ALLAHABAD HIGHCOURT : सेवानिवृत्ति के दिन से ही परिलाभ पाने का नियम - हाईकोर्ट

ALLAHABAD HIGHCOURT : सेवानिवृत्ति के दिन से ही परिलाभ पाने का नियम : हाईकोर्ट


विधि संवाददाता, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी को कोई वैधानिक अड़चन न हो तो सेवानिवृत्ति के दिन से ही सेवानिवृत्ति परिलाभों का भुगतान करने का नियम है। यदि भुगतान में देरी होती है तो कर्मचारी को ब्याज पाने का अधिकार है। इसी के साथ कोर्ट ने एसएसपी एटा को निर्देश दिया है कि याची को पांच मई 2009 से 15 मई 2018 तक की अवधि के बकाये पर नौ फीसदी ब्याज का भुगतान किया जाए।

यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने संजय उपाध्याय व पांच अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता बी एन सिंह राठौर ने बहस की। याची 31 जनवरी 2007 को पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल पद से सेवानिवृत्त हुआ। उसे परिलाभों का भुगतान नहीं किया गया। कोर्ट ने निर्णय लेने का आदेश दिया। अवमानना कार्यवाही केबाद 15 मई 2018 को परिलाभों का भुगतान किया गया। इसके बाद याची ने भुगतान में देरी के कारण 18 फीसद ब्याज की मांग की थी।

विसं, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन भरने में नाकाम रहे विष्णु स्वरूप के मामले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस के गुप्त तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दिया है।

वैट वसूली के मामले में सुनवाई 14 को : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स कंप्यूटर साइंस कापरेरेशन गौतमबुद्धनगर की याचिका को सुनवाई के लिए 14 मई को पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका में केंद्र सरकार की ओर से इंटर स्टेट ट्रांजेक्शन पर सेल टैक्स वसूली के बाद राज्य सरकार की वैट वसूली की अधिकारिता को चुनौती दी गई है। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति भारती सप्रू तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ कर रही है।

विसं, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र राज्य चीनी निगम लिमिटेड की सात चीनी मिलों को बेचने में करोड़ों की धोखाधड़ी व घोटाले के आरोपितों की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि वे लखनऊ पीठ में याचिका दाखिल कर सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा तथा न्यायमूर्ति आइए खान की खंडपीठ ने दिया है।

किन परिस्थितियों में हुई सफाई कर्मियों की मौत : वाराणसी में सीवर में सफाई करते समय जहरीली गैस से दो कर्मियों की मौत पर मानवाधिकार जन निगरानी समिति (पीवीसीएचआर) की जनहित याचिका पर दो माह बाद भी प्रति शपथ पत्र दाखिल नहीं हो सका।

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