सिर्फ नाम की रह गई सरकारी नौकरी : पेंशन के नाम पर कटौती पर भुगतान कर रहे आधा-अधूरा
• पुरानी पेंशन नीति बहाली के लिए अड़े कर्मचारी
इलाहाबाद। सरकारी नौकरी सिर्फ नाम की रह गई। पुरानी पेंशन नीति समाप्त हो जाने से सरकारी नौकरी में सुरक्षित भविष्य जैसी कोई चीज नहीं रह गई है। इसको लेकर कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया है और अब राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि नई अंशदायी पेंशन योजना लागू होने के बाद सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरी में कोई अंतर नहीं रह गया है बल्कि तमाम मामलों में निजी क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों से बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
सरकार ने निर्णय लिया है कि केंद्रीय विभागों में पहली जनवरी 2004 या उसके बाद और राजकीय विभागों में पहली अप्रैल 2005 या उसके बाद तैनात कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नीति का लाभ नहीं दिया जाएगा बल्कि नई अंशदायी पेंशन योजना के तहत उनके वेतन से कटौती की जाएगी। नई पेंशन योजना लागू हो जाने से सरकारी दफ्तरों में इस योजना के तहत आने वाले कर्मचारियों को अब भविष्य निधि का फायदा भी नहीं मिल रहा है। नई पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों के वेतन एवं डीए की दस फीसदी धनराशि की कटौती की जा रही है और इतनी ही रकम सरकार की तरफ से अंशदान के रूप में कर्मचारी के पेंशन फंड में जमा की जा रही है। सेवानिवृत्ति के वक्त कर्मचारियों को इसमें से 60 फीसदी रकम ही वापस की जाएगी और बाकी की 40 फीसदी धनराशि पर मिलने वाले ब्याज पेंशन के रूप में दिया जाएगा। ऐसे में कर्मचारियों को उनकी 40 फीसदी रकम कभी वापस नहीं मिलेगी। सिविल एकाउंट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी का कहना है कि इससे बेहतर स्थिति निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की हो गई, जिन्हें रिटायरमेंट के बाद या बीच में ईपीएफ में जमा पूरी रकम ब्याज सहित वापस हो जाती है।
जीपीएफ का भी हुआ नुकसान
नई पेंशन योजना के तहत सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते में कटौती बंद हो जाने से भी नुकसान हुआ है। पुरानी पेंशन नीति के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को जीपीएफ में अपने मूल वेतन की न्यूनतम छह फीसदी और राज्य कर्मियों को छह फीसदी रकम जमा करनी पड़ती है। कर्मचारी चाहें तो अधिकतम पूरा मूल वेतन भी जमा कर सकते हैं लेकिन नई पेंशन योजना में यह सहूलियत नहीं है। कर्मचारी सिर्फ पे और डीए की दस फीसदी रकम ही वेतन से कटवा सकते हैं और इतनी ही रकम सरकार अंशदान के रूप में अपनी तरह से जमा करेगी। ऐसे में जीपीएफ सुरक्षित निवेश का सबसे बेहतर तरीका है लेकिन नई पेंशन योजना में यह व्यवस्था खत्म हो जाने से कर्मचारियों को काफी नुकसान हुआ। कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक हनुमान प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि सरकारी नौकरी सिर्फ नाम की रह गई है। नई पेंशन नीति के तहत कर्मचारियों को अब न तो जीपीएफ मिलेगा और न ही ग्रेच्युटी का लाभ।
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