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प्रशिक्षु शिक्षक बनाने की मैराथन प्रक्रिया : टीईटी 'महायज्ञय' में धन की 'आहूति' -

शिक्षक बनाने की मैराथन प्रक्रिया : टीईटी 'महायज्ञ' में 'धन' की आहूति -

Sun, 13 Jul 2014 08:35 PM (IST)

जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : प्रदेश भर में टीईटी पास अभ्यर्थियों को शिक्षक बनाने की मैराथन प्रक्रिया चल रही है। भर्ती के लिए तीन साल से मानों 'महायज्ञ' चल रहा है इसमें समय-समय पर धन की 'आहुतियां' भी डाली जा रही हैं। कोर्ट के आदेश पर सरकार धन वापस तो कर नहीं पाई, लेकिन बेरोजगारों की जेब पर दनादन कैंची चलाती जा रही है।
प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए 2011 में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) करवाई थी। सरकार ने 72825 शिक्षकों की भर्ती के लिए 30 नवंबर 2011 को सामान्य अभ्यर्थियों के लिए 500 एवं आरक्षित वर्ग के लिए 200 रुपये का शुल्क रखा था। सभी को पांच जनपदों में आवेदन करने की छूट थी। आवेदकों के विरोध और कोर्ट के आदेश पर मायावती सरकार ने अभ्यर्थियों को सभी जिलों में आवेदन की छूट दे दी। सरकार ने यह शर्त रखी कि किसी एक जनपद के को मूल मानकर उसके बैंक ड्राफ्ट की फोटो कापी के साथ अन्य जनपदों में आवेदन किया जाए।
सूबे में सरकार बदली तो कोर्ट के आदेश पर दिसंबर 2012 में दोबारा बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर से विज्ञापन जारी हुआ। इसमें अभ्यर्थियों को मनचाहे जिले में आवेदन की छूट मिली। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने कई जनपदों में आवेदन किया। तब सरकार ने पहले जमा हुए शुल्क वापसी के लिए आवेदन मंगाया। इसमें भी सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई। करीब 68 लाख आवेदनों में से महज 73 हजार आवेदकों को ही धन वापस मिल सका। पुराना धन देने के बजाय सरकार ने जुलाई 2014 में फिर आवेदन मांगा कि जिसने अपना धन वापस ले लिया है वे नए सिरे से ड्राफ्ट जमा करें।

ताज्जुब है कि सरकार निरंतर धन मांग रही है, लेकिन बेरोजगारों की जेब पर कतई तरस नहीं खा रही है। अभ्यर्थियों ने सरकार की यह मुराद भी जैसे-तैसे पूरी की है। साथ ही डाटा फीडिंग के दौरान आवेदन में हुई त्रुटियों को ठीक कराने के लिए फिर सभी जिलों में आवेदन भेजा जा रहा है। इसमें लगभग सभी अभ्यर्थी जद में आ रहे हैं। धन, समय दोनों खर्च हो रहा है। हजारों अभ्यर्थी व अभिभावक परेशान हैं। डाकघर और डायट में चक्कर काट रहे हैं। तमाम जिलों में आवेदन भेजने के लिए भोर से ही लाइन लगा रहे हैं। यह तो भर्ती का शुरुआती चरण है अभी और कितनी जगह लाइन लगानी होगी और कितना धन लुटाना होगा तय नहीं है।
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कब-कब चली जेब पर कैंची

2011 : पांच ऐच्छिक जनपदों में आवेदन करने का फरमान हुआ। उस समय तक अभ्यर्थी दस से पंद्रह जिलों में आवेदन भेज चुके थे और एक जिले में आवेदन भेजने में करीब 650 रुपये खर्च हुए। ऐसे में प्रति अभ्यर्थी लगभग 20 हजार रुपये खर्च करना पड़ा।

2012 : सूबे की सरकार ने मनचाहे जिलों में फार्म भरने की छूट दे दी, तब सामान्य अभ्यर्थियों ने 40 से 75 जिलों तक आवेदन किया। तब भी एक जिले में आवेदन भेजने में 650 रुपये खर्च हुए, ऐसे में अभ्यर्थी को 50 हजार तक खर्च करना पड़ा।

2014 : इस समय हर अभ्यर्थी को आवेदन पत्र में गड़बड़ियां ठीक कराने के लिए प्रत्यावेदन भेजना पड़ रहा है। जितने जिलों में आवेदन किया है उन सभी में उसे भेजना है जिसमें हर अभ्यर्थी को करीब 10 हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है।

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