के कारण चर्चा में आ गईं। इस प्रशिक्षु आइएएस के खिलाफ जिस तेजी के साथ कार्रवाई हुई, आम तौर पर यह तेजी दूसरे अफसरों के मामलों में नहीं दिखी। यही कारण है कि बदसलूकी का चलन बढ़ता जा रहा है।

वास्तविकता यह है कि इस तरह की घटनाएं आम हो चली हैं। अफसरों को समझना चाहिए कि वे लोकसेवक हैं और उन्हें उसी रूप में व्यवहार करना चाहिए। उनके पदनाम में अधिकारी इसलिए लिखा जाता है क्योंकि उसे जनता द्वारा अंगीकृत संविधान अधिकार देता है। जब कोई अधिकारी अपने अधीनस्थ के साथ ऐसा व्यवहार करता है तो समझा जा सकता है कि आम जनता के साथ उसका व्यवहार किस तरह का होगा। शासन ने इस मामले में जो रुख अख्तियार किया है, यदि इसे ही वह नीति के रूप में लागू कर दे तो शायद भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाएं सामने न आयें।
      (साभार : दैनिक जागरण सम्पादकीय)

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