एनसीईआरटी की किताब से मकड़ी का पैर गायब : तीसरी कक्षा की किताब 'मैथ मैजिक'से बच्चे कन्फ्यूजन में -
मेरठ : मकड़ी के आठ पैर होते हैं? या फिर सात? हो गए न कन्फ्यूज। दरअसल यह कन्फ्यूजन तीसरी कक्षा की एनसीईआरटी की किताब से बच्चों को हो रहा है। किताब में मकड़ी का एक पैर गायब है। एनसीईआरटी जैसी प्रामाणिक संस्था की किताबों में इस तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती है।
नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की किताबों को प्रामाणिक माना जाता है। यही कारण है विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में तैयारी करने वाले अभ्यर्थी भी किसी विषय का बेसिक कांसेप्ट क्लीयर करने के लिए एनसीईआरटी की किताबों पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। मान्यता है कि उसमें जरा भी चूक की गुंजाइश नहीं होती है। बावजूद इसके बाजार में बिकने वाली एनसीईआरटी की कुछ किताबों में गड़बड़ी देखने को मिल रही है। खासकर आकृति आधारित टॉपिक में कई तरह की मुद्रण त्रुटियां हैं।
आकृति से गड़बड़ाया सवाल
कक्षा तीसरी में 'मैथ मैजिक' बुक में 'हाऊ मेनी टाइम्स' टॉपिक में चित्र देकर बच्चों से सवाल किया गया है। गुणा आधारित इन सवालों में चित्रों में प्रिटिंग मिस्टेक है। जैसे तीन मकड़ी का चित्र देकर तीनों मकड़ियों के पैरों की संख्या पूछी गई है। इसमें दो मकड़ी के पैर तो आठ-आठ हैं, लेकिन एक मकड़ी के सात। ऐसे में अगर बच्चे चित्र देखकर सवाल हल करने की कोशिश करेंगे तो उनका उत्तर गलत होगा। कुछ अन्य सवालों में भी गलत चित्र बच्चों में भ्रम फैला रहे हैं।
कटेंट में उम्दा किताबें -
सीबीएसई के एक्स एग्जाम कंट्रोलर पवनेश कुमार कहते हैं कि एनसीईआरटी की किताबों में कुछ जगह प्रिटिंग में गड़बड़ी है, लेकिन जैसे-जैसे शिकायत मिलती है। एनसीईआरटी उन किताबों को वापस मंगाकर नया संस्करण निकालती है। यह केवल प्रिंटिंग मिस्टेक है। कटेंट में एनसीईआरटी से उम्दा कोई किताब नहीं है। सीबीएसई सर्कुलर जारी करके एनसीईआरटी की किताबों को लगाने के लिए कहती है। एनसीईआरटी की किताबें वैज्ञानिक आधार पर लिखी जाती हैं, जिसमें बच्चों को ज्यादा सीखने का अवसर मिलता है।
खबर साभार : दैनिक जागरण
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