स्वहस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को बढ़ावा देना चाहता है केंद्र : नोटरी देने में 100 से लेकर 500 रूपये तक का है खर्च -
नई दिल्ली : केंद्र सरकार चाहती है कि सरकारी कामों के लिए स्वहस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को मान्यता दी जाए। प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, राजपत्रित अधिकारियों से हस्ताक्षर कराने या फिर नोटरी से प्रमाणपत्र बनवाने में होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए इस योजना पर विचार किया जा रहा है।
केंद्र ने इस बारे में राज्य सरकारों से भी विचार करने के लिए कहा है। अधिकारी के मुताबिक, प्रमाणपत्र तैयार कराना काफी बोङिाल काम है। इसमें नोटरी को देने में 100 से लेकर 500 रुपए तक खर्च हो जाते हैं। ज्यादातर राजपत्रित अधिकारी मूल दस्तावेज न होने पर प्रमाणपत्रों की फोटोकॉपी पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं। उनके मुताबिक, गांवों और दूरदराज के इलाकों में तो हालत और भी खराब है। अगर राज्य सरकारें स्व हस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को मान्यता देती हैं तो यह लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्व हस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को मान्यता देने की वकालत की है। अधिकारी ने बताया कि इसी के तहत कुछ मंत्रियों और राज्य सरकारों ने कई प्रकार के प्रमाणपत्रों (जैसे अंक पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, आदि) में स्वहस्ताक्षर को मान्यता देना शुरू किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में अंतिम स्थिति में मूल दस्तावेज पेश करने जरूरी होते हैं।
सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए एक ज्ञापन पत्र में कहा गया है कि यह व्यवस्था नागरिकों के हित में है। इसे अपनाने से न केवल लोगों का पैसा और समय बचेगा बल्कि सरकार को भी सहूलियत होगी।
नई दिल्ली : केंद्र सरकार चाहती है कि सरकारी कामों के लिए स्वहस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को मान्यता दी जाए। प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, राजपत्रित अधिकारियों से हस्ताक्षर कराने या फिर नोटरी से प्रमाणपत्र बनवाने में होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए इस योजना पर विचार किया जा रहा है।
केंद्र ने इस बारे में राज्य सरकारों से भी विचार करने के लिए कहा है। अधिकारी के मुताबिक, प्रमाणपत्र तैयार कराना काफी बोङिाल काम है। इसमें नोटरी को देने में 100 से लेकर 500 रुपए तक खर्च हो जाते हैं। ज्यादातर राजपत्रित अधिकारी मूल दस्तावेज न होने पर प्रमाणपत्रों की फोटोकॉपी पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं। उनके मुताबिक, गांवों और दूरदराज के इलाकों में तो हालत और भी खराब है। अगर राज्य सरकारें स्व हस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को मान्यता देती हैं तो यह लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्व हस्ताक्षरित प्रमाणपत्रों को मान्यता देने की वकालत की है। अधिकारी ने बताया कि इसी के तहत कुछ मंत्रियों और राज्य सरकारों ने कई प्रकार के प्रमाणपत्रों (जैसे अंक पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, आदि) में स्वहस्ताक्षर को मान्यता देना शुरू किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में अंतिम स्थिति में मूल दस्तावेज पेश करने जरूरी होते हैं।
सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए एक ज्ञापन पत्र में कहा गया है कि यह व्यवस्था नागरिकों के हित में है। इसे अपनाने से न केवल लोगों का पैसा और समय बचेगा बल्कि सरकार को भी सहूलियत होगी।

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